पोस्त भूसी तस्करी मामले में ग्वालियर HC ने उठाया कड़ा कदम, जांच अधिकारियों पर कार्रवाई

ग्वालियर। ग्वालियर हाईकोर्ट ने शिवपुरी के एक एनडीपीएस मामले में पुलिस जांच की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद शिवपुरी एसपी अमन सिंह राठौड़ ने तत्काल प्रभाव से देहात थाना प्रभारी समेत पांच अधिकारियों को लाइन अटैच कर दिया। यह मामला 1209 किलो पोस्त भूसी की तस्करी से जुड़ा है जिसमें थाने से 62 सैंपल बैग गायब होने की गंभीर जानकारी सामने आई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जांच सच्चाई सामने लाने के बजाय उसे छिपाने जैसी प्रतीत हो रही है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि कई मामलों में पुलिस केवल ड्राइवर या कैरियर तक कार्रवाई सीमित कर देती है, जबकि तस्करी के मुख्य सरगना तक पहुंचने का प्रयास नहीं किया जाता। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर जांचीय कमी मानते हुए कड़ा रुख अपनाया। यह मामला इंदौर से चंडीगढ़ भेजी जा रही 1209 किलो पोस्त भूसी की जब्ती से संबंधित है। अदालत ने पाया कि न तो माल भेजने वालों की समुचित जांच हुई और न ही प्राप्तकर्ताओं की भूमिका स्पष्ट की गई। सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि जब्त मादक पदार्थ से जुड़े 62 सैंपल बैग थाने से गायब पाए गए। पुलिस ने 17 जनवरी 2025 को सामग्री के निस्तारण का हवाला दिया, जबकि सैंपल बैग उपलब्ध नहीं थे और ट्रायल कोर्ट में जब्त सामग्री प्रस्तुत भी नहीं की गई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उस समय पदस्थ थाना प्रभारी और जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच शुरू की जाए तथा जांच पूरी होने तक उन्हें किसी थाने का प्रभार न दिया जाए। कोर्ट ने तीन माह के भीतर शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। साथ ही प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी भोपाल और एडीजी नारकोटिक्स इंदौर को यह निर्देश भी दिए गए कि सभी जिलों में एनडीपीएस मामलों में ‘एपेक्स परपेरेटर्स’ की पहचान और कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अगली सुनवाई 25 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। एसपी राठौड़ ने देहात थाना प्रभारी जितेंद्र मावई, उप निरीक्षक राघवेंद्र यादव और हरिशंकर शर्मा को लाइन अटैच किया है। इसके अतिरिक्त बालाघाट में पदस्थ उप निरीक्षक अंकित उपाध्याय और राजगढ़ में पदस्थ निरीक्षक मनीष शर्मा पर भी समान कार्रवाई की गई है। दो संबंधित अधिकारी पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस मामले में विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट, शिवपुरी ने 26 सितंबर 2025 को आरोपी जगशीर को धारा 8/15सी के तहत दोषी ठहराते हुए 15 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। बाद में सजा स्थगन संबंधी अर्जी वापस ले ली गई। ग्वालियर हाईकोर्ट की यह कार्रवाई न केवल शिवपुरी पुलिस के लिए चेतावनी है बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में एनडीपीएस मामलों में जांच की गंभीरता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकती है। न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि जांच अधिकारी केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए काम नहीं कर सकते, बल्कि तस्करी के असली सरगनाओं तक पहुंचने का प्रयास करना अनिवार्य है।
'रंग में भंग डालने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई', CM योगी का त्योहारों को लेकर सख्त आदेश

