Chambalkichugli.com

युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर का पहला जबलपुर दौरा रानी दुर्गावती को नमन कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह

नई दिल्ली ।भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर अपने पहले आधिकारिक दौरे पर जबलपुर पहुंचे। नगर आगमन पर युवा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। प्रदेश अध्यक्ष ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके अदम्य साहस शौर्य और बलिदान को नमन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद सदस्य चंद्रशेखर पटेल ने प्रदेश अध्यक्ष का स्वागत किया। कार्यक्रम की शुरुआत रानी दुर्गावती के जीवन और संघर्ष को स्मरण करते हुए की गई। आयोजन के दौरान वीरांगना रानी दुर्गावती के जीवन पर आधारित लोक नृत्य की विशेष प्रस्तुति दी गई जिसने उपस्थित युवाओं और अतिथियों को इतिहास और संस्कृति की गौरवशाली परंपरा से जोड़ दिया। लोक नृत्य के माध्यम से नारी शक्ति और स्वाभिमान का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने इस प्रस्तुति को प्रेरणादायक बताया। श्याम टेलर ने कहा कि रानी दुर्गावती जैसी वीरांगनाएं आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक हैं और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान आगामी बजट सत्र को लेकर भी चर्चा हुई। इसमें युवाओं की भूमिका जनकल्याणकारी योजनाएं और प्रदेश व देश के विकास की दिशा पर विचार विमर्श किया गया। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि युवा मोर्चा संगठन की रीढ़ है और युवाओं को नीति निर्माण और जनसरोकारों से जुड़े विषयों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में युवा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी अहम है। युवाओं को संगठन के माध्यम से सेवा समर्पण और राष्ट्रवाद की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।इस कार्यक्रम में योगेंद्र सिंह ठाकुर जय रोहणी आशीष काटकर ईशान नायक शरद विश्वकर्मा रोहन वैद्य राहुल सिंह पटेल अभिषेक वाल्मीक शशांक विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष के पहले जबलपुर दौरे का गर्मजोशी से स्वागत किया।

मप्र को मिला केंद्र से पंचायती राज के लिए 652 करोड़ का बूस्टर: ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति!

भोपाल। मध्य प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान के रूप में 652.55 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह राशि वित्त वर्ष 2024-25 की बंधनरहित अनुदान की दूसरी किस्त के रूप में है, जो राज्य की सभी 52 पात्र जिला पंचायतों, 312 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 23,001 पात्र ग्राम पंचायतों को लाभ पहुंचाएगी। साथ ही, पिछली किस्त के रोके गए 77 लाख रुपये भी तीन अतिरिक्त ब्लॉक पंचायतों और छह ग्राम पंचायतों को मुहैया कराए गए हैं। इस संबंध में प्राप्‍त जानकारी के अनुसार उक्‍त अनुदान ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को मजबूत करने का माध्यम बनेगा, जो स्वच्छता, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास में सहायक होगा। मध्य प्रदेश जैसे कृषि-प्रधान राज्य में यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला साबित होगा।उल्‍लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में पंचायती राज संस्थाएं (पीआरआई) लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने का आधार हैं। राज्य में कुल 52 जिला पंचायतें, 312 ब्लॉक पंचायतें और 23,001 ग्राम पंचायतें कार्यरत हैं, जो लगभग 7.8 करोड़ की जनसंख्या को कवर करती हैं। 73वें संविधान संशोधन के बाद यह त्रिस्तरीय व्यवस्था स्थापित हुई, जो ग्रामीण विकास को स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित करती है। पंद्रहवें वित्त आयोग ने 2021-26 की अवधि के लिए कुल 2.36 लाख करोड़ रुपये का अनुदान निर्धारित किया था, जिसमें मध्य प्रदेश को 6,339 करोड़ रुपये का हिस्सा मिलना है। इस अनुदान का बड़ा हिस्सा बंधनरहित है, जिसका उपयोग पंचायतें अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार कर सकती हैं।आर्थिक आंकड़ों से झलकता विकास का चित्रपिछले वर्षों के आंकड़े इस अनुदान की अहमियत को रेखांकित करते हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में मध्य प्रदेश को पंद्रहवें वित्त आयोग से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक मिले थे, जिनका उपयोग जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और ग्रामीण सड़कों पर हुआ। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024 तक ग्राम पंचायतों ने 15,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कें बनाईं, जबकि स्वच्छता अभियान में 90 फीसद से ऊपर खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) गांव हासिल हो चुके हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसएसओ) के अनुसार, मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय 2023 में 1.2 लाख रुपये तक पहुंची, जो अनुदान से प्रेरित है।इस अनुदान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। मध्य प्रदेश का ग्रामीण जीडीपी राज्य के कुल जीडीपी (2024-25 अनुमान: 4.5 लाख करोड़ रुपये) का 55% है। अनुदान से जल संरक्षण परियोजनाओं में निवेश बढ़ेगा, खासकर बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्रों में जहां सूखा प्रभावित किसान हैं। उदाहरणस्वरूप, 2024 में राज्य ने 5,000 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया, जिससे सिंचाई क्षमता 20 फीसद बढ़ी। इसके अलावा, महिला सशक्तिकरण के लिए पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण ने 1.5 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधियों को सक्रिय किया है।मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार ने 2025 बजट में पंचायतों के लिए 10,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया, जो केंद्र अनुदान के साथ मिलकर ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को दोगुना करेगा। विशेष रूप से, आदिवासी बहुल जिलों जैसे मंडला, डिंडोरी में यह राशि स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। नीति आयोग के आंकड़ों से स्पष्ट है कि पंद्रहवें वित्त आयोग अनुदान से राज्य की ग्रामीण गरीबी दर 2024 में 25 फीसद से घटकर 22 फीसद रह गई है।

फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर नहीं थम रहा विवाद, भोपाल में फिर प्रदर्शन जारी

भोपाल। साेशल मीडिया प्लेटफार्म ओटीटी पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक दिन पहले हुए प्रदर्शन के बाद भोपाल में ब्राह्मण समाज ने शुक्रवार को एक बार फिर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। एमपी नगर इलाके में हुए इस प्रदर्शन में फिल्म के टाइटल, संवाद, निर्देशन और कलाकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा कि वे किसी भी तरह की सफाई स्वीकार नहीं करेंगे और फिल्म को किसी भी कीमत पर रिलीज नहीं होने देंगे। प्रदर्शन के दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा कि फिल्मों को समाज का दर्पण कहा जाता है, लेकिन इस फिल्म के जरिए एक पूरे समाज को गलत और अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना जिम्मेदारी के इस तरह का कंटेंट लॉन्च करना गंभीर चूक है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार पर भी निशाना पुष्पेंद्र मिश्रा ने सरकार और प्रशासन पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एफआईआर की मांग के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर “सोए हुए हैं”। यूजीसी नियमों और सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की नीतियां समाज को बांटने का काम कर रही हैं। मनोज बाजपेयी की तस्वीर को जूतों से रगड़ा प्रदर्शन के दौरान फिल्म से जुड़े कलाकारों के खिलाफ नारे लगाए गए। इसी बीच अभिनेता मनोज बाजपेयी की तस्वीर को जूतों से रगड़कर प्रतीकात्मक विरोध किया गया, जिससे मौके पर माहौल तनावपूर्ण हो गया।

