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होमदेशSupreme Court: बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते है बुजुर्ग माता-पिता, आखिर क्यों लिया गया यह फैसला ?

Supreme Court: बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते है बुजुर्ग माता-पिता, आखिर क्यों लिया गया यह फैसला ?

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और भरण-पोषण के लिए जरूरी होने पर ट्रिब्यूनल बच्चों को माता-पिता की संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दे सकता है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया।

By Admin
19 Aug 2026
Supreme Court: बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते है बुजुर्ग माता-पिता, आखिर क्यों लिया गया यह फैसला ?
बुजुर्गों की संपत्ति पर SC का बड़ा फैसला

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सम्मान से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा निर्णय सुनाया है। SC ने स्पष्ट करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर माता-पिता की सुरक्षा और भरण-पोषण सुनिश्चित करने के लिए बच्चों को उनकी संपत्ति से बाहर करने का आदेश दिया जा सकता है। कोर्ट ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी पलट दिया।

सबसे अहम बुजुर्गों की गरिमा

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ किसी व्यक्ति के सम्मान और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने को कानून का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताया। कोर्ट के मुताबिक, यदि किसी बुजुर्ग को अपने ही घर में परेशानी, उपेक्षा या असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है, तो वरिष्ठ नागरिक कानून के तहत गठित ट्रिब्यूनल जरूरी कदम उठा सकता है।

लखनऊ की संपत्ति से जुड़ा था मामला

जानकारी के मुताबिक, यह मामला लखनऊ के विकास नगर का है। जहां रवि कांत गुप्ता ने अपनी खरीदी हुई संपत्ति से बेटे को बाहर करने के लिए प्रशासन के सामने आवेदन दिया था। उनके मुताबिक, परिवार में विवाद के बीच उनकी 81 वर्षीय मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहना पड़ा। SDM ने नवंबर 2022 में बेटे की बेदखली का आदेश दिया था। बाद में जिला मजिस्ट्रेट ने भी इस फैसले को बरकरार रखते हुए बेटे और बहू को मकान खाली करने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने आदेश पर लगाई थी रोक

बता दें बेटे और बहू ने प्रशासनिक आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने माना था कि वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े 2007 के कानून में बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का स्पष्ट अधिकार नहीं दिया गया है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली प्राधिकरणों के आदेश रद्द कर दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने बदला फैसला

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को गलत माना। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और सुरक्षा के उद्देश्य से ट्रिब्यूनल को आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार है। पीठ ने कानून की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल को केवल भरण-पोषण तय करने तक सीमित नहीं माना जा सकता। यदि किसी बुजुर्ग की सुरक्षा और सम्मान के लिए संपत्ति से बेटे या बहू को हटाना जरूरी हो, तो ऐसा आदेश भी दिया जा सकता है।

पुराने फैसलों का भी दिया हवाला

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एस. वनिता बनाम डिप्टी कमिश्नर (2021) के फैसले का उल्लेख किया। अदालत ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर बेदखली का आदेश दिया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बाद के मामलों में समटोला देवी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2025) और कमलकांत मिश्रा बनाम एडिशनल कलेक्टर (2025) में भी इसी कानूनी स्थिति को दोहराया गया है।

फैसले का क्या मतलब है?

इस फैसले का मुख्य संदेश यह है कि वरिष्ठ नागरिक कानून का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन सुनिश्चित करना भी है। हालांकि, किसी मामले में बेदखली का आदेश परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संबंधित ट्रिब्यूनल द्वारा तय किया जाएगा।

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