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को होली, महाशिवरात्रि और रमजान सहित विभिन्न त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्ती से निपटने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने यहां लोक भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक की. बैठक में सभी मंडलों, पुलिस जोन, रेंज और जनपदों के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि दो से चार मार्च तक होली का पर्व मनाया जाएगा और ब्रज क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में उत्सव का माहौल रहेगा. रंग में भंग डालने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई- सीएम योगी उन्होंने निर्देश दिए कि शोभायात्राओं में उपद्रवी तत्वों की घुसपैठ किसी भी स्थिति में न होने पाए और रंग में भंग डालने या उन्माद फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. सीएम योगी ने कहा कि विगत वर्षों की घटनाओं से सीख लेते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सतर्कता, निगरानी और प्रबंधन को और मजबूत किया जाए. उन्होंने कहा कि होलिका दहन केवल परंपरागत स्थलों पर ही कराया जाए और सड़क के बीच किसी भी स्थिति में न किया जाए. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाली पोस्ट पर भी सतत निगरानी रखने के निर्देश दिये गये. मुख्यमंत्री ने महाशिवरात्रि, होली और रमजान के साथ ही माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाओं, जनगणना और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों को देखते हुए शांति, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए. कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित- सीएम योगी उन्होंने कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की दुर्घटना रोकने के लिए पुलिस व प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा. पुलिस महानिदेशक ने बताया कि संबंधित दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने वाराणसी, मेरठ, लखीमपुर खीरी और बाराबंकी के जिलाधिकारियों से महाशिवरात्रि की तैयारियों की जानकारी ली. उन्होंने कहा कि 14 और 15 फरवरी को प्रमुख शिवधामों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे, इसलिए सुगम दर्शन, यातायात, पार्किंग, महिला सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें 24 घंटे सक्रिय रहें. सीएम योगी ने कहा कि मंदिर परिसरों में पर्याप्त महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाए. बोर्ड परीक्षाएं नकलविहीन हों- सीएम योगी मुख्यमंत्री ने यातायात जाम के स्थायी समाधान, रात्रि 10 बजे के बाद डीजे व तेज ध्वनि उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध के कड़ाई से पालन और धर्मस्थलों के आसपास भिक्षावृत्ति पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि 18 फरवरी से शुरू हो रही 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं नकलविहीन हों और परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए. किसी नई परंपरा की शुरुआत न हो- सीएम योगी सीएम योगी ने रमजान और संभावित रूप से 21 मार्च को ईद के मद्देनजर धर्मगुरुओं से संवाद बनाए रखने और किसी नई परंपरा की शुरुआत न होने देने के निर्देश भी दिए. मुख्यमंत्री ने बताया कि 19 मार्च से नवरात्र और इसके बाद रामनवमी का पर्व आएगा तथा इन सभी आयोजनों की तैयारियां समय से पूरी की जाएं व जनगणना के प्रथम चरण के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं.
लाडली से लखपति बिटिया: अब नई योजना में दोबारा आवेदन अनिवार्य

नई दिल्ली । दिल्ली सरकार ने बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। वर्ष 2008 से चल रही लाडली योजना को 31 मार्च 2026 को बंद कर दिया जाएगा और 1 अप्रैल 2026 से उसकी जगह दिल्ली लखपति बिटिया योजना लागू होगी, जिसका उद्देश्य बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता देना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि नई योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और इसे पूरी तरह डिजिटल मोड में लागू किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता और सहजता बनी रहे। नई लखपति बिटिया योजना के तहत सरकार बेटी के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन या डिप्लोमा तक अलग-अलग शैक्षणिक पड़ावों पर कुल 56,000 रुपये जमा करेगी, जो समय के साथ मिलकर ब्याज सहित 1 लाख रुपये से अधिक हो सकते हैं। यह राशि सीधे बेटी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। राशि