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कांग्रेस नेता का रील के लिए 'धुरंधर स्‍टाइल', रहमान डकैत के अंदाज में लहराई गन, पुलिस ने शुरू की जांच

नई दिल्ली । कर्नाटक के कलबुर्गी में एक कांग्रेस नेता ने ब्‍लॉकबस्‍टर फिल्‍म धुरंधर के बेहद लोकप्रिय गाने Fa9la पर रील बनाकर विवाद खड़ा कर दिया है. इस रील में कांग्रेस विधायक के बेहद करीबी मतीन पटेल वीडियो में पिस्तौल और बंदूक लहराते नजर आते हैं. अब इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. कलबुर्गी के पुलिस कमिश्‍नर शरणप्पा एसडी ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक व्यक्ति हथियार लहराता दिख रहा है. हम वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को जानते हैं. मैंने अधिकारियों को यह पता लगाने के लिए कहा है कि वीडियो कहां बनाया गया और यह किस पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है. पुलिस कमिश्‍नर ने दिए निर्देश साथ ही पुलिस कमिश्‍नर ने कहा कि उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया है कि पता लगाएं कि किस हथियार का इस्तेमाल किया गया था और क्या वह असली है या नहीं. साथ ही कहा कि अगर यह असली है तो हम देखेंगे कि क्या यह लाइसेंसी था या नहीं. अगर यह लाइसेंसी था तो हम जांच करेंगे कि क्या शर्तों का उल्लंघन हुआ था. शरणप्पा ने कहा कि अगर यह अवैध पाया गया, तो शस्त्र अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी. रहमान डकैत के अंदाज में डांस वीडियो में मतीन अपनी काली एसयूवी से उतरते हैं और फिर अपने दोस्तों के साथ डांस करते हुए आगे बढ़ते हैं यह ठीक बिलकुल वैसा ही है, जैसा फिल्‍म धुरंधर में रहमान डकैत अक्षय खन्ना बलूचिस्तान में एक हथियार डीलर के कैंप में घुसते वक्‍त करते हैं.

आज का पंचांग 11 फरवरी 2026 फाल्गुन माह की कृष्ण नवमी पर करें गणपति पूजन मिलेगा बुद्धि समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद

नई दिल्ली। 11 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है और साथ ही बुधवार का पावन संयोग भी बन रहा है। हिंदू धर्म में बुधवार का दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है। गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा अर्चना करता है उसके जीवन के समस्त विघ्न बाधाएं दूर होती हैं और उसे बुद्धि विवेक सफलता तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में बुध दोष होता है उनके लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है। आज के दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके साथ ही मोदक और शमी के पत्ते चढ़ाने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा के समय ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और कार्यों में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं। यदि कोई नया कार्य आरंभ करना चाहते हैं तो आज का दिन उपयुक्त साबित हो सकता है बशर्ते शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाए। आज का अमृत काल प्रातः 03:50 से 05:38 तक रहेगा। यह समय अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त ब्रह्म मुहूर्त 05:28 से 06:16 तक है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ध्यान जप और पूजा करने से आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12:41 से 2:04 तक रहेगा। इस अवधि में किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। यम गण्ड प्रातः 8:29 से 9:53 तक रहेगा जबकि कुलिक काल 11:17 से 12:41 तक है। दुर्मुहूर्त 12:18 से 01:03 तक रहेगा और वर्ज्यम् सायं 05:07 से 06:54 तक है। इन समयों में शुभ कार्यों से परहेज करना ही उचित माना जाता है। सूर्योदय प्रातः 7:05 पर होगा और सूर्यास्त सायं 6:16 पर। चंद्रोदय 11 फरवरी को प्रातः 2:07 पर हुआ है जबकि चंद्रास्त दोपहर 12:48 पर होगा। ग्रह नक्षत्रों की यह स्थिति साधना और आराधना के लिए अनुकूल मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन सादगी और श्रद्धा के साथ गणेश पूजन करने से जीवन में स्थिरता आती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह दिन विशेष लाभकारी हो सकता है। व्यापार और करियर से जुड़े लोगों को भी आज भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इस प्रकार 11 फरवरी 2026 का यह दिन आस्था विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। यदि शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए भगवान गणेश की आराधना की जाए तो जीवन में सुख शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

