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इस हफ्ते SME सेगमेंट के 3 नए पब्लिक इश्यू खुलेंगे, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

नई दिल्‍ली । यूनियन बजट 2026 के बाद शेयर बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बजट के ऐलान के साथ ही निवेशकों की नजर अब नए निवेश अवसरों पर टिक गई है और इसी कड़ी में इस सप्ताह आईपीओ बाजार काफी सक्रिय रहने वाला है। खास बात यह है कि इस हफ्ते खुलने वाले सभी नए पब्लिक इश्यू एसएमई  SME सेगमेंट से जुड़े हुए हैं, जो छोटे और मझोले निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इस सप्ताह कुल तीन नए आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन होने जा रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह हफ्ता बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि सही कंपनी में निवेश कर अच्छे रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं इन तीनों आईपीओ के बारे में- Grover Jewells IPOज्वेलरी सेक्टर की कंपनी Grover Jewells अपना आईपीओ 4 फरवरी को निवेशकों के लिए खोलने जा रही है। इस पब्लिक इश्यू में निवेशक 6 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। कंपनी इस आईपीओ के जरिए कुल 33.83 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। Grover Jewells ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 83 से 88 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस आईपीओ में एक लॉट 1600 शेयरों का होगा, यानी निवेशकों को न्यूनतम निवेश इसी लॉट साइज के अनुसार करना होगा। सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 11 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। ज्वेलरी सेक्टर में रुचि रखने वाले निवेशकों के लिए यह आईपीओ आकर्षक विकल्प माना जा रहा है। Biopol Chemicals IPOकेमिकल सेक्टर से जुड़ी कंपनी Biopol Chemicals अपना पब्लिक इश्यू 6 फरवरी से सब्सक्रिप्शन के लिए खोलने जा रही है। निवेशक इस आईपीओ में 10 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। कंपनी इस इश्यू के जरिए 31.26 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। Biopol Chemicals ने आईपीओ के लिए 102 से 108 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इसमें एक लॉट 1200 शेयरों का रखा गया है। सब्सक्रिप्शन बंद होने के बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 13 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर होने की संभावना है। केमिकल इंडस्ट्री में बढ़ती मांग को देखते हुए इस आईपीओ पर निवेशकों की खास नजर बनी हुई है। NFP Sampoorna Foods IPOफूड प्रोसेसिंग सेक्टर की कंपनी NFP Sampoorna Foods का आईपीओ 4 फरवरी से निवेशकों के लिए ओपन हो रहा है। इस इश्यू में निवेशक 6 फरवरी तक अपनी बोली लगा सकते हैं। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए कुल 24.53 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। कंपनी ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 52 से 55 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस आईपीओ में निवेश के लिए एक लॉट में 2000 शेयर शामिल किए गए हैं। सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 11 फरवरी को NSE SME प्लेटफॉर्म पर हो सकती है। कम प्राइस बैंड होने के कारण यह आईपीओ छोटे निवेशकों के लिए खासा आकर्षक माना जा रहा है। निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह सप्ताहबजट 2026 के बाद बाजार में बने सकारात्मक माहौल के बीच इन तीनों एसएमई आईपीओ को निवेश के नए अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, एसएमई आईपीओ में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, बिजनेस मॉडल और भविष्य की योजनाओं का आकलन करना जरूरी होता है।गौरतलब है कि यह सप्ताह उन निवेशकों के लिए खास हो सकता है जो बजट के बाद उभरते अवसरों का फायदा उठाना चाहते हैं और एसएमई सेगमेंट में निवेश करने में रुचि रखते हैं।

