आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई ताकत: 36 हजार किमी ऊपर से EOS-05 उपग्रह रखेगा बाढ़ और तूफान पर नजर
प्राकृतिक आपदाओं से लोगों की जान बचाने और रेस्क्यू मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए इसरो ने EOS-05 उपग्रह लॉन्च किया है। यह सैटेलाइट तूफान और बाढ़ की एडवांस जानकारी देकर सुरक्षा तंत्र को अलर्ट करेगा।
19 मिनट में आपदा प्रबंधन के लिए स्थापित हुआ नया सैटेलाइट
भारत के प्राकृतिक आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू सिस्टम को अब अंतरिक्ष से एक नई ताकत मिल गई है। ISRO ने 4 सितंबर को तड़के 2:55 बजे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट को लॉन्च किया। इस रॉकेट ने उड़ान भरने के मात्र 19 मिनट बाद ही पृथ्वी अवलोकन उपग्रह EOS-05 को सफलतापूर्वक भू-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित कर दिया, जो अब मौसम की मॉनिटरिंग करेगा।
'नॉटी बॉय' की सफल उड़ान ने दूर की मैनेजमेंट की चिंता
आपदा प्रबंधन के लिए इस सैटेलाइट का जाना बहुत जरूरी था, इसलिए इसरो पर भारी दबाव था। GSLV Mk-II को उसकी पिछली विफलताओं के कारण तकनीकी हलकों में 'नॉटी बॉय' कहा जाने लगा था। लेकिन इस महत्वपूर्ण मिशन में इस रॉकेट ने कोई शरारत नहीं की और उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरते हुए EOS-05 को सुरक्षित तरीके से उसकी जगह पर पहुंचा दिया।
2376 किलो का सैटेलाइट 36 हजार किमी से करेगा बचाव की तैयारी
पृथ्वी से लगभग 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया यह EOS-05 उपग्रह करीब 2,376 किलोग्राम वजनी है। इतनी ऊंचाई से यह सैटेलाइट बाढ़, भयानक चक्रवात, जंगलों की आग और जलवायु परिवर्तन जैसी घटनाओं की लाइव निगरानी करेगा, जिससे राहत और बचाव (Rescue) एजेंसियों को समय रहते लोगों की जान बचाने में काफी मदद मिलेगी।
एडवांस सेंसर्स से आपदाओं का मिलेगा सटीक अलर्ट
EOS-05 की असली ताकत इसके सेंसर्स हैं। यह उपग्रह दृश्य, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल बैंड में बहुत ही उन्नत किस्म की इमेजिंग कर सकता है। इस हाई-टेक डेटा से मौसम विभाग को आपदाओं की बिल्कुल सटीक जानकारी मिलेगी, जिससे किसी भी खतरे के आने से पहले ही रेस्क्यू मैनेजमेंट अलर्ट मोड पर आ सकेगा।
स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक ने दिया रेस्क्यू सिस्टम को सहारा
भारत का यह मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र हमारी अपनी स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक का ऋणी है। 1990 के दशक में जब पश्चिमी देशों ने यह अहम तकनीक देने से इनकार कर दिया था, तब इसरो के वैज्ञानिकों ने सालों की मेहनत से इसे खुद बनाया। आज यही स्वदेशी इंजन हमारी सुरक्षा और बचाव सिस्टम को अंतरिक्ष तक ले जा रहा है।
2021 के झटके से उबरकर मैनेजमेंट ने की शानदार वापसी
आपदाओं पर नजर रखने वाले सैटेलाइट को भेजने में इसरो को अगस्त 2021 में बड़ा झटका लगा था, जब GSLV-F10 मिशन के दौरान EOS-03 को कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका था। उस नाकामी से सीख लेकर मैनेजमेंट ने अपनी कमियों को सुधारा और अब EOS-05 की यह सफलता एक बहुत ही मजबूत वापसी मानी जा रही है।
