ग्वालियर में 108 करोड़ से बनेंगी 28 सड़कें, फिर भी गुणवत्ता पर सवाल क्यों?
ग्वालियर में 108 करोड़ रुपये की लागत से 28 प्रमुख सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण की योजना तैयार की गई है। लेकिन शहर की मौजूदा सड़कों पर गड्ढे, धूल और निर्माण के बाद सड़कें धंसने की शिकायतें गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
Gwalior News: ग्वालियर में बदहाल सड़कों से लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। कई इलाकों में सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, तो कहीं धूल के कारण राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच नगर निगम ने 108 करोड़ रुपये की लागत से शहर के 28 प्रमुख मार्गों के निर्माण और चौड़ीकरण की कार्ययोजना तैयार की है। हालांकि, पहले घोषित डस्ट फ्री रोड योजना के परिणामों और सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सड़क सुधार से जुड़ा मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है।
108 करोड़ रुपये से 28 मार्गों का होगा विकास
नगर निगम की कार्ययोजना में शहर के 28 प्रमुख मार्गों को शामिल किया गया है। इनमें एजी ऑफिस से सिल्वर एस्टेट, होटल सनबीम से मानसिंह चौराहा, टाइगर चौक से दाने बाबा चौराहा, भिंड रोड से सेंट्रल एकेडमी, हजीरा चौराहे से बिरला नगर पुल और चार शहर का नाका जैसे मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा लधेड़ी से जलालपुर, कम्पू थाना से गुड़ी-गुड़ी का नाका, माधोगंज थाना से हेमसिंह की परेड और महाराज बाड़ा से गश्त का ताजिया तक के मार्ग भी योजना का हिस्सा हैं।
सहायक नगर निवेशक अमित गुप्ता के अनुसार, नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी के प्रयासों से प्रदेश सरकार की द्वारका योजना के तहत इन मार्गों के विकास की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित कार्यों में सड़कों का निर्माण और चौड़ीकरण शामिल है।
गड्ढों से परेशान लोग, निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
ग्वालियर के गोले का मंदिर, चेतकपुरी, शताब्दीपुरम और दीनदयाल नगर सहित कई क्षेत्रों में सड़कों की हालत खराब बताई जा रही है। सिटी सेंटर की सड़कें भी बदहाली से अछूती नहीं हैं।
सड़क निर्माण के बाद दोबारा धंसने की घटनाओं ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। सड़क सुधार का मुद्दा हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। वहीं, कुछ मार्गों की जिम्मेदारी को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) और नगर निगम के बीच समन्वय का सवाल भी बना हुआ है।
ऐसे में नई सड़कों के निर्माण के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि काम तय मानकों के अनुरूप हो और सड़कें लंबे समय तक टिकाऊ रहें।
डस्ट फ्री रोड योजना के नतीजों पर भी सवाल
शहर में इससे पहले 40 किलोमीटर लंबाई की 18 सड़कों को डस्ट फ्री बनाने की योजना घोषित की गई थी। इसके तहत सड़कों पर पानी का छिड़काव करने और एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था।
हालांकि, इस योजना के नतीजों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में नई सड़क निर्माण योजना से धूल की समस्या कितनी कम होगी, यह उसके क्रियान्वयन और रखरखाव पर निर्भर करेगा।
एलिवेटेड रोड निर्माण से धूल की परेशानी
ग्वालियर में फूलबाग से गिरवाई तक 926 करोड़ रुपये की लागत वाला एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट भी प्रस्तावित है। इसके निर्माण से जुड़ी गतिविधियों के दौरान शहर में धूल बढ़ने की शिकायतें सामने आने की बात कही गई है।
शहर में सड़क निर्माण और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के बीच यातायात प्रबंधन तथा धूल नियंत्रण भी महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
नई सड़कों के साथ पुरानी सड़कों की मरम्मत भी जरूरी
नगर निगम की 108 करोड़ रुपये की कार्ययोजना से शहर के प्रमुख मार्गों के विकास की उम्मीद है, लेकिन नागरिकों के सामने तत्काल सवाल मौजूदा सड़कों की स्थिति का है। गड्ढों से राहत, निर्माण की गुणवत्ता और धूल पर नियंत्रण जैसे मुद्दों का समाधान भी जरूरी है।
नगर निगम के सामने चुनौती सिर्फ नई सड़कें बनाना नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, पुरानी सड़कों की मरम्मत कराना और संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी तय करना भी है। योजना का वास्तविक असर उसके समयबद्ध क्रियान्वयन और सड़कें तैयार होने के बाद उनके रखरखाव से स्पष्ट होगा।



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