लिव-इन रिश्ते में दहेज उत्पीड़न का दावा…SC ने सरकार से मांगी कानूनी स्पष्टता

नई दिल्ली। क्या एक विवाहित व्यक्ति जो अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी अन्य महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में है, उस महिला द्वारा दहेज प्रताड़ना (IPC की धारा 498A) का मामला दर्ज कराया जा सकता है? यह एक ऐसा सवाल है जिस पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने अब गंभीर कानूनी विचार करने का निर्णय लिया है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (अब भारतीय न्याय संहिता) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करती है कि केवल एक पत्नी ही अपने पति या उसके रिश्तेदारों के खिलाफ दहेज या क्रूरता की शिकायत दर्ज करा सकती है। चूंकि हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत कानूनी रूप से एक व्यक्ति एक ही समय में दो महिलाओं का पति नहीं हो सकता है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या लिव-इन पार्टनर को कानूनन पत्नी का दर्जा दिया जा सकता है? सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने एक डॉक्टर लोकेश बी.एच. द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। लोकेश ने फरवरी 2000 में नवीना से शादी की थी। आरोप है कि उन्होंने 2010 में तीर्थ नामक महिला से भी शादी की, जो कानूनी रूप से अवैध है। तीर्थ ने 2016 में लोकेश पर दहेज की मांग को लेकर उसे जलाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। बाद में उसने घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया। लोकेश ने तर्क दिया कि तीर्थ के साथ उनका कोई कानूनी वैवाहिक संबंध नहीं है। उन्होंने इस आशय की घोषणा के लिए बेंगलुरु की एक पारिवारिक अदालत में मुकदमा भी दायर किया है, जो लंबित है। इसके अलावा लोकेश के नियोक्ता ने प्रमाणित किया है कि कथित घटना के दिन लोकेश अस्पताल में ड्यूटी पर थे। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने लोकेश की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को इस मामले में सहयोग करने के लिए कहा है। इसके अलावा, अदालत ने मामले की जटिलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नीना नरिमन को ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालत का मित्र) नियुक्त किया है, जो इस कानूनी मुद्दे पर निष्पक्ष राय प्रदान करेंगी। याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील संजय नुली ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने धारा 498A की व्याख्या करने में गलती की है। उनका तर्क है कि कानून की शब्दावली स्पष्ट रूप से पति और पत्नी का उल्लेख करती है। इसे एक लिव-इन रिलेशनशिप पर लागू नहीं किया जा सकता है। विशेषकर तब जब पुरुष पहले से ही विवाहित हो। यदि सुप्रीम कोर्ट लिव-इन पार्टनर को इस धारा के तहत पत्नी मानता है, तो यह वैवाहिक कानूनों की पारंपरिक व्याख्या में एक बड़ा बदलाव होगा।
प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक रामानंद सागर के बेटे आनंद चोपड़ा का 84 वर्ष की उम्र में निधन

मुम्बई। मशहूर फिल्ममेकर रामानंद सागर (Filmmaker Ramanand Sagar) के बेटे सागर चोपड़ा (Sagar Chopra) का 13 फरवरी को 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। शुक्रवार को ही उनका मुंबई के हिंदू श्मशान भूमि, पवन हंस में अंतिम संस्कार किया गया। सागर परिवार के वरिष्ठ सदस्य आनंद रामानंद सागर चोपड़ा पिछले 10-12 वर्षों से पार्किंसंस बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन से फिल्म और टेलीविजन जगत में शोक की लहर है। परिवार ने इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के जरिए इस दुखद जानकारी को सबके साथ शेयर किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘बहुत ही दुख के साथ कहा जा रहा है कि हमारे पिता श्री आनंद रामानंद सागर चोपड़ा का निधन हो गया है।’ पिता के साथ किया कामआनंद के बारे में बता दें कि वह लीजेंड सागर परिवार से थे जिन्होंने साल 2008 में शो रोमायण में अपना कॉन्ट्रीब्यूशन दिया है अपने पिता रामानंद सागर के साथ। यह शो सुपरहिट थी यह तो सब जानते ही हैं। इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मों को भी प्रोड्यूस किया है जिसमें आंखें, अरमान और अलिफ लैला शामिल है। रामानंद सागर का परिवाररामानंद सागर की बात करें तो उन्होंने लीलावती सागर से शादी की थी और दोनों के 5 बच्चे थे, 4 बेटे सुभाश, सागर, मोती सागर, प्रेम सागर, आनंद सागर और एक बेटी सरिता सागर। रामानंद का करियररामानंद ने फिल्मों में बतौर राइटर काम की शुरुआत की साल 1940 में और हरसात फिल्म में काम किया। इसके बाद उन्हें चरस, प्रेम बंधन फिल्मों से सक्सेस मिली। 1980 में फिर उन्होंने टीवी में काम करना शुरू किया और माइथोलॉजिकल शोज जैसे लव कुश, श्री कृष्णा, विक्रम और बेताल बनाए। रामानंद को साल 2000 में पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया था।
Bangladesh में हिंदुओं की आबादी 8% … मगर चुनाव में 300 सीटों में से मात्र 3 हिंदू चुने गए सांसद

ढाका। बांग्लादेश चुनाव (Bangladesh Election) पूरा हो गया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Bangladesh Nationalist Party) को 209 सीटों पर जीत हासिल हुई है. तारिक रहमान (Tariq Rahman) पीएम बन सकते हैं. जमात-ए-इस्लामी (Jamaat-e-Islami) को 68 और छात्रों वाली पार्टी NCP को सिर्फ 6 सीटों पर वोट मिला. चुनाव के बाद अब जो आंकड़े आए हैं, वह हैरान करने वाले हैं. खासकर हिंदुओं की जीत को लेकर. दरअसल बांग्लादेश की कुल आबादी करीब 16.5 करोड़ है. 2022 की जनगणना के मुताबिक इनमें 1 करोड़ 31 लाख से ज्यादा हिंदू हैं. यानी देश की करीब 8 प्रतिशत आबादी हिंदू समुदाय से आती है. यह कोई छोटी संख्या नहीं है. लेकिन 2026 के ताजा संसदीय चुनाव में हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहद कम रह गया है. 300 सीटों वाली संसद में इस बार सिर्फ 3 हिंदू सांसद चुने गए हैं. यह आंकड़ा तब आया है जब हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा देखी गई है। बांग्लादेश चुनाव में कितने हिंदू जीते?पहले हिंदुओं की बड़ी संख्या अवामी लीग (AL) से होती थी. AL क्योंकि बैन है, इसलिए तीनों हिंदू उम्मीदवार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से जीते हैं.गायेश्वर चंद्र रॉय- ढाका-3 सीट सेनिताई रॉय चौधरी – मगरी-2 सीट सेएडवोकेट दिपेन देवान – रंगामाटी सीट सेइसके अलावा साचिंग प्रू नाम के एक और अल्पसंख्यक उम्मीदवार ने बंदरबन से जीत दर्ज की, लेकिन कुल संख्या फिर भी बहुत कम है. जमात का हिंदू कैंडिडेट हाराध्यान देने वाली बात यह है कि जमात-ए-इस्लामी ने इस बार एक हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को खुलना-1 सीट से मैदान में उतारा था. लेकिन वे चुनाव हार गए. इसका मतलब यह हुआ कि जमात के टिकट पर कोई भी अल्पसंख्यक उम्मीदवार जीत नहीं पाया. पहले क्या स्थिति थी?रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना के लंबे कार्यकाल के दौरान संसद में हिंदू सांसदों की संख्या इससे कहीं ज्यादा रही थी.2009-2014 की संसद में 16 हिंदू सांसद थे2014-2019 में यह संख्या बढ़कर 17 (और आरक्षित सीटों के साथ 20 तक) पहुंची2019-2024 में करीब 14 अल्पसंख्यक सांसद थेयानी पहले जहां 14 से 20 के बीच हिंदू सांसद होते थे, अब संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है. 2006-09 तक बांग्लादेश में केयरटेकर सरकार रही. ऐसे में हम कह सकते हैं कि यह 20 साल में सबसे कम संख्या है. यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है। कितने हिंदू उम्मीदवार मैदान में थे?इस चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे. इनमें 10 महिलाएं भी शामिल थीं. 60 में से 22 राजनीतिक दलों ने अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे थे. BNP ने 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 4 जीत पाए. लेकिन कुल संख्या फिर भी बहुत कम रही. सवाल क्यों उठ रहे हैं?देश की लगभग 8 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद संसद में 1 प्रतिशत से भी कम प्रतिनिधित्व होना चिंता का विषय माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय कई इलाकों में निर्णायक भूमिका निभाता है, लेकिन टिकट वितरण और चुनावी गणित में उनकी हिस्सेदारी सीमित रह जाती है. इसके अलावा चुनाव के दौरान सांप्रदायिक तनाव और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में रहा। बांग्लादेश चुनाव में कितनी महिलाएं जीतीं?इस बार चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या भी बहुत कम रही. हालांकि 7 महिलाओं ने जीत दर्ज की, जिनमें ज्यादातर बीएनपी से थीं. जमात-ए-इस्लामी के कुछ बयानों ने महिलाओं की भागीदारी पर भी विवाद खड़ा किया था।
