KARNATAKA POLITICS: ’80-90 MLA ने हाई कमांड से डीके शिवकुमार को CM पद का मौका देने का किया अनुरोध’, दिल्ली रवाना हुए डिप्टी सीएम

KARNATAKA POLITICS: नई दिल्ली । कर्नाटक में सीएम की कुर्सी को लेकर बयानबाजी तेज है। कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने कहा कि पार्टी के कम से कम 80 विधायकों ने मुख्यमंत्री पद के लिए उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का नाम हाई कमांड को दिया है। इस बीच, कर्नाटक के डिप्टी CM D K शिवकुमार दो दिनों की नई दिल्ली की यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं, दिल्ली में उनका पार्टी के शीर्ष नेताओं से मिलने का कार्यक्रम है। खुलकर नहीं बोल रहे डीके शिवकुमार उनके इस दौरे ने एक बार फिर राज्य में सीएम की कुर्सी में बदलाव की अटकलों को हवा दे दी है। हालांकि, डीके शिवकुमार इस दौरे के बारे में कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहे हैं। नई दिल्ली जाने से पहले इतना ही कहा कि डिप्टी सीएम होने के साथ-साथ वो प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उस नाते हाई कमांड से मिलने का अवसर मिलता रहता है। डीके शिवकुमार को देना चाहिए मौका- हुसैन डीके शिवकुमार को सीएम बनाए जाने के सवाल पर कांग्रेस विधायक हुसैन ने कहा, ‘हमने यह मामला हाई कमांड पर छोड़ दिया है। 80-90 विधायकों ने हाई कमांड से डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए मौका देने का अनुरोध किया है। हम एक अनुशासित पार्टी हैं और हमें शालीनता से व्यवहार करना होगा। राजनीति में अनुशासन से लेना होता है काम इसके साथ ही कांग्रेस विधायक ने कहा, ‘हमें यह पसंद नहीं है कि वह (यतींद्र सिद्धारमैया) बार-बार अपने पिता के पक्ष में बोलकर हाई कमांड को शर्मिंदा कर रहे हैं। हर पिता अपने बेटे से प्यार करता है और बेटा अपने पिता से, लेकिन राजनीति में हमें अनुशासन से काम लेना होता है। इस तरह के बयानों से दूसरों को उकसाना नहीं चाहिए। डीके शिवकुमार को इसी कार्यकाल में दिया जाए मौका इकबाल हुसैन ने कहा, ‘हम सभी के मन में यही इच्छा है कि डीके शिवकुमार को मौका दिया जाए। हर कोई यही चाहता है, लेकिन हमें बयानबाजी से कोई भ्रम पैदा नहीं करना चाहिए, इसीलिए सब चुप हैं और कुछ लोग आपस में बात कर रहे हैं। मैं खुले दिल से, जैसा कि मैंने पहले दिन से कहा है कि यही मेरी इच्छा है कि डीके शिवकुमार को इसी कार्यकाल में मौका दिया जाए।’ जानिए क्या बोले दूसरे विधायक कांग्रेस एमएलसी चन्नाराज हट्टीहोली ने भी कहा, ‘मेरी इच्छा है कि डीके शिवकुमार इस कार्यकाल में जल्द ही मुख्यमंत्री बनें।’ पिछले हफ्ते, यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा था कि कांग्रेस हाई कमांड ने सिद्धारमैया को पूरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहने की हरी झंडी दे दी है। यतींद्र द्वारा अपने पिता के पक्ष में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डीके शिवकुमार ने कहा, ‘मैं उनकी हर बात का सम्मानपूर्वक स्वागत करता हूं। चूंकि उन्होंने इस तरह से बात की है जैसे वे हाई कमांड के प्रमुख हों, तो आइए हम उन्हें उसी रूप में स्वीकार करें। सीएम की कुर्सी को लेकर नवंबर 2025 से चालू है खींचतान कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान नवंबर 2025 में शुरू हुई, जब सरकार ने अपने पांच वर्षीय कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ-साथ गृह मंत्री जी परमेश्वर भी शीर्ष पद की दौड़ में शामिल हैं।
electricity distribution company: भोपाल वृत्त के 3 लाख उपभोक्ताओं को जनवरी में 2 करोड़ से ज्यादा की राहत, स्मार्ट मीटर से मिला टाइम ऑफ डे छूट का लाभ

