जेफ्री एपस्टीन की 30 लाख फाइलों का महा-खुलासा: सोशल मीडिया के शोर के बीच इन डॉक्यूमेंट्रीज में छिपा है असली सच

नई दिल्ली।जेफ्री एपस्टीन का नाम सुनते ही दुनिया भर में एक बार फिर सनसनी फैल गई है। अमेरिकी न्याय विभाग DOJ ने जनवरी 2026 में 30 लाख से अधिक पन्नों की फाइलें सार्वजनिक की हैं, जिनमें रसूखदार लोगों के ईमेल, फोटो और चौंकाने वाले रिकॉर्ड शामिल हैं। यह पूरा मामला नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और अंतरराष्ट्रीय सेक्स ट्रैफिकिंग के नेटवर्क से जुड़ा है। इन फाइलों के बाहर आने के बाद सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अपुष्ट खबरों और वीडियो की बाढ़ आ गई है। ऐसे में इस जटिल और संवेदनशील केस की सच्चाई को समझने के लिए फैक्ट-बेस्ड डॉक्यूमेंट्रीज ही सबसे भरोसेमंद जरिया बनकर उभरी हैं। इस केस की शुरुआत को समझने के लिए नेटफ्लिक्स इंडिया पर उपलब्ध जेफ्री एपस्टीन: फिल्थी रिच सबसे सटीक चुनाव है। यह चार एपिसोड की डॉक्यूमेंट्री सीरीज एपस्टीन की अथाह दौलत और राजनीतिक पैठ के इस्तेमाल से बनाए गए ट्रैफिकिंग साम्राज्य को बेनकाब करती है। इसमें उन साहसी पीड़ितों के प्रत्यक्ष बयान दर्ज हैं, जिन्होंने सिस्टम से लड़कर अपनी आवाज बुलंद की। भारतीय दर्शकों के लिए यह सीरीज इस डरावने नेटवर्क को समझने का सबसे सरल और प्रभावशाली तरीका पेश करती है, जो दिखाता है कि कैसे सत्ता की आड़ में अपराध फलता-फूलता रहा। यदि आपकी रुचि पत्रकारिता और पावर की जंग में है, तो नेटफ्लिक्स की फिल्म स्कूप 2024 एक मास्टरपीस है। यह फिल्म उस ऐतिहासिक क्षण को दिखाती है जब बीबीसी की महिला पत्रकारों ने अपनी जान जोखिम में डालकर प्रिंस एंड्रयू का वह विनाशकारी इंटरव्यू लिया था। इस एक इंटरव्यू ने ब्रिटेन के शाही परिवार की नींव हिलाकर रख दी थी। यह फिल्म केवल अपराध नहीं दिखाती, बल्कि यह भी साबित करती है कि कैसे एक खोजी पत्रकार की हिम्मत दुनिया की सबसे बड़ी हस्तियों को कटघरे में खड़ा कर सकती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर हाल ही में रिलीज हुई मिनी-सीरीज ए वेरी रॉयल स्कैंडल एपस्टीन और प्रिंस एंड्रयू के रिश्तों को और भी गहराई से फिल्मी अंदाज में पेश करती है। इसकी बेहतरीन एक्टिंग और थ्रिलर जैसा ड्रामा दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है। यह सीरीज दिखाती है कि कैसे व्यक्तिगत संबंध राजनीतिक और सामाजिक पतन का कारण बन जाते हैं। इस स्कैंडल के हर पहलू को इतनी सूक्ष्मता से फिल्माया गया है कि दर्शक इसे केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गंभीर सबक के रूप में देखते हैं। सत्य और तथ्यों की तलाश करने वालों के लिए सीक्रेट्स ऑफ प्रिंस एंड्रयू Apple TV/YouTube और द प्रिंस एंड एपस्टीन स्कैंडल BBC जैसी डॉक्यूमेंट्रीज अनिवार्य हैं। इनमें कोर्ट में पेश किए गए ईमेल्स, फ्लाइट लॉग्स और उन तस्वीरों का बारीक जिक्र है, जिन्होंने दुनिया के बड़े नामों को एपस्टीन की संपत्तियों पर मौजूद साबित किया। इन शोज को देखकर साफ होता है कि एपस्टीन का मामला सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं था, बल्कि यह सिस्टम की कमजोरियों और दौलत के अहंकार का एक भयावह मेल था। सोशल मीडिया की अफवाहों से बचकर इन प्रामाणिक माध्यमों से सत्य को जानना ही आज की जरूरत है।
टॉक्सिक टीजर विवाद: ईसाई समुदाय और महिला आयोग की भारी नाराजगी, क्या यश की फिल्म से हटेंगे विवादित सीन?

