समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव गिरफ्तार, दो दिन से थे लापता, पत्नी ने की थी गुमशुदगी की रिपोर्ट

नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव को बाराबंकी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले दो दिन तक उनकी कोई खबर नहीं थी और उनकी पत्नी ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार सुबह अपने एक्स हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए कहा था कि उनके टीवी पैनलिस्ट मनोज यादव पिछले रात से लापता हैं, जो कि बेहद गंभीर मामला है। अब बाराबंकी की पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है। मेडिकल के बाद लखनऊ भेजा गयाइस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद सियासी गलियारे में हलचल मच गई। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मनोज यादव का मेडिकल परीक्षण बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया। परीक्षण के तुरंत बाद पुलिस की टीम उन्हें लखनऊ ले गई। बाराबंकी की सफदरगंज पुलिस ने बताया कि मनोज यादव उर्फ बबलू ने धमकी देने और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल में शामिल होने के मामले में गिरफ्तारी के बाद कानूनी कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया। भगोलापुरवा निवासी मनोज यादव के खिलाफ 11 फरवरी को मामला दर्ज किया गया था। बता दें कि इससे पहले परिवार के लोगों ने बताया था कि मनोज यादव काकोरी में एक तिलक समारोह में शामिल होने गए थे, लेकिन वहां से लौटने के बाद उनका मोबाइल बंद हो गया। रात भर संपर्क न होने पर पत्नी ने लखनऊ के गोमती नगर विस्तार थाना में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। परिवार का दावा है कि मनोज बिना बताए कहीं नहीं जाते और किसी से उनकी कोई दुश्मनी भी नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और समारोह के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन को खंगाला। हालांकि, बाराबंकी पुलिस ने बाद में स्पष्ट किया कि मनोज यादव को धमकी देने और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के मामले में सफदरगंज क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही गोमती नगर विस्तार पुलिस ने परिजनों को पूरे मामले की जानकारी दी है।
राहुल गांधी के बयान पर सियासी संग्राम तेज, सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर रोक की मांग

नई दिल्ली ।लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया बयान को लेकर संसद और सियासत दोनों में घमासान मच गया है। भारत अमेरिका व्यापार समझौते पर केंद्र सरकार को घेरते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अमेरिका के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है और देश के किसानों के हितों को कुचल दिया है। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे देश को गुमराह करने वाला बताया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए उनकी संसद सदस्यता समाप्त करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग की है। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सोरोस जैसी विदेशी ताकतों के प्रभाव में आकर देश के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न केवल संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि देश की छवि को भी नुकसान पहुंचाते हैं। उनके अनुसार राहुल गांधी लगातार तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश कर रहे हैं और जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस विवाद पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक गंभीर संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारियों तथा शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। पासवान ने कहा कि विशेषाधिकार प्रस्ताव लाना संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है और यदि कोई सदस्य तथ्यहीन या आपत्तिजनक टिप्पणी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय संसदीय प्रक्रियाओं के तहत ही होगा। दरअसल बुधवार को सदन में बोलते हुए राहुल गांधी ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा कि इस समझौते में भारत के किसानों के हितों की अनदेखी की गई है जैसा पहले किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को शर्म आनी चाहिए कि उसने भारत माता को बेच दिया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि इंडिया गठबंधन की सरकार होती तो अमेरिका के साथ बातचीत बराबरी के स्तर पर की जाती। उनके अनुसार भारतीय डेटा एक रणनीतिक संपत्ति है और अमेरिका के साथ किसी भी वार्ता में इसे केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की रक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। राहुल गांधी के इन बयानों ने संसद में तीखी बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर भाजपा इसे राष्ट्रविरोधी मानसिकता करार दे रही है तो दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना और नीतियों की आलोचना करना है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई होती है और क्या यह मामला विशेषाधिकार समिति तक पहुंचता है या सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रहता है। फिलहाल इस मुद्दे ने संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