electricity distribution company: भोपाल। स्मार्ट मीटरिंग पहल के तहत भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने जनवरी 2026 में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। कंपनी के कार्य क्षेत्र में कुल 5 लाख 20 हजार 457 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनके मासिक बिजली बिल में टाइम ऑफ डे छूट का लाभ दिया गया है। इस दौरान उपभोक्ताओं को कुल 3 करोड़ 61 लाख 26 हजार रुपये की रियायत प्रदान की गई। इसमें सबसे बड़ा लाभ भोपाल शहरी और ग्रामीण वृत्त के उपभोक्ताओं को मिला है। इन दोनों वृत्तों के 2 लाख 97 हजार 813 उपभोक्ताओं को केवल दिन के टैरिफ में 2 करोड़ 10 लाख 66 हजार रुपये की छूट दी गई। यह छूट स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी बिजली खपत के आधार पर प्रदान की गई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह छूट सरकारी सब्सिडी को छोड़कर दी गई है। यानी उपभोक्ताओं को जो भी राहत मिली है वह सीधे स्मार्ट मीटर और टाइम ऑफ डे टैरिफ व्यवस्था के कारण मिली है। यह पहल उपभोक्ताओं को दिन के समय खासकर सोलर ऑवर में बिजली उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लागू की गई है जिसमें 20 प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाने में सहयोग करें और इससे जुड़ी किसी भी तरह की आशंका से बचें। कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह सुरक्षित सटीक और पारदर्शी प्रणाली पर आधारित हैं। इनमें रीडिंग और बिलिंग में किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं रहती। स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत पर बेहतर नियंत्रण देने में भी मदद करते हैं। मोबाइल ऐप के जरिए उपभोक्ता रियल-टाइम डेटा देख सकते हैं और यह समझ सकते हैं कि किस समय अधिक बिजली की खपत हो रही है। इससे न केवल बिजली बचाने में मदद मिलती है बल्कि अनावश्यक खर्च पर भी रोक लगती है। इसके अलावा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को ऊर्जा की गुणवत्ता की जानकारी भी देते हैं जिससे वे अपनी खपत की आदतों में सुधार कर सकते हैं। उपभोक्ता किसी भी समय और कहीं से भी मोबाइल एप के माध्यम से अपनी बिजली खपत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर न सिर्फ उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद हैं बल्कि इससे ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। बिजली की बचत से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है जिससे पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कुल मिलाकर स्मार्ट मीटरिंग और टाइम ऑफ डे छूट योजना ने जनवरी 2026 में भोपाल क्षेत्र के लाखों उपभोक्ताओं को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाया है और भविष्य में इससे और अधिक उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
SCHOOL ROOF COLLAPSED: स्कूल परिसर में अचानक गिरी छत, लंबे समय से नहीं हो रहा था उपयोग

HIGHLIGHTS: श्योपुर के सरकारी स्कूल में किचन शेड की छत गिरी दो साल से जर्जर हालत में था शेड घटना के समय बच्चे कक्षाओं में थे कोई जनहानि नहीं, बड़ा हादसा टला जर्जर भवनों की जांच की मांग SCHOOL ROOF COLLAPSED: ग्वालियर। श्योपुर जिले के श्री जी की गांवड़ी स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में मंगलवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बता दें कि स्कूल परिसर के बाहर बने किचन शेड की छत अचानक भरभराकर गिर गई। राहत की बात यह रही कि घटना के समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। Collectorate Public Hearing: 13 साल की नौकरी के बाद हटाई गई दिव्यांग महिला, कलेक्टर के सामने फूट-फूटकर रोई स्कूल समय में हुई घटना, बच्चे कक्षाओं में थे विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य बाबूलाल बिसरिया ने बताया कि हादसे के समय स्कूल में नियमित कक्षाएं संचालित हो रही थीं और सभी बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में मौजूद थे। किचन शेड स्कूल भवन से अलग बाहर की ओर बना हुआ है, इसी कारण बच्चे और शिक्षक इसकी चपेट में आने से बच गए। दो वर्षों से जर्जर था किचन शेड स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार किचन शेड पिछले करीब दो वर्षों से जर्जर हालत में था। इसकी खराब स्थिति के चलते इसका उपयोग भी बंद कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद न तो मरम्मत कराई गई और न ही इसे हटाने की कोई कार्रवाई की गई। अचानक छत गिरने के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे। MORENA NEWS: विजयगढ़ पंचायत में मनरेगा–वाटरशेड योजनाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा, 2 करोड़ के घोटाले के आरोप प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग घटना के बाद कुछ देर तक स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा। ग्रामीणों और स्कूल स्टाफ ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल परिसर में मौजूद जर्जर भवनों और संरचनाओं का समय रहते निरीक्षण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। फिलहाल घटना की सूचना संबंधित शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को दे दी गई है। अन्य जर्जर निर्माणों की जांच की भी मांग उठी है।