MP में दिन होने लगे गर्म, लेकिन रातें अभी भी ठंडी, 15 शहरों में बढ़ने लगा पारा

भोपाल।  मध्य प्रदेश में अब दिन धीरे-धीरे गर्म होने लगे हैं। मंगलवार को भोपाल, इंदौर और अन्य 13 शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। लेकिन रातें अभी भी ठंडी बनी हुई हैं। मंगलवार की रात प्रदेश के 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिन तापमान में थोड़ी गिरावट हो सकती है। फिलहाल देश में दो मौसमीय सिस्टम सक्रिय हैं, लेकिन कमजोर होने की वजह से प्रदेश में बारिश की संभावना कम है। वहीं, 13 और 16 फरवरी को पश्चिमी हिमालय में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय हो सकता है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी दिख सकता है। इससे दिन और रात के तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। दिन में नर्मदापुरम सबसे गर्म, रात में कल्याणपुर सबसे ठंडी मंगलवार को प्रदेश के भोपाल, इंदौर, दमोह, खजुराहो, मंडला, सागर, टीकमगढ़, बैतूल, गुना, धार, खंडवा, खरगोन, रायसेन, रतलाम और नर्मदापुरम में पारा 30 डिग्री से ऊपर गया। नर्मदापुरम सबसे ज्यादा गर्म, 33 डिग्री के साथ, रहा। रात में सबसे ठंडा रहा शहडोल का कल्याणपुर, जहां न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री दर्ज किया गया। अन्य शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार रहा:कटनी (करौंदी) – 5.9 डिग्रीअनूपपुर (अमरकंटक) – 7.8 डिग्रीखजुराहो – 8.2 डिग्रीपचमढ़ी-उमरिया – 8.4 डिग्रीरीवा – 8.5 डिग्रीशिवपुरी – 9 डिग्रीमंडला – 9.1 डिग्रीदतिया – 9.5 डिग्रीनौगांव – 9.8 डिग्रीपहाड़ों में बर्फ पिघलने के बाद मौसम में आएगा बदलाव मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बारिश की संभावना है। इससे अगले दो दिन प्रदेश में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत अधिकांश शहरों में मंगलवार को तेज धूप खिली रही, जिससे दिन का तापमान बढ़ा। लेकिन रात और सुबह ठंड का असर बरकरार रहेगा। आने वाले दिनों का पूर्वानुमान: 12 फरवरी: दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी, दिन में तेज धूप13 फरवरी: तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट, रात और सुबह ठंड बनी रहेगी लेकिन रातें अभी भी ठंडी बनी हुई हैं। मंगलवार की रात प्रदेश के 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिन तापमान में थोड़ी गिरावट हो सकती है। फिलहाल देश में दो मौसमीय सिस्टम सक्रिय हैं, लेकिन कमजोर होने की वजह से प्रदेश में बारिश की संभावना कम है। वहीं, 13 और 16 फरवरी को पश्चिमी हिमालय में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय हो सकता है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी दिख सकता है। इससे दिन और रात के तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। दिन में नर्मदापुरम सबसे गर्म, रात में कल्याणपुर सबसे ठंडी मंगलवार को प्रदेश के भोपाल, इंदौर, दमोह, खजुराहो, मंडला, सागर, टीकमगढ़, बैतूल, गुना, धार, खंडवा, खरगोन, रायसेन, रतलाम और नर्मदापुरम में पारा 30 डिग्री से ऊपर गया। नर्मदापुरम सबसे ज्यादा गर्म, 33 डिग्री के साथ, रहा। रात में सबसे ठंडा रहा शहडोल का कल्याणपुर, जहां न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री दर्ज किया गया। अन्य शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार रहा:कटनी (करौंदी) – 5.9 डिग्रीअनूपपुर (अमरकंटक) – 7.8 डिग्रीखजुराहो – 8.2 डिग्रीपचमढ़ी-उमरिया – 8.4 डिग्रीरीवा – 8.5 डिग्रीशिवपुरी – 9 डिग्रीमंडला – 9.1 डिग्रीदतिया – 9.5 डिग्रीनौगांव – 9.8 डिग्रीपहाड़ों में बर्फ पिघलने के बाद मौसम में आएगा बदलाव मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बारिश की संभावना है। इससे अगले दो दिन प्रदेश में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत अधिकांश शहरों में मंगलवार को तेज धूप खिली रही, जिससे दिन का तापमान बढ़ा। लेकिन रात और सुबह ठंड का असर बरकरार रहेगा। आने वाले दिनों का पूर्वानुमान: 12 फरवरी: दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी, दिन में तेज धूप13 फरवरी: तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट, रात और सुबह ठंड बनी रहेगी

