भारत की वायुसेना को बड़ा बूस्ट: 100 से ज्यादा राफेल विमानों की खरीद पर चर्चा, खर्च 3.25 लाख करोड़

नई दिल्ली । रक्षा बजट बढ़ाने के बाद अब भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने की तैयारी जोर पकड़ रही है। खबर है कि भारत फ्रांस के साथ 100 से ज्यादा राफेल लड़ाकू विमान खरीदने पर बातचीत करने वाला है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब सीमा पर पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से संबंध तनावपूर्ण हैं। बड़ी डील की तैयारी फरवरी के तीसरे हफ्ते में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल विमानों की 3.25 लाख करोड़ रुपये की खरीद पर चर्चा कर सकता है। पिछले महीने रक्षा खरीद बोर्ड ने इस प्रस्ताव को शुरुआती मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति मैक्रों 18 फरवरी को एआई शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली में रहेंगे। रक्षा सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि यह प्रस्ताव अगले हफ्ते रक्षा मंत्रालय की उच्च-स्तरीय बैठक में चर्चा के लिए रखा जाएगा। इसे भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल जरूरतों और मौजूदा सुरक्षा हालात के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।अभी की स्थिति वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास लगभग 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन-पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ के कारण खतरे की आशंका बढ़ गई है। डील का महत्व इस परियोजना से भारतीय वायुसेना को लंबे समय तक 4.5-जेनरेशन-प्लस मल्टीरोल लड़ाकू विमानों की जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी। प्रस्तावित 114 राफेल में से लगभग 80% विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इसके तहत 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर विमान शामिल होंगे, जिन्हें डसॉल्ट और भारतीय निजी कंपनियों के सहयोग से भारत में तैयार किया जाएगा।एक बार डील पूरी होने पर भारतीय वायुसेना के पास कुल 150 राफेल होंगे, जबकि भारतीय नौसेना के पास 26 एयरक्राफ्ट कैरियर-कंपैटिबल राफेल होंगे। रक्षा बजट में वृद्धि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में पेश बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया। यह कुल बजट का 14.68% है और पिछले वर्ष से 15% अधिक है। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से रक्षा बजट में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में रक्षा बजट 4.84 लाख करोड़ रुपये, 2022-23 में 5.25 लाख करोड़, 2023-24 में 5.94 लाख करोड़, 2024-25 में 6.2 लाख करोड़ और 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ था। इस बार पहली बार रिकॉर्ड 1.03 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद रक्षा बजट GDP का सिर्फ 2% है, जो चीन के मुकाबले समान है।
IND vs PAK मैच विवाद पर श्रीलंका ने PCB को लिखा पत्र, भारत के साथ मुकाबले में भाग लेने की अपील

नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर दिया है। 15 फरवरी को भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला श्रीलंका के आर प्रेमदासा स्टेडियम में होना था। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने बांग्लादेश के रुख का समर्थन करते हुए यह निर्णय लिया। बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में अपने मैच खेलने से इनकार किया था और ICC के समझाने पर भी मान नहीं पाया। इस कदम से श्रीलंका को भी आर्थिक और लॉजिस्टिकल नुकसान होने की संभावना है। ऐसे में श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने पाकिस्तान को दो पेज का पत्र भेजा, जिसमें 2009 के आतंकी हमले और पाकिस्तान के कठिन समय में श्रीलंका के समर्थन को याद दिलाया गया। SLC