BUDGET 2026: 2026-27 के बजट प्रस्तावों में हर वर्ग के विकास पर फोकस: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा बजट

BUDGET 2026: भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में राज्य के सभी क्षेत्रों और समाज के हर वर्ग के विकास तथा कल्याण का विशेष ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री ने बजट प्रस्तावों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप और संतुलित बताते हुए उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा के दृष्टिकोण की सराहना की। मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बजट निर्माण में लगे विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के परिश्रम की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि यह प्रदेश के विकास की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई अपर मुख्य सचिव (वित्त) श्री मनीष रस्तोगी सहित वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रेजेंटेशन के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं विकास कार्यों सामाजिक कल्याण अधोसंरचना शिक्षा स्वास्थ्य कृषि और रोजगार से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। बजट में गरीब किसान महिला युवा और श्रमिक वर्ग के हितों को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही औद्योगिक विकास निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने वाले प्रस्तावों को भी इसमें शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री के समक्ष प्रेजेंटेशन के बाद मंत्रि-परिषद के समक्ष भी बजट प्रस्तावों का प्रस्तुतीकरण किया गया जिसे कैबिनेट ने अनुमोदित कर दिया है। मंत्रि-परिषद से मंजूरी मिलने के बाद अब यह बजट 18 फरवरी को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह बजट विकासोन्मुख होने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन को भी ध्यान में रखेगा। इसमें राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने आधारभूत ढांचे के विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देने पर जोर रहेगा। प्रदेश सरकार के इस बजट को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि 2026-27 का बजट मध्य प्रदेश के विकास को नई दिशा देगा और राज्य को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
BSE SHARE NEWS: BSE के Q3 नतीजों ने मचाया धमाल शेयर ने बनाया नया रिकॉर्ड..

BSE SHARE NEWS: नई दिल्ली । बीएसई के शेयरों ने तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद बाजार में जबरदस्त हलचल मचा दी है। एक्सपायरी डेट सितंबर 2025 में बदले जाने के बावजूद वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही बीएसई के लिए बेहद मजबूत साबित हुई है। शानदार ट्रेडिंग आंकड़ों और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के चलते कई ब्रोकरेज हाउस ने अपने टारगेट प्राइस बढ़ा दिए हैं। इसी का असर रहा कि आज शुरुआती कारोबार में बीएसई के शेयरों में छह फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। कारोबार के दौरान बीएसई का शेयर 6.81 फीसदी की उछाल के साथ 3188.40 रुपये के रिकॉर्ड हाई स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली की जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन इसके बावजूद शेयर मजबूत स्थिति में बना हुआ है। फिलहाल बीएसई का शेयर 6.25 फीसदी की तेजी के साथ 3171.60 रुपये पर कारोबार कर रहा है। एनालिस्ट्स की राय भी बीएसई के पक्ष में दिखाई दे रही है। इसे कवर करने वाले 16 एनालिस्ट्स में से 12 ने शेयर पर खरीद की सलाह दी है जबकि चार ने होल्ड रेटिंग दी है। खास बात यह है कि किसी भी एनालिस्ट ने शेयर बेचने की सिफारिश नहीं की है। यूबीएस जेफरीज और नुवामा जैसी