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गाजियाबाद में रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला, सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर की आत्‍महत्‍या

गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ ‘भारत सिटी’ सोसाइटी की 9वीं मंजिल से कूदकर तीन सगी बहनों ने सामूहिक आत्महत्या कर ली। टीला मोड थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने न केवल पुलिस महकमे को हिला दिया है, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग के खतरनाक प्रभाव पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।देर रात मची चीख-पुकार घटना रात करीब 2 बजे की है, जब बी-1 टावर के फ्लैट नंबर 907 से गिरने की तेज आवाज सुनकर लोग सहम गए। मौके पर पहुँची पुलिस ने 16 वर्षीय निशिका, 14 वर्षीय प्राची और 12 वर्षीय पाखी के शव बरामद किए। तीनों नाबालिग बहनों ने एक साथ मौत की छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।सुसाइड या ‘गेम ओवर’? पुलिस को शक शुरुआती जांच में इस सामूहिक सुसाइड के तार ऑनलाइन गेमिंग की लत से जुड़ते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि तीनों बहनें मोबाइल पर किसी ‘कोरियन लवर’ नामक टास्क-बेस्ड गेम की आदी थीं। आशंका है कि इसी गेम के किसी आखिरी और घातक टास्क को पूरा करने के जुनून में उन्होंने यह कदम उठाया। पिता का छलका दर्द: ‘कोरोना काल से शुरू हुई थी लत मृतकाओं के पिता चेतन कुमार के अनुसार, लॉकडाउन और कोरोना काल के दौरान बच्चों के हाथ में मोबाइल आया और धीरे-धीरे उन्हें टारगेट-बेस्ड गेम्स का चस्का लग गया। पिता ने बताया कि तीनों बहनें हमेशा एक साथ रहती थीं चाहे पढ़ाई हो, खाना हो या सोना। उनकी यह एकजुटता अंत में इस भयानक हादसे का सबब बनेगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। पुलिस तीनों बहनों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच करा रही है। जांच में सामने आया है कि गेमिंग की लत के कारण वे नियमित स्कूल भी नहीं जा रही थीं। सोसाइटी के कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि घटना के समय की गतिविधियों का पता चल सके।

संपत्ति और मुआवजा विवाद पर शहडोल के परिवार में सड़क से थाने तक हाथापाई और गाली-गलौज

शहडोल / मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में पारिवारिक संपत्ति विवाद अचानक हाईवोल्टेज ड्रामा में बदल गया। बुढ़ार और धनपुरी थाना क्षेत्र के माली मोहल्ला निवासी परिवार के सदस्य सड़क पर आमने-सामने आ गए और थाने तक अपना विवाद लेकर पहुंचे। हाथापाई, झूमा-झपटी और गाली-गलौज के इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामले की शुरुआत बुढ़ार थाना क्षेत्र के जैन झरोखा के सामने सड़क पर हुई। माली मोहल्ला के अजय माली की कुछ साल पहले करंट लगने से मौत हो गई थी। उनकी पत्नी सोनम बाद में पुणे चली गई थी। अब सोनम के धनपुरी लौटने पर पति की मृत्यु के बाद मिली मुआवजा राशि और संपत्ति को लेकर देवर विजय और देवरानी के बीच विवाद शुरू हुआ। विवाद सड़क तक सीमित नहीं रहा और दोनों पक्ष थाने में पहुंचे। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी संघर्षरत पक्षों को शांत करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन हालात काबू में करना उनके लिए आसान नहीं रहा। पुलिस दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने में जुटी हुई है। यह विवाद और उसका वायरल वीडियो जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। परिवारिक संपत्ति और मुआवजा को लेकर शुरू हुआ मामूली झगड़ा हिंसक रूप लेने के बाद थाने तक पहुंच गया।

सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा जिन्‍हें खेल की बुनियादी समझ तक नहीं, उनसे क्रिकेट संघ मत चलाएं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को खेल संस्थाओं के संचालन को लेकर सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि क्रिकेट संघों की कमान ऐसे लोगों के हाथ में होनी चाहिए जिन्होंने खुद क्रिकेट खेला हो और संन्यास लिया हो, न कि उन लोगों के पास जिन्हें खेल की बुनियादी समझ तक नहीं है। शीर्ष अदालत महाराष्ट्र क्रिकेट संघ से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जिसमें एमसीए के चुनावों पर रोक लगाई गई थी। ये चुनाव छह जनवरी को प्रस्तावित थे। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोपों को आधार बनाया था। सदस्यता बढ़ोतरी पर कोर्ट की आपत्ति सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने एमसीए में सदस्यों की संख्या अचानक बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए। रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि वर्ष 1986 से 2023 तक संघ में 164 सदस्य थे, लेकिन इसके बाद बहुत कम समय में संख्या तेजी से बढ़ी। प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “इतने वर्षों में 164 सदस्य और फिर अचानक बंपर इजाफा कैसे?” एमसीए और एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि सदस्यता प्रक्रिया एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति की निगरानी में हुई थी। उन्होंने बताया कि समिति ने 48 आवेदनों को खारिज भी किया। साथ ही यह आरोप लगाया गया कि चैरिटी आयुक्त ने कैबिनेट से सलाह लिए बिना प्रशासक नियुक्त कर दिया।पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को देने की बात प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि संघ अपनी सदस्य संख्या 300 तक बढ़ाना चाहता है, तो पद पूर्व अंतरराष्ट्रीय और संन्यास ले चुके खिलाड़ियों के लिए आरक्षित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे क्रिकेट प्रेमी देश में काबिल खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “आप ऐसे लोगों को क्यों ला रहे हैं जिन्हें खेल की समझ नहीं है, जिन्हें बल्ला पकड़ना तक नहीं आता? हमें मजबूर न करें कि हम इस पर और कड़ी प्रतिक्रिया दें। क्या है मामला बॉम्बे हाईकोर्ट का यह आदेश केदार जाधव की याचिका पर आया था। उन्होंने एमसीए की मतदाता सूची में लगभग 401 नए सदस्यों को जोड़े जाने पर सवाल उठाते हुए चुनाव पर रोक की मांग की थी। जाधव का आरोप था कि इनमें से कई सदस्य एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार के करीबी रिश्तेदार या उनसे राजनीतिक-व्यावसायिक रूप से जुड़े लोग हैं, जिनमें उनकी पत्नी कुंती पवार और सांसद सुप्रिया सुले की बेटी भी शामिल हैं। याचिका में यह भी कहा गया था कि नए जोड़े गए कई सदस्य एनसीपी-एसपी से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, जिससे निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़े होते हैं।

भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

भोपाल /मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, आरपीएफ और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कछुए तस्करी का मामला पकड़ा है। रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान 311 कछुए बरामद किए गए और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। भोपाल के बैरागढ़ के संत हिरदाराम रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने बैग चेकिंग के दौरान दो बैगों में कुल 311 कछुए पकड़े। आरोपी अजय सिंह राजपूत पिता रामकुमार रेलवे कोच में अटेंडर का काम करता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि ढाई हजार रुपए की लालच में वह कछुओं को देवास और इंदौर भेजने के लिए ले जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग को जानकारी दी गई। तुरंत स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग का स्टाफ मौके पर पहुंचा और आरोपी को हिरासत में लिया। आरपीएफ की पूछताछ में यह सामने आया कि रविंद्र कश्यप नामक व्यक्ति ने ढाई हजार रुपए की लालच देकर आरोपी से कछुए तस्करी कराई। फिलहाल आरोपी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/23 पंजीबद्ध किया गया है। STF मामले की जांच में जुटी है और आरोपी से विस्तार से पूछताछ की जा रही है। आज उसे माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।यह मामला वन्यजीव तस्करी और रेलवे सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है

संघ प्रमुख मोहन भागवत का इंदौर-खरगोन प्रवास कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन लेकर आया

इंदौर /मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ मोहन भागवत का आगमन हुआ। वे इंदौर रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से खरगोन जिले के कसरावद के लिए रवाना हुए। सरसंघचालक का यह प्रवास संगठन कार्यकर्ताओं और समाज में सक्रिय लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कसरावद में डॉ मोहन भागवत श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन की ओर से आयोजित विचार-प्रेरक कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस आयोजन में सेवा कार्यों से जुड़े कार्यकर्ता और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय लोग उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्बोधन “मनुष्य निर्माण से राष्ट्र निर्माण” के विषय पर केंद्रित रहेगा। इस दौरान डॉ भागवत समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, संगठन शक्ति और सेवा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण जैसे मुद्दों पर मार्गदर्शन देंगे। संघ कार्यकर्ताओं के लिए यह प्रवास विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह सेवा और सामाजिक समरसता के आयामों को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा। कार्यक्रम के जरिए डॉ मोहन भागवत संगठन और समाज के बीच समन्वय बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने का प्रयास करेंगे। यह दौरा संघ के सेवा कार्य और सामाजिक योगदान को बढ़ावा देने में अहम माना जा रहा है।

