सोया सेक्टर के जरिए बढ़ेगी किसानों की आय और युवाओं को मिलेंगे नए अवसर, अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुख्यमंत्री ने कंपनियों को सराहा
किसानों को बेहतर मूल्य, भंडारण और मूल्य संवर्धन: प्रोसेसिंग बढ़ने के फायदे मुख्यमंत्री ने गिनाए।

सोयाबीन सिर्फ खेती की उपज नहीं, बल्कि किसानों की आमदनी, खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन आधारित पोषण व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है, यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में कही। वे शुक्रवार (16 अक्टूबर) को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के दो दिवसीय 9वें अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में शामिल हुए थे।
किसानों को बेहतर कीमत, भंडारण और मूल्य संवर्धन
मुख्यमंत्री के मुताबिक खेती की उपज की प्रोसेसिंग बढ़ने से किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी, और भंडारण, विपणन व मूल्य संवर्धन की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि सोयाबीन की प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल की मार्केटिंग में विकास की संभावनाएं हैं, और आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण, गुणवत्ता और उत्पादों में विविधता से यह क्षेत्र मजबूत हो सकता है। खाद्य तेल उद्योग का विस्तार भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मददगार हो सकता है।
प्रदेश की पहचान और किसानों का योगदान
उन्होंने कहा कि देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का करीब 45 प्रतिशत मध्य प्रदेश में होता है। मालवा को उन्होंने सोयाबीन की राजधानी बताया। मध्यप्रदेश को देश की फूड बास्केट के रूप में पहचान मिली है, और खेती व सोयाबीन उत्पादन प्रदेश की अर्थव्यवस्था के अहम आधार हैं। खराब मौसम और अल नीनो जैसी चुनौतियों के बावजूद प्रदेश के किसानों ने सोयाबीन उत्पादन में बड़ा योगदान दिया।
सरकार किसानों की आय के लिए जुटी
राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, खेती की उत्पादकता सुधारने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए जुटी है। मुख्यमंत्री ने कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विकास की रफ्तार बढ़ाने की बात कही। निवेशकों से लगातार संवाद हो रहा है और उद्योगों के विस्तार के लिए अलग-अलग कार्यक्रम किए जा रहे हैं।
भावांतर योजना की चर्चा
सोपा के चेयरमैन नरेश गोयनका ने स्वागत भाषण में मध्यप्रदेश को सोयाबीन उत्पादन का मुख्य केंद्र बताया और कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में फैसले ले रही है। उन्होंने भावांतर योजना का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों को उपज की कीमत में अंतर की राशि देने की यह पहल अहम है। सोया उद्योग के विकास के लिए उन्होंने सरकार के सहयोग और मार्गदर्शन की जरूरत पर भी जोर दिया।
निवेश प्रस्ताव और रोजगार
मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में प्रदेश को करीब 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे, और उनके अनुसार इनमें से 30 प्रतिशत से अधिक प्रस्ताव धरातल पर उतारे जा चुके हैं। सरकार चाहती है कि ये प्रस्ताव असली परियोजनाओं में बदलें और रोजगार के नए अवसर बनें। जबलपुर, भोपाल और इंदौर को जोड़कर नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है, जिसके लिए गुरुवार (15 अक्टूबर) को कैबिनेट विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) को मंजूरी दे चुकी है। उन्होंने कहा कि सस्ती बिजली, जमीन और पानी निवेशकों को आकर्षित करते हैं। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से अलग-अलग क्षेत्रों के संसाधन और औद्योगिक संभावनाएं सामने आई हैं, और सरकार स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग व क्षेत्रीय रोजगार को बढ़ाना चाहती है। युवाओं के रोजगार, औद्योगिक निवेश और किसानों की आय सुधारने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में मिलकर प्रयास हो रहे हैं, जिनमें सोयाबीन और खाद्य तेल उद्योग अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सम्मान और मौजूद लोग
मुख्यमंत्री ने सोयाबीन की मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, प्रोसेसिंग, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल की मार्केटिंग में उल्लेखनीय काम करने वाली कंपनियों के करीब 15 उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। सोपा चेयरमैन नरेश गोयनका ने उन्हें शॉल और श्रीफल भेंट किया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, सुमित मिश्रा, सोपा के डिप्टी चेयरमैन गिरीश मतलानी, डेविश जैन, कृष्णवीर और विजय पाल समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आयोजन की थीम और मकसद
कॉन्क्लेव की थीम 'आत्मनिर्भर भारत – पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन' है और यह 16-17 अक्टूबर को चल रहा है। इसमें देश-विदेश के 500 से अधिक प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, उद्योगपति, नीति निर्माता और किसान शामिल हुए। मकसद है भारतीय खाद्य तेल और सोयाबीन क्षेत्र की दिशा तय करना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करना।

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