ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसा: मां बोली- बेटा जिंदा था, पोस्टमॉर्टम कराओ कहती रही पुलिस, गूगल मैप ने कैसे ली 15 जिंदगियां?
नो-एंट्री, पुलिस चेकिंग पॉइंट और ग्रामीणों की चेतावनी के बावजूद ट्रक मंदिर तक कैसे पहुंचे? ग्वालियर हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
Key Takeaways
- •ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद उठे सवाल


Gwalior Sheetla Mata Temple Accident: मंदिर में दर्शन करने निकले परिवारों को क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक दिन बन जाएगा। ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण ट्रक हादसे ने कई परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दिया है। हादसे में 15 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर है। अस्पताल से लेकर मॉर्चुरी तक परिजन अपनों को तलाशते रहे। इस मातम के बीच अब दो बड़े सवाल उठ रहे हैं—प्रतिबंधित रास्ते पर भारी ट्रक पहुंचा कैसे और हादसे के बाद घायलों को समय पर इलाज मिला या नहीं?
‘बेटा जिंदा था, मैं इलाज के लिए ले जाना चाहती थी’
इस हादसे में अपने 18 वर्षीय बेटे गौरव को खोने वाली मां किरण ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वह बेटे को इलाज के लिए ले जाना चाहती थीं, तब उन्हें रोककर रखा गया। किरण का आरोप है कि बेटे की सांसें चल रही थीं और वह उसे अस्पताल ले जाने की गुहार लगाती रहीं।
मां की इस आपबीती ने हादसे के बाद राहत और उपचार की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इलाज में देरी हुई या नहीं और उस दौरान क्या परिस्थितियां थीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। परिजनों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, ताकि घटना से जुड़े हर सवाल का जवाब सामने आ सके।
12 साल तक मन्नतें मांगीं, हादसे में दोनों बेटे खो दिए
इस हादसे में एक परिवार का दर्द और भी गहरा है। मुरैना के जौरा स्थित हार गांगोली गांव के विद्याराम त्यागी का परिवार कुछ समय से ग्वालियर के गदाईपुरा में रह रहा है। रिश्तेदार राकेश त्यागी के मुताबिक, विद्याराम ने संतान के लिए 12 साल तक मंदिरों की परिक्रमा की थी। बाद में उनके घर अमन और लव सहित तीन बच्चों का जन्म हुआ।
शनिवार रात परिवार के सदस्य अशोक त्यागी अपने बेटों अमन (15) और लव (13) के साथ मंदिर गए थे। हादसे में तीनों की मौत हो गई। जिस परिवार ने बच्चों के लिए सालों तक मन्नतें मांगी थीं, उसी परिवार को एक ही हादसे में दोनों बेटों को खोने का दुख झेलना पड़ा।
यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उन तमाम घरों का दर्द है जहां त्योहार और दर्शन की उम्मीद के साथ निकले लोग वापस नहीं लौट सके।
हादसे के बाद अपनों की तलाश, कोई वेंटिलेटर पर
हादसे में जान गंवाने वाले 23 वर्षीय पवन राठौर के शव को परिजन रोते-बिलखते अस्पताल से लेकर गए। वहीं, घायल निकेश के परिजन संदीप ने बताया कि उन्हें सुबह करीब 5 बजे हादसे की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने पर निकेश गंभीर हालत में मिला। उसके दोनों पैर टूट गए हैं और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है।
दिव्यांश कुशवाह के परिजन सावित्री ने बताया कि दर्शन के बाद सभी बाहर निकल आए थे, लेकिन दिव्यांश नहीं मिला। काफी तलाश करने के बाद जब वे अंदर गए, तो उसकी पहचान हो सकी।
अस्पतालों और मॉर्चुरी के बाहर परिजनों की बेचैनी इस हादसे की भयावहता बयां कर रही थी। हर किसी को अपने किसी करीबी की खबर चाहिए थी—किसी को इलाज की, किसी को सलामती की और किसी को आखिरी बार अपने परिजन को देखने की।
परिजनों और स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा
हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा प्रशासनिक व्यवस्था पर भी फूटा। उनका सवाल है कि जब मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित थी, तो धान से भरा ट्रक वहां तक पहुंचा कैसे? रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रक पुलिस बैरिकेडिंग पार कर ढलान वाले रास्ते पर आगे बढ़ा और श्रद्धालुओं को टक्कर मारते हुए मंदिर के प्रवेश द्वार से जा टकराया।
परिजनों ने मुआवजे और कार्रवाई की मांग की
मॉर्चुरी के बाहर परिजनों ने नाराजगी जताते हुए पुलिस और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई करने, मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये और घायलों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की।
कुछ परिजनों ने ट्रक चालक के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग भी उठाई। हालांकि, किसी घटना में आपराधिक जिम्मेदारी और लागू होने वाली धाराएं जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होती हैं। पुलिस ने ट्रक मालिक और चालक को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि ट्रक प्रतिबंधित मार्ग पर किन परिस्थितियों में पहुंचा और हादसे के पीछे कौन-कौन सी लापरवाहियां जिम्मेदार थीं।
गूगल मैप के भरोसे हाईवे छोड़कर अंदर घुसे ड्राइवर
जानकारी के मुताबिक ट्रक ड्राइवरों को स्थानीय रास्तों और नो एंट्री की जानकारी नहीं थी। उन्हें भितरवार से पंजाब जाना था। उन्होंने गूगल मैप पर सर्च किया और हाईवे के बजाय चीनौर-अमरोल होते हुए शीतला माता मंदिर के पीछे से निकलने वाला रास्ता पकड़ लिया।
अमरोल गांव के बाहर रावत परिवार के कुएं पर ट्रक ड्राइवरों ने पानी पीया। यहां ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि आगे रास्ता बंद है। ट्रक नहीं निकल पाएंगे। इस पर ड्राइवरों ने कहा- गूगल मैप पर रास्ता दिखा रहा है। हम यहीं से जाएंगे। ग्रामीणों का दावा है कि चालकों के मुंह से शराब की बदबू आ रही थी।
पुलिस चेकिंग पॉइंट से कैसे निकल गए भारी वाहन?
शीतला माता मंदिर से पहले चीनौर थाना पुलिस का चेकिंग पॉइंट बनाया गया था। यहां पुलिसकर्मियों की ड्यूटी होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद दोनों ट्रक इस पॉइंट से गुजरकर मंदिर की ओर बढ़ गए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां कार और बाइक तक को आगे जाने से रोका जा रहा था। ऐसे में धान से भरे दो ओवरलोड ट्रक चेकिंग पॉइंट से कैसे निकल गए? क्या उनकी जांच की गई थी? अगर नहीं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी?
ये सवाल इसलिए भी अहम हैं, क्योंकि नवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की जानकारी पहले से थी। ऐसे समय में भारी वाहनों की आवाजाही रोकने और रास्ते पर निगरानी रखने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी, इसकी जांच जरूरी है।
अब सबसे जरूरी है जवाबदेही
ग्वालियर का यह हादसा कई परिवारों को गहरे शोक में छोड़ गया है। लेकिन दुख के बीच उन सवालों के जवाब भी जरूरी हैं, जो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने से जुड़े हैं।
प्रतिबंधित रास्ते पर ट्रक कैसे पहुंचा? बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई? हादसे के बाद घायलों को उपचार उपलब्ध कराने में कोई देरी हुई या नहीं? और जिन लोगों की जिम्मेदारी थी, उनकी भूमिका क्या रही? इन सवालों का जवाब तथ्यों और निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है।

