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मासूम जान ने चुना मौत का रास्ता: भोपाल के सूखी सेवनिया में किशोरी ने घर में की खुदकुशी, सुसाइड नोट न मिलने से उलझी गुत्थी!

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सूखी सेवनिया थाना क्षेत्र में शुक्रवार को एक दुखद घटना घटी, जहाँ एक 15 साल की किशोरी ने अपने घर के कमरे में दुपट्टे का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। घटना के वक्त किशोरी घर में अकेली थी और उसके माता-पिता अपने काम पर गए हुए थे। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक आत्मघाती कदम उठाने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। छोटे भाई ने देखा खौफनाक मंजरपुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतका के माता-पिता फेरी लगाकर प्लास्टिक का सामान बेचने का काम करते हैं और रोज की तरह शुक्रवार सुबह भी काम पर निकल गए थे। दोपहर के समय जब छोटा भाई घर पहुँचा, तो उसने अपनी बहन को कमरे में पंखे से लटके हुए देखा। बहन की यह हालत देख मासूम भाई सहम गया और उसने तुरंत फोन कर अपने माता-पिता को इस भयावह स्थिति की जानकारी दी। शोर सुनकर इकट्ठा हुए पड़ोसियों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। जांच में जुटी पुलिस, कारणों पर सस्पेंसघटनास्थल पर पहुँची पुलिस को कमरे से कोई भी सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने जब परिजनों से प्रारंभिक पूछताछ की, तो उन्होंने किसी भी तरह के घरेलू विवाद या किशोरी को डांट-फटकार लगाने जैसी बात से साफ इनकार किया है। बताया जा रहा है कि किशोरी ने पांचवीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी और वह घर के कामों में हाथ बटाती थी। सुसाइड नोट न होने और परिजनों के बयानों के चलते पुलिस के लिए यह मामला एक रहस्य बन गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजारशनिवार को पुलिस की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम किया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक समय और अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी मिल सकेगी। फिलहाल, पुलिस किशोरी के मोबाइल फोन और उसके दोस्तों से पूछताछ करने की योजना बना रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह पिछले कुछ दिनों से किसी मानसिक तनाव में थी।

देवास में नरवाई जलाने पर अर्थदंड का प्रावधान, किसानों को सतर्क रहने की हिदायत

देवास जिले में गेंहू की फसल कटाई के बाद खेतों में शेष नरवाई या फसल अवशेष जलाने पर अब अर्थदंड लगाया जाएगा। जिले के कलेक्टर रितुराज सिंह ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में पंचायत स्तर तक समिति बनाकर नरवाई जलाने की निगरानी करें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें। जिले में गेंहू की फसल पकने के कारण कटाई के बाद खेतों में अवशेष बच जाते हैं। कई किसान इन्हें साफ-सफाई के लिए जलाते हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषण और आग लगने का खतरा रहता है। कलेक्टर ने कहा कि अवशेष जलाना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि इससे पर्यावरण और स्थानीय समुदाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। निर्देशों के अनुसार प्रत्येक पंचायत में समिति गठित की जाएगी जो खेतों में अवशेष जलाने की गतिविधियों पर निगरानी रखेगी। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अर्थदंड लगाया जाएगा। अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई को जलाने के बजाय खेतों में दहन रहित तरीकों का उपयोग करें, जैसे मल्चिंग, कंपोस्टिंग या मशीनों द्वारा कटाई और अवशेष निपटान। कलेक्टर रितुराज सिंह ने कहा कि प्रशासन इस दिशा में सख्ती बरतेगा और नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा। इसके तहत एसडीएम नियमित निगरानी करेंगे और पर्यावरण संरक्षण के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।यह कदम किसानों और प्रशासन को पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित कृषि प्रथाओं की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

श्रद्धा और आस्था का केंद्र: सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर उमड़ेगा आस्था का सागर

