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विदिशा में बैलगाड़ी बारात का जादू, भोपाल में काम वाली की संतान से लूट की सनसनी

विदिशा में आज एक अनोखी बारात निकली जिसने सबका दिल जीत लिया। आधुनिक जमाने में जहां बारातें कार और बाइक्स से निकलती हैं, वहीं सिरोंज के मंडी रोड पर निकली इस बारात में पूरी तरह पुराने रीति-रिवाजों की झलक थी। आगे घोड़े पर सवार दूल्हा राजा की शानदार सवारी और पीछे फूलों से सजाई गई 10 से 12 बैलगाड़ियां, जिनमें बाराती बैठकर पुराने जमाने की यादें ताजा कर रहे थे। बैलगाड़ियां धीरे-धीरे चल रही थीं और ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ माहौल मनमोहक बन रहा था। दूल्हा डॉ. प्रशांत ने बताया कि उनके पापा ने इस बारात की प्लानिंग दो महीने पहले से की थी। उन्होंने कहा कि यह बारात अनोखी और सबके लिए यादगार रही। इस बारात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और यूजर्स इसे सादगी और संस्कृति की जीत बता रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि आधुनिकता के बीच भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना कितना खूबसूरत अनुभव है। वहीं, भोपाल में टीटी नगर थाना इलाके के पॉश कॉलोनी 98 क्वार्टर में दिनदहाड़े एक सनसनीखेज लूट की घटना सामने आई। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी काम वाली बाई का बेटा निकला। जानकारी के अनुसार, आरोपी गोलू रैकवार अपने दोस्त के साथ पीड़िता के घर में घुसा और हाथ-पैर बांधकर चाकू की नोक पर अलमारी खोलने को कहा। चाबी देने से इंकार करने पर उन्होंने रॉड की मदद से अलमारी तोड़ी और डेढ़ लाख रुपए नकद, मोबाइल और लैपटॉप लेकर भाग गए। पीड़िता बीमार होने के कारण घर पर थी और माइनिंग विभाग में कार्यरत हैं। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुछ ही घंटे में आरोपी को पकड़ लिया। यह आरोपी कुछ दिन पहले 307 के केस में जमानत पर आया था। पुलिस अब आरोपी से नकदी और अन्य सामान की रिकवरी के बाद पूछताछ कर रही है। इस घटना ने शहर में सनसनी फैला दी है और लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मध्यप्रदेश में आज दो बिल्कुल अलग रंग देखने को मिले, विदिशा की बैलगाड़ी बारात ने संस्कृति और परंपरा का जश्न मनाया, वहीं भोपाल की लूट ने सुरक्षा और अपराध की गंभीरता को उजागर किया।

सरकारी भर्तियों का बदलेगा पैटर्न: अब ESB लेगा सिर्फ पात्रता परीक्षा, विभाग सीधे स्कोरकार्ड से करेंगे चयन

