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एमपी कैडर के IFS अधिकारी विपिन पटेल का अचानक इस्तीफा: निजी कारणों का दिया हवाला; जबलपुर में पदस्थापना के दौरान छोड़ी सेवा

भोपाल/जबलपुर। मध्य प्रदेश प्रशासन में उस वक्त हड़कंप मच गया जब भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी विपिन पटेल ने अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी। साल 2013 बैच के अधिकारी विपिन पटेल ने अचानक सेवा छोड़ने का निर्णय लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। उन्होंने अपना आधिकारिक त्यागपत्र PCCF प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स को भेज दिया है। निजी कारणों से लिया फैसला विपिन पटेल ने अपने इस्तीफे के पीछे पूरी तरह से ‘निजी कारणों’ का हवाला दिया है। उन्होंने विभाग को सौंपे गए पत्र में स्पष्ट किया कि वे 4 फरवरी 2026 से अपनी सेवाओं को पूर्ण विराम देना चाहते हैं और इसी तारीख से सेवा से मुक्त होने की इच्छा जताई है। हालांकि, इतने वरिष्ठ स्तर के अधिकारी का अचानक इस्तीफा देना कई सवाल भी खड़े कर रहा है, लेकिन अभी तक आधिकारिक रूप से किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जबलपुर में थे पदस्थ, कई जिलों में रहा लंबा अनुभव इस्तीफा देने के समय विपिन पटेल जबलपुर प्लानिंग में डीएफओ के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनका प्रशासनिक करियर काफी सक्रिय रहा है। इससे पहले वे रीवा, दमोह, सतना और अनूपपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में विभिन्न पदों पर कार्यरत रह चुके हैं। क्षेत्र में उनकी पहचान एक कार्यकुशल और सुलझे हुए अधिकारी के रूप में रही है। प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार एक अनुभवी आईएफएस अधिकारी का सेवाकाल के बीच में ही इस्तीफा देना वन विभाग के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। अब सबकी नजरें सरकार और विभाग के आला अधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या उनका इस्तीफा तत्काल स्वीकार किया जाता है या फिर उन्हें फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मनाया जाएगा।

प्रदेश विद्युत के क्षेत्र में पूर्णत: आत्म निर्भर : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किये जा रहे कार्यों से प्रदेश विद्युत के क्षेत्र में पूर्णतः आत्म निर्भर हो गया है। प्रदेश भविष्य में भी विद्युत के क्षेत्र में आत्म निर्भर बना रहे इसके लिये विद्युत उपलब्ध क्षमता में 1806 मेगावाट की वृद्धि का कार्यक्रम है। इसमें से 851 मेगावाट क्षमता वृद्धि हासिल की जा चुकी है। प्रदेश में गैर कृषि उपभोक्ताओं को लगभग 24 घंटे एवं कृषि उपभोक्ताओं को लगभग 10 घंटे प्रतिदिन विद्युत प्रदाय की जा रही है। रबी मौसम में मकर संक्रांति पर्व पर 19895 मेगावाट की अधिकतम विद्युत मांग की सफलतापूर्वक पूर्ति की गई, जो प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक है। प्रदेश में पारेषण हानियां अब मात्र 2.60 प्रतिशत रह गई हैं, जो पूरे देश में न्यूनतम हानियों में से एक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-2030 तक की अवधि में प्रदेश की पारेषण प्रणाली के सुदृढीकरण के लिये म.प्र. पॉवर ट्राँसमिशन कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 5163 करोड़ रुपये के पूंजीगत कार्यों का अनुमोदन प्रदान किया गया है। अटल गृह ज्योति योजना में जिनकी मासिक खपत 150 यूनिट तक है एवं पात्र उपभोक्ताओं को प्रथम 100 यूनिट की खपत के लिए अधिकतम 100 रुपये का बिल दिया जा रहा है एवं अंतर की राशि राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में वितरण कंपनियों को दी जा रही है। इस योजना में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के लिये वर्ष 2024-25 में सब्सिडी की मद में 6495.27 करोड़ रूपये जारी किए गए थे। अटल कृषि ज्योति योजना के अंतर्गत 10 हॉर्सपॉवर तक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 750 रुपये प्रति हॉर्सपॉवर प्रतिवर्ष एवं 10 हार्स पॉवर से अधिक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 1500 रूपये प्रति हॉर्स पॉवर प्रतिवर्ष की फ्लेट दर से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। शासन द्वारा 1 हैक्टेयर तक भूमि एवं 5 हार्स पॉवर तक के कृषि पंप वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को निःशुल्क विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। योजना लगभग 9.3 लाख कृषि उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। समाधान योजना 2025-26″ में अद्यतन लगभग 17 लाख 15 हजार रूपये उपभोक्ताओं का 350 करोड़ 67 लाख रूपये सरचार्ज माफ हुआ हैं तथा 852 करोड़ 76 लाख रूपये के बिल जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा-अभियान (पीएम-जनमन) में प्रदेश में लगभग 28 हजार घरों के विद्युतीकरण की कार्य योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। वितरण कंपनियों द्वारा नवम्बर 2025 तक लगभग 26,000 घरों को विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। शासन द्वारा अति उच्चदाब ट्राँसमिशन लाईनों के निर्माण से टॉवर लगने वाले और ट्राँसमिशन लाईन के प्रभावित किसानों को पहले की कलेक्टर गाईडलाईन से दोगुना मुआवजा एकमुश्त एवं डिजिटल माध्यम से दिया जाएगा।

