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आज का राशिफल 15 मई: जानें किस राशि को होगा लाभ और किसे रहना होगा सतर्क

नई दिल्ली।15 मई 2026 शुक्रवार को ग्रहों की विशेष स्थिति कई राशियों के लिए धन लाभ, करियर ग्रोथ और रिश्तों में मजबूती लेकर आ रही है, जबकि कुछ राशियों को स्वास्थ्य, खर्च और विवादों से सतर्क रहने की जरूरत है। जानिए सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल। मेष राशिआज आत्मविश्वास और ऊर्जा चरम पर रहेगी। करियर में नेतृत्व करने का मौका मिल सकता है। बिजनेस में नए निर्णय लाभ दिलाएंगे। प्रेम संबंध मजबूत होंगे।शुभ रंग: लाललकी नंबर: 9 वृषभ राशिअनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में विरोधियों से सतर्क रहें। मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। निवेश सोच-समझकर करें।शुभ रंग: सफेदलकी नंबर: 6 मिथुन राशिआर्थिक लाभ और करियर में तरक्की के मजबूत योग हैं। नई योजनाएं सफल होंगी। दोस्तों और परिवार का सहयोग मिलेगा।शुभ रंग: हरालकी नंबर: 5 कर्क राशिकार्यस्थल पर जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। मेहनत का फल मिलेगा। परिवार का सहयोग रहेगा, लेकिन तनाव से बचें।शुभ रंग: सिल्वरलकी नंबर: 2 सिंह राशिभाग्य का पूरा साथ मिलेगा। रुके हुए काम पूरे होंगे। यात्रा और निवेश दोनों लाभदायक रह सकते हैं।शुभ रंग: सुनहरालकी नंबर: 1 कन्या राशिआज सावधानी जरूरी है। स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। वाहन चलाते समय सतर्क रहें।शुभ रंग: नीलालकी नंबर: 7 तुला राशिसाझेदारी में लाभ मिलेगा। दांपत्य जीवन सुखद रहेगा। नौकरी और बिजनेस दोनों में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।शुभ रंग: गुलाबीलकी नंबर: 6 वृश्चिक राशिप्रतिस्पर्धियों पर जीत मिलेगी। पुराने विवाद खत्म हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखें।शुभ रंग: मरूनलकी नंबर: 8 धनु राशिविद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन शानदार रहेगा। नई योजनाओं में सफलता मिलेगी। प्रेम जीवन में मधुरता बढ़ेगी।शुभ रंग: पीलालकी नंबर: 3 मकर राशिपरिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। भावनाओं में बहकर निर्णय न लें।शुभ रंग: ग्रेलकी नंबर: 4 कुंभ राशिसाहस और आत्मविश्वास बढ़ेगा। करियर में बड़ी उपलब्धि मिल सकती है। यात्रा और नए संपर्क लाभकारी रहेंगे।शुभ रंग: आसमानीलकी नंबर: 11 मीन राशिधन लाभ के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में सराहना मिलेगी। रिश्तों में गंभीरता और स्थिरता आएगी।शुभ रंग: क्रीमलकी नंबर: 7

Vat Savitri Vrat: इस बार कब रखा जाएगा व्रत, जानिए पूरी पूजा विधि और सामग्री

नई दिल्ली । वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है और इस बार इसकी तिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार वट सावित्री व्रत 2026 का पालन 16 मई को किया जाएगा। तिथि और अमावस्या का समयज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 5:11 बजे शुरू होकर 17 मई 2026 को सुबह 1:30 बजे तक रहेगी। इसी कारण व्रत और पूजा 16 मई को ही करना शुभ माना गया है।  पूजा का शुभ मुहूर्तसुबह 6:00 बजे से 10:30 बजे तक का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ रहेगा।सूर्योदय लगभग सुबह 5:30 बजे के आसपास माना गया है, इसलिए महिलाएं प्रातःकाल स्नान करके व्रत की शुरुआत करती हैं। वट सावित्री पूजा विधि (संक्षेप मेव्रत के दिन सुहागिन महिलाएं बरगद (वट) वृक्ष की पूजा करती हैं। वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटा जाता है7 परिक्रमा की जाती हैं, जो सात जन्मों के दांपत्य सुख का प्रतीक मानी जाती हैंकुछ स्थानों पर 11 या 108 परिक्रमा भी की जाती हैंसावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती हैपति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है व्रत का महत्पौराणिक मान्यता के अनुसार देवी सावित्री ने अपने तप और संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण यह व्रत स्त्रियों के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पूरे श्रद्धा भाव से वट वृक्ष की पूजा करती हैं और वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