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार अब भर्तियों के मौजूदा पैटर्न को बदलने की तैयारी में है। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी चयन मंडल अब केवल पात्रता परीक्षा यानी एलिजिबिलिटी टेस्ट आयोजित करेगा, जबकि संबंधित विभाग उम्मीदवारों के स्कोरकार्ड के आधार पर सीधे चयन प्रक्रिया पूरी करेंगे। इस नई प्रणाली को लेकर शासन स्तर पर सकारात्मक संकेत मिले हैं। मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्ताव का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया जा चुका है, जिसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग से इसे सैद्धांतिक सहमति मिल गई है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही प्रदेश में सरकारी भर्तियों का पूरा सिस्टम नए स्वरूप में लागू हो जाएगा। फिलहाल मध्यप्रदेश में किसी भी सरकारी भर्ती को पूरा होने में औसतन एक से डेढ़ साल का समय लग जाता है। परीक्षा, परिणाम, दस्तावेज सत्यापन और चयन प्रक्रिया लंबी होने के कारण न केवल विभागों में पद खाली रहते हैं, बल्कि अभ्यर्थियों को भी लंबे इंतजार और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद इस पूरी प्रक्रिया को दो से ढाई महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नई प्रणाली से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अभ्यर्थियों को अलग-अलग पदों और विभागों के लिए बार-बार परीक्षाएं नहीं देनी पड़ेंगी। एक बार पात्रता परीक्षा पास करने के बाद उनका स्कोरकार्ड मान्य रहेगा और विभिन्न विभाग अपनी जरूरत के अनुसार उसी स्कोरकार्ड के आधार पर उम्मीदवारों का चयन कर सकेंगे। इससे न केवल समय और खर्च की बचत होगी, बल्कि युवाओं पर परीक्षा का मानसिक दबाव भी कम होगा। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों की संभावना भी कम होगी। साथ ही विभागों को भी समय पर योग्य उम्मीदवार मिल सकेंगे, जिससे प्रशासनिक कार्यों की रफ्तार तेज होगी। ESB की भूमिका अब परीक्षा आयोजन तक सीमित रहेगी, जबकि चयन की जिम्मेदारी सीधे संबंधित विभागों के पास होगी। प्रदेश के लाखों प्रतियोगी छात्रों के लिए यह बदलाव राहत भरी खबर माना जा रहा है। लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में देरी और बार-बार परीक्षा देने की समस्या को लेकर युवाओं में असंतोष था। यदि कैबिनेट से मंजूरी मिल जाती है, तो आने वाले समय में मध्यप्रदेश की सरकारी भर्तियां देश के सबसे तेज और सरल सिस्टम में गिनी जा सकती हैं।

इंदौर में भाजपा नेता की गुंडागर्दी: युवकों पर जानलेवा हमला, स्कॉर्पियो में तोड़फोड़; 20 दिन पुराने समझौते के बाद फिर भड़का विवाद

इंदौर । इंदौर के राऊ इलाके में रविवार सुबह सत्ताधारी दल से जुड़े एक नेता की दबंगई एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई। भाजपा युवा मोर्चा के एक पदाधिकारी पर अपने साथियों के साथ मिलकर दो युवकों पर जानलेवा हमला करने और उनकी कार में जमकर तोड़फोड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस हमले में दोनों युवक बुरी तरह घायल हो गए जिन्हें गंभीर हालत में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के मुताबिक हमलावर की पहचान भाजपा युवा मोर्चा के मंडल उपाध्यक्ष वेदांत तिवारी के रूप में हुई है। पीड़ित युवकों के नाम प्रखर शर्मा और नयन बाफना बताए गए हैं जो सुदामा नगर के निवासी हैं। रविवार सुबह दोनों युवक कैट रोड स्थित एक कैफे से चाय पीकर अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से लौट रहे थे। इसी दौरान वेदांत तिवारी अपने साथी समीर शर्मा और आदित्य के साथ उनका पीछा करने लगा। बताया जा रहा है कि रास्ते में आरोपियों ने स्कॉर्पियो को जबरन रोका और युवकों पर हमला बोल दिया। लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से की गई इस मारपीट में दोनों युवकों के सिर में गंभीर चोटें आईं। इतना ही नहीं आरोपियों ने स्कॉर्पियो के शीशे भी तोड़ दिए जिससे वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से वर्चस्व को लेकर रंजिश चली आ रही है। यह पहला मौका नहीं है जब इस विवाद ने हिंसक रूप लिया हो। करीब 20 दिन पहले महूनाका चौराहे पर भी वेदांत तिवारी और उसके साथियों ने इन युवकों को घेरने की कोशिश की थी। उस समय युवक किसी तरह अपनी कार भगा कर मौके से निकलने में सफल रहे थे। मामला छत्रीपुरा थाने तक पहुंचा था जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि उसी समझौते के बाद आरोपियों के हौसले और बुलंद हो गए जिसके चलते उन्होंने दोबारा हमला करने से भी परहेज नहीं किया। रविवार की घटना के बाद जब घायल युवक राऊ थाने पहुंचे तो वहां भी हंगामे की स्थिति बन गई। आरोप है कि सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं के दबाव के चलते पुलिस शुरुआत में एफआईआर दर्ज करने से बचती रही। हालांकि जब थाने पर भीड़ जुट गई और मामला तूल पकड़ने लगा तब पुलिस को मजबूरन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। पुलिस ने तोड़फोड़ मारपीट और जानलेवा हमले की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल घायलों का इलाज निजी अस्पताल में जारी है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर इंदौर में राजनीतिक रसूख और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई होती तो शायद यह हमला टल सकता था।

