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DATIYA POLITICS: संगठन विस्तार की तैयारी: दतिया भाजपा के 16 मंडलों में प्रभारी नियुक्त; जाने कौन-कौन है शामिल!

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DATIYA POLITICS: दतिया। भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जिला अध्यक्ष ए. रघुवीर सिंह कुशवाहा ने जिले के 16 मंडलों के लिए मंडल प्रभारियों की घोषणा कर दी है। बता दें कि इस निर्णय का उद्देश्य संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करना और बूथ स्तर तक पार्टी की पकड़ को मजबूत करना है। World Cancer Day 2026: भारत में हर दिन 4,000 से ज्यादा लोग हो रहे कैंसर का शिकार, आंकड़े बढ़ा रहे चिंता जिला पदाधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी जारी आदेश के अनुसार, बसई, उदगंवा, सीतापुर, दतिया नगर, दतिया ग्रामीण, बड़ौनी, इमिलिया, भांडेर, उनाव, सालोन बी, उड़ीना, इंदरगढ़ ग्रामीण, इंदरगढ़ नगर, थरेट, सेवढ़ा ग्रामीण और सेवढ़ा नगर सहित कुल 16 मंडलों में प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। इन सभी मंडलों की जिम्मेदारी जिला पदाधिकारियों को सौंपी गई है। MORENA CRIMES: दलित युवक के साथ अमानवीय व्यवहार, मुर्गा बनाकर पीटा; वीडियो सामने आने पर आरोपी गिरफ्तार बूथ स्तर तक समन्वय और सक्रियता पर जोर मंडल प्रभारियों को संगठनात्मक कार्यक्रमों को गति देने, कार्यकर्ताओं से निरंतर संवाद बनाए रखने, बूथ स्तर तक समन्वय स्थापित करने और पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। Sanitation workers’ protest: 3 महीने से वेतन नहीं मिलने पर भड़के सफाईकर्मी, विधायक बाबू जंडेल का अल्टीमेटम: 4 दिन में पेमेंट नहीं तो FIR आगामी राजनीतिक गतिविधियों में मिलेगा लाभ जिला नेतृत्व का मानना है कि इस नई व्यवस्था से संगठन की जमीनी पकड़ मजबूत होगी और आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों में पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलेगी। MAHARASHTRA DEPUTY CM: अजित पवार के निधन के चौथे दिन सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री 16 मंडलों में प्रभारीयों की पूरी सूची

MP: BJP विधायक का छलका दर्द, 'कुछ साल पहले तक CM, आधी कैबिनेट हमारी होती थी, अब कुछ…'

मध्य प्रदेश ।मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने सागर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। प्रदेश के सबसे वरिष्ठ विधायकों में शुमार गोपाल भार्गव ने मंच से ब्राह्मण समाज और मौजूदा हालात को लेकर अपनी पीड़ा खुलकर जाहिर की। उनका कहना था कि आज कई संगठनों का एक ही एजेंडा रह गया है ब्राह्मणों को दबाना, उन्हें हाशिए पर ले जाना और उनके खिलाफ माहौल बनाना। आज ब्राह्मण समाज आंखों में खटक रहा है कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने कहा कि ब्राह्मण समाज आज कई लोगों की आंखों में खटक रहा है। उन्होंने चिंता जताते हुए सवाल किया कि आखिर नियम-कानून बनाते समय हमेशा ब्राह्मण समाज को ही क्यों निशाना बनाया जाता है। भार्गव ने कहा कि अब समय आ गया है कि ब्राह्मण समाज एकजुट होकर अपनी सामाजिक और धार्मिक पहचान की रक्षा के लिए आगे आए। कुछ साल पहले तक सीएम और आधी कैबिनेट हमारी होती थी अपने संबोधन में वरिष्ठ विधायक ने राजनीतिक परिदृश्य में आए बदलावों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक मुख्यमंत्री हमारे होते थे, प्रशासन में अधिकारी हमारे होते थे और यहां तक कि आधी से ज्यादा कैबिनेट भी ब्राह्मण समाज से आती थी। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि गिने-चुने लोग ही बचे हैं। भार्गव का यह बयान न केवल समाज की स्थिति पर सवाल उठाता है, बल्कि सत्ता और प्रतिनिधित्व में आए बदलाव की ओर भी संकेत करता है। यूजीसी और नियमों पर उठाए सवाल गोपाल भार्गव ने यूजीसी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अन्य संस्थाओं के नियमों को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकतर नियम और नीतियां ब्राह्मण समाज के खिलाफ ही बनाई जा रही हैं। उन्होंने इसे चिंताजनक बताते हुए समाज से जागरूक होने और संगठित रहने की अपील की। पहले भी आ चुके हैं संवेदनशील बयान यह मामला इसलिए और गंभीर माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में कुछ आईएएस अधिकारियों के बयान भी चर्चा में रहे हैं। पहले आईएएस संतोष वर्मा का ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिया गया विवादित बयान सामने आया, फिर आईएएस नियाज खान ने सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समाज के समर्थन में टिप्पणी की। अब एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता का ऐसा बयान पूरे मुद्दे को और संवेदनशील बना रहा है। सम्मान समारोह में दिया गया बयान गौरतलब है कि विधायक गोपाल भार्गव रविवार 1 फरवरी 2026 को सागर शहर के रविंद्र भवन में आयोजित ब्राह्मण समाज की पत्रिका के विमोचन एवं मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इसी मंच से उन्होंने यह बयान दिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे चुका है।