नई दिल्ली।कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित पैन इंडिया फिल्म टॉक्सिक ने अपने टीजर के रिलीज होते ही विवादों का बवंडर खड़ा कर दिया है। फिल्म के टीजर में दिखाए गए कुछ दृश्यों को लेकर न केवल सामाजिक बल्कि धार्मिक स्तर पर भी भारी विरोध देखने को मिल रहा है। नेशनल क्रिश्चियन फेडरेशन NCF ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड CBFC के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। ईसाई समुदाय का आरोप है कि टीजर में कब्रिस्तान के बाहर कार में एक आपत्तिजनक दृश्य दिखाया गया है और उसके तुरंत बाद पवित्र स्थल के भीतर गोलीबारी होती है, जो धार्मिक मर्यादा के खिलाफ है। NCF की शिकायत में विशेष रूप से आर्कएंजल माइकल की मूर्ति के चित्रण पर सवाल उठाए गए हैं। समुदाय का कहना है कि जिस तरह से धार्मिक प्रतीकों के साथ हिंसा और अश्लीलता को जोड़ा गया है, उससे उनकी भावना को गहरी ठेस पहुंची है। फेडरेशन ने मांग की है कि इस टीजर को यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाया जाए। उनका तर्क है कि ईसाई समुदाय की आस्था के साथ खिलवाड़ को अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अनदेखा नहीं किया जा सकता, और फिल्म मेकर्स को इसके लिए जवाबदेह होना चाहिए। धार्मिक विवाद के साथ-साथ इस फिल्म को महिला आयोग के गुस्से का भी सामना करना पड़ रहा है। टीजर में दिखाए गए कुछ अंतरंग दृश्यों पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अश्लीलता की श्रेणी में रखा है। विवाद इस कदर बढ़ गया कि दृश्यों में नजर आईं अभिनेत्री बीट्रिज टौफेनबाक को सोशल मीडिया पर भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट तक डिलीट कर दिया। आयोग का मानना है कि इस तरह के सीन अनावश्यक हैं और समाज में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को प्रभावित करते हैं। फिल्म जगत से इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं। दिग्गज निर्देशक अनुराग कश्यप ने फिल्म के पक्ष में अपना बयान जारी करते हुए विरोध करने वालों को ‘पाखंडी’ करार दिया है। कश्यप का तर्क है कि जब पुरुष कलाकार पर्दे पर कामुकता दिखाते हैं तो समाज उसे सहजता से स्वीकार कर लेता है, लेकिन महिला कलाकारों के मामले में दोहरा मापदंड अपनाया जाता है। उन्होंने इसे कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। उनके इस समर्थन ने सोशल मीडिया पर चल रही बहस को और तेज कर दिया है। गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी यह फिल्म 19 मार्च को रिलीज होने वाली है। फिल्म में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी और तारा सुतारिया जैसे बड़े सितारे नजर आएंगे। लेकिन रिलीज से पहले ही टॉक्सिक को न केवल कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि बॉक्स-ऑफिस पर इसकी सीधी टक्कर रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 से होने वाली है। अब देखना यह होगा कि केवीएन प्रोडक्शंस इन विवादित दृश्यों को फिल्म से हटाते हैं या यह विवाद फिल्म की कमाई और साख पर कोई बड़ा असर डालता है।
जबलपुर में अतिक्रमण कार्रवाई के दौरान दुकानदार की मौत, परिजन और व्यापारियों ने थाने के सामने शव रख कर किया प्रदर्शन