ब्राह्मण होना योग्यता नहीं, हिंदू होना जरूरी’ RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, अंग्रेजी और राजनीति पर भी रखी दो टूक

नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर मुंबई में आयोजित व्याख्यानमाला के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सरसंघचालक पद जाति भाषा राजनीति और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ प्रमुख बनने के लिए ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है बल्कि कोई भी हिंदू चाहे वह ब्राह्मण हो क्षत्रिय वैश्य शूद्र या फिर एससी-एसटी वर्ग से सरसंघचालक बन सकता है। कार्यक्रम के दौरान सवालों के जवाब देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि RSS में पद जाति के आधार पर नहीं बल्कि काम और समर्पण के आधार पर तय होते हैं। उन्होंने कहा संघ में यह नहीं देखा जाता कि कौन किस जाति से है। जो काम करेगा वही आगे बढ़ेगा। एससी-एसटी होना अयोग्यता नहीं है और ब्राह्मण होना कोई विशेष योग्यता नहीं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ का नेतृत्व किसी जातीय पहचान से नहीं बल्कि हिंदू समाज की एकता से जुड़ा है। भाषा को लेकर भी संघ प्रमुख ने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी कभी भी RSS की भाषा नहीं बनेगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। अंग्रेजी का उपयोग केवल आवश्यकता पड़ने पर किया जाएगा। संघ भारतीय भाषाओं विशेषकर हिंदी को प्राथमिकता देता है और आगे भी सिर्फ भारतीय भाषाओं में ही काम करेगा। राजनीति को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर मोहन भागवत ने कहा कि RSS सरकार नहीं चलाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS और BJP दो अलग-अलग संगठन हैं। संघ का राजनीति से सीधा कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ ने पहले ही तय कर लिया है कि उसका काम केवल समाज को जोड़ना है न कि सत्ता या शासन चलाना। स्वयंसेवक भले ही अलग-अलग क्षेत्रों में हों लेकिन संगठन का उद्देश्य सामाजिक एकता तक ही सीमित है। संघ की शुरुआत को याद करते हुए भागवत ने कहा कि प्रारंभिक दौर में संघ एक छोटी ब्राह्मण बस्ती से शुरू हुआ था इसलिए उस समय पदाधिकारी ब्राह्मण थे। इसी कारण लोगों में यह धारणा बनी कि संघ ब्राह्मणों का संगठन है। लेकिन जैसे-जैसे संघ का विस्तार हुआ यह धारणा स्वतः टूटती चली गई। आज संघ में हर जाति और वर्ग के लोग सक्रिय हैं। अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर संघ प्रमुख ने सरकार से और सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पहले इस दिशा में काम नहीं हो रहा था लेकिन अब पहचान और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू हुई है। जनगणना और SIR जैसी प्रक्रियाओं से ऐसे लोग सामने आते हैं जो भारत के नागरिक नहीं हैं। उन्होंने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना प्रशासन को देने की अपील की। भागवत ने कहा कि घुसपैठियों को रोजगार नहीं मिलना चाहिए जबकि देश के नागरिकों को चाहे वे किसी भी धर्म के हों काम मिलना चाहिए। बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि वहां करीब 1.25 करोड़ हिंदू रहते हैं। यदि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का निर्णय लेते हैं तो पूरी दुनिया के हिंदू उनके समर्थन में खड़े होंगे। भाषा विवाद को उन्होंने स्थानीय बीमारी” बताते हुए कहा कि इसे फैलने नहीं देना चाहिए। संघ के विस्तार को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि अब संघ जाति के आधार पर नहीं बल्कि भौगोलिक आधार पर फैलता है। हर बस्ती हर मंडल और हर गांव तक संघ का काम पहुंच रहा है। इसी कारण आज संघ में सभी जातियों और वर्गों की सहभागिता स्वाभाविक रूप से देखने को मिलती है।

