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भ्रामक विज्ञापन मामले में सलमान खान को बड़ी राहत… इस आयोग ने गैर-जमानती वारंट पर लगाई रोक

जयपुर। राजस्थान उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Rajasthan Consumer Disputes Redressal Commission) ने अभिनेता सलमान खान (Actor Salman Khan.) को एक बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (Non-bailable warrant) पर रोक लगा दी है। यह मामला एक पान मसाला कंपनी के भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisement) से जुड़ा है। राज्य आयोग ने सलमान खान और कंपनी की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। राजस्थान उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शुक्रवार को एक पान मसाला कंपनी और सलमान खान की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई की। क्या दलील?सलमान खान के वकील ने सुनवाई के दौरान राज्य आयोग को बताया कि जिला उपभोक्ता आयोग ने बिना समन जारी किए ही जमानती वारंट जारी किया था। अब गैर-जमानती वारंट जारी करने की प्रक्रिया में है। यही नहीं जमानती वारंट रद्द करने का अनुरोध की एक अर्जी भी जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर-द्वितीय के समक्ष लंबित है। आयोग ने दी राहतइसे ध्यान में रखते हुए राज्य आयोग ने जमानती वारंट तामील होने तक गैर-जमानती वारंट जारी करने से रोक दिया। यही नहीं जिला आयोग को लंबित अर्जी पर जल्द से जल्द सुनवाई करने का भी निर्देश दिया। बता दें कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जयपुर-द्वितीय ने अभिनेता के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था और उन्हें छह फरवरी को पेश होने का निर्देश दिया था। क्या है मामला?यह आदेश शिकायतकर्ता योगेंद्र सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया था। शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि आयोग की ओर से छह जनवरी को अंतरिम रोक के बावजूद एक पान मसाला कंपनी के विज्ञापन अब भी दिखाए जा रहे हैं। दलील दी गई कि यह तो आयोग के आदेश की अवमानना है। क्या आरोप?मूल शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पान मसाला कंपनी और उसके ब्रांड एंबेसडर अभिनेता सलमान खान भ्रामक विज्ञापन कर रहे हैं। इस शिकायत पर आयोग ने 6 जनवरी को उत्पाद के प्रचार और विज्ञापन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। शिकायतकर्ता ने बाद में अवमानना याचिका दायर की। फिर दावा किया कि रोक के बावजूद 9 जनवरी को कोटा में नयापुरा स्टेडियम के पास उक्त विज्ञापन वाला एक साइन बोर्ड लगाया गया।

Pakistan: दौड़ते हुए आया हमलावर, गोलियां चलीं…. फिर इमामबाड़े में गूंजा धमाका… चश्मदीदों ने सुनाई ब्लास्ट की दास्तान

इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad ) शुक्रवार को उस वक्त खौफ और दहशत में डूब गई, जब जुमे की नमाज़ के दौरान एक शिया इमामबाड़े (Shia Imambaras) को निशाना बनाकर आत्मघाती हमला (Suicide Blast) कर दिया गया। इस भीषण विस्फोट में अब तक कम से कम 31 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 170 से ज़्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई घायलों की हालत गंभीर है, ऐसे में मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। धमाका ठीक उसी समय हुआ, जब नमाज़ शुरू हो रही थी और इमामबाड़ा पूरी तरह भरा हुआ था। गेट पर रोका, गोलियाँ चलीं और फिर मौत का मंजरपुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आत्मघाती हमलावर को इमामबाड़े के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा गार्डों ने रोक लिया था। इसी दौरान अचानक हालात बिगड़ गए। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावर ने सुरक्षा कर्मियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें कुछ गार्ड घायल हो गए। इसके बाद वह लगभग 20 मीटर तक दौड़ता हुआ अंदर घुसा और नमाज़ के बीच खुद को विस्फोट से उड़ा लिया। यह आतंकी वारदात इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में स्थित खदीजा तुल कुबरा इमामबाड़ा में हुई। वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और पलभर में इबादत की जगह मातम में बदल गई। “हर तरफ चीखें थीं, खून था” — आंखों देखा हालएक चश्मदीद ने बताया, “हमलावर को गेट पर रोका गया था। तभी गोलियों की आवाज आई। इसके बाद वह अंदर की ओर भागा और नमाज़ के दौरान जाकर धमाका कर दिया।” वहीं, हुसैन शाह ने बताया कि वह इमामबाड़े के आंगन में नमाज़ अदा कर रहे थे। उन्होंने कहा, “अचानक एक बहुत ज़ोरदार धमाका हुआ। उसी पल समझ आ गया कि कोई बड़ा हमला हुआ है।” हुसैन शाह के मुताबिक, जब वे अंदर पहुंचे तो हर तरफ अफरातफरी थी। “चारों ओर चीख-पुकार मची थी, खून बिखरा हुआ था। मैंने करीब 30 शव खुद देखे, जबकि घायलों की संख्या उससे कहीं ज़्यादा थी।” धमाके से कांपी इमारत, आसपास के घर भी क्षतिग्रस्तविस्फोट की तीव्रता इतनी ज़्यादा थी कि इमामबाड़े की तीन मंज़िला इमारत की खिड़कियाँ चकनाचूर हो गईं। आसपास की रिहायशी इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। मस्जिद के अंदर मौजूद बच्चों और बुज़ुर्गों समेत लगभग 200 लोग घायल हो गए। हालात इतने भयावह थे कि घायलों को स्ट्रेचर के अलावा निजी गाड़ियों और यहां तक कि कारों की डिक्की में डालकर अस्पताल पहुंचाया गया। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि दृश्य दिल दहला देने वाला था। कई लोग खून से लथपथ पड़े थे और हर कोई अपनों को ढूंढने की कोशिश कर रहा था। अस्पतालों में इमरजेंसी, मरीज रावलपिंडी भेजे गएहमले के तुरंत बाद इस्लामाबाद के PIMS (पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज), पॉलीक्लिनिक अस्पताल और CDA अस्पताल में आपातकाल घोषित कर दिया गया। इस्लामाबाद के डिप्टी कमिश्नर इरफान नवाज़ मेमन ने बताया कि घायलों की संख्या अधिक होने के कारण कई मरीजों को रावलपिंडी के अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। इमरजेंसी वार्ड के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। इलाका सील, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट परधमाके के बाद पाकिस्तान आर्मी, रेंजर्स और पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर सील कर दिया। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन और जांच की प्रक्रिया एक साथ चल रही है। अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा घेरा कैसे टूटा और हमलावर इमामबाड़े के अंदर तक कैसे पहुंचा। गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर इस्लामाबाद में मौजूद हैं। घटना के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है और हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

एआर रहमान को 'एंटी-नेशनल' बताने पर भड़के प्रकाश राज, कंगना की 'इमरजेंसी' को बताया प्रोपेगेंडा

नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के दो दिग्गज कलाकार कंगना रनौत और प्रकाश राज एक बार फिर आमने-सामने हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब दिग्गज संगीतकार एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में अपनी फिल्म ‘छावा’ और इंडस्ट्री में मिल रहे काम को लेकर कुछ बेबाक टिप्पणियां की थीं। रहमान के इसी बयान पर पलटवार करते हुए कंगना रनौत ने उन्हें ‘एंटी-नेशनल’ करार दिया था जिस पर अब प्रकाश राज ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। प्रकाश राज का कड़ा प्रहार प्रकाश राज ने एआर रहमान का बचाव करते हुए कहा कि रहमान जैसे कलाकार जिन्होंने ‘मां तुझे सलाम’ और ‘जय हो’ जैसे गीतों से देश का मान बढ़ाया और दो ऑस्कर जीते वह काम के लिए भीख नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने जो कहा वह सच है। कंगना पर निशाना साधते हुए प्रकाश राज ने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों का भौंकना शुरू हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक महिला निर्देशक और अभिनेत्री महज इसलिए किसी को ‘एंटी-नेशनल’ कह रही हैं क्योंकि उस संगीतकार ने उनके साथ काम करने से मना कर दिया। प्रकाश राज यहीं नहीं रुके उन्होंने कंगना की फिल्म ‘इमरजेंसी’ को एक प्रोपेगेंडा मूवी करार दिया। कंगना और रहमान के बीच क्या था विवाद? दरअसल एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें उनके धर्म की वजह से इंडस्ट्री में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर भड़ास निकालते हुए लिखा था कि वह रहमान को अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ की कहानी सुनाना चाहती थीं लेकिन रहमान उनसे मिले तक नहीं। कंगना ने आरोप लगाया कि रहमान ने उनकी फिल्म को ‘प्रोपेगेंडा’ कहकर ठुकरा दिया था। कंगना ने लिखा कि रहमान जी मैंने आपसे ज्यादा नफरत से भरा इंसान आज तक नहीं देखा। सियासी रंग लेता विवाद प्रकाश राज ने कंगना के दावों को खारिज करते हुए कहा कि रहमान का अपना एक कद है और किसी फिल्म का हिस्सा न बनने का मतलब यह नहीं है कि कोई देशद्रोही हो गया। प्रकाश राज के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। एक तरफ कंगना के समर्थक उन्हें राष्ट्रवादी बता रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रकाश राज के समर्थक इसे अभिव्यक्ति की आजादी और कलाकार के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर न तो एआर रहमान की कोई नई प्रतिक्रिया आई है और न ही कंगना ने प्रकाश राज के ‘भौंकने’ वाले बयान पर कोई जवाब दिया है।