कांग्रेस छोड़ने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री तय? सियासत में हलचल तेज

नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस से हाल ही में इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब नई राजनीतिक पारी की तैयारी में बताए जा रहे हैं। चर्चाओं के मुताबिक, वह 15 फरवरी को समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्यता ले सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका और सपा के लिए अहम सियासी संदेश माना जाएगा। अखिलेश यादव करा सकते हैं सदस्यतासूत्रों के अनुसार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी की सदस्यता दिला सकते हैं। बताया जा रहा है कि उनके साथ कुछ पूर्व विधायक और क्षेत्रीय नेता भी सपा में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में यह केवल एक व्यक्ति का दल बदल नहीं, बल्कि एक छोटे राजनीतिक समूह का पुनर्संयोजन भी हो सकता है। कांग्रेस से अलग होने के बाद सिद्दीकी के अगले कदम को लेकर अटकलें तेज थीं। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन अब सपा में संभावित एंट्री की खबरों ने यूपी की राजनीतिक फिजा बदल दी है। बसपा से कांग्रेस और अब सपा की ओरनसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वे कभी बहुजन समाज पार्टी का बड़ा चेहरा रहे और पार्टी प्रमुख मायावती के करीबी सहयोगी माने जाते थे। 2017 में बसपा से निष्कासन के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था। हालांकि कांग्रेस में उनकी पारी लंबी नहीं चली। 24 जनवरी को उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उनके इस फैसले ने कांग्रेस संगठन में भी हलचल मचा दी थी। अब सपा में संभावित शामिल होने की चर्चा ने इसे और ज्यादा सियासी रंग दे दिया है। इस्तीफे के पीछे क्या वजह?सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ते समय संकेत दिए थे कि वह पार्टी की कार्यप्रणाली और अंदरूनी माहौल से संतुष्ट नहीं थे। चर्चा यह भी रही कि उन्हें अपेक्षित सम्मान और भूमिका नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में उनका असंतोष धीरे-धीरे सार्वजनिक फैसले में बदल गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम अहम साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक और पारंपरिक समीकरणों को लेकर दलों की रणनीति पहले से ही तेज है। ऐसे में सिद्दीकी जैसे अनुभवी नेता का सपा के साथ जाना विपक्षी राजनीति में नए समीकरण बना सकता है। बदलते सियासी समीकरणयूपी की राजनीति में दल-बदल नई बात नहीं है, लेकिन चुनाव से पहले बड़े चेहरों की हलचल हमेशा संकेत देती है कि जमीन पर तैयारी शुरू हो चुकी है। यदि 15 फरवरी को सिद्दीकी की सपा में औपचारिक एंट्री होती है, तो यह आने वाले महीनों में और राजनीतिक पुनर्संयोजन का रास्ता खोल सकती है।
Gold-Silver Rates: 26000 सस्ती हुई चांदी… फिर आई तेजी, आज इतने महंगे हुए गोल्ड-सिल्वर

नई दिल्ली। सोना और चांदी के भाव में गुरुवार को ग्लोबल स्तर पर गिरावट देखने को मिली, लेकिन अब इनके दाम में तेजी देखी जा रही है. यह तेजी निवेशकों की निचले स्तर पर खरीदारी के बाद आई है.सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. अमेरिका से लेकर भारतीय बाजार तक सोने और चांदी के भाव तेजी से गिरे थे. अमेरिकी बाजार में चांदी करीब 9 फीसदी और सोना 2 फीसदी से ज्यादा गिरकर बंद हुए थे. इधर, मल्टी कमोडिटी मार्केट (MCX) पर गुरुवार को अप्रैल वायदा के लिए सोना 6,400 रुपये सस्ते हुए थे और 1.52 लाख रुपये पर आ गए थे. वहीं चांदी की कीमत देर रात करीब 26000 रुपये गिरी थी, जिस कारण वायदा बाजार में एक किलो चांदी का भाव 2.37 लाख रुपये पर आ गया. सोने और चांदी के भाव में तेजी सुबह 10.30 बजे MCX पर मार्च वायदा के लिए चांदी 6196 रुपये चढ़कर 2,42,599 रुपये पर कारोबार कर रही थी. वहीं अप्रैल वायदा के लिए गोल्ड 1464 रुपये चढ़कर 1.54 लाख रुपये पर आ गया. सोने और चांदी के भाव में यह तेजी एक दिन पहले आई बड़ी गिरावट के बाद आई है. कल क्यों गिरे थे सोने और चांदी के भावसोने और चांदी के भाव में गिरावट की वजह मजबूत अमेरिकी बेरोजगारी डाटा और फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से रेट कटौती की उम्मीदें कमजोर होना माना जा रहा है. जिस कारण डॉलर के मजबूत होने के संकेत मिले हैं और सोना और चांदी के दाम गिरे हैं. हालांकि शुक्रवार को एमसीएक्स पर गिरावट के बाद खरीदारी होने से तेजी देखी जा रही है. रिकॉर्ड हाई से इतने सस्ते हुए सोना-चांदी 29 जनवरी 2026 को सोने की कीमत 1.93 लाख रुपये पर थे और चांदी का भाव 4.20 लाख रुपये थे, जो इनका रिकॉर्ड हाई लेवल है. सोने की कीमत शुक्रवार को 1.54 लाख रुपये पर आ गए और चांदी की कीमत 2.42 लाख रुपये पर आ गए. इसका मतलब है कि सोने की कीमत 40 हजार रुपये और चांदी की कीमत 1.82 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है. इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी के भावअंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दोनों के भाव गिरकर बंद हुए. अमेरिका (COMEX/Spot) में सोना लगभग 2.3–2.8% गिरकर लगभग $4,980–$4,940 प्रति औंस पर आ गया और चांदी लगभग 8.8% तक टूट गई, जो $75–$76 पर पहुंच गई.