मोदी-ट्रंप की दोस्ती ने आसान की राह, लेकिन डील वार्ताकारों ने गढ़ी: मोबियस

नई दिल्ली । अरबपति निवेशक और उभरते बाजारों के दिग्गज विशेषज्ञ मार्क मोबियस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का यूरोपीय संघ के साथ हालिया व्यापारिक समझौता अमेरिका के लिए एक स्पष्ट संकेत था, जिसके बाद उसने भारत के साथ अपने समझौते को तेजी से अंतिम रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाए। नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत के दौरान मोबियस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंधों ने इस प्रक्रिया को आसान जरूर बनाया, लेकिन समझौते को वास्तविक आकार दोनों देशों के पेशेवर वार्ताकारों ने ही दिया है।मोबियस ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को फादर ऑफ ऑल ट्रेड डील कहना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, भारत का यूरोपीय संघ के साथ हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत का यूरोपीय संघ के साथ आगे बढ़ना उसकी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है। इसी कदम ने संभवतः अमेरिका को यह एहसास कराया कि भारत वैश्विक व्यापार में विकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे अमेरिका को भी अपने समझौते में तेजी लानी पड़ी।जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी अपनी व्यक्तिगत कूटनीति के चलते अमेरिका से बेहतर शर्तें हासिल कर पाए, तो मोबियस ने कहा कि अच्छे नेताओं के संबंध प्रक्रिया को सुगम बना सकते हैं, लेकिन किसी भी समझौते की बुनियाद पेशेवर बातचीत और तकनीकी वार्ताओं पर ही टिकी होती है। भारत की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए मोबियस ने भरोसा जताया कि देश निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर मजबूती से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की विकास दर कहीं अधिक स्थिर और मजबूत है।शेयर बाजार को लेकर मोबियस ने सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारतीय शेयर बाजार का एक लाख का आंकड़ा छूना मुश्किल दिखता है, क्योंकि इसके लिए लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि जरूरी होगी, जो मौजूदा परिस्थितियों में बहुत तेज़ मानी जाएगी। हालांकि, उन्होंने भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को बेहद सकारात्मक बताया। मोबियस के अनुसार, देश की युवा आबादी, तेज़ शहरीकरण और बढ़ता उपभोक्ता आधार आर्थिक मजबूती की बड़ी वजह हैं। इसके साथ ही निर्यात में लगातार हो रही बढ़ोतरी भी भारत को आने वाले वर्षों में उच्च विकास दर बनाए रखने में मदद करेगी।

आज से श्रीलंका में भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की ऐतिहासिक प्रदर्शनी

