मलेशिया में पीएम मोदी का संबोधन: भारत मलेशिया संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता

नई दिल्ली । मलेशिया की राजधानी में प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के बीच गहरे और गतिशील संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने अनवर इब्राहिम के स्वागत के लिए हृदय से आभार जताया और कहा कि मलेशिया ने अपनी परंपराओं और जीवन शैली को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया जो उन्हें हमेशा याद रहेगा। उन्होंने मित्रता की ऊँचाई और गहराई का अनुभव करने की बात कही और इस विशेष स्वागत के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। पीएम मोदी ने कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें तीसरी बार मलेशिया आने का अवसर मिला है और अनवर इब्राहिम के कार्यकाल में उन्हें चौथी बार मिलने का मौका मिल रहा है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ती सक्रियता और सहयोग की गति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों ने जो गति और गहराई हासिल की है वह प्रेरणादायक है और इसके लिए उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री के योगदान को सराहा। संबोधन में उन्होंने कहा कि आज भारत और मलेशिया का सहयोग कृषि विनिर्माण क्लीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गहरा हुआ है। इसके साथ ही स्किल डेवलपमेंट और क्षमता निर्माण कैपेसिटी बिल्डिंग में भी दोनों देश अहम साझेदार बन चुके हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है जो क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने मलेशिया को आसियान की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई दी और कहा कि मलेशिया के सहयोग से भारत आसियान संबंध और अधिक गहरे होंगे और विस्तार पाएंगे। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों की असली ताकत पीपल टू पीपल टाई को बताया। भारतीय मूल के लगभग 30 लाख मलेशियाई नागरिक दोनों देशों के बीच एक जीवंत पुल लिविंग ब्रिज हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें मलेशिया में डाइस्पोरा से मिलने का अवसर मिला जहां उन्होंने देखा कि लोगों का प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और प्रेम कितना गहरा है जो उनके लिए गर्व का विषय था। सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मित्र देशों का साथ महत्वपूर्ण है यह भी उन्होंने कहा। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत और मलेशिया दोनों मेरिटाइम नेबर्स हैं और उन्हें अपने संबंधों की पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का मूल संदेश यही है कि भारत मलेशिया के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाना चाहता है और हर क्षेत्र में सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाना चाहता है। अंत में उन्होंने एक बार फिर स्वागत के लिए मलेशियाई प्रधानमंत्री और उनकी टीम का आभार व्यक्त किया।
मुंबई में 2047 का संकल्प और सामाजिक समरसता का संदेश दिया संघ प्रमुख डॉ. भागवत ने

नई दिल्ली। /मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित नए क्षितिज कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आज का भारत 1947 का भारत नहीं है और अब देश को तोड़ने की सोच रखने वाली शक्तियां खुद ही टूट जाएंगी। उनके अनुसार, वर्ष 2047 जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा तब अखंड भारत के उदय की कल्पना एक राष्ट्रीय संकल्प के रूप में की जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि डॉ. भागवत का यह वक्तव्य सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के आधार पर भारत की एक व्यापक परिकल्पना को दर्शाता है। उन्होंने समाज की सजगता और एकजुटता को राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी पूरे समाज का दोष नहीं होती, बल्कि समाज की जागरूकता से विघटनकारी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। अपने संबोधन में खून और संस्कृति का गहरा रिश्ता बताते हुए भागवत बोले कि केशधारी और सहजधारियों के बीच रोटी-बेटी का संबंध भी रहा है और गुरु ग्रंथ साहिब में केवल सिख