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Budget 2026: टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, कैंसर दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी हटाई, 3 आयुर्वेदिक AIIMS का ऐलान

नई दिल्ली। संसद के पटल पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना लगातार 9वां बजट पेश किया। 85 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने देश की आर्थिक नींव को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हालांकि, इस बार इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न करके मध्यम वर्ग को थोड़ा निराश जरूर किया है, लेकिन टैक्स फाइलिंग की समय सीमा बढ़ाकर और ‘न्यू इनकम टैक्स एक्ट’ की घोषणा कर भविष्य में प्रक्रिया को सरल बनाने का वादा किया है। 1. स्वास्थ्य क्षेत्र: कैंसर और दुर्लभ बीमारियों का इलाज होगा सस्ताबजट की सबसे मानवीय और बड़ी घोषणा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी है। सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 महत्वपूर्ण दवाओं पर से 5% बेसिक कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटा दिया है। इसके अलावा, हीमोफिलिया और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाएं भी अब ड्यूटी फ्री होंगी। आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए देश में 3 नए आयुर्वेदिक एम्स (AIIMS) खोले जाएंगे, जो भारत को ‘बायो-फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 2. रेलवे और कनेक्टिविटी: 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर का जालबुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार ने रेलवे को नई गति दी है। देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का ऐलान किया गया है। इसमें दिल्ली-वाराणसी और मुंबई-पुणे जैसे रूट शामिल हैं, जो न केवल यात्रा का समय घटाएंगे बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी तेज करेंगे। साथ ही, अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास किया जाएगा, जिससे माल ढुलाई सस्ती और सुगम होगी। 3. रक्षा बजट: आधुनिकीकरण पर ₹2.19 लाख करोड़ का दांवबदलते वैश्विक परिवेश और जियो-पॉलिटिकल चुनौतियों को देखते हुए रक्षा बजट में 15.2% की भारी बढ़ोतरी की गई है। कुल ₹7.85 लाख करोड़ के रक्षा बजट में से ₹2.19 लाख करोड़ सीधे तौर पर सैन्य बलों के आधुनिकीकरण (Modernization) पर खर्च होंगे। इसमें स्वदेशी विमानों के इंजन विकास के लिए ₹64 हजार करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना को साकार करेगा। 4. महिला सशक्तिकरण और शिक्षा: हॉस्टल और SHE-मार्टमहिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘लखपति दीदी’ मॉडल को विस्तार देते हुए SHE-मार्ट (शी-मार्ट) योजना शुरू की गई है। ये स्टोर महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित होंगे, जहाँ वे बिना बिचौलियों के अपने उत्पाद बेच सकेंगी। शिक्षा के क्षेत्र में, हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने और कॉलेजों में ‘कंटेंट क्रिएटर लैब्स’ स्थापित करने का निर्णय युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का प्रयास है। 5. कृषि और लघु उद्योग: चंदन से लेकर काजू-कोको तकखेती को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि मुनाफे का जरिया बनाने के लिए सरकार ने नारियल, चंदन और काजू-कोको उद्योग को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है। ‘मछली पालन’ के लिए 500 नए तालाबों का विकास किया जाएगा। टेक्सटाइल सेक्टर में कारीगरों की मदद के लिए ‘नेशनल हैंडलूम पॉलिसी’ और ‘मेगा टेक्सटाइल पार्क’ के जरिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे।बजट 2026 में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन रिवाइज्ड रिटर्न की तारीख 31 मार्च तक बढ़ाई गई है। कैंसर की 17 दवाएं सस्ती होंगी, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 3 आयुर्वेदिक एम्स बनेंगे। रक्षा बजट को बढ़ाकर ₹7.85 लाख करोड़ किया गया है, जिसमें सैन्य आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।

15 साल की सबसे गर्म शुरुआत: फरवरी की ‘सर्द-गर्म’ से सावधान! इन 7 आसान उपायों से बचें फ्लू और बुखार से

नई दिल्ली। फरवरी का मौसम इस बार बेहद असामान्य है। जनवरी के बाद फरवरी की शुरुआत भी पिछले 15 सालों में सबसे गर्म रिकॉर्ड तोड़ रही है। दिन में तेज धूप और शाम को ठंडी हवा—इस ‘सर्द-गर्म’ के कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है और लोग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि धूप से लौटते ही पंखा/एसी चलाना या तुरंत ठंडा पानी पीना सर्द-गर्म का मुख्य कारण बन सकता है। फ्लू और सर्दी-जुकाम से बचने के लिए साफ-सफाई सबसे बड़ा हथियार है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाथों को साबुन से धोना, खांसते/छींकते समय रुमाल का उपयोग और बार-बार नाक-आंख छूने से बचना जरूरी है। साथ ही घर का बना ताजा भोजन, हल्दी वाला दूध, गुनगुना पानी, और सही पहनावा इस मौसम में सेहत बनाए रखने में मददगार है। बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम में ज्यादा प्रभावित होते हैं। अगर दो दिन से अधिक बुखार, कफ या कमजोरी बनी रहे तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।

फरवरी की 'सर्द-गर्म' से रहें सावधान: 15 सालों में सबसे गर्म शुरुआत, बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स

