Chambalkichugli.com

निफ्टी आईटी में 5.5% की भारी गिरावट, मार्केट कैप 1.6 लाख करोड़ रुपए घटा..

नई दिल्ली। मुंबई। गुरुवार के कारोबारी सत्र में आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स 5.51 प्रतिशत गिरकर चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे न केवल इंडेक्स प्रभावित हुआ बल्कि आईटी कंपनियों की कुल बाजार पूंजी में भी 1.6 लाख करोड़ रुपए की भारी कमी दर्ज की गई। इस दौरान निफ्टी आईटी कंपनियों का मार्केट कैप घटकर 27,32,579 करोड़ रुपए रह गया। प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों में गिरावट विशेष रूप से गंभीर रही। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का शेयर 5.48 प्रतिशत गिरकर 2,750 रुपए पर पहुंच गया, जो पिछले 52 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। इंफोसिस में भी 5.48 प्रतिशत की गिरावट आई। टेक महिंद्रा 6.40 प्रतिशत गिरा, जबकि एचसीएल टेक, एमफैसिस और विप्रो के शेयरों में 4.5 से 5 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बिकवाली के पीछे सबसे बड़ा कारण उभरती एआई तकनीक है। हाल ही में ‘एंथ्रोपिक’ नामक कंपनी ने ‘क्लॉड कोवर्क’ नामक नया एआई टूल लॉन्च किया है, जो कई व्यावसायिक कामों को स्वतः पूरा करने में सक्षम है। इस एआई टूल में ऐसे ऑटोमेशन सिस्टम शामिल हैं जो पहले कई अलग-अलग सॉफ्टवेयर की जरूरत वाले कामों को एक ही प्लेटफॉर्म पर कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस स्थिति को ‘सासपोकैलिप्स’ कहा है, यानी एआई पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों की जगह ले सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर एआई ने पारंपरिक आईटी सेवाओं का काम ले लिया, तो कंपनियों की आमदनी में 40 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है। इसके अलावा अमेरिका से मिले मजबूत रोजगार आंकड़े भी बाजार पर दबाव बनाने वाले रहे। जनवरी में अमेरिका में 1.3 लाख नई नौकरियां जुड़ीं और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत हो गई। इससे संकेत मिला कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्दी ब्याज दरें कम नहीं करेगा। इससे भारतीय आईटी कंपनियों की विदेशी आय पर असर पड़ सकता है और शेयरों पर दबाव बढ़ा। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि आने वाले समय में नए एआई टूल पुराने सॉफ्टवेयर और टेस्टिंग सेवाओं की मांग को घटा सकते हैं। पारंपरिक आईटी कंपनियों को इस बदलाव के लिए तैयार रहना होगा। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि निवेशक एआई तकनीक के प्रभाव और अमेरिका की मौद्रिक नीति पर नजर बनाए रखें। आईटी सेक्टर में उच्च लागत वाले पारंपरिक सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स की मांग में कमी आने की संभावना है, जिससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशक और कंपनियां दोनों ही इस बदलाव की जटिलताओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं। आईटी कंपनियों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें न केवल टेक्नोलॉजी में बदलाव अपनाना होगा बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों के आधार पर अपनी रणनीति भी बदलनी होगी।

वर्ल्ड कप सिर्फ खेलना नहीं, ट्रॉफी भी जीतना है"; रोहित शर्मा ने अपने इस बयान से कर दिया काफी कुछ साफ