ने PCB से इस मामले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। पत्र में कहा गया है कि अगर निर्धारित मैच नहीं होते, तो को-होस्ट देशों को वित्तीय, लॉजिस्टिकल और प्रतिष्ठान से जुड़ा बड़ा नुकसान होगा। SLC ने स्पष्ट किया कि ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए श्रीलंका पूरी तरह तैयार है और भारत-पाकिस्तान मैच के लिए टिकट बिक्री पहले ही तेज गति से हो चुकी है। SLC ने अपने पत्र में लिखा, श्रीलंका ICC पुरुष T20 वर्ल्ड कप 2026 का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। होस्ट वेन्यू के रूप में हमने कमर्शियल, ऑपरेशनल, लॉजिस्टिकल और सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजाम पहले ही पूरे कर लिए हैं। इस मैच में हॉस्पिटैलिटी प्लानिंग और टिकट बिक्री भी शामिल है। निर्धारित मैचों में भाग न लेने के दूरगामी नतीजे होंगे, जिसमें बड़े वित्तीय नुकसान और टूर्नामेंट की इंटरनेशनल अपील कम होना शामिल है।” श्रीलंका सरकार भी संभावित बॉयकॉट के असर पर नजर रख रही है, क्योंकि इन मैचों की मेजबानी से बड़ी आर्थिक उम्मीदें जुड़ी हैं। SLC ने पत्र में यह भी याद दिलाया कि श्रीलंका ने कई बार पाकिस्तान का दौरा किया है, कठिन सुरक्षा परिस्थितियों और हमलों के बावजूद इंटरनेशनल मैचों में हिस्सा लिया। इसमें नेशनल टीम के काफिले पर हुए हमले भी शामिल हैं, जिनसे खिलाड़ियों और अधिकारियों को शारीरिक और मानसिक चोटें आईं। SLC ने PCB से सम्मानपूर्वक अनुरोध किया कि 15 फरवरी को भारत-पाकिस्तान मैच में भाग न लेने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। पत्र में जोर दिया गया कि क्रिकेट के व्यापक हित, दोनों बोर्डों के बीच सहयोग और खेल भावना को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान टीम निर्धारित सभी मैचों में शामिल हो। अंत में SLC ने PCB और पाकिस्तान सरकार को धन्यवाद देते हुए शीघ्र सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद जताई।
DOG BITE CASE: ग्वालियर में रैबीज का आतंक: 3 साल में 18 लोगों की गई जान

DOG BITE CASE: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में डॉग बाइट और रैबीज का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब जानलेवा साबित हो रही है। बता दें कि बीते 24 घंटे में रैबीज से पीड़ित दो महिलाओं की मौत ने एक बार फिर स्वास्थ्य और नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। MP Weather Update: बढ़ी ठंड, कई शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे, 8 फरवरी से नया सिस्टम सक्रिय होने के आसार न्यू जेएएच (जयारोग्य अस्पताल) में गुरुवार को इलाज के दौरान टीकमगढ़ की रहने वाली 65 वर्षीय महिला ने दम तोड़ दिया। महिला पर कुछ समय पहले सियार ने हमला किया था, लेकिन उसने एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाए, जिससे उसे रैबीज हो गया। इससे पहले ग्वालियर में कुत्ते के काटने से रैबीज संक्रमित एक महिला की मौत हो चुकी है।वहीं, साल 2026 में यह रैबीज से होने वाली दूसरी मौत है। तीन साल में 18 मौतें, हर साल जा रही 6 जान आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। बीते तीन सालों में ग्वालियर में रैबीज से 18 लोगों की मौत हो चुकी है। औसतन हर साल 6 मरीज रैबीज के कारण जान गंवा रहे हैं।2023 से अब तक सामने आए मामलों में अधिकांश मौतें डॉग बाइट के बाद हुई हैं। इनमें एक मामला सियार के काटने का भी शामिल है। शहडोल में माफिया राज: अफसरों की हर चाल पर गुर्गों की नजर; खनिज विभाग के सामने से ट्रैक्टर लेकर फरार हुए रेत तस्कर महिला ने अस्पताल में तोड़ा दम महिला ने समय पर एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं लगवाई। हालत बिगड़ने पर बुधवार को उसे न्यू जेएएच के मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया, लेकिन गुरुवार तड़के इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक, रैबीज का कोई निश्चित इलाज दुनिया में मौजूद नहीं है, केवल लक्षणों के आधार पर मरीज का उपचार किया जाता है। इंस्टाग्राम दोस्ती के जाल में फंसा युवक, नग्न वीडियो बनाकर वसूले 56 हजार.. बढ़ती आबादी, सड़कों पर आवारा कुत्ते शहर में बढ़ती आबादी और सड़कों पर खुलेआम घूम रहे स्ट्रीट डॉग्स लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट के मामले इस बात का संकेत हैं कि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा।
