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Bihar Assembly Elections में मोर्चा संभालेंगे MP के सीएम, डॉ. मोहन यादव को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी

CM Mohan Yadav

Bihar Assembly Elections: भोपाल। बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) की घोषणा के बाद सियासी घमासान शुरू हो चुका है। तमाम राजनीतिक दलों ने प्रत्याशी चयन और प्रचार अभियान की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार चुनावी रण में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी भाजपा की तरफ से दमखम दिखाते नजर आएंगे। पार्टी ने उन्हें बिहार की यादव बाहुल्य सीटों की विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। दीपावली के बाद बिहार में कई सभाएं (Bihar Assembly Elections) सीएम डॉ. मोहन यादव 17 अक्टूबर को बिहार दौरे पर जा सकते हैं, जबकि दीपावली के बाद वे राज्य में जनसभाएं और रोड शो करेंगे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जल्द ही केंद्र से उनके दौरे का शेड्यूल जारी किया जाएगा। बता दें कि डॉ. यादव इससे पहले 14 सितंबर को बिहार में यादव समाज के एक बड़े कार्यक्रम में भी शामिल हो चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला था कि पार्टी उन्हें यादव वोटबैंक को साधने के लिए आगे कर सकती है। इसके अलावा प्रदेश के अन्य मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को भी बिहार की विभिन्न विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी जाएगी । READ MORE: अम्बेडकर समर्थकों का हल्ला बोल! अनिल मिश्रा के बयान से भड़की आग में घिरा ग्वालियर

Gwalior News: अम्बेडकर समर्थकों का हल्ला बोल! अनिल मिश्रा के बयान से भड़की आग में घिरा ग्वालियर

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Gwalior News: ग्वालियर। ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर उठे विवाद ने अब गहरी जातीय खाई का रूप ले लिया है। विवाद उस समय और तेज हो गया जब हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए विवादित बयान के बाद अम्बेडकर समर्थकों और सवर्ण संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। 15 अक्टूबर को प्रस्तावित उग्र प्रदर्शन और कथित तौर पर अनिल मिश्रा के घर पर जूते फेंकने के आह्वान को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करते हुए जिले में धरना, प्रदर्शन, रैली और जुलूस पर आगामी दो महीनों तक रोक लगा दी है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर जाति या समुदाय के खिलाफ भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने पर भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जानिए पूरा मामला प्रशासन की सख्ती के बावजूद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों से बड़े पैमाने पर भीड़ जुटाने की कॉल की जा रही है। जहां अंबेडकर समर्थक संगठनों ने मिश्रा के घर के बाहर प्रदर्शन की चेतावनी दी है, वहीं सवर्ण संगठनों ने इसका ‘जूते से जवाब’ देने की बात कही है। इससे ग्वालियर और आसपास के इलाकों में जातीय तनाव और हिंसा की आशंका बढ़ गई है। विवाद की जड़ में एडवोकेट अनिल मिश्रा का वह बयान है, जिसमें उन्होंने डॉ. अंबेडकर को ‘अंग्रेजों का एजेंट’ कहा था। इस बयान के खिलाफ ग्वालियर और महाराष्ट्र सहित कई स्थानों पर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है। वहीं मिश्रा के समर्थन में वकीलों और सवर्ण संगठनों ने देशभर में विरोध प्रदर्शन कर FIR को रद्द करने की मांग उठाई है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन ने ग्वालियर में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया है। अधिकारियों ने शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि कानून हाथ में लेने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी, और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी (Gwalior News)। READ MORE: 13.46 लाख लाभार्थियों को 2,078 करोड़ का ऋण, प्रदेश देश में नंबर वन