PRE VALENTINE GIFT: प्री वैलेंटाइन पर जेल का गिफ्ट इंदौर में पत्नी ने पति को पहुंचाया सलाखों के पीछे

PRE VALENTINE GIFT: मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आया यह मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि समाज और सिस्टम दोनों को आईना दिखाने वाला भी है। यहां एक महिला ने रिश्तों से ऊपर कानून को रखते हुए अपने ही पति के खिलाफ ड्रग्स कारोबार की शिकायत कर उसे जेल भिजवा दिया। यह घटना साबित करती है कि जब एक महिला ठान ले तो गलत के खिलाफ सबसे पहले वही खड़ी होती है चाहे सामने उसका अपना पति ही क्यों न हो। मल्हारगंज क्षेत्र में रहने वाली एक अकाउंटेंट महिला ने पुलिस कमिश्नर इंदौर को शिकायत दी थी जिसमें उसने बताया कि उसका पति लंबे समय से गांजा और पाउडरनुमा ड्रग्स का अवैध कारोबार कर रहा है। आरोप है कि आरोपी ने अपने ही घर को ड्रग्स का गोदाम बना रखा था और महालक्ष्मी नगर स्थित एक पान दुकान के जरिए कॉलेज और हॉस्टल की लड़कियों तक नशा सप्लाई करता था। महिला का कहना है कि घर में दो नाबालिग बेटियां भी रहती हैं और इस गंदे धंधे का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर पड़ रहा था। महिला ने बताया कि जब उसने इस अवैध कारोबार का विरोध किया तो पति और ससुराल पक्ष ने उसे चुप रहने की धमकी दी। चार फरवरी को तो मामला इस हद तक पहुंच गया कि पति ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की जिससे उसकी आंख के ऊपर गंभीर चोट आई और सात से आठ टांके लगाने पड़े। इसके बाद महिला ने हिम्मत जुटाकर पुलिस का दरवाजा खटखटाया। पीड़िता ने सबसे पहले मल्हारगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस घर तक पहुंची लेकिन आरोप है कि सामने रखे गांजा और ड्रग्स के बावजूद न तो कोई जब्ती की गई और न ही एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई हुई। इस कथित ढिलाई के बाद महिला को लगा कि स्थानीय स्तर पर उसे न्याय नहीं मिलेगा। इसके बाद महिला ने सोशल मीडिया पर चल रही नशामुक्ति मुहिम से प्रेरणा ली और नौ फरवरी को पति के घर से बाहर जाने के बाद घर में रखे ड्रग्स का वीडियो बना लिया। उसने यह वीडियो और पूरी शिकायत सीधे पुलिस कमिश्नर इंदौर कार्यालय को भेज दी। शिकायत मिलते ही कमिश्नर कार्यालय हरकत में आया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कमिश्नर के आदेश पर विजय नगर जोन के माध्यम से लसूड़िया थाना पुलिस ने मल्हारगंज थाना क्षेत्र में ही दबिश दी। देर रात हुई कार्रवाई में घर से भारी मात्रा में गांजा और ड्रग्स की पुड़िया बरामद की गई और आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई के बाद मल्हारगंज थाने की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़िता के वकील कृष्ण कुमार कुन्हारे का कहना है कि महिला ने पत्नी धर्म से ऊपर कानून को रखा है जिससे कई युवाओं की जिंदगी नशे में बर्बाद होने से बच सकती है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ रूपाली राठौर ने बताया कि महिला पूरे सबूतों के साथ उनके पास पहुंची थी और शिकायत सीधे कमिश्नर तक पहुंचाने में मदद की गई जिस पर तुरंत कार्रवाई हुई। यह मामला केवल एक गिरफ्तारी की कहानी नहीं है बल्कि सिस्टम के दो चेहरों को भी उजागर करता है। एक तरफ वह प्रशासन जो शिकायत मिलते ही सक्रिय हुआ और दूसरी तरफ वह स्थानीय थाना जो सब कुछ सामने होने के बावजूद चुप बैठा रहा। इस पूरी कहानी की सबसे मजबूत कड़ी वह मां है जिसने अपने बच्चों और शहर को नशे से बचाने के लिए अपने ही पति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
लापरवाही से गई जान: बैतूल में पानी की टंकी से गिरकर मजदूर की मौत, बिना सुरक्षा काम करवा रहा था ठेकेदार

बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां सरकारी योजना के तहत बन रही पानी की टंकी एक मजदूर की मौत का कारण बन गई। यह हादसा न सिर्फ एक व्यक्ति की जान जाने का मामला है, बल्कि सिस्टम और ठेकेदारी व्यवस्था की भारी लापरवाही को भी उजागर करता है। बैतूल जिले की बडोरा ग्राम पंचायत में जल जीवन मिशन के तहत निर्माणाधीन पानी की टंकी से गिरकर एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान मुकेश सिरसाम, निवासी हमलापुर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, मुकेश करीब 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर पुताई का काम कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि वह बिना सेफ्टी बेल्ट, बिना हेलमेट और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम कर रहा था। काम के दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह ऊंचाई से नीचे गिर पड़ा। हादसे में उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे तुरंत जिला अस्पताल बैतूल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। नियम साफ कहते हैं कि ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हैं। इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मजदूर से काम करवाया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या जल जीवन मिशन के नाम पर मजदूरों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है? क्या ठेकेदार खुद को कानून से ऊपर समझ रहे हैं? बताया जा रहा है कि यह पानी की टंकी पीएचई लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत ठेकेदार के माध्यम से बनाई जा रही थी। हैरानी की बात यह है कि हादसे के बाद न तो ठेकेदार सामने आया है और न ही पीएचई विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। मृतक मजदूर के परिजनों को अब तक किसी तरह की आर्थिक सहायता या राहत की घोषणा भी नहीं की गई है। मुकेश सिरसाम की मौत सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह उस लापरवाह सिस्टम का नतीजा है, जिसमें गरीब मजदूरों की जान की कीमत कुछ भी नहीं मानी जाती। सवाल यह भी है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार ठेकेदार पर कार्रवाई होगी, क्या पीएचई विभाग अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करेगा या फिर यह मामला भी अन्य हादसों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा। स्थानीय लोगों में घटना को लेकर आक्रोश है और वे दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है।
20 साल मंत्री रहे गोपाल भार्गव ने छलका दर्द, बोले- दिग्विजय ने कांग्रेस में आने का ऑफर दिया था

सागर: बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पिछले 40 वर्षों से विधायक रहे गोपाल भार्गव ने मोहन कैबिनेट में जगह न मिलने का अपना दर्द सार्वजनिक रूप से साझा किया। सागर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष और अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद अपेक्षित सम्मान न मिलना गहरा दुख देता है। गोपाल भार्गव ने बताया कि उन्होंने 20 साल तक लगातार मंत्री पदों पर रहते हुए कठिन परिस्थितियों का सामना किया, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी नहीं टिक पाते। उन्होंने कहा, राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। अगर किसी व्यक्ति की बात सरकार नहीं सुनती, तो उसका मन टूट जाता है। कार्यक्रम में उन्होंने यह भी खुलासा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन्हें एक बार कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए भार्गव ने कहा, मैंने साफ कह दिया था कि यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने हमेशा सिद्धांतों की राजनीति की है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक सौदे से खुद को दूर रखा। गोपाल भार्गव ने संकेत दिया कि लंबे समय तक पार्टी को समर्पित रहने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलना उनकी पीड़ा का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा, मैंने पार्टी को जीवन दिया है, और यह सीधे तौर पर मंत्री नहीं बनाए जाने की पीड़ा की ओर इशारा करता है।