संतों की ही नहीं, बल्कि पूरे देश के संतों की वाणी शामिल है। इस संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों समुदायों को अलग-अलग बताना गलत है, क्योंकि मूल रूप से वे एक ही सांस्कृतिक परंपरा के हिस्से हैं। समाज में समानता और समरसता के मुद्दे पर भी संघ प्रमुख ने अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुरूप जो भी आरक्षण व्यवस्था है, संघ उसका समर्थन करता है। उन्होंने जातिगत भेदभाव को समाज की एक बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि इसे पूरी तरह समाप्त होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने सदियों तक विषमता का सामना किया है, उनके उत्थान के लिए यदि समाज को लंबे समय तक प्रयास करना पड़े तो वह भी स्वीकार्य होना चाहिए। उनका मानना था कि समाज में समरसता आने पर राजनीति में भी जाति आधारित सोच स्वतः समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जाति अब व्यवस्था नहीं, बल्कि एक अव्यवस्था बन चुकी है और यह भावना धीरे-धीरे समाप्त हो रही है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि इसे सहज तरीके से खत्म करने का प्रयास किया जाए। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी उन्होंने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि संघ शुद्धाचार का समर्थक है और मानता है कि भ्रष्टाचार केवल कानून और सजा से समाप्त नहीं होगा, बल्कि संस्कारों के माध्यम से ही इसका समाधान संभव है। उन्होंने चाणक्य के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे पानी में मछली कब पानी पी जाती है, यह पता नहीं चलता, वैसे ही भ्रष्टाचार कब और कैसे हो जाता है, यह समझना मुश्किल होता है। इसलिए समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कारों का विकास सबसे जरूरी है। जनसंख्या संतुलन के विषय पर भी उन्होंने विचार रखे। उनका कहना रहा कि समाज के स्वास्थ्य और संतुलन के लिए परिवार व्यवस्था पर विचार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने मतांतरण और घुसपैठ को जनसंख्या असंतुलन के प्रमुख कारणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन लालच या दबाव में होने वाले मतांतरण को रोकना जरूरी है और घर वापसी को इसका उपाय बताया। इसके साथ ही उन्होंने रोजगार और नई तकनीक के विषय पर भी संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें आने से रोजगार कम नहीं होने देना चाहिए। तकनीक का विरोध करने के बजाय हमें ऐसा आर्थिक तंत्र विकसित करना चाहिए जिससे हाथ से काम करने वालों की प्रतिष्ठा बढ़े और सभी को रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि देश में काम करने वाले हाथ अधिक हैं, इसलिए उन्हें काम देना जरूरी है, अन्यथा बेरोजगारी से नक्सलवाद, हिंसा और सामाजिक समस्याएं बढ़ती हैं। उन्होंने अर्थव्यवस्था के विकेंद्रीकरण पर भी जोर दिया और कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने से समाज में स्थिरता और सुरक्षा बढ़ेगी। पारंपरिक व्यवसायों और महिला सशक्तीकरण के लिए एक जिला, एक उत्पाद जैसे अभियानों को उन्होंने प्रभावी बताया। कृषि के विषय में उन्होंने जैविक खेती को भविष्य का रास्ता बताते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होती है और किसान आत्मनिर्भर बनता है। यदि किसानों को भंडारण और प्रसंस्करण की बेहतर सुविधाएं मिलें तो उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और कर्ज की आवश्यकता भी कम पड़ेगी। उन्होंने इस दिशा में सरकार और समाज दोनों के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता बताई। उन्होंने जीडीपी को देश की आर्थिक स्थिति का एक अपूर्ण मापक बताते हुए कहा कि इसमें महिलाओं के श्रम और घरेलू योगदान का समुचित आकलन नहीं होता। उनके अनुसार, देश की वास्तविक आर्थिक ताकत का मूल्यांकन करने के लिए ऐसे मापदंड विकसित करने होंगे जो समाज के हर वर्ग के योगदान को पहचान सकें।इस कार्यक्रम में फिल्म जगत और प्रशासनिक सेवा से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां भी उपस्थित रहीं, जिनमें अनन्या पांडे, करण जौहर, जैकी श्रॉफ, मिलिंद और मनीषा शामिल थे।
रक्षा बजट 2026-27 से बढ़ेगी सैन्य क्षमता और आत्मनिर्भरता.