जनकपुरी हादसे के बाद एक्शन मोड में सरकार, खुदाई कार्यों पर सख्ती CM रेखा गुप्ता ने दिए कड़े निर्देश

नई दिल्ली । जनकपुरी में हुए हादसे के बाद दिल्ली सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस घटना को सुरक्षा व्यवस्था में एक गंभीर चूक बताते हुए साफ शब्दों में कहा है कि जनता की जान से जुड़ी जिम्मेदारियों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि किसी अधिकारी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ न सिर्फ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, बल्कि कठोर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे। घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि दिल्ली में सड़कों और फुटपाथों पर जहां-जहां खुदाई का कार्य चल रहा है, उसकी विस्तृत रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर सरकार को सौंपी जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राजधानी में चल रहे विकास कार्यों के नाम पर नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि निर्माण और खुदाई कार्यों की निगरानी अब पहले से कहीं अधिक सख्ती से की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद मुख्य सचिव ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है, जो लोक निर्माण विभाग दिल्ली जल बोर्ड, नगर निगम और सभी बिजली वितरण कंपनियों सहित हर संबंधित एजेंसी पर लागू होगा। इस आदेश के तहत दिल्ली में चल रहे सभी खुदाई कार्यों के लिए नए और कड़े सुरक्षा मानक अनिवार्य कर दिए गए हैं। अब हर खुदाई स्थल पर बड़े, स्पष्ट और पढ़ने योग्य चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा, ताकि राहगीरों को पहले से खतरे की जानकारी मिल सके। रात के समय सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत रिफ्लेक्टर लाइट, ब्लिंकर और चमकीली टेप का उपयोग जरूरी किया गया है, जिससे अंधेरे में भी खुदाई स्थल साफ नजर आए। इसके अलावा खुदाई वाली जगह को चारों तरफ से ऊंची और मजबूत बैरिकेडिंग से सुरक्षित करना होगा। सरकार ने मलबा प्रबंधन और धूल नियंत्रण को भी सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सड़क पर मिट्टी या निर्माण सामग्री बिखरी नहीं होनी चाहिए और प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएंगे। पैदल यात्रियों और वाहनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता सुनिश्चित करना भी अब अनिवार्य होगा। साथ ही संबंधित इंजीनियरों को रोजाना साइट का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों की जांच करनी होगी और ट्रैफिक बाधित न हो, इसके लिए उचित डायवर्जन और प्रबंधन करना होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दिल्ली सरकार एक सख्त निगरानी तंत्र विकसित कर रही है। उन्होंने दोहराया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ बिना किसी दबाव के कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद राजधानी में चल रहे सभी निर्माण और खुदाई प्रोजेक्ट्स का सुरक्षा ऑडिट शुरू कर दिया गया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि ऑडिट के दौरान पाई जाने वाली किसी भी खामी पर तत्काल और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

सालाना इनकम 12 लाख रुपये से ज्यादा है तो आज ही करें ये 4 निवेश, रिटायरमेंट भी रहेगा सुरक्षित और टैक्स भी जीरो!

