मोदी-शाह की रणनीति और CM मोहन के दौरे से बदला बालाघाट, 200 करोड़ के फंड से मिली नक्सलवाद को मात
बालाघाट के जिन जंगलों में कभी नक्सलवाद का खौफ था, वहां अब पीएम मोदी और सीएम मोहन यादव की नीतियों से विकास की बयार बह रही है। 200 करोड़ के फंड से तस्वीर बदल गई है।
नीतियों से नक्सलवाद पर प्रहार, 40 साल बाद लौटी उम्मीद
मध्य प्रदेश के बालाघाट में दशकों से नक्सलवाद ने विकास को बंधक बना रखा था, लेकिन अब राजनीतिक इच्छाशक्ति और ठोस नीतियों से तस्वीर बदल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सुरक्षा और विकास की जो दोहरी रणनीति अपनाई गई, उसने नक्सल गतिविधियों की कमर तोड़ दी है। कभी सरकारी टीमों को देखकर छिप जाने वाले आदिवासी परिवार, जो बिना किसी नक्सली संबंध के भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित थे, अब 40 साल बाद खुले मन से सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं।
सीएम मोहन यादव के ऐतिहासिक दौरे से जगा भरोसा
इस इलाके में कुपोषण और बीमारियों की खबरें विपक्ष के लिए मुद्दा बन सकती थीं, लेकिन सरकार ने तुरंत एक्शन लिया। खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन सुदूर गांवों का दौरा किया, जहां आज तक प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री नहीं पहुंचा था। इस दौरे ने उस खौफजदा जनता के मन में यह भरोसा जगाया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। आज नतीजा यह है कि स्वास्थ्य विभाग की 20 सर्वे टीमें, 4 मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU), 10 चिकित्सा अधिकारी और 4 एंबुलेंस बेखौफ होकर गांव-गांव जाकर इलाज कर रही हैं।
200 करोड़ रुपये से 100 से ज्यादा गांवों की बदली सूरत
राजनीतिक और प्रशासनिक मोर्चे पर यह एक बड़ी जीत है कि राज्य सरकार ने पहले चरण में 100 से ज्यादा गांवों के विकास के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की है। आज इन इलाकों के विकास को भोपाल या इंदौर के पैमाने पर नहीं मापा जा सकता। जहां कभी नक्सलियों के खतरनाक कैंप लगते थे, वहां आज सरकारी जनसुविधा केंद्र बन रहे हैं। इन इलाकों में बनी नई सड़कें केवल डामर का जाल नहीं हैं, बल्कि यह प्रशासन और एंबुलेंस के वहां तक पहुंचने का सीधा रास्ता बन गई हैं।
980 घरों तक पहुंची मेडिकल टीम, तैयार हो रहा रिकॉर्ड
सरकारी अमले ने 10 गांवों के 980 घरों में जाकर स्वास्थ्य अभियान चलाया है। अब तक 630 मरीजों की पहचान कर ली गई है, जिनमें से 461 लोगों को घर पर ही दवा देकर ठीक किया गया और 125 को अस्पताल भेजा गया। बच्चों की सेहत पर खास फोकस है। पिछले एक महीने में 169 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया गया, जिनमें से 125 स्वस्थ होकर लौट चुके हैं। इसके साथ ही, हर ग्रामीण का मेडिकल रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है ताकि भविष्य की स्वास्थ्य नीतियां बेहतर बन सकें।
बच्चों को मिला दवाइयों का सुरक्षा कवच
कुपोषण मिटाने की सरकारी मुहिम के तहत बच्चों को विटामिन-ए, डफर और जिंक की खुराक बांटी जा रही है। जमीनी आंकड़ों के मुताबिक, 597 बच्चों को आयरन सिरप और 521 बच्चों को अल्बेंडाजोल की गोलियां दी गई हैं। वहीं 63 बच्चों का मीजल्स टीकाकरण भी किया गया है। आज बालाघाट में बंदूक के खौफ की जगह स्कूल की किताबों और स्वास्थ्यकर्मियों के थर्मामीटर ने ले ली है, जो सरकार की एक बड़ी कामयाबी है।
