सपनों की तिकड़ी टूटी: भागम भाग 2 में नहीं दिखेंगे गोविंदा, अब मनोज बाजपेयी के साथ 'डबल रोल' में दिखेंगे परेश रावल

नई दिल्ली। साल 2006 में आई फिल्म ‘भागम भाग’ ने अपनी जबरदस्त कॉमेडी और अक्षय-गोविंदा-परेश की तिगड़ी से दर्शकों को लोटपोट कर दिया था। सालों से फैंस इसके दूसरे भाग का इंतजार कर रहे थे, लेकिन ‘भागम भाग 2’ से जुड़ी एक ताजा खबर ने प्रशंसकों को थोड़ा निराश कर दिया है। फिल्म के सीक्वल से कॉमेडी किंग गोविंदा बाहर हो गए हैं और उनकी जगह इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी ने ले ली है। दिग्गज अभिनेता परेश रावल ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान इस खबर की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस बार अक्षय कुमार और मनोज बाजपेयी का एक बिल्कुल ‘यूनीक’ और अनूठा कॉम्बिनेशन देखने को मिलेगा। परेश रावल के अनुसार, मनोज बाजपेयी जैसे गंभीर और वर्सेटाइल अभिनेता का कॉमेडी जॉनर में अक्षय के साथ आना फिल्म को एक नई ऊर्जा और अलग स्तर पर ले जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह सेट पर गोविंदा को मिस करेंगे, क्योंकि पहली फिल्म की सफलता में गोविंदा की कॉमिक टाइमिंग का बहुत बड़ा हाथ था। दिलचस्प बात यह है कि इस सीक्वल में परेश रावल खुद डबल रोल निभाते नजर आएंगे। परेश इससे पहले ‘अंदाज अपना अपना’ और ‘ओए लकी! लकी ओए!’ जैसी फिल्मों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित कर चुके हैं। फिल्म में फीमेल लीड की बात करें तो मीनाक्षी चौधरी की एंट्री हो चुकी है, जो अक्षय कुमार के अपोजिट नजर आएंगी। वहीं, मनोज बाजपेयी के लिए अभिनेत्री की तलाश अभी जारी है। गोविंदा का फिल्म से बाहर होना उनके प्रशंसकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है, क्योंकि वे लंबे समय से उनकी बड़े पर्दे पर वापसी का इंतजार कर रहे थे। दूसरी तरफ, अक्षय कुमार और परेश रावल की जोड़ी आने वाले समय में ‘हेरा फेरी 3’, ‘वेलकम टू द जंगल’ और ‘भूत बंगला’ जैसी बड़ी फिल्मों में भी साथ दिखने वाली है। ‘भागम भाग 2’ में हुए इस बदलाव के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मनोज बाजपेयी अपनी संजीदगी और कॉमेडी के मिश्रण से गोविंदा की कमी को पूरा कर पाएंगे।
सूदखोरी के जाल में उलझकर बीजेपी नेता ने गंवाई जान, कांग्रेस नेता पर मौत से पहले लगाए गंभीर आरोप

खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहाँ भारतीय जनता पार्टी के नेता जितेंद्र चौधरी उर्फ जीतू ने सूदखोरी और कर्ज के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। आरोप है कि एक पूर्व कांग्रेस पार्षद और उनके परिवार द्वारा लगातार दी जा रही प्रताड़ना से तंग आकर जीतू ने यह आत्मघाती कदम उठाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बीजेपी नेता ने कांग्रेस नेता के घर जाकर ही जहरीला पदार्थ खा लिया। 50 लाख का हिसाब और जानलेवा धमकी जानकारी के मुताबिक खंडवा के लवकुश नगर निवासी जितेंद्र चौधरी मंगलवार सुबह बड़गांव भीला रोड स्थित पूर्व कांग्रेस पार्षद गणेश सकरगाये के घर पहुंचे थे। मामला करीब 50 लाख रुपये के लेनदेन के हिसाब-किताब का था। बताया जा रहा है कि ब्याज की रकम चुकाने में असमर्थता जताने पर कांग्रेस नेता ने उन्हें कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने और उनका घर बिकवाने की धमकी दी। इस मानसिक दबाव को जीतू सहन नहीं कर पाए और उन्होंने वहीं जहरीला पदार्थ गटक लिया। अस्पताल में इलाज के दौरान मौत तबीयत बिगड़ते देख गणेश सकरगाये और उनके साथियों ने आनन-फानन में जीतू को एक निजी अस्पताल पहुँचाया जहाँ से उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में संघर्ष करने के बाद आखिरकार जितेंद्र चौधरी ने दम तोड़ दिया। मौत से पहले दिए गए अपने बयान में जीतू ने स्पष्ट रूप से गणेश सकरगाये पर सूदखोरी और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि कर्ज और बढ़ते ब्याज के कारण वे पिछले काफी समय से तनाव में थे। पुलिस जांच में जुटी मोघट थाना पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस के पास अब मृतक का मृत्यु पूर्व बयान मौजूद है जिसे जांच का मुख्य आधार बनाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लेनदेन के दस्तावेजों और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है। इस घटना के बाद शहर के सियासी गलियारों में भी तनाव देखा जा रहा है क्योंकि मामला सत्ताधारी दल के नेता और विपक्ष के पूर्व पार्षद के बीच के विवाद से जुड़ा है।