बैतूल जिले के भैंसदेही में पूर्णा नदी के पवित्र तट पर स्थित प्राचीन सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धा और उत्साह का केंद्र बन चुका है। सदियों पुराना यह मंदिर अपनी रहस्यमयी किंवदंती, अधूरे निर्माण और चमत्कारी मान्यताओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने महाशिवरात्रि की तैयारियों में जुटकर इंतजाम किए हैं। विशेष रूप से सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, पूजा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अनुमान है कि इस वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुँचेंगे और रात्रि में शिवलिंग के दर्शन और अभिषेक के लिए उपस्थित होंगे। स्थानीय लोगों और पुरातन मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर कभी अधूरा रह गया था और इसे पूर्ण करने का श्राप माना जाता है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का विश्वास चमत्कारी घटनाओं और आस्था के कारण अटूट है। महाशिवरात्रि के दौरान यहां सुबह से ही भक्तों की कतारें लग जाती हैं। रात्रि जागरण, विधि-विधान से पूजा और बेलपत्र, धतूरा, दूध, घी और जल से अभिषेक की परंपरा यहां निभाई जाती है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना है। प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और आसपास के क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं और मेडिकल सुविधा की व्यवस्था की गई है। स्थानीय व्यवसायियों और पर्यटन विभाग ने भी इस अवसर को देखते हुए तैयारियां पूरी कर रखी हैं। स्थानीय आस्था और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में शिवलिंग पर विधिपूर्वक अभिषेक करने से मनोकामनाओं की पूर्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है। महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु रातभर जागरण करते हैं और संपूर्ण दिन व्रत रखते हैं। सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर की विशिष्टता न केवल इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व में है बल्कि इसके आसपास के प्राकृतिक वातावरण और पूर्णा नदी के पवित्र तट की शांति में भी निहित है। यही कारण है कि श्रद्धालु यहां दूर-दूर से आते हैं और मंदिर की इस अनोखी आस्था और अनुभव का हिस्सा बनते हैं।

केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक बदलाव: साउथ ब्लॉक में अंतिम कैबिनेट बैठक के साथ नए युग की शुरुआत

नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों में स्थानांतरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक संपन्न हुई और यह क्षण केवल भवन परिवर्तन का नहीं बल्कि इतिहास और भविष्य के संगम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह परिसर गुलामी से आजादी और स्वतंत्र भारत की नीतिगत यात्रा का साक्षी रहा है। मंत्री ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नए प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवा तीर्थ के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया गया है। ब्रिटिश काल में निर्मित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक लंबे समय तक देश के प्रशासनिक संचालन के केंद्र रहे। स्वतंत्रता के बाद भी इन्हीं भवनों से शासन व्यवस्था संचालित होती रही और प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से कार्य करता रहा। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों को देखा है। इसकी सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री तक के कदम पड़े हैं। यहां संविधान की भावना और जनता के जनादेश से प्रेरित होकर अनेक बड़े फैसले लिए गए। भारत की सफलताओं का उत्सव भी यहीं मनाया गया और चुनौतियों से निपटने की रणनीतियां भी यहीं बनीं। उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक ने विभाजन की त्रासदी युद्धकालीन परिस्थितियां आपातकाल की चुनौतियां और शांति काल की नीतिगत चर्चाएं देखीं। टाइपराइटर के दौर से डिजिटल गवर्नेंस तक की प्रशासनिक यात्रा का साक्षी यही भवन रहा। अधिकारियों की कई पीढ़ियों ने यहां बैठकर ऐसे निर्णय लिए जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद की अनिश्चितता से देश को स्थिरता और विकास की राह पर अग्रसर किया। बीते एक दशक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह परिसर अनेक ऐतिहासिक फैसलों का केंद्र बना। स्वच्छ भारत अभियान डिजिटल इंडिया और जीएसटी जैसे सुधारों को यहीं से दिशा मिली। अनुच्छेद 370 से जुड़े निर्णय और तीन तलाक के विरुद्ध कानून जैसे कदमों ने सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया। सुरक्षा नीति के संदर्भ में सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे निर्णयों ने वैश्विक मंच पर भारत की दृढ़ता को प्रदर्शित किया। मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक आधुनिक तकनीकी और पर्यावरण अनुकूल कार्यक्षेत्र की आवश्यकता थी। सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन उसी सोच का परिणाम हैं जहां सेवाभाव और उत्पादकता को केंद्र में रखा गया है। उन्होंने बताया कि साउथ ब्लॉक के उद्घाटन के लगभग 95 वर्ष बाद अब सरकार इन भवनों को खाली कर नए परिसरों में स्थानांतरित हो गई है जो गुलामी के अतीत से आत्मविश्वासी भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक है। साथ ही मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय का हिस्सा बनाया जाएगा ताकि देश की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत नई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे। यह कदम प्रशासनिक परिवर्तन के साथ साथ सांस्कृतिक पुनर्स्मरण का भी संदेश देता है।