निवेशकों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में सरकार … पेंशन के साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी…डबल बेनेफिट

नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Government) अब निवेशकों (Investors) को पेंशन के साथ-साथ हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) कवर भी देने की तैयारी में है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के चेयरमैन एस. रमन ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन प्रमुख पेंशन फंड इस समय हेल्थ इंश्योरेंस कवर देने वाली पेंशन योजनाओं पर काम कर रहे हैं। यह नई पेंशन योजना या तो हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के साथ साझेदारी में, या फिर सीधे हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स के सहयोग से पेश की जा सकती है। रमन ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ‘स्वास्थ्य पेंशन योजना’ के तहत लोगों को चिकित्सा खर्चों के लिए अलग से बचत करने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वे भविष्य में किसी भी आकस्मिक स्वास्थ्य स्थिति का सामना बेहतर तरीके से कर सकें। यह पहल निवेशकों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित हो सकती है, जो अब अपनी पेंशन के साथ-साथ अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सकेंगे। पीएफआरडीए के चेयरमैन ने कहा- हम चाहते हैं कि लोग खुद को सुरक्षित रखने की अहमियत को समझें। हम चाहते हैं कि लोग मेडिकल पेंशन योजना में पैसा बचत करें। यह राशि केवल चिकित्सा उद्देश्यों के भुगतान के लिए समर्पित होगी। बता दें कि PFRDA ने इस साल जनवरी में ‘स्वास्थ्य’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत निवेशक की पेंशन राशि का अधिकतम 30 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा खर्चों के लिए अलग रखा जा सकता है। स्वास्थ्य बीमा कंपनियों से सस्ते टॉप-अप कवरपेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत बड़ी संख्या में निवेशकों का एकसाथ आना पेंशन फंड को बेहतर सौदे तय करने में मदद करता है। इससे हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों से सस्ते टॉप-अप कवर और अस्पतालों से उपचार पर रियायतें मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना में अस्पतालों को मरीज के इलाज के तुरंत बाद ही भुगतान मिल सकेगा जबकि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना के तहत भुगतान में कई महीने लग जाते हैं। रमन ने बताया कि आईसीआईसीआई, एक्सिस और टाटा की तरफ से प्रायोजित पेंशन फंड इस तरह की हेल्थ कवरेज योजनाएं पेश करने को लेकर प्रयोग कर रहे हैं और आईसीआईसीआई जल्द ही अपना उत्पाद पेश कर देगा। सोना-चांदी ईटीएफ में निवेश की योजनाउन्होंने कहा कि रिटर्न को लंबे समय तक दहाई अंकों में बनाए रखने के उपायों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए परियोजना वित्त, रियल एस्टेट, वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) के साथ सोना और चांदी ईटीएफ में सीमित निवेश की भी योजना है। उन्होंने एनपीएस के कम कवरेज (करीब एक करोड़ रुपये) को स्वीकार करते हुए कहा कि निवेशक आधार बढ़ाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से बातचीत जारी है ताकि डिजिटल माध्यम से लोगों को जोड़ने में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही रमन ने कहा कि कम-से-कम चार बैंकों या बैंकों के समूह ने पेंशन कोष कारोबार में उतरने की इच्छा जताई है। इनमें एक्सिस बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक एवं स्टार डायची का समूह शामिल हैं।
PM मोदी ने बताया – प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम 'सेवा तीर्थ क्यों रखा…. क्या है इसके पीछे का गहरा संदेश?