जब मास्टर राजू के लिए अमिताभ बच्चन को करना पड़ता था घंटों इंतज़ार: 'उस वक्त मेरे पास उनसे ज्यादा काम था'

नई दिल्ली । बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे बहुत कम कलाकार हुए हैं जिनके लिए सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को इंतजार करना पड़ा हो। लेकिन 70 के दशक के मशहूर चाइल्ड आर्टिस्ट राजू श्रेष्ठा जिन्हें दुनिया मास्टर राजू’ के नाम से जानती है एक ऐसे ही कलाकार थे। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान मास्टर राजू ने अपने सुनहरे दौर को याद करते हुए बताया कि एक वक्त ऐसा था जब उनके पास अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा फिल्में और काम हुआ करता था। फिल्म फरार’ के सेट का एक मजेदार किस्सा साझा करते हुए मास्टर राजू ने बताया कि अमिताभ बच्चन हमेशा से ही समय के बहुत पाबंद रहे हैं। वह सेट पर वक्त से पहले पहुँच जाते थे लेकिन चूंकि मास्टर राजू उस दौर में हर तीसरी फिल्म का हिस्सा होते थे इसलिए उनके पास समय की भारी कमी रहती थी। राजू ने बताया “मुझे यह कहते हुए हंसी आती है लेकिन उस वक्त अमित जी के पास मुझसे कम काम था। शूटिंग के दौरान मेकर्स मेरे शॉट्स को प्राथमिकता देते थे क्योंकि मुझे अगले शूट के लिए तीन घंटे में निकलना होता था। ऐसे में अमित जी के क्लोज-अप्स पहले ले लिए जाते थे और फिर उन्हें एक तरफ बैठकर तब तक इंतजार करना पड़ता था जब तक मेरे सीन्स पूरे न हो जाएं।” इतना ही नहीं मास्टर राजू ने अपनी मां और बिग बी से जुड़ा एक और दिलचस्प वाकया सुनाया। उन्होंने बताया कि फरार’ के सेट पर लंच के दौरान उनकी मां ने अमिताभ बच्चन को डांट लगा दी थी। दरअसल एक सीन के लिए अमित जी के हाथ पर नकली घाव बनाया गया था जिस पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। राजू की मां ने सफाई को लेकर सख्त होते हुए बिग बी से कह दिया था कि वह इसे कवर करें क्योंकि पास में ही सब खाना खा रहे थे। मास्टर राजू ने उस दौर के अन्य सुपरस्टार्स पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि उस समय सेट पर देरी से आना एक फैशन’ बन गया था। राजेश खन्ना विनोद खन्ना संजीव कुमार और धर्मेंद्र जैसे बड़े सितारे अक्सर देरी से पहुँचते थे लेकिन पूरी फिल्म इंडस्ट्री में केवल अमिताभ बच्चन ही इकलौते ऐसे अभिनेता थे जो हमेशा अनुशासन में रहते थे। मास्टर राजू का यह बयान उस दौर की याद दिलाता है जब एक बाल कलाकार की व्यस्तता ने बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारे को भी कतार में खड़ा कर दिया था।

