तिब्बत में 7.0 तीव्रता के भूकंप से तबाही, 16 लोगों की मौत 65 घायल; 413 आफ्टरशॉक दर्ज
तिब्बत में 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से भारी नुकसान हुआ है। हादसे में 16 लोगों की मौत और 65 लोगों के घायल होने की खबर है। भूकंप के बाद 413 आफ्टरशॉक दर्ज किए गए


Tibet Earthquake: चीन के तिब्बत क्षेत्र में गुरुवार, 22 अक्टूबर की रात आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, इस आपदा में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 65 लोग घायल हुए हैं। भूकंप के बाद 400 से ज्यादा आफ्टरशॉक दर्ज किए गए हैं। हालात को देखते हुए 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और राहत एवं बचाव अभियान जारी है।
भूकंप का केंद्र चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के नागक्यू शहर के बाछेन (Baqen) काउंटी में था। शुरुआती रिपोर्टों में 339 से अधिक मकानों के ढहने या क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। बचाव दल प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद करने, नुकसान का आकलन करने और जरूरी सामान पहुंचाने में जुटे हैं।
रात में आया भूकंप, लोगों ने घरों से बाहर निकलकर बचाई जान
रिपोर्टों के मुताबिक, भूकंप गुरुवार रात करीब 10:33 बजे स्थानीय समय पर आया। तेज झटकों के कारण लोग घरों से बाहर निकल आए। कई इमारतों में दरारें पड़ने और मकानों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्र की ऊंचाई काफी अधिक है और यहां मौसम भी चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में राहत कार्यों के दौरान लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना और उन्हें जरूरी सामान उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और घायलों की संख्या बढ़कर 65 हो गई। इनमें 11 लोगों की हालत गंभीर बताई गई। नुकसान का आकलन और राहत कार्य अभी जारी हैं।
413 आफ्टरशॉक से बढ़ी चिंता
मुख्य भूकंप के बाद क्षेत्र में लगातार छोटे झटके महसूस किए गए। चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र के हवाले से आई Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 413 आफ्टरशॉक दर्ज किए जा चुके थे।
आफ्टरशॉक मुख्य भूकंप के बाद उसी क्षेत्र में आने वाले अतिरिक्त झटके होते हैं। इनके कारण पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों को और नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है। इसलिए प्रशासन प्रभावित इमारतों की स्थिति जांचने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रखने के प्रयास कर रहा है।
339 से ज्यादा मकान प्रभावित, राहत अभियान जारी
भूकंप के कारण कम से कम 339 मकानों के ढहने या क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा 20 पशुशालाओं को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी आवास, टेंट, बिस्तर, कंबल और अन्य जरूरी सामान भेजा गया है।
राहत और बचाव कार्यों में पुलिस, दमकलकर्मी और अन्य आपातकालीन टीमें लगी हैं। 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी दर्ज हुए भूकंप
शुक्रवार सुबह चीन के तिब्बत क्षेत्र के अलावा पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी भूकंप दर्ज किए गए। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में 4.9 और अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता के झटके दर्ज किए गए। तिब्बत क्षेत्र में भी एक अलग भूकंपीय घटना रिकॉर्ड की गई।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इन देशों में दर्ज हुए झटकों को तिब्बत के मुख्य भूकंप का सीधा असर या आफ्टरशॉक बताने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए इन्हें अलग-अलग भूकंपीय घटनाओं के रूप में देखना उचित है।
तिब्बत में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?
तिब्बत और हिमालय के आसपास का क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है। इसकी प्रमुख वजह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार होने वाली भूगर्भीय हलचल है।
- भारतीय टेक्टोनिक प्लेट उत्तर की ओर बढ़ रही है।
- यह यूरेशियन प्लेट से टकराती है, जिससे धरती की ऊपरी परत में दबाव बनता है।
- चट्टानों और भूगर्भीय दरारों में जमा तनाव अचानक निकलने पर भूकंप आ सकता है।
- इसी प्लेट गतिविधि ने हिमालय और तिब्बती पठार के भूगर्भीय स्वरूप को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के बीच टकराव हिमालय क्षेत्र में बड़े भूकंप आने की प्रमुख भूगर्भीय वजह है।
पहले भी बड़े भूकंप झेल चुका है यह क्षेत्र
तिब्बत और इसके आसपास के इलाके में पहले भी विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। जनवरी 2025 में तिब्बत के तिंगरी क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। USGS ने उस घटना को भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की सीमा के उत्तर में हुई भूगर्भीय हलचल से संबंधित बताया था।
इसके अलावा, 2010 में पड़ोसी चीनी प्रांत छिंगहाई के युशू में 7.1 तीव्रता के भूकंप में कम से कम 2,698 लोगों की मौत हुई थी और करीब 300 लोग लापता हो गए थे। ये घटनाएं बताती हैं कि हिमालय और तिब्बती पठार के आसपास भूकंप का जोखिम गंभीर बना रहता है।
फिलहाल राहत और बचाव पर जोर
तिब्बत में राहत अभियान जारी है। प्रशासन के सामने क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन करने, घायलों का इलाज कराने और विस्थापित लोगों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराने की चुनौती है। आफ्टरशॉक के कारण प्रभावित इमारतों की सुरक्षा जांच भी जरूरी बनी हुई है।
मौतों, घायलों और नुकसान के आंकड़ों में आगे बदलाव हो सकता है। इसलिए स्थिति की ताजा जानकारी के लिए स्थानीय प्रशासन और आधिकारिक आपदा एजेंसियों की अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।