नई दिल्ली । अगर आपकी सालाना आमदनी 12 लाख रुपये से ज्यादा है और हर साल इनकम टैक्स आपकी जेब पर भारी पड़ता है, तो अब चिंता छोड़ दीजिए। सही टैक्स प्लानिंग और स्मार्ट निवेश से न सिर्फ टैक्स का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है, बल्कि रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फाइनेंशियल फंड भी तैयार किया जा सकता है। खास बात यह है कि कुछ निवेश ऐसे हैं, जो टैक्स बचत और भविष्य की सुरक्षा दोनों का डबल फायदा देते हैं। नेशनल पेंशन सिस्टम नेशनल पेंशन सिस्टम हाई इनकम वालों के लिए सबसे असरदार टैक्स सेविंग टूल माना जाता है। सेक्शन 80CCD के तहत इसमें 50,000 रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है, जो 80C की 1.5 लाख रुपये की सीमा से अलग है। यानी सीधे-सीधे टैक्सेबल इनकम कम। NPS में इक्विटी, डेट और सरकारी बॉन्ड में निवेश होता है, जिससे लंबे समय में 10-12% तक रिटर्न की उम्मीद की जाती है। रिटायरमेंट के समय 60% राशि टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है, जबकि बाकी रकम से नियमित पेंशन मिलती है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड जो लोग रिस्क से दूर रहना चाहते हैं, उनके लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड बेहतरीन ऑप्शन है। इसमें 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। मौजूदा समय में PPF पर 7.1% का फिक्स्ड और टैक्स-फ्री रिटर्न मिलता है। 15 साल की लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा इसे रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बेहद मजबूत बनाता है। इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम उन निवेशकों के लिए है, जो टैक्स बचाते हुए ज्यादा रिटर्न चाहते हैं। इसमें भी 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। 3 साल के लॉक-इन के साथ ELSS फंड्स इक्विटी में निवेश करते हैं और लंबे समय में 12–15% तक रिटर्न दे सकते हैं। हालांकि इसमें बाजार का रिस्क रहता है, इसलिए निवेश से पहले प्रोफाइल समझना जरूरी है। ULIP और पेंशन प्लान ULIP और लाइफ इंश्योरेंस पेंशन प्लान्स भी हाई इनकम वालों के लिए फायदेमंद हैं। 80C/80CCC के तहत टैक्स छूट और 10 के तहत टैक्स-फ्री मैच्योरिटी इन्हें अट्रैक्टिव बनाती है। ULIP में निवेश और इंश्योरेंस दोनों का लाभ मिलता है, जबकि पेंशन प्लान रिटायरमेंट के बाद नियमित आय सुनिश्चित करते हैं।

विकसित भारत’ के लिए नई वित्तीय रूपरेखा: बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने को बनेगी हाई-लेवल कमिटी