मोहन भागवत बनाम राज ठाकरे: 'भाषा की राजनीति' पर छिड़ी नई जंग, मनसे प्रमुख ने फिल्म हस्तियों की मौजूदगी को बताया 'दहसत की भीड़'

मुंबई/नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित भव्य समारोह अब एक बड़े सियासी विवाद में तब्दील हो गया है। इस कार्यक्रम में सलमान खान, अक्षय कुमार, रवीना टंडन और करण जौहर जैसी दिग्गज फिल्मी हस्तियों की मौजूदगी ने जितनी सुर्खियां बटोरी थीं, उससे कहीं ज्यादा चर्चा अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के तीखे बयानों की हो रही है। राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला करते हुए दावा किया है कि मंच पर बैठे सितारे किसी वैचारिक प्रेम के कारण नहीं, बल्कि सत्ता की दहशत के कारण वहां जुटे थे। राज ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि समारोह में शामिल लोग मोदी सरकार के डर से वहां मौजूद थे। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा कि अगर यह डर नहीं होता, तो कोई भी इतने उबाऊ और बोरिंग भाषण सुनने के लिए अपना समय खराब नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ प्रमुख मोहन भागवत को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि यह भीड़ उनके प्रति स्नेह या सम्मान के कारण उमड़ी थी। उनके अनुसार, यह केंद्र की सत्ता का रसूख था जिसने बॉलीवुड को कतार में खड़ा कर दिया। हमले का दूसरा बड़ा मोर्चा ‘भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता’ पर था। दरअसल, मोहन भागवत ने अपने संबोधन में भाषा के नाम पर आंदोलन करने को एक ‘बीमारी’ करार दिया था। इस पर पलटवार करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि भारत में राज्यों का गठन ही भाषाई आधार पर हुआ है। कर्नाटक, तमिलनाडु, बंगाल और गुजरात जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति से प्रेम करना अगर बीमारी है, तो यह पूरे देश में फैली है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब बाहरी लोग किसी प्रदेश में आकर वहां की संस्कृति का अनादर करते हैं, तब स्थानीय लोगों का आक्रोश स्वाभाविक है, इसे बीमारी कहना वास्तविकता को नकारना है। राज ठाकरे ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा कि जब गुजरात में यूपी-बिहार के लोगों को निकाला गया था, तब भाईचारे का संदेश देने वाले ये लोग कहां थे? उन्होंने मराठी समाज की सहनशीलता को कमजोरी समझने की चेतावनी देते हुए कहा कि संघ को गैर-राजनीतिक होने का दावा छोड़कर परोक्ष राजनीति बंद करनी चाहिए। अंत में उन्होंने चुनौती दी कि यदि संघ सच में सद्भाव चाहता है, तो उसे पहले केंद्र द्वारा थोपी जा रही हिंदी पर खुलकर अपना स्टैंड साफ करना चाहिए।
अजय देवगन vs प्रकाश राज: क्या विजय सालगांवकर के बुने जाल को काट पाएंगे नए विलेन? 'दृश्यम 3' से जुड़ी बड़ी अपडेट

नई दिल्ली। अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दृश्यम 3’ को लेकर इन दिनों बॉलीवुड गलियारों में जबरदस्त हलचल मची हुई है। फिल्म की आधिकारिक घोषणा के बाद से ही फैंस इस बात को लेकर उत्साहित थे कि इस बार विजय सालगांवकर का सामना किससे होगा। लेकिन हाल ही में आए एक बड़े अपडेट ने सबको चौंका दिया है। खबर है कि फिल्म के दूसरे भाग में पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाने वाले अक्षय खन्ना अब इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा नहीं होंगे। उनकी जगह इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज की एंट्री हुई है, जिन्होंने फिल्म की शूटिंग भी शुरू कर दी है। शुरुआती कयासों में कहा जा रहा था कि प्रकाश राज, अक्षय खन्ना वाले पुलिस ऑफिसर के रोल को ही आगे बढ़ाएंगे, लेकिन ताजा सूत्रों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। बताया जा रहा है कि प्रकाश राज का किरदार न केवल नया होगा, बल्कि बेहद अप्रत्याशित और पेचीदा भी होगा। निर्देशक अभिषेक पाठक इस बार कहानी को एक ऐसे मोड़ पर ले जा रहे हैं, जिसकी कल्पना दर्शकों