बड़ी ब्रोकरेज फर्मों ने बीएसई के टारगेट प्राइस में इजाफा किया है। दिसंबर 2025 की तिमाही बीएसई के लिए काफी दमदार रही है। तिमाही आधार पर कंपनी का टर्नओवर 30 फीसदी बढ़ा है। औसत दैनिक नोशनल टर्नओवर 28 फीसदी की वृद्धि के साथ 210 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जबकि औसत दैनिक प्रीमियम टर्नओवर 29.7 फीसदी बढ़कर 19459 करोड़ रुपये हो गया। एक्सचेंज के ट्रांजैक्शन चार्ज से होने वाली आय के चलते रेवेन्यू परफॉर्मेंस बाजार की उम्मीदों से बेहतर रही। बीएसई की ऑपरेटिंग इनकम तिमाही आधार पर 16 फीसदी बढ़कर 1244 करोड़ रुपये हो गई है जबकि ऑपरेटिंग प्रॉफिट 13 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 778 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि रेगुलेटरी कंट्रीब्यूशन बढ़ने से मार्जिन पर थोड़ा दबाव जरूर देखने को मिला है। रेगुलेटरी कंट्रीब्यूशन तिमाही आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 187 करोड़ रुपये हो गया जिससे मार्जिन 64.7 फीसदी से घटकर 62.5 फीसदी पर आ गया। ब्रोकरेज सेंटिमेंट की बात करें तो यूबीएस ने बीएसई पर बाय रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3650 रुपये कर दिया है। यूबीएस का कहना है कि ज्यादा लागत के चलते कंपनी अपने प्रॉफिट टारगेट से थोड़ी चूकी जरूर है लेकिन शेयर प्राइस में मजबूती रेवेन्यू ग्रोथ और प्रीमियम एवरेज डेली टर्नओवर की मजबूती इसे सपोर्ट कर रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एसटीटी रेट बढ़ने का ऑप्शन वॉल्यूम पर असर पहले की आशंका से कम हो सकता है। जेफरीज ने बीएसई को होल्ड रेटिंग दी है लेकिन टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3050 रुपये कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि 610 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट उम्मीद से बेहतर रहा है। हालांकि नए प्रोडक्ट्स को लेकर अनिश्चितता FY2029 के बाद ग्रोथ के लिए चुनौती बन सकती है। नुवामा ने बीएसई पर बाय रेटिंग देते हुए टारगेट प्राइस 3760 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज के मुताबिक एक्सपायरी डेट बदलने के बावजूद बीएसई ने इंडेक्स ऑप्शंस में मजबूत मार्केट शेयर हासिल किया है जिससे रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में तेज उछाल देखने को मिला है। कुल मिलाकर मजबूत नतीजों और सकारात्मक ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के चलते बीएसई का शेयर आने वाले समय में निवेशकों के रडार पर बना रह सकता है।
AI ALERT: AI से इंसानों की 99% नौकरियों पर संकट, बेरोज़गारी का स्तर होगा अभूतपूर्व: एक्सपर्ट की चेतावनी..

AI ALERT: नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि इंसानी जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, नौकरी, बिजनेस, हेल्थकेयर और रोजमर्रा के कामों में AI की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। लेकिन इसी तेजी के बीच अब AI को लेकर एक ऐसी चेतावनी सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया में चिंता बढ़ा दी है। मशहूर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्चर और कंप्यूटर साइंटिस्ट डॉ. रोमन याम्पोल्स्की ने दावा किया है कि आने वाले महज एक साल के भीतर AI इंसानों की करीब 99 फीसदी नौकरियों को खत्म कर सकता है। डॉ. याम्पोल्स्की का कहना है कि AI अब सिर्फ इंसानों की मदद करने वाला टूल नहीं रहेगा, बल्कि वह तेजी से इंसानों को रिप्लेस करने की दिशा में बढ़ रहा है। उनके मुताबिक ऐसा कोई भी इंसानी काम नजर नहीं आता, जिसे पूरी तरह ऑटोमेट न किया जा सके। जिस रफ्तार से AI विकसित हो रहा है, वह नौकरी बाजार में अभूतपूर्व उथल-पुथल ला सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि आईटी, कस्टमर सपोर्ट, डेटा एनालिसिस, कंटेंट क्रिएशन, अकाउंटिंग और यहां तक कि रिसर्च जैसे सेक्टर्स भी AI के प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में इंसानी भूमिका तेजी से कम हो सकती है। डॉ. याम्पोल्स्की के अनुसार, वर्ष 2045 तक दुनिया एक ऐसे टेक्नोलॉजिकल मोड़ पर पहुंच सकती है, जहां से वापस लौटना संभव नहीं होगा। आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और AI के दीर्घकालिक