कुंभ राशि में सूर्य गोचर 2026 से बदलेगा भाग्यचक्र: 15 मार्च तक मेष, मिथुन, सिंह और तुला के लिए करियर, निवेश और रिश्तों में प्रगति के संकेत

नई दिल्ली। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 13 फरवरी 2026 को सूर्य ने कुंभ राशि में प्रवेश किया है और इसका प्रभाव 15 मार्च 2026 तक रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है। द्रिक पंचांग के अनुसार यह परिवर्तन प्रातः लगभग 4 बजकर 14 मिनट पर हुआ। इससे पहले सूर्य मकर राशि में स्थित था। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, प्रतिष्ठा, प्रशासनिक शक्ति और पारिवारिक संतुलन का कारक ग्रह माना जाता है। इसी कारण सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश विशेष महत्व रखता है। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर यह गोचर मेष, मिथुन, सिंह और तुला राशि के जातकों के लिए अनुकूल परिणाम देने वाला माना जा रहा है। मेष राशि के लिए सूर्य का यह परिवर्तन लाभ भाव में सक्रियता ला सकता है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि के संकेत मिल सकते हैं जबकि व्यवसाय से जुड़े जातकों को नए संपर्कों और नेटवर्किंग से आर्थिक अवसर प्राप्त होने की संभावना जताई जा रही है। सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि के संकेत बताए जा रहे हैं। मिथुन राशि के लिए यह अवधि लंबित कार्यों को गति देने वाली मानी जा रही है। पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में सुधार के संकेत हैं। जो योजनाएं लंबे समय से रुकी हुई थीं उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। उच्च शिक्षा या विदेश से जुड़े कार्यों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। सिंह राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर साझेदारी और वैवाहिक जीवन के क्षेत्र में संतुलन ला सकता है। व्यवसायिक सहयोग मजबूत हो सकता है और सामूहिक निर्णयों में स्पष्टता बढ़ने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में नेतृत्व क्षमता उभर सकती है जिससे सम्मान और प्रभाव में वृद्धि हो सकती है। तुला राशि के लिए यह समय निवेश और व्यक्तिगत संतुलन से जुड़ा माना गया है। वित्तीय निर्णय सोच समझकर लेने पर लाभ के संकेत मिल सकते हैं। भावनात्मक मामलों में स्पष्टता आने और संबंधों में सामंजस्य बढ़ने की संभावना है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी यह उपयुक्त समय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रहों का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत कुंडली, दशा और अंतर्दशा पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक या पेशेवर निर्णय से पहले व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श को उपयोगी माना जाता है। सूर्य का यह गोचर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल को जागृत करने वाला समय माना जा रहा है जो प्रयास और संतुलन के साथ बेहतर परिणाम दे सकता है।

महाशिवरात्रि पर बना दुर्लभ संयोग: 15 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग में करें रुद्राभिषेक, पूरी होगी हर मनोकामना!

नई दिल्ली। देवों के देव महादेव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व ‘महाशिवरात्रि’ इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को बेहद खास संयोगों के बीच मनाया जाएगा। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आने वाला यह पर्व इस बार ‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ और ‘श्रवण नक्षत्र’ के दुर्लभ मेल के साथ आ रहा है, जो आध्यात्मिक साधना और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जा रहा है।तिथि और निशीथ काल का महत्वपंचांग गणना के अनुसार, चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 5 मिनट पर होगा और इसका समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 35 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि का व्रत उस दिन किया जाता है जिस दिन रात्रि के ‘निशीथ काल’ (मध्यरात्रि) में चतुर्दशी तिथि व्याप्त हो। इस आधार पर 15 फरवरी को ही मुख्य पर्व और उपवास रखा जाएगा।ज्योतिषीय संयोग: सर्वार्थ सिद्धि और श्रवण नक्षत्रइस वर्ष महाशिवरात्रि पर ज्योतिषीय गणनाएं विशेष फलदायी हैं। 15 फरवरी की रात 7 बजकर 48 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, जिसके उपरांत ‘श्रवण नक्षत्र’ प्रारंभ होगा। श्रवण नक्षत्र को शिव उपासना के लिए शास्त्रों में ‘सिद्ध नक्षत्र’ माना गया है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग का होना इस दिन किए गए दान, तप और अभिषेक के फल को अनंत गुना बढ़ा देता है। पूजन विधि और अभिषेक का विधानधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का उत्सव है। इस दिन श्रद्धालु प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। पूजन की मुख्य विधि में शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक करना अनिवार्य माना गया है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और आक के पुष्प अर्पित किए जाते हैं। विवाहित महिलाएं माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। चार प्रहर की पूजा और रात्रि जागरणमहाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। बहुत से श्रद्धालु रात भर जागकर चार प्रहर की पूजा संपन्न करते हैं। माना जाता है कि इस रात शिव तत्व पृथ्वी के अत्यंत निकट होता है, इसलिए की गई साधना सीधे महादेव तक पहुँचती है। देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए अभी से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि इस विशेष योग के कारण मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक हो सकती है।