विंध्य की गोद में बसा खिवनी अभयारण्य बन रहा इको-टूरिज्म का आकर्षण केन्द्र

भोपाल। विंध्य पर्वतमालाओं की गोद में स्थित खिवनी अभयारण्य मध्य प्रदेश के उभरते हुए इको-टूरिज्म स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। देवास और सीहोर जिलों की सीमा पर फैला लगभग 134 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला यह अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव शोधकर्ताओं और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित कर रहा है। जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि घने जंगल, पर्वत घाटियां, बहते नदी-नाले और समृद्ध जैव विविधता इसे एक अनूठा प्राकृतिक स्थल बनाते हैं। ईको-पर्यटन विकास बोर्ड के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। सफारी संचालन, भोजन व्यवस्था, आवास प्रबंधन तथा लघु उद्योगों के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और कारीगरों की आय में वृद्धि हो रही है। अभयारण्य में https://mpforest.gov.in/ecotourism/ecobooking/destination.aspx के माध्यम से बुकिंग की जा सकती है। उन्होंने बताया कि देवास जिले में स्थित इस अभयारण्य का लगभग 89.9 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र देवास तथा 44.8 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र सीहोर जिले में आता है। खिवनी अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन का सुंदर उदाहरण देखने को मिलता है। यहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के साथ अनेक औषधीय पौधों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं, जो इसकी प्राकृतिक समृद्धि को दर्शाती हैं। अभयारण्य में पर्यटकों के ठहरने के लिये सर्व-सुविधायुक्त टूरिस्ट कैंपस विकसित किया गया है, जिसमें कॉटेज, टेंट, वॉच टावर, पैगोडा और भोजन की व्यवस्था उपलब्ध है। वन्यजीव और जैव विविधता की समृद्ध धरोहर खिवनी अभयारण्य में मांसाहारी वन्यजीवों में बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, सोनकुत्ता, जंगल कैट, गोल्डन जैकाल, एशियन पाम सिवेट सहित अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं, वहीं शाकाहारी जीवों में चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंगा, कृष्णमृग, जंगली सूअर और खरहा प्रमुख हैं। पक्षियों की लगभग 170 प्रजातियां तथा तितलियों की करीब 65 प्रजातियां इस अभयारण्य की जैव विविधता को और समृद्ध बनाती हैं। प्रमुख दर्शनीय स्थल अभयारण्य में बाल गंगा मंदिर, कलम तलई सनसेट पॉइंट, ईको व्यू पॉइंट, गोल कोठी, खिवनी मिडो, शंकर खो एवं भदभदा झरने, भूरी घाटी और दौलतपुर घाटी जैसे अनेक आकर्षक स्थल हैं। विशेषकर वर्षाकाल में झरनों, हरियाली और पर्वत श्रृंखलाओं का दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयास खिवनी अभयारण्य को पर्यटन मानचित्र पर व्यापक स्तर पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नियमित मॉनिटरिंग के साथ पर्यटकों की सुविधाओं के समुचित प्रबंधन किया जा रहा है। खिवनी अभयारण्य भोपाल–इंदौर मार्ग पर आष्टा से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इंदौर–नेमावर–हरदा मार्ग से कन्नौद होकर भी यहां पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन हरदा तथा निकटतम हवाई अड्डे इंदौर और भोपाल हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, वन्यजीवों की विविधता और शांत वातावरण के कारण खिवनी अभयारण्य पर्यटकों की नई पसंद बनता जा रहा है और मध्यप्रदेश के इको-टूरिज्म को एक नई दिशा दे रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार के जवाब से पहले विजय शाह का भावुक संदेश कहा सेना और समाज के प्रति कोई दुर्भावना नहीं

मध्यप्रदेश / कर्नल सोफिया को लेकर दिए विवादित बयान पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से ठीक पहले मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने एक बार फिर माफी मांगी है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उन्होंने कहा कि उनके शब्द किसी महिला अधिकारी भारतीय सेना या किसी समाज के अपमान के उद्देश्य से नहीं थे बल्कि वे देशभक्ति के उत्साह और आवेश में निकल गए थे। विजय शाह ने कहा कि उन्होंने पहले भी कई बार क्षमा याचना की है और आज एक बार फिर अंतकरण से माफी मांग रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक होती है और इस घटना से उन्होंने आत्ममंथन किया है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में वाणी पर पूर्ण नियंत्रण रहेगा और ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक है कि एक छोटी सी त्रुटि से इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने भारतीय सेना के प्रति अपने सम्मान को दोहराते हुए कहा कि सेना के लिए उनके मन में हमेशा सम्मान रहा है और रहेगा। यह विवाद पिछले साल 11 मई को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में दिए गए भाषण से शुरू हुआ था। एक कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए मंत्री विजय शाह ने ऐसा बयान दिया जिसे लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई। विपक्षी दलों के साथ साथ पूर्व सैन्य अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने बयान को आपत्तिजनक बताया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जहां मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति को लेकर मध्यप्रदेश सरकार को जवाब दाखिल करना है। कोर्ट ने पहले ही राज्य सरकार को 15 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। अब 9 फरवरी को इस मामले में अहम सुनवाई प्रस्तावित है।सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से और समय मांग सकती है। तर्क दिया जा सकता है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण जरूरी है। यही रुख इस मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम का भी रहा है। विजय शाह मामले की जांच एसआईटी कर रही है जिसमें प्रमोद वर्मा कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं। एसआईटी पहले भी अतिरिक्त समय की मांग कर चुकी है। इसी बीच मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करने के लिए दिल्ली भेज दी है। गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस संबंध में दिल्ली पहुंचे हैं।सूत्र बताते हैं कि सरकार ने इस मामले में पार्टी नेतृत्व के साथ साथ अटॉर्नी जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी कानूनी सलाह ली है। संभावना है कि 9 फरवरी को अभियोजन से जुड़े बिंदुओं पर सुनवाई होगी जबकि 11 फरवरी को अन्य पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।

