अभिनेता रणवीर सिंह को मिली धमकी, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

नई दिल्ली। फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के घर हाल ही में हुई फायरिंग के बाद अब बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह को धमकी भरा मैसेज मिला है। पुलिस ने मंगलवार को बताया कि अनजान व्यक्तियों ने रणवीर को व्हाट्सऐप पर वॉइस नोट भेजकर करोड़ों रुपये की मांग की। इस घटना के बाद अभिनेता के घर के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और मामले की जांच जारी है। रणवीर सिंह ने धमकी मिलने के तुरंत बाद मुंबई पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने अभिनेता के निवास के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है और धमकी देने वाले व्यक्ति की तलाश में जुट गई है। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच में तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल प्रमाणों दोनों पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है ताकि दोषी को जल्द गिरफ्तार किया जा सके। मुंबई पुलिस का संदेह है कि इस धमकी के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ हो सकता है। रोहित शेट्टी के घर की फायरिंग में भी इस गैंग का नाम सामने आया था। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में तुरंत जांच शुरू कर दी है। रणवीर के घर में सुरक्षा बढ़ाने के लिए पुलिस जवानों के साथ-साथ प्राइवेट गार्ड भी तैनात किए गए हैं। सेंट्रल मुंबई की हाउसिंग सोसाइटी ने इस बढ़ी सुरक्षा पर चिंता जताई है। सोसाइटी के मैनेजिंग कमेटी ने पुलिस को पत्र लिखकर बताया कि हथियारबंद गार्ड अक्सर साझा क्षेत्रों जैसे लॉबी जिम और बच्चों के खेलने की जगह पर घूमते हैं जिससे निवासियों की सुरक्षा और शांति प्रभावित हो सकती है। इस बीच रोहित शेट्टी के घर फायरिंग मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और गैंग के फरार सदस्य शुभम लोंकर ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है।
भोपाल वृत्त के लगभग 3 लाख उपभोक्ताओं को जनवरी में दो करोड़ से अधिक की छूट

भोपाल। मध्य प्रदेश में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्य क्षेत्र में 5 लाख 20 हजार 457 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में टाइम ऑफ डे छूट का लाभ प्रदान करते हुए जनवरी 2026 में कुल 3 करोड़ 61 लाख 26 हजार की रियायत प्रदान की गई है। इसमें भोपाल शहरी एवं ग्रामीण वृत्त के 2 लाख 97 हजार 813 उपभोक्ताओं को 2 करोड़ 10 लाख 66 हजार रुपये की दिन के टैरिफ में छूट मिली है। जनसम्पर्क अधिकारी राजेश पाण्डेय ने मंगलवार को जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी खपत के आधार पर टाइम ऑफ डे छूट के तहत यह रियायत प्रदान की गई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटरिंग पहल के अंतर्गत माह जनवरी 2026 के दौरान यह छूट प्रदान की गई है। दिन के टैरिफ में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने परिसर में स्मार्ट मीटर लगाने में सहयोग करें और स्मार्ट मीटर लगवाने से न घबराएं। स्मार्ट मीटर उनके लिए हर तरह से फायदेमंद है और स्मार्ट मीटर की सटीक रीडिंग और बिलिंग के साथ ही कार्यप्रणाली में भी किसी प्रकार की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। स्मार्ट मीटर से बिजली उपभोक्ताओं को ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद मिलती है। स्मार्ट मीटर बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। ऐप से मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित किया जा सकता है। उपभोक्ताओं को ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बनाया जा सकता है। उपभोक्ता ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन मोबाइल एप के द्वारा किसी भी समय कहीं से भी देख सकते हैं। स्मार्ट मीटर ऊर्जा की खपत को कम करने में सहायक होकर पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करता है।
GWALIOR FAKE DOCTOR: फर्जी डॉक्टर को 2 साल की सजा, गलत इंजेक्शन से हुई थी मरीज की मौत

