WPL 2026 DC vs GG: आज कितने बजे से शुरू होगा एलिमिनेटर, जान लीजिए मैच शुरू होने का सही वक्त

नई दिल्ली । WPL 2026 में आज एलिमिनेटर खेला जाएगा। जो भी टीम इस मुकाबले को जीतेगी, सीधे फाइनल में एंट्री कर जाएगी। आरसीबी की टीम पहले ही फाइनल में है। आज का मैच कहां खेला जाएगा और कितने बजे शुरू होगा, इसका वक्त नोट कर लीजिए। दिल्ली कैपिटल्स बनाम गुजरात जायंट्स डब्ल्यूपीएल 2026 एलिमिनेटर WPL 2026 अब अपने समापन की ओर है। अब पांच में से केवल तीन ही टीमें ऐसी बची हैं, जो इस बार खिताब को अपने नाम कर सकती हैं। आज एक और बड़ा मुकाबला होना है, जो टीम आज जीतेगी, वो सीधे फाइनल में एंट्री कर जाएगी, वहीं हारने वाली टीम ट्रॉफी की दौड़ से बाहर हो जाएगी। आज गुजरात टाइटंस और दिल्ली कैपिटल्स के बीच मैच है। चलिए आपको बताते हैं कि ये मैच कितने बजे शुरू होगा और कहां खेला जाएगा। मैच का सही वक्त नोट कर लीजिए, क्योंकि इस मैच के रोचक होने की पूरी उम्मीद है। गुजरात जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच होगी एलिमिनेटर में भिड़ंत महिला प्रीमियर लीग 2026 में अब केवल दो ही मैच शेष है। आज एलिमिनेटर खेला जाएगा। इसके बाद 5 फरवरी को खिताबी भिड़ंत होगी। स्मृति मंधाना की कप्तानी वाली आरसीबी की टीम पहले ही अंक तालिका में नंबर वन होने के नाते फाइनल में अपनी सीट सुरक्षित कर चुकी है। आज एलिमिनेटर में गुजरात जायंट्स और दिल्ली कैपिटल्स की टीमें आमने सामने होने जा रही हैं। दिल्ली कैपिटल्स अब ऐसी पहली टीम बन चुकी है, जो डब्ल्यूपीएल के हर सीजन में टॉप 3 में पहुंचने में कामयाब रही है। ये बात और है कि फाइनल खेलने के बाद भी टीम ने अभी तक एक भी बार खिताब अपने हाथ में नहीं उठाया है। आज शाम साढ़े सात बजे से शुरू होगा डीसी बनाम जीजी मुकाबला आज के मैच की बात करें तो बड़ोदरा में खेला जाएगा। दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी जेमिमा रोड्रिग्स कर ही हैं, वहीं गुजरात जायंट्स की कमान एश्ले गार्डनर के हाथ में होगी। दोनों टीमों ने अब तक खेले गए टूर्नामेंट में कमाल का खेल दिखाया है। मैच की बात की जाए तो आज शाम साढ़े सात बजे से मैच शुरू होगा। इससे आधे घंटे पहले यानी सात बजे टॉस होगा। पहली बार ठीक सात बजे डाल दी जाएगी। मैच करीब 11 बजे तक खत्म भी हो जाएगा। उम्मीद है कि पूरे 40 ओवर का खेल हो, ताकि पूरा रोमांच बना रहे। आरसीबी से खिताबी भिड़ंत किससे होगी, ये आज रात तक तय हो जाएगा। दिल्ली कैपिटल्स महिला टीम: लिजेल ली (विकेटकीपर), शेफाली वर्मा, लौरा वोल्वार्ड्ट, जेमिमाह रोड्रिग्स (कप्तान), मारिजैन कप्प, चिनेले हेनरी, निकी प्रसाद, स्नेह राणा, मिन्नू मणि, श्री चरणानी, नंदनी शर्मा, एडडला स्रुजना, प्रगति सिंह, लुसी हैमिल्टन, तानिया भाटिया, अलाना किंग। गुजरात जायंट्स महिला टीम: बेथ मूनी (विकेटकीपर), सोफी डिवाइन, अनुष्का शर्मा, एशले गार्डनर (कप्तान), जॉर्जिया वेयरहैम, भारती फुलमाली, कनिका आहूजा, काशवी गौतम, तनुजा कंवर, रेणुका सिंह ठाकुर, राजेश्वरी गायकवाड़, आयुषी सोनी, तितास साधु, जिंतिमनी कलिता, शिवानी सिंह, हैप्पी कुमारी, किम गर्थ, डैनी व्याट-हॉज।
इतिहास रचने को तैयार इटली: दिग्गज कप्तान वेन मैडसेन और स्मट्स की जोड़ी भारत-श्रीलंका में दिखाएगी जलवा।