प्रभावों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले बदलाव पिछले सभी इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन से बिल्कुल अलग और कहीं ज्यादा गहरे होंगे। AI सिर्फ नौकरियों को नहीं बदलेगा, बल्कि समाज की पूरी संरचना को प्रभावित करेगा। उन्होंने यह भी आगाह किया कि तकनीक जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, वह रोजगार, अर्थव्यवस्था और इंसानी नियंत्रण को लेकर बड़े सवाल खड़े कर सकती है। डॉ. याम्पोल्स्की ने इसे ऐसा दौर बताया, जहां तकनीकी फैसले इंसानी फैसलों से कहीं आगे निकल सकते हैं। उल्लेखनीय है कि डॉ. याम्पोल्स्की लातविया के मूल निवासी हैं और वर्तमान में अमेरिका की लुइसविले यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। AI सेफ्टी और संभावित जोखिमों पर वे दुनिया के अग्रणी विशेषज्ञों में शामिल हैं और इस विषय पर 100 से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रकाशित कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि अगले पांच वर्षों में लगभग हर तरह के फिजिकल लेबर को ऑटोमेट किया जा सकता है। उनके मुताबिक हम एक ऐसी दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं, जहां बेरोज़गारी का स्तर पहले कभी नहीं देखा गया होगा। यह सिर्फ 10 या 20 फीसदी बेरोज़गारी की बात नहीं, बल्कि 99 फीसदी तक पहुंचने की आशंका है। हालांकि डॉ. याम्पोल्स्की ने यह भी बताया कि भविष्य में कुछ नौकरियां बच सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे काम जहां इंसानी मौजूदगी जरूरी मानी जाती है, वे पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। उदाहरण के तौर पर, कुछ लोग व्यक्तिगत भरोसे या पसंद के कारण इंसानी अकाउंटेंट या सलाहकार रखना चाहेंगे। इसके अलावा हाथ से बनाए गए उत्पादों और कारीगरी का एक सीमित लेकिन खास बाजार बना रहेगा।उन्होंने यह भी कहा कि AI की निगरानी और रेगुलेशन से जुड़ी नौकरियां भविष्य में बनी रह सकती हैं, हालांकि लंबे समय में AI को पूरी तरह नियंत्रित कर पाना बेहद मुश्किल होगा।
BHOPAL BIKE STUNT: भोपाल की सड़कों पर मौत से खेल: चलती बाइक पर खड़े होकर नाबालिग का खतरनाक स्टंट, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

BHOPAL BIKE STUNT: भोपाल। राजधानी भोपाल की सड़कों पर यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ताजा मामला एक ऐसे वायरल वीडियो का है, जिसने आम लोगों से लेकर प्रशासन तक को चौंका दिया है। इस वीडियो में वीआईपी चौराहे से इकबाल मैदान की ओर जाती सड़क पर एक नाबालिग बच्चा चलती दोपहिया गाड़ी पर खड़े होकर जानलेवा स्टंट करता नजर आ रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बाइक पर पीछे बैठा बच्चा सीट पर खड़ा है और संतुलन बनाते हुए खतरनाक करतब दिखा रहा है, जबकि बाइक चालक पूरी तरह बेफिक्र होकर वाहन चला रहा है। सड़क पर अन्य वाहन भी चल रहे हैं और जरा सी चूक किसी बड़े हादसे में बदल सकती थी। यह दृश्य न सिर्फ डराने वाला है, बल्कि यह सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह मामला मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। नाबालिग को इस तरह खुलेआम स्टंट करने देना उसकी जान से खिलवाड़ है, साथ ही यह अन्य वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है। नियमों के अनुसार, दोपहिया वाहन पर इस तरह का स्टंट और नाबालिग की सुरक्षा से समझौता करना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही लोगों में आक्रोश देखने को मिल रहा है। कई यूजर्स ने ट्रैफिक पुलिस से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ चालान काटना ही काफी नहीं, बल्कि ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की लापरवाही न करे। गौरतलब है कि भोपाल में पिछले कुछ समय से इस तरह के स्टंट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कुछ दिन पहले वीआईपी रोड पर एक बाइक पर सात लोग सवार होकर स्टंट करते पाए गए थे। इसके बावजूद ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। अब सवाल यह उठता है कि क्या ट्रैफिक पुलिस इस वायरल वीडियो के आधार पर वाहन चालक की पहचान कर पाएगी और क्या नाबालिग को खतरे में डालने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई होगी। राजधानी की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन को अब सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि ऐसे जानलेवा स्टंट पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।
