JPSC Protest Update: कैसे शुरू हुआ भर्ती विवाद और क्यों जारी है छात्रों का आंदोलन? जानिए पूरी टाइमलाइन
JPSC भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी CBI और ED से जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट, नई परीक्षा एजेंसी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग पर अड़े हैं। सरकार से बातचीत की तैयारी के बीच आंदोलन अभी भी जारी है।
रांची। झारखंड में JPSC भर्ती परीक्षा वाले विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन बस यू ही हर दिन, लगातार तेज होता जा रहा है, कुछ लोग कह रहे हैं कि अब ये रांची में भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार से बात करने की “हां” कह दी है, लेकिन हाँ, दो अहम शर्तें भी जोड़ी हैं, जिनके बिना वे आगे कुछ नहीं चाहते। उनका साफ कहना है कि वार्ता सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हो , और ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता रहे बैठक में मीडिया प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी जरूरी है।
JPSC भर्ती विवाद आखिर शुरू कैसे हुआ?
इस विवाद की शुरुआत 2 जुलाई 2026 को हुई मानी जा रही है, जब झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया। 103 पदों के लिए 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। इसके बाद कई उम्मीदवारों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। आरोप ये भी लगे कि कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए, और कथित OMR शीट तक वायरल हो गई। जब मामला ज्यादा उछला तो आयोग ने प्रस्तावित मुख्य परीक्षा रद्द कर दी, बस उसके बाद छात्रों का आंदोलन भी शुरू हो गया।
धरना जारी, आमरण अनशन तक बात पहुंच गई
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना 13वें दिन भी रुका नहीं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत छह छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग ये है कि इस पूरे मामले की जांच CBI और ED से कराई जाए। उनका तर्क है कि सिर्फ CID जांच कर देना, ये पर्याप्त नहीं है। इसी बीच CID ने पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है , जिससे अब तक गिरफ्तार लोगों की गिनती 19 तक पहुंच गई है।
सरकार से वार्ता… और छात्रों की दो शर्तें
जब सरकार की तरफ से संवाद का प्रस्ताव आया तो छात्रों ने कहा कि उन्हें बातचीत से परहेज नहीं है। लेकिन शर्तों के साथ ही प्रक्रिया चलनी चाहिए। पहली शर्त ये कि बातचीत सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हो, और दूसरी शर्त के तौर पर बैठक में कम से कम दो मीडिया प्रतिनिधियों की मौजूदगी अनिवार्य की जाए। छात्रों का मानना है कि ऐसा होने पर बातचीत पारदर्शी रहेगी और सभी पक्षों का भरोसा भी बना रहेगा।
CBI-ED जांच सहित कई मांगों पर अभ्यर्थी डटे
छात्रों का दबाव ये भी है कि 14वीं JPSC परीक्षा की जांच CBI और ED से हो। साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही जा रही है। TDPL के जरिए कराई गई परीक्षाओं को भी रद्द करने और कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग उठाई गई है। इतना ही नहीं, आगे की परीक्षाएं किसी विश्वसनीय एजेंसी जैसे TCS के जरिए कराने की मांग है, और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों पर कार्रवाई की भी बात की जा रही है। फिलहाल सरकार और छात्रों के बीच बातचीत कराने के प्रयास जारी हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने ये भी संकेत दिया है कि आंदोलन तब तक चलता रहेगा , जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं आ जाता।