नई दिल्ली। वर्ल्ड क्रिकेट में बड़े उलटफेर और रोमांचक कहानियों का दौर शुरू हो चुका है। भारत और श्रीलंका की सह-मेज़बानी में 7 फरवरी 2026 से आयोजित होने जा रहे ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप में इस बार एक नया रंग देखने को मिलेगा। पहली बार इस बड़े मंच पर क्वालीफाई कर इतिहास रचने वाली इटली की टीम ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। इस ऐतिहासिक अभियान को धार देने के लिए इटली ने दक्षिण अफ्रीका के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जेजे स्मट्स को अपनी 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया है। 37 वर्षीय यह ऑलराउंडर अब अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और चतुर स्पिन गेंदबाजी से यूरोपियन टीम को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। इटली की इस सफलता के पीछे एक लंबी मेहनत और रणनीतिक बदलाव की कहानी छिपी है। टीम ने यूरोप क्वालीफायर 2025 में स्कॉटलैंड और ग्वेर्नसे जैसी टीमों को धूल चटाकर दुनिया को हैरान कर दिया था। अब मुख्य टूर्नामेंट के लिए टीम की कमान 42 वर्षीय अनुभवी बल्लेबाज वेन मैडसेन के हाथों में है जिनके पास प्रथम श्रेणी और टी20 क्रिकेट का विशाल अनुभव है। लेकिन खेल प्रेमियों की निगाहें सबसे ज्यादा जेजे स्मट्स पर टिकी हैं। स्मट्स ने साल 2017 से 2021 के बीच दक्षिण अफ्रीका के लिए 6 वनडे और 13 टी20 मैच खेले हैं। दक्षिण अफ्रीका की SA20 लीग में डरबन सुपर जायंट्स और सनराइजर्स ईस्टर्न केप जैसी टीमों के लिए खेल चुके स्मट्स का अनुभव इटली जैसी उभरती टीम के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। जेजे स्मट्स का इटली की तरफ से खेलना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बदलते नियमों और वैश्विक विस्तार की एक खूबसूरत मिसाल है। स्मट्स ने स्वयं यह साझा किया कि उन्होंने पिछले तीन वर्षों से दक्षिण अफ्रीका के लिए कोई मैच नहीं खेला था जिससे वह ICC के नियमों के अनुसार किसी अन्य देश के लिए खेलने हेतु पात्र हो गए। साथ ही उनकी पत्नी के जरिए उन्हें इटली की नागरिकता और पात्रता हासिल करने में मदद मिली। यह पहली बार नहीं है जब इटली ने अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ा हो। इससे पहले इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेड डर्नबैक और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ओपनर जो बर्न्स भी इटली की जर्सी पहन चुके हैं। वर्ल्ड कप के ग्रुप-C में मौजूद इटली की राह आसान नहीं होने वाली है। उन्हें इंग्लैंड और वेस्टइंडीज जैसी पूर्व चैंपियन टीमों के अलावा स्कॉटलैंड और नेपाल जैसी जुझारू टीमों से भिड़ना है। इटली अपने विश्व कप सफर का आगाज 9 फरवरी को कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स मैदान पर स्कॉटलैंड के खिलाफ करेगा। क्रिकेट पंडितों का मानना है कि स्मट्स की मौजूदगी से मध्यक्रम को जो मजबूती मिलेगी वह बड़े मैचों में गेम चेंजर साबित हो सकती है। अब 8 मार्च को होने वाले फाइनल तक की इस दौड़ में यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि क्या जेजे स्मट्स और वेन मैडसेन की यह अनुभवी जोड़ी इटली को क्रिकेट जगत का नया ‘जायंट किलर’ बना पाती है या नहीं।
IRGC को आतंकी संगठन घोषित करने पर ईरान का तीखा जवाब, EU के सभी राजदूत तलब

तेहरान। ईरान और यूरोपीय संघ के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित करने के यूरोपीय संघ के फैसले के विरोध में ईरान ने सभी EU देशों के राजदूतों को तलब किया है। तेहरान ने इस कदम को अवैध, अनुचित और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ईरान पहले से ही देशभर में हुए प्रदर्शनों पर कथित हिंसक कार्रवाई और सामूहिक फांसी के मामलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल रहा है। इसी बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत और कई मिसाइल विध्वंसक जहाज तैनात कर दिए हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य कार्रवाई का आदेश देंगे या नहीं, क्योंकि क्षेत्रीय देश किसी नए युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहे हैं। EU के फैसले से बढ़ा विवाद यूरोपीय संघ ने पिछले सप्ताह ईरान में हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान कथित हिंसक कार्रवाई में IRGC की भूमिका का हवाला देते हुए उसे आतंकवादी संगठन घोषित करने पर सहमति जताई थी। इन प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में गिरफ्तारी के दावे किए गए हैं। अमेरिका और कनाडा पहले ही IRGC को आतंकवादी संगठन की सूची में शामिल कर चुके हैं। भले ही EU का यह कदम काफी हद तक प्रतीकात्मक माना जा रहा हो, लेकिन इससे ईरान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ गया है, क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था में IRGC की अहम भूमिका है। ईरान की चेतावनी और जवाबी कदम की तैयारी ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने बताया कि रविवार से EU राजदूतों को तलब करने की प्रक्रिया शुरू हुई और सोमवार तक जारी रही। उन्होंने कहा कि कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है और उन्हें निर्णय लेने वाले संस्थानों के पास भेज दिया गया है। बाघाई ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ के इस “अवैध और गलत” कदम के जवाब में ईरान आने वाले दिनों में ठोस फैसला ले सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास जारी इस बीच ईरान ने स्पष्ट किया है कि फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार होर्मुज जलडमरूमध्य में IRGC का सैन्य अभ्यास तय कार्यक्रम के अनुसार जारी है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार का आवागमन होता है। जब संभावित युद्ध को लेकर सवाल किया गया तो बाघाई ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है, हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि अमेरिका की ओर से ईरान को कोई समयसीमा दी गई है या नहीं। EU की सेनाओं को आतंकी मानने का एलान इससे पहले ईरानी संसद के अध्यक्ष ने 2019 के एक कानून का हवाला देते हुए कहा था कि अब ईरान यूरोपीय संघ की सभी सैन्य इकाइयों को आतंकवादी संगठन मानता है। IRGC का प्रभाव और इतिहास गौरतलब है कि IRGC की स्थापना 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद शिया नेतृत्व वाली सरकार की सुरक्षा के लिए की गई थी और बाद में इसे संविधान का हिस्सा बना दिया गया। यह नियमित सेना के समानांतर काम करता है। 1980 के दशक में इराक के साथ युद्ध के दौरान इसकी ताकत और प्रभाव तेजी से बढ़ा। युद्ध के बाद इसके विघटन की चर्चा जरूर हुई, लेकिन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इसे निजी क्षेत्र में विस्तार की अनुमति दी, जिससे यह ईरान की राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था में एक शक्तिशाली संस्था बन गया।
SAND MAFIA NEWS: चंबल किनारे अवैध रेत का भंडारण ध्वस्त, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

SAND MAFIA NEWS: ग्वालियर। मुरैना जिले के चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन और भंडारण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। ववन विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा चंबल नदी के किनारे डंप की गई हजारों ट्रॉली अवैध रेत को नष्ट करने की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने लिया एक्शन जानकारी के अनुसार रेत माफियाओं द्वारा चंबल नदी से अवैध रूप से रेत निकालकर नदी के किनारे बड़े पैमाने पर डंप कर रखी गई थी। इस अवैध गतिविधि की सूचना मिलने पर प्रशासन ने तत्काल सख्त कदम उठाते हुए कार्रवाई शुरू की। BHIND VIRAL VIDEO: भिंड में कथित साधुओं से सरेआम मारपीट, धार्मिक पहचान पर उठे सवाल; वीडियो वायरल पुलिस बल और प्रशासनिक अमला मौजूद कार्रवाई के दौरान चार जेसीबी मशीनों की मदद से नदी किनारे जमा की गई अवैध रेत को समतल कर नष्ट किया जा रहा है। मौके पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस बल और प्रशासनिक अमला मौजूद है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। रेत माफियाओं में मचा हड़कंप इस कार्रवाई के दौरान जिला वन अधिकारी (डीएफओ) और संबंधित क्षेत्र के उपखंड अधिकारी (एसडीएम) स्वयं मौके पर मौजूद रहकर पूरी कार्रवाई की निगरानी करते नज़र आए। जिसके बाद प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है। GWALIOR CYBER CRIME: RTO चालान के नाम पर साइबर ठगी, APK फाइल से उड़ाए 6.56 लाख रुपए