MP Weather Update: बढ़ी ठंड, कई शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे, 8 फरवरी से नया सिस्टम सक्रिय होने के आसार

MP Weather Update: ग्वालियर। मध्य प्रदेश में वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम का असर खत्म होने के बाद ठंड का असर तेज हो गया है। उत्तरी हवाओं के चलते दिन में ठिठुरन बढ़ गई है, जबकि रात के तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। बता दें कि कई शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे पहुंच गया है। हालांकि मौसम साफ होने के कारण इंदौर, उज्जैन और मुरैना में सुबह से धूप खिली हुई है, लेकिन ठंडी हवाओं के कारण सर्दी बनी हुई है। 8 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार-गुरुवार की रात ग्वालियर समेत 8 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से कम रहा। वहीं, 30 से अधिक जिलों में हल्का से घना कोहरा देखने को मिला। मध्यप्रदेश बना आस्था, पर्यटन और रोज़गार का पावरहाउस: 900 करोड़ से 20 धार्मिक-सांस्कृतिक लोक प्रदेश में सबसे ठंडा राजगढ़ रहा, जहां न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रीवा: 7.2°C खजुराहो: 8.2°C दतिया: 8.4°C दमोह और सतना: 9.6°C पचमढ़ी: 9.8°C ग्वालियर: 9°C अमित शाह ने दी ‘भारत टैक्सी’ को हरी झंडी: जीरो कमीशन मॉडल से ओला-उबर के एकाधिकार को बड़ी चुनौती बड़े शहरों का तापमान भोपाल: 13°C उज्जैन: 13°C इंदौर: 13.2°C जबलपुर: 13.5°C कोहरे से ट्रेनों पर असर घने कोहरे के कारण दिल्ली से आने वाली कई ट्रेनों की समय-सारणी प्रभावित हुई है। मालवा, सचखंड, शताब्दी सहित कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं। स्पेसएक्स और एक्सएआई का विलय, मस्क ने कहा-यह अध्याय नहीं, अभियान की अगली किताब आज और अगले दो दिन का मौसम मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार सुबह प्रदेश के ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और उज्जैन संभाग में हल्का से मध्यम कोहरा देखा गया। 7 फरवरी: हल्का कोहरा, बारिश की संभावना नहीं, ठंड बनी रहेगी 8 फरवरी: कई जिलों में हल्का से मध्यम कोहरा, बारिश का कोई अलर्ट नहीं हालांकि, 8 फरवरी से नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने के संकेत हैं, जिससे आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव हो सकता है।
दिल्ली का दूसरा साइड तो आपने देखा ही नहीं…5 ऐसी जगह जो राजधानी को दिखाती हैं औरों से अलग

नई दिल्ली । दिल्ली में हर मूड के इंसान के लिए कुछ ना कुछ है आप यहां इतिहास देख लें या यहां की संस्कृति सब कुछ एकदम अलग लगता है। दिल्ली केवल सैकड़ों साल पुराने किलों और इमारतों तक सीमित नहीं है बल्कि यहां पक्षियों से भरे वेटलैंड्स शांति-सुकून देने वाले पार्क और सलीके से बनाए गए गार्डन्स भी हैं जो टूरिस्ट ही नहीं बल्कि लोकल लोगों को भी बार-बार खींच लाते हैं। दिल्ली को देखना चाहते हैं तो चलिए जानते हैं यहां की कुछ ऐसी जगहों के बारे में जो उसे दूसरे शहरों से अलग बनाती हैं। ओखला बर्ड सैंक्चुरी अगर लगता है कि बर्ड वॉचिंग वाली जगहों पर देखने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है तो ओखला बर्ड सैंक्चुरी आपकी सोच बदल सकती है। ये शहर के बीच मौजूद एक खास वैटलैंड है जहां कंक्रीट की इमारतों के