HIGHLIGHTS: बिना वैध पंजीयन के कर रहा था एलोपैथी उपचार गलत इंजेक्शन लगाने से मरीज की हुई मौत जयारोग्य अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों से आरोप सिद्ध कोर्ट ने सुनाई 2 साल की कठोर कारावास की सजा GWALIOR FAKE DOCTOR: मध्यप्रदेश। ग्वालियर जिला अदालत ने बिना वैध पंजीयन के एलोपैथी उपचार करने और लापरवाही से मरीज की मौत के मामले में आरोपी बोधराज शास्त्री को दोषी करार दिया है। बता दें कि न्यायालय ने उसे दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही चार हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। फैसला मध्य प्रदेश आयुर्वेद विज्ञान परिषद अधिनियम 1987 की धारा 24 के तहत सुनाया गया। बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष नेता प्रतिपक्ष ने पेश किए सबूत बिना रजिस्ट्रेशन चला रहा था क्लीनिक अभियोजन के अनुसार 22 जनवरी 2022 को हजीरा क्षेत्र में बोधराज शास्त्री बिना किसी वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन के अपने क्लीनिक में मरीजों का इलाज कर रहा था। इसी दौरान धर्मेंद्र सिंह तोमर इलाज के लिए वहां पहुंचे थे। गलत इंजेक्शन से बिगड़ी हालत आरोप है कि उपचार के दौरान आरोपी ने डीएस बोतल के जरिए गलत इंजेक्शन और दवा दी, जिससे धर्मेंद्र की हालत अचानक गंभीर हो गई। परिजन तुरंत उन्हें जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) लेकर पहुंचे। मप्र का डिण्डौरी जिला जल अभावग्रस्त घोषित, 30 जून तक नलकूप एवं हैंडपंप खनन पर प्रतिबंध अस्पताल में मृत घोषित जेएएच में डॉक्टरों ने जांच के बाद धर्मेंद्र सिंह तोमर को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी के पास एलोपैथी चिकित्सा करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर अदालत में आरोप सिद्ध हुए। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। भोपाल में प्रोफेसर की खुदकुशी: ‘बीमारी से तंग आ गया हूं…’ सुसाइड नोट लिख फंदे पर झूले शैलेंद्र, पत्नी भी लड़ रही कैंसर से जंग
प्राण Birth Anniversary: पान की दुकान पर चमकी थी इस एक्टर की किस्मत, दिलचस्प है बॉलीवुड के खलनायक की कहानी
नई दिल्ली। बॉलीवुड के कई सितारे ऐसे हैं जिन्होंने इंडस्ट्री में खुद से अपनी पहचान बनाई है. ये सितारे हर किसी के दीवाने हैं. वहीं 90s के होने के बाद भी ये सितारे आज ऑडियंस के फेवरेट हैं. इन सितारों को बॉलीवुड में आने के लिए बड़े-बड़े पापड़ बेलने पड़ते हैं. आज हम एक ऐसे सितारे की बात करने जा रहे हैं जिसे पहली फिल्म बेहद सरप्राइज तरीके से ऑफर हुई थी. इसके बाद ये सितारा बॉलीवुड का जाना-माना खलनायक बनकर उभरा. अब आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर हम किस स्टार की बात कर रहे हैं, तो चलिए आपको भी बताते हैं आखिर ये सितारा कौन है? कैसे मिला रोल?बॉलीवुड में जाने-माने इस विलेन का नाम प्राण है. भले ही ये सितारा आज हमारे बीच ना हो लेकिन उनकी आइकॉनिक फिल्मों ऑडियंस के दिलों में आज भी जिंदा है. प्राण को अपनी पहली फिल्म बेहद सरप्राइज तरीके से मिली थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक प्राण अक्सर साल 1940 में लाहौर में एक पान की दुकान पर पान खाने जाते थे. वहीं उसी दुकान पर मशहूर फिल्म राइटर वली मोहम्मद भी अक्सर जाया करते थे. पहली फिल्मवली मोहम्मद जब ‘यमला जट’ फिल्म बना रहे थे तो वो एक नए विलेन की तलाश में थे. इसी बीच उनकी नजर प्राण पर पड़ी और इसके बाद वली मोहम्मद ने प्राण को मिलने के लिए स्टूडियो बुलाया. लेकिन प्राण ने उस दौरान वली मोहम्मद की बात को सीरियस नहीं लिया और उन्हें इग्नोर कर दिया. इसके बाद एक बार फिर दोनों की मुलाकात हुई और वली मोहम्मद ने इस दौरान प्राण को फिल्म करने के लिए मना लिया. भारत सरकार से मिला अवॉर्डप्राण ने इस बार वली मोहम्मद की बात मान ली और इस तरीके से उन्हें अपनी पहली फिल्म ‘यमला जट’ में रोल मिला. वहीं अपनी पूरी जिंदगी प्राण ने वली मोहम्मद को हमेशा अपना गुरु माना. बता दें प्राण बॉलीवुड के बेहतरीन कलाकारों में से एक थे और उन्हें अपनी एक्टिंग के लिए भारत सरकार से पद्म भूषण और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है. प्राण का निधन 12 जुलाई साल 2013 में हो गया था.
नरवणे की किताब पर विवाद जारी, बीजेपी ने राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की