Collectorate Public Hearing: 13 साल की नौकरी के बाद हटाई गई दिव्यांग महिला, कलेक्टर के सामने फूट-फूटकर रोई

HIGHLIGHTS: दिव्यांग महिला ने 13 साल बाद नौकरी से हटाने का लगाया आरोप हीरा कॉलोनी में सड़क निर्माण को लेकर विवाद कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए अतिक्रमण और सड़क निर्माण की शिकायतें भी आईं छात्रवृत्ति भुगतान के आदेश जारी Collectorate Public Hearing: ग्वालियर। दतिया कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया। इंदरगढ़ स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ एक महिला कर्मचारी कलेक्टर स्वप्निल बानखेड़े के सामने फूट-फूटकर रो पड़ी। महिला ने आरोप लगाया कि 13 वर्षों तक सेवा देने के बाव जूद उसे बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से हटा दिया गया। DABRA STAMPEDE NEWS: डबरा में कलश वितरण के दौरान भगदड़, महिला की मौत; बच्ची समेत 8 श्रद्धालु घायल महिला ने बताया कि वह और उसका पति दोनों दिव्यांग हैं और लंबे समय से स्वास्थ्य केंद्र की महिला वार्ड में कार्यरत हैं। बीमारी के चलते वह पिछले आठ दिनों से ड्यूटी पर नहीं जा सकी, इसी को आधार बनाकर उसे सेवा से हटा दिया गया। महिला ने कलेक्टर से पुनः कार्य पर बहाल करने की गुहार लगाई। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए। शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत जनसुनवाई में ग्राम राजापुर निवासी अंकुश अहिरवार ने शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि मान सिंह अहिरवार द्वारा उनके मकान के सामने अवैध निर्माण किया जा रहा है। विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया। कलेक्टर ने जांच कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। MORENA NEWS: विजयगढ़ पंचायत में मनरेगा–वाटरशेड योजनाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा, 2 करोड़ के घोटाले के आरोप हीरा कॉलोनी में सड़क निर्माण पर सवाल वार्ड नंबर 33 हीरा कॉलोनी के रहवासियों ने शिकायत की कि गली नंबर 2 में 20 फुट चौड़ी आरसीसी सड़क स्वीकृत होने के बावजूद अतिक्रमण के कारण केवल 15 फुट सड़क बनाई जा रही है। कलेक्टर ने नगर पालिका को जांच के आदेश दिए। छात्रवृत्ति न मिलने से परेशान छात्र ओबीसी वर्ग के छात्रों ने भी जनसुनवाई में शिकायत की कि सत्र 2022-23 और 2023-24 की छात्रवृत्ति अब तक नहीं मिली है। कलेक्टर ने संबंधित विभाग को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर स्वप्निल बानखेड़े ने कहा कि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध समाधान प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। NAGAR PALIKA ALLEGATION: पूर्व विधायक ने भिंड नगर पालिका पर लगाए गंभीर आरोप: बोले- विकास नहीं, सिर्फ कागजी काम”
Semi-nude protest: रिक्त पदों पर भर्ती की मांग को लेकर चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का अर्धनग्न प्रदर्शन जारी

Semi-nude protest: भोपाल /मध्यप्रदेश में चयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है राजधानी भोपाल में दूसरे दिन भी चयनित अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर डटे रहे और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए मुंडन कराकर विरोध दर्ज कराया भावी शिक्षकों का कहना है कि वे चयनित होने के बावजूद नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं जबकि प्रदेश में हजारों शिक्षक पद आज भी खाली पड़े हैं सोमवार को अभ्यर्थियों ने पैदल मार्च निकालते हुए लोक शिक्षण संचालनालय का घेराव किया था इसके बाद मंगलवार को आंदोलन और उग्र रूप में सामने आया जब भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने मुंडन कराकर अपना आक्रोश जताया कई अभ्यर्थी अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन करते नजर आए उनका कहना है कि यह आंदोलन सम्मान और रोजगार के लिए हैप्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रदेश में हजारों शिक्षक पद रिक्त होने के बावजूद सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया में सीटों की संख्या कम कर दी गई है उनका कहना है कि शिक्षक भर्ती परीक्षाएं ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं वर्तमान में केवल 13 हजार पदों पर भर्ती निकाली गई है जबकि आवश्यकता कहीं अधिक है अभ्यर्थियों के अनुसार माध्यमिक शिक्षकों के करीब 10 हजार पद रिक्त हैं जबकि प्राथमिक शिक्षकों के लगभग 3 हजार पद खाली हैं इसके बावजूद सरकार ने केवल सीमित संख्या में ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की है चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं फिर भी नियुक्ति नहीं मिलने से उनका भविष्य अंधकार में है प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि शिक्षक भर्ती की संख्या बढ़ाकर कम से कम 25 हजार पदों पर नियुक्ति की जाए इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया का दूसरा चरण भी जल्द शुरू किया जाए ताकि रिक्त पदों को भरा जा सके उनका कहना है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की है राजधानी भोपाल में चल रहे इस प्रदर्शन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला हैचयनित शिक्षक अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है मुंडन और अर्धनग्न प्रदर्शन के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं जब तक रिक्त पदों पर भर्ती नहीं होती और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा
राजधानी की हरियाली पर स्लो प्वाइजन हमला: पेड़ काटे नहीं जा रहे, जहर देकर सुखाए जा रहे भोपाल की ग्रीनरी खतरे में

भोपाल। राजधानी भोपाल की पहचान मानी जाने वाली हरियाली पर अब खुलकर बुरी नजर लग चुकी है। विकास के नाम पर पहले ही लाखों पेड़ काटे जा चुके हैं और अब पेड़ों को खत्म करने का एक नया और खतरनाक तरीका सामने आया है। पेड़ काटने के बजाय उन्हें स्लो प्वाइजन देकर सुखाया जा रहा है, ताकि कटाई की अनुमति लेने की जरूरत ही न पड़े। राजधानी के सबसे अधिक ग्रीन कवर वाले इलाकों में शामिल प्रोफेसर कॉलोनी में यह गंभीर मामला सामने आया है। यहां वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों में छेद करके केमिकल भरा गया है और ऊपर से मिट्टी लगा दी गई है। इसका असर यह हो रहा है कि पेड़ खड़े-खड़े सूख रहे हैं। कई पेड़ पहले ही सूख चुके हैं, जो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह कोई पहला मामला नहीं है। अब बारी उन पेड़ों की है, जो अभी हरे हैं और लोगों को ऑक्सीजन व फल दोनों दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे न तो पेड़ काटने की अनुमति लेनी पड़ती है और न ही तत्काल कार्रवाई का शक होता है। धीरे-धीरे पेड़ सूख जाते हैं और फिर उन्हें काट दिया जाता है। एनजीटी की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में भोपाल में 6 लाख से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। वर्ष 2016 की तुलना में राजधानी का ग्रीन कवर तेजी से घटा है। मेट्रो प्रोजेक्ट, स्मार्ट सिटी, सड़क चौड़ीकरण, वीवीआईपी बंगलों के पुनर्विकास और खनन परियोजनाओं के कारण हजारों पेड़ों की बलि दी गई है। रिपोर्ट बताती है कि शहर का ग्रीन कवर 22 से 26 प्रतिशत तक घट चुका है, जिससे तापमान और प्रदूषण दोनों में इजाफा हुआ है। इस मामले पर महापौर मालती राय ने कहा है कि मामला संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और हरियाली को नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। वहीं कांग्रेस ने भी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पर्यावरण विशेषज्ञ नूर राशिद खान का कहना है कि यह सीधा कानूनी अपराध है। हरे-भरे पेड़ों को जहर देकर मारना अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि यह इलाका रामसर साइट से भी जुड़ा हुआ है, जहां बिना अनुमति निर्माण और इस तरह की गतिविधियां पूरी तरह गैरकानूनी हैं। कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने सवाल उठाया कि नगर निगम आखिर क्या कर रहा है। जिन जगहों पर पेड़ों में सुराख कर जहर डाला गया है, वहां निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब भोपाल में पेड़ सिर्फ नाम के रह जाएंगे। हरियाली बचेगी तभी शहर की हवा साफ रहेगी, वरना भोपाल भी सिंगरौली जैसी स्थिति की ओर बढ़ सकता है।