9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला

भोपाल! श्रम विभाग ने 9 फरवरी को ‘बंधक श्रम उन्मूलन दिवस’ पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है। उद्घाटन सुबह 10 बजे श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। कार्यशाला में राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी होगा। पूरे मध्य प्रदेश में महीनेभर चलेगा अभियान बंधक श्रम (बंधुआ मजदूरी) कराने वालों के विरुद्ध मध्यप्रदेश का श्रम विभाग 9 फरवरी ‘बंधक श्रम उन्मूलन दिवस’ से विशेष अभियान भी शुरू करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री की पहल पर विभाग ने बाल एवं बंधक श्रम को रोकने और जागरुकता लाने एक विशेष ‘वेदा पहल’ की शुरुआत की है। कार्यशाला के प्रमुख चार बिंदु पहला: बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षण, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी। दूसरा: बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के क्रियान्वयन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिनियम की उपलब्धियों एवं वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया जाएगा। तीसरा: नई चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। चौथा: राज्य एक्शन प्लान के माध्यम से विभागीय समन्वय, प्रवर्तन व्यवस्था एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी। श्रम विभाग के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य कानून, नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य में बाल एवं बंधुआ श्रम के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।
MP के 11 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे, कटनी सबसे ठंडा, नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस से मावठे की संभावना

भोपाल। फरवरी में ठंड ने मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में फिर से दस्तक दी है। बीती रात ग्वालियर खजुराहो सहित 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रिकॉर्ड किया गया। कटनी शहडोल और छतरपुर इस ठंड की सूची में सबसे आगे हैं। शुक्रवार को तेज सर्द हवाओं ने ठंड का असर बढ़ाया, और शनिवार को भी सर्दी का असर जारी रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से प्रदेश में हाल के दिनों में ओले और बारिश का दौर चला। घना कोहरा भी प्रभावित रहा। सिस्टम कमजोर होने के बाद पिछले दो दिनों से ठंड और बढ़ गई है। सबसे ठंडा शहर कटनी रहा जहां करौंदी में तापमान 5.6 डिग्री तक गिरा। शहडोल छतरपुर और खजुराहो भी बेहद ठंडे रहे जबकि रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़ और उमरिया में 8 डिग्री न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव और पचमढ़ी में 8.6 डिग्री सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री और मंडला तथा सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रहा। पांच बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, यहां न्यूनतम 8.7 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 10.2 डिग्री, इंदौर में 10.9 डिग्री, जबलपुर में 11.6 डिग्री और उज्जैन में 12.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। शुक्रवार को तेज सर्द हवाओं ने ठंड और बढ़ा दी और शनिवार को भी सर्दी का असर जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के चलते हाल के दिनों में प्रदेश में ओले और बारिश हुई थी साथ ही घना कोहरा भी रहा। सिस्टम कमजोर होने के बाद पिछले दो दिनों से ठंड बढ़ी है। 8 फरवरी को हल्का कोहरा रहेगा, बारिश का कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन ठंड का असर बढ़ेगा। 9 फरवरी को कई जिलों में हल्का से मध्यम कोहरा रहेगा बारिश की संभावना नहीं है। पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिससे जल्द ही प्रदेश में मौसम प्रभावित होगा। 10 फरवरी से मावठा गिरने का अनुमान है, यानी अगले चार दिन प्रदेश में बारिश या ओले नहीं पड़ने की संभावना है। उज्जैन में सुबह का तापमान 13 डिग्री था और हल्की ठंड महसूस हुई। धूप निकलने के साथ ही दिन का अधिकतम तापमान 29 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है। ग्वालियर में रातें अभी भी ठंडी हैं, जबकि दिन में धूप के कारण गर्मी का एहसास होता है। इंदौर में शनिवार सुबह ठंड का असर साफ नजर आया, हल्का कोहरा और ठंडी हवाओं ने ठंड बढ़ा दी। ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और उज्जैन संभाग के जिलों में सुबह हल्का से मध्यम कोहरा देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार धूप निकलने के बाद ठंड से कुछ राहत मिलेगी।
बांग्लादेश चुनाव में भारत और अल्पसंख्यक सबसे बड़े मुद्दे, मैनिफेस्टो में क्या कह रहीं प्रमुख पार्टियां?

