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मुरैना में मंदिर की छत गिरने से मातम प्रसाद लेने गईं तीन मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत

मुरैना/मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां मंदिर की छत गिरने से तीन मासूम बच्चियों की मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब बच्चियां मंदिर में प्रसाद लेने गई थीं। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया और गांव में मातम का माहौल बन गया। घटना मुरैना जिले के कैलारस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एहरौली गांव की है। यहां स्थित चमड़ा माता मंदिर में रोज की तरह श्रद्धालु पूजा और प्रसाद लेने पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक मंदिर की छत भरभराकर गिर गई। छत गिरते ही वहां अफरा तफरी मच गई और लोग इधर उधर भागने लगे। मलबे के नीचे कई लोग दब गए। प्रसाद लेने गईं तीन बच्चियां छत के नीचे दब गईं। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तीनों बच्चियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इस हादसे में तीन अन्य बच्चियां और एक पति पत्नी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मलबा हटाने का काम शुरू किया गया और घायलों को बाहर निकाला गया। सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। हादसे की जानकारी मिलते ही कैलारस थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया और मलबे का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में मंदिर की जर्जर हालत सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि मंदिर की छत काफी पुरानी थी और लंबे समय से उसकी मरम्मत नहीं कराई गई थी। इस हादसे के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि मंदिर की हालत पहले से खराब थी, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। यदि समय रहते मरम्मत कराई जाती तो शायद यह हादसा टल सकता था। घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। जिन परिवारों ने अपनी मासूम बेटियों को खोया है, उनका रो रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की मांग की है।फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से भी मौके पर अधिकारियों को भेजा गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

फरीदाबाद जेल में राम मंदिर हमले के आरोपी का खून देश विरोध की साजिश का अंत या जेल सुरक्षा पर सवाल

नई दिल्ली :अयोध्या में बने राम मंदिर पर हमले की कथित साजिश से जुड़े मामले में फरीदाबाद जिला जेल से एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। जेल में बंद उन्नीस वर्षीय आरोपी अब्दुल रहमान की रविवार रात हत्या कर दी गई। अब्दुल रहमान पर आरोप था कि वह राम मंदिर परिसर पर ग्रेनेड हमले की साजिश में शामिल था। इस घटना ने न केवल जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि अंडरवर्ल्ड गैंग की खुलेआम चुनौती को भी उजागर किया है। अब्दुल रहमान को मार्च दो हजार पच्चीस में हरियाणा एसटीएफ और गुजरात एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए थे। जांच एजेंसियों का दावा था कि वह आईएसआई से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में था और अयोध्या स्थित राम मंदिर से संबंधित कई संवेदनशील वीडियो उसके मोबाइल से मिले थे। इसके बाद उसे फरीदाबाद जिला जेल में न्यायिक हिरासत में रखा गया था। रविवार रात करीब आठ बजे जेल के भीतर अचानक हिंसा भड़क उठी। बताया जा रहा है कि उसी बैरक में बंद कैदी अरुण चौधरी ने किसी नुकीली वस्तु या पत्थर से अब्दुल रहमान के सिर पर हमला कर दिया। हमले के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। गंभीर रूप से घायल अब्दुल रहमान को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस हत्या के बाद मामला और ज्यादा गंभीर तब हो गया जब कुख्यात रोहित गोदारा गैंग की ओर से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई। गैंग के सदस्य महेंद्र डेलाना ने इस हत्या की जिम्मेदारी को नैतिक समर्थन देते हुए अरुण चौधरी की खुलेआम सराहना की। पोस्ट में कहा गया कि जो भी देश के खिलाफ जाएगा उसका यही अंजाम होगा। इस बयान को सुरक्षा एजेंसियां खुलेआम धमकी और कानून व्यवस्था को चुनौती के रूप में देख रही हैं। रोहित गोदारा गैंग का नाम पहले भी कई आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। जेल के भीतर इस तरह की वारदात और उसके बाद गैंग का खुला समर्थन यह संकेत देता है कि जेलों के अंदर अपराधी नेटवर्क किस हद तक सक्रिय हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि एक हाई प्रोफाइल आतंकी मामले के आरोपी की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। उधर अब्दुल रहमान के परिवार को जैसे ही जेल से सूचना मिली वे फरीदाबाद के लिए रवाना हो गए। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया चल रही है। परिजनों का कहना है कि अब्दुल रहमान उनके परिवार का इकलौता वारिस था। दो दिन पहले ही वे उससे जेल में मिलकर लौटे थे और किसी को अंदेशा नहीं था कि इतनी बड़ी घटना हो जाएगी। इस मामले की जांच अब कई स्तरों पर की जा रही है। एक ओर हत्या की आपराधिक जांच होगी वहीं दूसरी ओर जेल प्रशासन की भूमिका भी जांच के घेरे में है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या जेलें सुधार गृह हैं या अपराध का नया मैदान बनती जा रही हैं।