निकासी की शर्तों के अनुसार, यह 18 वर्ष की आयु पूरी होने और 12वीं पास करने पर या 21 वर्ष की आयु में ग्रेजुएशन/डिप्लोमा पूरा करने के बाद की जा सकेगी। इस योजना में राशि चरणबद्ध रूप से दी जाएगी। जन्म के समय 11,000 रुपये, कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश पर 5,000-5,000 रुपये, कक्षा 10 पास करने पर 5,000 रुपये, कक्षा 12 में प्रवेश पर 5,000 रुपये और ग्रेजुएशन या डिप्लोमा के दौरान 20,000 रुपये दिए जाएंगे। कुल मिलाकर 56,000 रुपये की सरकारी सहायता बेटियों के खाते में जमा होगी, जो मैच्योरिटी पर बढ़कर करीब एक लाख रुपये बन सकती है। योजना का लाभ केवल उन्हीं बेटियों को मिलेगा जिनका जन्म दिल्ली में हुआ है और जिनका परिवार कम से कम तीन साल से राजधानी में रह रहा है। परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और हर परिवार की अधिकतम दो बेटियां ही योजना के लिए पात्र होंगी। लाभार्थी को मान्यता प्राप्त संस्थान से पढ़ाई करनी होगी और पूरा टीकाकरण अनिवार्य है। 18 साल से पहले शादी हो जाने पर लाभ निरस्त कर दिया जाएगा; यदि निर्धारित शर्तों पर क्लेम समय पर नहीं किया गया तो राशि सरकार को वापस चली जाएगी। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या नई योजना में दोबारा आवेदन करना होगा? सरकार ने स्पष्ट कहा है कि लाडली योजना 31 मार्च 2026 को बंद होगी और नई लखपति बिटिया योजना 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी, इसलिए पात्र लाभार्थियों को इसके लिए अलग से आवेदन करना होगा। आवेदन की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जिससे किसी सरकारी दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। नई पात्र बेटियों को तय शर्तों के अनुसार आवेदन करना होगा। सरकार ने यह भी बताया है कि लाडली योजना के कई खाते मैच्योरिटी के बाद भी क्लेम नहीं किए गए थे। ऐसे लंबित मामलों में भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बड़ी राशि लाभार्थियों को जारी की जा चुकी है। योजना के लिए शुरुआती तौर पर लगभग 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और लाडली योजना की अप्रयुक्त राशि को भी नई लखपति बिटिया योजना में समायोजित किया जाएगा ताकि बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक सहयोग निरंतर जारी रह सके।
गुरुवार की शाम में करें ये खास उपाय, मां लक्ष्मी की बरसात होगी आपके घर पर

नई दिल्ली । गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है और इस दिन किए गए उपायों का प्रभाव भी जल्दी दिखता है। अगर आप चाहते हैं कि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और धन की कमी दूर हो, तो गुरुवार की शाम को प्रदोष काल में कुछ खास उपाय जरूर करें। मान्यता है कि शाम के समय घर में मां लक्ष्मी के आगमन का समय होता है और इस समय दीपक जलाने से वे प्रसन्न होती हैं। इसलिए घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इस उपाय से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए गुरुवार की शाम को ईशान कोण में दीपक जलाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है और धन लाभ के योग बनते हैं। खासकर जब यह दीपक प्रदोष काल में जलाया जाए तो इसके प्रभाव और भी बढ़ जाते हैं। इसके अलावा, शाम के समय घर के आंगन में दीपक जलाना भी शुभ होता है। पुराने समय में लोग आंगन में दीपक जलाकर अंधेरे को दूर करते थे। आज भी अगर आप अपने आंगन में दीपक जलाते हैं, तो इससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए प्रदोष काल में तुलसी के पास दीपक जलाने से धन संबंधी परेशानियां कम होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही, घर के मंदिर में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से विष्णु-लक्ष्मी की कृपा से घर में धन लाभ होता है और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। गुरुवार की शाम को इन उपायों को नियमित रूप से करने से न केवल घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, बल्कि धन-लाभ के अवसर भी बढ़ते हैं। अगर आप सच्चे मन से और श्रद्धा के साथ दीपक जलाएंगे तो माना जाता है कि मां लक्ष्मी आपके घर पर अपनी कृपा बरसाएंगी और घर-परिवार में खुशहाली बनी रहेगी।