AI वीडियो शेयर कर ट्रंप फिर विवादों में, ओबामा दंपति को बंदर दिखाने पर मचा राजनीतिक तूफान

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट (Social Media post) को लेकर जबरदस्त विवाद में घिर गए हैं। इस बार मामला देश के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Former President Barack Obama.) और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा (Michelle Obama) से जुड़ा है। ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में ओबामा दंपति को बंदर के रूप में दिखाए जाने के बाद सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस कथित नस्लभेदी कंटेंट को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप पर जमकर निशाना साधा है। दरअसल, गुरुवार रात ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट साझा किए। इन्हीं में से एक 62 सेकंड का वीडियो क्लिप सबसे ज्यादा चर्चा में है। शुरुआती जांच में यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया प्रतीत होता है। वीडियो में 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर यह दावा किया गया है कि कुछ अहम राज्यों में वोटिंग मशीनों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी। वीडियो में क्या दिखाया गया?इस क्लिप के एक हिस्से में दो चिम्पैंजी नजर आते हैं, जिन पर बराक ओबामा और मिशेल ओबामा के मुस्कुराते हुए चेहरे एडिट कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि यह दृश्य एक लंबे वीडियो से लिया गया है, जिसे पहले एक मीम पेज पर शेयर किया गया था। उसी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप को खुद को “जंगल का राजा” बताते हुए दिखाया गया है। इतना ही नहीं, वीडियो में मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन समेत कई अन्य डेमोक्रेटिक नेताओं को भी जानवरों के रूप में पेश किया गया है। बाइडेन को केले खाते हुए चिम्पैंजी के रूप में दर्शाया गया, जिससे डेमोक्रेटिक खेमे में नाराजगी और बढ़ गई। डेमोक्रेट्स का तीखा पलटवारदेश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा और उनकी पत्नी के खिलाफ इस तरह के चित्रण को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे नस्लवादी और अपमानजनक करार दिया है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम राजनीतिक मर्यादाओं को तोड़ने वाला है। कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़ोम ने इस पोस्ट की कड़ी निंदा करते हुए इसे “घिनौना” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “राष्ट्रपति का यह व्यवहार बेहद शर्मनाक है। हर एक रिपब्लिकन को इसकी निंदा करनी चाहिए। अभी।” वहीं, बराक ओबामा के पूर्व वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बेन रोड्स ने भी ट्रंप पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतिहास डोनाल्ड ट्रंप को एक नकारात्मक और विभाजनकारी व्यक्ति के रूप में याद रखेगा। पहले भी रहे हैं विवादगौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ओबामा परिवार को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी वह बराक ओबामा और मिशेल ओबामा पर व्यक्तिगत हमले कर चुके हैं और कई मौकों पर उनके बयानों को भड़काऊ और नस्लभेदी बताया गया है। फिलहाल इस वीडियो को लेकर अमेरिका की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। एक ओर ट्रंप समर्थक इसे राजनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विरोधी इसे खुले तौर पर नस्लभेदी मानसिकता का उदाहरण बता रहे हैं।

वॉट्सऐप की प्राइवेसी नीति पर छिड़ा विवाद… SC ने लगाई कड़ी फटकार… कहा- नागरिकों की निजता सर्वोपरि