मंगलवार: हनुमानजी की आराधना से कठिनाइयाँ दूर, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

नई दिल्ली। हिंदू धार्मिक परंपरा में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मंगलवार को हनुमानजी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में बाधाएँ कम होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और सुख-समृद्धि आती है। इस दिन किये गए विशेष उपायों से देवी-देवताओं की कृपा पाकर कठिनाइयों से भी मुक्ति मिल सकती है। धार्मिक आस्था के अनुसार मंगलवार को सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद हनुमान चालीसा, बजरंगबाण या मारुति स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में आने वाली परेशानियों का नाश होता है और संकट दूर हो जाते हैं। हनुमान चालीसा की भक्ति से हनुमानजी संकटों से रक्षा करते हैं और भक्त को साहस तथा शक्ति प्रदान करते हैं। इस दिन श्रीराम के नाम का स्मरण तथा जाप भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। हनुमानजी को प्रभु राम का नाम अत्यंत प्रिय है, इसलिए मंगलवार के दिन राम नाम का उच्चारण निरंतर करने से मन और बुद्धि में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आस्था अनुसार मंगलवार को तुलसी के पास दीपक जलाना भी शुभ फलदायी होता है। तुलसी के पास जल या दीपक प्रज्वलित करने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। तुलसी के उपाय से गृहस्थ जीवन में सुख-शांति तथा लक्ष्मीजी का आगमन भी माना जाता है। लाल जनेऊ अर्पण तथा विशेष विधि से पूजा करना भी मंगलमय फल देता है। मंगलवार को मंदिर में जाकर या घर में ही हनुमानजी को लाल जनेऊ अर्पित करने से कार्यों में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं और बिगड़े हुए कार्यों के सफल होने की संभावनाएँ बढ़ती हैं। अन्य उपायों में हनुमानजी के मंदिर में दीपक जलाना, लाल या केसरिया वस्त्र धारण कर पूजा करना और प्रसाद के रूप में गुड़-चना, मेवा-फल अर्पित करना शामिल है। इस प्रकार की भक्ति और उपायों से मनोबल उच्च रहता है तथा जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ बलवान उपाय के रूप में कमजोर पड़ती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार को हनुमानजी की भक्ति निरंतर करने से न केवल भौतिक जीवन की समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि मानसिक संतुलन, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। इससे घर-परिवार में समृद्धि तथा संतोषपूर्ण जीवन का अनुभव होता है, जिससे भक्त का संपूर्ण कल्याण सुनिश्चित होता है।