मुकदमे से ठीक पहले गिरफ्तारी: नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस के बेटे पर लगे नए गंभीर आरोप

नॉर्वे। नॉर्वे की क्राउन प्रिंसेस मेटे-मारिट के बेटे मारियस बोर्ग होइबी की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बलात्कार समेत कई गंभीर आरोपों के मुकदमे से ठीक पहले उन्हें नए आपराधिक मामलों में गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उन्हें रविवार शाम हिरासत में लिया, जिससे उनके खिलाफ चल रही जांच और मुकदमे की गंभीरता और बढ़ गई है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब होइबी के खिलाफ मुख्य मुकदमा मंगलवार से ओस्लो जिला अदालत में शुरू होने वाला है। इस मुकदमे में उन पर कुल 38 आरोप लगाए गए हैं, जिनमें चार बलात्कार के मामले, पूर्व साथियों के खिलाफ हिंसा, धमकी, नशीली दवाओं के कब्जे और अन्य अपराध शामिल हैं। क्या हैं नए आरोप ओस्लो पुलिस के मुताबिक, मारियस बोर्ग होइबी पर शारीरिक नुकसान पहुंचाने, चाकू दिखाकर धमकाने और अदालत द्वारा जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का संदेह है। पुलिस ने अदालत से उन्हें चार सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रखने की मांग की है, यह कहते हुए कि उनके दोबारा अपराध करने का खतरा बना हुआ है। इन नए आरोपों के चलते होइबी को पहले से दर्ज मामलों के अलावा अतिरिक्त आपराधिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। पहले से दर्ज हैं कई गंभीर मामले होइबी के खिलाफ जांच की शुरुआत 2024 में हुई थी, जब उन पर अपनी तत्कालीन साथी के साथ शारीरिक हिंसा करने का आरोप लगा। बाद में उन्होंने स्वीकार किया था कि कोकीन और शराब के नशे में उन्होंने महिला को चोट पहुंचाई और उसके अपार्टमेंट में तोड़फोड़ की। उन्होंने अपने व्यवहार पर पछतावा भी जताया था। हालांकि, उनके वकील के अनुसार होइबी ने बलात्कार और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर आरोपों से इनकार किया है। यदि अदालत में आरोप साबित हो जाते हैं, तो उन्हें अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है। 19 मार्च तक चल सकता है मुकदमा मुख्य मुकदमे की सुनवाई 19 मार्च तक चलने की संभावना है। नए मामलों में गिरफ्तारी ने न केवल इस हाई-प्रोफाइल केस को और संवेदनशील बना दिया है, बल्कि नॉर्वे के शाही परिवार से जुड़े इस मामले पर देश-विदेश में निगाहें भी टिका दी हैं।
चार दिन की लगातार गिरावट के बाद सोने और चांदी में फिर उछाल

नई दिल्ली। लगातार चार कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर मजबूती देखने को मिली है। मंगलवार, 3 फरवरी को दोनों कीमती धातुओं ने तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की, जिससे निवेशकों को राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4 प्रतिशत की तेजी के साथ बढ़कर 4,830 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया। वहीं स्पॉट सिल्वर ने भी जोरदार छलांग लगाते हुए लगभग 8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की और इसका भाव 82.74 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। 30 जनवरी को 10% लुढ़का था भाव गोल्ड की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से मुनाफावसूली देखने को मिल रही है। 