U-19 वर्ल्ड कप 2026 सेमीफाइनल: भारत बनाम अफगानिस्तान की जंग …

नई दिल्‍ली । आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला आज, 4 फरवरी (बुधवार) को क्रिकेट प्रेमियों को जबरदस्त रोमांच देने के लिए तैयार है, जहां भारत और अफगानिस्तान की अंडर-19 टीमें आमने-सामने होंगी। यह हाई-वोल्टेज मुकाबला जिम्बाब्वे के हरारे स्थित हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाएगा। दोनों टीमें इस मैच को जीतकर फाइनल में अपनी जगह पक्की करने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी। शानदार लय में भारतीय अंडर-19 टीमभारतीय अंडर-19 टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अब तक बेहतरीन प्रदर्शन किया है और उसे खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। ग्रुप स्टेज में भारत ने अपने सभी मुकाबले जीतकर ग्रुप बी में शीर्ष स्थान हासिल किया। टीम ने अमेरिका, बांग्लादेश और न्यूजीलैंड जैसी टीमों को हराकर अपनी मजबूत तैयारी और संतुलित संयोजन का परिचय दिया। इसके बाद सुपर सिक्स चरण में भी भारत का दबदबा साफ नजर आया। अपने पहले मुकाबले में टीम इंडिया ने मेजबान जिम्बाब्वे को 204 रनों के विशाल अंतर से हराकर टूर्नामेंट में अपनी ताकत का ऐलान कर दिया। वहीं, निर्णायक मुकाबले में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम ने संयमित, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत दर्ज की। कप्तान आयुष म्हात्रे की अगुवाई में भारतीय टीम बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में संतुलित नजर आ रही है। अफगानिस्तान भी किसी से कम नहींदूसरी ओर, अफगानिस्तान अंडर-19 टीम ने भी इस वर्ल्ड कप में सभी को चौंकाया है। टीम ने ग्रुप स्टेज में लगातार तीन मुकाबले जीतकर सुपर सिक्स में प्रवेश किया। हालांकि सुपर सिक्स चरण में श्रीलंका के खिलाफ अफगानिस्तान को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बाद टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए आयरलैंड को 191 रनों के बड़े अंतर से हराया और सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की। कप्तान महबूब खान के नेतृत्व में अफगानिस्तान की टीम आत्मविश्वास से लबरेज दिख रही है। उनकी गेंदबाजी आक्रमण ने पूरे टूर्नामेंट में विपक्षी बल्लेबाजों को काफी परेशान किया है, वहीं बल्लेबाजी में भी टीम ने अहम मौकों पर दम दिखाया है। अफगानिस्तान की कोशिश होगी कि वह भारत जैसी मजबूत टीम को हराकर इतिहास रचे और पहली बार अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचे। कहां और कैसे देखें मुकाबला लाइवभारत बनाम अफगानिस्तान अंडर-19 सेमीफाइनल मुकाबले का लाइव टेलीकास्ट टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। वहीं, मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मैच की लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट फैंस इस रोमांचक मुकाबले को घर बैठे लाइव देख सकेंगे। दोनों टीमों के स्क्वॉडभारत (U-19):आयुष म्हात्रे (कप्तान), आरएस एम्ब्रिश, कनिष्क चौहान, दीवेंद्रन दीपेश, मोहम्मद एनान, एरोन जॉर्ज, अभिज्ञान कुंडू, किशन कुमार सिंह, विहान मल्होत्रा, उधव मोहन, हेनिल पटेल, खिलन पटेल, हरवंश सिंह, वैभव सूर्यवंशी, वेदांत त्रिवेदी। अफगानिस्तान (U-19):महबूब खान (कप्तान), खालिद अहमदजई, उस्मान सादात, फैसल खान, उजैरुल्लाह नियाजई, अजीज मिया खिल, नाजीफ अमीरी, खातिर स्टानिकजई, नूरिस्तानी, अब्दुल अजीज, सलाम खान, वाहिद जादरान, जैतुल्लाह शाहीन, रोहुल्लाह अरब, अकील खान ओबैद। आपको बतादें कि यह सेमीफाइनल मुकाबला रोमांच, जुनून और युवा प्रतिभाओं की परीक्षा होने वाला है। जहां भारत अपने शानदार रिकॉर्ड और आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगा, वहीं अफगानिस्तान उलटफेर कर इतिहास रचने की पूरी कोशिश करेगा। क्रिकेट फैंस को एक बेहद रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है।

