बताया गया है कि यह कार्यक्रम पहले 28 फरवरी को प्रस्तावित था, लेकिन उस दिन मुख्यमंत्री उपस्थित नहीं हो सके थे। उस समय बोत्सवाना से लाए गए नौ चीतों को कूनो में छोड़ने की योजना थी, जिसमें केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने भाग लिया। आज का कार्यक्रम पुनर्निर्धारित रूप से घड़ियाल और कछुए संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाने के लिए आयोजित किया गया है।
सीएम के आगमन को देखते हुए कूनो क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि किसी भी स्तर पर सुरक्षा में कोई चूक न हो।
विशेषज्ञों के अनुसार घड़ियाल और कछुए नदी पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण घटक हैं। इनकी उपस्थिति से जलाशयों का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। इस तरह के संरक्षण प्रयास लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा में मदद करते हैं और क्षेत्र को इको-टूरिज्म के रूप में पहचान दिलाने में भी सहायक होते हैं।
कूनो में लगभग एक घंटे का प्रवास पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव हेलीकॉप्टर से अशोकनगर के लिए रवाना होंगे। यह कार्यक्रम न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि राज्य में जैव विविधता और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने का प्रतीक भी माना जा रहा है।