कब्ज और अपच से राहत दिलाए खीरे का यह नुस्खा, चेहरे को भी दे प्राकृतिक चमक

नई दिल्ली में आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में अक्सर लोगों को समय पर और व्यवस्थित भोजन करने का अवसर नहीं मिल पाता। कई बार व्यक्ति संतुलित आहार तो लेता है, लेकिन इसके बावजूद शरीर में कमजोरी, सुस्ती और भारीपन की शिकायत बनी रहती है। इसका प्रमुख कारण खराब पाचन तंत्र हो सकता है। यदि भोजन ठीक से नहीं पचता, तो उसके पोषक तत्व शरीर को पूरी तरह नहीं मिल पाते। ऐसे में भोजन पेट में रुककर सड़ने लगता है और शरीर को अपेक्षित ऊर्जा और पोषण नहीं मिलता। इसलिए केवल संतुलित आहार लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से पचना भी उतना ही जरूरी है। जब पाचन प्रक्रिया कमजोर हो जाती है, तो पेट से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगती हैं। गैस, अपच और कब्ज जैसी परेशानियां न केवल शारीरिक असहजता पैदा करती हैं, बल्कि मानसिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर डालती हैं। आयुर्वेद में पेट से जुड़े रोगों के लिए कई रामबाण उपाय बताए गए हैं, लेकिन आयुर्वेद का मानना है कि बिना दवा के भी पेट की पाचन अग्नि को सुधारा जा सकता है। इसके लिए एक सरल और असरदार उपाय है खीरे की सलाद। अधिकांश लोग खीरे की सलाद खाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका नियमित सेवन पेट की कई समस्याओं से राहत दिला सकता है। रोज़ एक कटोरी ताजा खीरे की सलाद खाना पाचन सुधारने में बेहद सहायक माना जाता है। खीरे में भरपूर पानी, फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। ये पेट को साफ करने, कब्ज को तोड़ने और आंतों को लुब्रिकेट करने में मदद करते हैं। खीरे का पानी शरीर की शुष्कता कम करता है और मल त्यागने में आसानी होती है। खीरे की सलाद का सेवन करने का सबसे अच्छा समय दोपहर के भोजन के साथ माना जाता है। आप चाहें तो इसमें थोड़ा नींबू और काला नमक मिला सकते हैं। इसे हफ्ते में चार दिन आहार में शामिल करना फायदेमंद रहेगा। ध्यान रखें कि ज्यादा नमक न डालें और यदि खीरा फ्रिज में रखा था तो सामान्य तापमान पर आने के बाद ही इसका सेवन करें। खीरे का लाभ केवल पाचन तक ही सीमित नहीं है। यह त्वचा और बालों को भी स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करता है। गर्मियों के मौसम में त्वचा की ड्राईनेस कम करने के लिए खीरे का सेवन और लेपन भी फायदेमंद है। खीरे का नियमित सेवन चेहरे को प्राकृतिक ग्लो देता है और थकान भी कम करता है। इस प्रकार रोज़ाना खीरे की सलाद न केवल पेट और पाचन से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकती है, बल्कि त्वचा और बालों की सुंदरता में भी सुधार लाती है। यह एक सरल, प्राकृतिक और असरदार नुस्खा है, जिसे आप अपने दैनिक आहार में आसानी से शामिल कर सकते हैं।
महाशिवरात्रि से पहले खजुराहो में वन विभाग ने संभाली सुरक्षा, मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर किया स्थानांतरित

खजुराहो में शिवसागर तालाब पिछले कुछ समय से मगरमच्छ के लगातार दिखाई देने से चर्चा में था। यह तालाब भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन आता है और शहर के पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मगरमच्छ की उपस्थिति ने स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले पर्यटकों के बीच भय पैदा कर दिया था। खासकर विदेशी पर्यटक इस दृश्य से डरे हुए थे और पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना थी। स्थानीय लोगों की शिकायत और सुरक्षा की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने 3 फरवरी को आयोजित मेला महाशिवरात्रि की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शिवरात्रि से पहले तालाब से मगरमच्छ को निकालकर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए। इस आदेश के बाद वन मंडल अधिकारी ऋषि मिश्रा के नेतृत्व में वन विभाग और जिला आपदा प्रबंधन अमला, जिला छतरपुर ने संयुक्त रूप से कार्य शुरू किया। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तालाब का निरीक्षण किया और मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से पकड़ने की योजना बनाई। वन विभाग की टीम ने सावधानी और कुशलता के साथ मगरमच्छ को पकड़कर उसके जीवन और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा का ध्यान रखा। तालाब से मगरमच्छ को हटाकर अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। इस कार्य के पूरा होने के बाद पर्यटकों और स्थानीय लोगों में राहत की लहर दौड़ गई। अब शिवसागर तालाब के आसपास के क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बिना किसी डर के हो सकेंगी। वन विभाग ने कहा कि यह कार्य पर्यावरण और पर्यटन दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण था। मगरमच्छ को केवल खतरनाक माना जाता है, लेकिन उसका जीवन भी संरक्षण योग्य है। इस कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया कि पर्यटक सुरक्षित रहें और तालाब का पारिस्थितिकी संतुलित रहे। स्थानीय व्यापारियों और होटल संचालकों ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि मगरमच्छ की वजह से पिछले दिनों पर्यटक डर कर दौरे कम कर रहे थे, लेकिन अब सुरक्षा सुनिश्चित होने से पर्यटन में वृद्धि होगी। वन विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को यह भी चेतावनी दी कि तालाब के पास जाते समय सतर्क रहें और वन्यजीवों को परेशान न करें। इस तरह, महाशिवरात्रि 2026 से पहले खजुराहो में वन विभाग ने कुशलता से मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करके न केवल पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की बल्कि पर्यटन नगरी की प्रतिष्ठा और स्थानीय विश्वास भी बनाए रखा।
भोपाल में महाशिवरात्रि पर हुई पहली किन्नर शंकराचार्य की नियुक्ति, धर्मांतरित किन्नरों की घर वापसी

भोपाल में महाशिवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर एक अनूठा और विवादित धार्मिक आयोजन हुआ। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में देश की पहली किन्नर शंकराचार्य का पट्टाभिषेक संपन्न हुआ, जिसमें हिमांगी सखी को नियुक्त किया गया। इस अवसर पर जगद्गुरु और महामंडलेश्वरों की घोषणा भी की गई। कार्यक्रम का आयोजन उस समय सुर्खियों में आया, जब धर्मांतरित किन्नरों की घर वापसी का भी आयोजन किया गया। इस दौरान कुछ मुस्लिम किन्नर वापस हिंदू धर्म में लौटे और शुद्धिकरण के rites संपन्न हुए। इस आयोजन के लिए राजस्थान के पुष्कर पीठ को देश की पहली विवादित किन्नर शंकराचार्य के लिए चुना गया। कार्यक्रम में किन्नर अखाड़ा के संस्थापक ऋषि अजय दास भी मौजूद रहे और उन्होंने इस आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिमांगी सखी के शंकराचार्य बनने के बाद भव्य पट्टाभिषेक संपन्न हुआ और मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान और मंत्रोच्चारण का माहौल देखने को मिला। हालांकि इस नियुक्ति को लेकर धार्मिक समुदाय में विवाद और आलोचना भी सामने आई। साधु संत सन्यासी समिति के कार्यकारी अध्यक्ष स्वामी अनिलानंद ने कहा कि किन्नरों की सनातन धर्म में वापसी को कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अलग से किन्नर शंकराचार्य बनाना अत्यधिक आपत्तिजनक है। उनके अनुसार, धर्मशास्त्र में केवल चार शंकराचार्य ही मान्य हैं। स्वामी अनिलानंद ने आगे कहा कि ऋषि अजय दास इस मामले में पाखंड कर रहे हैं और धर्म का मजाक बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि किन्नरों और उनके नाम पर आर्थिक लाभ लेने का प्रयास किया गया है। इस पर शिकायत दर्ज कराई गई है और धर्म विरोधी कृत्यों और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामलों में वैधानिक कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की गई है। इस आयोजन को लेकर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोग इसे समावेशी धार्मिक पहल मान रहे हैं, जबकि कई धार्मिक विद्वान और समाजिक संगठन इसे धार्मिक परंपरा का उल्लंघन मान रहे हैं। भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक दृष्टि से चर्चाओं को जन्म दिया, बल्कि किन्नर समुदाय की धार्मिक पहचान और अधिकारों पर भी ध्यान आकर्षित किया। हिमांगी सखी के शंकराचार्य बनने की प्रक्रिया और धर्मांतरित किन्नरों की वापसी ने समाज में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बहस को एक नई दिशा दी है। साथ ही, यह मामला यह सवाल उठाता है कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए और धर्म के अधिकार और मर्यादा के बीच किस तरह की संवेदनशीलता बरती जाए।