GWALIOR SUICIDE NEWS: फांसी के फंदे पर लटका मिला 10 साल का मासूम, पिता ने जताई हत्या की आशंका

GWALIOR NEWS

GWALIOR SUICIDE NEWS: मध्यप्रदेह। ग्वालियर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां 10 वर्षीय मासूम बच्चा अपने ही घर में फांसी के फंदे पर लटका मिला। बताया जा रहा है कि यह मामला झांसी रोड थाना क्षेत्र के गड्ढा मोहल्ला का है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है। MAHARASHTRA DEPUTY CM: अजित पवार के निधन के चौथे दिन सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री मृतक बच्चे की पहचान सौरभ केवट के रूप में हुई है। सौरभ के पिता कमल केवट ग्वालियर के एक निजी अस्पताल में कंपाउंडर के पद पर कार्यरत हैं और मूल रूप से मुरैना जिले के सबलगढ़ के निवासी हैं। वह झांसी रोड इलाके में किराए के मकान में अपने बेटे के साथ रहते थे। जहां सौरभ एक निजी स्कूल में पढ़ता था। रस्सी के सहारे बेड पर लटका मिला शव पिता कमल के अनुसार, घटना वाले दिन वह शाम करीब 6:50 बजे ड्यूटी पर जाने से पहले बेटे के साथ खाना खाकर अस्पताल चले गए थे। घर में बच्चा अकेला था। रात करीब 8 बजे दोस्त पवन ने फोन कर बताया कि सौरभ दरवाजा नहीं खोल रहा है, बाद में सूचना मिली कि उसने फांसी लगा ली है । घर पहुंचने पर बच्चा रस्सी के सहारे बेड पर लटका मिला। पिता ने जताई हत्या की आशंका पिता ने बेटे की मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई है। घटना के बाद बच्चे को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम से घटनास्थल की जांच कराई है। साथ ही पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया । फिलहाल पुलिस पीएम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। GUNA CRIMES : स्कूल परिसर में नाबालिग छात्र से मारपीट, दो युवकों के खिलाफ मामला दर्ज; सीसीटीवी में कैद हुई घटना  

‘हिंदू कार्ड’ या सियासी पाखंड? बांग्लादेश में चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता पर सवाल