नई दिल्ली । भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में खेले जा रहे टी20 वर्ल्ड कप 2026 पर अभी सभी का ध्यान है, तो वहीं साल 2027 में वनडे वर्ल्ड कप खेला जाना है जिसको लेकर भी इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली टीमों ने अपनी तैयारियों को शुरू कर दिया है। रोहित शर्मा जिनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने साल 2024 के टी20 वर्ल्ड कप और उसके बाद साल 2025 की शुरुआत में खेली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी को अपने नाम किया था, अब उनका सपना देश के लिए वनडे वर्ल्ड कप की ट्रॉफी को जीतना है। रोहित जो अब बतौर प्लेयर खेल रहे हैं, उनके इंटरनेशनल क्रिकेट के 2 फॉर्मेट से रिटायरमेंट लेने के बाद से वनडे से भी संन्यास लेने की अटकलें लेकर लगातार देखने को मिलती रहती हैं, जिसमें अब हिटमैन रोहित ने दिए अपने एक बयान से सबकुछ साफ कर दिया है। मैं जरूर अपने देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना चाहता हूं रोहित शर्मा जो टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ब्रांड एंबेसडर हैं उन्होंने आईसीसी के इवेंट में वनडे वर्ल्ड कप को लेकर सवाल पूछे जाने पर खुलकर अपनी बात रखी। रोहित शर्मा ने कहा कि मैं जरूर अपने देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना चाहता हूं। यह मेरा हमेशा से सपना रहा है। मैं 50 ओवर का वर्ल्ड कप देखते हुए बड़ा हुआ हूं और उस समय ना ही टी20 वर्ल्ड कप होता था और ना ही आईपीएल। यह उस दौर में क्रिकेट का सबसे बड़ा इवेंट था जो हर चार साल में होता था और हम सभी इसका बेसब्री से इंतजार भी करते थे। इसलिए उस एक ट्रॉफी की बहुत अहमियत थी और उसे जीतने की बेचैनी भी। ये बात सही है कि मुझे सच में वह ट्रॉफी चाहिए, इसलिए मैं अपनी तरफ से उसे जीतने की पूरी कोशिश करूंगा।

छात्रों के लिए वरदान उत्थित पद्मासन, मांसपेशियों के साथ मानसिक शक्ति भी बढ़ाए

नई दिल्ली। भागदौड़ और तनाव से भरी आधुनिक जीवनशैली में योग एक ऐसा साधन बनकर उभरा है जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखने में मदद करता है। अनेक योगासनों में उत्थित पद्मासन को विशेष रूप से शक्तिशाली और प्रभावी माना जाता है। नियमित अभ्यास से यह न केवल शारीरिक मजबूती देता है बल्कि मानसिक एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार योग अनुशासन और शारीरिक मानसिक सामर्थ्य को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उत्थित पद्मासन इसी क्रम में एक उन्नत आसन है जिसमें साधक पद्मासन की स्थिति में बैठकर हाथों के बल पर पूरे शरीर को जमीन से ऊपर उठाता है। यह देखने में सरल लग सकता है लेकिन इसके लिए संतुलन ताकत और नियंत्रित श्वास की आवश्यकता होती है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पद्मासन में बैठें। एक पैर को विपरीत जांघ पर और दूसरा पैर पहली जांघ पर रखें। रीढ़ सीधी रखें और शरीर को स्थिर करें। इसके बाद दोनों हथेलियों को शरीर के पास जमीन पर टिकाएं। गहरी सांस लेते हुए हाथों पर दबाव डालें और पूरे शरीर को धीरे धीरे जमीन से ऊपर उठाएं। इस दौरान गर्दन और सिर सीधा रखें तथा नजर सामने या हल्का नीचे की ओर रखें। सांस सामान्य रखते हुए कुछ सेकंड तक इस स्थिति में बने रहें और फिर धीरे से वापस जमीन पर आ जाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्थित पद्मासन हाथों कलाइयों और कंधों को मजबूती देता है। इसके साथ ही कोर मसल्स यानी पेट और पीठ की मांसपेशियां भी सक्रिय होती हैं जिससे शरीर का संतुलन बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से पेट की मांसपेशियां टोन होती हैं और पाचन तंत्र मजबूत बनता है। कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में भी लाभ मिल सकता है। यह आसन मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना जाता है। संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया दिमाग को केंद्रित करती है और ध्यान की क्षमता को बढ़ाती है। छात्रों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है क्योंकि इससे एकाग्रता और स्मरण शक्ति में सुधार हो सकता है। परीक्षा की तैयारी के दौरान मानसिक स्थिरता बनाए रखने में भी यह सहायक हो सकता है। रक्त संचार को बेहतर बनाने और शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को संतुलित करने में भी यह आसन सहायक माना जाता है। छाती कंधों और बाहों में रक्त प्रवाह सुधरता है जिससे शरीर में स्फूर्ति आती है। नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति का अनुभव भी बढ़ता है। हालांकि जिन लोगों को घुटनों कूल्हों या कलाइयों में दर्द या चोट की समस्या हो उन्हें यह आसन करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग गुरु से सलाह लेनी चाहिए। सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास से उत्थित पद्मासन शरीर और मन दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