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार को नए ऑफिस का उद्धाटन किया। इसके बाद उन्होंने संबोधन भी दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime Minister Office) का नाम सेवा तीर्थ (Seva Teerth) क्यों रखा गया। इसके साथ ही उन्होंने इसके पीछे के दर्शन और संकल्प के बारे में भी बताया। पीएम मोदी ने कहाकि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है। नाम बदलने के पीछे स्वतंत्र भारत की पहचान है। उन्होंने आगे कहाकि सेवा की भावना ही भारत की पहचान है। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक निर्णय, नीतियां बनी लेकिन यह भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थी। इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था। मिलेगा नया आत्मविश्वासप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आज जब भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, आज जब भारत अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की नई गाथा लिख रहा है, आज जब भारत नए-नए ट्रेड समझौते कर संभावनाओं के नए दरवाजे खुल रहे हैं। जब देश संतृप्ति के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है तो सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों में आप सबके काम की नई गति और आपका नया आत्मविश्वास देश के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा। पुरानी इमारतों पर क्या बोलेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें जहां ब्रिटिश हुकूमत की सोच को लागू करने के लिए बनी थीं। वहीं, आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे वह किसी महाराजा की सोच को नहीं 140 करोड़ देशवासियों की सोच को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। प्रधानमंत्री ने आगे कहाकि इस बदलाव के बीच निश्चित तौर पर पुराने भवन में बिताए गए वर्षों की स्मृतियां हमारे साथ रहेंगी। अलग-अलग समय पर वहां से कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए, वहां से देश को नई दिशा मिली है। वह परिसर, वह इमारत भारत के इतिहास का अमर हिस्सा है इसलिए हमने उस भवन को देश के लिए समर्पित म्यूजियम बनाने का फैसला किया है। हमने तय किया कि…प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि 2014 में देश ने तय किया कि गुलामी की मानसिकता अब और नहीं चलेगी। हमने गुलामी की इस मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया, हमने वीरों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया। हमने पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया। रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था, यह सत्ता के मिजाज़ को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था।
एयर इंडिया की एयरबस ने बिना अनुमति भरी उड़ान, DGCA ने ठोका एक करोड़ का जुर्माना

नई दिल्ली। एयर इंडिया (Air India) पर डीजीसीए (DGCA) ने एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया (Air India) की एयरबस (Airbus) ने बिना जरूरी परमिशन के उड़ान भरी। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि आठ बार हुआ। डीजीसीए ने इसको बहुत गंभीर किस्म का उल्लंघन माना है। साथ ही लापरवाही के लिए टॉप लेवल मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया है। डीजीसीए ने जुर्माना लगाते हुए अपने आदेश में लिखा है कि एयरबस ए320 विमान ने कई सेक्टर्स में उड़ान भरी। इसमें नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी शामिल हैं। ऐसा पिछले साल 24 से 25 नवंबर के बीच हुआ। इन उड़ानों के लिए एयर इंडिया ने अनिवार्य एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) नहीं लिया था। एआरसी एक बेहद अहम सर्टिफिकेट है जो सालाना तौर पर डीजीसीए द्वारा जारी किया जाता है। इसके लिए