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत केंद्रीय बजट में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है। वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों, क्षेत्रीय चुनौतियों और चल रहे अभियानों को ध्यान में रखते हुए रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि भारत की दीर्घकालिक सैन्य रणनीति, आत्मनिर्भरता और तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है। इसके बारे में यही कहना होगा कि यह बजट देश की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ भारत को वैश्विक सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करने की आधारशिला भी रखता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 15.19 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बजट को आधुनिकरण, स्वदेशीकरण और मानव संसाधन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन स्थापित करता है। यदि सकल घरेलू उत्पाद के संदर्भ में देखा जाए, तो यह रक्षा आवंटन अनुमानित जीडीपी का लगभग 2.0 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष के 1.9 प्रतिशत से अधिक है। भारत पहले ही दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तेजी से तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में रक्षा क्षेत्र में यह निवेश देश की वैश्विक स्थिति को और मजबूत करता है। अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के बाद भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा खर्च करने वाले देशों में शामिल है। यह तथ्य भारत की सुरक्षा आवश्यकताओं और उसकी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित है। इसके लिए 2.1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21.84 प्रतिशत अधिक है। यह राशि नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों, अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों, आधुनिक युद्धपोतों, पनडुब्बियों, ड्रोन और डिजिटल युद्ध प्रणाली के विकास एवं खरीद पर खर्च की जाएगी। भारतीय वायुसेना और नौसेना के लिए अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, क्योंकि ये तकनीकी रूप से अधिक महंगे और जटिल होते हैं। इसके साथ ही, वेतन, भत्ते, ईंधन, गोला-बारूद और रखरखाव के लिए 3.6 लाख करोड़ रुपये का राजस्व बजट निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक है। इससे सैनिकों के मनोबल को मजबूत करने और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। रक्षा पेंशन के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे लगभग 34 लाख रक्षा एवं नागरिक कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। वन रैंक वन पेंशन योजना में सुधार के माध्यम से सरकार ने पूर्व सैनिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के लिए 29,100 करोड़ रुपये, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के लिए 7,394 करोड़ रुपये और पूर्व सैनिक कल्याण योजनाओं के लिए 12,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये सभी आवंटन यह दर्शाते हैं कि सरकार केवल हथियारों पर ही नहीं, बल्कि सैनिकों के जीवन, बुनियादी ढांचे और भविष्य की आवश्यकताओं पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है। स्वदेशीकरण इस बजट का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। पूंजीगत अधिग्रहण के लिए 1,85,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से 75 प्रतिशत राशि घरेलू उद्योग से रक्षा उपकरण खरीदने पर खर्च की जाएगी। इससे भारत की आत्मनिर्भर भारत नीति को मजबूती मिलेगी और देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। निजी क्षेत्र की भागीदारी और अनुसंधान एवं विकास में निवेश के कारण इस वर्ष रक्षा निर्यात से लगभग 30,000 करोड़ रुपये की आय होने की संभावना है। यह न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित भी करता है। भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं में पिछले कुछ वर्षों में लगातार वृद्धि हुई है। भारतीय सेना दुनिया की सबसे अनुशासित और प्रशिक्षित सेनाओं में से एक मानी जाती है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों से लेकर अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों तक, भारतीय सशस्त्र बलों ने हर क्षेत्र में अपनी दक्षता और समर्पण साबित किया है। सेना का तकनीकी रूपांतरण, महिला सैनिकों की बढ़ती भागीदारी और अत्याधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली भारतीय सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है। इसके अलावा, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का निर्माण रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल सेना की तैनाती और रसद व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों का सामाजिक और आर्थिक विकास भी तेज होता है। रक्षा बजट का प्रभाव सुरक्षा तक सीमित न रहते हुए यह राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रक्षा उद्योग से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। स्वदेशी हथियारों और उपकरणों का निर्माण देश के औद्योगिक विकास को गति देता है। यह बजट तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के