शहंशाह' के वे दिन जब दरवाजे पर आते थे लेनदार: 90 करोड़ का कर्ज और 55 लीगल केस

नई दिल्ली । अमिताभ बच्चन आज भारतीय सिनेमा के शहंशाह कहे जाते हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उनके सिर से सफलता का साया पूरी तरह उठ चुका था। 90 के दशक के अंत में बिग बी अपने जीवन के सबसे अंधकारमय दौर से गुजर रहे थे। उनकी कंपनी अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड  दिवालिया हो चुकी थी और उन पर 90 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज था। स्थिति इतनी भयावह थी कि उनके घर और निजी संपत्तियों के जब्त होने का खतरा मंडरा रहा था। साल 2013 के एक इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने अपनी उस पीड़ा को साझा करते हुए बताया था कि वह दौर उनके लिए बेहद अपमानजनक था। उनके दरवाजे पर हर दिन लेनदार पैसे मांगने आते थे। जो लोग कभी उनके साथ काम करने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहते थे, मुसीबत के वक्त उन्होंने ही बिग बी के प्रति अनादर दिखाना शुरू कर दिया था। उस दौरान उन पर 55 लीगल केस दर्ज थे और उन्होंने स्वीकार किया कि कई लोगों ने उन्हें गुमराह करके गलत दस्तावेजों पर साइन भी करवा लिए थे, जिसका खामियाजा उन्हें अकेले भुगतना पड़ा। इस टूटते हुए हौसले के बीच बिग बी को अपने पिता, महान कवि हरिवंश राय बच्चन की दो बातों ने संभाले रखा। पहली सीख थी मन का हो तो अच्छा, मन का न हो तो और भी अच्छा। इसका अर्थ था कि अगर चीजें आपकी योजना के अनुसार नहीं हो रही हैं, तो ईश्वर ने आपके लिए कुछ और भी बेहतर सोच रखा है। दूसरी अहम बात जो उनके पिता ने कही थी वह यह कि जब तक जीवन है, संघर्ष बना रहेगा। इन दो मंत्रों ने अमिताभ को हार मानने के बजाय लड़ने की शक्ति दी। अमिताभ बच्चन की सेकेंड इनिंग की शुरुआत फिल्म मोहब्बतें और टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति से हुई, जिसने न केवल उनका कर्ज उतारा बल्कि उन्हें पहले से भी बड़ा स्टार बना दिया। आज उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि इंसान अपने पिता के आदर्शों और खुद के परिश्रम पर भरोसा रखे, तो वह राख से भी उठकर दोबारा अपना साम्राज्य खड़ा कर सकता है।

डॉन 3 कॉन्ट्रोवर्सी: रणवीर सिंह का चौंकाने वाला दावा, क्या ऋतिक रोशन लेंगे उनकी जगह?

नई दिल्ली । बॉलीवुड की सबसे चर्चित फ्रेंचाइजी डॉन 3 को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शाहरुख खान के बाद डॉन की विरासत संभालने जा रहे रणवीर सिंह के फिल्म छोड़ने की खबरों ने पहले ही फैंस को मायूस कर दिया था लेकिन अब इस मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार रणवीर सिंह और एक्सेल एंटरटेनमेंट के बीच अनबन इतनी बढ़ गई है कि मेकर्स ने अभिनेता से मुआवजे के तौर पर 40 करोड़ रुपये की मांग की है। वहीं रणवीर सिंह ने चुप्पी तोड़ते हुए मेकर्स पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक रणवीर सिंह और मेकर्स के बीच हुई हालिया मीटिंग्स काफी तनावपूर्ण रहीं। सूत्रों का दावा है कि रणवीर ने एक्सेल एंटरटेनमेंट पर अनप्रोफेशनलिज्म का आरोप लगाया है। रणवीर का कहना है कि फरहान अख्तर फिल्म को लेकर गंभीर नहीं थे और उनके पास कोई बाउंड स्क्रिप्ट (पूरी लिखी हुई पटकथा) तैयार नहीं थी। एक कलाकार के तौर पर रणवीर का तर्क है कि वह केवल उसी प्रोजेक्ट पर काम करना पसंद करते हैं जो पूरी तरह से विकसित हो। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फरहान स्क्रिप्ट को लेकर किसी भी तरह के फीडबैक या बदलाव के सुझावों के लिए तैयार नहीं थे। इस विवाद के बीच रणवीर सिंह ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उनके अनुसार एक्सेल एंटरटेनमेंट फिल्म में ऋतिक रोशन को लेने की योजना बना रहा था। फिल्म धुरंधर की सफलता के बाद मेकर्स ने कथित तौर पर ऋतिक को दोबारा अप्रोच किया। गौरतलब है कि ऋतिक रोशन साल 2011 में आई डॉन 2 में भी एक कैमियो भूमिका में नजर आ चुके हैं। रणवीर को लगता है कि मेकर्स उनके प्रति पूरी तरह समर्पित नहीं थे। दूसरी तरफ फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के पक्ष का कहना है कि रणवीर ने स्क्रिप्ट को हर स्टेज पर अप्रूव किया था लेकिन बाद में वह अनुचित मांगें करने लगे। मेकर्स का मानना है कि फिल्म की तैयारी में हुए भारी नुकसान की भरपाई रणवीर को करनी चाहिए। फिलहाल रणवीर ने अपनी मानसिक शांति के लिए फिल्म से दूरी बना ली है जबकि फरहान अपने दूसरे प्रोजेक्ट्स और एक्टिंग करियर पर ध्यान दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि डॉन का यह प्रतिष्ठित किरदार आखिर किसकी झोली में गिरता है।