नई दिल्ली। क्या वाकई आपकी चैट पूरी तरह सुरक्षित है? इस सवाल के बीच भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप (Instant messaging platform WhatsApp.) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि डेटा साझा करने के नाम पर देश के नागरिकों की निजता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा की डेटा-शेयरिंग व्यवस्था और प्राइवेसी पॉलिसी पर गंभीर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि भारतीय नागरिकों के प्राइवेसी अधिकारों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा। वॉट्सऐप डेटा साझा करने की आड़ में निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ तीन फरवरी को मेटा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। गौरतलब है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने वर्ष 2024 में वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने भी सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप की तथाकथित “टेक इट ऑर लीव इट” प्राइवेसी नीति पर भी सवाल उठाए। अदालत का कहना है कि आम यूजर्स इन जटिल शर्तों को ठीक से समझ ही नहीं पाते। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि कंपनी को भारतीय कानून और संविधान का पालन करना ही होगा, अन्यथा उसे देश छोड़ने तक का विकल्प चुनना पड़ सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी याचिका में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की गई है। क्या है वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी?वॉट्सऐप ने 8 फरवरी 2021 को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी लागू की थी। कंपनी का दावा है कि उसका एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पूरी तरह सुरक्षित है, यानी यूजर की चैट, वॉइस कॉल और तस्वीरें मेटा नहीं देख सकता। अगर रिसीवर का फोन अस्थायी रूप से बंद हो या वह ऑफलाइन हो, तो संदेश अधिकतम 30 दिनों तक वॉट्सऐप के सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं ताकि बाद में डिलीवरी हो सके। हालांकि चैट कंटेंट निजी रहता है, लेकिन वॉट्सऐप यूजर के “मेटाडाटा” तक पहुंच रखता है। यूजर्स के सामने केवल दो ही विकल्प होते हैं—इन शर्तों को स्वीकार करना या ऐप का इस्तेमाल बंद कर देना। एआई आधारित साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स कंपनी इनेफ्यू लैब्स के को-फाउंडर और सीईओ तरुण विज के मुताबिक, वॉट्सऐप मेटाडाटा और व्यवहारिक संकेतों का उपयोग करता है। इसमें यह जानकारी शामिल होती है कि यूजर किससे, कितनी बार और किस समय बात करता है, उसका डिवाइस, लोकेशन, प्रोफाइल फोटो, ग्रुप मेंबरशिप और कॉन्टैक्ट लिस्ट। इसी आधार पर यूजर प्रोफाइलिंग की जाती है। मेटा इस डेटा को इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा कर सकता है, जिससे डेटा लीक और संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि यूरोप में यूरोपीय डेटा संरक्षण नियम (जीडीपीआर) के चलते ऐसी डेटा शेयरिंग पर सख्त सीमाएं हैं। तरुण विज बताते हैं कि वॉट्सऐप पर की गई गतिविधियां अन्य प्लेटफॉर्म्स पर दिखने वाले विज्ञापनों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि यूजर अपनी कितनी जानकारी साझा करना चाहता है। पहले भी घिर चुका है वॉट्सऐपवॉट्सऐप ने अपनी सफाई में कहा है कि उसकी मैसेजिंग सेवा मुफ्त है और दो लोगों के बीच की निजी चैट्स को कंपनी नहीं पढ़ती। वॉट्सऐप और मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि डेटा केवल यूजर की सहमति से ही साझा किया जाता है और प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। यह पहला मौका नहीं है जब वॉट्सऐप की नीतियों पर सवाल उठे हों। वर्ष 2021 में आयरलैंड के डेटा रेगुलेटर ने डेटा पारदर्शिता के नियमों के उल्लंघन पर वॉट्सऐप पर 225 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया था। जर्मनी की लाइपजिग रीजनल कोर्ट भी मेटा को दंडित कर चुकी है। अदालत ने कहा था कि मेटा के पास ऐसे टूल्स हैं जिनके जरिए वह यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार को ट्रैक कर टार्गेटेड विज्ञापनों से अरबों डॉलर कमाता है। सुरक्षा खामियों के आरोपपिछले वर्ष वॉट्सऐप के पूर्व सुरक्षा प्रमुख अत्ताउल्लाह बैग ने अमेरिका में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म पर रोजाना लाखों अकाउंट हैक हो रहे थे और सुरक्षा खामियों के चलते कर्मचारी यूजर्स का निजी डेटा देख सकते थे। बैग के अनुसार, बार-बार चेतावनी देने के बावजूद मेटा ने ठोस कदम नहीं उठाए। साल 2025 में शोधकर्ताओं ने “जीरो-क्लिक” हमलों का खुलासा किया, जिनमें बिना किसी क्लिक के वॉट्सऐप के जरिए आईफोन और मैक डिवाइस हैक कर लिए गए। इन हमलों में मैकओएस और आईओएस में इमेज प्रोसेसिंग की खामी और वॉट्सऐप के डिवाइस लिंकिंग फीचर की कमजोरी सामने आई। ऑस्ट्रिया के स्वतंत्र शोधकर्ताओं के एक समूह ने भी वॉट्सऐप में ऐसी कमी खोजी, जिसके जरिये 350 करोड़ फोन नंबर, प्रोफाइल फोटो, डिवाइस जानकारी, टाइमस्टैम्प और बिजनेस डिटेल्स तक पहुंच संभव हो गई थी। भारत में कानूनी स्थितिराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे बताते हैं कि वर्ष 2019 में वॉट्सऐप के जरिए पेगासस स्पायवेयर ने केवल एक मिस्ड कॉल से कई भारतीयों के फोन हैक कर लिए थे। यह स्पायवेयर इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने विकसित किया था। इस मामले में वॉट्सऐप ने एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। अमित दुबे के अनुसार, हाल के वर्षों में वॉट्सऐप ने चैट समरी और ऑटो-रिप्लाई जैसे एआई आधारित फीचर्स भी जोड़े हैं, जो यूजर की सहमति से सीमित परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसे में खासकर निजी, चिकित्सकीय या कानूनी बातचीत के दौरान सतर्क रहना जरूरी है। भारत में अभी बड़ी टेक कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए सख्त और प्रभावी कानूनों की कमी है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम मौजूद है, लेकिन यह पूरी तरह 13 मई 2027 से लागू होगा। ऐसे में नागरिकों के पास अदालत का रास्ता ही मुख्य विकल्प बचता है। पुट्टस्वामी फैसले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही निजता को मौलिक अधिकार घोषित कर चुका है। यूजर क्या करें?वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील पवन दुग्गल के अनुसार, आज कई सरकारी

पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार

पुणे। मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) (Military Engineering Services – MES) में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे के खड़की क्षेत्र से दो अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। सीबीआई ने यह कार्रवाई 5 फरवरी को सुनियोजित ट्रैप के जरिए की, जिसमें जूनियर इंजीनियर को शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया गया। रिश्वत की पूरी रकम उनके कार्यालय से बरामद कर ली गई है, जबकि असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर को भी इस साजिश में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। सीबीआई के अनुसार, दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है। एजेंसी ने बताया कि यह केस 3 फरवरी को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता एक निजी कंपनी का पावर ऑफ अटॉर्नी धारक है, जिसने आरोप लगाया था कि कार्य पूरा होने और जरूरी प्रमाणपत्र जमा करने के बावजूद भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा था, ताकि रिश्वत की मांग की जा सके। शिकायत में यह भी सामने आया कि शुरुआत में दोनों अधिकारियों ने भुगतान जारी करने के बदले 6 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के बाद यह सौदा पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये पर तय हुआ। रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क किया, जिसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाया और आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। छापेमारी में मिला अतिरिक्त कैशट्रैप के तुरंत बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों के आवासीय और कार्यालय परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ 1 लाख 88 हजार 500 रुपये की अनएक्सप्लेन्ड नकदी भी बरामद की गई। एजेंसी का कहना है कि यह रकम उनकी ज्ञात वैध आय से अधिक प्रतीत होती है और इसकी जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच में यह मामला सिर्फ एक रिश्वत लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि इसे एक संगठित प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें ठेकेदारों को भुगतान के लिए दबाव बनाकर अवैध वसूली की जाती थी। ऐसे कृत्य न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि रक्षा से जुड़े संवेदनशील विभागों में भरोसे को भी कमजोर करते हैं। सीबीआई ने कहा है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है और अतिरिक्त सबूत जुटाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाइयां न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मददगार होती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही और विश्वास को भी मजबूत करती हैं।

कांग्रेस से निष्कासन के बाद नवजोत कौर सिद्धू का तीखा हमला, राहुल गांधी पर की कड़ी टिप्पणी