NP) और जमात-ए-इस्लामी के मैनिफेस्टो में भारत और हिंदू समुदाय को लेकर अपनाए गए रुख पर सबकी निगाहें टिकी हैं। भारत को लेकर पार्टियों की सोच 17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान ने BNP की कमान संभालते ही “बांग्लादेश फर्स्ट” को अपना मूल मंत्र बताया है। पार्टी का घोषणापत्र भी इसी नीति के इर्द-गिर्द घूमता है। तारिक रहमान का कहना है कि बांग्लादेश न तो किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करेगा और न ही अपने मामलों में दखल स्वीकार करेगा। उनका चर्चित नारा— “न दिल्ली, न पिंडी, पहले बांग्लादेश”—भारत के लिए खास मायने रखता है। यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब यूनुस सरकार के दौरान बांग्लादेश की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियों को लेकर सवाल उठे थे। माना जा रहा है कि तारिक रहमान इस दिशा में अलग संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी ने अपने घोषणापत्र में भारत के साथ शांतिपूर्ण, मित्रवत और सहयोगी संबंधों की वकालत की है। चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के दस्तावेज़ में पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं है। हालांकि जमात ने मुस्लिम देशों को प्राथमिकता देने की बात कही है और अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान व कनाडा जैसे पश्चिमी देशों से भी रिश्ते मजबूत करने का संकेत दिया है। हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर क्या वादे? हिंदुओं की सुरक्षा इस चुनाव का एक अहम मुद्दा बन चुकी है। BNP ने अपने घोषणापत्र में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की जान, संपत्ति और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लागू करने का वादा किया है। इसके अलावा सभी धर्मों के धार्मिक नेताओं के लिए भत्ते और कल्याणकारी योजनाओं की भी बात कही गई है। वहीं जमात-ए-इस्लामी ने हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट और ठोस वादा नहीं किया है। पार्टी ने केवल धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने की बात अपने मैनिफेस्टो में शामिल की है। कुल मिलाकर, इस चुनाव में भारत से रिश्ते और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा ऐसे मुद्दे हैं, जो बांग्लादेश की आने वाली राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। …………
शाही मंडप नहीं, अपना आशियाना बना यादगार; शादी के खर्च से खरीदा घर, कपल की हर तरफ तारीफ

नई दिल्ली। आज के दौर में शादियों को भव्य बनाने की होड़ किसी से छिपी नहीं है। डेस्टिनेशन वेडिंग, लाखों का सजावटी मंडप, डिजाइनर कपड़े और सैकड़ों मेहमानों की दावत—इन सब पर लोग अपनी जमा-पूंजी तक खर्च कर देते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा कपल चर्चा में है, जिसने इस चलन से हटकर मिसाल पेश की है। इस जोड़े ने एक दिन के शोर-शराबे और दिखावे पर लाखों रुपये खर्च करने की बजाय उसी रकम से अपना घर खरीदने का फैसला किया। यही नहीं, दोनों ने अपने नए घर में ही बेहद सादगी से शादी रचाई, जो अब लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। नए घर में लिए सात फेरे वायरल हो रहे वीडियो में दिखाया गया है कि कपल ने अपने नए घर के लिविंग रूम को ही मंडप बना लिया। परिवार के चुनिंदा सदस्य और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में रस्में निभाई गईं। वीडियो में दूल्हे के भाई ने बताया कि महंगी शादी की बजाय घर में निवेश करने का फैसला सोच-समझकर लिया गया था। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस फैसले की खुलकर तारीफ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर मिल रही जमकर सराहना यूजर्स इस शादी को “समझदारी भरा कदम” बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि दिखावे के लिए कर्ज में डूबने से बेहतर है भविष्य की मजबूती पर ध्यान देना। कुछ यूजर्स ने लिखा कि समाज की परवाह किए बिना ऐसा फैसला लेना वाकई काबिले-तारीफ है। वहीं, कई लोग इसे आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं। इस कपल ने साबित कर दिया कि शादी की यादें खर्च से नहीं, फैसलों की समझदारी से खास बनती हैं।
आर्टेमिस मिशन में नया अध्याय: नासा पहली बार चंद्रमा पर भेजेगा iPhone

नई दिल्ली। अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में नासा एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत इस महीने चंद्रमा की यात्रा पर जाने वाले वैज्ञानिक पहली बार अपने साथ iPhone लेकर जाएंगे। इन स्मार्टफोन्स की मदद से अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की तस्वीरें लेंगे, वीडियो रिकॉर्ड करेंगे और वहां बिताए गए पलों को दस्तावेज़ करेंगे। नासा की ओर से वैज्ञानिकों को ये iPhone उपलब्ध कराए जाएंगे। इस फैसले की जानकारी नासा के प्रशासक जैरेड आइज़ैकमैन ने सोशल मीडिया के जरिए दी। उन्होंने बताया कि क्रू मेंबर्स को एक ऐसा विशेष टूल दिया जा रहा है, जिससे वे अपने ऐतिहासिक अनुभवों को न सिर्फ सुरक्षित रख सकें, बल्कि अपने परिवार और दुनिया भर के लोगों के साथ साझा भी कर सकें। अब तक नहीं थी अनुमति अब तक नासा के अंतरिक्ष यानों में किसी भी प्रकार के मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं थी। हालांकि, नासा ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह सुविधा सिर्फ मून मिशन के लिए दी जा रही है, लेकिन भविष्य में अन्य डिवाइसों को भी मंजूरी मिल सकती है। नासा की प्रवक्ता बेथनी स्टीवेन्स ने गुरुवार को कहा कि यह एजेंसी के लिए पहली बार है जब किसी मिशन में स्मार्टफोन को आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले करीब दस वर्षों से कमर्शियल स्पेस फ्लाइट्स में सुरक्षित रूप से स्मार्टफोन का उपयोग किया जा रहा है। पहले भी तोड़ी जा चुकी हैं परंपराएं गौरतलब है कि जैरेड आइज़ैकमैन 2024 में एक कमर्शियल स्पेस फ्लाइट के दौरान स्मार्टफोन अपने साथ ले जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि नासा ने लंबे समय से चली आ रही प्रक्रियाओं को चुनौती देते हुए आधुनिक हार्डवेयर को कम समय में अंतरिक्ष उड़ान के लिए योग्य बनाया है। अंतरिक्ष में कमर्शियल उत्पादों का दुर्लभ उपयोग अंतरिक्ष मिशनों में आमतौर पर कमर्शियल उत्पादों का इस्तेमाल बेहद कम होता है, क्योंकि वहां उपयोग होने वाले उपकरणों के लिए परीक्षण मानक बेहद सख्त होते हैं। इससे पहले ओमेगा स्पीडमास्टर प्रोफेशनल घड़ी को अपोलो मिशनों में इस्तेमाल किया गया था, जो चंद्रमा पर पहनी गई पहली घड़ी बनी। आज यह घड़ी स्मिथसोनियन के नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम में प्रदर्शित है और इसका व्यावसायिक संस्करण करीब 7,500 डॉलर में उपलब्ध है।
