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ASHOKNAGAR CRIMES : चाय के पैसे मांगने पर दुकानदार से बेरहमी से मारपीट, चार आरोपी गिरफ्तार

ASHOKNAGAR CRIMES

ASHOKNAGAR CRIMES : मध्यप्रदेश। अशोकनगर शहर में चाय के पैसे मांगना एक दुकानदार को भारी पड़ गया। कोतवाली थाना क्षेत्र में कुछ दबंगों ने चाय दुकान संचालक के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसमें दुकानदार गंभीर रूप से घायल हो गया। बता दें कि घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। MORENA ACCIDENT : कोचिंग से घर लौटते वक्त छात्र की मौत, ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचला लाठी-डंडों से जमकर पीटा पीड़ित दुकानदार की पहचान राज बहादुर सिंह यादव (55 वर्ष) के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी दिनभर दुकान पर चाय और सिगरेट पीते रहे। जब दुकानदार ने उनसे पैसे मांगे, तो विवाद शुरू हो गया। इसके बाद रात में आरोपी अपने साथियों के साथ दुकानदार की दुकान और घर में घुस आए और लाठी-डंडों व लात-घूंसों से जमकर मारपीट की। घायल को लगी गंभीर चोटें सूचना की माने तो हमले में दुकानदार को आंख, हाथ और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। घटने के बाद घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उसका इलाज जारी है। MORENA NEWS : तेज रफ्तार ट्रक ने मारी कॉलेज बस को टक्कर, 25 छात्र घायल जांच में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, यह घटना मंडी रोड, स्वराज एजेंसी के पास सेंट्रल बैंक के सामने हुई। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

