instagram new feature: बच्चों की सुरक्षा के लिए Instagram का बड़ा कदम, पैरेंट्स को मिलेगा नया मॉनिटरिंग फीचर

instagram new feature: नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram जल्द ही पैरेंट्स के लिए एक नया Supervision Tool लेकर आ रहा है। इस फीचर की मदद से माता-पिता अपने बच्चों की इंस्टाग्राम एक्टिविटी पर नजर रख सकेंगे। खास बात यह है कि यह टूल केवल Teen Accounts पर काम करेगा। कंपनी के मुताबिक, इस फीचर से पैरेंट्स यह समझ पाएंगे कि उनके बच्चों की फीड, रील्स और एक्सप्लोर सेक्शन में किस तरह का कंटेंट दिखाई दे रहा है और वे किन विषयों में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। क्यों लाया गया यह फीचर Meta का कहना है कि इस टूल को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि परिवार यह समझ सकें कि इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम बच्चों को कौन-सा कंटेंट और क्यों दिखा रहा है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई टीन यूजर स्पोर्ट्स, म्यूजिक, गेमिंग या फोटोग्राफी से जुड़ा कंटेंट ज्यादा देखता है, तो पैरेंट्स को इन कैटेगरी की जानकारी मिल जाएगी। इससे वे बच्चों की ऑनलाइन रुचियों और डिजिटल व्यवहार को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। Gujrat Road Accident: गुजरात जा रही वैन हादसे का शिकार, दो की मौत के बीच करोड़ों की चांदी मिलने से सनसनी नई कैटेगरी जुड़ते ही मिलेगा नोटिफिकेशन इस नए सुपरविजन टूल की एक खास सुविधा यह भी होगी कि अगर बच्चा अपने इंटरेस्ट में कोई नई कैटेगरी जोड़ता है, तो इसकी जानकारी पैरेंट्स को नोटिफिकेशन के जरिए मिल जाएगी। इससे माता-पिता यह जान सकेंगे कि बच्चे के फीड में अचानक नया कंटेंट क्यों दिखाई देने लगा है। AI एक्टिविटी पर भी रखी जा सकेगी नज कुछ समय पहले इंस्टाग्राम, फेसबुक और मैसेंजर के लिए एक और फीचर पेश किया गया था, जिसमें पैरेंट्स यह देख सकते हैं कि बच्चे AI टूल्स का इस्तेमाल किस तरह कर रहे हैं। नई “Insights” टैब में पिछले 7 दिनों के दौरान बच्चे किन विषयों पर AI से सवाल पूछ रहे हैं, उसकी जानकारी दिखाई जाएगी। हालांकि, इसमें पूरी चैट नहीं दिखाई जाएगी, बल्कि केवल टॉपिक्स की लिस्ट दिखाई जाएगी। भारत में भी जल्द मिलेगा फीचर रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नया सुपरविजन टूल ग्लोबली रोलआउट होना शुरू हो गया है। शुरुआती चरण में इसे अंग्रेजी भाषा के यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा और बाद में भारत समेत अन्य देशों में भी लॉन्च किया जाएगा।
स्मार्टफोन की सेफ्टी के लिए जरूरी टिप्स: ये 5 चीजें फोन के साथ रखी तो हो सकता है भारी नुकसान

नई दिल्ली। आज के समय में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन छोटी-छोटी लापरवाहियां इसके लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती हैं। अक्सर लोग अनजाने में फोन के साथ ऐसी चीजें रख लेते हैं जो इसकी स्क्रीन, बैटरी और इंटरनल पार्ट्स को खराब कर सकती हैं। सबसे पहले, चाबियां और सिक्के जैसे धातु के सामान फोन के साथ रखने से स्क्रीन और कैमरा लेंस पर गहरी खरोंच आ सकती है, जिससे फोन की लुक और परफॉर्मेंस दोनों प्रभावित होते हैं। वहीं, मजबूत मैग्नेट वाले डिवाइस या चुंबक फोन के सेंसर्स और कंपास जैसी तकनीक को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, पावर बैंक के साथ फोन को एक ही टाइट जगह पर चार्ज करते समय रखने से ओवरहीटिंग