राजपाल यादव: कॉमेडी किंग की मुश्किल राह, जेल की सलाखों के पीछे और करोड़ों का कर्ज

नई दिल्ली । बॉलीवुड में अपनी अद्भुत कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को लोटपोट करने वाले अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। भूल भुलैया के छोटा पंडित हों या हंगामा के राजा हर किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले इस कलाकार को हाल ही में दिल्ली की तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा है। यह पूरा मामला साल 2010 का है जब राजपाल ने अपनी फिल्म अता पता लापता के निर्देशन के लिए 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही और यह कर्ज समय के साथ बढ़ता चला गया। आज ब्याज समेत यह राशि 9 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है जिसे चुकाने में असमर्थता जताने के बाद कानून का शिकंजा उन पर कस गया है। राजपाल यादव की इस गिरफ्तारी ने फिल्म इंडस्ट्री में उनकी फीस और आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। ताज्जुब की बात यह है कि दशकों का अनुभव और हर बड़ी फिल्म का हिस्सा होने के बावजूद मुख्य अभिनेताओं की तुलना में उनकी फीस काफी कम है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार वरुण धवन की फिल्म बेबी जॉन के लिए राजपाल को केवल 1 करोड़ रुपये मिले जो मुख्य अभिनेता की फीस का महज 4 प्रतिशत था। पिछले दो-तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उन्होंने कटहल और ड्रीम गर्ल 2 जैसी फिल्मों के लिए करीब 1-1 करोड़ रुपये लिए जबकि भूल भुलैया 3 जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी के लिए उन्हें 2 से 3 करोड़ रुपये के बीच भुगतान किया गया। औसतन उनकी एक फिल्म की कमाई 1 से 2 करोड़ रुपये के आसपास ही रहती है। आर्थिक तंगी और जेल की खबरों के बीच राजपाल यादव का आने वाला फिल्मी कैलेंडर काफी व्यस्त नजर आ रहा है। 2025 और 2026 में उनके पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं जो उनके करियर को फिर से पटरी पर ला सकते हैं। अक्षय कुमार के साथ उनकी केमिस्ट्री हमेशा सुपरहिट रही है और आने वाले समय में वे भूत बंगला 10 अप्रैल 2026 और मल्टी-स्टारर फिल्म वेलकम टू द जंगल 26 जून 2026 में कॉमेडी का तड़का लगाते दिखेंगे। इसके अलावा विवश टैक्सी में भूत है और सामाजिक मुद्दे पर आधारित फिल्म काम चालू है जैसी फिल्में भी कतार में हैं। वर्तमान में जब राजपाल तिहाड़ जेल में हैं फिल्म जगत के उनके साथी जैसे सोनू सूद और गुरमीत चौधरी उनके समर्थन में आगे आए हैं। राजनीतिक गलियारों से तेज प्रताप यादव ने भी उनकी मदद का हाथ बढ़ाया है। फैंस को उम्मीद है कि वह जल्द ही इन कानूनी उलझनों से बाहर निकलेंगे और अपनी कॉमेडी से एक बार फिर सिनेमाघरों में हंसी के ठहाके गूंजने पर मजबूर कर देंगे।