नई दिल्ली। फरवरी का महीना आते ही प्रकृति करवट बदलने लगती है। इस साल मौसम का मिजाज कुछ ज्यादा ही हैरान करने वाला है; जहाँ जनवरी पिछले छह सालों में सबसे गर्म रहा, वहीं फरवरी की शुरुआत ने भी पिछले 15 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दिन में चुभती धूप और शाम होते ही सर्द हवाओं का यह ‘डबल अटैक’ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पर सीधा हमला करता है। ऐसे में थोड़ी सी भी लापरवाही आपको अस्पताल पहुँचा सकती है। धूप से आकर तुरंत न चलाएं पंखा दोपहर के वक्त बाहर से आने पर अक्सर शरीर का तापमान बढ़ जाता है और हम तुरंत पंखा चला लेते हैं या एसी की तलाश करते हैं। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि ऐसा करना ‘सर्द-गर्म’ का मुख्य कारण बनता है। जब आप बाहर से आएं, तो कम से कम 10-15 मिनट शांति से बैठें ताकि शरीर का तापमान प्राकृतिक रूप से सामान्य हो जाए। इसी तरह, तेज धूप से लौटकर तुरंत ठंडा पानी पीना गले के संक्रमण और तेज बुखार को न्योता देना है। साफ-सफाई: फ्लू से बचने का सबसे बड़ा हथियार बदलते मौसम में वायरस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण से बचने के लिए हाथों की स्वच्छता (Hand Hygiene) सबसे महत्वपूर्ण है। अपनी हथेलियों, उंगलियों और नाखूनों को नियमित रूप से साबुन से धोएं। खांसते या छींकते समय रुमाल का प्रयोग करें और हाथों से बार-बार नाक या आंखों को छूने से बचें। सेहत बनाए रखने के अचूक उपाय: इस संक्रमण काल में खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपनी दिनचर्या में ये छोटे बदलाव जरूर करें:बाहर के खुले या जंक फूड से परहेज करें और घर का बना ताजा भोजन ही लें।रात को सोने से पहले एक गिलास हल्दी वाला दूध पिएं, यह प्राकृतिक एंटीबायोटिक का काम करता है।कफ या गले में खराश महसूस होने पर केवल गुनगुना पानी ही पिएं।  सुबह और शाम की ठंड को हल्के में न लें; पूरी बाजू के कपड़े पहनें। पैरों में संक्रमण से बचने के लिए अब बंद जूतों की जगह खुली चप्पलों का चुनाव किया जा सकता है। डॉक्टर की सलाह कब लें? बदलते मौसम में बच्चे और बुजुर्ग सबसे जल्दी संक्रमण की चपेट में आते हैं। यदि आपको या परिवार में किसी को भी दो दिन से अधिक समय तक बुखार, लगातार कफ या शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो इसे ‘मौसमी असर’ मानकर नजरअंदाज न करें। तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर से परामर्श लें ताकि समय रहते सही उपचार शुरू हो सके। फरवरी में दिन की गर्मी और रात की ठंड के कारण ‘सर्द-गर्म’ की समस्या बढ़ रही है। 15 साल की सबसे गर्म शुरुआत के बीच सर्दी-जुकाम और फ्लू का खतरा है। बचाव के लिए धूप से आकर तुरंत ठंडा पानी न पिएं, स्वच्छता का ध्यान रखें और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हल्दी वाले दूध का सेवन करें।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट, वित्त मंत्री ने 40,000 करोड़ की स्कीम और ISM 2.0 का किया ऐलान

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलान किया है। इसके जरिए सरकार की कोशिश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उभरते अवसरों का फायदा उठाना है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का परिव्यय बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए कर दिया है। वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने इसके लिए 40,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। इसके जरिए कोशिश इंडस्ट्री के नेतृत्व में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रिसर्च और ट्रेनिंग सेक्टर को आने बढ़ाना है। बजट भाषण में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “भारत के सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 ने देश की सेमीकंडक्टर क्षमताओं का विस्तार किया है। इसी आधार पर सरकार उपकरण और सामग्री उत्पादन, पूर्ण-स्टैक भारतीय बौद्धिक संपदा (आईपी) विकास और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए आईएसएम 2.0 की शुरुआत करेगी। भारत के सेमीकंडक्टर विकास की गति का लाभ उठाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम काे परिव्यय को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए किया है।” वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “हम प्रौद्योगिकी और कुशल कार्यबल के विकास के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे। अप्रैल 2025 में 22,999 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (आईएसएम) को पहले ही लक्ष्य से दोगुने निवेश की प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं।” इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2026-27 में लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपए के एक समर्पित कोष की शुरुआत का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य भविष्य में रोजगार सृजित करना और चुनिंदा मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहन देना है। श्रम प्रधान वस्त्र क्षेत्र के लिए वित्त मंत्री ने पांच प्रमुख घटकों वाले एक एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्तावित किया गया है। पहला घटक – नेशनल फाइबर स्कीम है, जिसका लक्ष्य रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर्स के साथ-साथ मानव निर्मित और नए औद्योगिक युग के फाइबर्स में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है। दूसरा घटक- वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना, जिसका उद्देश्य मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और साझा परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्रों के लिए पूंजीगत सहायता प्रदान करके पारंपरिक क्लस्टरों का आधुनिकीकरण करना है। तीसरा घटक राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम (एनएचएचपी) है, जिसे बुनकरों और कारीगरों के लिए लक्षित समर्थन सुनिश्चित करते हुए मौजूदा योजनाओं को एकीकृत और मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है।