नई दिल्ली । भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष आज से श्रीलंका में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रदर्शित किए जाएंगे। यह ऐतिहासिक अवशेष इंडियन एयरफोर्स के विशेष विमान सी 130जे के माध्यम से नई दिल्ली से कोलंबो पहुंचाए गए हैं। पवित्र अवशेषों को कोलंबो के प्रसिद्ध गंगारामया मंदिर में रखा गया है, जहां हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। कोलंबो स्थित भारतीय हाई कमीशन ने जानकारी दी है कि ये पवित्र अवशेष 4 से 11 फरवरी तक गंगारामया मंदिर में सुरक्षित रखे जाएंगे। सार्वजनिक पूजा और दर्शन की शुरुआत 5 फरवरी से होगी। 11 फरवरी 2026 को यह पवित्र धरोहर वापस भारत लाई जाएगी। यह देवनीमोरी अवशेषों का पहला अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक प्रदर्शन माना जा रहा है।यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा का हिस्सा है, जिसके तहत भारत अपनी बौद्ध विरासत को विश्व के साथ साझा कर रहा है। इसका उद्देश्य सीमाओं के पार सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करना है। भारत सरकार की इस पहल को बौद्ध समुदायों के बीच ऐतिहासिक और भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्रीलंका में इस प्रदर्शनी के दौरान बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, स्थानीय श्रद्धालु और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री पहुंचने की उम्मीद है। सभी को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन और श्रद्धांजलि देने का दुर्लभ अवसर मिलेगा।भारतीय हाई कमीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया भाषण का वीडियो साझा करते हुए कहा कि भारत वियतनाम से मंगोलिया और थाईलैंड से रूस तक अपनी बौद्ध विरासत को साझा करता रहा है। जैसे ही देवनीमोरी अवशेष श्रीलंका पहुंचेंगे, यह स्पष्ट होगा कि भारत भगवान बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश के जरिए दुनिया को कैसे जोड़ रहा है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हाल के महीनों में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष जहां भी प्रदर्शित किए गए, वहां आस्था और भक्ति की लहर देखने को मिली।भारत में श्रीलंका की हाई कमिश्नर महिशिनी कोलोन ने इस पहल को श्रीलंका के लिए एक अनोखा आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि यह अवशेषों का पहला अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन है और इसके लिए भारत सरकार तथा सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। गौरतलब है कि जनवरी की शुरुआत में नई दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपराहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन भी प्रधानमंत्री मोदी ने किया था। उस अवसर पर उन्होंने बौद्ध विरासत स्थलों के विकास और युवा पीढ़ी को बौद्ध मूल्यों से जोड़ने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई थी।

स्पेसएक्स और xAI का ऐतिहासिक विलय, इलॉन मस्क की कंपनी बनी 1 ट्रिलियन डॉलर की ताकत