30 जनवरी 2026 को गोल्ड का रेट 10 प्रतिशत लुढ़क गया था। इस गिरावट के बाद स्पॉट गोल्ड का रेट 5000 डॉलर प्रति आउंस के नीचे आ गया था। चांदी की स्थिति तो गोल्ड की तुलना में और खराब हो गई। इसी दिन चांदी का रेट 27 प्रतिशत कम हो गया था। आज से पहले बीते दो कारोबारी दिन में गोल्ड की कीमतों में 13 प्रतिशत और चांदी की कीमतों में 34 प्रतिशत की गिरावट इंटरनेशनल मार्केट में दर्ज की गई है। चांदी की कीमतें लगातार तीसरे दिन तेजी से गिरीं। सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में यह 52,000 रुपये टूटकर 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई, जबकि कमजोर वैश्विक रुझानों और मजबूत डॉलर के बीच सोना टूटकर 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी 52,000 रुपये, या लगभग 17 प्रतिशत टूटकर 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) रह गई। शनिवार को, चांदी 19 प्रतिशत, या 72,500 रुपये गिरकर 3.12 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गई थी। पिछले तीन सत्रों में, चांदी की कीमतें 1,44,500 रुपये, या लगभग 36 प्रतिशत गिरकर 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे आ गई हैं। 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर 29 जनवरी को दर्ज किया गया जो अब तक की सबसे ऊंची कीमत थी।
सिम और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से निकाला लाखों का सोना, वायरल हुआ वीडियो

वीजिंग। दक्षिण पूर्वी चीन के हुइझोउ में रहने वाले कियाओ ने मोबाइल सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से करीब 191 ग्राम सोना निकाला, जिसकी कीमत लगभग 2 लाख युआन (27 लाख रुपये) आंकी गई है। कियाओ ने इस प्रक्रिया का पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसे अब तक 50 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। कैसे किया सोना निकाला वीडियो में कियाओ ने पुराने सिम कार्ड्स और इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप को रासायनिक और भौतिक प्रक्रियाओं से प्रोसेस करते हुए दिखाया। इसमें जंग हटाना, गर्म करना, छानना और रिफाइनिंग शामिल था। उन्होंने बताया कि सिम कार्ड में सोने की मात्रा बेहद कम होती है—एक सामान्य सिम कार्ड में लगभग 0.001 ग्राम सोना होता है। इसके अलावा, फेंके गए बैंक कार्ड चिप्स और कम्युनिकेशन डिवाइस के कॉन्टैक्ट्स से भी कीमती धातुएं निकाली जा सकती हैं। कियाओ के अनुसार, उनके पास लगभग दो टन इलेक्ट्रॉनिक कचरा था, जिसे प्रोसेस करके उन्होंने यह सोना प्राप्त किया। उन्होंने दर्शकों को चेतावनी भी दी कि यदि किसी को पूरी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है, तो इसे अपनाना जोखिम भरा हो सकता है। सोशल मीडिया पर धमाल और असर कियाओ का वीडियो वायरल होते ही लोग उनकी प्रक्रिया सीखने के लिए उत्सुक हो गए। कई यूजर्स ने उन्हें “अलकेमिस्ट” यानी रसायनविद तक कह दिया। इस वायरल वीडियो का असर ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर भी दिखा—रीसेल प्लेटफॉर्म्स पर लोग पुराने सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक चिप्स के बंडल बेचने लगे। कुछ लोग सोना निकालने के औजार और ट्रेनिंग पैकेज भी बेच रहे हैं, जिसमें से एक पैकेज की लगभग 2,000 यूनिट बिकने की खबर है। निष्कर्ष कियाओ की इस उपलब्धि ने न सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट की कीमत दिखा दी, बल्कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन मार्केट्स में नए बिजनेस अवसर भी पैदा कर दिए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया जोखिम भरी है और इसके लिए रासायनिक और सुरक्षा ज्ञान बेहद जरूरी है।