स्क्रीन के उजाले में बुझती युवा संवेदनाएं

– डॉ. संध्‍या एस चौकसे आज का भारत युवाओं का भारत है। यही युवा देश की रीढ़ हैं और भविष्य की नींव भी, किंतु विडंबना यह है कि जिन हाथों में कलम किताबें औजार और रचनात्मकता होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में आज हर पल एक चमकती हुई स्क्रीन दिखाई देती है। मोबाइल फोन! जिसने दुनिया को हमारी मुट्ठी में समेट दिया, वही अब हमारी संवेदनाओं संबंधों और संतुलन को चुपचाप निगलता जा रहा है। ऐसे में आज मोबाइल आधुनिकता का प्रतीक भर नहीं रहा है, वह घटती मानवीय संवेदनशीलता का सबसे स्पष्ट चेहरा बन चुका है। डिजिटल क्रांति ने शिक्षा संचार और सूचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व अवसर दिए हैं। इसमें कोई संदेह नहीं। परंतु जब उपयोग की सीमा टूटती है तब वही साधन विनाश का कारण बन जाता है। भारत में आज युवा वर्ग मोबाइल लत का सबसे बड़ा शिकार है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार भारत में लगभग 50 प्रतिशत युवा किसी न किसी रूप में मोबाइल पर निर्भरता या लत के लक्षण दिखा रहे हैं। विश्व स्तर पर लगभग 6.9 प्रतिशत आबादी स्मार्टफोन लत से ग्रस्त मानी जाती है जिसमें भारतीय युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ये आंकड़े आज उस गहरी सामाजिक समस्या की चेतावनी हैं जो हमारे सामने खड़ी है। हाल के वर्षों में मोबाइल से जुड़ी हिंसक और आत्मघाती घटनाएँ समाज को झकझोरने वाली हैं। ओडिशा के जगतसिंहपुर में 21 वर्षीय छात्र द्वारा मोबाइल देखने से रोके जाने पर अपने माता-पिता और बहन की हत्या कर देना। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में किशोर का अपने माता-पिता पिता द्वारा हर वक्त मोबाइल में डूबे रहने से मना किए जाने पर लोहे की छड़ से उन पर हमला कर देना, जिसमें कि पिता की जान किसी तरह बच सकी, लेकिन मां की जान चली गई। राजस्थान के जयपुर में तेरह साल की एक बच्ची को उसके माता-पिता ने मोबाइल देखने से मना किया और इससे गुस्साई उस बच्ची ने पहले अपने हाथ की नस काट ली, तो उसके अभिभावकों ने इलाज करा कर उसे बचा लिया। मगर अगले ही दिन उसने नदी में कूद कर जान दे दी। छत्तीसगढ़ और सरगुजा की घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि मोबाइल अब आदत नहीं रहा बल्कि कई युवाओं के लिए भावनात्मक नियंत्रण का केंद्र बन चुका है। जब मोबाइल उनसे दूर होता है तो उन्हें लगता है जैसे उनका अस्तित्व ही छिन गया हो। युवा अवस्था लक्ष्य अनुशासन और निर्माण की होती है। परंतु मोबाइल की अंतहीन दुनिया युवाओं को लक्ष्यहीनता की ओर धकेल रही है। घंटों तक रील्स गेम्स और चैट में उलझे रहना पढ़ाई कौशल विकास और शारीरिक गतिविधियों का समय छीन रहा है। अध्ययनों के अनुसार औसतन भारतीय युवा प्रतिदिन चार से छह घंटे मोबाइल स्क्रीन पर बिताते हैं जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन किशोरों के लिए दो घंटे से अधिक स्क्रीन टाइम को हानिकारक मानता है। इस असंतुलन का परिणाम है एकाग्रता में कमी धैर्य का अभाव और त्वरित आनंद की मानसिकता। मानसिक स्वास्थ्य पर मोबाइल का प्रभाव अत्यंत घातक सिद्ध हो रहा है। सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली तथाकथित परफेक्ट लाइफ की तस्वीरें युवाओं को निरंतर तुलना के जाल में फँसा देती हैं। लाइक और फॉलोअर्स आत्म मूल्यांकन का पैमाना बन जाते हैं। शोध बताते हैं कि जो किशोर प्रतिदिन चार घंटे से अधिक मोबाइल का उपयोग करते हैं उनमें अवसाद के लक्षण 60 प्रतिशत तक अधिक पाए जाते हैं। मोबाइल लत चिंता अवसाद और नींद विकारों की संभावना को दो से तीन गुना तक बढ़ा देती है। अनिद्रा चिड़चिड़ापन और निर्णय लेने में कठिनाई आज सामान्य समस्याएँ बन चुकी हैं। सामाजिक अलगाव इस संकट का दूसरा गंभीर पहलू है। आभासी संवाद ने वास्तविक रिश्तों की जगह ले ली है। एक सर्वे के अनुसार मोबाइल के कारण माता पिता और बच्चों के बीच औसत संवाद समय घटकर मात्र दो मिनट रह गया है। जब परिवार में संवाद टूटता है तो भावनात्मक सुरक्षा भी कमजोर पड़ जाती है। यही कारण है कि मोबाइल लत से ग्रस्त किशोरों में सामाजिक समर्थन की कमी 25 से 30 प्रतिशत अधिक पाई गई है। यह कमी उन्हें आत्मघाती विचारों और आत्म हानि की ओर धकेल सकती है। शारीरिक स्वास्थ्य भी इस डिजिटल लत से अछूता नहीं है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आँखों में जलन सिरदर्द गर्दन और पीठ दर्द आम समस्याएँ बन गई हैं। देर रात तक मोबाइल उपयोग से नींद का चक्र बिगड़ता है जिससे हार्मोनल असंतुलन और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आती है। खेलकूद और शारीरिक श्रम की जगह बैठकर मोबाइल चलाने की आदत मोटापा आलस्य और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को बढ़ावा दे रही है। नैतिक और भावनात्मक स्तर पर मोबाइल का प्रभाव और भी चिंताजनक है। इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध अश्लीलता हिंसा और नकारात्मक सामग्री युवाओं की सोच को प्रभावित कर रही है। बार-बार हिंसक दृश्य देखने से संवेदनशीलता घटती जाती है और दूसरों के दुख दर्द के प्रति सहानुभूति कम होती है। साइबर बुलिंग ट्रोलिंग और नफरत भरे संदेश युवाओं को आक्रामक और असहिष्णु बना रहे हैं। त्वरित संतुष्टि की आदत धैर्य जिम्मेदारी और त्याग जैसे मूल्यों को कमजोर कर रही है। शिक्षा के क्षेत्र में भी मोबाइल दोधारी तलवार बन गया है। एक ओर ऑनलाइन संसाधनों ने सीखने को आसान बनाया है वहीं दूसरी ओर अनियंत्रित उपयोग पढ़ाई में बाधा बन रहा है। नोटिफिकेशन और चैट के बीच गहन अध्ययन संभव नहीं रह जाता। कॉपी पेस्ट संस्कृति मौलिक सोच और विश्लेषण क्षमता को नुकसान पहुँचा रही है। इससे दीर्घकालीन बौद्धिक विकास प्रभावित हो रहा है और युवा शॉर्टकट की मानसिकता के शिकार बनते जा रहे हैं। साइबर अपराध भी युवाओं के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है। फर्जी प्रोफाइल ऑनलाइन ठगी डेटा चोरी और ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाएँ युवाओं को मानसिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुँचा रही हैं। निजी तस्वीरों और जानकारी का दुरुपयोग गोपनीयता के हनन को बढ़ावा दे रहा है। अनुभवहीनता के कारण युवा अक्सर इन जालों में फँस जाते हैं। इस परिस्‍थि‍तियों में ध्‍यान यही आता है कि डिजिटल डिटॉक्स आज समय की आवश्यकता बन चुका है। सप्ताह में कुछ घंटे या एक दिन मोबाइल से दूरी मानसिक शांति और संतुलन प्रदान कर सकती है। स्क्रीन टाइम की स्पष्ट सीमा