समर्थन मूल्य पर सात मार्च तक होगा गेहूं उपार्जन के लिये पंजीयन

भोपाल! मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में गेहूं का उपार्जन के लिये पंजीयन 7 फरवरी से आरंभ हो गया है, यह 7 मार्च तक जारी रहेगा। प्रदेश में 3186 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं। गेहूं का समर्थन मूल्य गत वर्ष से 160 रुपए अधिक है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक संदेश मिला है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 142 और शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 37 हो गई है। टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश देश के 5 शीर्ष राज्यों में शामिल है। सिकल सेल उन्मूलन के लिए प्रदेश में व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। आयुष्मान योजना के माध्यम से उपचार में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। एयर एंबुलेंस सेवा और राहवीर योजना के क्रियान्वयन में भी निरंतर प्रगति हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले हुए वंदे मातरम के सामूहिक गान के बाद, अपने संबोधन में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आहवान किया कि सभी जिलों में विक्रमोत्सव और गुड़ी पड़वा का पर्व उल्लास और उत्साह से मनाया जाए। उन्होंने कहा कि इसके तत्काल बाद प्रदेश में जल गंगा अभियान आरंभ हो जाएगा जो 3 महीने तक जारी रहेगा। उन्होंने मंत्रीगण को अपने-अपने जिलों में अभियान की गतिविधियों के व्यवस्थित संचालन के लिए आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को नक्सलियों से मुक्त करने के उपलक्ष में 9 फरवरी को बालाघाट में आयोजित कार्यक्रम के संबंध में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल क्षेत्र की कृषि कैबिनेट बालाघाट में की जाएगी, जो पूरे क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा में लाने के संकल्प का प्रतीक होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश को रेल के क्षेत्र में सिंगरौली जबलपुर ट्रेन की सौगात प्राप्त होने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रेस्क्यू सेंटर और जू एक साथ विकसित करने की योजना है, इसके अंतर्गत जबलपुर और उज्जैन में गतिविधियां आरंभ हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जहां अभयारण्य हैं वहां रेस्क्यू सेंटर की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य जीव पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिये पर्यटन, वन और संस्कृति विभाग समन्वित रूप से कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में चीतों के परिवार में वृद्धि की बधाई दी। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया मैं विलुप्त हो रही वन्य प्रजाति पुनर्जीवित हो रही है। प्रदेश में चीतों की संख्या 35 हो गई है। उन्होंने बताया कि जल्द ही और भी खुशखबरी मिलेगी। उन्होंने बताया कि इंदौर जू से भी व्हाइट टाइगर की संख्या में वृद्धि का शुभ समाचार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव से प्रदेश में वन्य जीवों के पुनर्स्थापना के संबंध में हुई चर्चा के परिणाम स्वरूप अब प्रदेश में जंगली भैंसा भी लाए जा रहे हैं। साथ ही बोत्सवाना से 8 चीते 28 फरवरी को प्रदेश में लाऐ जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि धान का समर्थन मूल्य 2369 रुपए रखा गया है, जो पिछली बार की एमएसपी से अधिक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 51 लाख 74 हजार मीट्रिक टन धान का उत्पादन हुआ। प्रदेश में 8 लाख 59 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया, जिसमें से 7 लाख 89 हजार से अधिक किसानों ने स्पॉट बुकिंग कर धान उत्पादन में अपना योगदान दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा इस वर्ष प्रदेश में गेहूं की पर्याप्त पैदावार होने की संभावना है, राज्य सरकार के पास भंडारण की समुचित व्यवस्था है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंत्रीगण अपने-अपने क्षेत्र में वस्त्र उद्योग इकाई स्थापना की संभावनाओं को भी देखें तथा मूलभूत आवश्यकता वाले रोजगारपरक टेक्सटाइल यूनिटों की अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापना के लिए प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस हुई उनकी हरिद्वार यात्रा के संबंध में भी जानकारी दी।