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में निरंतर कमी लाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्य सचिव जैन

भोपाल। मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में मंत्रालय में बुधवार को राज्य स्वास्थ्य समिति की गवर्निंग बॉडी की बैठक आयोजित हुई। मुख्य सचिव श्री जैन ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में विभाग द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ एवं सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं डिजिटल पहलों के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की गई हैं। अनमोल 2.0 से गर्भवती महिलाओं की सतत निगरानी से एमएमआर और आईएमआर में हुआ है सुधार मुख्य सचिव श्री जैन ने निर्देश दिए कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तिकरण के समन्वित प्रयास करें। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में निरंतर कमी लाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बताया गया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य के 51 जिलों में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए 228 बर्थ वेटिंग रूम क्रियाशील हैं। साथ ही गर्भवती महिलाओं की शंकाओं के समाधान हेतु सुमन सखी चैटबॉट को गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध कराया गया है। गर्भवती महिलाओं की सतत निगरानी अनमोल 2.0 के माध्यम से की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष 2025-26 में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) एवं शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में कमी दर्ज की गई है। बैठक में मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना ने लोक स्वास्थ्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत प्राप्त उपलब्धियों और वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। आरबीएसके के अंतर्गत 33 हज़ार से अधिक निःशुल्क सर्जरी ई-शिशु मॉडल के अंतर्गत एमजीएम इंदौर में वन-हब एवं 16 स्पोक्स के माध्यम से अब तक 947 नवजात शिशुओं को टेली-कंसल्टेशन सेवाएँ प्रदान की गई हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत 33,075 नि:शुल्क शल्य क्रियाएँ की गईं, साथ ही 1,026 नि:शुल्क जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) सर्जरी भी की गई हैं। वर्ष 2025 में कुल 8,896 पंचायतें हुई टीबी-मुक्त टीबी (क्षय रोग) के नोटिफिकेशन एवं उपचार सफलता दर में सुधार के परिणामस्वरूप डीआर-टीबी मृत्यु दर 3.9 से घटकर 3.0 हुई है। वर्ष 2025 में कुल 8,896 पंचायतों को टीबी-मुक्त पंचायत घोषित किया गया। सिकल सेल प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत 28,541 मरीजों को नि:शुल्क उपचार प्रदान किया गया और एक करोड़ 13 लाख 59 हजार 76 नागरिकों को सिकल सेल कार्ड वितरित किए गए हैं। स्वस्थ यकृत मिशन में 1 करोड़ 42 लाख स्क्रीनिंग ‘स्वस्थ यकृत मिशन’ (एनएएफएलडी स्क्रीनिंग अभियान) के अंतर्गत एक करोड़ 42 लाख स्क्रीनिंग की गई हैं। फाइब्रोस्कैन सेवाएँ 13 जिलों में प्रारंभ की गई हैं, जिनमें अब तक 2,032 स्कैन पूर्ण किए जा चुके हैं। उच्च रक्तचाप के उपचार हेतु 1.77 करोड़ नागरिक की स्क्रीनिंग एवं 10.40 लाख नागरिक उपचाराधीन, इसी प्रकार मधुमेह के लिए 1.80 करोड़ स्क्रीनिंग एवं 7.21 लाख उपचाराधीन रोगी हैं। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए ‘मिशन मधुमेह’ के अंतर्गत 537 टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चे उपचाराधीन हैं। ट्रक ड्राइवरों की नियमित नेत्र जांच करने के निर्देश राज्य में 4,03,401 मोतियाबिंद शल्य क्रियाएँ की गईं। इसमें 48,816 स्कूली बच्चों एवं 1,03,944 वृद्धजनों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त 2,235 कॉर्निया नेत्रदान के माध्यम से एकत्र किए गए। होप (होम बेस्ड केयर प्रोग्राम फॉर एल्डर्ली) योजना के अंतर्गत 6 शहरी क्षेत्रों में 1,214 अशक्त वृद्धजनों को घर पर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गई हैं। मुख्य सचिव श्री जैन ने ट्रक ड्राइवरों की नियमित नेत्र जांच कराने के निर्देश दिए। मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार महाविद्यालयों में भी करें मुख्य सचिव श्री जैन ने उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार महाविद्यालयों में भी किए जाने के निर्देश दिए। बताया गया कि राज्य में 3,756 शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू-मुक्त प्रमाणित किया गया है। टेली-मानस सेवा (टोल-फ्री नंबर 14416 / 1800-891-4416) के माध्यम से 55,711 उपयोगकर्ताओं को नि:शुल्क मानसिक स्वास्थ्य परामर्श प्रदान किया गया। आत्महत्या रोकथाम के लिये गेट-कीपर कार्यक्रम के अंतर्गत 2,385 आत्म-हानि एवं 1,593 आत्मघाती विचारों से संबंधित मामलों में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (डीएमएचपी) के माध्यम से परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया गया। वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना निर्माण प्रक्रिया में बॉटम-अप दृष्टिकोण अपनाया गया है और शून्य-आधारित बजटिंग सिद्धांतों पर संसाधन आवंटन किया गया है, जिससे वर्तमान स्वास्थ्य आवश्यकताओं एवं जिला-स्तरीय जरूरतों के अनुरूप योजनाएँ तैयार की जा सकें। परिणाम-आधारित योजना एवं बजटिंग के अंतर्गत मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, टीकाकरण कवरेज में सुधार और संक्रामक एवं गैर-संक्रामक रोगों के नियंत्रण जैसे मापनीय स्वास्थ्य लक्ष्यों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए एसएनए-स्पर्श के माध्यम से निगरानी की जाएगी। जिला स्वास्थ्य कार्ययोजना की तैयारी, राज्य स्तरीय समीक्षा, कार्यकारी समिति की बैठक एवं राज्य स्वास्थ्य समिति की स्वीकृति की सुव्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई गई है, जो विकेंद्रीकरण, अभिसरण, लक्ष्य निर्धारण एवं प्राथमिकता निर्धारण के सिद्धांतों पर आधारित है। यह दृष्टिकोण “विकसित मध्यप्रदेश@2047” एवं सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप है। बैठक में लगभग 5 हज़ार करोड़ रुपए की वार्षिक कार्य योजना भारत सरकार को प्रेषित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य आयुक्त, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय, आयुष, स्कूल शिक्षा, वित्त विभाग, आयुक्त महिला बाल विकास, मनरेगा विभाग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्रालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी शर्मा अति-उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित

भोपाल। मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल में पदस्थ मुख्य सुरक्षा अधिकारी / सहायक पुलिस आयुक्त (सुरक्षा) श्री अविनाश शर्मा को वर्ष 2025 के लिए केन्द्रीय गृहमंत्री का अति-उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्‍मानित किया गया है। श्री शर्मा को उनकी दीर्घकालीन, निष्ठावान एवं अति-उत्कृष्ट सेवाओं के लिए यह पदक दिया गया है। उल्‍लेखनीय है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 के लिए पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनकी सराहनीय, अनुकरणीय एवं अति-उत्कृष्ट सेवाओं के लिए केन्द्रीय गृहमंत्री का अति-उत्कृष्ट सेवा पदक एवं उत्कृष्ट सेवा पदक प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। श्री अविनाश शर्मा ने मंत्रालय की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, महत्वपूर्ण शासकीय प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा कर्तव्यनिष्ठा के साथ उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनका यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण का प्रतीक है, बल्कि मध्यप्रदेश पुलिस एवं मंत्रालय सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी गौरव का विषय है।

प्रदेश में 900 करोड़ की लागत से बन रहे हैं धार्मिक और सांस्कृतिक लोक

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकास भी,विरासत भी‘ के कालजयी मंत्र को ध्येय वाक्य मानकर मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक पथ पर अग्रसर है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जिस सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद उज्जैन में ‘श्री महाकाल लोक‘ के लोकार्पण के साथ किया था, वह यात्रा अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक विराट जन-अभियान का रूप ले चुकी है। प्रदेश की पावन धरा पर लगभग 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 ‘लोकों‘ का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी गौरवशाली परंपराओं का जीवंत साक्ष्य बनेंगे। धार्मिक एवं सांस्कृतिक वैभव की इस अविरल यात्रा में वर्तमान में 580 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 17 महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक लोक पर तीव्र गति से कार्य संचालित है। सागर में ‘संत रविदास लोक‘ 101 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। यह हमारी सामाजिक समरसता का प्रतीक है। सीहोर जिले के सलकनपुर में ‘देवी लोक‘ और ओरछा में ‘श्रीरामराजा लोक‘ जैसे भव्य प्रकल्प अपनी पूर्णता के करीब हैं। सरकार की संकल्प शक्ति का ही परिणाम है कि मंदसौर में ‘भगवान पशुपतिनाथ लोक परिसर‘ का कार्य पूर्ण कर उसे जनता को समर्पित किया जा चुका है। साथ ही भोपाल में ‘वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक‘, जानापाव में ‘भगवान परशुराम लोक‘ और महेश्वर में ‘देवी अहिल्या संग्रहालय‘ जैसे प्रकल्पों ने पूर्ण होकर प्रदेश के सांस्कृतिक मानचित्र को और अधिक समृद्ध किया है।  जन-आस्था का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने 315 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से भविष्य में 3 नए लोक और 2 अन्य लोक के द्वितीय चरण को भी मूर्त रूप दिया जायेगा। ‘श्री महाकाल लोक‘ की भव्यता को प्रेरणा मानकर अब ओंकारेश्वर में ‘ममलेश्वर लोक‘ का निर्माण, बैतूल में ताप्ती उद्गम स्थल में ‘ताप्ती लोक’ और मैहर में ‘माँ शारदा लोक’ का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। महेश्वर में 110 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला ‘देवी अहिल्या लोक‘ और अमरकंटक में ‘माँ नर्मदा लोक‘ के द्वितीय चरण का निर्माण सनातन संस्कृति के प्रति अटूट श्रद्धा का परिचायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निर्मित हो रहे धार्मिक और सांस्कृतिक ‘लोक‘ केवल पत्थर और ईंटों के निर्माण मात्र नहीं हैं, अपितु ये मध्यप्रदेश के विकास के नए ‘ग्रोथ इंजन‘ सिद्ध होंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल‘ के विज़न को आत्मसात करते हुए ये स्थल पर्यटन के वैश्विक केंद्रों के रूप में उभरेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अभूतपूर्व अवसर सृजित होंगे। हस्त शिल्पियों से लेकर सेवा क्षेत्र तक, इन लोकों का विकास हर वर्ग के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगा। आस्था का यह महायज्ञ जहाँ एक ओर हमारी जड़ों को सींच रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश को आधुनिकता और आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से आगे बढ़ा रहा है।