GWALIOR CYBER FRAUD : PNB ऐप अपडेट के नाम पर साइबर ठगी, IITTM अधिकारी से 1.72 लाख की ऑनलाइन धोखाधड़ी

GWALIOR CYBER FRAUD

GWALIOR CYBER FRAUD : मध्यप्रदेश। ग्वालियर स्थित भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान (IITTM) में पदस्थ प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. विनय कुमार राय साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) का ऐप अपडेट कराने के बहाने उनके मोबाइल में फर्जी APK फाइल डाउनलोड करवाई, जिससे उनके तीन बैंक खातों से कुल 1 लाख 72 हजार रुपए निकाल लिए गए। SHEOPUR NEWS : श्योपुर एटीएम चोरी की कोशिश: युवक गिरफ्तार, पुलिस ने पकड़ा रंगे हाथ सोशल मीडिया शिकायत के बाद ठगों ने किया संपर्क डॉ. राय के अनुसार PNB One ऐप सही तरीके से काम नहीं कर रहा था। इस समस्या को लेकर उन्होंने बैंक से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट पर शिकायत की थी। इसके कुछ समय बाद उनके मोबाइल पर कॉल आया और खुद को बैंक प्रतिनिधि बताने वाले व्यक्ति ने ऐप अपडेट करने की बात कही। APK फाइल डाउनलोड करते ही खातों से निकले रुपए ठग ने वॉट्सऐप पर एक APK फाइल भेजी, जिसे डॉ. राय ने जल्दबाजी में डाउनलोड कर लिया। फाइल इंस्टॉल होते ही चेतकपुरी और साडा ब्रांच से जुड़े खातों से ट्रांजैक्शन शुरू हो गए। कुछ ही मिनटों में एफडीआर, आरडी और सेविंग अकाउंट से रकम निकल गई। BHIND HONOR KILLING : लवर के साथ भागी बेटी, बदनामी के डर से पिता ने मारी गोली साइबर सेल और थाने में शिकायत घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित ने बैंक से संपर्क कर खाते फ्रीज कराए। इसके बाद साइबर सेल और थाटीपुर थाना पुलिस में मामले की शिकायत दर्ज कराई गई। TRAFFIC JAM MORENA : कैलारस में 3 घंटे जाम, एंबुलेंस फंसी; अतिक्रमण बना कारण APK फाइल से रहें सावधान पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान APK फाइल को न खोलें। ऐसे फाइल के जरिए ठग मोबाइल का एक्सेस लेकर ऑनलाइन ठगी को अंजाम देते हैं।