बैकग्राउंड आपको हैरान कर देंगे। यमुना के फ्लडप्लेन्स में फैली इस सैंक्चुरी में 300 से ज्यादा तरह के पक्षी पाए जाते हैं खासकर सर्दियों के मौसम में। यहां आप सुबह जा सकते हैं क्योंकि इस दौरान माइग्रेटरी बर्ड्स जैसे पेंटेड स्टॉर्क पेल्किन और कई तरह के शिकारी पक्षी आसानी से दिख जाते हैं। हौज खास विलेज अगर दोस्तों के साथ यादगार शाम बिताना चाहते हैं तो हौज खास विलेज से बेहतर ऑप्शन मिलना काफी मुश्किल है। ये वो जगह है जहां पुराने जमाने का इतिहास और आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल एक साथ देखने को मिलती है। यहां 13वीं सदी का हौज तालाब कब्रें और मदरसे के खंडहर हैं जो एक खूबसूरत झील को देखते हुए बनाए गए हैं। यहां कैफे बूटीक शॉप्स और आर्ट स्पेसेज की भरमार है।दिल्ली रिज जंगल ट्रेल दिल्ली रिज को अक्सर शहर की ग्रीन लंग्स कहते हैं यहां आते ही सच में खुलकर सांस लेने का एहसास होता है। यह जगह आपको कुछ देर के लिए शहर की भीड़-भाड़ और शोर से दूर जंगल जैसे माहौल में ले जाती है। सेंट्रल रिज और नॉर्थ रिज के आसपास के इलाके नेचर वॉक बर्ड वॉचिंग और शांत ट्रेक के लिए काफी पसंद किए जाते हैं। यहां के जमीन और रास्ते थोड़े आपको ऑफबीट लगेंगे। दिल्ली हाट दिल्ली हाट राजधानी में घूमने वाली बेहतरीन जगहों में शामिल है। ये एक ऐसी एयर मार्केट है जहां आपको भारत की कला शिल्प और खाने की झलक एक ही जगह पर मिल जाती है। यहां अलग राज्यों से आए कारीगर अपनी दुकानें लगाते हैं जिनमें हैंडलूम कपड़े जूलरी मिट्टी के बर्तन और लोक कला की चीजें मिलती हैं। खाने के शौकीनों के लिए भी ये जगह किसी जन्नत से कम नहीं। मोमोज लिट्टी-चोखा डोसा से लेकर कबाब तक हर राज्य के फेमस स्वाद यहां चखने को मिल जाएंगे। लाल किला लाल किला दिल्ली की पहचान और भारत के सबसे मजबूत ऐतिहासिक प्रतीकों में से एक है। ये यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा बनवाया गया था। इसकी ऊंची-ऊंची लाल पत्थर की दीवारों के अंदर महल दीवाने आम दीवाने खास और म्यूजियम हैं जो भारत के इतिहास के कई अहम किस्से बताते हैं।
एथलीट पेरेंट्स की दुविधा: जब बच्चे का मन न लगे मैदान में, तो दबाव नहीं 'डायरेक्शन' बदलें

नई दिल्ली । अक्सर देखा जाता है कि जिन घरों में माता-पिता खुद खेल की दुनिया के दिग्गज रहे हैं, वहां समाज और परिवार को उम्मीद होती है कि उनका बच्चा भी उसी विरासत को आगे बढ़ाएगा। लेकिन हकीकत इससे अलग हो सकती है। अगर आप एक एथलीट हैं और आपका बेटा स्पोर्ट्स में रुचि नहीं ले रहा, तो यह आपके लिए निराशाजनक हो सकता है, लेकिन यहाँ यह समझना जरूरी है कि ‘जबरदस्ती का खेल’ कभी चैंपियन पैदा नहीं करता। रुचि न होने के पीछे छिपे मनोवैज्ञानिक कारण अक्सर माता-पिता बच्चे की अरुचि को उसका ‘आलस’ मान लेते हैं, जबकि इसके पीछे कई गहरे मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण ‘परफॉर्मेंस प्रेशर’ होता है। जब बच्चा देखता है कि उसके माता-पिता खेल में सफल रहे हैं, तो उसे हारने से डर लगने लगता है। उसे लगता है कि अगर वह अच्छा नहीं खेला, तो वह अपने माता-पिता के नाम को छोटा कर देगा। इसके अलावा, खेल के मैदान पर होने वाला सोशल जजमेंट या एंग्जाइटी भी उसे पीछे धकेलती है। कभी-कभी कारण शारीरिक भी होते हैं, जैसे लो-एनर्जी लेवल या किसी खेल विशेष में रुचि की कमी। सख्त कोच का व्यवहार या साथी खिलाड़ियों से लगातार तुलना भी बच्चे के मन में खेल के प्रति नफरत पैदा कर सकती है। फोर्स करना क्यों हो सकता है खतरनाक? यदि आप बच्चे को उसकी इच्छा के विरुद्ध मैदान पर भेजते हैं, तो इसके परिणाम नकारात्मक हो सकते हैं। जबरदस्ती करने से बच्चा न केवल खेल से दूर होगा, बल्कि उसका आत्मविश्वास भी डगमगा सकता है। दबाव में खेलने से उसमें चिड़चिड़ापन, तनाव और माता-पिता के प्रति विद्रोह की भावना पैदा हो सकती है। खेल जो खुशी और मानसिक शांति का माध्यम होना चाहिए, वह उसके