नई दिल्ली । पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर सियासी तनातनी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया और एक काल्पनिक कहानी गढ़ी। पार्टी ने मांग की है कि इस मामले पर राहुल गांधी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के स्पष्टीकरण के बाद राहुल गांधी के दावे पूरी तरह सवालों के घेरे में हैं। PRHI ने पहले ही स्पष्ट किया था कि उनके पास नरवणे की किताब के विशेष प्रकाशन अधिकार हैं और यह अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। त्रिवेदी ने इसे अक्षम्य अपराध बताया और कहा कि इससे यह साबित होता है कि कांग्रेस नेता लोकसभा का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे थे। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी की कार्रवाई से राष्ट्रीय सुरक्षा पर भ्रम फैलाने का प्रयास हुआ। वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि लोकसभा में सदन को गुमराह करने के लिए फर्जी किताब का हवाला देना गंभीर मामला है और गांधी को देश व संसद के सामने माफी मांगनी चाहिए। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध किया कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाए और लोकतंत्र की रक्षा के लिए विकल्पों पर विचार किया जाए।
सावधान! इंटरनेट से मिले 'लोन एजेंट' ने लगाया ढाई लाख का चूना; ग्वालियर में मकान बनाने के लिए कर्ज ले रहे युवक के साथ फ्रॉड

ग्वालियर। शहर के मुरार थाना क्षेत्र में एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के साथ ऑनलाइन लोन दिलाने के नाम पर ₹2.5 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित ने अपने मकान निर्माण के लिए फंड की तलाश में इंटरनेट पर ‘लोन एजेंट’ सर्च किया था, लेकिन उसे क्या पता था कि गूगल सर्च का यह नतीजा उसकी जमा-पूंजी भी छीन लेगा। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर साइबर धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है। मूल रूप से कैलारस मुरैना के रहने वाले अवधेश शिवहरे वर्तमान में ग्वालियर की सीपी कॉलोनी में किराए से रहते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि जनवरी की शुरुआत में उन्होंने गूगल पर लोन के लिए सर्च किया था। इस दौरान मिले एक नंबर पर कॉल करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताया और लोन प्रक्रिया के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और सैलरी स्लिप जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल कर लिए। जालसाजों ने ठगी के लिए ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का सहारा लिया। 6 से 13 जनवरी के बीच हुई इस साजिश में पीड़ित के पास गुरुग्राम स्थित आईडीएफसी IDFC बैंक के नाम से ₹6.49 लाख का फर्जी लोन स्वीकृति संदेश भी भेजा गया। इसके बाद ठग ने पीड़ित को विश्वास में लेकर कहा कि वह क्रेडिट कार्ड के जरिए इस पर ‘टॉपअप’ दिला सकता है। इस प्रक्रिया के लिए ₹2.5 लाख की ‘सिक्योरिटी डिपॉजिट’ मांगी गई, जिसे पीड़ित ने झांसे में आकर ट्रांसफर कर दिया। रकम मिलते ही आरोपी ने अपना मोबाइल बंद कर लिया। मुरार थाना पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह फर्जी कॉल और सोशल इंजीनियरिंग का मामला लग रहा है। साइबर टीम उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की पड़ताल कर रही है जहाँ राशि ट्रांसफर की गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि आधिकारिक बैंकिंग पोर्टल के अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति को दस्तावेज देना या अग्रिम भुगतान करना हमेशा वित्तीय जोखिम को न्यौता देता है।
ग्वालियर में एयरफोर्स ऑफिसर से 'डिजिटल डकैती': 2 क्रेडिट कार्ड से ठगों ने उड़ाए ₹1.66 लाख, एक साथ खरीदे 8 मोबाइल

ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन में पदस्थ एक ज्वाइंट वारेंट ऑफिसर साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। शातिर ठगों ने अधिकारी के दो अलग-अलग बैंकों के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर महज कुछ ही मिनटों में ₹1.66 लाख की ऑनलाइन खरीदारी कर डाली। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित अधिकारी ने न तो किसी के साथ अपना ओटीपी OTP साझा किया और न ही किसी संदिग्ध कॉल पर कोई जानकारी दी। पुलिस को अंदेशा है कि यह पूरा खेल मोबाइल में भेजी गई एक घातकAPKफाइल के जरिए रचा गया है। मूल रूप से जम्मू के रहने वाले अधिकारी ऋषि नरगोवाजो वर्तमान में महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन में तैनात हैंउनके साथ यह घटना 6 फरवरी की रात घटित हुई। रात करीब 10:11 बजे अचानक उनके मोबाइल पर ट्रांजैक्शन के मैसेज आने शुरू हुए। ठगों ने उनके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के क्रेडिट कार्ड से ₹95,020 और इंडसइंड बैंक के कार्ड से ₹70,753 की चपत लगाई। अगले दिन जब अधिकारी बैंक पहुंचेतो पता चला कि इन पैसों से कुल 8 महंगे मोबाइल फोन खरीदे गए हैं। अधिकारी ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराईजिसके बादई-जीरो एफआईआरके माध्यम से मामला महाराजपुरा थाने भेजा गया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि अधिकारी के मोबाइल पर कोई संदिग्ध लिंक याAPKफाइल आई होगीजिसे अनजाने में ओपन करने से उनके फोन का पूरा एक्सेस ठगों के पास चला गया। इससे ठगों ने बिना कॉल किए ही ओटीपी और कार्ड की डिटेल्स हैक कर लीं। फिलहालसाइबर सेल उस आईडी और डिलीवरी एड्रेस को ट्रैक कर रही हैजहाँ इन 8 मोबाइल फोनों को मंगवाया गया है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि किसी भी अनजान लिंक या फाइल को ओपन करना वित्तीय जोखिम का कारण बन सकता है।
बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष नेता प्रतिपक्ष ने पेश किए सबूत

भाेपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रहीं निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में मंगलवार को मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के समक्ष अहम सुनवाई हुई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए दलबदल से जुड़े कथित सबूत प्रस्तुत किए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बताया कि इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विधानसभा से यह स्पष्ट करने को कहा था कि अब तक क्या कार्रवाई की गई है। विधानसभा की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि प्रकरण विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है और उस पर सक्रिय रूप से कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि दलबदल से जुड़े मामलों में 90 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए। भाजपा मंच से सदस्यता ग्रहण करने के प्रमाण पेश उमंग सिंघार ने दावा किया कि उन्होंने स्पीकर के समक्ष ऐसे पुख्ता प्रमाण रखे हैं, जिनसे यह साबित होता है कि विधायक निर्मला सप्रे ने भाजपा के मंच से सार्वजनिक रूप से सदस्यता ग्रहण की थी। इसके साथ ही उनके बयान और अन्य दस्तावेज भी सौंपे गए हैं, जो दलबदल की पुष्टि करते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने उम्मीद जताई कि विधानसभा अध्यक्ष संवैधानिक दायित्व निभाते हुए इस मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध निर्णय लेंगे। हाईकोर्ट में 27 फरवरी को अगली सुनवाई इस दलबदल प्रकरण से जुड़ी याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। इससे पहले चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की डबल बेंच के समक्ष सरकार की ओर से बताया गया था कि मामला स्पीकर के पास विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने 15 जनवरी को सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया था और स्थगन याचिका स्वीकार कर ली थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होनी है। तब तक यह देखा जाएगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस पर कोई निर्णय लेते हैं या नहीं। भाजपा पर टालमटोल का आरोप नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह इस मामले को जानबूझकर टाल रही है, क्योंकि उसे उपचुनाव से डर है। उन्होंने कहा कि भाजपा को आशंका है कि यदि बीना सीट पर उपचुनाव हुए तो कांग्रेस की जीत तय है, इसी वजह से निर्णय में देरी की जा रही है। सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा कोर्ट में अपने जवाबों के जरिए कानून की व्याख्या को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। 10–15 दिनों में फैसले की उम्मीद विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने कहा कि अध्यक्ष सभी पक्षों को सुन रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले 8 से 15 दिनों के भीतर इस मामले में निर्णय आ जाएगा। कांग्रेस पार्टी ने भरोसा जताया है कि लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा के अनुसार सच्चाई के आधार पर फैसला लिया जाएगा।
जंगली हाथी पहुंचा अनूपपुर नगर, वन अमला नदारद