बेहद खास है 16 मई की अमावस्या, शनि जयंती के साथ बन रहा दुर्लभ संयोग, इन गलतियों से बचें

नई दिल्ली। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष महत्व प्राप्त है और ज्येष्ठ मास की अमावस्या को और भी महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई को पड़ रही है, जो कई धार्मिक संयोगों के कारण खास मानी जा रही है। इसी दिन शनि जयंती भी मनाई जाएगी और यह वर्ष की पहली शनि अमावस्या भी होगी। द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे शुरू होगी और 17 मई 2026 को रात 01:30 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर अमावस्या का स्नान और दान 16 मई, शनिवार को ही किया जाएगा। शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या का संयोगइस दिन शनि जयंती, वट सावित्री व्रत और ज्येष्ठ अमावस्या का एक साथ संयोग बन रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इन कार्यों से बचने की सलाहधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन कुछ कार्यों से परहेज करना चाहिए, अन्यथा जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। बाल और नाखून काटने से बचेंमान्यता है कि अमावस्या के दिन बाल और नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता। विशेषकर शनिवार को शनि जयंती होने के कारण यह नियम और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। बुजुर्गों का सम्मान जरूरीइस दिन पितरों का स्मरण और तर्पण किया जाता है। ऐसे में बुजुर्गों का सम्मान करना आवश्यक माना गया है। उनका अपमान या अनादर करने से पारिवारिक अशांति बढ़ सकती है। तामसिक भोजन से परहेजअमावस्या के दिन सात्विक आहार लेने और तामसिक भोजन से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही स्वच्छता बनाए रखना और सुबह जल्दी स्नान करना भी शुभ माना जाता है। सुनसान जगहों से दूरीधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय मानी जाती है। इसलिए श्मशान घाट या सुनसान स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है। नए कार्यों की शुरुआत न करेंइस दिन नए कार्य शुरू करना या बड़ी खरीदारी करना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे कार्यों में बाधा या असफलता आ सकती है। धार्मिक महत्व और मान्यताएंज्येष्ठ अमावस्या को पितरों को समर्पित तिथि माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य, स्नान और पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सही तरीके से किए गए धार्मिक कार्य जीवन में सुख-समृद्धि और शांति लाते हैं।

मां गंगा के अवतरण दिवस पर उमड़ेगी आस्था: गंगा दशहरा 25 मई को, स्नान-दान का मिलेगा फल..