नई दिल्‍ली । बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों एक गंभीर विरोधाभास से गुजर रही है। एक तरफ देश में हिंदू समुदाय पर हमलों, हिंसा और कथित नरसंहार की खबरें सामने आ रही हैं, तो दूसरी ओर कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी खुद को “समावेशी” और “धर्मनिरपेक्ष” दिखाने की कोशिश कर रही है। इस कोशिश का ताजा उदाहरण खुलना-1 संसदीय सीट से हिंदू प्रकोष्ठ के नेता कृष्ण नंदी को उम्मीदवार बनाए जाने के रूप में सामने आया है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स और खुद पार्टी के संविधान की धाराएं इस कदम को महज एक सियासी दिखावा और ‘हिंदू कार्ड’ करार दे रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जमात-ए-इस्लामी का यह कदम वास्तविक समावेशिता से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अल्पसंख्यकों को गुमराह करने की रणनीति है। पार्टी के संविधान में निहित प्रावधान यह साफ करते हैं कि कोई भी हिंदू या गैर-मुस्लिम कभी भी जमात-ए-इस्लामी का पूर्ण सदस्य नहीं बन सकता। ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसी समुदाय को संगठन के भीतर बराबरी का अधिकार ही नहीं दिया जा सकता, तो उसे चुनावी उम्मीदवार बनाना कितना ईमानदार कदम कहा जा सकता है। संविधान की सख्त शर्तें, गैर-मुस्लिमों को बराबरी नहींएक रिपोर्ट के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी के संविधान की धारा 11 स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी गैर-मुस्लिम केवल “एसोसिएट सदस्य” ही बन सकता है। इसका मतलब यह है कि हिंदू या अन्य गैर-मुस्लिम नेताओं को पार्टी की कोर कमिटी, नीति-निर्माण या अहम फैसलों में कोई भूमिका नहीं मिलेगी। पूर्ण सदस्यता केवल मुसलमानों के लिए आरक्षित है। ऐसे में कृष्ण नंदी जैसे नेताओं को उम्मीदवार बनाना प्रतीकात्मक कदम से ज्यादा कुछ नहीं लगता। यही नहीं, पार्टी के संविधान की धारा 7 और 9 में पूर्ण सदस्य बनने के लिए जिन शर्तों का उल्लेख है, वे किसी भी स्वाभिमानी हिंदू या गैर-मुस्लिम के लिए स्वीकार्य नहीं मानी जा सकतीं। इन धाराओं के तहत पार्टी सदस्य को अल्लाह, पैगंबर मोहम्मद और कुरान को एकमात्र आदर्श मानना अनिवार्य है। साथ ही, सदस्य को शरिया कानून के अनुसार जीवन जीने और इस्लामी कर्तव्यों का पालन करने की शपथ लेनी होती है। इसके अलावा, “इस्लाम से भटके हुए लोगों” से दूरी बनाए रखने की शर्त भी संविधान में दर्ज है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी ने वर्ष 2008 में अपने संविधान में कुछ सीमित बदलाव किए थे, लेकिन ये बदलाव भी कथित तौर पर चुनाव आयोग और जनप्रतिनिधित्व आदेश के नियमों से बचने के लिए किए गए थे, ताकि पार्टी का पंजीकरण रद्द न हो। मूल विचारधारा और कट्टर इस्लामी सोच में कोई ठोस बदलाव नहीं किया गया। इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि बिना बुनियादी सुधार के समावेशिता की बात करना महज राजनीतिक अवसरवाद है। चुनाव का माहौल और बदली हुई सियासी तस्वीरबांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद यह देश का पहला आम चुनाव है। अब तक बांग्लादेश की राजनीति मुख्य रूप से अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे वह चुनाव नहीं लड़ पा रही है। इस राजनीतिक खालीपन का फायदा उठाकर जमात-ए-इस्लामी खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि हिंदू उम्मीदवार उतारना इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पार्टी पर लगने वाले कट्टरपंथी और अल्पसंख्यक विरोधी छवि के आरोपों को कमजोर किया जा सके। महिलाओं को लेकर भी कट्टर रुखजमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता की पोल महिलाओं के मुद्दे पर भी खुलती है। पार्टी ने इस चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतारा है। पार्टी प्रमुख शफीकुर रहमान का साफ कहना है कि जमात-ए-इस्लामी की कभी कोई महिला प्रमुख नहीं बन सकती। उनके अनुसार, “अल्लाह ने पुरुष और महिलाओं को अलग-अलग बनाया है” और महिलाएं पार्टी का नेतृत्व नहीं कर सकतीं। शफीकुर रहमान का एक और बयान काफी विवादित रहा, जिसमें उन्होंने कामकाजी महिलाओं की तुलना वेश्यावृत्ति से कर दी। इस बयान के बाद ढाका समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए और जमात-ए-इस्लामी की सोच पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। उल्‍लेखनीय है कि बांग्लादेश में जहां एक ओर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, वहीं जमात-ए-इस्लामी का ‘हिंदू उम्मीदवार’ उतारना वास्तविक बदलाव से ज्यादा राजनीतिक दिखावा प्रतीत होता है। पार्टी का संविधान, उसकी विचारधारा और नेताओं के बयान यह संकेत देते हैं कि बिना ठोस वैचारिक और संरचनात्मक सुधार के यह समावेशिता केवल एक चुनावी रणनीति है, जिसका उद्देश्य सत्ता की दौड़ में अपनी छवि को चमकाना भर है।

MP Weather Today: वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर जारी, एमपी में बारिश-आंधी के साथ कोहरे का अलर्ट, 20 जिलों में मावठे की चेतावनी