अनूपपुर, । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में पिछले 50 दिनों से डेरा डाले हुए हाथियों के दल में से एक दंतैल हाथी सोमवार सुबह शहरी क्षेत्र में पहुंच गया। यह हाथी जिला मुख्यालय अनूपपुर से महज 1 किलोमीटर दूर आरटीओ कार्यालय के पीछे विचरण करता देखा गया। इस दौरान वन विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी दोपहर तक मौके पर नहीं पहुंचा था। हाथी को देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं। ग्रामीणों ने हाथी को अपने गांव और खेतों की ओर आने से रोकने के लिए आग जलाकर और पटाखे फोड़कर उसे भगाने का प्रयास किया। चारों तरफ से घिरने के कारण हाथी आक्रामक हो गया और बार-बार भीड़ की ओर दौड़ लगा रहा था, जिससे भगदड़ की स्थिति बन गई। ग्रामीणों ने वन विभाग की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि पूर्व में इसी तरह की अनदेखी के कारण जैतहरी में दो लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन प्रशासन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जानकारी के अनुसार, यह नर हाथी रविवार रात सेंदुरी से रेलवे लाइन और तिपान नदी पार कर बेलापार पहुंचा था। सोमवार सुबह इसने अनूपपुर-जैतहरी मुख्य मार्ग पार किया और आरटीओ ऑफिस के पीछे पलास के जंगलों में आ गया। वर्तमान में यह घनी आबादी वाले हर्री-बर्री गांव से मात्र 1 किलोमीटर दूर है। हाथियों का जोड़ा धनगवां के जंगल में छिपे बताया गया कि हाथियों का यह समूह 9 दिन पहले दो हिस्सों में बंट गया था। दो हाथियों का जोड़ा फिलहाल धनगवां बीट के जंगल में स्थिर है, जबकि यह दंतैल हाथी सोनमोहरी के रास्ते फसलों को रौंदते हुए शहर के करीब आ पहुंचा है। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की है कि हाथी की मौजूदगी और ग्रामीणों की भारी भीड़ के बीच वन अमले की अनुपस्थिति किसी बड़ी घटना का कारण बन सकती है। उनका मानना है कि यदि समय रहते हाथी को सुरक्षित गलियारे की ओर नहीं मोड़ा गया, तो रिहायशी इलाकों में जनहानि का खतरा बढ़ सकता है।
ED की बड़ी कार्रवाई: नगर निगम के पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी की 1.06 करोड़ की संपत्ति कुर्क, आय से अधिक संपत्ति का आरोप

इंदौर । प्रवर्तन निदेशालय ED ने इंदौर में आय से अधिक संपत्ति आनुपातिक संपत्ति मामले में बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम में पदस्थ रहे पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार और उनके परिजनों की कुल 1 करोड़ 6 लाख रुपए की संपत्ति कुर्क की गई है। यह कार्रवाई ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की जा रही जांच के दौरान की गई है। ED की जांच में यह तथ्य सामने आया कि 2007 से 2022 के बीच राजेश परमार ने अपनी आय से अधिक 175 प्रतिशत संपत्ति अर्जित की थी। इस दौरान उन्होंने अपनी आय और संपत्ति के संबंध में कोई पुख्ता दस्तावेज या प्रमाण पेश नहीं कर सके।कुर्क की गई संपत्ति में एक रहवासी मकान, प्लॉट, फ्लैट और कृषि भूमि शामिल है। ED ने इस कार्रवाई के बाद संबंधित संपत्तियों को जब्ती में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति निर्माण के खिलाफ सरकार की नीतियों और ED की सख्ती को दर्शाती है। अब जांच एजेंसी यह देखेगी कि संपत्ति का स्रोत कहां से आया और क्या कोई अन्य संदिग्ध लेन-देन जुड़ा है।