नई दिल्ली । दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क ने तकनीक और अंतरिक्ष उद्योग में अब तक का सबसे बड़ा कॉरपोरेट कदम उठाया है। उनकी रॉकेट और सैटेलाइट निर्माण कंपनी स्पेसएक्स का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप xAI के साथ औपचारिक रूप से विलय कर दिया गया है। इस मर्जर के बाद स्पेसएक्स की कुल वैल्यूएशन 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे यह दुनिया की सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों में शामिल हो गई है। इस विलय के साथ स्पेसएक्स अब केवल अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक AI रेस में भी एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगी। xAI वही कंपनी है जिसने चर्चित AI चैटबॉट ग्रोक को विकसित किया है। इलॉन मस्क ने इस डील को दो बड़े मिशनों के एकीकरण की संज्ञा देते हुए कहा कि यह मानवता के भविष्य को आकार देने वाला कदम है। डील से जुड़ी जानकारी के अनुसार xAI की वैल्यूएशन करीब 250 बिलियन डॉलर आंकी गई है। समझौते के तहत xAI के निवेशकों को प्रत्येक शेयर के बदले स्पेसएक्स के 0.1433 शेयर दिए जाएंगे। कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को शेयर के स्थान पर नकद भुगतान का विकल्प भी दिया गया है, जिसकी कीमत 75.46 डॉलर प्रति शेयर तय की गई है। इसे कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े और जटिल सौदों में गिना जा रहा है। इस विलय के पीछे सबसे बड़ी वजह AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बढ़ती चुनौतियां मानी जा रही हैं। मौजूदा समय में AI मॉडल्स को ट्रेन और ऑपरेट करने के लिए धरती पर विशाल डेटा सेंटर्स बनाए जा रहे हैं, जिनमें भारी मात्रा में बिजली और कूलिंग की जरूरत होती है। इससे न केवल ऊर्जा संकट गहराता है, बल्कि पर्यावरण पर भी दबाव बढ़ता है। मस्क का मानना है कि धरती पर AI की बढ़ती ऊर्जा मांग लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। इसी सोच के तहत स्पेसएक्स अंतरिक्ष आधारित AI इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी ने अमेरिकी संचार नियामक संस्था FCC के पास पृथ्वी की कक्षा में लगभग 10 लाख डेटा सेंटर सैटेलाइट्स लॉन्च करने की अनुमति के लिए आवेदन किया है। मस्क का दावा है कि अगले दो से तीन वर्षों में अंतरिक्ष में AI कंप्यूटिंग करना धरती की तुलना में सबसे सस्ता और प्रभावी विकल्प बन सकता है। xAI की स्थापना 9 मार्च 2023 को की गई थी और अप्रैल 2023 में इसे सार्वजनिक रूप से पेश किया गया। अब स्पेसएक्स और xAI का यह विलय अंतरिक्ष तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऊर्जा के भविष्य को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

संसद में गद्दार बयान से सियासी भूचाल और राहुल गांधी पर सिख समाज के अपमान का आरोप

नई दिल्ली । संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी तीखे टकराव के बीच एक नया और संवेदनशील विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर आरोप है कि उन्होंने संसद परिसर में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को गद्दार कहा। इस कथित टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में ही नहीं, बल्कि सिख समाज में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मामला इतना बढ़ गया कि भारतीय जनता पार्टी के कई सिख नेताओं ने एकजुट होकर राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत संसद परिसर में हुई कथित नोकझोंक से मानी जा रही है। आरोप है कि राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ट्रेटर यानी गद्दार कहा। इस पर तुरंत पलटवार करते हुए बिट्टू ने राहुल गांधी को देश का दुश्मन बताया। दोनों नेताओं के बीच हुई इस जुबानी जंग ने राजनीतिक विवाद को सामाजिक और भावनात्मक मुद्दे में बदल दिया, क्योंकि यह टिप्पणी एक सिख नेता को लेकर की गई थी। राहुल गांधी की कथित टिप्पणी के बाद सिख समाज में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। बीजेपी के सिख नेताओं का कहना है कि किसी सिख नेता को गद्दार कहना पूरे सिख समाज का अपमान है। इसी सिलसिले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीजेपी नेता आरपी सिंह और अरविंदर सिंह लवली ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा एक सिख नेता को गद्दार कहना बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हम सभी सिख समाज से आते हैं और सिखों का इतिहास देशभक्ति, बलिदान और त्याग से भरा हुआ है। पुरी ने कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही को लगातार बाधित करने का आरोप भी लगाया और कहा कि विपक्ष जानबूझकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। आरपी सिंह ने राहुल गांधी के पुराने बयानों और रुख का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून  का भी विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि राजीव गांधी फाउंडेशन में विदेशी फंडिंग कहां से आई, इस पर भी कांग्रेस को जवाब देना चाहिए। आरपी सिंह ने कहा कि संसद के भीतर और बाहर मर्यादा और भाषा की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है। बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस मुद्दे पर सबसे तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और उनका परिवार शुरू से ही सिखों के खिलाफ मानसिकता रखते आए हैं। सिरसा ने आरोप लगाया कि सिखों को हमेशा आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश की गई, जबकि सच्चाई यह है कि सिखों ने देश की सीमाओं पर अपनी जान कुर्बान की है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया, उन्हें गद्दार कहना न केवल अपमानजनक है बल्कि अक्षम्य अपराध भी है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने 1980 के दशक की घटनाओं का जिक्र करते हुए गांधी परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अगर कोई गद्दार है तो वह गांधी परिवार है, जिसने दरबार साहिब पर टैंक और तोपें चलवाईं, अकाल तख्त साहिब को गिराया और निर्दोष सिखों को जिंदा जलाया। उन्होंने इसे सिख समाज की तौहीन बताते हुए कहा कि यह बयान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने लोकसभा स्पीकर से राहुल गांधी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। आरपी सिंह ने आगे कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू केवल एक सांसद नहीं हैं, बल्कि वे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, जिन्होंने आतंकवाद के दौर में शांति बहाल करने के लिए अपनी जान गंवाई। ऐसे परिवार से आने वाले व्यक्ति को गद्दार कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समाज की पहचान एकता, भाईचारे और “पंगत” की परंपरा से है, जहां सभी बराबरी से बैठते हैं। अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी से सिख समाज में गहरा गुस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पहले भी सिखों के खिलाफ रुख अपनाते रहे हैं और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े विधेयकों के साथ भी उनका व्यवहार सम्मानजनक नहीं रहा। इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने उनके बयान की निंदा करते हुए माफी और कार्रवाई की मांग की। कुल मिलाकर, संसद के भीतर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक सीमा से निकलकर सामाजिक और ऐतिहासिक भावनाओं से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या संसद या अन्य संवैधानिक संस्थाएं इस मामले में कोई कदम उठाती हैं।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील का असर बरकरार, शेयर बाजार में आज भी तेजी के मजबूत संकेत

