World Lung Cancer Day: सिगरेट न पीने वालों को भी हो रहा लंग कैंसर, पैसिव स्मोकिंग और प्रदूषण से भी हो सकता है खतरा?
World Lung Cancer Day: जबलपुर की स्टडी में खुलासा, नॉन-स्मोकर्स भी लंग कैंसर की चपेट में। पैसिव स्मोकिंग, प्रदूषण और देर से जांच बने बड़े कारण, 57% मरीजों में आखिरी स्टेज पर पता चला कैंसर।
World Lung Cancer Day: मध्यप्रदेश। अगर आपको लगता है कि सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही लंग कैंसर होता है, तो यह धारणा गलत हो सकती है। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, जबलपुर की 5 साल की स्टडी में सामने आया है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी फेफड़ों के कैंसर का शिकार हो रहे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। इसकी बड़ी वजह पैसिव स्मोकिंग और बढ़ता वायु प्रदूषण है।
546 मरीजों पर हुई स्टडी
संस्थान ने 5 साल तक 546 लंग कैंसर मरीजों का अध्ययन किया।
इनमें: 328 (60%) मरीज स्मोकर थे।
218 (40%) मरीज नॉन-स्मोकर थे।
नॉन-स्मोकर मरीजों में 58 लोग पैसिव स्मोकिंग का शिकार थे। यानी वे खुद सिगरेट या बीड़ी नहीं पीते थे, लेकिन दूसरों के धुएं के संपर्क में आने से बीमार हुए। इनमें ज्यादातर महिलाएं थीं।
सबसे बड़ी चिंता: 57% मरीजों को आखिरी स्टेज पर पता चला की उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी है।
स्टडी के मुताबिक 57% मरीजों में कैंसर का पता तब चला, जब वह स्टेज-4 तक पहुंच चुका था। यानी बीमारी शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल चुकी थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह जागरूकता और समय पर जांच की कमी है।
गांवों में ज्यादा मामले
रिपोर्ट के अनुसार: 68.5% मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से थे।
सबसे ज्यादा मरीज 50 से 70 साल की उम्र के थे।
कुल मरीजों में 80% पुरुष थे।
लंग कैंसर के आम लक्षण
लगातार खांसी
सांस फूलना
सीने में दर्द
तेजी से वजन घटना
टीबी समझकर होता रहा इलाज, बाद में निकला कैंसर
स्टडी में 49 मरीजों को पहले टीबी हो चुकी थी, जबकि 17 मरीजों का शुरुआत में टीबी का इलाज चलता रहा, लेकिन बाद में जांच में लंग कैंसर निकला। डॉक्टरों का कहना है कि टीबी और लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण कई बार एक जैसे होते हैं, इसलिए सही जांच बेहद जरूरी है।
प्रदूषण भी बन रहा बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार अब सिर्फ धूम्रपान ही नहीं, बल्कि PM 2.5, जहरीले प्रदूषक और खराब हवा भी लंग कैंसर का खतरा बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि नॉन-स्मोकर्स और महिलाओं में भी इस बीमारी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
हर साल बढ़ रहे मामले
मध्य प्रदेश कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार, राज्य में हर एक लाख आबादी पर 12.1 लोग लंग कैंसर से प्रभावित हैं और हर साल मामलों में करीब 0.3% की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
यह रिपोर्ट बताती है कि लंग कैंसर अब सिर्फ धूम्रपान करने वालों की बीमारी नहीं रह गई है। समय पर जांच, धुएं से दूरी और प्रदूषण से बचाव ही इसके खतरे को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।