किसानों को सशक्त बनाने किया जा रहा है तकनीक का प्रभावी उपयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाने और कृषि व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से राज्य में ग्रामीण डेटा प्रणाली को एक नई दिशा प्रदान की गई है। उन्नत तकनीक, पारदर्शी डेटा प्रबंधन और केंद्र-राज्य समन्वय से यह पहल किसानों के हित में मजबूत डिजिटल आधार तैयार कर रही है। इससे किसानों को योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खेत पर उपस्थित होकर फसल की फोटो लेकर जानकारी सुरक्षित की जा रही है, जिससे फसल संबंधी डेटा पूरी तरह प्रमाणिक हो रहा है। जियो-फेंसिंग तकनीक से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सर्वे केवल वास्तविक खेत स्थल पर ही किया जाए। सर्वे डेटा का त्रिस्तरीय सत्यापन एआई/एमएल सिस्टम और पटवारी स्तर पर किया जा रहा है। अन्य विभागों द्वारा भी इस डेटा का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। डीसीएस डेटा के आधार पर उपार्जन पंजीयन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इंटरनेट उपलब्ध न होने की स्थिति में भी सर्वे की विश्वसनीयता बनी रहे। सर्वे के दौरान ली गई फोटो की प्रामाणिकता और सही लोकेशन की पुष्टि प्रणाली द्वारा की जाती है। सर्वे केवल निर्धारित समयावधि में ही संभव है और समय सीमा के बाहर या मोबाइल समय में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर सर्वे स्वतः रुक जाता है। एआई या एमएल एल्गोरिदम के माध्यम से डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर मानवीय त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम किया गया है। फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा-ड्रिवन निर्णय लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री को एकीकृत डिजिटल प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। इसमें किसानों की पहचान, भूमि विवरण और योजना संबंधी जानकारी का केंद्रीकृत पंजीकरण एवं सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में भूमि अभिलेखों का पूर्ण डिजिटल एकीकरण, स्थान आधारित रिकॉर्ड और बहु-स्तरीय डेटा जांच शामिल हैं। प्रत्येक किसान को 11 अंकीय विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या प्रदान की जा रही है, जिससे एक प्रमाणिक और सटीक किसान डेटाबेस (यूनिफाइड डिजिटल प्रोफाइल) तैयार हो रही है। फार्मर रजिस्ट्री के निर्धारित मानकों का 100 प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। एससीए योजना में भारत सरकार से वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए 713 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह डिजिटल व्यवस्था डुप्लीकेशन और फर्जी लाभार्थियों पर प्रभावी रोक लगाएगी और भविष्य की सभी डिजिटल कृषि योजनाओं की मजबूत नींव बनेगी। साथ ही, जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से किसानों को आसान कृषि ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

Bihar Assembly Election: बिहार चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची PK की जन सुराज पार्टी