चंडीगढ़। कांग्रेस पार्टी (Congress Party.) ने पूर्व क्रिकेटर और पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू (Navjot Kaur Sidhu.) को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस फैसले की जानकारी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने अमृतसर में मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि नवजोत कौर सिद्धू (Navjot Kaur Sidhu) पहले से ही पार्टी से निलंबित थीं और अब संगठन ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें निष्कासित कर दिया है। भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस में अनुशासन सर्वोपरि है और पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले नवजोत कौर सिद्धू खुद सार्वजनिक मंच से कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर चुकी थीं। इसके बावजूद पार्टी ने संगठनात्मक नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें बाहर करने का निर्णय लिया। सोशल मीडिया पर निकाली भड़ासपार्टी से निष्कासन के बाद नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें “पप्पू” तक कह दिया। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी ने आखिरकार अपने नाम को सही साबित कर दिया है। उनके मुताबिक, राहुल खुद को अकेला ईमानदार और समझदार नेता मानते हैं, जबकि उन्हें जमीनी हकीकत की कोई समझ नहीं है। नवजोत कौर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के आसपास मौजूद लोग उन्हें वास्तविक स्थिति से दूर रखते हैं और फैसले होने से पहले ही टिकट बेचकर ऐश करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी इमरजेंसी कॉल का जवाब देने में राहुल को छह महीने से ज्यादा लग जाते हैं, जिससे तब तक नुकसान हो चुका होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि लोगों को साथ जोड़ने से पहले राहुल को अपने तथाकथित समर्थकों से पूछना चाहिए कि क्या वे ईमानदारी से पंजाब के लिए काम करना चाहते हैं। राहुल गांधी पर आगे भी साधा निशानाअपनी पोस्ट में नवजोत कौर ने आगे कहा कि राहुल गांधी के पास न तो जमीनी सच्चाई सुनने का समय है और न ही इच्छाशक्ति, क्योंकि वे अपनी बनाई हुई दुनिया में रहना पसंद करते हैं। उन्होंने दावा किया कि राहुल के अधिकांश समर्थक नि:स्वार्थ सेवा के बजाय अपनी जेबें भरने में लगे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वे दोबारा सत्ता में नहीं लौटने वाले। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर राहुल में हिम्मत है तो वे अपने समर्थकों से मौजूदा सरकार के खिलाफ खुलकर बोलने को कहें और अपनी फाइलें खुलवाने के लिए भी तैयार रहें। नवजोत कौर ने राहुल को सलाह दी कि उन्हें सच बोलना और उसका सामना करना सीखना चाहिए, क्योंकि सच वही रहता है जो था और जो है। राजनीति और पंजाब पर टिप्पणीनवजोत कौर सिद्धू ने खुद को एक शुभचिंतक बताते हुए राहुल गांधी को ज्यादा संवेदनशील, व्यावहारिक और ग्रहणशील बनने की सलाह दी। उन्होंने दावा किया कि राहुल के ज्यादातर कथित समर्थक भाजपा में जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि न तो वे किसी से मिलने गई हैं और न ही कोई उनके पास आया है। उनके अनुसार, वे एक फाउंडेशन के माध्यम से काम कर सकती हैं, लेकिन उनका समय और ऊर्जा केवल पंजाब की भलाई के लिए समर्पित है। उन्होंने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि जब पार्टी में भ्रष्ट नेताओं को सम्मान मिलता है, तब ईमानदारी और सच्चाई की बातें बेमानी हो जाती हैं। अंत में उन्होंने राहुल गांधी को “गुड लक” कहते हुए राजनीति में अपना वजूद बचाने की नसीहत दी। बीजेपी को लेकर भी की टिप्पणीएक अन्य पोस्ट में नवजोत कौर सिद्धू ने भारतीय जनता पार्टी की तारीफ भी की। उन्होंने लिखा कि बीजेपी ने उनके टैलेंट को पहचाना और निष्पक्ष सर्वे के आधार पर उन्हें वर्ष 2012 में विधायक का टिकट दिया। उस समय वे अस्पताल में कार्यरत थीं और डॉक्टर होने के कारण उन्हें सीएपीएस हेल्थ की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने कहा कि बीजेपी में उन्हें ईमानदारी और सच्चाई से काम करने की पूरी आजादी मिली और वे किसी भी विभाग में जाकर उसी दिन काम निपटाकर लौट सकती थीं।

'धुरंधर' देख छलक उठा सुनील शेट्टी का दर्द: आदित्य धर की इस महाफिल्म के बंद होने का आज भी है मलाल