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौते का असर भारतीय शेयर बाजार में लगातार दिखाई दे रहा है। मंगलवार को बाजार में आई जोरदार तेजी के बाद आज के कारोबार में भी निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बना हुआ है। बाजार संकेतकों और सेक्टोरल ट्रेंड्स से साफ है कि फिलहाल निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर है और बाजार में विश्वास कायम है। मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स दो हजार अंकों से अधिक की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी ने ढाई प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती दर्ज की। यह तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप सभी श्रेणियों में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। बाजार की इस मजबूती को भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी सकारात्मक उम्मीदों से जोड़कर देखा जा रहा है। सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो रियल्टी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर ने बाजार को ऊपर खींचने में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही हेल्थकेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मा, एनर्जी, ऑटो और मेटल सेक्टर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार की मजबूती व्यापक आधार पर बनी हुई है।मुख्य सूचकांकों में शामिल अधिकांश शेयर हरे निशान में बंद हुए। बैंकिंग, पावर, मैन्युफैक्चरिंग, एविएशन और कंज्यूमर सेक्टर से जुड़े शेयरों में मजबूत खरीदारी दर्ज की गई। हालांकि, कुछ आईटी और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में हल्का दबाव देखा गया, जिससे साफ है कि निवेशक सेक्टर चयन को लेकर सतर्क भी बने हुए हैं। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी का रुझान बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब तीन प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। बाजार की चौड़ाई मजबूत रहने से निवेशकों के भरोसे को बल मिला है।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यापार समझौते से निर्यात आधारित उद्योगों को लंबी अवधि में लाभ मिल सकता है। खासतौर पर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट और आईटी सर्विसेज से जुड़े क्षेत्रों में आगे बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की स्थिति मजबूत होने से ऑर्डर और राजस्व में इजाफा हो सकता है। हालांकि जानकारों की राय है कि तेजी के माहौल में भी निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। वैश्विक बाजारों के संकेत, ब्याज दरों में बदलाव और कच्चे तेल की कीमतों जैसे कारकों पर नजर रखना जरूरी होगा। कुल मिलाकर, मौजूदा संकेत यही बताते हैं कि भारत-अमेरिका ट्रेड समझौते का असर फिलहाल बाजार में बना रह सकता है।