SIP शुरू करने से पहले समझ लें ये सच्चाई, वरना उम्मीदें बन सकती हैं बोझ

नई दिल्ली। भारतीय निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड का सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) तेजी से लोकप्रिय हुआ है। हर महीने छोटी रकम लगाकर बड़ा फंड बनाने का सपना अब मध्यम वर्ग की वित्तीय रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। आसान प्रक्रिया और ऑटोमैटिक निवेश की सुविधा ने इसे आकर्षक बनाया है, लेकिन इसके साथ कई गलतफहमियां भी जुड़ी हैं। सोशल मीडिया और अधूरी जानकारी के कारण कई निवेशक SIP को “गारंटीड मुनाफे” का जरिया मान बैठते हैं। हकीकत यह है कि SIP बाजार से जुड़ा निवेश है और इसमें जोखिम भी शामिल रहता है। सही जानकारी और संतुलित उम्मीदें ही लंबी अवधि में बेहतर परिणाम दे सकती हैं। तुरंत मोटा रिटर्न नहीं, समय ही असली ताकतकई नए निवेशक यह मान लेते हैं कि SIP शुरू करते ही उन्हें हर साल ऊंचा और स्थिर रिटर्न मिलेगा। कुछ लोग तो इसे जल्दी अमीर बनने का फॉर्मूला समझ लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि SIP कोई जादुई योजना नहीं, बल्कि अनुशासित निवेश की प्रक्रिया है। बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, जिसका असर फंड के प्रदर्शन पर पड़ता है। अगर चुना गया फंड कमजोर है तो नियमित निवेश भी अपेक्षित परिणाम नहीं देगा। आमतौर पर 7 से 15 साल की अवधि में कंपाउंडिंग का असर दिखता है और तब जाकर ठोस ग्रोथ नजर आती है। इसलिए धैर्य और लंबी अवधि की सोच जरूरी है। ज्यादा फंड मतलब ज्यादा फायदा? जरूरी नहींअक्सर निवेशक यह सोचकर कई अलग-अलग म्यूचुअल फंड में SIP शुरू कर देते हैं कि ज्यादा फंड रखने से जोखिम कम होगा और रिटर्न बढ़ेगा। इसी भ्रम में कुछ लोग 8–10 फंड तक जोड़ लेते हैं। लेकिन बहुत अधिक फंड रखने से पोर्टफोलियो जटिल हो जाता है और कई बार एक जैसे सेक्टर या स्टॉक में दोहराव भी हो जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 3 से 5 मजबूत और अलग रणनीति वाले फंड पर्याप्त होते हैं। निवेश लक्ष्य, जोखिम क्षमता और अवधि को ध्यान में रखकर संतुलित पोर्टफोलियो बनाना ज्यादा समझदारी भरा कदम है। जरूरत पड़े तो SIP रोकना भी समझदारीएक और आम मिथक यह है कि SIP को कभी बंद नहीं करना चाहिए। जबकि वास्तविकता यह है कि वित्तीय परिस्थितियां बदल सकती हैं। आय में कमी, आपात स्थिति या लक्ष्य में बदलाव आने पर SIP को रोका या बदला जा सकता है। यह कोई कानूनी अनुबंध नहीं है। यदि कोई फंड लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा हो, तो बेहतर विकल्प में स्विच करना भी सही फैसला हो सकता है। निवेश में लचीलापन बनाए रखना उतना ही जरूरी है जितना अनुशासन।
महाशिवरात्रि पर CM डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के बड़वाले महादेव में की विशेष पूजा, प्रदेश की खुशहाली की कामना

भोपाल में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी आस्था और भक्ति के प्रति गहरी श्रद्धा दिखाई। सुबह के समय मुख्यमंत्री भोपाल के प्राचीन और प्रसिद्ध बड़वाले महादेव मंदिर पहुंचे। यह मंदिर अपने प्राचीन ज्योतिर्लिंग के लिए जाना जाता है और महाशिवरात्रि के दिन यहाँ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। मुख्यमंत्री ने मंदिर में पहुँचते ही भगवान शिव के दर्शन किए और जलाभिषेक कर आराधना में लीन हो गए। उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना की। इस दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ रुद्राभिषेक और अन्य अनुष्ठान संपन्न हुए। मंदिर परिसर में मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और भक्ति का माहौल और बढ़ा दिया। पूजा-अर्चना के दौरान CM डॉ. मोहन यादव ने भक्तों के साथ मिलकर ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाए और सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि भगवान शिव की भक्ति, समर्पण और आत्मिक शक्ति का महापर्व है। मुख्यमंत्री