महाशिवरात्रि पूजा पर रोक की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची दरगाह कमेटी, CJI ने जताई नाराजगी

नई दिल्ली । कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के आलंद स्थित लाडले मशाइक दरगाह एक बार फिर धार्मिक विवाद के केंद्र में आ गई है। दरगाह कमेटी ने महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रस्तावित पूजा-अर्चना पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कमेटी का कहना है कि दरगाह परिसर में किसी भी तरह की पूजा या निर्माण गतिविधि से उसकी मूल धार्मिक पहचान प्रभावित हो सकती है, इसलिए शीर्ष अदालत हस्तक्षेप करे और यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दे। यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दरगाह कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा ने अदालत से अनुरोध किया कि 15 फरवरी, यानी महाशिवरात्रि से पहले इस याचिका पर त्वरित सुनवाई की जाए। उन्होंने अदालत को बताया कि दरगाह परिसर में शिवरात्रि मनाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई का आश्वासन देने के बजाय इस पर विचार करने की बात कही। साथ ही अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि ऐसे मामलों में सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जा रहा है, जबकि पहले संबंधित हाई कोर्ट में जाना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की, सब कुछ अनुच्छेद 32 के तहत क्यों आ रहा है? इससे यह धारणा बनती है कि याचिकाएं इसलिए दायर की जा रही हैं क्योंकि कानून सुविधाजनक है। इससे यह संदेश जाता है कि हाई कोर्ट निष्क्रिय हो चुका है। हम इसकी जांच करेंगे।” दरअसल, यह विवाद उस ऐतिहासिक स्थल से जुड़ा है जो 14वीं शताब्दी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी, जिन्हें लाडले मशाइक के नाम से जाना जाता है, और 15वीं शताब्दी के हिंदू संत राघव चैतन्य से संबंधित है। दोनों संतों के अवशेष इसी परिसर में बताए जाते हैं। परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नामक एक संरचना भी मौजूद है। वर्षों से यहां हिंदू श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते रहे हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय दरगाह में अकीदत पेश करता रहा है। साल 2022 में यह मामला तब गरमा गया जब कुछ उपद्रवियों द्वारा कथित रूप से शिवलिंग पर आपत्तिजनक कृत्य किए जाने की घटना सामने आई, जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया। इसके बाद पूजा-अधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई। फरवरी 2025 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने हिंदू समुदाय के 15 सदस्यों को राघव चैतन्य शिवलिंग पर महाशिवरात्रि के दिन पूजा करने की अनुमति दी थी। यह पूजा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई थी और किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई थी। एक वर्ष पूर्व भी अदालत के आदेश के आधार पर सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को प्रवेश और अनुष्ठान की अनुमति दी गई थी, जो शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी। अब दरगाह कमेटी की नई याचिका ने इस संवेदनशील मामले को फिर से कानूनी और सामाजिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद में क्या रुख अपनाता है और महाशिवरात्रि से पहले क्या कोई अंतरिम आदेश जारी होता है।

S-400 से सस्ता लेजर कवच, अमेरिकी HELIOS ने हवा में पिघलाए ड्रोन, बिना गोला-बारूद का नया हथियार