'उन्हें निक संग मेरी शादी टूटने का इंतजार…', बोलीं प्रियंका चोपड़ा, हेटर्स को दिया जवाब

नई दिल्ली। ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपनी इंडियन सिनेमा में कमबैक फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं. उनके इंडियन फैन्स उन्हें फिर से बड़े पर्दे पर इंडियन अवतार में देखने के लिए उत्सुक हैं. हाल ही में प्रियंका ने एक इंटरव्यू में अपनी अपकमिंग फिल्म से लेकर पर्सनल लाइफ से जुड़ी कुछ बातें साझा की हैं. निक से शादी के वक्त उठे सवाल? प्रियंका चोपड़ा ने वैराइटी इंडिया से अपनी चर्चित शादी को लेकर बात की है. उन्होंने बताया कि कैसे हॉलीवुड के फेमस सिंगर-एक्टर निक जोनस संग शादी को लेकर कई लोगों को आपत्ति थी. एक्ट्रेस ने साथ ही साथ अपनी शादी टूटने की बातों पर भी रिएक्ट किया. प्रियंका ने कहा, ‘हमारी शादी को अब 8 साल हो गए हैं. अगर लोग अभी भी इंतजार कर रहे हैं कि ये रिश्ता कब टूटेगा या बर्बाद होगा, तो वो उनकी मर्जी.’ ‘मैंने तो अब इसके बारे में सोचना ही छोड़ दिया है. पता नहीं हमने ऐसा क्या किया जो लोगों को हमारा रिश्ता इतना खटकता था. शायद इसलिए क्योंकि हम अलग-अलग देशों से हैं, अलग-अलग धर्म के हैं, और उम्र में भी फर्क है. ये सब सुनकर बहुत दुख होता था.’ प्रियंका बताती हैं कि उन्हें अब अपने रिश्ते को लेकर होने वाली चर्चाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता. वो और निक अब एक-दूसरे में खोए रहते हैं, बाहरी दुनिया से खुद को अलग कर चुके हैं. पति निक की तारीफ में क्या बोलीं प्रियंका? प्रियंका ने आगे अपने पति निक जोनस के बारे में भी बात की और उनकी तारीफ में भी कुछ बातें कहीं. उन्होंने कहा, ‘हमारी शादी बहुत जल्दी हो गई थी, मिलने के सिर्फ छह महीने में. जब मैंने निक से शादी की, तो मुझे भी लग रहा था कि ये सच में हो रहा है या नहीं. उनका ये वाला हिस्सा… मतलब मुझे लगा कि ये सब नकली है, ये दिखावा है, ये पागलपन है. लेकिन निक में सच्चाई है, पूरी ईमानदारी है. ये बात मुझे हर रोज इंस्पायर करती है.’ ‘मेरे प्रोफेशन में तो हर बार कुछ ना कुछ बनना पड़ता है, रोल बदलना पड़ता है, जो दिखाना हो वो दिखाना पड़ता है. लेकिन निक दिन भर जो भी बात करते हैं, जिससे भी बात करते हैं, वो हमेशा बिल्कुल सच्चे रहते हैं. वो बहुत छोटी उम्र से काम करने लगे थे. उनके मम्मी-पापा बहुत अच्छे, समझदार और सच्चे इंसान हैं, संत जैसे. तो मुझे पता चल गया कि ये गुण कहां से आए. ये उनकी ऐसी खूबी है जो सबको हैरान कर देती है, कोई बचाव नहीं कर पाता.’ प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस की शादी साल 2018 में हुई थी. दोनों के बीच लगभग 10 साल का अंतर है, जिसपर कई लोगों ने सवाल खड़े किए थे. मगर कपल ने हमेशा उन सभी सवालों का अपनी दमदार केमिस्ट्री से मुंह तोड़ जवाब दिया. अब दोनों एक बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनस के पेरेंट्स भी हैं, जिनका जन्म साल 2022 में हुआ था. डिजिटल और प्रिंट जर्नलिज्म में करीब 8 साल से अधिक का अनुभव। मनोरंजन, लाइफ स्टाइल पर काम कर चुकी हूं। कानपुर, मेरठ, रोहतक, जयपुर और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुकी हूं। कानपुर यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया है। साथ ही भारतीय विद्या भवन से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। हिन्दुस्तान लाइव से जुड़ने से पहले हिन्दुस्तान प्रिंट मीडिया, दैनिक भास्कर प्रिंट, राजस्थान पत्रिका डिजिटल, गृहलक्ष्मी, दैनिक जागरण डिजिटल जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। पिछले एक साल से प्रीति कुशवाहा लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़ी हैं और एंटरटेनमेंट बीट पर काम कर रही हैं।और पढ़ें
जबलपुर में छात्र हॉस्टल से लापता, स्कूल परिसर में मिली सुरक्षा की बड़ी चूक..