उल्लेखनीय है कि गोपाल भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा से लगातार नौ बार विधायक चुने गए हैं। वे भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और पूर्व में लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं। इससे पहले दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा था, हर जगह सिर्फ ब्राह्मणों को ही टारगेट किया जा रहा है। इस बयान ने प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी। उनके हालिया बयान और मंत्री न बनने की पीड़ा भविष्य में पार्टी और प्रदेश की राजनीति पर क्या असर डालेगी, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी। गोपाल भार्गव की यह खुलकर कही गई भावनाएं वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और पार्टी में वरिष्ठता के महत्व को भी उजागर करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में स्थायित्व, सेवा और नैतिकता उनके लिए हमेशा प्राथमिकता रही है, और कोई भी पद उनके सिद्धांतों से ऊपर नहीं है।सागर और प्रदेश के राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भार्गव के बयान आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर और समाज में हलचल पैदा कर सकते हैं। वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाएं, सम्मान और उनके अनुभव को अगर नजरअंदाज किया गया, तो राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है
पचमढ़ी चौरागढ़ मेला प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था में भक्तों की आस्था का जीवंत दर्शन

सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्थित पचमढ़ी इन दिनों भक्ति और श्रद्धा से सराबोर नजर आ रहा है महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित चौरागढ़ मेला पूरे जोश के साथ चल रहा है चारों ओर हर-हर महादेव के जयघोष ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों की आस्था से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया है भगवान शिव के दर्शन के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर चौरागढ़ शिखर तक पहुंच रहे हैं कठिन और पथरीली चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालु अपने कंधों पर भारी त्रिशूल उठाकर मंदिर तक जाते हैं मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने पर त्रिशूल चढ़ाया जाता है इसी कारण दिनभर नहीं बल्कि देर रात तक भी भक्तों की कतार शिखर मंदिर तक बनी रहती है भक्त नाचते गाते जयकारे लगाते हुए भोलेनाथ के दर्शन कर रहे हैं पहाड़ी की ठंडी हवा और थकान भी आस्था के आगे कमजोर साबित हो रही है मेले में भारी भीड़ के बीच अपनों से बिछड़ने वालों के लिए प्रशासन द्वारा बनाया गया खोया-पाया केंद्र काफी कारगर साबित हो रहा है पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए लगातार घोषणाएं की जा रही हैं हाल ही में सिवनी जिले का आठ वर्षीय बालक शौर्य नायक भीड़ में खो गया था जिसे कंट्रोल रूम की सतर्कता से ढूंढकर परिजनों को सौंपा गया इसी तरह छिंदवाड़ा निवासी आशा राठौर को भी उनके भाई से मिलवाया गया कलेक्टर सोनिया मीणा के निर्देश पर मेला व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन और एसडीएम आकिब खान स्वयं पैदल भ्रमण कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पल-पल की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दे रही हैं सुरक्षा, यातायात और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया है मेले में सुरक्षा के लिए पुलिस बल चौबीस घंटे तैनात है परिवहन विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि श्रद्धालुओं से अतिरिक्त किराया न वसूला जाए वहीं स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए सफाई मित्र सुबह से सक्रिय रहते हैं शौचालयों की नियमित सफाई कचरा प्रबंधन और ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव से स्वच्छ वातावरण बनाए रखा जा रहा है पचमढ़ी का चौरागढ़ मेला न केवल धार्मिक आयोजन है बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी आस्था की जीत का जीवंत उदाहरण बन गया है त्रिशूल लेकर शिखर तक पहुंचते भक्त प्रशासन की सजग व्यवस्था सुरक्षा और स्वच्छता का अनुभव कर आस्था और विश्वास से परिपूर्ण हो रहे हैं इस मेला ने यह दिखा दिया है कि कठिन मार्ग और भारी भीड़ के बीच भी श्रद्धा कभी कमजोर नहीं होती है
बालाघाट में कृषि कैबिनेट, तलाकशुदा पुत्री को भी मिलेगी पेंशन ,डॉ. मोहन सरकार के बड़े फैसले, 18 फरवरी को पेश होगा बजट

भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने एक के बाद एक कई बड़े और अहम फैसले लिए हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सामाजिक, कृषि, सांस्कृतिक और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक की शुरुआत वंदेमातरम गान के साथ हुई। कैबिनेट मंत्री चेतन कश्यप ने फैसलों की जानकारी मीडिया को दी। कैबिनेट में तय किया गया कि बालाघाट जिले में कृषि कैबिनेट का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही तारीख तय की जाएगी। मंत्री चेतन कश्यप ने बताया कि बालाघाट के नक्सल मुक्त होने के बाद यह निर्णय लिया गया है। यहां होने वाली कृषि कैबिनेट में जिले के समग्र विकास, कृषि, किसानों और स्थानीय जरूरतों को लेकर अहम फैसले लिए जाएंगे। प्रदेश सरकार ने जू में रेस्क्यू सेंटर बनाने का भी बड़ा निर्णय लिया है। इस रेस्क्यू सेंटर में घायल और बीमार वन्य जीवों का इलाज किया जाएगा। इससे वन्य जीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी और समय पर उपचार संभव हो सकेगा। सामाजिक स्तर पर एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए डॉ. मोहन यादव सरकार ने तलाकशुदा पुत्री को भी पेंशन देने का निर्णय लिया है। मंत्री चेतन कश्यप ने बताया कि यह प्रावधान पहली बार किया गया है। इसके तहत पारिवारिक पेंशन में विशेष व्यवस्था की गई है। साथ ही 2005 की नई पेंशन योजना को लेकर भी निर्णय लिया गया है, जिसके अंतर्गत 2026 में नए नियम बनाए गए हैं। संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 19 मार्च को गुड़ी पड़वा पर्व सरकारी स्तर पर मनाने का फैसला लिया है। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को नई पहचान मिलेगी।विकास योजनाओं की बात करें तो धरती आवा कार्यक्रम के तहत 63 हजार आदिवासी घरों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए 366 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। कैबिनेट ब्रीफिंग में यह भी जानकारी दी गई कि 18 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश किया जाएगा। यह बजट संतुलित और विकासोन्मुख होगा। इसके अलावा स्वास्थ्य क्षेत्र में भी प्रदेश ने उपलब्धि हासिल की है। नेशनल हेल्थ इंडेक्स में मध्य प्रदेश ने बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 हो गई है, जिसे सरकार ने बड़ी सफलता बताया है।कुल मिलाकर डॉ. मोहन यादव सरकार के ये फैसले सामाजिक सुरक्षा, सांस्कृतिक सम्मान, विकास और प्रशासनिक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
ग्वालियर में रेबीज का कहर: पांच दिन में तीन मौतें, वैक्सीन भी नहीं बचा सकी मासूम