फिल्मी जुदाई जैसी हकीकत: महिला अधिकारी ने 1.5 करोड़ में खरीदा पति, प्रेमिका ने दी दाम की रकम

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा। फिल्मी कहानी जैसी यह घटना असल जिंदगी में भी हुई जहां एक महिला अधिकारी ने अपने प्रेमी को उसकी पत्नी से खरीद लिया। मामला इतना चौंकाने वाला है कि इसे भोपाल का पहला ऐसा केस कहा जा रहा है जहां तलाक के बदले डेढ़ करोड़ रुपए की बड़ी डील हुई। यह पूरा मामला कुटुंब न्यायालय में दर्ज हुआ। 42 वर्षीय पति का दिल अपने दफ्तर में साथ काम करने वाली 54 वर्षीय महिला अधिकारी पर आ गया। वह अपनी पत्नी से 10 साल बड़ी है। पत्नी और पति के बीच कई बार काउंसलिंग भी हुई लेकिन पति ने अपनी नई प्रेमिका के साथ रहने का फैसला कर लिया। पत्नी ने भी यह बात समझ ली कि पति वापस नहीं आएगा लेकिन अपने और अपनी बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा की शर्त रखी। पत्नी ने पति से कहा कि वह उसे छोड़ दे लेकिन इसके बदले 27 लाख रुपए कैश चाहिए। यह सुनते ही प्रेमिका ने तुरंत सहमति दे दी। उसने यह भी नहीं चाहा कि प्रेमी का परिवार सड़क पर आ जाए और उनकी जिंदगी बर्बाद हो। प्रेमिका ने अपनी गाढ़ी कमाई से यह रकम चुकाने को तैयार हो गई। धीरे धीरे बातचीत आगे बढ़ी और दोनों पक्षों के बीच सौदा तय हो गया। कुल मिलाकर करीब डेढ़ करोड़ रुपए मकान + कैश में मामला सुलझा लिया गया। दोनों पक्षों ने सहमति से अलग होने का फैसला किया और कुटुंब न्यायालय में यह मामला भी दर्ज हुआ। यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या यह प्यार है या केवल पैसों का सौदा? क्या कानून की नजर में यह समझौता सही है? इस मामले में पत्नी ने अपने भविष्य और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जबकि प्रेमिका ने अपने प्रेमी को पाने के लिए आर्थिक दांव खेला। कुटुंब न्यायालय में इस तरह की पैसे से तलाक की डीलें दुर्लभ हैं लेकिन यह मामला एक बार फिर सामाजिक और नैतिक सीमाओं पर बहस को बढ़ा देगा। किसी भी मामले में यह स्पष्ट है कि पति पत्नी के बीच रिश्तों का टूटना केवल परिवार को ही नहीं बल्कि समाज को भी प्रभावित करता है। वहीं इस घटना से यह भी संदेश जाता है कि आर्थिक स्थिति मजबूत होने पर लोग रिश्तों को अपनी मर्जी से बदलने से नहीं चूकते। अब इस मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और कुटुंब न्यायालय में यह केस कैसे निपटता है यह देखने वाली बात होगी।
Valentine Day 2026 पर प्यार जताने के लिए 7 रोमांटिक गाने, अरिजीत सिंह के सॉन्ग भी लिस्ट में शामिल

नई दिल्ली। Valentine Day 2026 Romantic Songs: वैलेंटाइन वीक को और खास बनाने के लिए आप अपने पार्टनर को बॉलीवुड के रोमांटिक गाने डेडिकेट कर सकते हैं. इन गानों को आप अपनी वैलेंटाइन डे की प्लेलिस्ट में भी शामिल कर सकते हैं. इस लिस्ट में अरिजीत सिंह और जुबिन नौटियाल के गाने भी शामिल हैं. चलिए लिस्ट पर एक नजर डालते हैं. ‘आशिकी 2’ फिल्म का ‘तुम ही हो’ गाना बॉलीवुड के आइकॉनिक गानों में शामिल है. इस गाने को अरिजीत सिंह ने अपनी आवाज में बखूबी गाया है. वहीं ये गाना आशिकों की पहली पसंद बन गया है. ‘मरजावां’ फिल्म का ‘तुम ही आना’ गाना भी वैलेंटाइन डे की प्ले लिस्ट में शामिल है. इस गाने को जुबिन नौटियाल ने गाया है. वहीं सोशल मीडिया पर भी ये गाना काफी पॉपुलर है. पार्टनर को डेडिकेट करने के लिए ये परफेक्ट चॉइस है. जुबिन नौटियाल का एल्बम सॉन्ग ‘हमनवा मेरे’ भी काफी पॉपुलर है. साल 2018 में आए इस गाने को काफी पसंद किया गया था. सोशल मीडिया पर भी इसे मिलियन में व्यूज मिले थे. अभी भी फैंस इसे काफी पसंद करते हैं. ‘डंकी’ फिल्म का ‘ओ माही’ गाना भी इस लिस्ट में शामिल है. इस गाने को अरिजीत सिंह ने गाया है. वहीं इस गाने को शाहरुख खान और तापसी पन्नू पर फिल्माया गया है. फैंस भी इसे काफी पसंद करते हैं. ‘भेड़िया’ फिल्म का ‘अपना बना ले’ गाना भी इस लिस्ट में शामिल है. इस गाने को अरिजीत सिंह ने गाया है. वहीं ‘भेड़िया’ फिल्म के इस गाने को वरुण धवन और कृति सेनन पर फिल्माया गया है. शाहरुख खान की ‘जवान’ फिल्म का ‘चलेया’ गाना भी काफी पॉपुलर है. वैलेंटाइन डे पर पार्टनर को डेडिकेट करने के लिए ये परफेक्ट चॉइस है. सोशल मीडिया पर भी ये काफी वायरल हुआ था. ऋतिक रोशन की ‘काबिल’ फिल्म का ‘काबिल हूं’ गाना भी वैलेंटाइन डे की प्ले लिस्ट में शामिल है. इस गाने को जुबिन नौटियाल ने बेहद प्यारे तरीके से गाया है. इस गाने को ऋतिक रोशन और यामी गौतम पर फिल्माया गया है.