कृषक कल्याण वर्ष-2026: वैज्ञानिक तकनीक और कृषि रथ से किसानों तक पहुँची आधुनिक खेती की जानकारी

भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इस महाअभियान का उद्देश्य कृषि को आधुनिक तकनीक, परम्परागत ज्ञान और प्राकृतिक संतुलन के साथ नई ऊँचाइयों तक ले जाना तथा अन्नदाता के सम्मान और समग्र उत्थान को सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में बुरहानपुर जिले में जिला स्तरीय कार्यक्रम एवं संवाद-सत्र का आयोजन किया गया, जहाँ मुख्यमंत्री की इस पहल के अंतर्गत “कृषि रथ” को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में बुरहानपुर विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस, जनप्रतिनिधि एवं प्रगतिशील कृषकगण उपस्थित रहे। कृषि रथ के माध्यम से जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में पहुँचकर किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इसमें जैविक एवं प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, विभागीय योजनाएँ, ई-टोकन आधारित उर्वरक वितरण व्यवस्था तथा पराली प्रबंधन से संबंधित जानकारियाँ शामिल हैं। विशेष रूप से किसानों को उनकी मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के अनुसार सही फसल और खेती के उपयुक्त कॉम्बिनेशन की जानकारी दी जा रही है, जिससे उत्पादन लागत कम हो और लाभ अधिक मिले। बुरहानपुर जिले में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, पशुपालन विभाग और सहकारिता विभाग की संयुक्त टीम द्वारा ग्राम पंचायत पातोंडा, चिंचाला और एमागिर्द में कृषक चौपालों का आयोजन किया गया। इन चौपालों में उर्वरक वितरण की ई-टोकन प्रणाली, प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटक जैसे जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दसपर्णी अर्क बनाने की विधियों की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए मिट्टी नमूना लेने की सही विधि और संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी गई। कृषकों को दलहन एवं तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए जायद फसल के रूप में उड़द और मूंगफली की खेती के बारे में जानकारी दी गई और बुवाई के लिए प्रेरित किया गया। जिले के विभिन्न गांवों में आयोजित हो रही कृषक चौपालों में पराली प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी किसानों को जागरूक किया जा रहा है। कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत ग्राम बाकड़ी में भी कृषि रथ पहुँचा, जहाँ चौपाल लगाकर किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की बारीक जानकारी दी गई। जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण और उर्वरकों के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। कृषि रथ गांव-गांव पहुँचकर किसानों को जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत बुरहानपुर जिले में प्रत्येक गुरुवार को महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि उपज मंडी, शनवारा में “प्राकृतिक हाट बाजार” का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर श्री हर्ष सिंह ने हाट बाजार का अवलोकन करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है और इससे सुरक्षित व पौष्टिक उत्पाद उपलब्ध होते हैं। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

दलहन क्षेत्र को नई दिशा देगा राष्ट्रीय सम्मेलन, 7 फरवरी को सीहोर के अमलाहा में होगा आयोजन

मध्यप्रदेश ।दलहन उत्पादन एवं उत्पादकता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में 7 फरवरी को मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा में दलहन क्षेत्र का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन को दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण, अनुसंधान और नवाचार के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। कार्यक्रम में दलहन उत्पादन से जुड़ी मूल संवेदनाओं, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करना, किसानों की आय बढ़ाना और उन्नत तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान को नई दिशा देगा तथा राष्ट्रीय स्तर पर ठोस रणनीति तैयार करने में सहायक सिद्ध होगा। सम्मेलन में देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, सरकारी बीज उत्पादक संस्थाएँ, दाल उद्योग से संबंधित प्रतिनिधि तथा अन्य सहयोगी एजेंसियाँ भाग लेंगी। विभिन्न राज्यों के अनुभवों और सफल मॉडलों के आदान-प्रदान से दलहन विकास के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान किसानों तक नवीन शोध, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक खेती पद्धतियों और बाजार से जुड़ी आवश्यक जानकारी पहुँचाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। सम्मेलन में यह भी चर्चा की जाएगी कि किस प्रकार वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों को खेत स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाकर दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। दलहन फसलों की बढ़ती मांग और पोषण सुरक्षा के महत्व को देखते हुए यह सम्मेलन न केवल किसानों के लिए बल्कि नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के लिए भी अत्यंत उपयोगी साबित होगा। आयोजकों का मानना है कि इस राष्ट्रीय सम्मेलन से निकलने वाले निष्कर्ष और सुझाव देश में दलहन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे और किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मध्यप्रदेश: स्वास्थ्य अधोसंरचना विस्तार से स्वास्थ्य संकेतकों में तेज सुधार, मेडिकल हब बनने की ओर प्रगति