सिस्टम से हारा सरपंच: नरसिंहपुर में पंचायत भवन के अंदर खुद को किया कैद, आत्मदाह की दी चेतावनी।

नरसिंहपुर/ मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने लोकतंत्र के जमीनी स्तर पंचायती राज और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के चीचली जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली सीरेगांव ग्राम पंचायत के सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने व्यवस्था से हारकर एक आत्मघाती कदम उठाने का ऐलान किया है। मंगलवार की रात से ही सरपंच ने खुद को पंचायत भवन के एक कमरे में कैद कर लिया है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं सुना गया, तो वे वहीं आत्मदाह कर लेंगे। क्या है पूरा मामला?सीरेगांव के सरपंच महेंद्र कुशवाहा का आरोप है कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी पंचायत में विकास कार्य कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यों और अन्य विकास परियोजनाओं में लगातार बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। सरपंच का कहना है कि उन्होंने ग्राम स्तर की समस्याओं के निराकरण के लिए कई बार जनपद पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर तक का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दर्जनों बार लिखित आवेदन दिए, जनसुनवाई में अपनी बात रखी, लेकिन हर बार उन्हें केवल ‘आश्वासन’ का झुनझुना थमा दिया गया। सरपंच का दर्द यह है कि एक चुना हुआ जनप्रतिनिधि होने के बावजूद वे अपने क्षेत्र की जनता की सेवा नहीं कर पा रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी जायज मांगों को सुनने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। वीडियो संदेश और ‘अंतिम फैसला’पंचायत भवन में खुद को कैद करने के बाद सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने एक वीडियो जारी किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सरपंच काफी भावुक और व्यथित नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं पिछले दो साल से प्रशासन से निवेदन कर रहा हूं कि मुझे काम करने दिया जाए और विकास कार्यों में सहयोग किया जाए, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। पिछले मंगलवार की जनसुनवाई में भी मैंने गुहार लगाई थी, पर मुझे सिर्फ प्रताड़ना मिली।” सरपंच ने वीडियो में स्पष्ट रूप से कहा कि यह उनका ‘अंतिम फैसला’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हुआ, तो वे पंचायत भवन के भीतर ही खुद को आग लगा लेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी। प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंपजैसे ही सरपंच के कैद होने और आत्मदाह की चेतावनी की खबर फैली, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का चरम कदम उठाना जिले की कानून-व्यवस्था और छवि के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और तहसील स्तर के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सरपंच को समझाने-बुझाने का दौर शुरू हुआ।यह घटना केवल एक सरपंच की नाराजगी भर नहीं है, बल्कि यह उस नौकरशाही की तस्वीर पेश करती है जहाँ एक जनप्रतिनिधि को अपनी आवाज सुनाने के लिए मौत को गले लगाने जैसी धमकी देनी पड़ती है। सीरेगांव की जनता अब इस उम्मीद में है कि शासन उनकी पंचायत की समस्याओं पर ध्यान देगा और सरपंच को न्याय मिलेगा, ताकि गांव में विकास के पहिये फिर से घूम सकें। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन सरपंच को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशों में जुटा है।

भोपाल सागर छिंदवाड़ा में बड़ी कार्यकारिणी पर रोक कांग्रेस संगठन के नए फरमान से असमंजस्य