भारत अमेरिका समझौते ने बदली बाजार की चाल सेंसेक्स निफ्टी में शानदार तेजी

नई दिल्ली :भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में मजबूत तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर साझा बयान सामने आने के बाद निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। दिन के अंत में सेंसेक्स 485.35 अंक की तेजी के साथ 84,065.75 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 173.60 अंक चढ़कर 25,867.30 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पीएसयू बैंक रियल्टी इंडिया डिफेंस मेटल फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों का रुझान जोखिम लेने की ओर दिखाई दिया जिससे बाजार को व्यापक समर्थन मिला। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों की बात करें तो एसबीआई टाइटन टाटा स्टील अल्ट्राटेक सीमेंट इटरनल बीईएल कोटक महिंद्रा बैंक ट्रेंट इंडिगो एमएंडएम एलएंडटी अदाणी पोर्ट्स और एशियन पेंट्स में मजबूत तेजी दर्ज की गई। इन शेयरों में खरीदारी ने सेंसेक्स को ऊपरी स्तरों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं दूसरी ओर पावर ग्रिड आईटीसी एनटीपीसी आईसीआईसीआई बैंक इन्फोसिस एचडीएफसी बैंक टेक महिंद्रा और मारुति जैसे शेयरों में दबाव देखा गया और ये शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इसके बावजूद बाजार की समग्र धारणा सकारात्मक बनी रही। बाजार में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर जारी साझा बयान को माना जा रहा है। रविवार सुबह जारी इस बयान के अनुसार भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके अलावा कई उत्पादों पर ड्यूटी को शून्य रखा गया है। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है और इसी उम्मीद ने बाजार को नई ऊर्जा दी। लार्जकैप शेयरों के साथ साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 938.45 अंक की तेजी के साथ 60,441.15 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 447.25 अंक चढ़कर 17,385.90 के स्तर पर पहुंच गया। यह दर्शाता है कि बाजार में तेजी व्यापक आधार पर रही। एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च प्रमुख सुदीप शाह ने बाजार की चाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बाजार की शुरुआत मजबूत रही थी हालांकि शुरुआती कारोबार में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली। इसके बाद बाजार सीमित दायरे में कारोबार करता रहा और अंत में निफ्टी 25,867 के स्तर पर बंद हुआ। उन्होंने आगे बताया कि निफ्टी के लिए 25,970 से 26,000 का स्तर एक अहम रुकावट है। यदि निफ्टी इस स्तर को पार करता है तो आने वाले सत्रों में 26,200 और 26,400 तक जाने की संभावना बन सकती है। वहीं गिरावट की स्थिति में 25,780 से 25,750 के बीच मजबूत सपोर्ट देखा जा सकता है।कुल मिलाकर भारत अमेरिका ट्रेड डील से जुड़े सकारात्मक संकेतों ने शेयर बाजार में नई जान फूंक दी है और निवेशकों को आगे भी बाजार से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद नजर आ रही है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की गणना में बड़ा बदलाव: जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के लिए नया आधार वर्ष तय, जानें कब जारी होंगे सटीक आंकड़े