जबलपुर। माढ़ोताल थाना क्षेत्र के ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल हॉस्टल से दो छात्र अचानक लापता हो गए, जिसके बाद रात भर हड़कंप मच गया। बुधवार रात छात्र हॉस्टल में नहीं लौटे तो स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस टीम रात करीब 12 बजे स्कूल पहुंची और परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। फुटेज में छात्र स्कूल परिसर से बाहर जाते दिखाई नहीं दिए। इस पर स्कूल के सभी ब्लॉक्स और कक्षाओं में सघन तलाशी शुरू की गई। तलाशी के दौरान पता चला कि दोनों छात्र लगभग तीन घंटे तक एक कक्षा की अलमारी में छिपे रहे। पुलिस ने दोनों छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला। छात्रों की पहचान सार्थक पटेल और आलोक के रूप में हुई। सार्थक ने पुलिस को बताया कि पिछले दो हफ्ते से उसे घर पर माता-पिता से फोन पर बात नहीं कराई जा रही थी। उसने कहा कि रविवार को भी बातचीत नहीं कराई गई, जिससे वह नाराज था। इसी नाराजगी के कारण वह शाम करीब सात बजे अपने साथी आलोक के साथ कक्षा में गया और बाद में अलमारी में छिप गया। छात्र की यह हरकत स्कूल में हड़कंप मचाने के लिए काफी थी। सार्थक के पिता सीताराम पटेल ने आरोप लगाया कि स्कूल में अभिभावकों से नियमित बातचीत का नियम होने के बावजूद कई बार कॉल के बावजूद बच्चों से बात नहीं कराई जाती। उन्होंने कहा कि इस बार भी बच्चों को माता-पिता से बात कराने में अनदेखी हुई। उन्होंने प्रबंधन से स्पष्ट व्यवस्था बनाने और नियमित संवाद सुनिश्चित करने की मांग की। माढ़ोताल थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह पवार ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस यह जांच कर रही है कि यह घटना केवल संवाद की कमी का परिणाम थी या बच्चों पर किसी प्रकार का दबाव या प्रताड़ना थी। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन और कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे मामले की तह तक पहुंचा जा सके। इस घटना के बाद स्कूल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी की समीक्षा शुरू कर दी गई है। अभिभावकों को आश्वस्त किया गया है कि बच्चों के संवाद और सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल स्पष्ट किए जाएंगे। पुलिस ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने स्कूलों में हॉस्टल छात्रों की सुरक्षा और अभिभावकों से संवाद की अहमियत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि उनकी शारीरिक सुरक्षा। ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल की यह घटना अन्य स्कूलों के लिए चेतावनी के रूप में भी देखी जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
Mahashivratri 2026: दिल्ली का वो चमत्कारी शिवधाम, जहां एक साथ होते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन!

दिल्लीः महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अगर आप दिल्ली में रहकर देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना चाहते हैं, तो चांदनी चौक स्थित प्राचीन गौरी शंकर मंदिर आपके लिए सबसे खास जगह बन सकता है. इस ऐतिहासिक शिवालय में श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्वरूपों के दर्शन का दुर्लभ अवसर मिलता है. महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भक्तों का मेला लगता है. मेट्रो स्टेशन से लेकर मंदिर परिसर तक पैर रखने तक की जगह नहीं होती है. मंदिर को फूलों, बेलपत्र और रोशनी से सजाया जाता है. सुबह से ही जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष आरती का सिलसिला शुरू हो जाता है. देर रात तक ॐ नमः शिवाय और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा चांदनी चौक इलाका शिवमय हो उठता है. एक ही परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन मंदिर परिसर में सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन विधि-विधान के साथ कराए जाते हैं. खास बात यह है कि हर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी मान्यताओं और कथाओं को भी यहां विस्तार से बताया जाता है, जिससे श्रद्धालुओं का आध्यात्मिक अनुभव और गहरा हो जाता है. मंदिर का स्थान और स्थापनामंदिर के पुजारी सुशील शुक्ला जी ने बताया कि इस विशेष 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना 27 जुलाई 2024 को की गई थी. उन्होंने बताया कि देशभर के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा हर भक्त के लिए संभव नहीं हो पाती, ऐसे में यह मंदिर श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर महादेव के सभी ज्योतिर्लिंग स्वरूपों के दर्शन का अवसर देता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भारत के विभिन्न ज्योतिर्लिंग स्थलों से लाए गए शिवलिंग विधि-विधान के साथ स्थापित किए गए हैं. जिससे भक्तों को वास्तविक तीर्थ दर्शन जैसा अनुभव मिलता है.इतना ही नहीं है अब मंदिर में 1 जनवरी 2026 से भस्म आरती भी स्टार्ट हो गई है. जहां पर बाबा महाकालेश्वर की भस्म आरती की जाती है, आरती प्रत्येक सोमवार को सुबह 6:00 होती है. दर्शन का समय और सुरक्षा व्यवस्थागौरी शंकर मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए श्रद्धालु सुबह 4:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और इसके बाद शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक मंदिर में दर्शन कर सकते हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में व्यापक इंतजाम किए गए हैं.मंदिर में हर तरफ सीसीटीवी कैमरों की निगरानी की जा रही है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया गया है. दर्शन के लिए बनाए गए बेसमेंट हिस्से में एयर कंडीशनिंग की सुविधा उपलब्ध है, वहीं भव्य झूमरों और आकर्षक सजावट से मंदिर की भव्यता और भी बढ़ जाती है.