मध्य प्रदेश /कांग्रेस संगठन में हाल ही में राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के निर्देश के बाद हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस के जिलों की कार्यकारिणी अब छोटी होगी और ज्यादा संख्या में सदस्यों की नियुक्ति पर रोक लगाई गई है। बड़े जिलों में 55 और छोटे जिलों में 35 सदस्य बनाए जाने की गाइडलाइन जारी की गई है। राष्ट्रीय महासचिव ने राज्यों की इकाई और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर यह निर्देश दिए हैं। इस गाइडलाइन को एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में बैठक में तय किया गया था। इसके साथ ही 15 दिन के भीतर जिलों की कार्यकारिणी बनाने का निर्देश भी दिया गया। मध्य प्रदेश में लंबे समय से जम्बो कार्यकारिणी की परंपरा रही है ताकि अलग-अलग गुटों को संतुलित किया जा सके। लेकिन नई गाइडलाइन आने के बाद कई जिलों में असमंजस्य की स्थिति पैदा हो गई है। 30 जनवरी को मध्य प्रदेश कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी की थी, जिसमें गाइडलाइन से ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए। छिंदवाड़ा जिला कार्यकारिणी में 240 सदस्य बनाए गए हैं जबकि सागर जिले में 150 से ज्यादा पदाधिकारी हैं। छोटे जिले मऊगंज में 40 पदाधिकारी हैं। वहीं भोपाल शहर की सूची में 106 और ग्रामीण क्षेत्र की सूची में 85 सदस्य बनाए गए हैं। नई गाइडलाइन लागू होने के बाद यह लंबी सूची राष्ट्रीय संगठन के निर्देशों के खिलाफ मानी जा रही है और अब कांग्रेस में असमंजस्य की स्थिति बन गई है।सभी जिलों में जल्द ही नए निर्देश के मुताबिक कार्यकारिणी तैयार करने की तैयारी शुरू हो गई है और संगठन स्तर पर इस पर निगरानी रखी जा रही है।

मध्यप्रदेश के राजा रघुवंशी मर्डर केस में बड़ा अपडेट कोर्ट ने बिल्डिंग मालिक और चौकीदार को किया दोषमुक्त

इंदौर /मध्यप्रदेश के इंदौर का राजा रघुवंशी हत्याकांड लंबे समय से सुर्खियों में रहा है। अब इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। इंदौर की कोर्ट ने बिल्डिंग के मालिक लोकेंद्र और चौकीदार बलवीर को दोषमुक्त कर दिया है। दोनों को पहले राजा की हत्या के बाद सबूत मिटाने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। लेकिन विस्तृत जांच में उनके और हत्या के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया। मामला तब शुरू हुआ जब राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी शादी के बाद हनीमून के लिए शिलॉन्ग, मेघालय गए थे। वहां राजा की लाश मिली थी। इस हत्याकांड में राजा की पत्नी सोनम ही मास्टरमाइंड निकली। शिलॉन्ग पुलिस ने सोनम के अलावा राज कुशवाह आकाश राजपूत आनंद और विशाल को भी गिरफ्तार किया था। सोनम रघुवंशी हत्या के बाद इंदौर आई थी और एक किराए के फ्लैट में रुकी थी। उस फ्लैट की बिल्डिंग का मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर था और चौकीदार बलवीर अहिरवार कार्यरत थे। शुरुआती जांच में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और आरोप लगाया कि उन्होंने हत्या के बाद कुछ सबूत मिटाने की कोशिश की थी। लेकिन कोर्ट में पेश की गई दूसरी चार्जशीट और विस्तृत जांच के बाद साफ हुआ कि बिल्डिंग मालिक और चौकीदार का हत्याकांड से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इस फैसले के बाद दोनों को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया।राजा रघुवंशी मर्डर केस अब भी सुर्खियों में है क्योंकि इस मामले में प्रमुख आरोपी सोनम रघुवंशी पर केस चल रहा है। इस मामले की जांच और कोर्ट की कार्रवाई पूरे देश की निगाहों में है।

सबका साथ, सबका विकास’ भारत की समावेशी सोच का प्रतीक: संयुक्त राष्ट्र मंच पर सावित्री ठाकुर का संदेश

नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण सत्र में भारत का पक्ष रखते हुए श्रीमती सावित्री ठाकुर ने कहा कि भारत का शासन दर्शन सबका साथ सबका विकास लोगों को विकास के केंद्र में रखने की वैश्विक प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उन्होंने कोपेनहेगन घोषणा और दोहा राजनीतिक घोषणा का स्मरण कराते हुए कहा कि भारत गरिमा समानता और अवसर को सुनिश्चित करने के लिए समग्र सरकार और संपूर्ण समाज के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है। श्रीमती ठाकुर ने भारत के व्यापक सामाजिक संरक्षण और समावेशन उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश में खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिल रहा है जो भूख और कुपोषण से लड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से 55 करोड़ से अधिक नागरिकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा देशभर में फैले 16000 जन आरोग्य केंद्रों के जरिए किफायती दवाएं और चिकित्सा उपकरण सुनिश्चित किए जा रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की चर्चा करते हुए बताया कि स्थानीय प्रशासन में 14 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि कार्यरत हैं जो जमीनी स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता और महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी पहलें बालिकाओं की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को नई मजबूती दे रही हैं। श्रम सुधारों का उल्लेख करते हुए श्रीमती ठाकुर ने कहा कि समान वेतन सुरक्षित कार्यस्थल और महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही बिना गारंटी वाले ऋणों ने लाखों महिलाओं उद्यमियों और स्ट्रीट वेंडरों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। स्माइल योजना जैसी लक्षित पहलें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और अन्य कमजोर वर्गों के पुनर्वास और सामाजिक समावेशन में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की विकास यात्रा में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण DBT और नागरिक भागीदारी का सफल एकीकरण किया गया है जिससे पारदर्शिता और अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाना संभव हुआ है। अंत में वसुधैव कुटुंबकम की भारतीय सभ्यतागत भावना को दोहराते हुए श्रीमती ठाकुर ने कहा कि भारत वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने के लिए अपने विकास अनुभव साझा करने को पूरी तरह तैयार है। इस सत्र में संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी रही। सत्र के बाद उन्होंने स्वीडन की सामाजिक सेवा मंत्री कैमिला वाल्टरसन ग्रोनवॉल से शिष्टाचार भेंट भी की।

प्रधानमंत्री मोदी ने संस्कृत सुभाषित के जरिए बताया हंसी का महत्व, कहा यह है स्वास्थ्य और प्रसन्नता की सर्वोत्तम औषधि

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान की गहराई को आधुनिक जीवन से जोड़ते हुए एक प्रेरणादायक संदेश साझा किया है। उन्होंने स्वास्थ्य और प्रसन्नता के लिए हंसी की शक्ति को रेखांकित करते हुए इसे जीवन की सर्वोत्तम औषधि बताया। प्रधानमंत्री ने यह संदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पूर्व में ट्विटर पर एक संस्कृत सुभाषित के माध्यम से साझा कियाजिसमें जीवन में मुस्कान और सकारात्मक सोच के महत्व को बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों में समझाया गया है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में संस्कृत का यह श्लोक उद्धृत किया औषधेष्वपि सर्वेषु हास्यं श्रेष्ठं वदन्ति ह। स्वाधीनं सुगमं चैव रोग्यानन्दविवर्धनम्। इस श्लोक का भावार्थ है कि सभी औषधियों में हंसी को सबसे श्रेष्ठ माना गया हैक्योंकि यह मनुष्य के अपने नियंत्रण में होती हैसहज रूप से उपलब्ध है और स्वास्थ्य के साथ-साथ आनंद को भी बढ़ाती है। प्रधानमंत्री ने इस सुभाषित के जरिए यह संदेश दिया कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल दवाइयों पर निर्भर रहना ही पर्याप्त नहीं हैबल्कि मानसिक प्रसन्नता और सकारात्मक दृष्टिकोण भी उतने ही आवश्यक हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय में सामने आया हैजब तेज़ रफ्तार जीवनशैलीतनाव और मानसिक दबाव लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि हंसी न केवल तनाव को कम करती हैबल्कि शरीर और मन दोनों को ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करती है। भारतीय परंपरा में हंसी और आनंद को जीवन का अभिन्न हिस्सा माना गया है और यही विचार इस सुभाषित में भी झलकता है। प्रधानमंत्री पहले भी योगध्यान और भारतीय जीवन मूल्यों के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील करते रहे हैं। यह संदेश उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा हैजिसमें वे लोगों को सरल उपायों के जरिए खुशहाल और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका यह संदेश यह भी दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान आज के आधुनिक दौर में भी उतना ही प्रासंगिक और उपयोगी है।कुल मिलाकरप्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह संस्कृत सुभाषित लोगों को यह याद दिलाता है कि हंसी न केवल चेहरे की मुस्कान हैबल्कि यह बेहतर स्वास्थ्यमानसिक शांति और जीवन में आनंद का आधार भी है।