ग्वालियर । में रेबीज ने हड़कंप मचा दिया है। महज पांच दिनों में तीन लोगों की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया है। इनमें सबसे चौंकाने वाला मामला दतिया जिले के छह वर्षीय मासूम हंस प्रजापति का है। बच्चे को डॉग बाइट के बाद समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन के तीन डोज लगाए गए थे लेकिन इसके बावजूद वह बीमारी की चपेट में आ गया और उसकी जान चली गई। यह घटना न केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि प्रशासन के आवारा कुत्तों को लेकर दावों की भी पोल खोलती है। मासूम हंस के पिता अशोक उर्फ कल्लू प्रजापति ने बताया कि जिस दिन उनके बेटे को कुत्ते ने काटा उसी दिन डॉक्टर की सलाह पर इलाज शुरू करवा दिया गया। पहले इंजेक्शन 13 जनवरी को, दूसरा 16 जनवरी को और तीसरा 21 जनवरी को लगाया गया। चौथा डोज 10 फरवरी को लगना था लेकिन बीते शुक्रवार से बच्चे में रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे। बच्चा अचानक चौंकने लगा, हवा और पानी से डरने लगा। परिजन उसे तत्काल कमलाराजा अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे दतिया ले जाया गया जहां शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात उसकी मौत हो गई। इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और वैक्सीन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यही है कि जब पीड़ित को डॉक्टरों द्वारा बताई गई तारीखों पर सभी इंजेक्शन लगाए गए, तो फिर रेबीज कैसे हुआ। विशेषज्ञ मानते हैं कि एंटी-रेबीज वैक्सीन के तीन डोज के बाद रेबीज होना बेहद दुर्लभ है। यह घटना rare to rarest category में आती है और इसकी जांच बहुस्तरीय होनी चाहिए। ग्वालियर में सामान्य रूप से सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों ने पहले ही लोगों को भयभीत किया हुआ है। प्रशासन और स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी अब जानलेवा साबित हो रही है। न्यू जयारोग्य चिकित्सालय में बीते पांच दिनों में रेबीज से तीन मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें एक ग्वालियर का, दूसरा टीकमगढ़ का और सबसे गंभीर मामला दतिया जिले के छह वर्षीय हंस प्रजापति का है। जयारोग्य चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मनीष चतुर्वेदी ने स्वीकार किया कि बीते पांच दिनों में डॉग बाइट के शिकार तीन लोगों की मौत बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चे की मौत को लेकर जांच बहुस्तरीय होगी जिसमें इलाज की प्रक्रिया, देखरेख और वैक्सीन की गुणवत्ता की भी समीक्षा शामिल होगी। इस घटना ने लोगों के बीच डर बढ़ा दिया है। हवा, पानी और कुत्तों से लगने वाले जोखिम को लेकर परिजन और आम जनता चिंतित हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को अब न केवल आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेना होगा बल्कि रेबीज वैक्सीन की आपूर्ति, गुणवत्ता और समय पर इलाज सुनिश्चित करना होगा।
MORENA NEWS: विजयगढ़ पंचायत में मनरेगा–वाटरशेड योजनाओं में बड़ा फर्जीवाड़ा, 2 करोड़ के घोटाले के आरोप

HIGHLIGHTS: विजयगढ़ पंचायत में 2 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप मनरेगा और वाटरशेड योजनाओं में फर्जीवाड़ा बाहरी लोगों के नाम से बनाए गए जॉब कार्ड तालाब और नाला निर्माण में बिना काम भुगतान कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू MORENA NEWS: ग्वालियर। मुरैना जिले की पोरसा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत विजयगढ़ में मनरेगा और वाटरशेड योजनाओं के तहत करीब 2 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आया है। जहां पंचायत के ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर मुरैना को लिखित शिकायत सौंपकर सरपंच श्रीराम सखवार और ग्राम रोजगार सहायक नरेश सिंह के खिलाफ निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। ‘वोकल फॉर लोकल’ का असर: गुना में 50 से अधिक स्टॉलों के साथ हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ फर्जी जॉब कार्ड बनाकर निकाली मजदूरी ग्रामीणों का आरोप है कि कई महिला श्रमिकों और अन्य लोगों के नाम से फर्जी जॉब कार्ड बनाए गए। शिकायत में सुग्रीव, आशीष, नीतू, हकीम सिंह, रामनरेश, प्रेम सिंह, कुलदीप, मदन मोहन, नागेश, सुमित, सिया, सचिन कुमार, सुदामा समेत कई नाम शामिल हैं, जिनके नाम पर काम दिखाकर मजदूरी की राशि निकाल ली गई, जबकि वे कभी कार्यस्थल पर मौजूद नहीं रहे। DABRA STAMPEDE NEWS: डबरा में कलश वितरण के दौरान भगदड़, महिला की मौत; बच्ची समेत 8 श्रद्धालु घायल पौधरोपण, अमृत वाटिका और नाला निर्माण में अनियमितता चारागाह विकास, पौधरोपण, वसुधा वंदन अमृत वाटिका और गोशाला के नाम पर महीनों तक फर्जी मजदूरी दर्शाई गई। पंचायत भवन के पास स्वीकृत ई-कक्ष निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई। वहीं श्मशान घाट से पोखर तक स्वीकृत नाला निर्माण के लिए 1.40 लाख रुपये निकाल लिए गए, लेकिन आज तक कार्य शुरू नहीं हुआ। तालाब निर्माण में करोड़ों का भुगतान ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि परकोलेशन टैंक, अर्दन डेम और तालाब निर्माण से जुड़े 41 कार्यों में पुराने तालाबों को नया दिखाकर वर्क कोड बदले गए। वाटरशेड उपयंत्री की मिलीभगत से फर्जी मूल्यांकन कर एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान निकाल लिया गया। NAGAR PALIKA ALLEGATION: पूर्व विधायक ने भिंड नगर पालिका पर लगाए गंभीर आरोप: बोले- विकास नहीं, सिर्फ कागजी काम” प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश जनपद पंचायत पोरसा के सीईओ देवेंद्र जैन ने कहा कि सभी आरोपों की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर सरपंच और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
वेलेंटाइन डे पर पार्टनर के साथ रोड ट्रिप के लिए ये जगहें हैं परफेक्ट

नई दिल्ली । वेलेंटाइन डे का नाम आते ही अक्सर हमारे मन में किसी महंगे होटल या कैंडल लाइट डिनर का ख्याल आता है, लेकिन प्यार का असली आनंद तो साथ बिताए गए उन लम्हों में है, जहां शोर कम और सुकून ज्यादा हो. इस 14 फरवरी अगर आप अपनी पार्टनर के साथ भीड़भाड़ से दूर कुछ अलग प्लान करना चाहते हैं, तो रोड ट्रिप से बेहतर कुछ नहीं हो सकता.भारत में कई ऐसे ड्राइविंग रूट्स हैं जहां खिड़की के बाहर बदलते नजारे, हल्का संगीत और पार्टनर का साथ आपके सफर को किसी फिल्म के रोमांटिक सीन जैसा बना देगा. तो चलिए जानते हैं उन खूबसूरत रास्तों के बारे में जहां मंजिल की जल्दबाजी नहीं, बल्कि रास्तों की खूबसूरती आपके प्यार को एक नया अहसास देगी.पहाड़ों की ठंडी हवाओं में घुलेगा रोमांस उत्तर भारत के जोड़ों के लिए हिमालय की गोद में बसी वादियां हमेशा से पहली पसंद रही हैं. दिल्ली से मनाली का सफर हो या मसूरी की धुंध भरी सुबह, इन रास्तों पर बर्फ से ढके पहाड़ और देवदार के पेड़ों के बीच से गुजरना एक जादुई अनुभव होता है. इसके अलावा, दिल्ली से कसौली की घुमावदार सड़कें शिवालिक पहाड़ियों के ऐसे नजारे पेश करती हैं जो आपके सफर को यादगार बना देते हैं. यही नहीं, मसूरी के लाल टिब्बा पर साथ में सूर्यास्त देखना हो या सोलंग वैली की बर्फीली वादियों में हाथ थामकर चलना, पहाड़ों की यह शांति आपके बीच की बातचीत को और भी गहरा और अर्थपूर्ण बना देती है. राजस्थान की सड़कों पर महसूस करें शाही अंदाज अगर आप अपने वेलेंटाइन को थोड़ा राजसी और ऐतिहासिक रंग देना चाहते हैं, तो राजस्थान की सड़कें आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं. जयपुर से उदयपुर की ड्राइव आपको किलों और महलों के बीच से ले जाती है, जहां पहुंचकर पिछोला झील के किनारे शाही डिनर का