महाकाल वन मेला "समृद्ध वन, खुशहालजन थीम पर 11 से 16 फरवरी तक

उज्‍जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन में बुधवार को शाम 4 बजे दशहरा मैदान, सेठी नगर उज्जैन में वन मेले का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एम.एफ.पी. पार्क द्वारा निर्मित प्राकृतिक “होली रंग गुलाल” एवं “महाकाल स्मृति उपहार” का विमोचन करेंगे। साथ ही वन विभाग की एक नवीन पहल “महाकाल वन प्रसादम” का भी शुभारंभ करेंगे। महाकाल वन मेला “समृद्ध वन, खुशहालजन” थीम पर आधारित होगा, जो 11 से 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। महाकाल की नगरी उज्जैन में वन मेले का आयोजन पहली बार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन विभाग की प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन करेंगे। साथ ही वन मंडलाधिकारी एवं प्रबंध संचालक, जिला यूनियन दक्षिण पन्ना एवं वन रक्षक, जिला यूनियन दक्षिण पन्ना को प्रशस्ति-पत्र प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण राज्यमंत्री श्री दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन एवं प्रशासक, मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ श्री अशोक बर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही.एन. अंबाडे और प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ डॉ. समिता राजौरा उपस्थित रहेंगे। मेले में प्रदेश के वनवासियों द्वारा एकत्र की जाने वाली अकाष्ठीय वनोपज के प्रदर्शन, संरक्षण, संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मेले का आयोजन किया जा रहा है। वन मेला प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता के वैभव को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम है। अकाष्ठीय वनोपज संग्राहक, वन धन केन्द्रों, प्राथमिक लघु वनोपज समितियाँ, व्यापारीगण, हर्बल और आयुर्वेदिक उद्योग के प्रतिनिधि इस आयोजन में भाग लेंगे और अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। वनों में उपलब्ध अकाष्ठीय वनोपज व्यापक तौर पर ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रदेश में अकाष्ठीय वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। वन मेले में लगभग 250 भव्य एवं आकर्षक स्टॉल्स लगाये जा रहे हैं, जिसमें 16 स्टॉल्स विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी के लिये, 76 स्टॉल्स प्राथमिक लघु वनोपज समितियों एवं वन धन केन्द्रों के लिये, एक भव्य स्टॉल विंध्य हर्बल्स के लिये, 5 स्टॉल्स लघु वनोपज के जीवंत प्रदर्शन के लिये, ओपीडी (नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श) के लिये 50 स्टॉल्स आरक्षित रखे गये हैं। इसके अलावा 76 स्टॉल्स निजी क्षेत्र के स्टॉल धारकों के लिये और 16 स्टॉल्स फूड जेन के लिये रखे गये हैं। मेले में किड्स जोन, व्हील चेयर्स, गोल्फ कार्ट, सिटिंग एरिया, वॉटर पाइंट, सेल्फी पाइंट की सुविधाएँ भी आगंतुकों को उपलब्ध रहेंगी। मेले में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, आयुर्वेर्दिक डॉक्टर्स एवं परम्परागत वैद्यों द्वारा नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श, ज्ञानवर्धक सांस्कृतिक कार्यक्रम और परम्परागत भोज्य पदार्थों की उपलब्धता रहेगी। वन मेले में चीता परिवार एवं डायनासोर का विशाल स्कल्पचर, वरिष्ठ नागरिकों के लिये व्हील-चेयर एवं गोल्फ कॉर्ट की सुविधा, ओपीडी में उपचार कराने वाले लोगों के लिये पृथक से बैठक व्यवस्था, महाकाल मंदिर से मेला परिसर तक नि:शुल्क बस सुविधा, बच्चों के लिये आकर्षक एवं मजेदार किड्स जोन की सुविधा, फूड जोन में बाँधवगढ़ का गोंडी व्यंजन, छिंदवाड़ा का वन भोज रसोई और अलीराजपुर का दाल पानिया आकर्षण का विशेष केन्द्र रहेगा।

देश में पांच साल में गड्ढों में गिरने से 9 हजार 109 लोगों की मौत… रोजाना 6 लोगों ने गंवाई जान