जबलपुर । शहर के बरगी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक दुकानदार की मौत हो जाने से तनाव की स्थिति पैदा हो गई। परिजनों और व्यापारियों ने प्रशासन पर दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया और विरोध स्वरूप थाने के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया। घटना के बाद प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया तभी प्रदर्शन शांत हुआ। घटना बरगी थाना अंतर्गत पटेल चौराहे की बताई जा रही है। मंगलवार शाम को राजस्व और पुलिस की टीम कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान दुकानदार को हार्ट अटैक आ गया और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग भड़क उठे। परिजनों का आरोप था कि प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान अत्यधिक दबाव बनाया जिससे दुकानदार की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। दुकानदार की मौत की खबर फैलते ही आसपास के व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने बरगी थाने के बाहर इकट्ठा होकर जोरदार विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने थाने के सामने शव रखकर नारेबाजी की और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन का रवैया अत्यधिक कठोर था और इससे मौत हुई है। विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के प्रयास किए। बरगी थाना प्रभारी ने लोगों को आश्वासन दिया कि घटना की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद लोगों का गुस्सा कुछ हद तक शांत हुआ और प्रदर्शन समाप्त हुआ। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उचित सावधानियां बरती गईं या नहीं। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की जा रही थी लेकिन परिजनों का आरोप है कि दबाव और तनाव के कारण दुकानदार की तबीयत बिगड़ गई। अब इस मामले की जांच की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई है। जांच में यह देखना होगा कि कार्रवाई के दौरान नियमों का पालन हुआ या नहीं और क्या प्रशासन की गलती से मौत हुई है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अतिक्रमण हटाने के दौरान सुरक्षा और चिकित्सा आपातकालीन इंतजाम थे या नहीं। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और उसके दौरान हुई मौत ने शहर में गर्मागरम बहस छेड़ दी है। लोग प्रशासन की कार्रवाई और जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहे हैं जबकि प्रशासन मामले की जांच और निष्पक्षता की बात कर रहा है।
अरुण जेटली स्टेडियम के बाद दिल्ली को मिलेगा दूसरा इंटरनेशनल वेन्यू; डीडीसीए DDCA का बड़ा खुलासा, रोहन जेटली ने दिखाई हरी झंडी

नई दिल्ली के क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक बहुत बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। राजधानी के ऐतिहासिक अरुण जेटली स्टेडियम के अलावा अब दिल्ली को एक और इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम मिलने जा रहा है। डीडीसीए DDCA के चेयरमैन रोहन जेटली ने इस महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा करते हुए बताया कि राजधानी में एक नया और अत्याधुनिक स्टेडियम तैयार किया जाएगा। इस नए स्टेडियम की सबसे बड़ी खासियत इसकी दर्शक क्षमता होगी, जो लगभग 70 हजार दर्शकों को एक साथ मैच देखने का मौका देगी। इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली में बढ़ती क्रिकेट की मांग को पूरा करना और खेल के बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर पहुँचाना है। क्षमता, इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रबंधन, डिमांड, दर्शकों वर्तमान में देश की राजधानी में केवल अरुण जेटली स्टेडियम ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का प्रमुख स्थल है, जिसकी क्षमता लगभग 41 हजार दर्शकों की है। सालभर यहाँ IPL, इंटरनेशनल मैच, वूमेंस प्रीमियर लीग WPL और महत्वपूर्ण घरेलू मैचों का आयोजन होता रहता है। इस अत्यधिक दबाव के कारण मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काफी बोझ पड़ता है। ऐसे में डीडीसीए ने दूसरे बड़े स्टेडियम के निर्माण का निर्णय लिया है ताकि क्राउड मैनेजमेंट और मैचों के वितरण में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके और प्रशंसकों को विश्वस्तरीय अनुभव मिले। रोहन, जेटली, विजन, भविष्य, जरूरत रोहन जेटली ने मीडिया से बात करते हुए इस विजन को साझा किया कि यह नया स्टेडियम न सिर्फ आज की तत्काल जरूरत को पूरा करेगा, बल्कि अगले दो दशकों में बढ़ने वाली क्रिकेट की लोकप्रियता को भी ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में दोनों स्टेडियम एक साथ काम करेंगे, जिससे राजधानी में एक हेल्दी क्रिकेट इकोसिस्टम तैयार होगा। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय मैचों की मेजबानी में आसानी होगी, बल्कि दिल्ली के उभरते खिलाड़ियों को भी अधिक अभ्यास और खेल के अवसर मिल सकेंगे। सुविधाएं, पहुंच, मेट्रो, कम्यूट, विकास स्टेडियम के स्थान चयन और निर्माण में डीडीसीए इस बात का विशेष ध्यान रखेगा कि यह दर्शकों के लिए सुगम और आसानी से पहुंच योग्य हो। योजना के अनुसार, नए स्टेडियम के पास मेट्रो कनेक्टिविटी और अन्य परिवहन सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि कम्यूट करने में प्रशंसकों को कोई असुविधा न हो। ठीक उसी तरह जैसे अरुण जेटली स्टेडियम शहर के केंद्र में स्थित है, नया वेन्यू भी आधुनिक कनेक्टिविटी से लैस होगा। इस प्रकार, दिल्ली जल्द ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए एक ऐसा मंच बनेगा जो अपनी विशाल क्षमता और सुविधाओं के मामले में दुनिया के बेहतरीन मैदानों को टक्कर देगा।
फेसबुक पर राकेश बनकर दोस्ती, असल में निकला फैजान; 24 वर्षीय युवती ने लव जिहाद, बलात्कार और धर्मांतरण के आरोपों में FIR दर्ज कराई

भोपाल। राजधानी में एक बार फिर लव जिहाद और दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। करोंद क्षेत्र की 24 वर्षीय युवती ने छोला थाने में आरोपी फैजान पुत्र रमजान के खिलाफ बलात्कार, धमकी, ब्लैकमेल और जबरन धर्म परिवर्तन के गंभीर आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने बलात्कार के मामले में तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया है, जबकि लव जिहाद और धर्मांतरण के एंगल की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2022 में फेसबुक पर आरोपी ने खुद को राकेश कुशवाह बताकर दोस्ती की। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार और शारीरिक संबंधों में बदल गई। कुछ समय बाद महिला को पता चला कि आरोपी का असली नाम फैजान है और वह हिंदू नाम का उपयोग कर संपर्क कर रहा था। जब महिला ने दूरी बनाने की कोशिश की, तो आरोपी ने अपने भाई यूनुस के जरिए उसे जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता ने यूनुस के खिलाफ पहले भी छोला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इस बीच, फैजान हत्या के एक अन्य मामले में जेल में था और दिसंबर 2025 में रिहाई के बाद फिर से महिला से संपर्क करने लगा। महिला के इनकार करने पर फैजान ने उसके परिवार को जान से मारने की धमकियां दीं और जबरन बलात्कार किया। पीड़िता ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को फैजान महिला को जबरन कहीं ले जा रहा था, तभी जेल रोड पर एक होटल के पास दुकानदारों की मदद से वह बच निकली। इसके बाद बजरंग दल के सदस्यों की सहायता से महिला थाने पहुंची और पूरी घटना की शिकायत की। युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी ने लगातार ब्लैकमेल किया और उसे सोशल मीडिया पर भी परेशान किया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 बलात्कार 506 आपराधिक धमकी 354 और अन्य संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर ली है। लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के आरोपों की जांच के लिए पुलिस ने विशेष टीम गठित की है। पुलिस ने बताया कि मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है और आरोपी की तलाश में छापेमारी की जा रही है। पीड़िता ने सोशल मीडिया पर भी मदद की अपील की है, जबकि पुलिस ने नागरिकों से सहयोग की गुहार लगाई है। इस घटना ने शहर में सुरक्षा और सोशल मीडिया पर पहचान छुपाकर संबंध बनाने के खतरों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