लुत्फ उठाया जा सकता है. उदयपुर को ‘सिटी ऑफ लेक्स’ के साथ-साथ प्रेम का शहर भी कहा जाता है, जो जोड़ों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है. इसके अलावा, अगर आपको रेगिस्तान की खामोशी पसंद है, तो जैसलमेर के सुनहरे रेत के टीलों पर पार्टनर के साथ डूबते सूरज को देखना एक ऐसा अहसास है जो शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. दक्षिण भारत के कॉफी बागानों और समंदर का साथ प्राकृतिक सुंदरता और शांति की तलाश करने वाले कपल्स के लिए दक्षिण भारत के रास्ते किसी जन्नत से कम नहीं हैं. बेंगलुरु से कूर्ग की ड्राइव आपको भारत के ‘स्कॉटलैंड’ तक ले जाती है, जहां कॉफी के बागानों की खुशबू और चारों तरफ फैली हरियाली आपके मन को तरोताजा कर देती है. इसके अलावा, कोच्चि से मुन्नार का रास्ता चाय के बागानों और खूबसूरत झरनों से होकर गुजरता है, जो सफर को बेहद रोमांटिक बना देता है. यही नहीं, चेन्नई से पांडिचेरी का ईस्ट कोस्ट रोड एक तरफ नीला समंदर और दूसरी तरफ खुली सड़क का ऐसा मेल कराता है, जहां गाड़ी चलाना अपने आप में एक उत्सव बन जाता है. बीच वाइब्स और लॉन्ग ड्राइव का बेजोड़ मेल एडवेंचर और मस्ती पसंद करने वाले जोड़ों के लिए पश्चिम भारत की सड़कें सबसे रोमांचक विकल्प पेश करती हैं. मुंबई से गोवा का सफर उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो आजादी और पार्टी वाइब्स को प्यार के साथ जोड़ना चाहते हैं. यहां के नारियल के पेड़ों से घिरी सड़कें और समंदर किनारे के कैफे आपके वेलेंटाइन को जोश से भर देते हैं. इसके अलावा, अगर आपके पास समय कम है, तो मुंबई से लोनावला की छोटी सी ड्राइव भी एक परफेक्ट रोमांटिक गेटअवे साबित हो सकती है. लोनावला की हरी-भरी वादियां और रास्ते में मिलने वाले छोटे-छोटे झरने आपके सफर में प्यार की मिठास घोलने के लिए काफी हैं.
‘वोकल फॉर लोकल’ का असर: गुना में 50 से अधिक स्टॉलों के साथ हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ

गुना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का असर अब जमीन पर साफ नजर आने लगा है। इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के गुना जिले में देखने को मिला, जहां स्थानीय और देशभर के हस्तशिल्पियों के लिए हस्तशिल्प प्रदर्शनी-2026 का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य कारीगरों की आमदनी बढ़ाना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय व वैश्विक पहचान दिलाना है। कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से मध्य प्रदेश राज्य सहकारी संघ मर्यादित और विकास आयुक्त हस्तशिल्प द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी का शुभारंभ 9 फरवरी की रात प्रताप छात्रावास, गुना में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक दुबे, अमित सहारे और सहायक निदेशक, हस्तशिल्प विकास आयुक्त सेवा केंद्र, ग्वालियर भी मौजूद रहे। प्रदर्शनी में हैदराबाद, जयपुर, दिल्ली, आगरा, बेंगलुरु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों से आए हस्तशिल्पियों ने करीब 50 स्टॉल लगाए। यहां जूट बैग, जरी वर्क, एम्ब्रॉयडरी, बांस शिल्प, कलमकारी, बनारसी साड़ी, मीनाकारी, ज्वेलरी, पेंटिंग, क्ले और क्रॉकरी, लेदर आर्ट, तोरण आर्ट, दरी-बेडशीट और लकड़ी के खिलौने सहित पारंपरिक हस्तशिल्प प्रदर्शित किए गए। कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने स्टॉलों पर संबंधित कारीगरों और उनके राज्यों के नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से न केवल कारीगरों को बाजार मिलता है, बल्कि आमजन को भी भारत की समृद्ध कला और संस्कृति के करीब जाने का अवसर मिलता है। उन्होंने गुनावासियों से अपील की कि अधिक से अधिक लोग आएं, हस्तशिल्प को देखें, सराहें और पसंद आने पर खरीदारी