नई दिल्ली । भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में केंद्र सरकार अब बैंकिंग क्षेत्र को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि सरकार जल्द ही बैंकिंग सेक्टर के लिए एक हाई-लेवल कमिटी का गठन करेगी। इस कमिटी का उद्देश्य आने वाले वर्षों में देश की बढ़ती वित्तीय जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग व्यवस्था को तैयार करना और उसे अधिक सक्षम, व्यापक और मजबूत बनाना होगा। दरअसल, जैसे-जैसे भारत तेजी से आर्थिक विकास की ओर बढ़ रहा है, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, उद्योग, स्टार्टअप और सामाजिक योजनाओं के लिए भारी वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम को भी उसी गति से विकसित करना जरूरी है, ताकि वह देश की विकास यात्रा का मजबूत आधार बन सके। इसी उद्देश्य से यह कमिटी बैंकिंग सेक्टर की पूरी समीक्षा करेगी और यह तय करेगी कि आने वाले समय में उसे किस दिशा में आगे बढ़ाना है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित भारतका सपना केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि मजबूत वित्तीय ढांचे से पूरा होगा। इसके लिए पर्याप्त फंडिंग, क्रेडिट की उपलब्धता और बैंकिंग सुविधाओं का आम लोगों तक पहुंचना बेहद जरूरी है। कमिटी इसी बात का ब्लूप्रिंट तैयार करेगी कि बैंकिंग क्षेत्र कैसे देश की अगली विकास छलांग का साथ दे सकता है। इस प्रस्ताव का जिक्र 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में भी किया गया था। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा था कि विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर हाई-लेवल कमिटीबनाई जाएगी, जो पूरे सेक्टर की समीक्षा करेगी और इसे भारत के अगले विकास चरण से जोड़ेगी। साथ ही यह सुनिश्चित करेगी कि वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण से कोई समझौता न हो। सरकार का फोकस केवल बड़े उद्योगों को फंडिंग देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि बैंकिंग सेवाएं देश के हर व्यक्ति तक पहुंचें। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कारोबारियों, महिलाओं और युवाओं को सस्ती और आसान वित्तीय सेवाएं मिलें, इसके लिए भी कमिटी सुझाव देगी। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग को इतना बड़ा और सक्षम बनाना है कि वह देश की बढ़ती आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सके और आम आदमी की पहुंच में भी बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी की आवश्यकता होगी। इसके लिए बैंकिंग सिस्टम को मजबूत, लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाना जरूरी है। यही कारण है कि सरकार इस कमिटी का गठन जल्द से जल्द करने की दिशा में काम कर रही है। बजट में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कुछ शुरुआती कदम भी उठाए गए हैं। इसी कड़ी में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेश PFC और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशनस REC जैसे बड़े पब्लिक सेक्टर एनबीएफसी को पुनर्गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मकसद इन संस्थानों का आकार बढ़ाना और उनकी कार्यक्षमता को और बेहतर बनाना है, ताकि वे बड़े स्तर पर परियोजनाओं को फंडिंग दे सकें। हाल ही में PFC के बोर्ड ने REC के साथ मर्जर को सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी है। REC पहले से ही PFC की सब्सिडियरी है और दोनों ही नवरत्नश्रेणी की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं, जो बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देती हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में PFC ने सरकार से REC में 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 14,500 करोड़ रुपये में खरीदी थी, जिससे उसे प्रबंधन का नियंत्रण मिला था। अब यह कदम वित्तीय संस्थानों के समेकन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जब वित्त मंत्री से पूछा गया कि क्या यह कमिटी भविष्य में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मर्जर की भी सिफारिश कर सकती है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल को केवल मर्जर के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सेक्टर को इतना बड़ा और मजबूत बनाना है कि वह विकसित भारत की वित्तीय जरूरतों को आसानी से पूरा कर सके। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मंत्रालय के भीतर इस दिशा में काफी काम पहले से चल रहा है और कई विचार सामने आ चुके हैं। अब यह कमिटी उन सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन कर आगे की रणनीति तय करेगी। माना जा रहा है कि बैंकिंग सेक्टर पहले से ही अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में है, ऐसे में यह सही समय है जब इसे अगले स्तर पर ले जाने की योजना बनाई जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, डिजिटल इकोनॉमी, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप सेक्टर में पूंजी की मांग लगातार बढ़ेगी। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम की क्षमता बढ़ाना समय की जरूरत है। हाई-लेवल कमिटी का गठन इसी सोच के साथ किया जा रहा है, ताकि बैंकिंग सेक्टर केवल पारंपरिक सेवाओं तक सीमित न रहे, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का मुख्य इंजन बन सके। यह कमिटी इस बात पर भी ध्यान देगी कि वित्तीय स्थिरता बनी रहे और बैंकिंग सेवाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

38th Noida Flower Show: नोएडा में यहां एंजॉय करें बसंत उत्सव, एंट्री से तारीख तक जानें हर डिटेल