का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बैटरी कमजोर हो सकती है या गंभीर मामलों में फटने का रिस्क भी बन सकता है। क्रेडिट और डेबिट कार्ड को फोन के कवर में रखना भी सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि फोन के मैग्नेटिक फील्ड से कार्ड की स्ट्रिप या चिप खराब हो सकती है। वहीं पानी की बोतल या किसी भी तरल पदार्थ के पास फोन रखने से रिसाव होने पर शॉर्ट-सर्किट का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन को हमेशा अलग और सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए और अच्छे क्वालिटी के केस व स्क्रीन प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहे।
कमजोर पासवर्ड पर साइबर अटैक का खतरा बढ़ा: AI के सामने सेकंडों में टूट रहे आसान पासवर्ड, 23 करोड़ लीक डाटा से बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। साइबर सुरक्षा को लेकर Kaspersky की ताज़ा रिपोर्ट ने गंभीर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार 2023 से 2026 के बीच करीब 23.10 करोड़ यूनिक पासवर्ड लीक हुए हैं, जिनके विश्लेषण में यह सामने आया कि बड़ी संख्या में यूजर्स अब भी कमजोर और आसानी से अनुमान लगाए जा सकने वाले पासवर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 68% मॉडर्न पासवर्ड ऐसे हैं जिन्हें आज के ब्रूट-फोर्स और AI आधारित हैकिंग टूल्स की मदद से एक दिन के भीतर क्रैक किया जा सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं, गलत पैटर्न और सरल कॉम्बिनेशन वाले 12 से 15 कैरेक्टर लंबे पासवर्ड भी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पा रहे हैं और कुछ मामलों में इन्हें एक मिनट से भी कम समय में तोड़ा जा सकता है। विश्लेषण में यह भी पाया गया कि लोग अक्सर पासवर्ड में आसान नंबर सीक्वेंस जैसे “123456”, कीबोर्ड पैटर्न जैसे क्वर्टी या सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे हैकर्स के लिए काम और आसान हो जाता है। इसके अलावा ट्रेंडिंग और भावनात्मक शब्दों का इस्तेमाल भी पासवर्ड को कमजोर बना रहा है, जिससे डेटा चोरी का खतरा और बढ़ जाता है। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ लंबा पासवर्ड बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत और यूनिक पासवर्ड के साथ मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) और पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल करना आज की सबसे जरूरी डिजिटल सुरक्षा रणनीति बन चुका है।
स्मार्टफोन से जुड़ी बड़ी चेतावनी: ये 5 चीजें साथ रखने की गलती पड़ सकती है भारी, फोन हो सकता है खराब

नई दिल्ली। स्मार्टफोन आज हर व्यक्ति की जरूरत बन चुका है, लेकिन रोजमर्रा की छोटी-छोटी लापरवाहियां इसके लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कई लोग अनजाने में अपने फोन के साथ ऐसी चीजें रख देते हैं, जो स्क्रीन से लेकर बैटरी और इंटरनल पार्ट्स तक को नुकसान पहुंचा सकती हैं। सबसे आम गलती है फोन के साथ चाबियां और सिक्के रखना। धातु की ये चीजें स्क्रीन और कैमरा लेंस पर खरोंच डाल सकती हैं, जिससे डिवाइस की परफॉर्मेंस और क्वालिटी दोनों प्रभावित होती हैं। इसी तरह मैग्नेटिक डिवाइस या मजबूत चुंबक फोन के सेंसर और कंपास जैसे पार्ट्स को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे लोकेशन और कैमरा स्टेबिलाइजेशन जैसी सुविधाएं खराब हो सकती हैं। चार्जिंग के दौरान फोन और पावर बैंक को एक साथ बंद जगह में रखने से ओवरहीटिंग