अरावली पहाड़ियों में खनन पर अदालत और सरकार

कैलाश चन्द्र । भारत की अरावली पर्वतमाला उत्तर और पश्चिम भारत की पारिस्थितिक सुरक्षा प्रणाली की रीढ़ है। दिल्ली से लेकर गुजरात तक फैली यह प्राचीन पर्वत शृंखला भारत की सबसे पुरानी भूवैज्ञानि संरचनाओं में से एक होने के साथ ही यह मरुस्थलीकरण को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार भूजल पुनर्भरण का अहम क्षेत्र और जैव विविधता का महत्वपूर्ण आश्रय भी है। ऐसे में हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ यूट्यूब चैनलों पर यह दावा किया जाना कि सरकार ने अरावली में खनन और निर्माण के लिए ढील दे दी है स्वाभाविक रूप से चिंता पैदा करता है और इससे जुड़ा सच जानने के लिए प्रेरित करता है। इसी संदर्भ में केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना पड़ा है। उन्होंने इन आरोपों को भ्रामक और तथ्यों से परे बताया। वास्तव में इस पूरे विवाद को समझने के लिए तीन बुनियादी पहलुओं को स्पष्ट रूप से देखना आवश्यक है; अरावली का भौगोलिक और पारिस्थितिक महत्व सुप्रीम कोर्ट के पुराने और नए आदेश तथा सरकार की वर्तमान संरक्षण नीति। हम यदि गहराई से देखें तब अरावली पर्वतमाला दिल्ली हरियाणा राजस्थान और गुजरात के 39 जिलों में फैली हुई दिखाई देती है। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए यह ‘ग्रीन लंग्स’ की तरह काम करती है। यही पहाड़ियाँ थार मरुस्थल को उत्तर और पूर्व की ओर बढ़ने से रोकती हैं। वर्षा जल को रोककर यह भूजल को रिचार्ज करती हैं। हवा के बहाव को नियंत्रित करती हैं और प्रदूषण के स्तर को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। एनसीआर की जलवायु वायु गुणवत्ता और जल सुरक्षा सीधे-सीधे अरावली की स्थिति से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि दशकों से अरावली क्षेत्र में खनन और निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण और कई जगहों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए गए हैं। अरावली में अवैध खनन और पर्यावरणीय क्षति को लेकर 1980 के दशक से ही जनहित याचिकाएँ दाखिल होती रही हैं। इन याचिकाओं के परिणामस्वरूप उच्चतम न्यायालय ने कई ऐतिहासिक आदेश दिए। वर्ष 2009 में उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा के फरीदाबाद गुरुग्राम और नूंह जिलों की अरावली पहाड़ियों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। यह प्रतिबंध आज भी प्रभावी है। इसके बाद न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक मैपिंग और पर्यावरण प्रभाव अध्ययन ईआईए के बिना अरावली क्षेत्र में किसी भी नई खनन गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती। पहले वैज्ञानिक सर्वे फिर पर्यावरणीय योजना और उसके बाद ही किसी प्रकार की अनुमति यह सिद्धांत स्थापित किया गया। इसमें भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ये रोकें अस्थायी नहीं बल्कि दीर्घकालिक और कई मामलों में स्थायी हैं। आम धारणा के विपरीत हर साल नई-नई रोकें नहीं लगतीं किंतु एक बार सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद वह वर्षों तक लागू रहता है। वर्ष 2025 में उच्चतम न्यायालय ने अरावली को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया। अदालत ने सभी राज्यों से अरावली की एक समान वैज्ञानिक और लागू करने योग्य परिभाषा तैयार करने को कहा और केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को स्वीकार किया। यहीं से भ्रम की शुरुआत हुई। कुछ लोगों ने यह प्रचारित किया कि अब केवल पहाड़ी की चोटी से 100 मीटर ऊपर तक ही संरक्षण रहेगा और उसके नीचे खनन की छूट मिल जाएगी। निश्चित ही ये दावा अधूरा और पूरी तरह भ्रामक है। विशेषज्ञ समिति द्वारा सुझाया गया 100 मीटर मानदंड पहाड़ी की ऊँचाई को स्थानीय राहत के संदर्भ में परिभाषित करता है। इसका अर्थ यह है कि पहाड़ी का आधार यदि जमीन के भीतर 20 मीटर नीचे तक फैला है तो संरक्षण की गणना वहीं से होगी। यानी चट्टान की पूरी मोटाई उसकी ढलानें और उससे जुड़ी घाटियां भी संरक्षण के दायरे में आती हैं। दूसरे शब्दों में यह नियम खनन को छूट देने के लिए नहीं है उक्त संदर्भ में यह स्पष्ट करने के लिए है कि अरावली वास्तव में कहाँ तक फैली है। जबकि इससे पहले विभिन्न राज्यों में अलग-अलग परिभाषाओं के कारण भ्रम और दुरुपयोग की गुंजाइश बनी रहती थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार नई वैज्ञानिक परिभाषा के बाद अरावली क्षेत्र लगभग 1.44 से 1.47 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ माना गया है। इसमें से करीब 90 प्रतिशत हिस्सा सीधे-सीधे संरक्षित श्रेणी में आता है। केवल 0.2 से 2 प्रतिशत तक का हिस्सा ही सैद्धांतिक