नई दिल्ली :भारतीय अर्थव्यवस्था की चाल को मापने और उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अधिक करीब लाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय MoSPI ने मुख्य आर्थिक आंकड़ों-जीडीपी सीपीआई और आईआईपी की प्रासंगिकता और सटीकता को बेहतर बनाने के लिए एक व्यापक समीक्षा पूरी कर ली है। सोमवार को संसद में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि सरकार अब नए आधार वर्ष Base Year पर आधारित आर्थिक आंकड़ों की नई सीरीज जारी करने के लिए तैयार है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य गणना के तरीकों में सुधार करना और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था विशेषकर सेवा और अनौपचारिक क्षेत्र की अधिक सटीक गणना सुनिश्चित करना है। मंत्रालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद GDP के नए आंकड़े 27 फरवरी को पेश किए जाएंगे। वहीं महंगाई को मापने वाले उपभोक्ता मूल्य सूचकांक CPI के आंकड़े 12 फरवरी को और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक IIP की नई सीरीज 28 मई को जारी की जाएगी। सरकार ने जीडीपी और आईआईपी का नया आधार वर्ष 2022-23 तय किया है जबकि सीपीआई का बेस ईयर अब 2024 होगा। आधार वर्ष को अपडेट करना इसलिए अनिवार्य हो गया था क्योंकि पुराना डेटा अब वर्तमान उपभोग पैटर्न और औद्योगिक उत्पादन की नई तकनीकों को सही ढंग से नहीं दर्शा पा रहा था। संसद में जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया तकनीकी सलाहकार समितियों की देखरेख में संपन्न हुई है। इन समितियों में प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ आरबीआई RBI के जानकार और केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। गणना की इस नई पद्धति में न केवल डेटा के स्रोतों को बढ़ाया गया है बल्कि वस्तुओं और सेवाओं के “वजन” Weightage को भी वर्तमान जरूरतों के हिसाब से अपडेट किया गया है। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से भारत के आर्थिक आंकड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF के विशेष डेटा प्रसार मानकों SDDS के और अधिक अनुरूप हो जाएंगे। नए आधार वर्ष के लागू होने से न केवल डेटा की पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि यह नीति निर्माताओं और निवेशकों को भी निवेश संबंधी निर्णय लेने में मदद करेगा। खासकर सीपीआई का बेस ईयर 2024 करने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की बदलती खपत की आदतों का सही अंदाजा लग सकेगा। सरकार के अनुसार ये सुधार देश की आर्थिक नीतियों को तैयार करने और जनकल्याणकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मील का पत्थर साबित होंगे। कुल मिलाकर नई सीरीज का आगमन यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के सांख्यिकीय आंकड़े वैश्विक स्तर पर सबसे भरोसेमंद और उपयोगी बने रहें।

बॉलीवुड में नहीं चला सिक्का, तो टीवी की दुनिया में रखा कदम, आज रोमांटिक स्टार बन गए मोहम्मद इकबाल खान

नई दिल्‍ली । हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में हर कलाकार का स्‍टार बनने का सपना पूरा नहीं होता। कई ऐसे चेहरे रहे हैं, जिन्हें फिल्मों में अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने करियर के लिए नया रास्ता चुना। इन्हीं में से एक नाम है अभिनेता मोहम्मद इकबाल खान का। आज, 10 फरवरी को अपना 44वां जन्मदिन मना रहे इकबाल खान ने भले ही फिल्मों में लंबी पारी न खेली हो, लेकिन टेलीविजन पर उन्होंने खुद को एक भरोसेमंद और लोकप्रिय रोमांटिक स्टार के रूप में स्थापित किया। छोटे पर्दे पर उनके निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखते हैं और वह लगातार टीवी इंडस्ट्री में सक्रिय बने हुए हैं। कम उम्र में ही अभिनेता बनने की ठानी कश्मीर में जन्मे और आज टीवी इंडस्ट्री के जाने-माने चेहरे बन चुके मोहम्मद इकबाल खान ने बहुत कम उम्र में ही तय कर लिया था कि उन्हें अभिनय की दुनिया में ही अपना भविष्य बनाना है। स्कूल के दिनों में वह नाटकों और स्टेज परफॉर्मेंस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे और अपनी एक्टिंग से सभी को प्रभावित भी करते थे। हालांकि पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई आकर करियर बनाना उनके लिए आसान नहीं रहा। शुरुआती दौर में इकबाल ने मॉडलिंग के जरिए खुद के खर्च पूरे किए और परिवार पर निर्भर रहने से बचते रहे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब वह पहली बार मुंबई पहुंचे, तब न तो रहने के लिए ढंग की जगह थी और न ही जेब में पर्याप्त पैसे। बावजूद इसके, उन्होंने अपने संघर्षों का जिक्र परिवार से कम ही किया और अकेले दम पर आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। ऐसे बदला कैरियर का रूख मुंबई में संघर्ष के बाद जब मोहम्मद इकबाल खान को फिल्मों में काम मिलने लगा, तो उम्मीदें भी बढ़ने लगीं। उन्हें बॉलीवुड में पहला मौका फिल्म कुछ दिल ने कहा से मिला। इसके बाद वह बुलेट: एक धमाका एक छोटी सी ईगो और फंटूस जैसी फिल्मों में नजर आए। हालांकि ये सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास असर नहीं छोड़ पाईं। इकबाल ने विद्या बालन के साथ फिल्म जलसा में भी काम किया, लेकिन बड़े पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाना उनके लिए लगातार मुश्किल साबित हो रहा था। एक के बाद एक फ्लॉप फिल्मों ने उनके आत्मविश्वास को जरूर झटका दिया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय नया रास्ता चुना। अभिनय को अलविदा कहने के बजाय इकबाल ने टेलीविजन की ओर रुख किया, जहां उन्हें लगातार लोकप्रिय शोज मिले और यहीं से उनके करियर ने नई उड़ान भरी। टेलीविजन की दुनिया में छा गए टेलीविजन की दुनिया में मोहम्मद इकबाल खान की एंट्री ने उनके करियर की दिशा ही बदल दी। उन्हें छोटे पर्दे पर पहला बड़ा ब्रेक रोमांटिक सीरियल कैसा ये प्यार है से मिला, जिसने उन्हें रातों-रात दर्शकों का चहेता बना दिया। शो की जबरदस्त सफलता के बाद इकबाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और वह लगातार करीब 19 टीवी धारावाहिकों का हिस्सा बने। काव्यांजलि में शौर्य और कहीं तो होगा में रघु जैसे किरदार निभाकर उन्होंने खासतौर पर युवा दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। इसके अलावा वारिस दिल से दिल तक एक था राजा एक थी रानी और रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी में भी उनकी मौजूदगी ने खूब सुर्खियां बटोरीं। कोविड काल के दौरान इकबाल ने कुछ समय के लिए टीवी और सोशल मीडिया से दूरी जरूर बनाई, लेकिन इसके बाद उन्होंने सीरियल न उम्र की सीमा हो के जरिए शानदार वापसी की। आज भी वह टीवी इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के कई प्रोजेक्ट्स में नजर आकर अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए हुए हैं।

नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत की बड़ी छलांग चार पायदान सुधार के साथ 45वें स्थान पर पहुंचा देश

नई दिल्ली :भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी डिजिटल और नेटवर्क से जुड़ी तैयारियों में एक बार फिर मजबूती दिखाई है। नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत ने चार पायदान की छलांग लगाते हुए 45वां स्थान हासिल किया है। यह जानकारी सरकार की ओर से साझा की गई है। इस रिपोर्ट में भारत ने न केवल अपनी रैंकिंग बेहतर की है बल्कि कई अहम वैश्विक संकेतकों में शीर्ष स्थान भी प्राप्त किया है। यह रिपोर्ट वॉशिंगटन डीसी स्थित स्वतंत्र और गैर लाभकारी शोध संस्थान पोर्टुलंस इंस्टीट्यूट द्वारा जारी की गई है। इसमें दुनिया के 127 देशों की डिजिटल टेक्नोलॉजी नेटवर्क कनेक्टिविटी और शासन व्यवस्था की तैयारियों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत का कुल स्कोर वर्ष 2024 में 53.63 था जो 2025 में बढ़कर 54.43 हो गया है। नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स में देशों का मूल्यांकन चार प्रमुख आधारों पर किया जाता है। इनमें टेक्नोलॉजी लोग शासन व्यवस्था और प्रभाव शामिल हैं। इन चार स्तंभों के अंतर्गत कुल 53 संकेतकों का अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि भारत ने कई क्षेत्रों में दुनिया के अन्य देशों से बेहतर प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत टेलीकॉम सेवाओं में सालाना निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े वैज्ञानिक शोध पत्र आईटी और संचार सेवाओं के निर्यात और ई कॉमर्स कानून जैसे क्षेत्रों में पहले स्थान पर रहा है। इसके अलावा फाइबर इंटरनेट कनेक्शन देश के भीतर मोबाइल इंटरनेट उपयोग और अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट क्षमता के मामले में भारत को दूसरा स्थान मिला है। घरेलू बाजार के आकार और आय असमानता जैसे संकेतकों में भारत तीसरे स्थान पर रहा है। संचार मंत्रालय ने कहा कि भारत की नेटवर्क से जुड़ी तैयारियां उसके आय स्तर से भी बेहतर हैं। कम आय वाले मध्यम वर्ग के देशों की श्रेणी में भारत दूसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि देश में डिजिटल समावेशन और तकनीकी पहुंच को दर्शाती है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हाल ही में कहा था कि भारत में दुनिया का सबसे सस्ता डेटा उपलब्ध है और डेटा का उपयोग भी वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक किया जा रहा है। मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते देश में 120 करोड़ से अधिक मोबाइल उपयोगकर्ता हैं। सरकार का लक्ष्य है कि जून तक 4जी नेटवर्क देश के हर गांव तक पहुंच जाए। सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने अब तक 97068 4जी साइट्स स्थापित की हैं जिनमें से 93511 साइट्स चालू हो चुकी हैं। बीएसएनएल आने वाले महीनों में अपने सभी 4जी टावरों को 5जी में बदलने की योजना पर काम कर रही है। देश में 5जी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5जी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं और वर्तमान में ये सेवाएं देश के 99.9 प्रतिशत जिलों में उपलब्ध हैं। टेलीकॉम कंपनियों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कुल 5.08 लाख 5जी बेस ट्रांससीवर स्टेशन स्थापित किए हैं।नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत की यह प्रगति डिजिटल इंडिया पहल मजबूत टेलीकॉम नेटवर्क और तकनीकी नवाचार का प्रमाण है। यह उपलब्धि वैश्विक मंच पर भारत की डिजिटल शक्ति को और मजबूत बनाती है।

महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव में BJP का दबदबा कायम, शिंदे सेना और NCP भी मजबूत स्थिति में

नई दिल्‍ली । महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के बाद अब जिला परिषद चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। शुरुआती रुझानों के अनुसार, भाजपा 145 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना 85 सीटों पर और अजित पवार गुट की एनसीपी करीब 80 सीटों पर आगे चल रही है। बता दें कि राज्यभर में कुल 731 जिला परिषद और 1462 पंचायत समिति सीटों के लिए रविवार को मतदान कराया गया था, जिसमें लगभग 2 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यह चुनाव पहले 5 फरवरी को प्रस्तावित थे, लेकिन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के कारण इन्हें स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद 8 फरवरी को मतदान संपन्न हुआ और अब इसके नतीजे सामने आ रहे हैं। भाजपा को सांगली, सतारा और पनवेल में बढ़त अब तक सामने आए रुझानों के मुताबिक, भाजपा ने सांगली, सतारा और पनवेल जैसे अहम क्षेत्रों में बढ़त बना ली है। दूसरी ओर, अजित पवार का पारंपरिक गढ़ माने जाने वाले बारामती इलाके में एनसीपी का प्रदर्शन मजबूत नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एनसीपी को यह बढ़त अजित पवार के हालिया निधन के बाद बनी सहानुभूति के चलते मिली हो सकती है। अजित पवार को पुणे और मराठवाड़ा क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में शुमार थे और इन इलाकों में उनकी गहरी पकड़ रही है। ऐसे में उनके निधन के बाद मतदाताओं में भावनात्मक जुड़ाव का असर चुनावी नतीजों में झलकता दिखाई दे रहा है। विपक्ष को करारा झटका 731 जिला परिषद सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरती दिख रही है। महायुति के सहयोगी दलों में एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना दूसरे स्थान पर है, जबकि अजित पवार की एनसीपी तीसरे नंबर पर बनी हुई है। विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार संघर्ष कर रहे विपक्ष को इन नतीजों से एक बार फिर करारा झटका लगा है। कांग्रेस महज 30 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना केवल 21 सीटों पर ही बढ़त दर्ज कर पाई है। वहीं पुणे और सोलापुर जैसे प्रमुख जिलों में एनसीपी ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया है। सोलापुर-पुणे में एनसीपी का दबदबा, सतारा में BJP ने बनाई बढ़त जिला परिषद चुनावों के रुझानों में सोलापुर और पुणे जिलों में एनसीपी का प्रदर्शन काफी मजबूत नजर आ रहा है। सोलापुर में पार्टी अब तक 24 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस यहां अपना खाता खोलने में भी नाकाम रही है। पुणे जिले में भी एनसीपी को बढ़त मिलती दिख रही है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक सहानुभूति लहर से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं सतारा जिले में भाजपा ने स्पष्ट बढ़त हासिल की है। यहां भाजपा 32 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि एनसीपी 17 और शिवसेना 10 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