नई दिल्ली ।  देशभर में आस्था का माहौल उस समय विशेष रूप से गहराने लगता है जब गंगा दशहरा जैसे पवित्र पर्व की तिथि नजदीक आती है। वर्ष 2026 में यह महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर 25 मई को मनाया जाएगा। इस दिन को केवल एक पर्व के रूप में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि और आत्मिक उन्नति के अवसर के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, जिससे यह तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन की शुरुआत श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जब वे ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा और मन को शुद्ध करने की प्रक्रिया मानी जाती है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन किया गया स्नान व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता को दूर करता है और उसे पुण्य की ओर अग्रसर करता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष गंगा दशहरा की दशमी तिथि 25 मई की सुबह से प्रारंभ होकर अगले दिन तक प्रभाव में रहेगी, लेकिन उदयातिथि के अनुसार पर्व 25 मई को ही मनाया जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त को स्नान, पूजा और दान के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु इन समयों में धार्मिक क्रियाओं को विशेष महत्व देते हैं ताकि अधिकतम आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया जा सके। गंगा दशहरा का एक महत्वपूर्ण पहलू दान की परंपरा भी है। इस दिन अन्न, वस्त्र, धन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। परंपरा के अनुसार जरूरतमंदों को सहायता देना और ब्राह्मणों को सम्मानपूर्वक दान देना विशेष फलदायी होता है। साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करना भी इस दिन की धार्मिक भावना का हिस्सा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक हैं। पौराणिक कथा के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए कठोर तप किया था, जिसके परिणामस्वरूप गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं। इस कथा के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि दृढ़ संकल्प और आस्था के बल पर असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। आज के समय में गंगा दशहरा का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और जल शुद्धता का भी संदेश देता है। यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि जल स्रोतों की रक्षा करना और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। कुल मिलाकर गंगा दशहरा 2026 श्रद्धा, शुद्धता और सामाजिक सहयोग का प्रतीक पर्व है, जो लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने के साथ-साथ सेवा और दान की भावना को भी मजबूत करता है। 25 मई का यह दिन उन सभी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखेगा जो गंगा स्नान और पूजा के माध्यम से अपने जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता की कामना करते हैं।

शुक्रवार का व्रत दूर करता है कई दोष, सही समय पर शुरुआत से मिलता है विशेष फल

नई दिल्ली। सनातन धर्म में शुक्रवार का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन धन और ऐश्वर्य की देवी शुक्रवार व्रत तथा मां संतोषी की पूजा के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से जीवन में आर्थिक उन्नति, वैवाहिक सुख और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही शुक्र ग्रह से जुड़े दोष भी कम होते हैं। कब शुरू करें शुक्रवार व्रत?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार से शुरू करना शुभ माना जाता है। सामान्यतः यह व्रत लगातार 16 शुक्रवार तक रखा जाता है, जिसके बाद विधिपूर्वक उद्यापन किया जाता है। शुक्रवार व्रत की पूजा विधसुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद लाल वस्त्र बिछाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं और फूल, अक्षत, चंदन, कुमकुम तथा मिठाई अर्पित करें। पूजा के दौरान ये मंत्र विशेष फलदायी माने जाते हैं-“ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”“विष्णुप्रियाय नमः”इसके साथ ‘श्री सूक्त’ और ‘कनकधारा स्तोत्र’ का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। संतोषी माता व्रत में रखें ये सावधानीयदि आप मां संतोषी का व्रत रखते हैं तो खट्टी चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। व्रत के दौरान मीठे भोजन जैसे खीर-पूरी का सेवन किया जा सकता है। घर में तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से भी परहेज करना चाहिए। क्या मिलता है शुक्रवार व्रत का फलमान्यता है कि नियमित रूप से शुक्रवार व्रत करने पर- धन संबंधी समस्याएं दूर होती हैंवैवाहिक जीवन में मधुरता आती हैशुक्र ग्रह मजबूत होता हैघर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती हैमनोकामनाओं की पूर्ति होती हैगरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या दान देने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

Santoshi Mata Vrat: शुक्रवार को ऐसे रखें संतोषी माता का व्रत, जानें नियम और महत्व

