सिंहस्थ 2028: उज्जैन में आपदा प्रबंधन और सुरक्षित यातायात की तैयारी
सिंहस्थ 2028 को आपदा मुक्त बनाने के लिए सीएम डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन की कालिदास अकादमी में एसडीआरएफ और होमगार्ड की प्रदर्शनी का जायजा लिया। त्वरित रेस्क्यू के लिए ट्रेनिंग का शुभारंभ हुआ और 5.30 किमी के एलिवेटेड कॉरिडोर की नींव रखी गई।
आगामी सिंहस्थ-2028 में किसी भी प्रकार की मेडिकल या आपातकालीन स्थिति (Rescue & Management) से निपटने के लिए उज्जैन प्रशासन ने अभी से कमर कस ली है। इसी कड़ी में यातायात व्यवस्था को बाधा रहित बनाने के लिए बुधवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 945.20 करोड़ रुपये की लागत वाले 5.30 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि इस बार उज्जैन को एक भव्य, दिव्य, अलौकिक और पूरी तरह से 'आपदा मुक्त' सिंहस्थ के लिए तैयार किया जा रहा है।
आपात स्थितियों से निपटने के लिए आधुनिक उपकरणों का मुआयना
एलिवेटेड कॉरिडोर के भूमिपूजन के साथ ही मुख्यमंत्री ने कालिदास अकादमी में सिंहस्थ की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने होमगार्ड और एसडीआरएफ (SDRF) की ओर से लगाई गई विशेष प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सीएम को बाढ़, आगजनी, भवन हादसे और सड़क दुर्घटनाओं जैसी गंभीर आपात स्थितियों में तत्काल रेस्क्यू के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले आधुनिक उपकरणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
त्वरित रेस्क्यू के लिए होमगार्ड ट्रेनिंग का हुआ शुभारंभ
आपातकालीन प्रबंधन को और मजबूत करते हुए मुख्यमंत्री ने होमगार्ड जवानों की ट्रेनिंग का विधिवत शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ जैसे विशालकाय आयोजन में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response) और मजबूत बचाव व्यवस्था का होना अनिवार्य है। सीएम ने आपदा मित्रों को भी इस रेस्क्यू व्यवस्था से जोड़ने और जवानों को लगातार प्रशिक्षित व अलर्ट रखने पर विशेष जोर दिया।
945 करोड़ का कॉरिडोर: एंबुलेंस और श्रद्धालुओं के लिए सुगम रास्ता
करीब 945.20 करोड़ रुपये और 5.30 किलोमीटर लंबा यह एलिवेटेड कॉरिडोर आपात स्थितियों में एंबुलेंस और रेस्क्यू वाहनों की आवाजाही को भी सुगम बनाएगा। कालिदास अकादमी में हुए इस कार्यक्रम में बताया गया कि यह कॉरिडोर दो प्रमुख हिस्सों—इंद्रानगर चौराहे से नीलगंगा चौराहे तक और निकास चौराहे से इंदौर गेट तक—बनेगा। इससे पुराने शहर का यातायात दबाव कम होगा और महाकाल मंदिर, काल भैरव, मंगलनाथ व अन्य धार्मिक स्थलों तक श्रद्धालुओं को बिना जाम के सुरक्षित कनेक्टिविटी मिलेगी। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि सुविधाओं के विस्तार के लिए आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।

.jpg)
.jpg)
.jpg)