का खतरा बढ़ जाता है, जो बैटरी लाइफ को कम करने के साथ-साथ गंभीर मामलों में डिवाइस फेलियर का कारण बन सकता है। इसके अलावा, क्रेडिट या डेबिट कार्ड को फोन कवर में रखने से उनकी मैग्नेटिक स्ट्रिप प्रभावित हो सकती है, जबकि पानी की बोतल या लिक्विड के साथ फोन रखने पर रिसाव की स्थिति में शॉर्ट सर्किट का खतरा रहता है। तकनीकी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फोन को हमेशा अलग और सुरक्षित जगह पर रखें और उचित कवर व स्क्रीन प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करें ताकि डिवाइस लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।
हज सुविधा स्मार्टवॉच पर विवाद: यात्रियों ने बैटरी और परफॉर्मेंस पर उठाए सवाल, कंपनी ने दी सफाई

नई दिल्ली। हज यात्रा पर गए कई भारतीय यात्रियों ने ‘हज सुविधा स्मार्टवॉच’ की कार्यक्षमता को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं। यात्रियों का कहना है कि GPS और हेल्थ फीचर्स से लैस यह डिवाइस फुल चार्ज के बाद भी बहुत कम समय तक चल रही है, जिससे इमरजेंसी और ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं में दिक्कत आ रही है। हज कमेटी ऑफ इंडिया (HCoI) की ओर से करीब 1.2 लाख से अधिक यात्रियों को यह स्मार्टवॉच वितरित की गई थी। इसका उद्देश्य यात्रियों की लोकेशन ट्रैकिंग, SOS अलर्ट, हेल्थ मॉनिटरिंग और रियल-टाइम गाइडेंस देना बताया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, यात्रियों ने आरोप लगाया है कि वॉच की बैटरी अपेक्षा से जल्दी खत्म हो रही है और भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे मक्का और मीना में नेटवर्क और कनेक्टिविटी भी कमजोर पड़ रही है। कुछ यात्रियों ने इसे 7 हजार रुपये की कीमत के हिसाब से कमजोर परफॉर्मेंस वाला बताया है। वहीं, डिवाइस बनाने वाली कंपनी (Sekyo) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वॉच को टेस्टिंग के बाद ही वितरित किया गया है और यह सामान्य परिस्थितियों में 1–2 दिन तक बैकअप देने में सक्षम है। कंपनी का कहना है कि यात्रियों को दिए गए मैनुअल में 10W से कम चार्जर उपयोग करने की सलाह दी गई है और डिवाइस के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न करने की अपील की गई है। इस पूरी स्थिति पर हज कमेटी और कंपनी दोनों की ओर से यात्रियों की सहायता और तकनीकी सपोर्ट जारी रखने की बात कही गई है।
AI का कमाल: बालकनी में घुसते ही कबूतर पर ‘ऑटोमैटिक अटैक’, वायरल हुआ पिजन डिफेंस सिस्टम

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक अनोखा प्रयोग सामने आया है, जहां एक शख्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर ऐसा सिस्टम बना दिया है जो बालकनी में आने वाले कबूतरों को खुद पहचानकर उन्हें भगाता है। यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर तेजी से वायरल हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह AI-पावर्ड “पिजन डिफेंस सिस्टम” कबूतरों की पहचान करके उन पर पानी की बौछार कर उन्हें बालकनी से दूर करता है। सिस्टम को खास तौर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि जैसे ही कैमरे में कबूतर दिखता है, वह तुरंत एक्शन लेता है। इस डिवाइस में Orange Pi 5 कंप्यूटर, USB कैमरा और YOLO World V2 AI विजन मॉडल का इस्तेमाल किया गया है। यह मॉडल लाइव वीडियो फीड को प्रोसेस करके कबूतर की पहचान करता है और फिर जुड़े हुए मैकेनिज्म को एक्टिव कर देता है। सिस्टम में दो सर्वो