GWALIOR BANK CLOSE: ग्वालियर में ट्रेड यूनियन हड़ताल: PNB शाखाएं बंद, बैंकिंग सेवाओं में बाधा

HIGHLIGHTS: ट्रेड यूनियन हड़ताल से PNB की कुछ शाखाएं बंद रहीं स्टेट बैंक और प्राइवेट बैंकों में कामकाज सामान्य चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग मनरेगा खत्म करने के विरोध में श्रमिकों का प्रदर्शन मांगें नहीं मानी गईं तो दिल्ली कूच की चेतावनी GWALIOR BANK CLOSE: ग्वालियर। ट्रेड यूनियन की हड़ताल के कारण शहर की कुछ बैंक शाखाओं में सेवाएं बाधित रहीं। बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की कुछ शाखाएं बंद रही, जिससे ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा, जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और अन्य प्राइवेट बैंकों में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहा। लोगों को करना परेशानी का सामना बैंक में बंदी से प्रभावित लोगों ने बताया कि उन्हें हड़ताल की जानकारी नहीं थी। कुछ लोग तो भोपाल से ग्वालियर आए थे और वापसी का टिकट भी बुक कर लिया था, लेकिन बैंक का काम नहीं हो पाने से उन्हें समस्या हुई। 17 साल बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान, क्या बदलेंगे देश की राजनीतिक इबारत? इस बीच, शहर में लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के सामने ट्रेड यूनियन के बैनर तले धरना-प्रदर्शन भी आयोजित किया गया। प्रदर्शन में श्रमिकों ने चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग उठाई। साथ ही, भारत-अमेरिका के बीच किसानों से जुड़ी व्यापारिक डील को समाप्त करने की भी मांग की गई। मनरेगा समाप्त करने की अपील हड़ताल पर बैठे ट्रेड यूनियन नेताओं ने मनरेगा को समाप्त करने को श्रमिकों के साथ अन्याय करार दिया। उनका कहना था कि देशभर में श्रमिक हड़ताल पर हैं और यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आगे चरणबद्ध आंदोलन किए जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर दिल्ली कूच भी किया जाएगा। Lawrence Bishnoi Gang: अशोकनगर के बिल्डर को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर 10 करोड़ की रंगदारी, वॉयस नोट में दी धमकी विशेषज्ञों का कहना है कि इस हड़ताल का असर स्थानीय बैंकिंग सेवाओं पर सीमित रहा, लेकिन यह श्रमिकों की बढ़ती असंतोष और नीति संबंधी मांगों की ओर संकेत करता है। नागरिकों को अब बैंकिंग सेवाओं की स्थिति के बारे में सतर्क रहने और वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने की सलाह दी जा रही है। ग्वालियर में ट्रेड यूनियन की यह हड़ताल, श्रमिक अधिकारों और नीतिगत विरोध को उजागर करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन

नई दिल्ली। कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी घमासान खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के विधायक इकबाल हुसैन ने दावा किया कि कांग्रेस के करीब 80 से 90 विधायक उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। हुसैन ने कहा कि कई विधायक मानते हैं कि शिवकुमार के संघर्ष और मेहनत को सम्मानित करना चाहिए और आने वाले चुनावों की रणनीति के लिहाज से भी यह सही कदम होगा। रामनगर में पत्रकारों से बातचीत में हुसैन ने बताया कि सभी 140 विधायक बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं और करीब 80-90 विधायक नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ कौन खड़ा है और शिवकुमार के साथ कौन। विदेश यात्रा ने बढ़ाई हलचलसूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले कुछ विधायकों की विदेश यात्रा को गंभीरता से लिया है। पार्टी के कर्नाटक प्रभारी और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन विधायकों के नाम मांगे हैं जो इस यात्रा में शामिल थे। यह यात्रा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को शांत करने के लिए आयोजित की गई मानी जा रही है। राज्य पशुपालन मंत्री के. वेंकटेश ने कहा कि कुछ नेताओं ने उन्हें इस यात्रा में शामिल होने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा उनके मंत्रालय द्वारा आयोजित नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी कहा कि विधायक और एमएलसी अपने खर्च पर विदेश जा रहे हैं। दिल्ली