विमान को सभी जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। बिना एआरसी के उड़ान भरना उड़ान के सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। डीजीसीए ने माना बेहद गंभीरडीजीसीए ने एयर इंडिया के इस उल्लंघन को बेहद गंभीर माना है। एक खबर के मुताबिक इसे एयरलाइन की कैजुअल अप्रोच बताया गया है। जानकारी के मुताबिक डीजीसीए ने कहाकि इस तरह के उल्लंघन को लेकर हम बहुत कड़ी कार्रवाई करते हैं। इसलिए जितनी ज्यादा संभव हो सकती थी, उतनी पेनाल्टी लगाई गई है। जब किसी संस्था पर जुर्माना लगाया जाता है तो जिम्मेदार मैनेजर को नोटिस दी जाती है। डीजीसीए ने शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय की है, और एयर इंडिया के सीईओ कैम्पबेल विल्सन को इस चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया है। एयर इंडिया ने क्या कहाडीजीसीए के आदेश का जवाब देते हुए, एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहाकि एयर इंडिया ने 2025 में स्वेच्छा से रिपोर्ट किए गए एक घटना से संबंधित डीजीसीए आदेश की प्राप्ति को स्वीकार किया है। सभी पहचाने गए गैप्स को तब से संतोषजनक रूप से संबोधित किया गया है, साथ ही प्राधिकरण के साथ साझा किया गया है। एयर इंडिया अपने संचालन की निष्पक्षता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता में अडिग है।
पीयूष गोयल बोले… US डील किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित… राहुल गांधी ने झूठी कहानी गढ़ी

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के आरोपों को पूरी तरह झूठी कहानी करार देते हुए पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने एक बार फिर सुनियोजित तरीके से पूरी तरह बनावटी और झूठी कहानी गढ़ी है। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के इशारों पर किसानों को गुमराह कर रहे हैं और उनका दावा बेबुनियाद है। गोयल ने कहा कि राहुल गांधी कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं के इशारों पर चल रहे हैं, जो किसान नेता होने का ढोंग कर रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह से बनावटी और बेबुनियादी बातचीत है। अब मैं राहुल गांधी के झूठे दावों की सच्चाई सामने लाता हूं और उन्हें और उनके मित्रों को बेनकाब करता हूं, जो हमारे भोले-भाले, मेहनती अन्नदाताओं को गुमराह कर रहे हैं। मंत्री ने आगे कहा, मोदी सरकार ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Agreement) में किसानों की हितों की पूरी तरह सुरक्षा की है। जब मैं कहता हूं कि पूरी सुरक्षा की गई है, तो मैं इसे रिकॉर्ड पर और पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं। उन्होंने कहा, हमने सभी किसानों के हितों की रक्षा की है और यह एक ऐसा समझौता है जो हमारे किसानों, मछुआरों, मेहनती युवाओं, एमएसएमई, स्टार्टअप्स को लाभ पहुंचाएगा। राहुल गांधी, आज आप एक नाटकबाज और झूठे, बेबुनियाद आरोपों और मनगढ़ंत कहानियों को लगातार फैलाने वाले के रूप में पूरी तरह बेनकाब हुए हैं। राहुल गांधी ने क्या कहा था?कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत के किसानों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता किसानों की आजीविका के लिए सीधा खतरा है। रायबरेली सांसद ने पर लिखा, नरेंद्र सरेंडर मोदी ने भारत के किसानों को धोखा दिया है और किसानों ने इसे समझ लिया है। यह केवल एक व्यापार समझौता नहीं है। यह हमारे अन्नदाताओं की आजीविका पर सीधा हमला है। कांग्रेस नेता ने कहा कि संसद में किसानों के संगठनों के प्रतिनिधियों से हुई बैठक में यह चिंता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। उन्होंने लिखा, आज संसद में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में उनकी चिंताएं स्पष्ट रूप से सामने आईं। महंगाई, बढ़ती लागत और एमएसपी की अनिश्चितता से जूझ रहे किसान अब विदेशी फसलों का सामना करने के लिए तैयार नहीं हैं, जो बड़ी सब्सिडी और यांत्रिक ताकत के साथ आती हैं।
नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर से हट सकती है 100 साल पुरानी कदीमी मस्जिद, वक्फ बोर्ड में चिंता की लहर

नई दिल्ली। केंद्रीय सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में मौजूद 100 साल पुरानी ‘कदीमी मस्जिद’ के भविष्य को लेकर संशय बढ़ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज किए जाने और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा हाल ही में जारी टेंडर के बाद मस्जिद को हटाए जाने की आशंका उठ रही है। इससे पहले केंद्र सरकार ने मस्जिद की सुरक्षा का भरोसा दिया था। अदालत में पिछली स्थिति2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि बोर्ड पुनः तब कोर्ट आ सकता है जब उसे सेंट्रल विस्टा परियोजना में अपनी संपत्ति पर खतरा महसूस हो। याचिका में कृषि भवन परिसर की मस्जिद सहित छह धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की मांग की गई थी। 1 दिसंबर 2021 की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि सरकार इन स्थलों के साथ कोई बदलाव नहीं कर रही है। टेंडर ने बढ़ाई अनिश्चितताइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, CPWD ने 19 जनवरी 2026 को कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्विकास के लिए नया टेंडर जारी किया। हालांकि मस्जिद का नाम हटाने वाली सूची में नहीं है, लेकिन टेंडर के ड्रॉइंग्स में मस्जिद को नए प्रस्तावित भवन में उसके मौजूदा स्थान पर नहीं दिखाया गया है। वक्फ बोर्ड और इमाम की प्रतिक्रियाकदीमी मस्जिद कृषि भवन के खुले प्रांगण में स्थित है और मुख्य रूप से केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा नमाज अदा करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षित स्मारक नहीं है, लेकिन 1970 के दिल्ली प्रशासन के राजपत्र में वक्फ संपत्तियों की सूची में दर्ज है। वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अमानतुल्ला खान ने कहा, “सरकार ने अदालत में स्पष्ट कहा था कि मस्जिदों को कोई नुकसान नहीं होगा। अगर इसे हटाने का प्रयास किया गया, तो यह उचित नहीं होगा।” परियोजना और लागतCPWD ने कृषि भवन और शास्त्री भवन के स्थान पर ‘कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट’ (CCS) की इमारतों 4 और 5 के निर्माण के लिए 19 जनवरी को टेंडर जारी किया। बोली लगाने की अंतिम तिथि 13 फरवरी है। CCS 4 और 5 परियोजनाओं की अनुमानित लागत 3,006.07 करोड़ रुपये है और इसे 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत पहले उपराष्ट्रपति के पूर्व आधिकारिक निवास परिसर में स्थित एक मस्जिद और एक मंदिर को हटाया जा चुका है, जिससे कदीमी मस्जिद के भविष्य को लेकर वक्फ बोर्ड की चिंता और बढ़ गई है।
ईरान पर दबाव बढ़ाने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भेजा सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर

नई दिल्ली। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया कि वह अपने सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड को पूरी टीम के साथ मध्य एशिया की ओर भेज रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद अभी भी कायम हैं। यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड की तैनातीट्रंप ने कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर को जल्द ही रवाना किया जाएगा और यदि ईरान के साथ समझौता नहीं होता है तो इसकी आवश्यकता पड़ेगी। इसके साथ ही यूएसएस अब्राहम लिंकन को भी भेजा गया है, जो पहले से अरब सागर में गाइडेड मिसाइलों के साथ तैनात है। पिछले सप्ताह इसी युद्धपोत ने ईरानी ड्रोन को निशाना बनाकर मार गिराया था। ईरान में विरोध और बढ़ता तनावईरान में हाल के विरोध प्रदर्शनों और उन्हें दबाने के लिए आयातुल्ला खामेनेई के कदमों के बाद अमेरिका-ईरान संबंध और तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी शर्तों का पालन नहीं करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। दबाव बढ़ाने की रणनीतियूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड, जो पहले वेनेजुएला अभियान पर था, अब सीधे मध्य एशिया की ओर भेजा गया है। दोनों देशों के बीच ओमान में हुई बातचीत के बावजूद कोई ठोस समझौता नहीं हुआ। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच वाशिंगटन की सैन्य क्षमता दिखाने के उद्देश्य से उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दो विमानवाहक पोतों की एक साथ मौजूदगी अमेरिका की नौसैनिक ताकत को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाएगी और ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव मजबूत करेगी। इस तैनाती में गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक और निगरानी विमान भी शामिल हैं।
भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर बारिश का साया, कोलंबो से आया मौसम का पूर्वानुमान

नई दिल्ली। 15 फरवरी को होने वाले आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 के भारत-भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर बारिश का साया, कोलंबो से आया मौसम का पूर्वानुमानपाकिस्तान मुकाबले से पहले मौसम ने क्रिकेट फैन्स और टीमों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में इस हाई-वोल्टेज मैच पर बारिश का साया दिख रहा है। ताजा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार खराब मौसम मैच के रोमांच को प्रभावित कर सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 15 फरवरी के आसपास दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र (लो-प्रेशर सिस्टम) विकसित हो सकता है। इसका असर सीधे कोलंबो के मौसम पर पड़ने की संभावना है। अनुमान है कि मुकाबले वाले दिन लगभग 93 प्रतिशत बारिश की संभावना है। मैच के दौरान टॉस में देरी, ओवरों की कटौती, खेल का रुक-रुक कर चलना, ऐसे हालात बन सकते हैं। हालांकि बीच-बीच में मौसम साफ होने और धूप निकलने की उम्मीद भी है, लेकिन लगातार बदलता मौसम दोनों टीमों की रणनीति पर असर डाल सकता है। ग्रुप-ए की नंबर-1 कुर्सी पर दांवइस मुकाबले में केवल जीत ही नहीं, बल्कि ग्रुप-ए में शीर्ष स्थान भी दांव पर है। टीम इंडिया ने पिछले मैच में नामीबिया को 93 रनों से हराया था। उस मैच में ईशान किशन ने पावरप्ले में 61 रनों की तूफानी पारी खेलकर टीम को 86 रन का अब तक का सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर दिलाया। पाकिस्तान भी शानदार फॉर्म में है, लेकिन नेट रन रेट के मामले में भारत से थोड़ी पीछे है। इस मुकाबले के नतीजे से ग्रुप-ए में नंबर-1 टीम तय होगी। गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता पिछले कुछ वर्षों में आईसीसी और एसीसी टूर्नामेंट्स तक सीमित रही है। दोनों टीमें आखिरी बार एशिया कप 2025 के फाइनल में आमने-सामने आई थीं। उस रोमांचक मुकाबले में भारत ने पांच विकेट से जीत हासिल कर खिताब अपने नाम किया था। अभिषेक शर्मा की फिटनेस में सुधारयुवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा हाल ही में पेट की परेशानी के कारण अभ्यास नहीं कर पा रहे थे, लेकिन उनकी फिटनेस में सुधार के संकेत मिले हैं। टीम प्रबंधन को भरोसा है कि वह पाकिस्तान के खिलाफ अहम मुकाबले के लिए उपलब्ध रहेंगे। फैंस की उत्सुकता इस समय दोहरी है – एक ओर अभिषेक की वापसी को लेकर उम्मीदें और दूसरी ओर आसमान पर निगाहें। अब देखना दिलचस्प होगा कि मौसम इस बड़े मुकाबले में बाधा बनेगा या दर्शकों को भारत-पाकिस्तान की जोरदार भिड़ंत देखने को मिलेगी।