मोटर्स, ट्रांजिस्टर और एक मॉडिफाइड इलेक्ट्रिक वॉटर गन लगाई गई है, जो टारगेट पर पानी की बौछार करती है। यह पूरा सेटअप Rockchip 3588 चिप के न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट पर काम करता है, जिससे यह पूरी तरह ऑटोमैटिक हो जाता है। खास बात यह है कि यह सिस्टम सिर्फ कबूतर ही नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार गिलहरी या बिल्ली जैसे अन्य जानवरों को भी पहचानकर उन्हें भगाने के लिए सेट किया जा सकता है। इंटरनेट पर इस इनोवेशन की काफी चर्चा हो रही है और लोग इसे AI के क्रिएटिव और प्रैक्टिकल इस्तेमाल का दिलचस्प उदाहरण बता रहे हैं।
Amazon Sale में Samsung Galaxy S25 FE पर भारी छूट, AI फीचर्स और 7 साल अपडेट के साथ मिल रहा दमदार फ्लैगशिप एक्सपीरियंस

नई दिल्ली। अमेज़न की शानदार ग्रीष्मकालीन सेल में स्मार्टफोन्स पर आकर्षक ऑफर्स दिए जा रहे हैं, जिसमें Samsung का पॉपुलर डिवाइस Galaxy S25 FE भी शामिल है। यह फोन अपने प्रीमियम डिजाइन, AI फीचर्स और लंबे सॉफ्टवेयर सपोर्ट के कारण मिड-हाई रेंज सेगमेंट में खासा चर्चा में है। कीमत और ऑफरसेल के दौरान Samsung Galaxy S25 FE पर लगभग 17% तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसकी MRP 59,999 रुपये के मुकाबले यह फोन करीब 49,835 रुपये के आसपास उपलब्ध है (वेरिएंट और ऑफर के अनुसार कीमत में बदलाव संभव है)। बैंक ऑफर्स और EMI विकल्पों के जरिए कीमत और भी कम हो सकती है। फीचर्स की खासियतGalaxy S25 FE को खास बनाते हैं इसके AI-पावर्ड फीचर्स, जो कैमरा, फोटो एडिटिंग और परफॉर्मेंस को और स्मार्ट बनाते हैं। कंपनी इस डिवाइस के साथ लंबे समय तक सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट देने का दावा करती है, जिससे यह भविष्य के लिए एक बेहतर निवेश माना जा रहा है। किसके लिए बेहतर है यह फोन?जो यूजर्स 50,000 रुपये से कम बजट में एक फ्लैगशिप-लेवल परफॉर्मेंस, AI फीचर्स और लंबे अपडेट सपोर्ट वाला फोन चाहते हैं, उनके लिए Galaxy S25 FE एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आता है।
सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने से पहले समझ लें ये जरूरी बातें, दो तरह के सिस्टम से बदल सकता है आपका बिजली बिल

नई दिल्ली। आज के समय में बढ़ते बिजली बिल और ऊर्जा की जरूरतों के बीच सोलर एनर्जी एक स्मार्ट और पर्यावरण-हितैषी विकल्प बनकर उभरा है। यह न सिर्फ बिजली खर्च कम करता है बल्कि स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) को बढ़ावा देता है। लेकिन सोलर सिस्टम लगवाने से पहले यह समझना जरूरी है कि यह मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं ऑफ-ग्रिड (Off-Grid) और ऑन-ग्रिड (On-Grid), और दोनों का इस्तेमाल अलग-अलग जरूरतों के लिए किया जाता है। ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम: बिजली नहीं तो भी चलता रहेगा कामऑफ-ग्रिड सिस्टम पूरी तरह बैटरी पर आधारित होता है। इसमें सोलर पैनल, इन्वर्टर और बैटरी शामिल होती है। यह सिस्टम उन इलाकों के लिए बेहद उपयोगी है जहां बिजली की सप्लाई नहीं होती या बार-बार कटौती होती है। दिन में बनने वाली सोलर एनर्जी बैटरी में स्टोर हो जाती है, जिसे रात में इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी बिजली न होने पर भी आप पंखा, लाइट और छोटे उपकरण आसानी से चला सकते हैं। ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम: बिजली बिल घटाने का सबसे आसान तरीकाऑन-ग्रिड सिस्टम सीधे बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है और इसमें बैटरी की जरूरत नहीं होती। यह सिस्टम तभी काम करता है जब बिजली सप्लाई मौजूद हो। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बनने वाली अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजा जा सकता है, जिससे बिजली बिल काफी कम या शून्य तक हो सकता है। हालांकि, बिजली कटने पर यह सिस्टम बंद हो जाता है। सोलर पैनल के मुख्य प्रकारसोलर पैनल भी मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं मोनोक्रिस्टलाइन और पॉलीक्रिस्टलाइन। मोनोक्रिस्टलाइन पैनल: एकल सिलिकॉन क्रिस्टल से बने होते हैं, इनकी दक्षता (Efficiency) ज्यादा होती है और कम धूप में भी बेहतर काम करते हैं, लेकिन कीमत अधिक होती है। पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल: कई सिलिकॉन कणों से बने होते हैं, ये सस्ते होते हैं और उन जगहों के लिए बेहतर हैं जहां दिन में ज्यादा धूप मिलती है। अगर आप लंबी अवधि में बिजली खर्च कम करना चाहते हैं तो अपनी जरूरत और स्थान के अनुसार सही सोलर सिस्टम चुनना बेहद जरूरी है। सही चयन से न सिर्फ बिजली बिल में बड़ी बचत होगी बल्कि आप पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगे।
Jio vs Airtel ₹349 Plan: डेटा, वैलिडिटी और बेनिफिट्स में कौन देता है ज्यादा फायदा?

नई दिल्ली। Jio और Airtel दोनों ही भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां हैं, जो 349 रुपये की कीमत में किफायती प्रीपेड प्लान ऑफर करती हैं। दोनों प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की है, लेकिन डेटा और अतिरिक्त बेनिफिट्स के मामले में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। Jio ₹349 प्रीपेड प्लानJio के 349 रुपये वाले प्लान में यूजर्स को 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ रोजाना 2GB डेटा मिलता है, यानी कुल 56GB इंटरनेट। इसके साथ अनलिमिटेड कॉलिंग और प्रतिदिन 100 SMS की सुविधा भी दी जाती है।इस प्लान का सबसे बड़ा आकर्षण इसके डिजिटल बेनिफिट्स हैं, जिसमें JioHotstar मोबाइल का 3 महीने का फ्री सब्सक्रिप्शन, 50GB JioAI क्लाउड स्टोरेज, JioTV और AI आधारित सेवाएं शामिल हैं। इसके अलावा यूजर्स को Google Gemini Pro जैसे AI टूल्स का एक्सेस भी ऑफर किया जाता है, जो इसे एक फीचर-रिच पैक बनाता है। Airtel ₹349 प्रीपेड प्लानAirtel का 349 रुपये वाला प्लान भी 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है। इसमें यूजर्स को रोजाना 1.5GB डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और 100 SMS मिलते हैं। साथ ही चुनिंदा सर्कल्स में 5G नेटवर्क पर अनलिमिटेड डेटा का लाभ भी दिया जाता है।हालांकि Airtel अपने यूजर्स को 399 रुपये वाले प्लान की ओर अपग्रेड करने का विकल्प भी देता है, जिसमें अनलिमिटेड डेटा, JioHotstar, Adobe Express Premium और बेहतर सिक्योरिटी फीचर्स जैसे स्पैम प्रोटेक्शन शामिल हैं। कौन सा प्लान बेहतर है?अगर आप ज्यादा डेटा और एंटरटेनमेंट के साथ AI और क्लाउड स्टोरेज जैसी डिजिटल सर्विसेज चाहते हैं तो Jio का 349 रुपये वाला प्लान बेहतर विकल्प है।वहीं अगर आपका फोकस स्टेबल नेटवर्क, 5G अनलिमिटेड एक्सेस और बेसिक डेटा यूसेज पर है, तो Airtel का प्लान ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।
Netflix आपकी कौन-कौन सी जानकारी ट्रैक करता है? जानिए प्राइवेसी बचाने के आसान तरीके