इंदौर में टीचर्स के मीम्स बनाने वाले छात्र को स्कूल से निकाले जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता: ICSE बोर्ड और MP सरकार से 13 फरवरी तक मांगा जवाब

इंदौर /का 14 वर्षीय छात्र जो इंस्टाग्राम पर टीचर्स के कुछ मीम्स शेयर करने के आरोप में लिटिल वंडर्स कॉन्वेंट स्कूल से निष्कासित किया गया था अब सुप्रीम कोर्ट की निगाहों में है। जस्टिस बी.वी. नागरथना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार, ICSE बोर्ड और स्कूल प्रबंधन सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है और 13 फरवरी 2026 तक जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह मामला केवल अनुशासन का नहीं है बल्कि एक बच्चे के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि छात्र को बोर्ड परीक्षा में शामिल कराने के लिए व्यावहारिक समाधान निकालना सभी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जवाब में स्पष्ट किया जाए कि छात्र की पढ़ाई जारी रखने के लिए किस संस्था की क्या भूमिका होगी। मामला लिटिल वंडर्स कॉन्वेंट स्कूल का है। आरोप है कि छात्र ने दो दोस्तों के साथ मिलकर एक प्राइवेट इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया और वहां शिक्षकों से जुड़े मीम्स पोस्ट किए। स्कूल ने इसे अनुशासनहीनता माना और छात्र को निष्कासित कर दिया। परिवार ने इंदौर हाईकोर्ट में राहत मांगी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे अस्वीकार कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील निपुण सक्सेना ने कोर्ट में दलील दी कि 13-14 साल के बच्चे की डिजिटल गतिविधियों को अपराध के तौर पर नहीं देखा जा सकता। स्कूल की कार्रवाई अत्यधिक कठोर थी। उन्होंने कहा कि अगर निष्कासन को सही माना गया, तो स्कूलों को बच्चों की निजी डिजिटल लाइफ पर असीमित निगरानी का अधिकार मिल जाएगा, जो उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन है। इंदौर हाईकोर्ट ने पहले छात्र को राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि समाज में सख्त संदेश जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट अब शिक्षा के अधिकार और अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की पहल कर रहा है। अदालत का मुख्य फोकस यह है कि छात्र का शैक्षणिक सत्र बाधित न हो।अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी। इस दिन कोर्ट यह तय कर सकता है कि छात्र उसी स्कूल से परीक्षा देगा या बोर्ड उसे किसी अन्य सेंटर से परीक्षा देने की विशेष अनुमति देगा। पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे की शिक्षा किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होनी चाहिए।

प्रबंध संचालक द्वारा इंदौर मेट्रो परियोजना निरीक्षण एवं प्रगति की समीक्षा

इंदौ। मध्य प्रदेश के इंदौर मेट्रो परियोजना के अंतर्गत एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने शुक्रवार को परियोजना कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्ध प्रगति तथा प्रस्तावित परिचालन से जुड़े विभिन्न तकनीकी एवं प्रबंधकीय पहलुओं का अवलोकन किया। प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप एवं तय समयसीमा में पूर्ण किए जाएँ, ताकि यात्रियों को सुरक्षित, विश्वसनीय एवं आधुनिक मेट्रो सेवा उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि इंदौर मेट्रो के आगामी सेक्शनों को शीघ्र ही परिचालन हेतु तैयार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने सभी ठेकेदारों एवं अधिकारियों को कार्यस्थलों पर उपस्थिति बढ़ाने तथा उपलब्ध मैनपावर का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रबंध संचालक ने मालवीय नगर से स्टेशन SC-02 तक के खंड का निरीक्षण किया। इस दौरान स्टेशन परिसर, अप्रोच मार्ग, यात्री सुविधाओं एवं फिनिशिंग कार्यों की गुणवत्ता का जायजा लिया गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। समीक्षा बैठक में अधिकारियों द्वारा निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति एवं आगामी कार्य योजना की जानकारी प्रस्तुत की गई। विशेष रूप से पैकेज IN-02, IN-03, IN-04, IN-05 तथा IN-07 की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रबंध संचालक ने भूमिगत एवं एलिवेटेड खंडों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए कार्यों को गति प्रदान करने पर विशेष जोर दिया। निरीक्षण एवं समीक्षा के दौरान परियोजना से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