नई दिल्ली। वॉशिंगटन। आधुनिक युद्ध तकनीक तेजी से बदल रही है और अब मिसाइलों की जगह लेजर हथियार अपनी जगह बना रहे हैं। अमेरिकी नौसेना ने 2025 में समुद्र में तैनात अपने गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर USS Preble से हाई एनर्जी लेजर सिस्टम HELIOS का सफल परीक्षण किया, जिसकी जानकारी 2026 की शुरुआत में सार्वजनिक की गई। इस परीक्षण के दौरान जहाज पर तैनात लेजर प्रणाली ने हवा में उड़ रहे चार ड्रोन को मार गिराया। यह पहली बार है जब अमेरिकी नौसेना ने ऑपरेशनल डेमोंस्ट्रेशन में जहाज पर लगे लेजर से हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने की पुष्टि की है। HELIOS का पूरा नाम हाई एनर्जी लेजर विद इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल डैजलर एंड सर्विलांस है। करीब 60 किलोवॉट क्षमता वाला यह सिस्टम लॉकहीड मार्टिन ने विकसित किया है। इसे Arleigh Burke क्लास डेस्ट्रॉयर के Aegis कॉम्बैट सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे यह जहाज के रडार और फायर कंट्रोल डेटा के आधार पर लक्ष्य की पहचान कर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है। यह प्रणाली दो तरह से काम करती है। पहली सॉफ्ट किल क्षमता जिसमें लेजर दुश्मन ड्रोन के ऑप्टिकल या इंफ्रारेड सेंसर को चकाचौंध कर उन्हें भ्रमित कर देता है, जिससे उनकी निगरानी और निशाना साधने की क्षमता प्रभावित होती है। दूसरी हार्ड किल क्षमता जिसमें केंद्रित थर्मल ऊर्जा लक्ष्य को भौतिक रूप से क्षतिग्रस्त कर देती है, यानी ड्रोन को जला या पिघला सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लागत है। पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर पर जहां लाखों डॉलर खर्च हो सकते हैं, वहीं लेजर शॉट की लागत बेहद कम मानी जाती है। इसमें गोला बारूद की आवश्यकता नहीं होती और लगातार फायर की क्षमता होती है। छोटे और मध्यम आकार के ड्रोन खासकर कम दूरी पर इसके लिए आसान लक्ष्य माने जा रहे हैं। हालांकि इसकी सीमाएं भी हैं। लेजर हथियार लाइन ऑफ साइट पर काम करता है यानी लक्ष्य सीधा दिखाई देना चाहिए। अधिक नमी, धूल, बादल या समुद्री छींटे बीम की प्रभावशीलता को कम कर सकते हैं। यही कारण है कि अब तक निर्देशित ऊर्जा हथियारों का व्यापक उपयोग सीमित रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत वाले ड्रोन के बढ़ते उपयोग के बीच ऐसे ऊर्जा आधारित हथियार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। ईरान के शाहेद ड्रोन जैसे सस्ते लेकिन बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाने वाले सिस्टम के खिलाफ पारंपरिक एयर डिफेंस महंगा पड़ता है। ऐसे में लेजर आधारित प्रणाली कम खर्च में तेज प्रतिक्रिया देने वाला विकल्प बन सकती है। अमेरिकी रक्षा विभाग बहु स्तरीय समुद्री रक्षा में ऊर्जा आधारित हथियारों को शामिल करने की दिशा में काम कर रहा है। भविष्य में HELIOS को अन्य युद्धपोतों पर भी तैनात किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए और परीक्षण किए जाएंगे। यह परीक्षण संकेत देता है कि लेजर हथियार प्रयोगशाला से निकलकर वास्तविक तैनाती के दौर में प्रवेश कर चुके हैं और आने वाले समय में युद्ध की प्रकृति को बदल सकते हैं।