रूप से खनन के लिए संभावित माना जा सकता है। किंतु यह संभावित शब्द भी महत्वपूर्ण है। इस छोटे से हिस्से में भी खनन तभी संभव है जब विस्तृत माइनिंग प्लान बने। वैज्ञानिक अध्ययन हो। पर्यावरणीय मंजूरी मिले और इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन आईसीएफआरई से अनुमोदन प्राप्त हो। व्यावहारिक रूप से यह छूट लगभग नगण्य है। दिल्ली की पूरी अरावली में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध है और भविष्य में भी यहां किसी प्रकार की माइनिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। एनसीआर के संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण परियोजनाओं पर भी सख्त नियंत्रण रहेगा। जहां किसी क्षेत्र को लेकर संदेह होगा उसे तब तक अरावली माना जाएगा जब तक वैज्ञानिक सर्वे कुछ और सिद्ध न कर दे। यह प्रावधान संरक्षण नीति को और अधिक कठोर बनाता है। ध्यातव्य हो कि मई 2024 में न्यायालय ने विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाए जा रहे असंगत मानदंडों को देखते हुए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति में पर्यावरण मंत्रालय चारों राज्यों के वन विभाग भारतीय वन सर्वेक्षण भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति के प्रतिनिधि शामिल रहे। समिति का उद्देश्य था अरावली की एक समान वैज्ञानिक और कानूनी रूप से मजबूत परिभाषा तैयार करना। इसकी सिफारिशों को 20 नवंबर 2025 के अंतिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करते हुए पूरे अरावली क्षेत्र के लिए एक सस्टेनेबल माइनिंग मैनेजमेंट प्लान बनने तक सभी नई खनन लीज पर रोक लगा दी है। दूसरी ओर सरकार ग्रीन अरावली अभियान के तहत 39 जिलों में वनीकरण जल संरक्षण और स्थानीय प्रजातियों की नर्सरी विकसित कर रही है। ड्रोन सर्विलांस सीसीटीवी ई-चालान हाईटेक वेइंग ब्रिज और जिला स्तरीय टास्क फोर्स के जरिए अवैध खनन पर निगरानी रखी जा रही है। कुल मिलाकर यदि हम सार रूप में कहें तो अरावली को लेकर ढील या छूट की खबरें तथ्यात्मक नहीं हैं यह बहुत भ्रामक हैं। न्यायालय के आदेशों
MP NEWS : मध्यप्रदेश में सड़क परिवहन को मिली नई रफ्तार, डिजिटल सेवाओं और टैक्स छूट से जनता को बड़ी राहत

MP NEWS : मध्यप्रदेश। पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में सड़क परिवहन व्यवस्था ने नई रफ्तार पकड़ी है। परिवहन विभाग के कार्यों को लेकर मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि सरकार का लक्ष्य आम जनता को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जनवरी से सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का लाभ सीधे आम नागरिकों को मिलेगा, जिससे सफर और अधिक सुविधाजनक होगा। MP NEWS : युवक ने प्रेमिका को मारी गोली, फिर खुद की ली जान सूचना के मुताबिक परिवहन विभाग ने वाहन और सारथी पोर्टल के माध्यम से कई सेवाएं ऑनलाइन की हैं। अब ई-ड्राइविंग लाइसेंस की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे दस्तावेज डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेंगे। साथ ही एमपी ऑनलाइन सेंटर्स को सुविधा केंद्र के रूप में मान्यता देकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाई गई है। WEATHER UPDATE: घने कोहरे की चपेट में MP का उत्तरी हिस्सा, 20 जिलों में ऑरेंज–येलो अलर्ट बसों के परमिट के लिए परिवहन प्राधिकार का गठन किया गया है, वहीं इलेक्ट्रॉनिक वाहनों पर टैक्स में पूरी छूट दी जा रही है। पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर भी टैक्स में राहत मिल रही है। इसके साथ ही ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सतना, सिंगरौली, उज्जैन और देवास में ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिससे वाहन जांच व्यवस्था और अधिक पारदर्शी बनी है CM Mohan Yadav ने एक क्लिक में 3 लाख से ज्यादा किसानों के खाते में डाले 238.78 करोड़ रीवा में ट्रक ड्राइवर और दलाल के वायरल वीडियो पर क्या बोले परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह रीवा में ट्रक ड्राइवर और दलाल के वायरल वीडियो को लेकर परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि अवैध वसूली को परिवहन विभाग कभी भी प्रोत्साहित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई शिकायत सामने आती है, उसकी जांच स्थानीय कलेक्टर और एसपी के माध्यम से कराई जाती है और पिछले दो वर्षों में करीब 6 फीसदी कर्मचारियों पर कार्रवाई भी की गई है। मंत्री ने यह भी कहा कि कई बार विभाग पर दबाव बनाने के उद्देश्य से वीडियो बनाए जाते हैं, लेकिन परिवहन विभाग ऐसे किसी दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में चेकपोस्ट बंद कर दिए गए हैं, हालांकि चलित चेकिंग की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। आरटीओ दफ्तरों में दलालों की सक्रियता के सवाल पर मंत्री ने कहा कि विभाग ने अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन कर दी हैं, कुछ आधिकारिक संस्थाएं भी कार्य कर रही हैं, लेकिन कई बार लोग जल्दबाजी में स्वयं दलालों की मदद ले लेते हैं।