Elara Securities: ने UGRO Capital को दी BUY रेटिंग 46 प्रतिशत तक तेजी की संभावना

Elara Securities: नई दिल्ली:  ब्रोकरेज फर्म एलारा कैपिटल ने यूग्रो कैपिटल पर कवरेज शुरू करते हुए स्टॉक को BUY रेटिंग दी है और अनुमान लगाया है कि शेयर में करीब 46 प्रतिशत तक तेजी आ सकती है। ब्रोकरेज ने यूग्रो कैपिटल के शेयर को 155 रुपये पर खरीदने की सलाह दी है और टारगेट प्राइस 226 रुपये निर्धारित किया है। INDORE HIGH COURT: बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश एलारा का कहना है कि कंपनी अब ग्रोथ से अधिक मुनाफे पर फोकस कर रही है। इसके तहत कंपनी कम यील्ड वाले एसेट्स को कम करने, उच्च लागत वाले कर्ज को घटाने, लागत अनुकूलन और हाई-यील्ड एसेट्स की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर देगी। ब्रोकरेज के मुताबिक इस रणनीति से कंपनी के रिटर्न ऑन एसेट RoA में सुधार होगा और स्टॉक की वैल्यूएशन री-रेटिंग हो सकती है। यूग्रो कैपिटल एक प्राइवेट इक्विटी समर्थित एमएसएमई लेंडर है जिसने टेक्नोलॉजी आधारित प्लेटफॉर्म के दम पर पिछले पांच वर्षों में AUM में 69 प्रतिशत की मजबूत सीएजीआर दर्ज की है। कंपनी का बिजनेस मॉडल प्राइम और उभरते बाजारों में फैले विविध एमएसएमई ग्राहकों को कवर करता है जिससे यह आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच भी अपेक्षाकृत स्थिर बना रहता है। INDORE HIGH COURT: बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश हालांकि सोमवार को शेयर 7 प्रतिशत से अधिक टूटकर 137 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहे थे लेकिन एलारा ने इस शेयर में बुलिश नजरिया जताया है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के RoA वित्त वर्ष 2026 के 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 2028 तक 3.4 प्रतिशत हो सकते हैं। यूग्रो कैपिटल की देशभर में मजबूत वितरण मौजूदगी है जिसमें ब्रांच आधारित नेटवर्क, इकोसिस्टम चैनल और पेमेंट प्लेटफॉर्म शामिल हैं। पिछले दो वर्षों में कंपनी ने 300 नई ब्रांच खोली हैं जिससे AUM में इजाफा होने की संभावना बढ़ गई है। इसके अलावा प्रोफेक्टस और एम्बेडेड फाइनेंस प्लेटफॉर्म के अधिग्रहण से भी स्केल बढ़ेगा। ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी की टेक-ड्रिवन क्रेडिट असेसमेंट क्षमता के कारण NPA पिछले पांच साल में 2.5 प्रतिशत से नीचे रहा है। भविष्य में NPA करीब 2.7 प्रतिशत और क्रेडिट कॉस्ट 1.7 प्रतिशत के आसपास स्थिर रहने की उम्मीद है। फंडिंग कॉस्ट में कमी, ऑपरेटिंग लीवरेज और हाई-यील्ड पोर्टफोलियो से आने वाले वर्षों में कमाई और वैल्यूएशन दोनों में सुधार होने की संभावना है। यूग्रो कैपिटल लिमिटेड एक डेटा-टेक आधारित NBFC है जो एमएसएमई और छोटे कारोबारों को फाइनेंस देने में विशेषज्ञता रखती है। उन्नत डेटा एनालिटिक्स और मजबूत वितरण नेटवर्क के जरिए कंपनी भारत में छोटे व्यवसायों की बड़ी क्रेडिट जरूरत को पूरा करती है। कंपनी देशभर के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को उनकी जरूरत के मुताबिक कर्ज समाधान उपलब्ध कराती है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय स्टॉक में निवेशकों के लिए यह अवसर है क्योंकि कंपनी के फोकस में बदलाव और उच्च RoA के संकेत स्टॉक की कीमत में तेज बढ़त ला सकते हैं। निवेशक और ट्रेडर इसे टारगेट प्राइस और संभावित अपसाइड के नजरिए से देख रहे हैं।