लिए एक ‘बोझ’ बन जाता है। लॉन्ग टर्म में, यह आपके और बच्चे के बीच के भावनात्मक रिश्ते को भी कमजोर कर सकता है। क्या करें कि वह खेलों में रुचि ले? बतौर पेरेंट्स आपकी पहली जिम्मेदारी यह पहचानना है कि बच्चा किस चीज में ‘बेस्ट’ है। यदि उसे क्रिकेट या फुटबॉल पसंद नहीं, तो शायद उसे तैराकी, बैडमिंटन या चेस जैसा कोई अन्य खेल पसंद आ सकता है। उसे विभिन्न खेलों के विकल्प दें और खुद फैसला करने का मौका दें। घर का माहौल ऐसा रखें जहाँ खेल केवल जीतने के लिए नहीं, बल्कि आनंद और सेहत के लिए खेला जाए। याद रखें, सही पेरेंटिंग का अर्थ बच्चे को अपनी परछाई बनाना नहीं, बल्कि उसे उसकी अपनी चमक खोजने में मदद करना है। अगर वह खेल में करियर नहीं बनाना चाहता, तो भी उसे फिजिकल एक्टिविटी के अन्य तरीकों जैसे डांस या योग के लिए प्रेरित किया जा सकता है। उसे स्पोर्ट्स के फायदे बताएं, लेकिन उसे अपनी विरासत ढोने के लिए मजबूर न करें। जब बच्चा खुद को सुरक्षित और बिना किसी जजमेंट के महसूस करेगा, तभी वह अपनी असली प्रतिभा को निखार पाएगा।
Chocolate Day Special: चॉकलेट डे पर चाहिए दमकती त्वचा तो स्किन केयर में करें चॉकलेट का इस्तेमाल
नई दिल्ली । वैलेंटाइन वीक तीसरे दिन यानी कि 9 फरवरी को चॉकलेट डे मनाया जाता है ऐसे में इस दिन कपल्स एक-दूसरे को चॉकलेट तोहफे में देते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि इसी खाने वाली चॉकलेट से आप अपने चेहरे को दमका भी सकते हैं। जी हां आपको ये जानने की जरूरत है कि डार्क चॉकलेट त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है? दरअसल इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्लेवोनॉयड्स और मिनरल्स स्किन को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और नेचुरल ग्लो लाने में मदद करते हैं। खासतौर पर आजकल नेचुरल और होम रेमेडीज की डिमांड तेजी से बढ़ रही है ऐसे में चॉकलेट फेस पैक एक ट्रेंडिंग ब्यूटी हैक बन चुका है।तो अगर आप केमिकल प्रोडक्ट्स से दूर रहकर नेचुरल तरीके से ग्लोइंग स्किन पाना चाहती हैं तो चॉकलेट का सही इस्तेमाल जानना बेहद ज़रूरी है। आइए इस लेख में आपको इसी बारे में जानकारी देते हैं। चॉकलेट फेस पैक डार्क चॉकलेट में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। जब इसमें शहद और दूध मिलाया जाता है तो यह स्किन को गहराई से मॉइश्चराइज करता है। ये फेस पैक ड्राई और डल स्किन के लिए बेहद फायदेमंद है। हफ्ते में 1–2 बार इसका इस्तेमाल करने से चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है और स्किन सॉफ्ट व स्मूद बनती है। चॉकलेट स्क्रब चॉकलेट और ब्राउन शुगर से बना स्क्रब त्वचा की ऊपरी परत पर जमी डेड स्किन को हटाने में मदद करता है। ये ब्लड सर्कुलेशन को भी बेहतर बनाता है जिससे चेहरे पर तुरंत फ्रेशनेस नजर आती है। इस स्क्रब को हफ्ते में सिर्फ एक बार ही इस्तेमाल करें ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे। चॉकलेट और कॉफी मास्क कॉफी में मौजूद कैफीन और चॉकलेट के पोषक तत्व मिलकर टैनिंग पिग्मेंटेशन और डार्क स्पॉट्स को हल्का करने में मदद करते हैं। गुलाब जल त्वचा को ठंडक देता है और पोर्स को टाइट करता है। ये मास्क ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वालों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है। बरतें ये सावधानी चेहरे पर लगाने से पहले हमेशा पैच टेस्ट करें ताकि किसी तरह की एलर्जी या जलन से बचा जा सके। स्किन के लिए केवल डार्क चॉकलेट का ही इस्तेमाल करें क्योंकि दूध या फ्लेवर वाली चॉकलेट में ज्यादा शुगर और केमिकल होते हैं।फेस पैक को 15–20 मिनट से अधिक समय तक चेहरे पर न रखें और स्क्रब करते समय त्वचा को जोर से न रगड़ें।अगर आपकी त्वचा सेंसिटिव या एक्ने-प्रोन है तो इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें। खुले घाव कट या एक्टिव मुंहासों पर चॉकलेट न लगाएं।