में डीके शिवकुमार की बैठकप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर बैठक की, जो नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को और मजबूत करती है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समय ही बताएगा कि आगे क्या होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा या राहुल गांधी से मुलाकात की, तो शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात की और सभी चर्चा पूरी हो गई। शिवकुमार ने यह भी कहा कि वे सड़क पर खड़े होकर राजनीति नहीं कर रहे हैं और सब कुछ पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन में हो रहा है। आगे क्या होगाकर्नाटक कांग्रेस में यह घमासान अभी जारी है। 80-90 विधायक डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और पार्टी हाईकमान की बैठकें और विदेश यात्रा इस सियासी समीकरण को और जटिल बना रही हैं। अब नजर यह है कि नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में अगला कदम कब और कैसे उठाया जाएगा और क्या डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह संकट राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
17 साल बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान, क्या बदलेंगे देश की राजनीतिक इबारत?

नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर ऐतिहासिक मोड़ पर है। 12 फरवरी को हुए आम चुनाव ने देश की सत्ता की दिशा तय करने का मंच तैयार कर दिया। इस बार अवामी लीग की गैरमौजूदगी ने मुकाबले को पूरी तरह नया रंग दिया है और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरी है। पार्टी के चेहरा हैं तारिक रहमान, जिन्होंने 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद लंदन से लौटकर राजनीतिक परिदृश्य में धमाकेदार एंट्री की। उनकी वापसी केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि बांग्लादेश की सियासत के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। कौन हैं तारिक रहमानतारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं। उन्हें राजनीतिक विरासत परिवार से मिली और 1990 के दशक में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। 2001 से 2007 तक वे बीएनपी में बेहद प्रभावशाली नेता रहे। उस दौर में उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ कहा जाता था क्योंकि वे पर्दे के पीछे रणनीति बनाने वाले नेता के रूप में जाने जाते थे। संगठन पर उनकी पकड़ मजबूत थी और युवा कार्यकर्ताओं में उनका प्रभाव विशेष रूप से महसूस किया जाता था। निर्वासन और कानूनी चुनौतियां2007 में सैन्य समर्थित सरकार के दौरान तारिक रहमान पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और उन्हें जेल जाना पड़ा। बाद में इलाज के लिए वे लंदन चले गए और वहीं से पार्टी की गतिविधियों का संचालन करते रहे। 2018 और 2021 में उन्हें भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और 2004 के ग्रेनेड हमले से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। हाल ही में अदालतों ने कई फैसलों को पलट दिया, जिससे उनके देश लौटने का रास्ता साफ हो गया। पत्नी डॉ जुबैदा रहमानतारिक रहमान की पत्नी डॉ जुबैदा रहमान पेशे से चिकित्सक हैं और लंदन से उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं। उन्होंने सरकारी सेवा में भी शीर्ष स्थान हासिल किया था। हाल ही में राजनीतिक बदलावों के बाद उनके खिलाफ सजा पर रोक लग गई है।बेटी जायमा रहमानतारिक रहमान की बेटी जायमा रहमान 30 वर्ष की हैं और कानून की पढ़ाई कर चुकी हैं। उन्होंने लंदन से बैरिस्टर की डिग्री हासिल की और बीएनपी की वर्चुअल बैठकों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही हैं। बांग्लादेश का भविष्यतारिक रहमान की वापसी ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। समर्थक इसे लोकतांत्रिक संतुलन की वापसी बता रहे हैं, जबकि आलोचक उनके पुराने मामलों को याद दिला रहे हैं। अब यह देखने वाली बात है कि क्या वे चुनावी जीत के साथ सत्ता संभाल पाएंगे और देश की राजनीति को नई दिशा दे पाएंगे। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि बांग्लादेश की राजनीतिक धारा तय करने वाला मोड़ भी साबित हो सकता है।