नई दिल्ली। सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन मां संतोषी की आराधना के लिए विशेष माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन और श्रद्धा के साथ मां संतोषी का व्रत रखते हैं, उनके जीवन से दुख, दरिद्रता और परेशानियां दूर हो जाती हैं। मां संतोषी को संतोष, धैर्य और प्रेम की देवी माना जाता है। कहा जाता है कि उनकी कृपा से घर में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि बनी रहती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां संतोषी भगवान गणेश की पुत्री हैं। शुक्रवार के दिन उनका व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है। खास बात यह है कि इस व्रत में खट्टी चीजों का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। भक्त माता को गुड़, चना, केला और सफेद मिठाई का भोग लगाते हैं। कैसे करें संतोषी माता की पूजा?व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां संतोषी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। माता को फूलों की माला अर्पित करें और सिंदूर, हल्दी तथा अक्षत चढ़ाएं। इसके बाद कलश स्थापना करें। कलश में जल भरकर आम के पत्ते रखें और उसके पास घी का दीपक जलाएं। पूजा में अगरबत्ती और धूप का प्रयोग करें। माता को गुड़ और भुने हुए चने का भोग लगाएं। पूजा के दौरान संतोषी माता की कथा सुनना या पढ़ना बेहद शुभ माना जाता है। अंत में माता की आरती करें और प्रसाद सभी में बांटें। व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यानसंतोषी माता के व्रत में खट्टी चीजें खाना पूरी तरह निषिद्ध माना गया है। व्रती को दिनभर संयम और शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। कई लोग इस व्रत में केवल एक समय भोजन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि लगातार 16 शुक्रवार तक यह व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। क्या है इस व्रत का महत्वमान्यता है कि मां संतोषी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है, वहीं नौकरी और कारोबार में भी सफलता मिलने की मान्यता है। छात्र-छात्राओं के लिए भी यह व्रत शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे शिक्षा और परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार मां संतोषी अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करती हैं और जीवन में संतोष का भाव बनाए रखती हैं। इसलिए शुक्रवार का यह व्रत आस्था और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय: शुक्रवार को जरूर करें इन वस्तुओं का दान

नई दिल्ली। सनातन धर्म में शुक्रवार का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन धन, वैभव और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी पूजा को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार के दिन पूजा-पाठ, व्रत और दान करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। खासतौर पर शुक्र ग्रह को मजबूत करने और वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर करने के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। शुक्रवार को करें इन चीजों का दान- श्रृंगार सामग्री का दाशुक्रवार के दिन सुहागिन महिलाओं को चूड़ियां, सिंदूर, कुमकुम, साड़ी और अन्य श्रृंगार सामग्री दान करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-संपत्ति का वास होता है। सफेद वस्त्र दान करेंधार्मिक मान्यता के अनुसार जरूरतमंद या विधवा महिलाओं को सफेद कपड़े दान करने से सौभाग्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। नमक का दानशुक्रवार को नमक दान करना शुक्र ग्रह से जुड़े दोषों को कम करने वाला माना गया है। कहा जाता है कि इससे आर्थिक संकट और पारिवारिक तनाव कम होते हैं। पुराने जूते और किताबेंगरीब और जरूरतमंद लोगों को पुराने जूते या किताबें दान करने से रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं और बिगड़ी किस्मत भी संवर सकती है। रेशमी वस्त्र और चादरेंरेशमी कपड़े, चादरें या उपयोगी वस्त्र दान करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। शुक्रवार को क्या न करें?घर में रद्दी और खराब कागज जमा करके न रखेंतामसिक भोजन और नकारात्मक सोच से बचेंकिसी का अपमान या झूठ बोलने से परहेज करेंमां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपायशाम को घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएंकमल के फूल से मां लक्ष्मी की पूजा करें“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करेंगरीबों को भोजन और सफेद मिठाई का दान करें मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से किए गए शुक्रवार के उपाय व्यक्ति के जीवन में धन, सुख और समृद्धि के नए रास्ते खोलते हैं।

15 मई 2026 राशिफल: धन, करियर और प्रेम जीवन में क्या कहते हैं सितारे? पढ़ें सभी राशियों का हाल