नई दिल्ली । बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी और कानूनी घमासान तेज हो गया है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज पार्टी ने राज्य में हुए विधानसभा चुनाव को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। पार्टी ने चुनाव के दौरान महिलाओं को सीधे ₹10,000 ट्रांसफर किए जाने को आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए इसे अवैध करार दिया है और नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है।सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार जन सुराज पार्टी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की शुक्रवार को सुनवाई करेगी। याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है। 10 हजार रुपये ट्रांसफर पर उठे सवाल याचिका में कहा गया है कि चुनाव से ठीक पहले और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू रहने के दौरान राज्य सरकार की ओर से महिला मतदाताओं को ₹10,000 का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण किया गया, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम है। पार्टी का दावा है कि इससे 25 से 35 लाख महिला वोटर्स प्रभावित हुईं, जो सीधे तौर पर भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। संविधान के कई अनुच्छेदों के उल्लंघन का आरोप जन सुराज पार्टी ने कोर्ट से यह घोषित करने की मांग की है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत चुनावी अवधि में नए लाभार्थियों को जोड़ना और उन्हें भुगतान करना संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का गंभीर उल्लंघन है। साथ ही, चुनाव आयोग को इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की भी अपील की गई है। जीविका दीदियों की तैनाती पर भी आपत्ति याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि दो चरणों में कराई गई वोटिंग के दौरान जीविका स्वयं सहायता समूह की करीब 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को पोलिंग बूथों पर तैनात किया गया, जो निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ है। पार्टी ने इसे अवैध और अनुचित बताया है। दोबारा चुनाव की मांग जन सुराज पार्टी ने चुनाव में कथित भ्रष्ट आचरणों का हवाला देते हुए बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है। साथ ही, पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु सरकार 2013 मामले में दिए गए निर्देशों को लागू कराए और मुफ्त योजनाओं व डीबीटी स्कीम्स पर स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश तय करे। बढ़ेगा सियासी तापमान इस याचिका के बाद बिहार की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में बिहार की सियासत की दिशा तय कर सकता है।

India vs Pakistan पर सस्पेंस गहराया: तूफान से पहले की खामोशी या T20 वर्ल्ड कप का महामुकाबला होगा रद्द?

नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप 2026 में होने वाले भारत-पाकिस्तान महामुकाबले को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। 15 फरवरी को प्रस्तावित इस हाई-वोल्टेज मैच से ठीक दस दिन पहले हालात ऐसे बन चुके हैं कि यह कहना मुश्किल हो गया है कि यह खामोशी तूफान से पहले की शांति है या फिर मैच के रद्द होने का साफ संकेत। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे मामले पर आईसीसी बीसीसीआई और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड तीनों की ओर से सार्वजनिक तौर पर चुप्पी साध ली गई है। इस विवाद की शुरुआत 1 फरवरी को हुई जब पाकिस्तान सरकार ने ऐलान किया कि पाकिस्तान की टीम टी20 वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा तो लेगी लेकिन 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाले मुकाबले में मैदान पर नहीं उतरेगी। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी। इसके तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की ओर से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को चेतावनी दी गई कि मैच न खेलने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हालांकि इसके बाद से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने एक बार फिर यह दोहराया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच यह मुकाबला नहीं होगा। इससे अटकलों को और हवा मिली है कि यह फैसला सिर्फ क्रिकेट बोर्ड का नहीं बल्कि सीधे सरकार का है। अगर ऐसा है तो आईसीसी के लिए भी स्थिति बेहद जटिल हो जाती है क्योंकि किसी सदस्य देश की टीम का सरकारी आदेश के तहत मैच से हटना एक गंभीर मामला माना जाता है। हालांकि क्रिकेट की दुनिया में पाकिस्तान के फैसलों को लेकर अनिश्चितता कोई नई बात नहीं है। पिछले साल एशिया कप के दौरान भी ऐसा देखा गया था जब आखिरी वक्त पर पाकिस्तान अपने पहले के रुख से पलट गया था। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि मौजूदा बॉयकॉट का ऐलान अंतिम फैसला नहीं भी हो सकता। लेकिन अगर पाकिस्तान सरकार अपने फैसले पर अड़ी रहती है तो इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मुकाबले का रद्द होना लगभग तय माना जा रहा है। क्रिकबज की एक रिपोर्ट के मुताबिक आईसीसी और उसके सदस्य किसी भी तरह की काम से गैरहाजिरी को हल्के में नहीं लेंगे। अगर पाकिस्तान टीम मैच नहीं खेलती है तो उस पर भारी जुर्माना अंक कटौती या भविष्य के टूर्नामेंट्स को लेकर सख्त कार्रवाई संभव है। हालांकि यह सजा बाद की प्रक्रिया है फिलहाल फोकस मैच के भविष्य पर टिका है। कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि दोनों पक्षों के बीच बैक-चैनल बातचीत चल रही है और बीच-बचाव की कोशिशें जारी हैं लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच पाकिस्तानी मीडिया में यह खबर फैली कि आईसीसी चेयरमैन जय शाह और सीईओ संजोग गुप्ता मुंबई में जियोस्टार के मालिक मुकेश अंबानी से मिले हैं। चूंकि जियोस्टार टी20 वर्ल्ड कप का आधिकारिक ब्रॉडकास्टर है इसलिए इस मुलाकात को मैच को लेकर बड़े फैसले से जोड़कर देखा गया। हालांकि इस दावे पर भी सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि जय शाह और संजोग गुप्ता इस समय इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के निमंत्रण पर इटली के मिलान में मौजूद हैं जहां वे 145वें IOC सत्र में हिस्सा ले रहे हैं। आज तारीख 5 फरवरी है और मैच 15 फरवरी को होना है। ऐसे में सवाल अब भी वही है क्या यह खामोशी किसी बड़े समझौते की आहट है या फिर क्रिकेट के सबसे बड़े मुकाबलों में से एक के रद्द होने की भूमिका? जवाब आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा।