दिल्ली में टीम इंडिया का ऐतिहासिक 'धमाका': नामीबिया को 93 रनों से रौंदकर भारत ने टी-20 विश्व कप में रचा नया कीर्तिमान

नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में टीम इंडिया ने टी-20 विश्व कप 2026 के ग्रुप ए मुकाबले में नामीबिया को 93 रन के विशाल अंतर से हराकर इतिहास रच दिया है। रनों के लिहाज से यह भारत की टी-20 विश्व कप के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी जीत है। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ने अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए विश्व मंच पर अपनी ताकत का जोरदार प्रदर्शन किया और क्रिकेट जगत को अपनी आक्रामकता का संदेश दिया। ईशान, हार्दिक, पारी, रन, आक्रमण मैच की शुरुआत से ही भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बेहद आक्रामक अंदाज अपनाया। सलामी बल्लेबाज ईशान किशन ने 61 रन की विस्फोटक पारी खेलकर पारी की नींव मजबूत की, जबकि हार्दिक पांड्या ने 52 रन बनाकर स्कोर को जबरदस्त रफ्तार प्रदान की। मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने भी क्रीज पर आते ही हाथ खोले और तेजी से रन जोड़े, जिसके परिणामस्वरूप टीम इंडिया ने निर्धारित 20 ओवरों में 209 रन का एक अभेद्य और मजबूत स्कोर खड़ा कर दिया। लक्ष्य इतना बड़ा था कि नामीबिया की टीम पहली ही गेंद से मानसिक दबाव में नजर आई। कोलंबो, इंग्लैंड, रिकॉर्ड, 2012, इतिहास इस ऐतिहासिक जीत ने वर्ष 2012 में बने उस रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है जब ICC Men’s T20 World Cup के दौरान कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में भारत ने इंग्लैंड को 90 रन के भारी अंतर से हराया था। वह जीत पिछले कई सालों तक भारत की सबसे बड़ी जीत बनी रही, लेकिन अब दिल्ली के मैदान पर मिली इस 93 रनों की प्रचंड जीत ने उस पुराने कीर्तिमान को प्रतिस्थापित कर दिया है और अब यह जीत इतिहास के पन्नों में शीर्ष पर दर्ज हो गई है। मीरपुर, ऑस्ट्रेलिया, मेलबर्न, जिम्बाब्वे, अभियान भारत की इस निरंतरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टीम की तीसरी सबसे बड़ी जीत वर्ष 2014 में मीरपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 73 रन से आई थी। इसके बाद 2022 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में भारत ने जिम्बाब्वे को 71 रन से हराकर अपना परचम लहराया था। वहीं, पिछले 2024 विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ मिली 68 रन की जीत भारत की पांचवीं सबसे बड़ी जीत के रूप में याद की जाती है। इन सभी मुकाबलों ने अलग-अलग दौर में भारतीय क्रिकेट की वैश्विक ताकत और जीत के प्रति अटूट विश्वास को स्थापित किया है। गेंदबाजी, दबाव, विकेट, समापन, जीत जब बात लक्ष्य के बचाव की आई, तो 209 रन के पहाड़ जैसे स्कोर का पीछा करते हुए नामीबिया की टीम भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के सामने टिक नहीं सकी। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही सटीक लाइन-लेंथ पर गेंदबाजी की और नियमित अंतराल पर विकेट चटकाते रहे। नामीबिया की पूरी टीम 18.2 ओवर में मात्र 116 रन पर ही सिमट गई। इस तरह भारत ने न केवल मैच जीता, बल्कि रनों के अंतर से अपनी सबसे बड़ी 93 रनों की ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ जीत पर मुहर लगा दी। टी-20 विश्व कप के इतिहास में भारत की 5 सबसे बड़ी जीत: भारत बनाम नामीबिया: 93 रन विश्व कप 2026, दिल्ली भारत बनाम इंग्लैंड: 90 रन विश्व कप 2012, कोलंबो भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया: 73 रन विश्व कप 2014, मीरपुर भारत बनाम जिम्बाब्वे: 71 रन विश्व कप 2022, मेलबर्न भारत बनाम इंग्लैंड: 68 रन विश्व कप 2024, प्रोविडेंस