नई दिल्ली। ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास से जानें ग्रहों की चाल का आपके करियर, वित्त और सेहत पर प्रभाव. पढ़ें 15 मई 2026 का सटीक राशिफल और पंचांग.मेष राशि आज का दिन ऊर्जा से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी। परिवार में किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है, इसलिए वाणी पर संयम रखें। धन लाभ के योग बन रहे हैं। वृषभ राशिआर्थिक मामलों में सावधानी बरतें। निवेश सोच-समझकर करें। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। मिथुन राशिआज पुराने रुके काम पूरे होने के संकेत हैं। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल रहेगा। दोस्तों के साथ अच्छा समय बितेगा। यात्रा के योग बन सकते हैं। कर्क राशिभावनात्मक फैसले लेने से बचें। परिवार में किसी सदस्य की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। कार्यक्षेत्र में धैर्य बनाए रखें। शाम तक राहत मिलेगी। सिंह राशिकरियर में सफलता के संकेत हैं। अधिकारियों से सहयोग मिलेगा। व्यापार में लाभ हो सकता है। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। कन्या राशिआज खर्च बढ़ सकते हैं। सेहत का ध्यान रखें और खानपान में लापरवाही न करें। किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। तुला राशिनया काम शुरू करने के लिए दिन शुभ है। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कोर्ट-कचहरी के मामलों में राहत मिल सकती है। वृश्चिक राशिआज आपकी वाहन खरीदने की इच्छा पूरी हो सकती है। नौकरी और व्यापार दोनों में लाभ के संकेत हैं। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा। निवेश के लिए समय अच्छा है। धनु राशिधनु राशि वालों को आज बड़ी राहत मिल सकती है। पुराने कर्ज से मुक्ति मिलने के योग हैं। रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। करियर में नई संभावनाएं बनेंगी। मकर राशिकाम का दबाव बढ़ सकता है, लेकिन मेहनत का फायदा मिलेगा। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह लाभदायक रहेगी। कुंभ राशिआज का दिन सामान्य रहेगा। किसी नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकते हैं। छात्रों को सफलता मिलने के संकेत हैं। मानसिक तनाव कम होगा। मीन राशिधार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। यात्रा के योग बन रहे हैं। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी।

Char Dham yatra: बारिश और ओलावृष्टि के बीच चार धाम यात्रा: आस्था का सफर बना चुनौती, यात्रियों के लिए जारी हुए अहम सुरक्षा संकेत

Char Dham yatra: नई दिल्ली ।  उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में इन दिनों मौसम ने करवट ले ली है और लगातार हो रही भारी बारिश तथा ओलावृष्टि ने चार धाम यात्रा को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। यह यात्रा, जो आस्था और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है, अब यात्रियों के लिए सावधानी और तैयारी की परीक्षा बन गई है। पहाड़ी इलाकों में बदलते मौसम ने यात्रा मार्गों पर जोखिम बढ़ा दिया है और प्रशासन लगातार यात्रियों को सतर्क रहने की अपील कर रहा है। चार धाम यात्रा का मार्ग अपने आप में कठिन माना जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में यह और भी संवेदनशील हो जाता है। कई जगहों पर भूस्खलन, सड़क फिसलन और अचानक रास्ता बंद होने जैसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे हालात में बिना तैयारी यात्रा करना खतरनाक साबित हो सकता है और किसी भी समय अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न हो सकती है। यात्रा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात मौसम की लगातार निगरानी रखना है। पहाड़ों में मौसम बहुत तेजी से बदलता है, जहां कुछ ही घंटों में साफ आसमान अचानक घने बादलों और तेज बारिश में बदल सकता है। इस कारण यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले और यात्रा के दौरान मौसम के अपडेट पर ध्यान देना जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में खराब मौसम या चेतावनी जैसी स्थिति बनी हो तो यात्रा को कुछ समय के लिए रोक देना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। चार धाम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए समय प्रबंधन भी बेहद जरूरी भूमिका निभाता है। सुबह के समय यात्रा शुरू करना अधिक सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि दिन के शुरुआती हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। वहीं शाम के समय पहाड़ी क्षेत्रों में धुंध और बारिश का असर बढ़ जाता है, जिससे दृश्यता कम हो जाती है और दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा दिन के उजाले में ही पूरी करने की कोशिश करें। यात्रा के दौरान हल्का और आवश्यक सामान ही साथ रखना समझदारी भरा कदम है। भारी बैग और अनावश्यक वस्तुएं पहाड़ी रास्तों पर चलने में कठिनाई पैदा कर सकती हैं। बारिश से बचाव के लिए रेनकोट और वाटरप्रूफ कपड़े, साथ ही मजबूत पकड़ वाले जूते यात्रा का हिस्सा होना चाहिए। विशेष रूप से ट्रैकिंग मार्गों पर फिसलन का खतरा अधिक होता है, इसलिए सही जूते और सावधानी बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य सुरक्षा भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड और कम ऑक्सीजन के कारण थकान, सांस लेने में कठिनाई और कमजोरी जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। बुजुर्गों और बच्चों को इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। जिन लोगों को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें यात्रा से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। इसके साथ ही यात्रियों को यह भी समझना होगा कि मौसम खराब होने पर धैर्य रखना और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना सबसे सुरक्षित विकल्प है। कई बार यात्रा को रोकना या मार्ग बदलना असुविधाजनक हो सकता है, लेकिन यह निर्णय जीवन सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। कुल मिलाकर कहा जाए तो चार धाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का मार्ग नहीं बल्कि प्रकृति की कठिन परिस्थितियों में धैर्य, तैयारी और सावधानी की परीक्षा भी है। सही योजना, सतर्कता और मौसम के प्रति जागरूकता इस पवित्र यात्रा को सुरक्षित और सफल बनाने की सबसे बड़ी कुंजी है।