नई दिल्ली। सड़क परिवहन मंत्रालय (Ministry of Road Transport) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 से 2023 के बीच देश में सड़कों पर बने गड्ढों (Potholes Roads) के कारण हुए सड़क हादसों (Road Accidents) में 9,109 लोगों की मौत हुई थी.यह आंकड़ा साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है.वर्ष 2022 में जहां ऐसे हादसों में 1,856 लोगों की मौत हुई, वहीं 2023 में यह आंकड़ा बढ़ कर 2,161 तक पहुंच गया.यानी उस साल रोजाना औसतन छह लोगों की मौत हुई थी.उसके बाद का आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। यह गड्ढे दोपहिया वाहनों और पैदल चलने वालों के लिए सड़क हादसे की सबसे प्रमुख वजह बन गए हैं.मानसून में यह समस्या बेहद गंभीर हो जाती है.बीते सप्ताह दिल्ली के जनकपुरी इलाके में जल बोर्ड की ओर से खोदे गए गड्ढे में गिरकर कमल नामक 25 वर्ष के एक युवक की मौत हो गई थी।अदालतों की फटकार भी बेअसर बंबई हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने बीते साल अक्तूबर में इन मौतों से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ऐसे मामलों में मृतकों के परिजनों को कम से कम छह लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया था.इससे पहले जुलाई 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की थी कि सड़कों पर बने गड्ढों के कारण होने वाले हादसों से साफ है कि इनके लिए जिम्मेदार अधिकारी सही तरीके से अपनी ड्यूटी नहीं निभा रहे हैं. शीर्ष अदालतों की टिप्पणी और फटकार के बावजूद यह समस्या कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों पर बने गड्ढे दोपहिया वाहनों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं.सड़कों की मरम्मत के लिए जिम्मेदार नगर निगम, लोक निर्माण विभाग या नगरपालिकाएं अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाती.क्यों बनते हैं सड़कों पर गड्ढे?लेकिन आखिर सड़कों पर ऐसे गड्ढे क्यों हो जाते हैं और समय पर इनकी मरम्मत के उपाय क्यों नहीं किए जाते? इस सवाल पर लोक निर्माण विभाग के एक पूर्व इंजीनियर समरेश भट्टाचार्य डीडब्ल्यू से कहते हैं, “मानसून के सीजन में सड़कों पर पानी भरना और रिसना इसका एक प्रमुख कारण है.ज्यादातर मामलों में सड़कों पर भरे पानी को निकालने के लिए ड्रेनेज सिस्टम ठीक नहीं होता. उस दौरान भारी वाहनों के गुजरने के कारण सड़कों पर गड्ढे बन जाते हैं.इसके अलावा सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल भी दूसरी बड़ी वजह है”समरेश का कहना है कि कई बार बिजली और जल निगम जैसे विभाग भी सड़कों पर गड्ढे खोदकर उनको जस का तस छोड़ देते हैं.विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की कमी इस समस्या को और गंभीर बना देती है.उनके मुताबिक, कोई बड़ा हादसा होने के बाद राजनीतिक तौर पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है और तमाम विभाग अपना पल्ला झाड़ने लगते हैं.मुआवजे की कोई गारंटी नहीं एक गैर-सरकारी संगठन के संयोजक मोहम्मद तस्लीम डीडब्ल्यू से कहते हैं, “हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि गड्ढों के कारण रोजाना 19 सड़क हादसे होते हैं और इनमें औसतन छह लोगों की मौत हो जाती है.इसके अलावा कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर जीवन भर के लिए अपाहिज हो जाते हैं.ऐसे लोगों का कोई आंकड़ा नहीं है” उनके मुताबिक, ऐसे हादसों में वाहनों को होने वाले नुकसान का भी कोई आंकड़ा कहीं नहीं मिलता. क्या ऐसे हादसों से प्रभावित लोगों को कानूनी तौर पर मुआवजा मिल सकता है? कलकत्ता हाईकोर्ट के एक एडवोकेट दीपक कुमार डीडब्ल्यू से कहते हैं, “सैद्धांतिक तौर पर प्रभावित लोग या उनके परिजन मुआवजे के हकदार हैं.लेकिन न्याय का रास्ता लंबा और जटिल है और उसके बाद भी जीत की कोई गारंटी नहीं है.कानूनी खामियों का फायदा उठा कर अक्सर तमाम विभाग एक-दूसरे पर अंगुली उठा कर बच निकलते हैं”हादसों को कैसे रोका जाएपरिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ जगह एआई तकनीक वाले कैमरे से सड़कों पर बने गड्ढों का पता लगा कर उनकी मरम्मत का काम जरूर किया जा रहा है लेकिन यह नाकाफी है.समरेश कहते हैं कि ऐसे हादसों पर अंकुश लगाने के लिए विभागों की जवाबदेही तय करनी होगी और तय समय सीमा के भीतर गड्ढों की मरम्मत नहीं करने की स्थिति में उन पर भारी जुर्माना लगाना होगा.वहीं मोहम्मद तस्लीम का कहना है कि समस्या तकनीक या पैसों की नहीं बल्कि इच्छाशक्ति और सोच की है.जब तक संबंधित विभागों का रवैया लापरवाह रहेगा, ऐसे हादसे बढ़ते ही रहेंगे.सड़क जैसे आधारभूत ढांचे के प्रबंधन पर गंभीरता से ध्यान दिया जाने की जरूरत है।