MP CURRENT WEATHER

MP Weather Today: ग्वालियर। मध्य प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के असर से मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। प्रदेश के कई जिलों में आंधी-बारिश का सिलसिला जारी है। साथ ही मौसम विभाग ने भोपाल समेत 20 जिलों में मंगलवार को गरज-चमक के साथ मावठा गिरने का अलर्ट जारी किया है। राजधानी भोपाल में मंगलवार तड़के हल्की बारिश दर्ज की गई। GWALIOR SUICIDE NEWS: फांसी के फंदे पर लटका मिला 10 साल का मासूम, पिता ने जताई हत्या की आशंका अगले 3 प्रदेश के कई हिस्सों में घाना कोहरा मौसम विभाग के अनुसार, बारिश के बाद अगले तीन दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में घना कोहरा छाने की संभावना है, जिससे सुबह और रात के समय दृश्यता प्रभावित हो सकती है। बता दें कि 5 फरवरी से एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होगा, जिसके चलते 10 फरवरी तक फिर से बारिश होने के आसार हैं। इसके बाद तापमान में गिरावट आने से ठंड और बढ़ सकती है। इन इलाकों में बारिश दर्ज सोमवार को भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, रीवा, सागर और जबलपुर संभाग के 20 से अधिक जिलों में बादल छाए रहे और कई जगह हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। टीकमगढ़, आगर-मालवा और अशोकनगर में सुबह ही बारिश हुई, जबकि कुछ जिलों में शाम को मौसम बदला। उत्तरी मध्य प्रदेश में इसका असर ज्यादा देखा गया। GUNA CRIMES : स्कूल परिसर में नाबालिग छात्र से मारपीट, दो युवकों के खिलाफ मामला दर्ज; सीसीटीवी में कैद हुई घटना आज इन जिलों में बारिश की संभावना ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में गरज के साथ बारिश हो सकती है। कई इलाकों में सुबह के समय मध्यम कोहरा भी दर्ज किया गया है। अगले तीन दिन कोहरे का अलर्ट 4 फरवरी: शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सतना, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी 5 फरवरी: राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, चंबल संभाग व रीवा संभाग 6 फरवरी: गुना, अशोकनगर, ग्वालियर, शिवपुरी, चंबल और विंध्य क्षेत्र BHIND VIRAL VIDEO: भिंड में कथित साधुओं से सरेआम मारपीट, धार्मिक पहचान पर उठे सवाल; वीडियो वायरल देशभर में मौसम का हाल भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर उत्तर भारत के कई राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और घने कोहरे की स्थिति बनी हुई है। पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी से मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं चल रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी के पहले पखवाड़े में उत्तर और मध्य भारत में मौसम का यह उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

अमेरिकी फैसले से निर्यात प्रतिस्पर्धा में नई ताकत, एशियाई देशों से आगे निकला भारत