शुक्रवार व्रत स्पेशल: संतोषी माता को प्रसन्न करने के लिए जानें पूजा विधि और कथा का महत्व

नई दिल्ली। सनातन धर्म में शुक्रवार का दिन मां संतोषी की आराधना के लिए विशेष माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन और श्रद्धा के साथ मां संतोषी का व्रत रखते हैं, उनके जीवन से दुख, दरिद्रता और परेशानियां दूर हो जाती हैं। मां संतोषी को संतोष, धैर्य और प्रेम की देवी माना जाता है। कहा जाता है कि उनकी कृपा से घर में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि बनी रहती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां संतोषी भगवान गणेश की पुत्री हैं। शुक्रवार के दिन उनका व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है। खास बात यह है कि इस व्रत में खट्टी चीजों का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। भक्त माता को गुड़, चना, केला और सफेद मिठाई का भोग लगाते हैं। कैसे करें संतोषी माता की पूजा?व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां संतोषी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। माता को फूलों की माला अर्पित करें और सिंदूर, हल्दी तथा अक्षत चढ़ाएं। इसके बाद कलश स्थापना करें। कलश में जल भरकर आम के पत्ते रखें और उसके पास घी का दीपक जलाएं। पूजा में अगरबत्ती और धूप का प्रयोग करें। माता को गुड़ और भुने हुए चने का भोग लगाएं। पूजा के दौरान संतोषी माता की कथा सुनना या पढ़ना बेहद शुभ माना जाता है। अंत में माता की आरती करें और प्रसाद सभी में बांटें। व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यानसंतोषी माता के व्रत में खट्टी चीजें खाना पूरी तरह निषिद्ध माना गया है। व्रती को दिनभर संयम और शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। कई लोग इस व्रत में केवल एक समय भोजन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि लगातार 16 शुक्रवार तक यह व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। क्या है इस व्रत का महत्व?मान्यता है कि मां संतोषी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है, वहीं नौकरी और कारोबार में भी सफलता मिलने की मान्यता है। छात्र-छात्राओं के लिए भी यह व्रत शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे शिक्षा और परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार मां संतोषी अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करती हैं और जीवन में संतोष का भाव बनाए रखती हैं। इसलिए शुक्रवार का यह व्रत आस्था और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।