आय से अधिक संपत्ति मामला: पूर्व डिप्टी डायरेक्टर की 11.81 करोड़ की संपत्ति PMLA के तहत अटैच

जबलपुर । मध्यप्रदेश के भोपाल जोनल ऑफिस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश सरवटे के खिलाफ PMLA 2002 के तहत 11.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को प्रोविजनल रूप से अटैच किया गया है। यह कार्रवाई भोपाल जोनल ऑफिस की ओर से आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई थी जिसमें संपत्ति के स्रोत और उसके दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जगदीश सरवटे मध्यप्रदेश के जबलपुर में आदिम जाति कल्याण विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर तैनात रहे हैं। उनके खिलाफ यह मामला आय से अधिक संपत्ति के संदेह पर दर्ज किया गया था। आरोप है कि उनके पास घोषित आय से कहीं अधिक संपत्ति पाई गई है जिसके चलते विभाग ने PMLA की धाराओं के तहत यह कठोर कदम उठाया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अचल संपत्तियों को प्रोविजनल रूप से अटैच किया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति के वैध दस्तावेज और स्रोत की पुष्टि होने पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह कार्रवाई EOW की पिछली कार्रवाई से जुड़ी हुई है जब जबलपुर EOW की टीम ने छापेमारी के दौरान करोड़ों की संपत्ति के साथ बाघ की खाल भी बरामद की थी। उस जांच में EOW को आरोपी की आय से अधिक करोड़ों रुपए की संपत्ति मिलने की जानकारी मिली थी। अब इस मामले में PMLA के तहत अटैचमेंट की प्रक्रिया पूरी की गई है जिससे आरोपी की संपत्ति को किसी भी तरह की बिक्री या हस्तांतरण से रोक दिया गया है। PMLA 2002 के तहत अटैचमेंट का अर्थ है कि संपत्ति को अस्थायी रूप से सीज कर दिया जाता है ताकि जांच पूरी होने तक उसका उपयोग या हेरफेर न हो सके। इस मामले में EOW की जांच जारी है और आगे की जांच में यह देखा जाएगा कि आरोपी ने संपत्ति के स्रोत को सही तरीके से दिखाया या नहीं। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ संपत्ति को फॉरफिट भी किया जा सकता है। मामले की गूंज अब पूरे राज्य में सुनाई दे रही है क्योंकि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के खिलाफ सरकार की सख्त नीति को दर्शाती है।
खंडवा के धरमपुरी गौशाला में भूख-प्यास से गायों की मौत, कलेक्टर ने इंजीनियर-डॉक्टर को नोटिस जारी किया

खंडवा । जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर धरमपुरी की नंद मोहन समिति गौशाला में एक महीना से लगातार गायों की मौत का सिलसिला चल रहा है। बुधवार को गौशाला के पास लगभग छह गायों के शव और छह के कंकाल मिलने से मामला सार्वजनिक हुआ तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। सरकारी अनुदान से संचालित इस गौशाला में गायों की मौत की खबर फैलते ही कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान गौशाला की स्थिति बेहद खराब मिली। फर्श टूटा हुआ पानी की टंकी लीकेज में और चरनौई भूमि पर चारे की बजाय गेहूं की फसल उगती हुई दिखी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृत गायों के शवों को दफनाने की बजाय वन विभाग की जमीन पर खुले में छोड़ दिया गया था। इससे प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई और कलेक्टर ने संबंधित इंजीनियरों