खेतों में ड्रोन तकनीक उपयोग, 2500 एकड़ में स्प्रे कर फसलों का किया उपचार

राजगढ़। कलेक्टर डॉ. गिरीशकुमार मिश्रा के निर्देशन में परंपरागत खेती के तौर-तरीकों को पीछे छोड़ते हुए राजगढ़ जिले के किसानों ने आधुनिक कृषि की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। अंकुरण फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी मऊ ने जिले में पहली बार ड्रोन तकनीक का उपयोग कर 2500 एकड़ भूमि पर फसलों का उपचार (स्प्रे) कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कंपनी के संचालक श्याम राजपूत ने बताया कि कृषि ड्रोन का उपयोग केवल एक नवाचार नही, बल्कि किसानों की बड़ी समस्याओं का समाधान है। इससे समय की बचत के साथ पूरी फसल में एक समान दवा का छिड़काव होता है, जिससे बर्बादी रुकती है। घने क्षेत्रों में भी स्प्रे संभव है,जहां हस्तचालित पंप के साथ जाना मुश्किल था। छिड़काव के दौरान किसानों को जहरीले जीवों और कीटनाशकों के सीधे शारीरिक संपर्क से होने वाले खतरों से सुरक्षा मिली है। कंपनी के तकनीकी ऑपरेटर नीरज राजपूत ने बताया कि रबी सीजन में टीम ने 3 अत्याधुनिक ड्रोन्स की मदद से सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों को कवर किया है, जिसमें 2500 एकड़ का यह सफर तो महज एक शुरुआत है, हमारा लक्ष्य अगले साल दस हजार एकड़ तक पहुंचना है।वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सारंगपुर राजेश राजपूत ने बताया कि कृषि ड्रोन तकनीक का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन उत्साहजनक है। खेतों में ड्रोन से फसलों पर छिड़काव के काफी सकारात्मक और प्रभावी परिणाम देखने को मिल रहे है। इससे न केवल कीटनाशकों का सटीक उपयोग सुनिश्चित हो रहा है, बल्कि फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आ रहा है। उपसंचालक कृषि सचिन जैन का कहना है कि राजगढ़ जिले में ड्रोन तकनीक के माध्यम से किया जा रहा यह नवाचार कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति ला रहा है। तकनीक के इस समावेश से निश्चित ही हमारे जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपना रहे है।शासन की मंशा के अनुरूप यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।

इटारसी में कार नहर में गिरी, 3 की मौत: युवक फंसे रहे कार में, विंडो तोड़ते रहे, देखते ही देखते डूब गए

