MP में बांग्लादेशियों के 31 फर्जी पासपोर्ट निरस्त, डबरा के बौद्ध विहार के पते पर बने थे 17 पासपोर्ट; 66 आरोपी फरार
मध्य प्रदेश में फर्जी भारतीय पासपोर्ट मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। STF की जांच के बाद 70 संदिग्ध पासपोर्ट में से 31 निरस्त कर दिए गए।

MP Fake Passport Case: मध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनवाने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट विभाग ने 70 संदिग्ध पासपोर्ट में से 31 को निरस्त कर दिया है। इनमें 17 पासपोर्ट ग्वालियर जिले के डबरा से जारी किए गए थे। खास बात यह है कि इन सभी पासपोर्ट में डबरा के सिमरिया स्थित एक बौद्ध विहार का पता दर्ज था।
एक ही गवाह और एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए एक ही गवाह और एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया था। इस खुलासे के बाद ग्वालियर और भोपाल को फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क के प्रमुख केंद्रों के रूप में देखा जा रहा है। जांच एजेंसियां अब बाकी संदिग्ध पासपोर्ट निरस्त कराने की तैयारी में हैं।
इस पूरे मामले में अब तक 100 से ज्यादा आरोपियों की पहचान की जा चुकी है। हालांकि, अब तक केवल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश में जांच एजेंसियां जुटी हुई हैं।
नाम और पहचान बदलकर बनवाए भारतीय दस्तावेज
STF की जांच में सामने आया कि बांग्लादेशी नागरिकों ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर भारतीय नाम और पहचान अपनाई। इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए गए और उन्हीं के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल किए गए।
जांच में यह भी पता चला कि फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कराने के लिए पंचायत स्तर से लेकर नगर पालिका डबरा तक के कुछ कर्मचारियों की कथित मिलीभगत थी। इस नेटवर्क की मदद से बांग्लादेशी नागरिकों के लिए भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज तैयार करवाए गए।
बौद्ध विहार के पते पर जारी हुए 17 पासपोर्ट
इस फर्जीवाड़े में बौद्ध मठों और विहारों के पते का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। डबरा के सिमरिया स्थित बौद्ध विहार के पते पर 17 पासपोर्ट जारी हुए थे। जांच में इन पासपोर्ट में समान गवाह और मोबाइल नंबर मिलने से फर्जीवाड़े की कड़ियां सामने आईं।
पुलिस इस मामले में मास्टरमाइंड रियाल चौधरी उर्फ नित्यानंद भिक्षु और उसके तीन बांग्लादेशी साथियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर मदद करने के आरोप में गुलाबराय गौतम, गयाप्रसाद गौतम और भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र के एजेंट नसीम अख्तर की गिरफ्तारी भी हुई है।
66 आरोपी फरार, विदेश भागने की आशंका
जांच एजेंसियों के मुताबिक, करीब 66 आरोपी मुख्य नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि 34 अन्य लोगों की भूमिका भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराने में सामने आई है। इस तरह मामले में 100 से ज्यादा लोगों को चिन्हित किया गया है।
इनमें से कई आरोपी अभी भी फरार हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुछ आरोपी देश छोड़कर इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार और चीन जैसे देशों में छिपे हो सकते हैं। फरार आरोपियों की तलाश के लिए जांच जारी है।
बाकी 39 संदिग्ध पासपोर्ट भी होंगे निरस्त
STF अधिकारियों के अनुसार, 70 संदिग्ध पासपोर्ट में से 31 निरस्त किए जा चुके हैं। बाकी 39 पासपोर्ट को भी निरस्त कराने की प्रक्रिया चल रही है।
अधिकारियों का मानना है कि पासपोर्ट निरस्त होने के बाद यदि कोई व्यक्ति इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर विदेश जाने या यात्रा करने की कोशिश करता है, तो इमिग्रेशन सिस्टम के जरिए उसकी पहचान कर उसे ट्रैक किया जा सकेगा। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।