फिटनेस प्रमाणन बिना 8 उड़ानें एअर इंडिया पर DGCA की कड़ी कार्रवाई लगभग 1 करोड़ रुपये का जुर्माना

नई दिल्ली। भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई सामने आई है। देश के विमानन नियामक नागर विमानन महानिदेशालय ने एअर इंडिया पर लगभग 1.10 लाख डॉलर यानी करीब एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह दंड उस मामले में लगाया गया है जिसमें एयरलाइन के एक Airbus A320neo विमान को वैध एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट के बिना आठ व्यावसायिक उड़ानों में संचालित किया गया। नियामक ने इसे सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन माना है। प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित विमान का फिटनेस प्रमाणन समाप्त हो चुका था फिर भी उसे 24 और 25 नवंबर 2025 को राजस्व सेवाओं में लगाया गया। उड्डयन नियमों के तहत किसी भी विमान का एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट उसकी तकनीकी स्थिति और सुरक्षित संचालन की अनिवार्य शर्त होता है। प्रमाणन की वैधता समाप्त होने के बावजूद विमान का संचालन नियामकीय प्रक्रियाओं में गंभीर चूक की ओर संकेत करता है। मामले की जानकारी एयरलाइन ने स्वयं नियामक को दी थी जिसके बाद 2 दिसंबर को औपचारिक जांच प्रारंभ की गई। विस्तृत समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि प्रमाणन की अवधि समाप्त होने के बाद भी आवश्यक तकनीकी सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि परिचालन स्तर पर निगरानी और अनुपालन तंत्र में कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। नागर विमानन महानिदेशालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही से यात्री सुरक्षा और नियामकीय विश्वसनीयता दोनों प्रभावित होती हैं। विमानन उद्योग में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है और किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक चूक को हल्के में नहीं लिया जा सकता। नियामक ने कहा कि दंडात्मक कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है। एअर इंडिया ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा है कि घटना की सूचना समय रहते नियामक को दे दी गई थी और आंतरिक समीक्षा के माध्यम से पहचानी गई कमियों को दूर कर दिया गया है। कंपनी के अनुसार परिचालन प्रक्रियाओं की निगरानी को और सुदृढ़ किया गया है तथा अनुपालन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त नियंत्रण उपाय लागू किए गए हैं। इन सुधारात्मक कदमों की विस्तृत रिपोर्ट नियामक को सौंप दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक विमानन उद्योग में एयरवर्थनेस और अनुपालन संबंधी प्रक्रियाएं अत्यंत कठोर होती हैं क्योंकि यात्रियों की सुरक्षा सीधे इन पर निर्भर करती है। ऐसे मामलों में त्वरित रिपोर्टिंग और पारदर्शिता सकारात्मक पहलू माने जाते हैं लेकिन परिचालन चूक पर नियामकीय कार्रवाई अनिवार्य होती है। यह प्रकरण एक बार फिर संकेत देता है कि भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है। भविष्य में एयरलाइनों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि प्रमाणन और तकनीकी अनुमोदन जैसी मूलभूत आवश्यकताओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई महंगी साबित हो सकती है।

वैश्विक ऊर्जा समीकरणों के बीच रिलायंस को वेनेजुएला से प्रत्यक्ष खरीद की अनुमति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती

नई दिल्ली। ऊर्जा आपूर्ति को अधिक संतुलित और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। देश की अग्रणी ऊर्जा कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को वेनेजुएला से सीधे कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिकी लाइसेंस मिलने की जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह अनुमति संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा सीमित शर्तों के तहत दी गई है जिससे कंपनी अब बिचौलियों के बजाय प्रत्यक्ष आयात की प्रक्रिया अपना सकेगी। हालांकि कंपनी की ओर से इस संबंध में औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है परंतु उद्योग जगत में इसे एक रणनीतिक और दूरगामी प्रभाव वाला कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जनवरी के अंतिम सप्ताह में संयुक्त राज्य अमेरिका ने कुछ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को वेनेजुएला से प्रत्यक्ष खरीद की अनुमति प्रदान की। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में आपूर्ति संतुलन मूल्य अस्थिरता और भूराजनीतिक तनावों के चलते कंपनियां अपने स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि लाइसेंस आधारित व्यवस्था के माध्यम से सीमित दायरे में व्यापार को अनुमति देकर अमेरिका ने नियंत्रित ढंग से ऊर्जा प्रवाह को सुगम बनाने का संकेत दिया है। परिचालन दृष्टि से यह अनुमति रिलायंस के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वेनेजुएला का भारी श्रेणी का कच्चा तेल गुजरात के जामनगर स्थित विशाल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के लिए तकनीकी रूप से अनुकूल है। जटिल और उच्च क्षमता वाली रिफाइनिंग इकाइयां भारी और सल्फरयुक्त कच्चे तेल को कुशलतापूर्वक प्रोसेस करने में सक्षम हैं जिससे बेहतर उत्पाद मिश्रण और संभावित रूप से उच्च मार्जिन प्राप्त हो सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रत्यक्ष आयात सुचारु रूप से शुरू होता है तो कंपनी को फीडस्टॉक विविधता के माध्यम से लागत नियंत्रण और परिचालन लचीलापन दोनों में लाभ मिल सकता है। नीतिगत परिप्रेक्ष्य में यह घटनाक्रम भारत की व्यापक ऊर्जा आयात रणनीति के अनुरूप भी देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में भारतीय रिफाइनरियों ने पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता घटाने और नए आपूर्तिकर्ताओं के साथ संतुलित पोर्टफोलियो बनाने पर जोर दिया है। इससे मूल्य जोखिम को कम करने और आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में वैकल्पिक विकल्प सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। बाजार रिपोर्टों के अनुसार विभिन्न रिफाइनरियां वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक और स्पॉट दोनों प्रकार के अनुबंधों की समीक्षा कर रही हैं। ऐतिहासिक संदर्भ में वर्ष 2019 में वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कई देशों और कंपनियों ने वहां से आयात सीमित कर दिया था। वेनेजुएला ओपेक का सदस्य है और विश्व के बड़े तेल भंडारों में उसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी मानी जाती है हालांकि उत्पादन और निर्यात पर प्रतिबंधों का असर रहा है। विशेषज्ञों का आकलन है कि लाइसेंस आधारित सीमित छूट से कुछ कंपनियों को नियंत्रित रूप में व्यापार का अवसर मिलता है बशर्ते सभी नियामकीय शर्तों और अनुपालन मानकों का पालन किया जाए। आगे की स्थिति में वास्तविक आयात मात्रा मूल्य निर्धारण की शर्तें भुगतान तंत्र और अनुबंध संरचना अहम भूमिका निभाएंगे। यह भी देखा जाएगा कि यह व्यवस्था कितनी अवधि तक प्रभावी रहती है और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां किस प्रकार विकसित होती हैं। फिलहाल इसे ऊर्जा आपूर्ति विविधीकरण और रणनीतिक लचीलापन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती दे सकता है।

मुरैना में एमपी ट्रांसको का जीवन रक्षा संकल्प 220 केवी सब स्टेशन पर सीपीआर प्रशिक्षण से सशक्त हुए कर्मचारी