नई दिल्‍ली । अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के बाद भारत की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा में स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होती नजर आ रही है। इस फैसले को भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक और रणनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि नए टैरिफ ढांचे में भारत अब कई प्रमुख निर्यातक देशों की तुलना में कम शुल्क वाली श्रेणी में आ गया है। इससे न केवल भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बढ़त मिलेगी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका भी और सशक्त होगी। वर्तमान अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था पर नजर डालें तो भारत पर अब 18 प्रतिशत शुल्क लागू रहेगा, जबकि इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत, वियतनाम और बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत तथा चीन पर सबसे अधिक 34 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। इस तुलना से साफ है कि भारत अब अपने प्रमुख एशियाई प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में पहुंच गया है। खासतौर पर चीन जैसे बड़े निर्यातक देश पर अधिक टैरिफ होने से भारत के लिए अमेरिका जैसे बड़े बाजार में अवसरों के नए द्वार खुल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैरिफ कटौती का सीधा लाभ भारत के टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा। ‘मेड इन इंडिया’ उत्पाद अब अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे निर्यात बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। यह फैसला भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों को भी नई गति दे सकता है। व्हाइट हाउस ने इस फैसले के पीछे की अहम वजह भी स्पष्ट की। उसके अनुसार, भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने पर सहमति जताने के बाद रूसी तेल से जुड़ा 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ पूरी तरह हटा लिया गया है। यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई फोन बातचीत के बाद लिया गया। इससे पहले अमेरिका ने रूस से जुड़े ऊर्जा व्यापार को लेकर भारत पर अतिरिक्त दबाव बनाया था, जिसे अब नई समझ के तहत समाप्त कर दिया गया है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद समाप्त करने के समझौते के तहत 25 प्रतिशत का अतिरिक्त रूसी तेल-संबंधित टैरिफ हटाया जा रहा है। इस फैसले के बाद कुल अमेरिकी पारस्परिक टैरिफ 25 प्रतिशत से घटकर सीधे 18 प्रतिशत पर आ गया है। इसे भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस समझौते की पुष्टि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए की। उन्होंने लिखा कि नए समझौते के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। ट्रंप ने इसे ऊर्जा सहयोग और भू-राजनीतिक लक्ष्यों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि यह फैसला दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देगा। ट्रंप के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बातचीत में व्यापार, रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका से, साथ ही संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह कदम अमेरिका की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत वह अपनी व्यापार नीति को ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक उद्देश्यों से जोड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले पर संतोष जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि यह जानकर खुशी हुई कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर अब 18 प्रतिशत का कम टैरिफ लगेगा। उन्होंने कहा कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र साथ मिलकर काम करते हैं, तो इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलता है और सहयोग के नए अवसर सामने आते हैं।वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ सीधे तौर पर उसकी रूसी तेल खरीद से जुड़ा था। अब नई दिल्ली की ओर से दी गई प्रतिबद्धता के बाद इसे पूरी तरह हटा लिया गया है। यह फैसला इस बात का संकेत है कि अमेरिका व्यापारिक फैसलों को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और भू-राजनीतिक नजरिए से भी देख रहा है। गौरतलब है कि अमेरिकी टैरिफ में यह कटौती भारत के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। इससे न केवल भारत की निर्यात क्षमता बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में उसकी विश्वसनीयता और रणनीतिक अहमियत भी मजबूत होगी। आने वाले समय में इसका असर निवेश, रोजगार और भारत-अमेरिका संबंधों की गहराई पर भी साफ तौर पर दिखाई देने की उम्मीद है।

GUNA CRIMES : स्कूल परिसर में नाबालिग छात्र से मारपीट, दो युवकों के खिलाफ मामला दर्ज; सीसीटीवी में कैद हुई घटना

GUNA SCHOOL

GUNA CRIMES : गुना। शहर के वंदना कॉन्वेंट स्कूल परिसर में कक्षा सातवीं के एक 13 वर्षीय नाबालिग छात्र के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। बता दें कि घटना स्कूल प्रांगण के भीतर घटित हुई, जिसके बाद स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। BHIND VIRAL VIDEO: भिंड में कथित साधुओं से सरेआम मारपीट, धार्मिक पहचान पर उठे सवाल; वीडियो वायरल जान से मारने की दी धमकी जानकारी के अनुसार बच्चों के आपसी विवाद के बाद दो युवक स्कूल परिसर में पहुंचे और नाबालिग छात्र के साथ मारपीट की। आरोप है कि युवकों ने छात्र को बुरी तरह से पीटा और जान से मारने की धमकी भी दी। बताया जा रहा है कि घटना के बाद छात्र भयभीत हो गया, जिसको लेकर परिजनों में आक्रोश देखने को मिला। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज घटना के बाद पीड़ित छात्र की मां शीलम शर्मा ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है। पुलिस ने स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को भी जांच में शामिल किया है, ताकि घटना की पुष्टि की जा सके और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो। कोतवाली पुलिस ने आरोपियों ऋतुराज बैस और हनी बैस के खिलाफ अपराध दर्ज किया है, और मामले की गहन जांच की जा रही है । ASHOKNAGAR RAIN: अब नहीं मिलेगी ठंड से रहत, अशोकनगर में हुई बारिश सा बढ़ी ठिठुरन

अमेरिका-भारत व्यापार संबंध: ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत

नई दिल्‍ली । अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक अहम और सकारात्मक मोड़ देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का बड़ा फैसला लिया है। इस निर्णय को भारत में न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों की मजबूती के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। इस फैसले का भारत सरकार ने खुले दिल से स्वागत किया है। केंद्रीय रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के सहयोगी हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों की ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं और यही कारण है कि मिलकर काम करने से शांति, विकास और नवाचार के नए रास्ते खुल सकते हैं। अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के पास मिलकर ऐसी अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने की अपार क्षमता है, जिनसे न केवल दोनों देशों को बल्कि पूरे विश्व को लाभ मिल सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यापार केवल आर्थिक लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास, साझेदारी और साझा भविष्य की नींव भी रखता है। भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित और विकसित हो रहा व्यापार समझौता इसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जो दोनों देशों के उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी होगा। इससे भारत और अमेरिका के नागरिकों, उद्योगों, स्टार्टअप्स और तकनीकी क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है। टैरिफ में कटौती से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई टेलीफोन बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके उन्हें अत्यंत खुशी हुई और यह जानकर विशेष संतोष मिला कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने इस निर्णय के लिए भारत की 140 करोड़ जनता की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो उसका सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचता है। इससे न केवल व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ते हैं, बल्कि पारस्परिक सहयोग के नए आयाम भी खुलते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कदम भारत-अमेरिका साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के संदर्भ में भी राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका इन क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण है और भारत शांति के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों का पूरा समर्थन करता है। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मिलकर काम करने और भारत-अमेरिका संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। गौरतलब है कि इस महत्वपूर्ण फैसले से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर विस्तृत बातचीत हुई थी। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों देशों के नेता आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए निरंतर संपर्क में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में कटौती का यह फैसला भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को नई गति देगा। इससे न केवल व्यापारिक रिश्ते बेहतर होंगे, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग की भावना भी और गहरी होगी। कुल मिलाकर, यह कदम भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग का एक मजबूत संकेत है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।

नियमित जांच से कैंसर पर शुरुआती दौर में लगाया जा सकता है ब्रेक..

नई दिल्ली। कैंसर आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में शामिल है। हालांकि मेडिकल साइंस में लगातार प्रगति हो रही है, लेकिन समय पर पहचान न होने के कारण यह बीमारी लाखों लोगों की जान ले लेती है। भारत में कैंसर के अधिकांश मामलों का पता तीसरे या चौथे स्टेज में चलता है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है और मृत्यु दर बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही समय पर जरूरी हेल्थ चेकअप कराए जाएं, तो कैंसर को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है। GLOBOCAN 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 14.1 लाख नए कैंसर मामले सामने आए, जबकि लगभग 9.2 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह लेट डायग्नोसिस है। शुरुआती स्टेज में कैंसर अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ता रहता है, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। लेट डायग्नोसिस क्यों है खतरनाकजब कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच जाता है, तब यह शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका होता है। इस स्थिति में इलाज न केवल महंगा होता है बल्कि सफल होने की संभावना भी कम हो जाती है। यही कारण है कि डॉक्टर शुरुआती पहचान को कैंसर से लड़ाई का सबसे मजबूत हथियार मानते हैं। एक्सपर्ट द्वारा बताए गए 6 जरूरी हेल्थ चेकअप ब्लड टेस्टसामान्य ब्लड जांच से शरीर में असामान्य बदलाव, संक्रमण या ट्यूमर मार्कर के संकेत मिल सकते हैं। यह शुरुआती चेतावनी का काम करता है। मैमोग्राफीमहिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी की सलाह दी जाती है। पैप स्मीयर टेस्टयह सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान में सहायक होता है। समय पर जांच से इस कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैनपेट, लिवर, किडनी और अन्य अंगों में होने वाले ट्यूमर की पहचान के लिए यह जांच महत्वपूर्ण होती है। कोलोनोस्कोपीयह जांच आंतों और कोलन कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाने में मदद करती है, खासकर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए। ओरल स्क्रीनिंगतंबाकू, गुटखा या धूम्रपान करने वालों के लिए मुंह और गले की नियमित जांच बेहद जरूरी होती है, जिससे ओरल कैंसर की समय रहते पहचान हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का डर पालने की बजाय जागरूकता और नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। संतुलित आहार, व्यायाम और समय-समय पर मेडिकल चेकअप से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।समय रहते पहचान न केवल इलाज को आसान बनाती है बल्कि जीवन को भी बचा सकती है।