वैभव सूर्यवंशी पर भारी पड़ा BCCI का नियम: 14 साल की उम्र में ही खत्म हुआ अंडर-19 वर्ल्ड कप का सफर

नई दिल्ली ।अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की तूफानी पारी खेलकर भारत को छठा खिताब दिलाने वाले वैभव सूर्यवंशी आज हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी की जुबान पर हैं। पूरे टूर्नामेंट में 439 रन और रिकॉर्ड 30 छक्के जड़ने वाले वैभव की उम्र अभी सिर्फ 14 साल है। कायदे से देखा जाए तो 27 मार्च को 15 साल के होने जा रहे वैभव 2028 और उसके बाद के भी अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने की उम्र रखते हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI का एक नियम उनके इस मौके को छीन चुका है। बीसीसीआई का वो सख्त नियम क्या है? दरअसल, बीसीसीआई ने साल 2016 में जूनियर क्रिकेट के ढांचे में एक बड़ा बदलाव किया था। इस नियम के तहत कोई भी भारतीय खिलाड़ी अपने करियर में केवल एक ही बार अंडर-19 वर्ल्ड कप में हिस्सा ले सकता है। बोर्ड का मानना है कि ऐसा करने से नए खिलाड़ियों को मौका मिलता है और टैलेंट पूल का दायरा बढ़ता है। यदि किसी खिलाड़ी को एक से ज्यादा बार मौका दिया जाए, तो वह नए टैलेंट का रास्ता रोकता है। यही कारण है कि वैभव सूर्यवंशी अब भविष्य में दोबारा कभी भी भारत की अंडर-19 विश्व कप टीम की जर्सी नहीं पहन पाएंगे। इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं ये नाम 2016 से पहले नियम अलग थे। उस समय कई खिलाड़ियों ने अपनी उम्र के आधार पर एक से अधिक बार इस टूर्नामेंट में भाग लिया था। भारतीय टीम के मौजूदा सितारे रवींद्र जडेजा, सरफराज खान, आवेश खान, विजय जोल और रिकी भुई ऐसे नाम हैं जिन्होंने एक से ज्यादा बार अंडर-19 वर्ल्ड कप खेला है। सरफराज खान ने तो दो वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन कर काफी सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन वैभव अब इस फेहरिस्त में शामिल नहीं हो सकेंगे। आगे क्या है वैभव का रास्ता? भले ही वैभव अब अंडर-19 वर्ल्ड कप न खेल पाएं, लेकिन उनकी इस उम्र में ऐसी परिपक्व बल्लेबाजी ने उनके लिए टीम इंडिया के सीनियर स्क्वॉड के दरवाजे खोल दिए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीसीसीआई अब उन्हें सीधे घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) और इंडिया-ए के दौरों पर भेजकर सीनियर टीम के लिए तैयार करेगा। वैभव ने जो तबाही 14 साल की उम्र में मचाई है, उसने साबित कर दिया है कि वह ‘लंबी रेस के घोड़े’ हैं और अब उनका लक्ष्य सीधे नीली जर्सी पहनकर सीनियर वर्ल्ड कप में तिरंगा लहराना होगा।
विक्रांत मैसी की अनोखी पेरेंटिंग: बेटे के बर्थ सर्टिफिकेट पर नहीं लिखा कोई धर्म, बोले- 'यह मेरा अधिकार'

नई दिल्ली । फिल्म ’12वीं फेल’ के जरिए हर घर में अपनी पहचान बनाने वाले विक्रांत मैसी इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ और पेरेंटिंग स्टाइल को लेकर सुर्खियों में हैं। विक्रांत और उनकी पत्नी शीतल ठाकुर के घर पिछले साल 7 फरवरी 2024 को बेटे ‘वरदान’ का जन्म हुआ था। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में विक्रांत ने साझा किया कि उन्होंने अपने बेटे के कानूनी दस्तावेजों में धर्म की पहचान को अनिवार्य नहीं बनाया है। मल्टीकल्चरल परिवार और कड़वे अनुभव टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में विक्रांत ने बताया कि वह एक ऐसे परिवार से आते हैं जहाँ विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों का संगम है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में धार्मिक तनाव और उसके नकारात्मक पहलुओं को बहुत करीब से देखा है। शायद यही वजह है कि वह अपने बेटे को बचपन से ही किसी खास धार्मिक लेबल में बांधना नहीं चाहते थे। विक्रांत ने स्पष्ट किया कि उनके इस फैसले का उद्देश्य अपने बेटे को उन तनावों से बचाना है जो अक्सर धर्म के नाम पर समाज में पैदा होते हैं। भारत सरकार के नियमों का हवाला विक्रांत ने अपने फैसले का बचाव करते हुए भारतीय कानून और सिस्टम की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार हमें यह विकल्प देती है कि हम आधिकारिक दस्तावेजों में धर्म का उल्लेख करना चाहते हैं या नहीं। उन्होंने इसकी तुलना उस नियम से की जिसके तहत अब सिंगल महिलाओं को पासपोर्ट पर पति का नाम देना अनिवार्य नहीं है। विक्रांत के मुताबिक सरकार द्वारा दी गई इस आजादी का इस्तेमाल करना उनका अधिकार है और उन्होंने वही किया जो उन्हें अपने बच्चे के भविष्य के लिए सही लगा। बेटे को दी चुनने की आजादी एक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि वह चाहते हैं कि वरदान जब बड़ा हो जाए और दुनिया को समझने लगे तो वह खुद तय करे कि उसे किस विचारधारा या धर्म का पालन करना है। विक्रांत और शीतल की यह सोच आधुनिक भारत की एक नई तस्वीर पेश करती है जहाँ माता-पिता बच्चों पर अपनी पहचान थोपने के बजाय उन्हें स्वतंत्र व्यक्तित्व बनाने की ओर अग्रसर हैं। विक्रांत की इस सादगी और प्रगतिशील सोच की सराहना उनके चाहने वाले जमकर कर रहे हैं।
जापान में 'पुष्पा' का फायर: टॉप 10 में बनाई जगह, लेकिन नंबर 1 की बादशाहत अब भी बरकरार
नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सीमाओं को लांघते हुए ‘आइकन स्टार’ अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा 2’ ने जापान के बॉक्स ऑफिस पर अपनी धमक दर्ज कराई है। 16 जनवरी को जापान में ‘पुष्पा कुनरिन’ शीर्षक के साथ रिलीज हुई इस फिल्म ने शुरुआती धीमी रफ्तार के बाद अब अपनी गति पकड़ ली है। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म का पहला भाग जापान के सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हुआ था, बावजूद इसके दूसरे पार्ट को जापानी दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। धूम 3 को पछाड़ा, अब ‘रोबोट’ पर नजर व्यापार विश्लेषक वेबसाइट सैक्निक के आंकड़ों के अनुसार, पुष्पा 2 ने अपनी रिलीज के महज 14 दिनों में ₹6.06 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। इस कमाई के साथ ही इसने आमिर खान की फिल्म ‘धूम 3’ (₹6.03 करोड़) को पीछे छोड़ते हुए टॉप 10 की लिस्ट में 10वां स्थान हासिल किया है। अब पुष्पा 2 का अगला लक्ष्य रजनीकांत की फिल्म ‘एंथिरन’ (रोबोट) का रिकॉर्ड तोड़ना है, जिसने वहां ₹6.33 करोड़ का कारोबार किया था। फिल्म को टोक्यो और ओसाका जैसे प्रमुख शहरों में बेहतरीन ‘वर्ड ऑफ माउथ’ का फायदा मिल रहा है। RRR का सिंहासन है सबसे ऊपर जापान में भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता की बात करें तो ‘RRR’ अब भी निर्विवाद रूप से पहले नंबर पर