टी-20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले श्रीलंका का बड़ा फैसला: धनंजय डी सिल्वा बाहर, कामिंदु मेंडिस की एंट्री से बढ़ी चुनौती

नई दिल्ली । भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले श्रीलंका क्रिकेट टीम ने अपने स्क्वॉड में बड़ा और अहम बदलाव किया है। टीम मैनेजमेंट ने कड़ा फैसला लेते हुए आउट ऑफ फॉर्म चल रहे अनुभवी खिलाड़ी धनंजय डी सिल्वा को 15 सदस्यीय टीम से बाहर कर दिया है, जबकि उनकी जगह विस्फोटक बल्लेबाज कामिंदु मेंडिस को शामिल किया गया है। इस फैसले को वर्ल्ड कप की तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। धनंजय डी सिल्वा हाल के दिनों में पाकिस्तान और इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे थे। रन बनाने में संघर्ष और कमजोर स्ट्राइक रेट को देखते हुए चयनकर्ताओं ने वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर उन्हें मौका न देने का फैसला किया। इसके उलट कामिंदु मेंडिस, जो पिछले कुछ समय से टीम से बाहर चल रहे थे, अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और बहुआयामी क्षमता के चलते एक बार फिर चयनकर्ताओं का भरोसा जीतने में सफल रहे हैं। उनकी वापसी से टीम के बल्लेबाजी संतुलन में मजबूती आने की उम्मीद है। इस बार श्रीलंका ने युवा प्रतिभाओं पर भी बड़ा दांव खेला है। 23 वर्षीय बल्लेबाज पवन रत्नायके और तेज गेंदबाज ईशान मलिंगा को वर्ल्ड कप स्क्वॉड में जगह दी गई है, जबकि प्रमोद मदुशन को बाहर बैठना पड़ा है। धनंजय के बाहर होने से बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर दुनिथ वेललागे के लिए प्लेइंग इलेवन में जगह बनाना आसान हो गया है। वेललागे के पास फ्रेंचाइजी क्रिकेट का अच्छा अनुभव है और उन्होंने हाल ही में श्रीलंका-ए टीम की सफल कप्तानी कर अपनी क्षमता साबित की है। सह-मेजबान होने के नाते श्रीलंका को घरेलू परिस्थितियों का भरपूर फायदा मिलने की उम्मीद है। ग्रुप बी के सभी मुकाबले कोलंबो और पल्लेकेले में खेले जाएंगे। श्रीलंका का सामना इस ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, ओमान और जिम्बाब्वे जैसी टीमों से होगा। टीम 8 फरवरी को आयरलैंड के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी, इसके बाद 12 फरवरी को ओमान, 16 फरवरी को ऑस्ट्रेलिया और 19 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ मैदान में उतरेगी। टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए घोषित श्रीलंका की 15 सदस्यीय टीम में कप्तान दासुन शनाका नेतृत्व करेंगे। बल्लेबाजी क्रम में पथुम निसांका, कुसल मेंडिस, कुसल परेरा, चरिथ असलांका और कामिंदु मेंडिस शामिल हैं। ऑलराउंड विभाग में वानिंदु हसरंगा, दुनिथ वेललागे, जेनिथ लियानागे और पवन रत्नायके को जगह दी गई है, जबकि गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी महीश तीक्षाना, दुष्मंता चमीरा, मथीशा पथिराना और ईशान मलिंगा संभालेंगे। संतुलित टीम के साथ श्रीलंका अब घरेलू दर्शकों के सामने खिताब जीतने के इरादे से उतरेगा।
डॉलर के प्रभुत्व का समय समाप्त …. चीनी राष्ट्रपति ने किया युआन को वैश्विक करेंसी बनाने का आह्वान! भड़के ट्रंप

बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Chinese President Xi Jinping) ने हाल ही में अमेरिका (America) को एक स्पष्ट और बड़ा संदेश दिया है, जब उन्होंने अपने एक भाषण में कहा कि डॉलर के प्रभुत्व का समय अब समाप्त हो चुका है। जिनपिंग के अनुसार, दुनिया को एक ऐसी करेंसी की आवश्यकता है, जिसपर वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी विश्वास किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीन अपने युआन (Yuan.) को वैश्विक रिजर्व करेंसी बनाने (Creating Global Reserve Currency) की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। अपने संबोधन में शी ने यह भी कहा कि एक सशक्त आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार, विश्वस्तरीय तकनीकी और आर्थिक क्षमता, और एक ऐसी करेंसी की आवश्यकता है, जिस पर पूरे विश्व का भरोसा हो और जिसका वैश्विक उपयोग हो। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि इसके लिए एक प्रभावी केंद्रीय बैंक की आवश्यकता होगी, जो सही ढंग से मौद्रिक नीति और मैक्रो प्रूडेंशियल प्रबंधन को लागू कर सके। इसके अलावा, चीन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी वित्तीय संस्थान और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों की जरूरत होगी, जो दुनियाभर से पूंजी आकर्षित कर सकें और वैश्विक कीमतों पर प्रभाव डाल सकें। संगीन है वक्त की बातयह भाषण चीनी मैगजीन ‘चिउशी’ में शनिवार को प्रकाशित हुआ था। खास बात यह है कि शी जिनपिंग ने यह भाषण 2024 में ही दिया था, और इस समय इसे प्रकाशित करने की टाइमिंग पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मकसद स्पष्ट रूप से अमेरिका, खासकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती देना हो सकता है, जो डॉलर के वर्चस्व को लेकर पहले भी कई बार आलोचना कर चुके हैं। ब्रिक्स पर ट्रंप का गुस्सापूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले कई बार डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने वाले देशों को चेतावनी दी थी। उन्होंने भारत, चीन और रूस के नेतृत्व वाले ब्रिक्स समूह के उन प्रयासों का विरोध किया था, जिनमें डॉलर के विकल्प के रूप में एक नई वैश्विक करेंसी या भुगतान प्रणाली की खोज की जा रही थी। उन्होंने तो यह भी धमकी दी थी कि यदि ब्रिक्स देशों ने ऐसा प्रयास किया तो वे 100 फीसदी टैरिफ लगा देंगे। लेकिन वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और बढ़ते अनिश्चितताओं के बीच, भारत और अन्य ब्रिक्स सदस्य देशों ने डॉलर का विकल्प तलाशने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सूत्रों के अनुसार, ब्रिक्स देशों ने एक साझा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाने की योजना बनाई है, जिससे वे डॉलर पर निर्भरता कम कर सकें और अपने-अपने देशों में वित्तीय लेन-देन को सुविधाजनक बना सकें। शी जिनपिंग का यह आह्वान और उनके द्वारा किया गया प्रस्ताव, अमेरिकी वित्तीय प्रभुत्व को चुनौती देने के तौर पर देखा जा सकता है। यदि युआन को वैश्विक रिजर्व करेंसी के रूप में स्वीकार किया जाता है, तो यह वैश्विक वित्तीय संरचना को बदलने के संकेत हो सकते हैं। चीन का यह कदम निश्चित रूप से अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है, जो डॉलर के माध्यम से वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर लंबे समय से अपना नियंत्रण बनाए हुए है। इन घटनाक्रमों के बाद ट्रंप और उनके समर्थक इससे और अधिक बौखलाएंगे, और अमेरिका द्वारा इसके जवाब में कुछ कड़े कदम उठाने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि चीन और ब्रिक्स देशों की यह नई रणनीति अमेरिकी डॉलर के प्रभाव को किस हद तक चुनौती देती है।
एक पेड़ मां के नाम’ बना वैश्विक अभियान: इजराइल के नेवातिम में रोपे गए 300 पेड़, भारत–इजराइल दोस्ती हुई मजबूत

