सिंधिया राजपरिवार संपत्ति बंटवारा मामले में आज सुनवाई: 40 हजार करोड़ की संपत्ति, प्रतिमा देवी ने क्यों रखी 10% हिस्से की मांग?
सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे का मामला एक बार फिर कानूनी उलझनों में फंस गया है।

Scindia Property Dispute: सिंधिया राजपरिवार की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की बताई जा रही संपत्ति के बंटवारे का मामला एक बार फिर चर्चा में है। ग्वालियर की अदालत में बुधवार, 14 अक्टूबर को प्रतिमा देवी राणा की आपत्तियों पर अहम सुनवाई निर्धारित है। मामला परिवार के बीच हुए संपत्ति बंटवारे के प्रस्तावित समझौते और उस पर उठाए गए सवालों से जुड़ा है। अब अदालत को यह तय करना है कि प्रतिमा देवी को अपनी आपत्तियों के समर्थन में साक्ष्य और गवाही पेश करने का अवसर दिया जाए या नहीं।
प्रतिमा राणा ने समझौते पर क्यों उठाए सवाल?
प्रतिमा देवी राणा, ज्योतिरादित्य सिंधिया की दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी हैं। उन्होंने अदालत में आवेदन देकर आरोप लगाया है कि संपत्ति बंटवारे से जुड़े दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर उनकी पूरी जानकारी और सहमति के बिना कराए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जरूरी दस्तावेजों और नोटिसों की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।
प्रतिमा देवी ने अपनी आपत्तियों पर सुनवाई और अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मांगा है। उनकी मांग है कि आपत्तियों का निपटारा किए बिना समझौते के आधार पर अंतिम डिक्री पारित न की जाए। ये आरोप फिलहाल उनके पक्ष के दावे हैं, जिन पर अदालत को विचार करना है।
संपत्ति में 10 फीसदी हिस्से की मांग
जानकारी के मुताबिक प्रतिमा राणा ने सिंधिया परिवार की संपत्ति में मां का 20 फीसदी हिस्सा बताकर 10 फीसदी संपत्ति की मांग रखी है। उनका कहना है कि प्रस्तावित समझौते में उनके अधिकारों का उचित ध्यान नहीं रखा गया। वह अपने हिस्से से जुड़े दावे पर कानूनी सुनवाई चाहती हैं।
यह विवाद केवल हिस्सेदारी के प्रतिशत तक सीमित नहीं है। समझौते की प्रक्रिया, उस पर किए गए हस्ताक्षर और परिवार के सदस्यों के अधिकार भी मामले के अहम पहलू हैं। प्रतिमा राणा की मांग और आपत्तियों पर अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
ज्योतिरादित्य सिंधिया और परिवार के अन्य सदस्यों का क्या पक्ष है?
इस मामले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे सहित परिवार के अन्य सदस्य भी पक्षकार हैं। प्रतिमा देवी की आपत्ति का विरोध करते हुए परिवार के सदस्यों की ओर से कहा गया है कि समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर सहमति से किए गए थे।
परिवार के पक्ष ने यह भी दलील दी कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के बाद सदस्य साथ रहे, पारिवारिक भोज में शामिल हुए और तस्वीरें भी खिंचवाई गईं। उनके मुताबिक, यह घटनाक्रम आपसी सहमति की ओर संकेत करता है। दूसरी ओर, प्रतिमा देवी ने हस्ताक्षरों और समझौते की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अदालत में दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार होना है।
40 हजार करोड़ की संपत्ति में क्या-क्या शामिल है?
सिंधिया राजपरिवार की संपत्ति का मूल्य मीडिया रिपोर्टों में करीब 40 हजार करोड़ रुपये या उससे अधिक बताया गया है। इस विवाद से जुड़ी प्रमुख संपत्तियों में ग्वालियर का जय विलास पैलेस और परिवार की अन्य संपत्तियां शामिल हैं। हालांकि, यह आंकड़ा अनुमानित है; इसे अदालत द्वारा तय किया गया अंतिम मूल्य नहीं माना जाना चाहिए।
इस विवाद में 13 अगस्त 1948 को भारत सरकार और तत्कालीन मध्य भारत के बीच हुआ विलय अनुबंध, जिसे ‘द कोवेनेंट’ कहा जाता है, भी महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। इसमें तत्कालीन रियासतों की निजी और सरकारी संपत्तियों के वर्गीकरण से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख है।
2015 से अदालत में चल रहा है मामला
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सिंधिया परिवार की संपत्ति को लेकर कानूनी विवाद वर्ष 2015 से अदालत में विचाराधीन है। परिवार के सदस्यों के बीच समझौते के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश की गई, लेकिन प्रतिमा देवी राणा की आपत्तियों के बाद कानूनी प्रक्रिया फिर आगे बढ़ गई।
अब 14 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा। इससे यह तय होने में मदद मिल सकती है कि प्रतिमा देवी की आपत्तियों पर साक्ष्य और गवाही की प्रक्रिया अपनाई जाएगी या मामले को समझौते के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।