गंभीर का मास्टरमाइंड और सूर्या का 'स्काई' अवतार: टी20 विश्व कप में खिताब बचाने उतरेगी कोच-कप्तान की यह बेमिसाल जोड़ी

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में एक नई और आक्रामक युग की शुरुआत हो चुकी है। राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा की सफल विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी अब गौतम गंभीर और सूर्यकुमार यादव के कंधों पर है। 72 घंटे से भी कम समय में भारतीय टीम टी20 विश्व कप में अपने खिताब को बचाने के अभियान का आगाज करेगी, और दुनिया भर की नजरें उस केमिस्ट्री पर टिकी हैं जो मैदान के बाहर गंभीर के दिमाग में पकती है और मैदान के अंदर सूर्या के बल्ले से आकार लेती है। आंकड़े दे रहे हैं गवाही नतीजों के लिहाज से देखें तो गंभीर और सूर्या की जोड़ी अब तक अपराजेय सी नजर आई है। 39 मैचों में 31 जीत और लगभग 80 प्रतिशत का जीत का रिकॉर्ड यह बताने के लिए काफी है कि इन दोनों की फ्रीक्वेंसी एक ही धुन पर बज रही है। भारतीय क्रिकेट में अक्सर कप्तान को जनरल माना जाता रहा है, जैसा रवि शास्त्री और विराट कोहली के दौर में था। लेकिन टी20 प्रारूप के बदलते मिजाज ने अब ‘फुटबॉल मैनेजर’ शैली की कोचिंग की मांग की है। यहाँ गंभीर एक रणनीतिकार की भूमिका में हैं और सूर्या उस योजना को शत-प्रतिशत मैदान पर उतारने वाले ‘एक्जीक्यूटर’ हैं। पुराना रिश्ता, नई इबारत इन दोनों का रिश्ता आज का नहीं है। सूर्यकुमार यादव को पहली बार वैश्विक पहचान तब मिली थी जब वे गौतम गंभीर की कप्तानी में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए फिनिशर की भूमिका निभा रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि सूर्या का मशहूर नाम ‘स्काई’ (SKY) भी उन्हें गंभीर ने ही दिया था। यह भारतीय क्रिकेट का एक खुला राज है कि 2024 में हार्दिक पंड्या के ऊपर सूर्यकुमार को टी20 की कप्तानी दिलाने में गंभीर की अहम भूमिका रही थी। गंभीर को पता था कि सूर्या जैसा निडर खिलाड़ी ही उनकी आक्रामक रणनीति को अंजाम दे सकता है। अलग मिजाज, एक लक्ष्य निजी तौर पर दोनों ध्रुवों की तरह अलग हैं। गंभीर दिल्ली के एक समृद्ध व्यावसायिक परिवार से आते हैं और स्वभाव से बेहद गंभीर और ‘नो-नॉनसेन्स’ खिलाड़ी रहे हैं। वहीं सूर्या मुंबई के मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और मैदान पर बेहद शांत और हंसमुख नजर आते हैं। लेकिन इस सामाजिक-आर्थिक अंतर के बावजूद दोनों का ‘क्रिकेटिंग डीएनए’ एक है। दोनों ही पक्के राष्ट्रवादी हैं और हार न मानने की जिद्द उनके चरित्र का मुख्य हिस्सा है। गंभीर जानते हैं कि उन्हें सहवाग जैसी नैसर्गिक प्रतिभा नहीं मिली थी, इसलिए उन्होंने कड़ी मेहनत से अपनी जगह बनाई। ठीक उसी तरह सूर्या ने भी लंबे समय तक घरेलू क्रिकेट में संघर्ष किया और अपनी जगह छीनी। अब विश्व कप के महामंच पर गंभीर का गेम प्लान तैयार है और सूर्या को बस अपनी उस आजादी के साथ खेलना है जिसके लिए वे जाने जाते हैं। अगर यह जुगलबंदी अपने पूरे शबाब पर रही, तो भारत को अपना विश्व कप खिताब बचाने से रोकना नामुमकिन होगा।