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी महत्वाकांक्षी पहल ‘एक पेड़ मां के नाम’ अब भारत की सीमाओं को पार कर वैश्विक स्वरूप लेती नजर आ रही है। इसी कड़ी में इजराइल के नेगेव क्षेत्र स्थित मोशव नेवातिम में 300 पेड़ लगाए गए, जिसने न केवल हरियाली का संदेश दिया बल्कि भारत और इजराइल के गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान की। यह विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम यहूदी पर्व ‘तु बिश्वत’ के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसे इजराइल में पेड़ों का नया साल और पर्यावरण जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस तरह भारतीय पहल और यहूदी परंपरा का संगम प्रकृति, संस्कृति और साझा मूल्यों का प्रतीक बनकर सामने आया। नेवातिम में हरियाली के साथ दोस्ती का उत्सवमोशव नेवातिम में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, बच्चों और समुदाय के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारत के दूतावास, केरेन कायेमेट ले इजराइल KKL-JNF और मोशव नेवातिम के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम के तहत कुल 300 पौधे लगाए गए। यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे भारत और इजराइल के बीच लोगों से लोगों के रिश्तों को मजबूत करने के एक सशक्त माध्यम के रूप में देखा गया। बच्चों की भागीदारी ने इस संदेश को और भी भावनात्मक बना दिया कि प्रकृति की रक्षा की जिम्मेदारी अगली पीढ़ियों के साथ साझा है। भारत–इजराइल की साझा सोच और प्रतिबद्धताकार्यक्रम में इजराइल के पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय के महानिदेशक रामी रोजेन, भारत के इजराइल में राजदूत जेपी सिंह और ब्नेई शिमोन क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख निर जामिर की उपस्थिति ने आयोजन को और भी खास बना दिया। सभी वक्ताओं ने सतत विकास, जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर भारत और इजराइल की साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल किसी एक देश का मुद्दा नहीं, बल्कि यह एक वैश्विक जिम्मेदारी है। ऐसे में ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलें दुनिया को यह संदेश देती हैं कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना संभव है। राजदूत जेपी सिंह का भावनात्मक संबोधनभारतीय राजदूत जेपी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ‘तु बिश्वत’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ दोनों ही परंपराएं प्रकृति, समुदाय और भावनात्मक जुड़ाव को केंद्र में रखती हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह मां जीवन का आधार होती है, उसी तरह पेड़ धरती पर जीवन को संजोए रखते हैं।राजदूत ने विश्वास जताया कि नेवातिम में लगाए गए ये पेड़ आने वाले वर्षों में भारत–इजराइल मित्रता के स्थायी प्रतीक बनेंगे और जब ये पेड़ बड़े होंगे, तो वे आने वाली पीढ़ियों को दोनों देशों के बीच गहरे रिश्तों की कहानी सुनाएंगे। भारतीय विरासत से गहराई से जुड़ा नेवातिमनेवातिम का भारत से ऐतिहासिक रिश्ता भी इस आयोजन को विशेष बनाता है। इस मोशव की स्थापना भारत के कोचीन क्षेत्र से आए यहूदियों ने की थी। आज भी नेवातिम में भारतीय यहूदी विरासत जीवंत रूप में मौजूद है। यहां स्थित भारतीय यहूदी विरासत केंद्र और कोचिनी शैली का सिनेगॉग इस ऐतिहासिक संबंध की गवाही देते हैं।हाल ही में यहां भारतीय महाराजा जाम साहिब की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदी शरणार्थियों की मदद के लिए जाने जाते हैं। यह प्रतिमा भारत और यहूदी समुदाय के बीच मानवीय रिश्तों की एक और मजबूत कड़ी है। एक पहल, कई संदेशकुल मिलाकर, इजराइल के नेवातिम में आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम केवल पेड़ लगाने का आयोजन नहीं था, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक जुड़ाव और भारत–इजराइल मित्रता का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल अब एक वैश्विक संदेश बनती दिख रही है ऐसा संदेश, जिसमें प्रकृति के प्रति सम्मान, मां के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारी एक साथ जुड़ी हुई है।