INDORE HIGH COURT: बाइक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल करना गैरकानूनी: इंदौर हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश

  INDORE HIGH COURT: इंदौर । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर खंडपीठ से एक महत्वपूर्ण और दिशा-निर्देशात्मक फैसला सामने आया है, जिसमें बाइक का सार्वजनिक परिवहन जैसे उपयोग पर स्पष्ट रूप से रोक लगाई गई है। न्यायालय ने कहा है कि धारा 66 के तहत किसी भी वाहन को बिना परमिट सार्वजनिक परिवहन के लिए इस्तेमाल करना अवैध है और ऐसे उपयोग को रोकना राज्य सरकार और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है। मामला यह है कि इंदौर शहर सहित पूरे प्रदेश में ओला, उबर, रैपिडो जैसी ट्रांसपोर्ट एग्रीगेटर कंपनियां दो-पहिया वाहनों बाइक का उपयोग सार्वजनिक परिवहन की तरह कर रही हैं, जबकि इन वाहनों के पास किसी भी प्रकार का पब्लिक ट्रांसपोर्ट परमिट नहीं है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे प्रयोग से न केवल कानून का उल्लंघन होता है, बल्कि सड़क सुरक्षा और यात्री संरक्षण के मानकों को भी खतरा होता है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे कानून के तहत परमिट नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और बिना वैध अनुमति वाले वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में उपयोग से रोकें। आदेश में यह भी कहा गया कि परिवहन विभाग को नियमों के अनुरूप परमिट जारी करने, मॉनिटरिंग और अनुपालन की प्रक्रिया को सशक्त बनाना होगा, ताकि कानून का सही ढंग से पालन हो सके। दरअसल, मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधान स्पष्ट हैं कि सार्वजनिक परिवहन के लिए वाहन का उपयोग तभी किया जा सकता है जब वह वैध परिवहन परमिट/लाइसेंस धारक हो। बिना परमिट वाहन को जनता के आवागमन में शामिल करना गैरकानूनी और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरे से भरा माना जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निजी वाहनों का सार्वजनिक परिवहन की तरह उपयोग कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है, चाहे वह तकनीकी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही क्यों न होता हो। स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग को आदेश दिया गया है कि वे ऐसी गतिविधियों पर निगरानी रखें और किसी भी निजी वाहन के बिना परमिट पब्लिक ट्रांसपोर्ट संचालन को रोका जाए। अदालत का यह आदेश राज्य में सार्वजनिक परिवहन सुरक्षा के मानकों की पूर्ति और सड़कों पर नियम-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जारी किया गया है। विशेष रूप से हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म इस तरह के वाहनों को सार्वजनिक परिवहन के रूप में संचालित करने की अनुमति चाहता है, तो उसे परिवहन नियमों के अनुकूल वैध परमिट और लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इलेक्ट्रॉनिक और ऐप-आधारित मोबिलिटी सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। अदालत की यह टिप्पणी कानून-व्यवस्था और सड़क यातायात नियमों के स्पष्ट पालन को सुनिश्चित करने के प्रयासों का हिस्सा है।