ग्वालियर में आवारा सांड का हमला: 6 साल के मासूम को पटककर घसीटा, सिर पर 25 टांके

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आवारा मवेशियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। मुरार क्षेत्र के त्यागी नगर में बीते 9 फरवरी को एक 6 साल के मासूम गोविंद लक्षकार पर आवारा सांड ने जानलेवा हमला कर दिया। घटना सीसीटीवी में कैद हो गई जिससे पता चलता है कि किस तरह सांड ने मासूम को बेरहमी से पटककर घसीटा। मासूम गोविंद को कोचिंग से घर लौटते समय यह हमला हुआ। उसी समय उसकी बहन नंदनी ने चीख-पुकार मचाई जिसे सुनकर आसपास के लोग तुरंत पहुंच गए और सांड को भगाकर बच्चे को बचाया। घायल मासूम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उसके सिर पर 25 टांके लगाए। साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोटें आई हैं। इलाज के बाद मासूम को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। घटना की सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि सांड मासूम को जोर-जोर से पटक रहा है और जमीन पर घसीट रहा है। यह दृश्य लोगों में गुस्सा और चिंता दोनों पैदा कर रहा है। इस घटना ने नगर निगम के आवारा मवेशियों को पकड़ने के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम समय-समय पर आवारा मवेशियों के नियंत्रण और पकड़ने का दावा करता रहता है लेकिन मुरार क्षेत्र में हुई इस घटना ने यह दिखाया कि वास्तविक स्थिति कितनी खतरनाक है। स्थानीय लोग और व्यापारी अब नगर निगम से इस समस्या को गंभीरता से लेने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि आवारा मवेशी सड़क पर घूमते हैं बच्चे और बुजुर्ग खतरे में हैं और कई बार ऐसे मवेशियों के कारण दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। पुलिस और नगर निगम की टीमों को इस घटना के बाद सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि केवल जुर्माना या चेतावनी से काम नहीं चलेगा बल्कि आवारा मवेशियों को पकड़कर सुरक्षित गौशालाओं में रखने की व्यवस्था करनी होगी। यह घटना ग्वालियर में आवारा मवेशियों की समस्या की एक बार फिर तस्वीर सामने लाती है जिसमें आम नागरिकों की जान जोखिम में है। यदि समय रहते बच्चे को बचाया नहीं जाता तो यह घटना और भी भयावह परिणाम दे सकती थी।
बाल्टी में हाथ डालते ही इमर्शन रॉड से करंट, 5 वर्षीय बच्ची की दर्दनाक मौत; परिजन PM से इनकार, थाने के सामने हुआ हंगामा

रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के बेगमगंज में एक 5 वर्षीय बच्ची की करंट लगने से मौत ने परिवार में मातम और क्षेत्र में चिंता की लहर फैला दी है। घटना हदाईपुर की बताई जा रही है जहां सुरेंद्र जैन की पुत्री स्वस्ति जैन 5 घर में हाथ धोने के लिए बाल्टी में हाथ डाला तभी उसमें रखी इमर्शन रॉड से करंट लग गया। बच्ची की चीख सुनकर परिजन दौड़े और उसे तुरंत सिविल अस्पताल लेकर गए लेकिन डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिजन मासूम के पीएम पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते थे। उन्होंने अस्पताल में लिखित रूप से डॉक्टर को बताया और शव को घर ले आए। इसके बाद पुलिस को भी परिजनों ने पीएम न कराने की मांग की। परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर शमशान पहुंच गए। इस बीच अस्पताल से थाने में सूचना पहुंची कि बच्ची अज्ञात कारण से करंट लगने से मृत हुई है। जब पुलिस ने मर्ग