भोपाल /मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा प्रदेश भर में कार्यस्थलों को सुरक्षित और आपात स्थितियों के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में मुरैना स्थित 220 केवी सब स्टेशन पर सीपीआर एवं अन्य जीवन रक्षक तकनीकों पर आधारित एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम रेड क्रॉस सोसायटी तथा शासकीय जिला चिकित्सालय मुरैना के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्युत तंत्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को ऐसी जीवन रक्षक दक्षताओं से लैस करना है जिनसे किसी आकस्मिक परिस्थिति में तुरंत सहायता प्रदान कर किसी की जान बचाई जा सके। कार्यक्रम के संयोजक ग्वालियर के अधीक्षण अभियंता श्री राजीव तोतला तथा कार्यपालन अभियंता श्री सीके जैन ने इस अवसर पर कहा कि प्रशिक्षण का वास्तविक उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं बल्कि मानवीय संवेदनशीलता का विस्तार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रशिक्षित कर्मियों में से कोई एक भी व्यक्ति अपने जीवनकाल में किसी जरूरतमंद की जान बचाने में सफल होता है तो यह प्रशिक्षण पूर्णतः सार्थक सिद्ध होगा। उनके अनुसार तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय तत्परता का समावेश ही संस्था की वास्तविक शक्ति है। कार्यशाला में नियमित एवं आउटसोर्स दोनों प्रकार के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बड़ी संख्या में उपस्थित कर्मियों ने प्रशिक्षण को गंभीरता से ग्रहण किया और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता को समझा। प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सा अधिकारी डॉ अनिल व्यास और उनकी विशेषज्ञ टीम ने प्रतिभागियों को सीपीआर की संपूर्ण प्रक्रिया का चरणबद्ध अभ्यास कराया। मानव पुतलों के माध्यम से हृदय गति रुकने की स्थिति में छाती पर दाब देने की सही तकनीक श्वास प्रदान करने की विधि तथा समय प्रबंधन के महत्व को विस्तार से समझाया गया। डॉ व्यास ने बताया कि दुर्घटना या अचानक हृदयाघात की स्थिति में प्रारंभिक कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि सही तरीके से और सही समय पर सीपीआर दिया जाए तो व्यक्ति के जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक प्रतिभागी को विशेषज्ञों की निगरानी में स्वयं अभ्यास करने का अवसर दिया गया ताकि वे केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहें बल्कि व्यावहारिक दक्षता भी अर्जित करें। कार्यक्रम में सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया। विद्युत उपकेंद्रों और ट्रांसमिशन लाइन में कार्यरत कर्मचारियों को अक्सर जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करना पड़ता है। ऐसे में प्राथमिक उपचार और जीवन रक्षक तकनीकों का ज्ञान उनके लिए अनिवार्य हो जाता है। यह पहल न केवल कर्मचारियों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है बल्कि कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित और उत्तरदायी बनाती है। मुरैना में आयोजित यह प्रशिक्षण शिविर प्रदेश स्तर पर चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसके अंतर्गत सभी जिला मुख्यालयों पर स्थित ट्रांसमिशन इकाइयों में इसी प्रकार की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इस प्रयास से स्पष्ट है कि कंपनी केवल विद्युत आपूर्ति तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है। जीवन की रक्षा से बड़ा कोई कर्तव्य नहीं और इसी भावना के साथ यह अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल से प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की शिष्टाचार भेंट

भोपाल :मंगुभाई पटेल से प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा ने शनिवार को भोपाल स्थित लोकभवन में सौजन्य भेंट की। यह मुलाकात आत्मीय वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें राज्य और केंद्र से जुड़े विभिन्न समसामयिक एवं विकासात्मक विषयों पर सार्थक चर्चा की गई। भेंट के दौरान प्रशासनिक समन्वय, सुशासन और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। राज्यपाल श्री पटेल ने प्रदेश में चल रही प्रमुख योजनाओं, सामाजिक सरोकारों और जनहितकारी पहलों की जानकारी साझा की। वहीं डॉ. मिश्रा ने केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं तथा विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर अपने विचार रखे। मुलाकात के अवसर पर डॉ. मिश्रा ने राज्यपाल श्री पटेल को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। राज्यपाल श्री पटेल ने भी सौहार्दपूर्ण भाव से डॉ. मिश्रा का स्वागत करते हुए उन्हें अंगवस्त्रम् भेंट किया। साथ ही, मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक साँची स्तूप की प्रतिकृति स्मृति-चिह्न के रूप में प्रदान की। यह सौजन्य भेंट राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय तथा विकासात्मक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चर्चा के दौरान प्रशासनिक सहयोग को और सुदृढ़ बनाने तथा प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर संवाद बनाए रखने पर भी सहमति बनी।लोकभवन में आयोजित यह मुलाकात सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई, जिसने राज्य एवं केंद्र के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने का संदेश दिया