लिए भी नए अवसर पैदा करता है। आज के समय में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि साइबर युद्ध, सूचना युद्ध और अंतरिक्ष आधारित सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। इस बजट में इन उभरते क्षेत्रों में निवेश का संकेत मिलता है, जिससे भारत भविष्य के युद्धों के लिए तैयार हो सकेगा। तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और एकीकृत युद्ध क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। भारत के यूरोप और अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग से उसकी सामरिक स्थिति और मजबूत हुई है। बहु-क्षेत्रीय अभियानों, दीर्घकालिक युद्ध क्षमता और सीमाओं की सुरक्षा के लिए यह बजट एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि भारतीय सशस्त्र बल आतंकवाद से लेकर पारंपरिक युद्ध तक हर प्रकार की चुनौती का सामना करने में सक्षम हों। यदि इस रक्षा बजट को आम नागरिक के दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह राष्ट्र की सुरक्षा के लिए एक प्रकार का बीमा है। यह देश के भविष्य को सुरक्षित करने, सैनिकों के मनोबल को मजबूत करने और भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित करने की
आईएनएस सुदर्शिनी ने लोकायन 26 से पहले पोर्ट कॉल पूरा किया, भारत ओमान समुद्री संबंधों को दी नई मजबूती

नई दिल्ली । भारतीय नौसेना की सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 05 फरवरी 2026 को ओमान के शहर सलालाह में अपना पहला पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह कदम जहाज की दस महीने लंबी महासागरीय यात्रा लोकायन 26 में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस यात्रा का उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करना और वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत के माध्यम से विश्व परिवार के साथ सद्भावना को बढ़ावा देना है। पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने ओमान की रॉयल नेवी के साउदर्न नेवल एरिया कमांडर कैप्टन मोहम्मद अल ग़ैलेनी और रॉयल नेवी ऑफ़ ओमान के जहाज अल मोज़ेर के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद अल महारी से बातचीत की। इन वार्ताओं में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक समुद्री संबंधों और साझा हितों पर चर्चा हुई। साथ ही दोनों नौसेनाओं के बीच मित्रता और पेशेवर सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके बाद रॉयल नेवी ऑफ़ ओमान के अधिकारियों के लिए भी आईएनएस सुदर्शिनी ने एक यात्रा का आयोजन किया, जिससे आपसी समझ और साझेदारी और गहरी हुई। सामाजिक संपर्क और जनसंपर्क के उद्देश्य से आईएनएस सुदर्शिनी को जनता के लिए खुला रखा गया। इस दौरान 600 से अधिक आगंतुकों ने तीन-मास्टेड बार्क जहाज का भ्रमण किया। इनमें स्कूल के बच्चे भी शामिल थे, जिन्हें समुद्री यात्रा और नौकायन की बारीकियों का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। इस प्रकार पोर्ट कॉल ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ समुद्री संस्कृति और शिक्षा को भी बढ़ावा दिया। अब आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन 26 के अगले चरण की ओर बढ़ रही है। यह यात्रा भारत की समुद्री विरासत को विश्व स्तर पर फैलाने के साथ-साथ मित्रता, उत्कृष्टता और समुद्री सद्भावना का संदेश देती रहेगी। पाल फहराए और उत्साह बनाये रखते हुए यह शिप समुद्री उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर अपने मिशन को जारी रखेगी।
शबरी जयंती पर CM डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं, मां शबरी को भक्ति की मिसाल बताया

भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मां शबरी जयंती के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की परम भक्त मां शबरी ने आस्था, श्रद्धा और भक्ति को जीवन का सर्वोच्च मार्ग बताया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मां शबरी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है और उनके आदर्शों को आत्मसात करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मां शबरी ने अपनी साधना और भक्ति के माध्यम से यह सिखाया कि सच्ची भक्ति में जाति, वर्ग या सामाजिक स्थिति का कोई महत्व नहीं होता। उन्होंने कहा कि मां शबरी का जीवन संदेश है कि श्रद्धा और समर्पण से हर मुश्किल आसान हो जाती है। मुख्यमंत्री ने मां से प्रार्थना की कि उनकी कृपा सभी पर बनी रहे और देश-समाज में शांति, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शबरी जयंती का पर्व हमें प्रेम, धैर्य और सेवा की भावना से प्रेरित करता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस पावन दिन पर भगवान श्रीराम और मां शबरी की भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को सकारात्मक बनाएं और समाज में भाईचारे का संदेश फैलाएं।
CIBIL स्कोर खराब है तो क्या नहीं मिलेगा नया क्रेडिट कार्ड? जानिए क्या कहता है नियम

नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो फ्लाइट टिकट बुक करनी हो या अचानक आई जरूरत आज के दौर में क्रेडिट कार्ड केवल सुविधा नहीं बल्कि फाइनेंशियल लाइफ का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति नया क्रेडिट कार्ड अप्लाई करता है सबसे पहले जिस चीज की जांच होती है वह है उसका CIBIL स्कोर। ऐसे में जिन लोगों का सिबिल स्कोर खराब है उनके मन में यही सवाल उठता है कि क्या अब उन्हें कभी नया क्रेडिट कार्ड नहीं मिलेगा? चलिए जानते हैं। क्या है CIBIL स्कोर?CIBIL स्कोर एक तीन अंकों की संख्या होती है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को दर्शाती है। यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। आमतौर पर 750 या उससे ज्यादा स्कोर को बैंक अच्छा मानते हैं। वहीं 600 से नीचे का स्कोर यह संकेत देता है कि आपने पहले लोन या क्रेडिट कार्ड के भुगतान में लापरवाही की है। ऐसे में बैंक आपको ‘हाई रिस्क कस्टमर’ मान लेते हैं। क्या RBI ने खराब स्कोर वालों पर रोक लगाई है?यह जानना जरूरी है कि भारतीय रिजर्व बैंक RBIने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है जो खराब CIBIL स्कोर वाले व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड देने से रोकता हो। दरअसल क्रेडिट कार्ड जारी करना पूरी तरह बैंकों और कार्ड जारी करने वाली कंपनियों की नीति पर निर्भर करता है। बैंक अपने रिस्क को देखते हुए शर्तें तय करते हैं। खराब CIBIL स्कोर वालों के लिए कोई ऑप्शन?अगर आपका स्कोर कम है तब भी कुछ रास्ते खुले हैं। सबसे सेफ ऑप्शन है सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड। इसमें आपको बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट FDकरानी होती है और उसी के बदले कार्ड मिलता है। इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य के कार्ड पर ऐड-ऑन कार्ड भी लिया जा सकता है। कुछ फिनटेक कंपनियां और NBFC सीमित क्रेडिट लिमिट के साथ कार्ड ऑफर करती हैं ताकि यूजर धीरे-धीरे अपनी साख सुधार सके। क्रेडिट कार्ड से कैसे सुधरेगा सिबिल स्कोर?सही तरीके से इस्तेमाल किया गया क्रेडिट कार्ड आपके खराब CIBIL स्कोर को सुधारने में मदद कर सकता है। समय पर बिल भुगतान लिमिट से कम खर्च और नियमित उपयोग से 6 से 12 महीनों में स्कोर में अच्छा सुधार देखा जा सकता है। एक बार स्कोर बेहतर होते ही अनसिक्योर्ड यानी बिना FD वाले क्रेडिट कार्ड के रास्ते भी खुल जाते हैं।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर CM मोहन यादव ने किया स्मरण, शिक्षा और गरीब कल्याण को बताया जीवन लक्ष्य

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. जाकिर हुसैन का जीवन शिक्षा, सामाजिक न्याय और गरीब कल्याण के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि डॉ. जाकिर हुसैन ने देश के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए जो योगदान दिया, वह सदैव याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि डॉ. जाकिर हुसैन शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से सक्रिय रहे और उन्होंने शिक्षा को समाज के विकास का मूलाधार माना। उनकी सोच में शिक्षा को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता साफ झलकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी शिक्षा और सामाजिक कल्याण के लिए की गई मेहनत और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने रहेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डॉ. जाकिर हुसैन का जीवन हमें यह संदेश देता है कि देश की प्रगति में शिक्षा और सामाजिक न्याय का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि हम सभी को उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता है और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए।
सात फेरों का खूनी अंत: शराबी पति ने पत्नी पर दागीं 3 गोलियां, मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया।

ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र स्थित दर्पण कॉलोनी उस वक्त दहल उठी जब शनिवार रात करीब 10 बजे गोलियों की तड़तड़ाहट से सन्नाटा चीर गया। यह आवाज किसी बाहरी हमले की नहीं बल्कि घर के भीतर पनप रहे उस गुस्से की थी जिसने एक सुहागिन का सुहाग ही कातिल बना दिया। सोनू तोमर नाम के युवक ने अपनी पत्नी रुचि तोमर के साथ हुए मामूली विवाद के बाद आपा खो दिया और अपनी पिस्टल से एक के बाद एक आधा दर्जन राउंड फायर झोंक दिए। रुचि के शरीर में तीन गोलियां लगीं और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में कोहराम मच गया। जब परिजन कमरे की ओर भागे तो वहां का मंजर खौफनाक था। रुचि खून से लथपथ जमीन पर पड़ी थी और आरोपी सोनू मौके से फरार हो चुका था। मृतका के ससुर ने तत्काल पुलिस को सूचना दी जिसके बाद एफएसएल (FSL) की टीम और पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सोनू तोमर शराब की लत का शिकार था और कोई काम-धंधा नहीं करता था। घर का खर्च उसके पिता की पेंशन और किराये की आय से चलता था। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में जो दलील दी वह चौंकाने वाली है। उसका कहना था कि घर में आए दिन कलेश होता था और उसे खुद खाना बनाने से लेकर साफ-सफाई तक का काम करना पड़ता था। शनिवार की रात भी खाना बनाने की बात को लेकर शुरू हुआ विवाद धक्का-मुक्की तक जा पहुंचा और अंततः हत्या में बदल गया। हालांकि पुलिस इस थ्योरी की गहनता से जांच कर रही है क्योंकि हत्या के पीछे की असल वजह अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इस वारदात ने दो मासूम बच्चों के सिर से मां का साया छीन लिया है। 11 साल का आदित्य और 14 साल की राधिका अब उस सदमे में हैं जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को घर के पास से ही गिरफ्तार कर लिया है लेकिन वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल अभी बरामद होना बाकी है। ग्वालियर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है।