मृत्यु का मामला दर्ज किया और नियम अनुसार पीएम कराने के लिए कहा तो परिजन ने विरोध किया। शमशान में शव लेकर आए परिजन थाने के सामने भी एकत्रित हो गए और पीएम कराने से इनकार करते रहे। लोगों का कहना था कि पहले पुलिस ने मूक सहमति दी थी लेकिन बाद में पीएम के लिए दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने मामले की गंभीरता बताते हुए समझाइश दी और नियमों के अनुसार पीएम कराना आवश्यक बताया। अंततः परिजन समझौता करके शव को फिर से सिविल अस्पताल ले गए। पीएम के बाद परिजनों ने पुलिस की मौजूदगी में शव को पलकमति वाले शमशान में दफन कर दिया। इस पूरे विवाद ने यह सवाल उठाया है कि क्या परिवार और पुलिस के बीच संवाद सही ढंग से हुआ या नहीं। पुलिस का कहना है कि मर्ग की सूचना मिलने पर पीएम अनिवार्य था इसलिए नियम के अनुसार पीएम करा कर शव परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं परिजन का आरोप है कि पुलिस ने पहले मूक सहमति दी और बाद में पीएम के लिए दबाव बनाया। इस हादसे ने घरों में इमर्शन रॉड से पानी गर्म करने की प्रथा पर भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों और पुलिस का मानना है कि इमर्शन रॉड को बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए ताकि ऐसे दर्दनाक हादसे दोबारा न हों। स्वस्ति की मौत से परिवार में शोक का माहौल है और आसपास के लोग भी इस घटना को चेतावनी मानकर बच्चों की सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं।
भारत-अमेरिका महा-डील: वाशिंगटन से आएंगे 'खतरनाक' हथियार, टैरिफ युद्ध खत्म होने के बाद रक्षा संबंधों में नई गर्मी

नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच हाल ही में हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील ने दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में नई गर्मजोशी भर दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वाशिंगटन अब भारत को और भी खतरनाक हथियार प्रणालियों की आपूर्ति करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस कदम का सीधा उद्देश्य भारत की रक्षा क्षमता और सैन्य आधुनिकीकरण को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करना है। यह महत्वपूर्ण विकास ऐसे समय में हुआ है, जब पिछले कुछ वर्षों में दोनों महाशक्तियों के बीच रणनीति और व्यापार को लेकर कई उतार-चढ़ाव देखे गए थे। पिछले कुछ समय में राष्ट्रपति ट्रंप के शासनकाल के दौरान भारत और अमेरिका के संबंधों में काफी ठंडापन महसूस किया गया था। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर कड़ी टिप्पणियां की थीं और कई कड़े अमेरिकी टैरिफ भारत पर थोप दिए थे, जिससे आपसी सहयोग पर दबाव बढ़ गया था। लेकिन नई ट्रेड डील के बाद हालात तेजी से बदलते दिख रहे हैं। अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत के भारी टैरिफ को घटाकर अब मात्र 18 प्रतिशत कर दिया है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत है। इसके बदले में भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की संभावना जताई है। अमेरिकी विदेश विभाग में एशियाई मामलों के सहायक सचिव पॉल कपूर ने आधिकारिक पुष्टि की है कि दोनों देश रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और भारत अधिक उन्नत हथियार प्रणालियों की खरीद पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे न केवल भारत की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। यह सप्लाई श्रृंखला दोनों देशों के बीच एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है, जिसमें ऊर्जा उत्पादों से लेकर उच्च तकनीक वाले सैन्य उपकरणों तक सब कुछ शामिल है। वर्तमान रक्षा परिदृश्य की बात करें तो भारत ने 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अमेरिका के साथ समुद्री निगरानी विमानों और अन्य बड़ी सैन्य प्रणालियों पर गहन चर्चा जारी है। हालांकि, इस सौदे में फिलहाल