और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि धरमपुरी की गौशाला मुख्य मार्ग से लगभग 4 किलोमीटर दूर है। वहां पहले भी कुछ गायों के मृत और बचे हुए कंकाल मिलने की शिकायत आई थी। उस समय निरीक्षण के बाद गौशाला के संचालकों और ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव को बेहतर प्रबंधन के निर्देश दिए गए थे। साथ ही हर महीने गौशाला का दौरा करने वाले डॉक्टर को भी नोटिस जारी किया गया है। गौशाला के संचालक जब कलेक्टर से पूछे गए तो नंद मोहन गौशाला के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के सदस्य आशीष बरोले ने कहा कि आसपास के गांवों के लोग मृत गायों को यहां छोड़ जाते हैं हम क्या कर सकते हैं। इस बयान के बाद ग्रामीणों ने आरोपों को गलत बताया और कहा कि गायों की मौत गौशाला के खराब प्रबंधन और खाने-पीने की कमी से हुई है। पशु चिकित्सा विभाग के उप-संचालक हेमंत शाह ने बताया कि गायों की मौत एक दिन में नहीं हुई बल्कि लगभग 15 दिनों के अंतराल में यह घटना सामने आई है। मौके पर सिर्फ एक गाय का शव मिला जबकि अन्य के कंकाल पाए गए जिन्हें सही तरीके से डिस्पोजल कराया गया। उन्होंने कहा कि पूरी जांच की रिपोर्ट कलेक्टर को दे दी गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।मामले की जांच जिला प्रशासन द्वारा जारी है और अब इस गौशाला के प्रबंधन पानी-चारे की व्यवस्था और विभागीय लापरवाही की जाँच की जा रही है।
फागुन में सिमटती गंगा से बढ़ी चिंता, बिहार में भीषण गर्मी और जल संकट के संकेत

नई दिल्ली ।बिहार में इस बार गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। फागुन के महीने में ही गंगा का जलस्तर घटने लगा है जिससे आने वाले महीनों में भीषण गर्मी और संभावित जल संकट की आशंका गहरा गई है। आमतौर पर वैशाख और जेठ में गंगा की धारा सिमटती है लेकिन इस वर्ष फरवरी में ही शहरी इलाकों से नदी काफी दूर चली गई है। यह बदलाव सामान्य मौसमी चक्र से अलग माना जा रहा है और विशेषज्ञ इसे गंभीर संकेत के रूप में देख रहे हैं। भागलपुर के बरारी स्थित इंटकवेल की स्थिति हालात की गवाही दे रही है। वर्ष 2025 की फरवरी में जिस स्थान से गंगा की धारा से पानी मिल रहा था इस बार वहां से करीब 100 फीट आगे तक अतिरिक्त पाइप लगाकर पानी लेना पड़ रहा है। यानी नदी की धारा पीछे हट चुकी है। इंटकवेल प्रबंधन ने आगे और जलस्तर गिरने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त पाइप मंगाने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि शहर की पेयजल आपूर्ति बाधित न हो। गर्मी के प्रारंभिक संकेत केवल नदी तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों को सामान्य से अधिक प्यास लगना और भूख कम होना भी तापमान में संभावित वृद्धि का संकेत माना जा रहा है। यदि मार्च और अप्रैल में वर्षा सामान्य से कम रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संभावित पानी संकट को लेकर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पीएचईडी विशेष सतर्कता बरत रहा है। विभागीय अभियंताओं से सभी क्षेत्रों के ग्राउंड वाटर लेवल की रिपोर्ट मांगी गई है। कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार ने जूनियर इंजीनियरों को साप्ताहिक अवलोकन के निर्देश दिए हैं ताकि भूजल स्तर में गिरावट की नियमित निगरानी की जा सके और जरूरत पड़ने पर सरकार से समय रहते मदद ली जा सके। इधर केंद्रीय भूमि जल बोर्ड सीजीडब्ल्यूबी की प्री मानसून बुलेटिन ने भी चिंता बढ़ा दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जनवरी फरवरी में की गई ग्राउंड सुपरविजन के दौरान भागलपुर समेत गंगा किनारे बसे शहरों और गांवों में भूजल स्तर गिरने की पुष्टि हुई है। सीजीडब्ल्यूबी ने सभी प्रखंडों का जलस्तर रिकॉर्ड किया है