इनट्यूशन थॉट की ताकत कैसे अंदर की आवाज बदल सकती है आपकी किस्मत और फैसलों की दिशा

नई दिल्ली। जिंदगी में हम अक्सर ऐसे लोगों को देखते हैं जो बिना ज्यादा सोचे समझे भी बिल्कुल सटीक फैसला ले लेते हैं। खेल के मैदान से लेकर बिजनेस और कला की दुनिया तक कई सफल लोग कहते हैं कि वे अपनी अंदर की आवाज यानी इनट्यूशन थॉट पर भरोसा करते हैं। यही इनट्यूशन उन्हें सही समय पर सही निर्णय लेने की ताकत देती है। कई बार फैसले लेने के लिए हमारे पास कुछ सेकंड भी नहीं होते और वही पल हमारी दिशा तय कर देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इनट्यूशन थॉट होता क्या है और यह हमारी जिंदगी को कैसे बदल सकता है। इनट्यूशन थॉट दरअसल दिमाग की वह क्षमता है जो अनुभव और भावनाओं के आधार पर तुरंत निर्णय लेने में मदद करती है। खेल जगत में इसका बेहतरीन उदाहरण बेसबॉल खिलाड़ियों में देखने को मिलता है। मेजर लीग बेसबॉल में गेंद की रफ्तार 90 मील प्रति घंटे से ज्यादा होती है और बल्लेबाज के पास केवल करीब 150 मिलीसेकेंड का समय होता है यह तय करने के लिए कि शॉट खेलना है या नहीं। उस समय सोचने का मौका नहीं होता वहां सिर्फ अनुभव और इनट्यूशन काम करती है। यही वजह है कि टॉप खिलाड़ियों के फैसले हमें सहज और नेचुरल लगते हैं। लेकिन इनट्यूशन कोई जादुई शक्ति नहीं है जो केवल महान खिलाड़ियों या सफल लोगों के पास हो। शोध बताते हैं कि यह क्षमता हर इंसान में मौजूद होती है। 2016 में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार इनट्यूशन को अभ्यास और जागरूकता से मजबूत किया जा सकता है। न्यूरोसाइंस के मुताबिक हमारा दिमाग दो तरह की सोच पर काम करता है एनालिटिकल और इनट्यूटिव। एनालिटिकल सोच तर्क आंकड़ों और योजना पर आधारित होती है जबकि इनट्यूटिव सोच भावनाओं अनुभव और बड़ी तस्वीर को समझने पर आधारित होती है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति घर खरीदने का फैसला ले रहा है तो एनालिटिकल सोच वाला व्यक्ति बजट स्कूल दूरी और सुविधाओं पर ध्यान देगा जबकि इनट्यूटिव सोच वाला यह महसूस करेगा कि उस जगह पर उसे कैसा लग रहा है क्या वह वहां खुद को सहज और खुश महसूस कर पा रहा है। दोनों सोच जरूरी हैं लेकिन कई बार तेजी से निर्णय लेने के लिए इनट्यूशन अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इनट्यूशन को मजबूत करने के लिए सबसे जरूरी है खुद पर भरोसा। जब हम अपनी अंदर की आवाज को सुनना सीखते हैं और फैसलों के नतीजों पर विचार करते हैं तो हमारी निर्णय क्षमता बेहतर होती जाती है। अक्सर हमारे भीतर दो तरह की आवाजें होती हैं एक डर और घबराहट से जुड़ी और दूसरी शांत और स्थिर। जो आवाज आपको भीतर से शांति देती है वही सच्ची इनट्यूशन होती है। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी कह चुके हैं कि इनट्यूशन हमारे पुराने बौद्धिक अनुभवों का परिणाम होती है। नियमित अभ्यास ध्यान सांस पर फोकस रचनात्मक गतिविधियां और तनाव में भी शांत रहने की आदत इनट्यूशन को मजबूत बनाती हैं। आखिरकार इनट्यूशन थॉट कोई रहस्य नहीं बल्कि हमारे अनुभव और आत्मविश्वास का निचोड़ है। जब हम खुद को समझते हैं और अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेते हैं तो यही अंदर की आवाज हमें सही दिशा में आगे बढ़ने का साहस देती है और यही सफलता की असली कुंजी बन सकती है।

ग्वालियर में सुसाइड का सनसनीखेज वीडियो: मेरी मौत का जिम्मेदार मेरा पति…प्रेम विवाह के 6 माह बाद पत्नी ने लगाई फांसी

ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहाँ प्यार में मिले धोखे ने एक महिला को मौत गले लगाने पर मजबूर कर दिया। बहोड़ापुर इलाके की रहने वाली वैष्णवी उर्फ प्राची ने सिरौल थाना क्षेत्र स्थित ‘ईस्ट मैरेडियन मल्टी’ के अपने फ्लैट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत को गले लगाने से पहले प्राची ने अपने मोबाइल से एक वीडियो रिकॉर्ड किया जिसमें उसने सिसकते हुए अपनी मौत का जिम्मेदार अपने पति राजू उर्फ सत्यनारायण भदौरिया और उसके परिवार को ठहराया है। मंदिर में रचाई थी शादी फिर खुला कड़वा सच करीब 6 महीने पहले प्राची ने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर पुरानी छावनी निवासी राजू से मंदिर में शादी की थी। दोनों ने स्टांप पर भी अपने रिश्ते को प्रमाणित किया था और किराये के फ्लैट में साथ रह रहे थे। प्राची को लगा था कि उसने अपना संसार बसा लिया है लेकिन जल्द ही उसके सामने एक ऐसा सच आया जिसने उसके पैरों तले जमीन खिसका दी। उसे पता चला कि राजू पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। ससुराल में मारपीट और आखिरी फैसला पति की पहली शादी की सच्चाई जानने के बाद जब प्राची न्याय मांगने के लिए राजू के घर पहुंची तो वहां सहानुभूति के बजाय उसे प्रताड़ना मिली। परिजनों का आरोप है कि राजू की पहली पत्नी और उसके पिता ने प्राची के साथ जमकर मारपीट की। इसी अपमान और धोखे से आहत होकर प्राची अपने फ्लैट पर वापस आई और पंखे से दुपट्टे का फंदा बनाकर सुसाइड कर लिया। पुलिस की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही सिरौल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस के हाथ वह वीडियो भी लगा है जिसे प्राची ने मरने से ठीक पहले बनाया था। पुलिस अब इस मामले में आरोपी पति और उसके परिजनों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है।