नई दिल्ली । बसंत के मौसम में पेड़-पौधौं पर रंग-बिरंगे फूलों की बहार आ जाती है. इस दौरान कई तरह के फेस्ट भी ऑर्गेनाइज किए जाते हैं. हर साल नोएडा में बसंत उत्सव फ्लावर शो होता है, जिसमें अनगिनत फूलों की वैरायटी देखने को मिलती हैं. इसके अलावा भी इसमें बहुत कुछ होता है. यह उत्सव नेचर लवर्स, फूलों की बागवानी का शौक रखने वाले लोगों के लिए बेहद खास होता है. इस बार 38वां नोएडा फ्लावर शो होने जा रहा है. जिसमें फूलों की प्रदर्षनी से लेकर स्प्रिंग गार्डन कम्पटीशन और फूलों से बने ऊंचे सेंटर पीस सेंटर ऑफ अट्रैक्शन होंगे. अगर आप फूलों के पौधे लगाने के शौकीन हैं या फिर बागवानी करते हैं तो आप भी इस फ्लावर शो में अपने पौधे लेकर जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए आज आपको रजिस्ट्रेशन करवाना होगा, जिसके लिए फ्लोरीकल्चर सोसाइटी नोएडा की साइट पर विजिट करना होगा. यहां पर आपको सारी डिटेल मिल जाएंगी. फिलहाल हम जान लेते हैं कि अगर आपको यहां विजिट करना हो तो एंट्री से लेकर डेट्स क्या हैं और क्या है वेन्यू. यहां होगा बसंत उत्सव 38वां नोएडा फ्लावर शो, बसंत उत्सव 2026 शिवालिक पार्क, सेक्टर 33 ए, नोएडा. नोएडा हाट के पास ऑर्गेनाइज होगा. यहां पहुंचने के लिए अगर आप मेट्रो ले रहे हैं तो नोएडा सिटी सेंटर सबसे पास पड़ेगा. यहां सो आप ऑटो या फिर ई-रिक्शा से शिवालिक पार्क पहुंच सकते हैं. ये हैं सेंटर ऑफ अट्रेक्शन इस फ्लावर शो यानी बसंत उत्सव को फ्लोरीकल्चर सोसाइटी नोएडा द्वारा आयोजित किया जाता है. इस बार स्प्रिंग गार्डन प्रतियोगिता रखी गई है यानी आप भी इसमें अपने फूलों वाले पौधों की प्रदर्शनी लगा सकते हैं. इसके अलावा इसमें कई तरह से रंग-बिरंगे फूल होंगे. फूलों से बने हुए कई फीट ऊंचे सेंटर पीस लोगों को यहां आने के लिए अट्रैक्ट करते हैं. आप भी अगर यहां विजिट करते हैं तो बेहतरीन एक्सपीरियंस रहेगा. अगर आप फोटो क्लिक करने के शौकीन हैं तो ये फेस्ट आपके लिए बेहतरीन रहेगी. ये उत्सव बसंत ऋतु और बागवानी का जश्न मनाने का एक शानदार मौका है. एंट्री और डेट्स की डिटेल ये बसंत उत्सव चार दिन तक चलेगा. डेट्स की बात करें तो 19 फरवरी ये ये फेस्ट शुरू हो जाएगा और 22 फरवरी 2026 तक चलेगा. एंट्री की बात करें तो यहां पर आने के लिए आपको कोई टिकट नहीं लगेगा यानी पब्लिक के लिए यहां फ्री एंट्री है. दिल्ली-एनसीआर के इवेंट्स बसंत उत्सव के अलावा भी दिल्ली-एनसीआर में कई अपकमिंग इवेंट्स आने वाले हैं. सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट मेला 31 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा. इसके अलावा अगर आपको म्यूजिक और पार्टी करना बेहद पसंद है तो 7 फरवरी को द्वारका के IICC में सिंगर अनुष्का शंकर के कॉन्सर्ट में जा सकते हैं. इसके अलावा 13 फरवरी को पलक मुछाल तालकटोरा में स्टेडियम में परफॉर्म करेंगी. स्पोर्ट्स वालों के लिए इवेंट्स की बात करें तो 2 से 14 फरवरी तक डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज एरिया में एशियन शूटिंग चैंपियनशिप ऑर्गेनाइज होगी. वहीं आप दिल्ली मैराथन एंजॉय कर सकते हैं.