SIDHI NEWS: किसी के बस में नहीं रेत माफिया! अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर ने मासूम की ली जान

SIDHI NEWS: मध्यप्रेदश। सीधी जिले में रेत माफिया का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मड़वास थाना क्षेत्र के टिकरी चौकी अंतर्गत गोपद नदी से अवैध रेत उत्खनन कर लौट रहे एक ट्रैक्टर ने मासूम बच्चे को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। GWALIOR RAPE CASE: ग्वालियर में रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला: 13 साल की नाबालिग से दुष्कर्म घटना के समय तीन ट्रैक्टर गोपद नदी से अवैध रेत लेकर जा रहे थे। जहां नदी से करीब आधा किलोमीटर दूर रास्ते में बच्चे का शव पड़ा मिला। हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर जमकर हंगामा किया। GWALIOR NEWS: जानलेवा लापरवाही; गलत इंजेक्शन से बच्चे की मौत, तीन अन्य बीमार सूचना मिलते ही टिकरी चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय रेत माफिया रातभर गोपद नदी से अवैध उत्खनन और परिवहन करते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। फिलहाल पुलिस ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रही है और पूरे मामले की तहकीकात जारी है।
Cold Wave in MP:चंबल-ग्वालियर संभाग सबसे ज्यादा ठंडे, बर्फीली हवाओं से बढ़ी परेशानी

Cold Wave in MP: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में सर्दी ने जोर पकड़ लिया है। सोमवार सुबह प्रदेश के कई जिलों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ। साथ ही दतिया और रीवा में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे, जहां विजिबिलिटी घटकर सिर्फ 50 मीटर रह गई। ग्वालियर, जबलपुर, खजुराहो और सतना में दृश्यता 50 से 200 मीटर के बीच दर्ज की गई। उमरिया में विजिबिलिटी 500 से 1000 मीटर, नौगांव, सागर और दमोह में 200 से 500 मीटर रही। वहीं भोपाल और मंडला में दृश्यता 1 से 2 किलोमीटर तक रिकॉर्ड की गई। प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में लगातार गिरावट देखी जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ग्वालियर में 11.3 डिग्री, उज्जैन में 11.4 डिग्री और जबलपुर में पारा 9 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा रीवा में 5.6 डिग्री, राजगढ़ और खजुराहो में 7 डिग्री, मलाजखंड में 7.4 डिग्री, बैतूल में 7.5 डिग्री और नौगांव में 7.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। GOVERNMENT JOB VACANCY : मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूती, 474 पदों पर सीधी भर्ती खंडवा और सतना में न्यूनतम तापमान 8 डिग्री, मंडला में 8.2 डिग्री, नरसिंहपुर, खरगोन और उमरिया में 8.4 डिग्री, दमोह में 8.5 डिग्री, रायसेन में 8.8 डिग्री, सागर में 8.9 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री और दतिया में 9.5 डिग्री सेल्सियस रहा। ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। यहां बर्फीली हवाओं के साथ कोहरे का असर ज्यादा देखा जा रहा है। सागर और रीवा संभाग भी ठंड से प्रभावित हैं। भोपाल संभाग के सीहोर, रायसेन, राजगढ़ और विदिशा में ठंड का जोर है। राजगढ़ में पारा 4 डिग्री तक पहुंच चुका है। सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना और रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में भी तेज ठंड का असर है। जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडौरी और इंदौर संभाग के इंदौर, धार व झाबुआ में भी सर्दी बढ़ गई है। MP WEATHER UPDATE: चंबल संभाग में कोहरे का कहर, 22 जिलों में अलर्ट कोहरे की एडवाइजरी जारी लगातार कोहरे को देखते हुए मौसम विभाग ने ट्रैवल, हेल्थ और कृषि को लेकर एडवाइजरी जारी की है। ट्रैवल: कम विजिबिलिटी में अनावश्यक यात्रा से बचें। जरूरी हो तो फॉग लैंप और लो बीम हेडलाइट का उपयोग करें, वाहन धीमी गति से चलाएं। हेल्थ: तेज ठंड में सिर, गर्दन, हाथ-पैर ढककर रखें। सर्दी-खांसी होने पर डॉक्टर से सलाह लें। विटामिन-C युक्त फल-सब्जियां खाएं। कोहरे के कारण सांस की दिक्कत से बचने के लिए मास्क पहनें और गर्म कपड़े पहनें। कृषि: लंबे समय तक कोहरे से फसलों में नमी बढ़ने और रोग का खतरा रहता है। फसल और पशुओं की देखभाल करें। टमाटर, मिर्च, फूलगोभी और सरसों पर विशेष ध्यान दें।