करें। प्रदर्शनी ने कई हस्तशिल्पियों की जिंदगी बदलने की कहानी भी बताई। गुजरात से आए मोनू गुजराती ने कहा कि पहले उनकी स्थिति कठिन थी, लेकिन इस मंच के मिलने से आमदनी में सुधार हुआ। बनारस से आए जलालुद्दीन अंसारी ने बताया कि अब उन्हें ग्राहक तक सीधी पहुंच मिल रही है और बीच का मार्जिन बच रहा है। राजस्थान के जयपुर से आए नीरज कुमार सैनी और नागपुर की शकुन ठाकुर ने भी अपनी आमदनी में बढ़ोतरी की कहानी साझा की। पश्चिम बंगाल के बप्पा दास और सेवोसी दे ने बताया कि पहले गांव-गांव जाकर सामान बेचना मुश्किल था, लेकिन अब सीधे बाजार तक पहुंच बन गई है। गुना के स्थानीय लोग भी इस पहल से प्रभावित नजर आए। महेंद्र नायक ने कहा कि हाथों की कलाकारी आम जनता तक पहुंचनी चाहिए। गायत्री शर्मा ने बताया कि कारीगरों को रोजगार मिला है और ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद। उपायुक्त सहकारिता मुकेश जैन ने आमजन से अपील की कि यह प्रदर्शनी 16 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक प्रताप छात्रावास, मेन रोड, गुना में आयोजित रहेगी। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग आएं, हस्तशिल्प का लाभ उठाएं और देश की पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करें।
DABRA STAMPEDE NEWS: डबरा में कलश वितरण के दौरान भगदड़, महिला की मौत; बच्ची समेत 8 श्रद्धालु घायल

HIGHLIGHTS: डबरा के नवग्रह मंदिर में कलश वितरण के दौरान मची भगदड़। भगदड़ में 70 वर्षीय महिला रति साहू की मौत । बच्ची समेत 8 श्रद्धालु घायल हुए, कुछ की हालत गंभीर। परिजनों ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर लगाए लापरवाही के आरोप। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने किया कार्यक्रम का आयोजन । DABRA STAMPEDE NEWS: ग्वालियर। जिले के डबरा में नवग्रह मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान बड़ा हादसा हो गया। जहां कलश यात्रा शुरू होने से पहले कलश वितरण के समय अचानक भगदड़ मच गई। इस हादसे में 70 वर्षीय महिला रति साहू की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची समेत आठ लोग घायल हो गए। भारी भीड़ से मचा हड़कंप घटना उस समय हुई जब श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में मौजूद थी। जिसके बाद कलश वितरण शुरू होते ही पहले कलश लेने की होड़ मच गई। इसके बाद भीड़ लगातार बढ़ती चली गई और कुछ ही देर में हालात बेकाबू हो गए। इसी दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग गिर पड़े और कुचल दिए गए। PF निकासी होगी अब और आसान, EPFO लाएगा नया मोबाइल एप UPI इंटीग्रेशन के साथ घायलों को डबरा सिविल अस्पताल में किया भर्ती हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायलों को तुरंत डबरा के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल लोगों को ग्वालियर रेफर किया गया। प्रशासन के अनुसार सभी घायलों का इलाज जारी है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप मृतक महिला की बहू ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने अचानक गेट खोल दिया, जिससे भीड़ एक साथ अंदर घुस गई और भगदड़ मच गई। आरोप है कि भगदड़ में महिला को कुचल दिया गया। परिजनों का यह भी कहना है कि अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिला और महिला करीब 30 मिनट तक तड़पती रही। कार्यक्रम के आयोजक पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा बताया जा रहा है कि नवग्रह मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के आयोजक पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा हैं। हादसे के बाद कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। एआई कंपनी का बड़ा आईपीओ फ्रैक्टल एनालिटिक्स रिटेल और एनआईआई निवेशकों के लिए समीक्षा