नई दिल्ली । इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर निर्देशक आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ का जबरदस्त डंका बज रहा है। फिल्म की अपार सफलता के बाद अब इसके दूसरे भाग ‘धुरंधर 2’ का टीजर भी रिलीज हो चुका है जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इसी बीच बॉलीवुड के ‘अन्ना’ यानी सुनील शेट्टी ने आदित्य धर के साथ काम न कर पाने को लेकर अपनी निराशा जाहिर की है। सुनील शेट्टी ने खुलासा किया कि वह आदित्य धर की उस फिल्म का अहम हिस्सा थे जिसका इंतजार पूरी दुनिया को था लेकिन अफसोस कि वह फिल्म कभी बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच पाई। हाथ से निकली ‘द इम्मोर्टल अश्वत्थामा’ हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सुनील शेट्टी ने बताया कि वह आदित्य धर की मेगा-बजट फिल्म ‘द इम्मोर्टल अश्वत्थामा’ में काम करने वाले थे। इस फिल्म में उनके साथ विक्की कौशल लीड रोल में थे। सुनील ने भारी मन से खुलासा किया कि बजट की सीमाओं और मार्केट बिहेवियर में आए बदलाव के कारण आदित्य धर को इस प्रोजेक्ट को बंद करने का कठिन फैसला लेना पड़ा। सुनील शेट्टी ने कहा कि ‘धुरंधर’ देखने के बाद मुझे महसूस हुआ कि आदित्य एक शानदार विजन वाले निर्देशक हैं और मुझे उनके साथ काम न कर पाने का अफसोस है। रणवीर सिंह को बताया सबसे बड़ा परफॉर्मर फिल्म ‘धुरंधर’ के कलाकारों की तारीफ करते हुए सुनील शेट्टी ने बेहद बेबाक राय रखी। जहाँ पूरी दुनिया अक्षय खन्ना के अभिनय की मुरीद है वहीं सुनील शेट्टी का मानना है कि रणवीर सिंह और आदित्य धर ने उनसे भी बेहतर काम किया है। उन्होंने तर्क दिया कि अक्षय खन्ना के किरदार को बैकग्राउंड म्यूजिक और शानदार प्रेजेंटेशन की वजह से काफी माइलेज मिला लेकिन रणवीर सिंह के पास ऐसा कोई सहारा नहीं था फिर भी वह पर्दे पर अपनी चमक छोड़ने में कामयाब रहे। सुनील के मुताबिक रणवीर एक जन्मजात परफॉर्मर हैं। आदित्य धर के विजन के कायल हुए ‘अन्ना’ फिल्म मेकिंग की बारीकियों पर चर्चा करते हुए सुनील ने कहा कि आदित्य धर ने दर्शकों की नब्ज को बखूबी पहचाना है। आज के दौर में जहाँ लोगों का अटेंशन स्पैन कम होता जा रहा है वहाँ आदित्य ने 3 घंटे 40 मिनट की लंबी फिल्म बनाने का जोखिम उठाया और सफल रहे। सुनील शेट्टी ने कहा कि आदित्य जानते थे कि कोरोना काल के बाद लोग लंबी वेब सीरीज देखने के आदी हो चुके हैं और इसी आदत को उन्होंने सिनेमाई अनुभव में तब्दील कर दिया। उनका यह आत्मविश्वास ही उन्हें एक महान निर्देशक बनाता है।

गरीब नहीं, संघर्षशील महिला कहिए- वकील की दलील पर CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में रोजाना सैकड़ों मामलों की सुनवाई होती है, लेकिन शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice- CJI) सूर्यकांत (Suryakant.) की टिप्पणी ने सबका ध्यान खींच लिया। मामला एक महिला से जुड़ी लंबित क्लेम याचिका का था, जो लंबे समय से हाई कोर्ट (High Court) में विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान जब महिला की ओर से पेश वकील ने उसे “गरीब महिला” बताया, तो इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने तीखा और चर्चा में रहने वाला जवाब दिया। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता एक गरीब महिला है, सीजेआई सूर्यकांत ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए पूछा, “वह सुप्रीम कोर्ट आने से पहले गरीब थी या सुप्रीम कोर्ट आने के बाद गरीब हुई है?” सीजेआई ने वकील को आगे समझाते हुए कहा कि अदालत के सामने इस तरह की शब्दावली का प्रयोग न किया जाए। उन्होंने कहा कि उसे गरीब महिला कहने के बजाय “फाइटर महिला” कहा जाना चाहिए, जो तब तक शांत नहीं बैठेगी जब तक उसका पूरा दावा तार्किक अंजाम तक नहीं पहुंच जाता। सीजेआई ने यह भी जोड़ा कि जब कोई महिला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची है, तो उसे कमजोर या गरीब बताने की जरूरत क्यों पड़ती है। यह मामला हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट से संबंधित है, जहां महिला का केस करीब 11 वर्षों से लंबित है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह आग्रह किया गया है कि हाई कोर्ट को निर्देश दिया जाए ताकि मामले की सुनवाई शीघ्र पूरी हो और फैसला सुनाया जा सके। इसी दिन एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि अदालतें किसी महिला, विशेषकर नाबालिग लड़की को, जबरन गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं। पीठ के समक्ष यह मामला आया था कि एक नाबालिग लड़की पड़ोस के एक लड़के के साथ संबंध में थी और उसी दौरान वह गर्भवती हो गई। लड़की ने अदालत से चिकित्सकीय रूप से गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति मांगी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के जेजे अस्पताल को निर्देश दिया कि नाबालिग की गर्भावस्था को मेडिकल प्रक्रिया के तहत समाप्त किया जाए। साथ ही अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि इस दौरान सभी जरूरी चिकित्सकीय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए। इन दोनों मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को महिला अधिकारों और न्याय तक पहुंच के संदर्भ में बेहद अहम माना जा रहा है।