और विस्तृत रिपोर्ट मई जून में प्रकाशित की जाएगी। प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि भूजल भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। गंगा से सटे जिलों के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। बक्सर में भूजल स्तर 56138.3 से घटकर 30318.55 हेक्टेयर मीटर हो गया है। पटना में यह 98219.10 से घटकर 37595.63 लखीसराय में 37503.18 से 26462.36 और बेगूसराय में 50675.69 से घटकर 15692.38 हेक्टेयर मीटर रह गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वर्षा जल संचयन भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए गए तो आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहरा सकता है। फिलहाल प्रशासन सतर्क है लेकिन फागुन में ही सिमटती गंगा यह संकेत दे रही है कि इस बार की गर्मी सामान्य नहीं रहने वाली।
'घुटनों के बल पर लागू करेगी बीजेपी', यूजीसी बिल को लेकर पल्लवी पटेल ने सरकार को दी चुनौती

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा में यूजीसी बिल को लेकर अपना दल कमेरावादी पार्टी नेता और सिराथू सीट से विधायक पल्लवी ने भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस सरकार ने जानबूझकर यूजीसी बिल को कोर्ट के दांवपेंच में फंसा दिया है. लेकिन, एक दिन यहीं सरकार घुटनों पर आकर इसे लागू करेगी. पल्लवी पटेल ने राज्यपाल के अभिभाषण पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मैं भारतीय जनता पार्टी से पूछना चाहती हूं कि आपकी दृष्टि बदलाव, सुधार और रिफॉर्म क्या है? क्या आपकी नजर मे रिफॉर्म सिर्फ आंकड़ों तक सीमित है या सत्ता प्राप्ति तक सीमित है. क्योंकि, झूठे आंकड़े पेश करके सुधार विकास के दावे करके छवि नहीं सुधार सकते हैं. यूजीसी बिल को लेकर सरकार को घेरासिराथू विधायक ने कहा कि जिस बदलाव, सुधार और रिफॉर्म की हम बात कर रहे हैं उसका उद्देश्य है न्याय, समानता और दक्षता है लेकिन, बीजेपी की सरकार ने इस विचार के उद्देश्य की धज्जियां उड़ा दी है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं है तो क्या कारण था कि देश के उच्च संस्थानों में समानता के भाव को उजागर करने के लिए जिस यूजीसी एक्ट 2026 को संसदीय समिति की संस्तुति के बाद और कोर्ट के निर्देशानुसार लाया गया क्यों आपने उसे लाकर पिछड़ा वंचित समाज को खुश होने का अवसर दिया और फिर सोची समझी रणनीति के तहत सड़कों पर तनाव पैदा करने का काम किया. इसके बाद इसे न्यायपालिका के पेचीदा घुमाव में फंसा दिया. भारतीय जनता पार्टी पर उठाए सवालपल्लवी पटेल ने सवाल किया आपको ये करके क्या मिला? यूजीसी समानता अधिनियम के लागू होने के बाद यहां सालों से चले आ रहे वंचित और अगड़ा समाज की खाई को पाटा जा सकता था लेकिन आपने इस खाई को और गहरा कर दिया. ये तो वहीं बात हुई चित भी अपनी और पट भी अपनी. जितना सवाल आज इस सरकार पर उठ रहा है उतना है सवाल आज हम जन प्रतिनिधियों पर भी उठ रहा है. क्योंकि वंचित समाज आज उच्च शिक्षा और सम्मान के लिए अपने जनप्रतिनिधियों की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है. ये हम सबकी जिम्मेदारी है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस पर चर्चा की जाए.. ‘घुटनों पर आकर लागू करेगी सरकार’उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की कविता पढ़ते हुए कहा कि ‘जो तटस्थ है समय लिख देगा उसका भी अपराध..’ पल्लवी ने कहा कि मैं भविष्य वक्ता तो नहीं लेकिन याद रखिए जिस बीजेपी सरकार ने इस यूजीसी बिल को कोर्ट में फंसाकर का काम किया वहीं घुटनों पर आकर इस बिल को लागू करेगी. बीजेपी का हर कदम रिफॉर्म नहीं होता है. ‘मेरी मजबूरी समझिए, मेरा तो ये भी ठिकाना नहीं…’, यूपी विधानसभा में भावुक हुए अब्बास अंसारी