ने पहले कभी नहीं की होगी। प्रकाश राज अपनी दमदार आवाज और स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में उनका जुड़ना फिल्म के सस्पेंस को एक अलग स्तर पर ले जाने वाला साबित हो सकता है। अक्षय खन्ना के अचानक फिल्म छोड़ने के पीछे कई दिलचस्प कारण सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि शूटिंग शुरू होने से महज 5 दिन पहले उन्होंने प्रोजेक्ट से किनारा कर लिया। रिपोर्ट्स की मानें तो अक्षय अपने किरदार के लुक के लिए विग का इस्तेमाल करना चाहते थे, जबकि मेकर्स पिछले भाग की निरंतरता बनाए रखने के लिए उनके बाल्ड गंजे लुक पर ही अड़े थे। हालांकि, फीस को लेकर चल रही तमाम अटकलों को मेकर्स ने गलत करार दिया है। फिलहाल अक्षय खन्ना अब सनी देओल के साथ फिल्म ‘इक्का’ में व्यस्त हैं, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। स्टार स्टूडियोज के बैनर तले बन रही ‘दृश्यम 3’ के लिए मेकर्स ने 2 अक्टूबर 2026 की तारीख को लॉक कर दिया है। गांधी जयंती के मौके पर रिलीज होना इस फ्रेंचाइजी के लिए हमेशा लकी रहा है, क्योंकि कहानी का मुख्य आधार इसी तारीख से जुड़ा है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रकाश राज की मौजूदगी विजय सालगांवकर के ‘परफेक्ट क्राइम’ की गुत्थी को सुलझा पाएगी या इस बार भी विजय पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब रहेगा।
मध्य प्रदेश का महाबजट तैयार, 4.70 लाख करोड़ के करीब आकार; 18 फरवरी को विधानसभा में होगा पेश

भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार इस बार राज्य का बजट आकार करीब 4.70 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 4.21 लाख करोड़ रुपये के बजट से लगभग 12 प्रतिशत अधिक होगा। बजट 18 फरवरी को विधानसभा में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश की आर्थिक दिशा और विकास की प्राथमिकताएं स्पष्ट होंगी। बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बजट का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। बैठक में विकास योजनाओं वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति पर विशेष चर्चा हुई। सरकार इस बार राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने पर खास जोर दे रही है ताकि राज्य की वित्तीय स्थिति संतुलित और मजबूत बनी रहे। वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ विकास की रफ्तार बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती और प्राथमिकता दोनों है। सूत्रों के मुताबिक इस बार पूंजीगत व्यय कैपिटल एक्सपेंडिचर में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। इसका सीधा असर बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ेगा। सड़क पुल सिंचाई परियोजनाएं शहरी अधोसंरचना शिक्षा संस्थानों का विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर बड़े निवेश की तैयारी है। सरकार का मानना है कि पूंजीगत निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ हो रहा है। इस दौरान बजट प्रस्तुति के अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत विषयों पर चर्चा होगी। यह बजट मोहन यादव सरकार का तीसरा प्रमुख बजट माना जा रहा है जिससे जनता और विभिन्न वर्गों को काफी उम्मीदें हैं। सरकार के संकेत हैं कि इस बजट में किसान कल्याण योजनाओं को मजबूती दी जाएगी। कृषि क्षेत्र में तकनीकी सुधार सिंचाई विस्तार और समर्थन मूल्य से जुड़ी व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के लिए प्रावधान बढ़ने की संभावना है। युवाओं के लिए कौशल विकास स्टार्टअप प्रोत्साहन और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाने जैसे कदम भी बजट का हिस्सा बन सकते हैं। ग्रामीण विकास पेयजल बिजली और आवास योजनाओं के लिए भी पर्याप्त राशि आवंटित किए जाने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि यह बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का मॉडल पेश करेगा और प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा। अब निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हैं जब विधानसभा में इस ‘महाबजट का औपचारिक ऐलान होगा।
पीएम आवास पर अफसरशाही का ताला, टूटी झोपड़ियों में सिमटा बैगा परिवारों का सपना