08 फरवरी 2026 का पंचांग: फाल्गुन कृष्ण सप्तमी आज, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और सूर्य-चंद्र का समय

नई दिल्ली । आज 08 फरवरी 2026, रविवार को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन पूजा-पाठ, जप-तप और व्रत-अनुष्ठान के लिए विशेष महत्व रखता है। दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होती है, जिसे आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। वहीं शुभ कार्यों की योजना बनाते समय अभिजीत और अमृत काल को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाता है। आज के पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 1 बजकर 03 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं अमृत काल शाम 7 बजकर 17 मिनट से 9 बजकर 03 मिनट तक रहेगा, इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक रहती है। प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त 5 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान, योग और ईश्वर स्मरण के लिए सर्वोत्तम समय है। अशुभ काल की बात करें तो आज राहुकाल शाम 4 बजकर 51 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य से बचना चाहिए। यम गण्ड दोपहर 12 बजकर 41 मिनट से 2 बजकर 04 मिनट तक और कुलिक काल 3 बजकर 27 मिनट से 4 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 45 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट तक तथा वर्ज्यम् काल सुबह 8 बजकर 40 मिनट से 10 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। खगोलीय दृष्टि से आज सूर्य का उदय सुबह 7 बजकर 07 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय 9 फरवरी की रात 12 बजकर 18 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त 9 फरवरी को सुबह 11 बजकर 23 मिनट पर रहेगा। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य सकारात्मक फल प्रदान करते हैं, इसलिए दिन की योजना पंचांग के अनुसार बनाना लाभकारी माना जाता है। शुभ काल:अभिजीत मुहूर्त – 12:18 PM – 01:03 PMअमृत काल – 07:17 PM – 09:03 PMब्रह्म मुहूर्त – 05:30 AM – 06:18 AM अशुभ काल:राहुकाल – 04:51 PM – 06:14 PMयम गण्ड – 12:41 PM – 02:04 PMकुलिक – 03:27 PM – 04:51 PMदुर्मुहूर्त – 04:45 PM – 05:30 PMवर्ज्यम् – 08:40 AM – 10:26 AM सूर्य और चंद्रमा का समय:सूर्योदय – 07:07 AMसूर्यास्त – 06:14 PMचन्द्रोदय – 09 फरवरी, 12:18 AMचन्द्रास्त – 09 फरवरी, 11:23 AM

महिला और सिटी मजिस्ट्रेट में तीखी बहस एक घंटे के विवाद के बाद हटा अतिक्रमण

खंडवा /मध्यप्रदेश के खंडवा शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हुआ। रविंद्र नगर गेट के पास नगर निगम की टीम जब अतिक्रमण हटाने पहुंची तो वहां रह रही एक महिला ने कार्रवाई का खुलकर विरोध किया। मामला इतना बढ़ गया कि महिला और सिटी मजिस्ट्रेट के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नगर निगम का अमला अतिक्रमण हटाने के लिए जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंचा था। इस दौरान कार्यपालन यंत्री राधेश्याम उपाध्याय और सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर सिंह भी मौजूद थे। जैसे ही जेसीबी ने घर के आगे बने ओटले को तोड़ना शुरू किया, वहां खड़ी महिला अचानक मशीन के सामने आ गई और कार्रवाई रोकने की कोशिश करने लगी। महिला ने अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह वर्षों से वहां रह रही है और साफ-सफाई भी करती है। विरोध करते हुए महिला ने कहा कि तुम तोड़कर दिखाओ, यहां जितने लोग हैं सबको न फंसा दिया तो फिर बोलना। इस दौरान महिला ने सिटी मजिस्ट्रेट को धमकी भरे लहजे में कहा कि वह उनके खिलाफ उल्टा केस दर्ज करा देगी और पहले उसे गिरफ्तार किया जाए। बहस के दौरान महिला ने आसपास के मकानों की ओर इशारा करते हुए सवाल उठाया कि आगे बढ़े हुए ओटले क्यों नहीं हटाए जा रहे हैं। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह सरकारी जमीन पर किया गया अतिक्रमण है और इसे हटाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जेसीबी लगाकर कार्रवाई पूरी की जाए। करीब एक घंटे तक चले इस विवाद के बाद आखिरकार नगर निगम ने अतिक्रमण हटा दिया। हालांकि कार्रवाई के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई और बहस का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह अतिक्रमण लंबे समय से किया गया था और पहले भी नोटिस दिए जा चुके थे। प्रशासन का साफ कहना है कि शहर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।