बनी हुई है। एसएस राजामौली की इस मास्टरपीस ने जापान में ₹139.79 करोड़ (¥2.42 बिलियन) की ऐतिहासिक कमाई की थी, जो किसी भी अन्य भारतीय फिल्म के लिए एक सपना जैसा है। दूसरे नंबर पर सुपरस्टार रजनीकांत की ‘मुत्थु’ है, जिसने दो दशकों तक अपनी बादशाहत बनाए रखी थी। जापान की टॉप 5 भारतीय फिल्में (कलेक्शन के आधार पर): | रैंक | फिल्म | कमाई लगभग | | :— | :— | :— | | 1 | RRR | ₹139.79 करोड़ | | 2 | मुत्थु | ₹23.39 करोड़ | | 3 | बाहुबली 2 | ₹17.61 करोड़ | | 4 | 3 इडियट्स | ₹9.81 करोड़ | | 5 | इंग्लिश विंग्लिश | ₹9.24 करोड़ | अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना ने जापान जाकर इस फिल्म का जमकर प्रचार किया था, जिसका असर अब आंकड़ों में दिख रहा है। हालांकि ‘RRR’ तक पहुंचना मुश्किल लग रहा है, लेकिन ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘पुष्पा 2’ जापान में अपनी लंबी पारी खेल सकती है और जल्द ही 7वें या 8वें पायदान तक पहुंच सकती है।
JIWAJI RAGGING CASE: जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर में रैगिंग का तीसरा मामला, बी-फार्मेसी छात्र को बनाया निशाना

JIWAJI RAGGING CASE: ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर के आर्यभट्ट हॉस्टल में बी-फार्मेसी चौथे वर्ष के छात्र आशुतोष मरावी के साथ रैगिंग का मामला सामने आया है। छात्र ने कुलसचिव और छात्र कल्याण अधिष्ठाता से लिखित शिकायत की है। बता दें कि शिकायत में कहा गया कि सहपाठी उसे नशा करने के लिए दबाव डालते हैं और मना करने पर मारपीट की धमकी देते हैं। 15 दिन में तीसरी रैगिंग की घटना सूचना के मुताबिक हॉस्टल में यह 15 दिन में तीसरी रैगिंग की घटना है। इससे पहले 2 फरवरी को फार्मेसी छात्रों ने लॉ के एक सीनियर छात्र के साथ मारपीट की थी। जिसको लेकर यूजीसी और विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों को शिकायत दी गई थी। Pakistan: दौड़ते हुए आया हमलावर, गोलियां चलीं…. फिर इमामबाड़े में गूंजा धमाका… चश्मदीदों ने सुनाई ब्लास्ट की दास्तान आरोपी छात्र और आरोप आशुतोष ने आरोप लगाया कि फार्मेसी तृतीय और चौथे वर्ष के छात्र सौरभ गुर्जर और अनंत प्रताप सिंह उसपर लगातार मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं। साथ ही शिकायत में बताया गया कि आरोपी छात्रों ने कई बार उसके कमरे में घुसकर मारपीट की और जबरन ऑडियो रिकॉर्डिंग भी की। पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार विश्वविद्यालय प्रबंधन पर उठ रहे सवाल छात्रों का कहना है कि लगातार रैगिंग की घटनाओं के बावजूद भी विश्वविद्यालय प्रबंधन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। हॉस्टल में भय और असुरक्षा का माहौल है। छात्रों का आरोप है कि प्रबंधन कुछ छात्रों के छात्र संगठन से जुड़े होने के कारण कार्रवाई से बच रहा है। बाहरी छात्रों का आना-जाना और अनुचित गतिविधियां छात्रों का कहना है कि आर्यभट्ट हॉस्टल में बाहरी छात्रों का प्रवेश और रुकना होता है और वे शराब पार्टी और अन्य अनुचित गतिविधियों में शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि यही कारण है कि हॉस्टल में सुरक्षा और अनुशासन की कमी बनी हुई है। AI वीडियो शेयर कर ट्रंप फिर विवादों में, ओबामा दंपति को बंदर दिखाने पर मचा राजनीतिक तूफान प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने लिया बयान 2 फरवरी को लॉ के छात्र के साथ हुई मारपीट के मामले में प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने छात्र का बयान लिया। छात्र ने बताया कि आरोपी शराब के नशे में थे और गाली-गलौज करने के बाद मारपीट करने लगे। वहीं दूसरी और आरोपी छात्र घटना से इंकार कर रहे हैं। अब यह मामला विश्वविद्यालय की एंटी-रैगिंग कमेटी के सामने जाएगा। मामले में छात्र और अभिभावक सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहें हैं।
धुरंधर 2 का 'जीरो बजट' कनेक्शन: क्या वाकई बिना खर्च के रिलीज हो रही है फिल्म? जानें मेकर्स की मास्टर स्ट्रैटेजी

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में बहुत कम ऐसी फिल्में होती हैं जो अपनी रिलीज से पहले ही वित्तीय रूप से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएं। आदित्य धर की आगामी फिल्म ‘धुरंधर 2’ इसी श्रेणी में खड़ी नजर आ रही है। 19 मार्च को रिलीज होने जा रही इस फिल्म के बजट को लेकर सोशल मीडिया पर दो तरह की बातें हो रही हैं-एक धड़ा इसे 250 करोड़ की फिल्म बता रहा है तो दूसरा इसे ‘शून्य बजट’ वाली फिल्म कह रहा है। क्यों कहा जा रहा है इसे 0 बजट की फिल्म? हकीकत यह है कि आदित्य धर ने ‘धुरंधर’ की पूरी कहानी को एक साथ ही शूट किया था जिसकी कुल लंबाई लगभग 7 घंटे थी। फिल्म की शूटिंग पर करीब 225 से 280 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। चूँकि पहले पार्ट ने बॉक्स ऑफिस पर 1347 करोड़ से ज्यादा की कमाई करके अपनी मूल लागत कई गुना वसूल ली है इसलिए दूसरे पार्ट के लिए प्रोडक्शन का कोई नया बड़ा खर्च नहीं बचा है। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि तकनीकी रूप से दूसरे पार्ट की निर्माण लागत पहले ही कवर हो चुकी है जिससे अब बिकने वाला हर टिकट सीधे मेकर्स के मुनाफे में जुड़ेगा। कमाई का गणित और रिस्क फ्री रिलीज फिल्म की वित्तीय मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिलीज से पहले ही इसके डिजिटल और म्यूजिक राइट्स की भारी बिक्री हो चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जियो हॉटस्टार ने ‘धुरंधर 2’ के डिजिटल राइट्स रिकॉर्ड 150 करोड़ रुपये में खरीदे हैं। वहीं टी-सीरीज ने इसके म्यूजिक राइट्स के लिए 50-60 करोड़ रुपये चुकाए हैं। प्रमोशन और वीएफएक्स के कुछ नए खर्चों को जोड़ भी लिया जाए तो भी फिल्म अपनी लैंडिंग कॉस्ट से काफी ऊपर जा चुकी है। यही वजह है कि इसे अब एक ‘रिस्क फ्री’ प्रोजेक्ट माना जा रहा है। बॉक्स ऑफिस क्लैश और फैंस का उत्साह 19 मार्च को बॉक्स ऑफिस पर ‘धुरंधर 2’ का मुकाबला यश की बहुचर्चित फिल्म ‘टॉक्सिक’ से होने की संभावना है। हालांकि ‘धुरंधर 2’ के पास एक बड़ा फायदा यह है कि इसे अपनी लागत निकालने का कोई दबाव नहीं है। फिल्म के टीजर में हमजा की बैक स्टोरी और कुछ नए किरदारों जैसे यामी गौतम की झलक ने फैंस की उत्सुकता बढ़ा दी है। भले ही दर्शकों को एंड क्रेडिट्स के जरिए कहानी का थोड़ा अंदाजा हो लेकिन स्क्रीन पर इस विजुअल ट्रीट को देखने का क्रेज कम नहीं हुआ है।फिल्म व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि आदित्य धर ने दो हिस्सों में फिल्म को रिलीज करने का जो फैसला लिया वह न केवल रचनात्मक रूप से बल्कि आर्थिक रूप से भी बॉलीवुड के लिए एक नया उदाहरण पेश कर रहा है।