शहडोल । शहडोल संभाग के अनूपपुर जिले के बरगंवा अमलाई नगर परिषद क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना की हकीकत सवालों के घेरे में है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गरीब वंचित और आदिवासी परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराना है लेकिन वार्ड क्रमांक 1 2 और 5 में रहने वाले बैगा आदिवासी परिवार आज भी जर्जर झोपड़ियों में जीवन बिताने को मजबूर हैं। बारिश में टपकती छत गर्मी में झुलसाती धूप और सर्दियों में हाड़ कंपा देने वाली ठंड इनके लिए रोजमर्रा की नियति बन चुकी है। योजनाओं की फाइलों में दर्ज नाम और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी यहां साफ दिखाई देती है। इन्हीं परिवारों में से एक हैं राम प्रसाद बैगा जो अपनी बुजुर्ग मां के साथ एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहते हैं। दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह दो वक्त की रोटी जुटाने वाले राम प्रसाद वर्षों से प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन कर रहे हैं। नगर परिषद से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार चक्कर काट चुके हैं लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। उनकी वृद्ध मां की आंखों में एक ही सपना है मौत से पहले अपने सिर पर एक पक्की छत देखना। लेकिन समय बीतता जा रहा है और उनका सपना अब भी अधूरा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में ऐसे प्रभावशाली और संपन्न लोगों को भी पीएम आवास का लाभ मिल चुका है जिनके पास पहले से पक्के मकान वाहन और अन्य संसाधन मौजूद हैं। जबकि वास्तविक जरूरतमंद बैगा परिवार सूची में नाम होने के बावजूद लाभ से वंचित हैं। इससे योजना की पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। बैगा समाज के लोगों का कहना है कि उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार शिकायत की लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। अब वे संभागीय मुख्यालय तक गुहार लगा रहे हैं फिर भी अफसरशाही की चुप्पी उनकी उम्मीदों को तोड़ रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सम्मानजनक जीवन देना है लेकिन बरगंवा अमलाई में यह उद्देश्य अधूरा नजर आ रहा है। जिन परिवारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए वे आज भी असुरक्षित और अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि क्या योजना का लाभ सही मायनों में जरूरतमंदों तक पहुंचेगा या फिर कागजों में ही सीमित रह जाएगा। बैगा परिवारों की पथराई आंखें आज भी अपने हक की छत का इंतजार कर रही हैं।
डॉक्टर बनने की चाहत और सिलेबस का भारी तनाव; भोपाल GMC की छात्रा की बाथरूम में मिली लाश, पीजी इंचार्ज का बड़ा खुलासा

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एक बार फिर मानसिक तनाव और पढ़ाई के दबाव ने एक उभरते हुए करियर को हमेशा के लिए शांत कर दिया। आलीराजपुर जिले की रहने वाली एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी ने कोहेफिजा स्थित एक निजी पीजी (पेइंग गेस्ट) के बाथरूम में एसिड पीकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार सुबह जब रोशनी अपने कमरे से बाहर नहीं निकली और सहेलियों के बार-बार बुलाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला, तब इस खौफनाक वारदात का खुलासा हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही आलीराजपुर से भोपाल पहुंचे पिता वंतर सिंह कलेश की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोशनी बचपन से ही मेधावी थी और उसका सपना एक सफल डॉक्टर बनने का था। नीट परीक्षा में 400 से अधिक अंक हासिल कर उसने अपनी मेहनत के दम पर गांधी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। पिता के अनुसार, रोशनी पिछले कुछ दिनों से घर पर ही थी और शनिवार को ही उन्होंने खुद उसे भोपाल जाने वाली ट्रेन में बैठाया था। हालांकि रोशनी ने बातों-बातों में पढ़ाई के दबाव का जिक्र किया था, लेकिन वह हमेशा हिम्मत दिखाते हुए कहती थी, “पापा, मैं संभाल लूंगी, मैं पढ़ लूंगी।” किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि पढ़ाई का यह बोझ उसकी जान ले लेगा। दूसरी ओर, पीजी की संचालक करुणा नायर के बयानों ने मामले में एक नया मोड़ दे दिया है। संचालक का दावा है कि रोशनी जब दो दिन पहले घर से लौटी थी, तभी से वह अपनी सहेलियों के सामने सुसाइड करने की बातें कर रही थी। मंगलवार सुबह जब वह कॉलेज के लिए तैयार होकर बाहर नहीं निकली, तो सहेलियों ने गार्ड को बुलाकर दरवाजा तुड़वाया। भीतर का नजारा भयावह था; रोशनी बाथरूम में बेसुध पड़ी थी और पास ही एसिड की खाली बोतल पड़ी मिली। उसे तुरंत हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है कि एसिड पीने के कारण अंदरूनी अंगों के बुरी तरह जल जाने से उसकी मृत्यु हुई। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन कविता एन. सिंह ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि रोशनी एक ‘डे-स्कॉलर’ छात्रा थी और अक्टूबर में ही उसने कॉलेज में प्रवेश लिया था। प्रारंभिक जांच और मोबाइल संदेशों से यह संकेत मिले हैं कि रोशनी को मेडिकल का सिलेबस समझने में कठिनाई हो रही थी। वह कड़ी मेहनत कर रही थी, लेकिन उसे लग रहा था कि वह विषयों को ठीक से समझ नहीं पा रही है। इसी ‘एकेडमिक स्ट्रेस’ के कारण वह गहरे अवसाद में चली गई थी। पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या तनाव का कारण सिर्फ पढ़ाई थी या इसके पीछे कुछ और भी वजहें छिपी हैं।
भारत में न्यायाधीशों की संख्या चीन-यूएस के मुकाबले बेहद कम, बिहार सबसे पिछड़ा

नई दिल्ली। देश की जिला अदालतों में मुकदमों के भारी बोझ के बीच प्रति दस लाख जनसंख्या पर सिर्फ 22 जज हैं। विधि आयोग और सुप्रीम कोर्ट के अनुसार 2007 तक यह संख्या कम से कम 50 जज होनी चाहिए थी। खासकर बिहार उत्तर प्रदेश झारखंड और पश्चिम बंगाल में यह औसत राष्ट्रीय स्तर से भी कम है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में जिला अदालतों के लिए 25 439 जजों की स्वीकृत संख्या है लेकिन करीब 5 000 पद अभी रिक्त हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार जिला अदालतों में प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 22 जज ही उपलब्ध हैं। आज की अनुमानित जनसंख्या 140 करोड़ से अधिक होने के कारण यह अनुपात और घट सकता है। विधि आयोग ने 1987 में अपनी 120वीं रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 50 जज होने चाहिए ताकि न्याय की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित हो। सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में ऑल इंडिया जज एसोसिएशन बनाम भारत सरकार मामले में इसे लागू करने का आदेश दिया था। भारत चीन और अमेरिका से काफी पीछे जनसंख्या और जज के अनुपात की तुलना में भारत अन्य देशों से बहुत पीछे है।चीन: प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 300 जजअमेरिका: 150 जजयूरोप: 220 जज सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों की स्थिति सुप्रीम कोर्ट: प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 0.028 जज स्वीकृत क्षमता 34 वर्तमान में 33 कार्यरतउच्च न्यायालय: प्रति 10 लाख जनसंख्या पर 0.92 जज स्वीकृत क्षमता 1 122 लगभग 300 पद रिक्त प्रमुख राज्यों में प्रति 10 लाख जनसंख्या जजों की स्थिति: बिहार – 19.45उत्तर प्रदेश – 18.52झारखंड – 21.43उत्तराखंड – 29.55दिल्ली – 53.43पश्चिम बंगाल – 12.05मध्य प्रदेश – 27.92गुजरात – 28.46असम – 15.54मिजोरम – 67.44 विश्लेषकों का कहना है कि जजों की कमी और बढ़ती जनसंख्या के कारण अदालतों में न्याय की प्रक्रिया धीमी हो रही है और त्वरित न्याय मिलना मुश्किल हो रहा है।
बांग्लादेश को अमेरिका से मिली टेक्सटाइल छूट, भारत के कपड़ा उद्योग के लिए चिंता का विषय