ऑल इंडिया मुशायरे में दबंगई, गला दबाकर शायर को पीटा, नकदी और सामान लूटने का आरोप

खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन शहर में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा उस समय अफरातफरी और हिंसा में बदल गया जब मंच पर ही एक पत्रकार और शायर पर कथित रूप से जानलेवा हमला कर दिया गया। 8 फरवरी 2026 की देर रात जम जम मार्केट में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के नामवर शायर शामिल हुए थे। कार्यक्रम शांतिपूर्वक चल रहा था और श्रोता शायरी का आनंद ले रहे थे, तभी अचानक माहौल बिगड़ गया। बताया गया है कि कार्यक्रम में बतौर शायर आमंत्रित अबूबकर जिया, जो पेशे से पत्रकार भी हैं, ने जब अपनी प्रस्तुति दी तो श्रोताओं ने उन्हें सराहा। इसी दौरान रात करीब 12:30 से 1 बजे के बीच 25 से 30 लोगों का एक समूह मंच पर चढ़ आया। आरोप है कि इन लोगों ने कार्यक्रम रोकने की कोशिश की और आयोजकों से सवाल किया कि उन्हें सम्मान क्यों नहीं दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंच पर पहुंचे कुछ लोगों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि इसी दौरान अबूबकर जिया को निशाना बनाया गया। उनके साथ धक्का मुक्की की गई, गला दबाने का प्रयास किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। स्थिति कुछ समय के लिए इतनी गंभीर हो गई कि वहां मौजूद लोगों में भगदड़ जैसे हालात बन गए। पीड़ित का आरोप है कि हमले के दौरान उनकी जेब में रखे करीब 3200 रुपये नकद, प्रेस कार्ड, एक पेन और हाथ घड़ी भी छीन ली गई। साथ ही उनके साथ मारपीट कर अपमानजनक व्यवहार किया गया। घटना ने कार्यक्रम की गरिमा को ठेस पहुंचाई और शहर में कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए। मौके पर मौजूद कुछ जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने बीच बचाव कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। जिला सदर और पार्षद रियाजुद्दीन, पार्षद वारिस चौबे, पार्षद असलम, पार्षद शकील वक्त, पार्षद पति अदीब बावा, एडवोकेट शाहरुख मिर्जा और पत्रकार रईस खान सहित अन्य लोगों ने हस्तक्षेप कर अबूबकर जिया को भीड़ से सुरक्षित बाहर निकाला। उन्हें पीछे के रास्ते से कार्यक्रम स्थल से हटाया गया। घटना के बाद अबूबकर जिया ने थाना कोतवाली खरगोन में आवेदन देकर संबंधित लोगों के खिलाफ लूट, मारपीट, जानलेवा हमले और गाली गलौज की धाराओं में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पुलिस ने आवेदन प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।इस घटना ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। सार्वजनिक मंच पर इस प्रकार की हिंसक घटना से शहर के बुद्धिजीवी और साहित्य प्रेमी आहत हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपों की जांच कर तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

दतिया में नाबालिग की शादी पर प्रशासन का शिकंजा: बारात का पीछा कर किया रेस्क्यू, टेंट-डीजे-हलवाई पर भी FIR

दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया जिले में बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन ने सख्ती का परिचय दिया है। ग्राम खटोला में एक नाबालिग बालिका का विवाह संपन्न होने और विदाई की तैयारी की गुप्त सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। त्वरित कार्रवाई करते हुए न केवल बालिका को रेस्क्यू किया गया बल्कि विवाह में सहयोग करने वाले टेंट हाउस डीजे और हलवाई संचालकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार जिला कार्यक्रम अधिकारी अरविंद उपाध्याय को सूचना मिली थी कि गांव में नाबालिग लड़की की शादी कर दी गई है और विदाई की रस्म पूरी की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी जनपद पंचायत दतिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनीत त्रिपाठी और थाना उनाव की पुलिस टीम संयुक्त रूप से मौके पर पहुंची। हालांकि तब तक विदाई हो चुकी थी और बारात रवाना हो चुकी थी। प्रशासनिक टीम ने बिना समय गंवाए विदाई के काफिले का पीछा किया। रास्ते में घेराबंदी कर लौटती बारात को रोका गया और दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में बालिका की उम्र कानूनी विवाह आयु से कम पाई गई। इसके बाद बालिका को तत्काल रेस्क्यू कर थाना उनाव लाया गया जहां आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई। कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बार कार्रवाई का दायरा केवल परिजनों तक सीमित नहीं रखा गया बल्कि विवाह आयोजन में सहयोग देने वाले सभी पक्षों को भी जिम्मेदार माना गया है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत विवाह में भोजन बनाने वाले हलवाई पंडाल लगाने वाले टेंट संचालक और डीजे मालिक के खिलाफ भी विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने जिले के सभी टेंट हाउस संचालकों हलवाइयों डीजे ऑपरेटरों और पंडितों को सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने निर्देशित किया है कि भविष्य में किसी भी शादी की बुकिंग लेने से पहले वर-वधू के आयु संबंधी प्रमाण पत्र जैसे जन्म प्रमाण पत्र या अंकसूची का सत्यापन अनिवार्य रूप से करें। यदि किसी आयोजन में नाबालिग की शादी पाई गई तो सेवा प्रदाताओं को भी कानूनी कार्रवाई और जेल का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से जिले में स्पष्ट संदेश गया है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। अधिकारियों ने आमजन से भी अपील की है कि ऐसी किसी भी सूचना को तत्काल प्रशासन तक पहुंचाएं ताकि समय रहते बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

SEHORE BIJLI CHORI: सीहोर में बिजली चोरी पकड़ते ही भड़का उपभोक्ता, स्मार्ट मीटर उखाड़कर तोड़ा; विभागीय टीम से बदसलूकी का वीडियो वायरल

  SEHORE BIJLI CHORI: सीहोर । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची विद्युत विभाग की टीम पर हमला और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। रूटीन चेकिंग के दौरान जब टीम ने एक उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर से छेड़छाड़ कर बिजली चोरी करते पकड़ा तो आरोपी ने आपा खो दिया और साक्ष्य मिटाने के इरादे से मीटर ही उखाड़कर फेंक दिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार विद्युत विभाग की टीम क्षेत्र में स्मार्ट मीटर की निगरानी और नियमित जांच के लिए पहुंची थी। इसी दौरान एक मकान में लगे स्मार्ट मीटर में संदिग्ध गतिविधि पाई गई। तकनीकी जांच में मीटर से छेड़छाड़ कर अवैध रूप से बिजली उपयोग करने के संकेत मिले। टीम ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की संबंधित उपभोक्ता भड़क उठा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपी ने पहले टीम की कार्रवाई का विरोध किया और फिर दीवार पर लगे स्मार्ट मीटर को जबरन उखाड़कर जमीन पर पटक दिया जिससे वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि यह कदम कथित रूप से चोरी के साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उठाया गया। इसके बाद आरोपी ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें ड्यूटी करने से रोकने की कोशिश की। घटना के दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। वायरल वीडियो में आरोपी को आक्रामक रवैये में देखा जा सकता है जबकि विभागीय कर्मचारी स्थिति संभालने का प्रयास करते नजर आते हैं। वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। विद्युत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर सरकारी संपत्ति है और उसे नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। साथ ही ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के साथ बदसलूकी और कार्य में बाधा डालना भी दंडनीय है। विभाग द्वारा संबंधित उपभोक्ता के खिलाफ बिजली अधिनियम की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिजली चोरी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी तरह की दबंगई या विरोध के बावजूद कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। वहीं स्थानीय पुलिस से भी संपर्क कर मामले में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई है। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि बिजली चोरी रोकने की कार्रवाई के दौरान विभागीय कर्मचारियों को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल वायरल वीडियो को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित किया गया है और पूरे मामले की जांच जारी है।