इटारसी/पथरोटा मार्ग शुक्रवार देर रात एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पथरोटा की बड़ी नहर की रेलिंग तोड़ते हुए गहरे पानी में गिर गई कार में सवार तीन युवक मौके पर ही मृत पाए गए। मृतकों की पहचान रैसलपुर निवासी 30 वर्षीय लकी पटेल पिता भवानी शंकर पटेल जो कार चला रहा था, 26 वर्षीय शिवम तिवारी पिता महेश तिवारी निवासी खीर पानी और 19 वर्षीय अभय उर्फ अभि चौहान पिता राकेश चौहान, जय प्रकाश नगर, पुरानी इटारसी के रूप में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इटारसी की ओर से आ रही ग्रे रंग की कार अचानक पुल की रेलिंग तोड़ती हुई सीधे नहर में समा गई। एसडीआरएफ प्लाटून कमांडर अमृता दीक्षित ने बताया कि कार सवार युवक विंडो खोलने और कांच तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, साथ ही चिल्ला भी रहे थे, लेकिन कार के लॉक होने की वजह से वे गहरे पानी में डूब गए। हादसा देख स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। एक स्थानीय युवक ने नहर में कूदकर जान की परवाह किए बिना बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण सफल नहीं हो सका। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और करीब ढाई घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद कार को नहर से बाहर निकाला गया। कार के दरवाजे खोलते ही तीनों युवक मृत पाए गए। एसडीआरएफ ने बताया कि कार में युवक संघर्ष करते रहे, कांच तोड़ने के निशान मिले, लेकिन वे बाहर नहीं निकल सके। परिजनों के अनुसार तीनों सिवनी मालवा गए थे और लौटते समय यह हादसा हुआ। मृतक शिवम तिवारी के पिता महेश ने बताया कि सुबह करीब छह बजे हादसे की सूचना मिली थी। अभय चौहान के पिता राकेश ने बताया कि रात में बेटे से फोन पर बात हुई थी, अभय ने कहा था कि कार से लौट रहा है और मां से खाने को लेकर बात की थी। अभय परिवार का इकलौता बेटा था। लकी पटेल की मां वैष्णो देवी यात्रा पर हैं। लकी के पिता पहले ही देहांत हो चुके हैं और बड़े भाई की कुछ साल पहले नर्मदा में डूबने से मौत हो गई थी। लकी के घर में दो बहनें हैं, एक शादीशुदा और दूसरी अविवाहित शुभांगी।हादसे ने इटारसी और आसपास के इलाकों में मातम मचा दिया है। ग्रामीणों और परिवारवालों में गहरी शोक की लहर है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच में लगी है और सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर रही है। का हिस्सा बन गए हैं

पीएम मोदी ने बजट चर्चा में दिग्विजय सिंह के भाषण पर साधा चुटकी भरा तंज कहा– क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे?

भोपाल :संसद में बजट पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिग्विजय सिंह के भाषण पर चुटकी ली और मुस्कुराते हुए कहा कि क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे प्रधानमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि मैं कल एक माननीय सदस्य को सुन रहा था जो अपने आप को राजा कहलाने में गर्व महसूस करते हैं लेकिन वही आर्थिक असमानता की चर्चा कर रहे थे मोदी ने सवालिया अंदाज में कहा बताइए जो खुद को राजा माने और आर्थिक असमानता की बात करे क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे दिग्विजय सिंह ने अपने भाषण में सामाजिक सौहार्द और समरसता बिगड़ने के साथ आर्थिक असमानता बढ़ने की चिंता जताई थी संसद में विपक्ष के लगभग हर सांसद ने सरकार को घेरने की कोशिश की लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के जवाब ने ‘राजा साहब’ को सीधे तंज की जद में ला दिया इसी बीच लाड़ली बहनों पर विवादित बयान देने वाले मंत्री करण सिंह वर्मा ने सफाई दी और कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा उन्होंने केवल लाड़ली बहनों को भोजन पर आमंत्रित किया था उन्होंने अपने बयान पर खेद भी जताया विपक्ष ने इसकी कड़ी निंदा की वहीं इस तरह के बयान भाजपा सरकार के लिए किरकिरी का सबब बन सकते हैं इससे पहले भी मंत्री विजय शाह को लाड़ली बहनों के बयान को लेकर विवाद का सामना करना पड़ा था सियासी हलचल श्योपुर में तब और तेज हुई जब भाजपा पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय के घर चोरी की घटना सामने आई चोरों ने एसी का पंखा ही चोरी कर लिया कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने इस घटना को लेकर खुशी जाहिर की और कहा ऐसे चोर को पुरस्कार मिलना चाहिए उन्होंने तंज कसा कि जब सत्ताधारी दल के नेता के घर में सुरक्षा नहीं है तो आम आदमी की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है भोपाल में मीडिया के सवालों से बचते हुए मंत्री विजय शाह सीधे कार में बैठे और शीशा चढ़ाकर रवाना हो गए उनका कर्नल सोफिया पर दिया गया विवादित बयान 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए तय है मंत्री की चुप्पी सियासी गलियारों में चर्चाओं को और बढ़ा रही है लोग कह रहे हैं इसे ही कहते हैं दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक कर पीता है वहीं कुछ का कहना है कहीं पार्टी ने मंत्री की जुबान पर ताला तो नहीं लगा दिया इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि संसद की बहस और सियासी बयानबाज़ियों ने एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ा दी है पीएम के तंज से लेकर मंत्री के बयान और मीडिया से बचने की कवायद तक ये सब राजनीतिक हलचल