जरूरत की खबर: क्या आपकी सेहत के लिए सही है फ्रोजन मटर? जानें इसे खरीदने के 6 गोल्डन रूल्स और सही इस्तेमाल का तरीका

नई दिल्ली। सर्दियों के खत्म होते ही ताजी मटर बाजार से गायब होने लगती है, ऐसे में फ्रोजन मटर ही एकमात्र विकल्प बचती है। ‘रेडी-टू-यूज’ होने के कारण यह न केवल समय बचाती है, बल्कि छीलने के झंझट से भी मुक्ति दिलाती है। लेकिन क्या यह उतनी ही पौष्टिक है जितनी ताजी मटर? एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सही तरीके से चुनी और इस्तेमाल की जाए, तो फ्रोजन मटर ताजी मटर का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है।फ्रोजन मटर: ताजी मटर से कितनी अलग? अक्सर लोग इसे ‘प्रोसेस्ड फूड’ मानकर घबराते हैं, लेकिन डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि फ्रोजन मटर को ‘ब्लांचिंग’ प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसमें मटर को पहले उबलते पानी में डाला जाता है और फिर तुरंत ठंडा कर फ्रीज किया जाता है। यह प्रक्रिया मटर के प्राकृतिक रंग, स्वाद और पोषक तत्वों को ‘लॉक’ कर देती है। कई मामलों में, फ्रोजन मटर उन ताजी मटर से बेहतर हो सकती है जो कई दिनों तक ट्रांसपोर्टेशन या धूप में रखी रहती हैं।खरीदते समय बरतें ये 6 सावधानियां बाजार से फ्रोजन मटर का पैकेट उठाते समय इन बातों का खास ख्याल रखें:पैकेट को हिलाकर देखें: मटर के दाने अलग-अलग महसूस होने चाहिए। यदि वे एक बड़े बर्फ के गोले की तरह जमे हुए हैं, तो इसका मतलब है कि पैकेट को पहले पिघलाया गया और फिर दोबारा फ्रीज किया गया है । ऐसे पैकेट न खरीदें। बर्फ की परत: अगर पैकेट के अंदर बहुत अधिक बर्फ जमी है, तो यह नमी और खराब स्टोरेज की निशानी है। एक्सपायरी डेट: हमेशा मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट चेक करें। फ्रोजन मटर आमतौर पर 6-12 महीने तक अच्छी रहती है। पैकेट की बनावट: पैकेट कहीं से फटा या ढीला नहीं होना चाहिए। सीलबंद पैकेट ही लें। रंग: दानों का रंग गहरा हरा होना चाहिए। यदि रंग हल्का पीला या सफेद पड़ रहा हो, तो मटर पुरानी हो सकती है। पिक-अप टाइम: ग्रोसरी शॉपिंग के दौरान फ्रोजन मटर सबसे अंत में उठाएं ताकि वह घर पहुँचने तक ज्यादा न पिघले। इस्तेमाल करने का सही तरीका डायरेक्ट कुकिंग न करें: फ्रोजन मटर को फ्रीजर से निकालकर सीधे गरम तेल या तड़के में न डालें।गुनगुना पानी: इस्तेमाल से 5-10 मिनट पहले मटर को सामान्य या गुनगुने पानी में भिगोकर रखें। इससे इसकी बर्फ पिघल जाएगी और यह अपनी प्राकृतिक कोमलता में आ जाएगी। ओवरकुकिंग से बचें: चूंकि फ्रोजन मटर पहले से ही ‘ब्लांच’ होती है, इसलिए इसे ताजी मटर की तुलना में बहुत कम पकाने की जरूरत होती है। ज्यादा पकाने से इसके विटामिन सी और बी-कॉम्प्लेक्स नष्ट हो सकते हैं।