एफ-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर विमानों की खरीद पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका लगातार भारत को अपने रक्षा खेमे में लाने के प्रयास कर रहा है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए अपनी जरूरतों के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ तकनीक का चयन कर रहा है। भारत के लिए यह संतुलन बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, क्योंकि रूस स्वतंत्रता के बाद से ही भारत का सबसे भरोसेमंद साझेदार रहा है। अमेरिका ने कई बार भारत को पूरी तरह अपने पक्ष में करने की कोशिश की है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की स्वायत्तता वाली विदेश नीति ने दोनों देशों के साथ संतुलन बनाए रखा है। इस नई डील के बाद यह साफ हो गया है कि भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नया भरोसा पैदा हुआ है। यह समझौता न केवल सैन्य मोर्चे पर बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी भविष्य की सुनहरी तस्वीर पेश करता है, जहाँ दोनों देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करेंगे।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम लेकर 5 करोड़ की फिरौती, अस्पताल संचालक के बेटे को धमकी इंदौर में बढ़ा अलर्ट

इंदौर। महू में एक बड़े हॉस्टल और अस्पताल संचालक के परिवार को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर धमकी देकर 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई है। यह मामला किशनगंज थाना क्षेत्र में सामने आया जहां अस्पताल के मालिक के बेटे को मोबाइल पर कॉल कर भारी रकम की मांग की गई। सूत्रों के अनुसार धमकी भरा कॉल सीधे संचालक के बेटे के मोबाइल पर आया। कॉल करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा बताया और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। इस तरह के गिरोह का नाम पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में रंगदारी और धमकी के मामलों में सुर्खियों में रहा है। हाल ही में अशोकनगर के एक व्यापारी को भी इसी तरह की धमकी मिलने की खबरें सामने आई थीं। ऐसे में महू में अस्पताल संचालक के परिवार को निशाना बनाए जाने के बाद पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है। धमकी मिलते ही पीड़ित परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अस्पताल परिसर और परिवार की सुरक्षा बढ़ा दी है। किशनगंज थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गए हैं। फोन कॉल की लोकेशन नंबर की जांच और साइबर सेल की मदद से तकनीकी पड़ताल शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कॉल वाकई गैंग से जुड़ा है या किसी ने नाम का इस्तेमाल कर दहशत फैलाने की कोशिश की है। कई बार अपराधी किसी बड़े गिरोह का नाम लेकर भय फैलाते हैं ताकि उनकी धमकी का असर बढ़ सके। इसी वजह से पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अलर्ट मोड पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। महू और इंदौर पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी है। साथ ही अस्पताल और परिवार के साथ जुड़े अन्य लोगों की भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। पुलिस का कहना है कि यदि कॉल करने वाला असली गिरोह से जुड़ा निकला तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना स्थानीय समुदाय में डर और चिंता फैलाने वाली है क्योंकि अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के संचालक और परिवार को ही निशाना बनाया गया। ऐसे मामलों में समय पर पुलिस की सक्रियता और तकनीकी जांच ही सुरक्षा और न्याय की दिशा तय करती है। आगे की जांच में यह भी सामने आएगा कि धमकी देने वाले का मकसद सिर्फ फिरौती था या किसी और उद्देश्य से परिवार को डराना था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपी की पहचान के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।