नई दिल्ली। लोकप्रिय ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix एक बार फिर प्राइवेसी को लेकर चर्चा में है। हाल ही में अमेरिका के टेक्सास में नेटफ्लिक्स के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी यूजर्स की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखती है और उस डेटा का इस्तेमाल उन्हें लंबे समय तक प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के लिए करती है। डिजिटल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नेटफ्लिक्स सिर्फ यह नहीं जानता कि आप कौन-सी फिल्म या वेब सीरीज देख रहे हैं, बल्कि वह आपकी हर छोटी-बड़ी गतिविधि को ट्रैक करता है।डिजिटल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नेटफ्लिक्स सिर्फ यह नहीं जानता कि आप कौन-सी फिल्म या वेब सीरीज देख रहे हैं, बल्कि वह आपकी हर छोटी-बड़ी गतिविधि को ट्रैक करता है। Netflix कैसे करता है यूजर्स को ट्रैक?क्या देखते हैं और कितना देखते हैं नेटफ्लिक्स रिकॉर्ड करता है कि:आपने कौन-सी फिल्म या सीरीज देखीकितनी देर तक देखीकौन-सा एपिसोड बीच में छोड़ाकौन-सा सीन बार-बार देखा या रोकाइन जानकारियों के आधार पर आपका एक डिजिटल प्रोफाइल तैयार किया जाता है, जिससे अगली बार आपको वैसा ही कंटेंट दिखाया जाता है। हर यूजर का होम स्क्रीन क्यों होता है अलगआपने ध्यान दिया होगा कि नेटफ्लिक्स का होमपेज हर व्यक्ति के लिए अलग दिखाई देता है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्लेटफॉर्म यह भी ट्रैक करता है कि:आप किस थंबनेल पर ज्यादा देर रुकेक्या सर्च कियाकिस कंटेंट पर क्लिक कियाकितनी तेजी से स्क्रॉल किया इसी डेटा के जरिए एल्गोरिदम तय करता है कि आपको कौन-सा कंटेंट पसंद आ सकता है।डिवाइस और लोकेशन भी होती है ट्रैकनेटफ्लिक्स यह भी रिकॉर्ड करता है कि:आप किस डिवाइस से लॉगिन हैंकौन-सा इंटरनेट नेटवर्क इस्तेमाल कर रहे हैंआपकी अनुमानित लोकेशन क्या हैइसी तकनीक का इस्तेमाल “Netflix Household” और पासवर्ड शेयरिंग रोकने के लिए भी किया जाता है। बच्चों की एक्टिविटी पर भी नजकिड्स प्रोफाइल होने के बावजूद प्लेटफॉर्म बच्चों की देखने की आदतों से जुड़ा डेटा भी इकट्ठा कर सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे बच्चों को ज्यादा समय तक स्क्रीन पर बनाए रखने की रणनीतियां तैयार की जाती हैं। ऐसे में माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम और प्रोफाइल सेटिंग्स पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे सुरक्षित रखें अपनी प्राइवेसीअगर आप नेटफ्लिक्स इस्तेमाल करते हैं, तो ये उपाय आपकी पर्सनल जानकारी को ज्यादा सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं: Viewing History छुपाएं या डिलीट करें मजबूत पासवर्ड और Two-Factor Authentication इस्तेमाल करेंअनजान डिवाइस से Sign Out करेंप्रोफाइल लॉक फीचर ऑन करेंCookies और Tracking सेटिंग्स कंट्रोल करेंEmails और Notifications की परमिशन सीमित करेंडेटा इस्तेमाल पर आपका भी कंट्रोल Netflix Privacy Center के जरिए यूजर्स अपने डेटा से जुड़ी कई सेटिंग्स बदल सकते हैं। यहां से आप:Behavioral Ads से Opt-out कर सकते हैंडेटा डाउनलोड या हटाने का अनुरोध कर सकते हैंपर्सनलाइजेशन सेटिंग्स कंट्रोल कर सकते हैं क्या है ‘Dark Pattern’?डिजिटल दुनिया में “Dark Pattern” ऐसे डिजाइन और तकनीकों को कहा जाता है, जिनका उद्देश्य यूजर्स को ज्यादा समय तक ऐप या वेबसाइट पर बनाए रखना होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म इसी रणनीति का इस्तेमाल करते हैं।