नई दिल्ली। अमेरिका और बांग्लादेश के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए चुनौती बनता दिख रहा है। इस समझौते के तहत बांग्लादेश से अमेरिका को जाने वाले कपड़े पर आयात शुल्क शून्य रखा जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी। उद्योग का कहना है कि अगर बांग्लादेश को शून्य शुल्क पर निर्यात करने की सुविधा मिल रही है तो भारत को भी समान लाभ मिलना चाहिए। मसौदे के अनुसार बांग्लादेश जितने मूल्य का कॉटन अमेरिका को भेजेगा उतने मूल्य के कपड़े और वस्त्र शून्य शुल्क पर अमेरिका को निर्यात कर पाएगा। इससे बांग्लादेशी कंपनियां अमेरिकी बाजार में सस्ती दरों पर अपने उत्पाद बेच पाएंगी। बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और वहां सस्ती श्रमशक्ति के कारण वस्त्र उत्पादन की लागत कम है। वर्तमान में बांग्लादेश अमेरिका को सालाना 9-10 अरब डॉलर के कपड़े निर्यात करता है और शून्य शुल्क मिलने के बाद यह निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है।भारत के लिए चुनौती भारत का कुल टेक्सटाइल निर्यात 36-37 अरब डॉलर है जिसमें 2024-25 में लगभग 10 अरब डॉलर अमेरिका को गया। भारत मुख्य रूप से रेडीमेड गारमेंट्स कॉटन मैन-मेड फैब्रिक्स और होम टेक्सटाइल्स निर्यात करता है। बांग्लादेश को मिलने वाली छूट के कारण भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में नुकसान होने का खतरा है।उद्योग की मांग टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विजय कुमार अग्रवाल का कहना है कि अमेरिका द्वारा बांग्लादेश को दी जा रही छूट से भारतीय निर्यातकों को नुकसान होगा। इसलिए उद्योग संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं कि भारत को भी बांग्लादेश जैसी छूट दी जाए ताकि भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।
महाकाल का महापर्व 15 फरवरी को 44 घंटे तक नॉनस्टॉप दर्शन और दोपहर 12 बजे अद्भुत भस्म आरती का दिव्य आयोजन

उज्जैन का विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भक्ति और आस्था के महासागर में डूबने जा रहा है। इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 रविवार को मनाया जाएगा और इसे लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए महाकाल मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे ताकि देश और विदेश से आने वाले लाखों भक्त बिना किसी बाधा के बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें। 6 फरवरी से ही महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि के साथ भगवान शिव के विवाहोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। यह आयोजन 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे मंदिर परिसर को भव्य और आकर्षक सजावट से सजाया जा रहा है। फूलों की विशेष साज सज्जा के साथ महादेव का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महाशिवरात्रि के दिन 15 फरवरी को सुबह 6 बजे से दर्शन प्रारंभ होंगे और 16 फरवरी की सुबह तक बिना किसी विश्राम के जारी रहेंगे। इन 44 घंटों के दौरान मंदिर नॉनस्टॉप खुला रहेगा। श्रद्धालु दिन और रात किसी भी समय बाबा महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन भक्तों के लिए की गई है जो दूर दराज से उज्जैन पहुंचते हैं और महाशिवरात्रि पर महाकाल के साक्षात दर्शन की अभिलाषा रखते हैं। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। इस दिन चारों प्रहर महादेव की पूजा की जाती है। भक्त व्रत रखते हैं और रात्रि जागरण कर शिव नाम का स्मरण करते हैं। उज्जैन नगरी इस अवसर पर पूरी तरह शिवमय हो जाती है। हर ओर हर हर महादेव के जयघोष गूंजते हैं और वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो जाता है। इस पर्व का सबसे विशेष और आकर्षक आयोजन 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे होने वाली भस्म आरती होगी। महाकालेश्वर मंदिर में दोपहर की भस्म आरती साल में केवल एक बार महाशिवरात्रि पर ही आयोजित की जाती है। यह अद्भुत और दुर्लभ दृश्य देखने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल को फलों फूलों और सप्तधान्य से निर्मित भव्य सेहरा बांधा जाता है। यह श्रृंगार अपने आप में अद्वितीय होता है और श्रद्धालुओं के लिए दिव्य अनुभूति का क्षण बन जाता है। महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि का यह भव्य समापन 16 फरवरी को भस्म आरती के साथ होगा। उज्जैन का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत खास है। महाकाल की नगरी में इस दौरान उमड़ने वाली आस्था यह दर्शाती है कि भगवान शिव के प्रति श्रद्धा आज भी उतनी ही प्रगाढ़ है जितनी सदियों पहले थी। महाकाल के दरबार में इस महापर्व पर शामिल होना हर शिवभक्त के लिए सौभाग्य की बात मानी जाती है और इस वर्ष 44 घंटे के निरंतर दर्शन ने इस उत्सव को और भी ऐतिहासिक बना दिया है।