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अब CBSE अंकों को मिलेगी मान्यता: भारतीय छात्रों के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का द्वार; रिसर्च के लिए बनेगा CAS सेंटर

नई दिल्ली/कैम्ब्रिज। विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना संजोए भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में गिने जाने वाले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने भारतीय शिक्षा प्रणाली, विशेषकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE के स्तर को वैश्विक मान्यता प्रदान की है। अब CBSE से 12वीं कक्षा पास करने वाले मेधावी छात्र अपने बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के चुनिंदा अंडरग्रेजुएट UG कोर्सेज में प्रवेश के लिए सीधे आवेदन कर सकेंगे। यह कदम न केवल भारतीय छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारतीय स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता पर मुहर भी लगाता है। वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा की पहचान इससे पहले कई विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने के लिए भारतीय छात्रों को जटिल प्रक्रियाओं और अतिरिक्त प्रवेश परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के इस फैसले ने उस बाधा को काफी हद तक कम कर दिया है। यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर डेबोरा प्रेंटिस ने इस महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि भारतीय छात्रों में अद्भुत प्रतिभा और जुनून है। कैम्ब्रिज इस मेधा को पहचानते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना चाहता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि केवल 12वीं के अंक ही प्रवेश का एकमात्र आधार नहीं होंगे; छात्रों को यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित अन्य मापदंडों और शर्तों को भी पूरा करना होगा, लेकिन बोर्ड अंकों को मान्यता मिलना प्रक्रिया को पहले से कहीं अधिक सुलभ बना देगा। शैक्षणिक संबंधों को नई दिशाCAS की स्थापना भारत और कैम्ब्रिज के बीच इन शैक्षणिक संबंधों को और गहरा बनाने के लिए यूनिवर्सिटी ने कैम्ब्रिज इंडिया सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज शुरू करने का भी निर्णय लिया है। यह केंद्र रिसर्च, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के संगम के रूप में कार्य करेगा। CAS का मुख्य उद्देश्य भारत की तेजी से उभरती ‘नॉलेज इकोनॉमी’ को वैश्विक शिक्षा नेटवर्क से जोड़ना है। इस सेंटर के माध्यम से न केवल छात्रों को, बल्कि भारतीय रिसर्च स्कॉलर्स और शिक्षकों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध करने और दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ काम करने का बेहतरीन मंच मिलेगा। भविष्य की राह हुई आसान कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का यह कदम भविष्य में अन्य वैश्विक संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा। इससे भारतीय छात्रों के लिए करियर के नए और रोमांचक रास्ते खुलेंगे। यह पहल उन हजारों परिवारों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है जो अपने बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा दिलाने का सपना देखते हैं। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय स्कूली शिक्षा की साख दुनिया भर में बढ़ेगी और वैश्विक विश्वविद्यालयों में भारतीय चेहरों की मौजूदगी पहले से कहीं अधिक प्रभावी और सशक्त होगी।