J&K: अनंतनाग में ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल पर बड़ी कार्रवाई… NIA ने की मेडिकल कॉलेज पर छापामारी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency- NIA) ने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के अनंतनाग जिले (Anantnag district) में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में छापेमारी की है। यह कार्रवाई ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी है, जिसमें शिक्षित और प्रतिष्ठित पेशेवर शामिल हैं—जैसे डॉक्टर, तकनीशियन और अन्य लोग—जो पारंपरिक आतंकवादी प्रोफाइल से अलग हैं। एनआईए की टीम ने कॉलेज परिसर में तलाशी ली और खास तौर पर एक डॉक्टर के लॉकर से राइफल बरामद होने के संबंध में साक्ष्य जुटाए। यह मॉड्यूल ‘व्हाइट कॉलर’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसमें आम आतंकवादियों के बजाय समाज के सम्मानित वर्ग के लोग शामिल थे। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने दस्तावेजों और अन्य सबूतों की खोज की, ताकि इस नेटवर्क के गहरे संबंधों और संरचना का पता लगाया जा सके। जांच की शुरुआत और लाल किले विस्फोटइस जांच की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई, जब दिल्ली के लाल किले के पास एक कार बम विस्फोट हुआ, जिसमें कई लोगों की मौत हुई। इस हमले के बाद ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ, जिसमें डॉक्टरों का एक समूह शामिल था। इस मामले में प्रमुख आरोपी डॉ. आदिल अहमद रदर है, जो पहले GMC अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर रह चुका था। उसकी गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हुई, जहां वह एक निजी अस्पताल में काम कर रहा था। डॉ. रदर के लॉकर से AK-56 राइफल और गोला-बारूद बरामद हुआ, जिसके बाद मामला एनआईए को सौंप दिया गया। अब तक इस मॉड्यूल से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और फरीदाबाद से बड़ी मात्रा में विस्फोटक जब्त किए गए हैं। जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्यजांच में यह भी पता चला कि डॉ. आदिल अहमद रदर कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपोरा का रहने वाला है और उसने श्रीनगर के GMC से MBBS की डिग्री हासिल की थी। एनआईए के दावे के मुताबिक, वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा था और दिल्ली में हुए विस्फोट में उसकी भूमिका थी। मॉड्यूल में अन्य डॉक्टर भी शामिल थे, जिनमें डॉ. मुजामिल अहमद गनाई और डॉ. शाहीन सईद का नाम सामने आया है। एनआईए ने बताया कि यह समूह पिछले चार वर्षों से सक्रिय था और वैश्विक कॉफी चेन जैसी जगहों पर हमले की साजिश रच रहा था। उनका लक्ष्य इजराइल-गाजा संघर्ष से प्रेरित होकर ऐसे हमले करना था। कुछ सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की भी योजना बनाई थी। आतंकवाद का नया चेहरायह मामला आतंकवाद के एक नए रूप को दर्शाता है, जहां समाज के प्रतिष्ठित पेशेवर कट्टरपंथी विचारधारा की तरफ आकर्षित हो रहे हैं और अपनी शिक्षा तथा सामाजिक स्थिति का गलत उपयोग कर रहे हैं। एनआईए की यह छापेमारी मॉड्यूल के बचे हुए सदस्यों और उनके नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जांच अभी जारी है और भविष्य में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। इस तरह के मॉड्यूल समाज के लिए अधिक खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि ये सामान्य जीवन में घुलमिलकर काम करते हैं और अपनी पहचान छुपाते हैं। कुल मिलाकर, यह घटना सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और तेज कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर करती है।