इंदौर: शादी का झांसा देकर युवती से कई बार दुष्कर्म, आरोपी रितिक कुशवाह गिरफ्तार; पॉक्सो एक्ट में भी केस दर्ज

इंदौर । मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के तेजाजी नगर थाना क्षेत्र से सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने दोस्ती का फायदा उठाते हुए एक युवती को शादी का झांसा दिया और उसके साथ कई बार दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है। तेजाजी नगर थाना प्रभारी देवेंद्र मरकाम के अनुसार पीड़िता शनिवार को अपनी मां के साथ थाने पहुंची थी और आपबीती सुनाई। शिकायत के मुताबिक आरोपी रितिक कुशवाह की पहचान युवती से साल 2022 में हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और आरोपी ने युवती को प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने का वादा किया। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने उस समय भी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे जब वह नाबालिग थी इसी आधार पर पुलिस ने मामले में दुष्कर्म की धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो ) एक्ट भी जोड़ा है। घटनाक्रम के विवरण के अनुसार आरोपी रितिक ने जुलाई 2025 में पीड़िता को अपने दोस्त रमन के कमरे पर ले जाकर पहली बार दुष्कर्म किया। इसके बाद नवंबर माह में उसने लिबोंदी क्षेत्र में अपने एक अन्य दोस्त के घर पर भी युवती के साथ गलत काम किया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर करीब 6 बार उसके साथ बलात्कार किया। जब भी युवती ने शादी का दबाव बनाया आरोपी टालमटोल करने लगा और अंततः मुकर गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने रितिक कुशवाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अपराध में उसके दोस्तों की क्या भूमिका थी। इंदौर पुलिस का कहना है कि महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में कोई भी कोताही नहीं बरती जाएगी और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
मध्य प्रदेश में बोर्ड पैटर्न लागू, नकल और लीक से निपटने की तैयारी

भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस साल 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं पूरी तरह से बोर्ड पैटर्न पर आयोजित की जा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में किया गया है। अब प्रश्नपत्र स्कूलों में नहीं, बल्कि सीधे पुलिस थानों में सुरक्षित रखे जाएंगे। परीक्षा के दिन ही केंद्राध्यक्ष की निगरानी में इन बंडलों को थाने से परीक्षा केंद्र तक लाया जाएगा और परीक्षा शुरू होने से ठीक 60 मिनट पहले खोला जाएगा। इस कदम से नकल और प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं को रोकने की तैयारी की जा रही है। मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा तैयार किए गए प्रश्नपत्र अब जिला शिक्षा अधिकारी और केंद्राध्यक्षों के माध्यम से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो। कक्षा 11वीं की परीक्षाएं 23 फरवरी से 17 मार्च 2026 तक आयोजित होंगी जबकि कक्षा 9वीं की परीक्षाएं 2 मार्च से 17 मार्च 2026 तक होंगी। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं एक ही पाली में होंगी और दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेंगी। सभी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 23 मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंक योजना के अनुसार होगी, जिससे सभी छात्रों को निष्पक्ष अंक मिलें और मूल्यांकन में पारदर्शिता बनी रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रश्नपत्रों की थाने में सुरक्षा व्यवस्था से नकल की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे स्कूल स्तर पर लीक की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। साथ ही, परीक्षा अधिकारियों और पुलिस की निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी अनुचित गतिविधि न हो। अभिभावक और शिक्षक इस बदलाव से संतुष्ट हैं और उनका मानना है कि इससे परीक्षा का स्तर और विश्वसनीयता दोनों बढ़ेंगे। छात्रों को भी समय से पहले प्रश्नपत्र खोलने की प्रक्रिया से अतिरिक्त तनाव कम होगा और वे बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल हो पाएंगे। मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम राज्य में परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है। भविष्य में इसे अन्य कक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में भी लागू किए जाने की संभावना है। इस प्रकार इस साल 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं केवल पाठ्यक्रम की समझ ही नहीं, बल्कि अनुशासन और ईमानदारी की परीक्षा भी होंगी। छात्रों और शिक्षकों के लिए यह नई प्रणाली चुनौतीपूर्ण, लेकिन पारदर्शिता और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।