भोपाल । मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर सशक्त करने के लिए समन्वित प्रयासों से स्वास्थ्य अधोसंरचना का व्यापक विस्तार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। मेडिकल शिक्षा, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में उल्लेखनीय प्रगति के साथ प्रदेश स्वास्थ्य संकेतकों में लगातार सुधार की ओर अग्रसर है। मातृ-शिशु स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश की मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 और शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 37 हो गई है। जननी सुरक्षा योजना एवं मुख्यमंत्री प्रसूति सहायता योजना के तहत लाखों लाभार्थियों को हजारों करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। नवजात एवं कुपोषण प्रबंधन में एसएनसीयू और एनआरसी की सफल डिस्चार्ज दरों में वृद्धि हुई है। जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत टीबी उन्मूलन में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष 5 राज्यों में शामिल है। सिकल सेल मिशन के तहत व्यापक स्क्रीनिंग और उपचार सुविधाएँ विकसित की गई हैं। आयुष्मान भारत योजना में 4.43 करोड़ कार्ड तैयार किए गए, जिससे पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये तक नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है। आपात स्थिति में गंभीर रोगियों को पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा से उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है, और अब तक 120 से अधिक नागरिकों को सेवा का लाभ मिला है। साथ ही निःशुल्क एवं सम्मानजनक शव-परिवहन सेवा भी प्रारंभ की गई है। राह-वीर योजना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिटों के माध्यम से नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित की जा रही हैं। मध्यप्रदेश मेडिकल हब बनने की दिशा में भी तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2003 तक प्रदेश में सिर्फ 6 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब 33 मेडिकल कॉलेज हैं। पिछले दो वर्षों में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 और निजी मेडिकल कॉलेज 12 से बढ़कर 14 हो गए हैं। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, इंदौर में 50 एमबीबीएस सीटों के साथ संचालन शुरू हो गया है। आगामी दो वर्षों में 6 शासकीय और पीपीपी मॉडल पर 13 मेडिकल कॉलेज शुरू करने की योजना है। सरकारी एमबीबीएस सीटें 2275 से बढ़कर 2850 हो गई हैं, जबकि कुल एमबीबीएस सीटें 5550 हो गई हैं। पीजी सीटें भी बढ़ाकर 2862 की गई हैं, साथ ही 93 सुपर स्पेशियलिटी सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। कटनी, धार, पन्ना और बैतूल में पीपीपी मॉडल पर नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना प्रगति पर है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर में 773.07 करोड़ रुपये के अधोसंरचनात्मक कार्य शुरू किए गए हैं। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज, रीवा के लिए 321.94 करोड़ और सतना मेडिकल कॉलेज से जुड़े नए अस्पताल के लिए 383.22 करोड़ रुपये के कार्य प्रारंभ हुए हैं। 13 नए नर्सिंग कॉलेजों के लिए 192.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के अंतर्गत इंदौर, जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में लिनियर एक्स-रेटर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर में सीटी स्कैन और एमआरआई, भोपाल और रीवा में कार्डियक कैथ लैब स्थापित की गई है। इंदौर और जबलपुर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाएँ शुरू हुई हैं, जबकि इंदौर में कार-टी सेल थेरेपी जैसी अत्याधुनिक सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेजों में 354 नए सीनियर रेजिडेंट पद सृजित किए गए और विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की व्यापक भर्ती की गई है।