ने भोलेनाथ से प्रार्थना की कि वे पूरे मध्य प्रदेश पर अपनी कृपा बनाए रखें और राज्य में शांति, समृद्धि एवं विकास का मार्ग प्रशस्त करें। महाशिवरात्रि के दिन प्रदेश भर में शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। उज्जैन के महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचे। भोपाल के बड़वाले महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही, और मुख्यमंत्री की उपस्थिति से मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भगवान शिव की भक्ति में जीवन को सरल और सकारात्मक बनाने की शक्ति है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में संयम, धर्म और परस्पर सहयोग की भावना बनाए रखें। उन्होंने यह भी कहा कि महाशिवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरूकता और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देने का अवसर भी है। प्रदेश में सरकार भी धार्मिक स्थलों के सुचारु संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तैयारियों में लगी रही। बड़वाले महादेव मंदिर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया ताकि श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन और पूजा का अवसर मिल सके। इस तरह महाशिवरात्रि 2026 पर CM डॉ. मोहन यादव की भक्ति, प्रदेश की खुशहाली की कामना और जनता के बीच सामूहिक उत्साह का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का संदेश भी देता है।
IMDb Most Anticipated Films: ‘ओ रोमियो’ के बाद अब इन 5 फिल्मों का इंतजार चरम पर

नई दिल्ली।शाहिद कपूर की फिल्म ओ रोमियो सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है और रिलीज के साथ ही दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा में है। रोमांस और ड्रामा से सजी इस फिल्म के बाद अब फैंस की नजरें आने वाली बड़ी रिलीज पर टिक गई हैं। IMDb की रियल-टाइम पॉपुलैरिटी लिस्ट के मुताबिक पांच ऐसी फिल्में हैं, जिनका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह रैंकिंग फिल्मों के पेज व्यूज के आधार पर तय होती है, यानी जिस फिल्म को लेकर जितनी ज्यादा दिलचस्पी, वह उतनी ऊपर। 1. Toxicलिस्ट में सबसे ऊपर सुपरस्टार Yash की बहुप्रतीक्षित एक्शन फिल्म Toxic है। इस फिल्म को Geetu Mohandas ने डायरेक्ट किया है। स्टाइलिश एक्शन और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के लिए मशहूर यश इस बार भी बड़े पैमाने पर एक्शन अवतार में नजर आएंगे। फिल्म 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और ट्रेड एनालिस्ट इसे साल की बड़ी ओपनिंग फिल्मों में गिन रहे हैं। 2. Dhurandhar: The Revengeदूसरे नंबर पर Ranveer Singh की फिल्म Dhurandhar: The Revenge है। इसे Aditya Dhar ने निर्देशित किया है। फिल्म का पहला पार्ट 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुआ था और बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की थी। अब इसका सीक्वल 19 मार्च को रिलीज होने जा रहा है। हाई-ऑक्टेन ड्रामा और देशभक्ति के रंग से सजी यह फिल्म दर्शकों में खास उत्साह जगा रही है। 3. Assiतीसरे स्थान पर Taapsee Pannu स्टारर Assi है। इस फिल्म का निर्देशन Anubhav Sinha ने किया है। सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले अनुभव सिन्हा इस बार भी एक गंभीर विषय लेकर आ रहे हैं। फिल्म 20 फरवरी को रिलीज होगी और कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा पसंद करने वालों को इससे काफी उम्मीदें हैं। 4. The Paradiseचौथे नंबर पर तेलुगु एक्शन ड्रामा The Paradise है, जिसमें Raghav Juyal नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन Srikanth Odela ने किया है। 26 मार्च को रिलीज होने वाली इस फिल्म को लेकर साउथ सिनेमा के दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। 5. Love Insurance Companyपांचवें नंबर पर तमिल रोमांटिक-कॉमेडी Love Insurance Company है। इसे Vignesh Shivan ने डायरेक्ट किया है। हल्की-फुल्की प्रेम कहानी और कॉमिक ट्विस्ट के कारण यह फिल्म चर्चा में है। हालांकि इसकी रिलीज डेट का अभी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन फैंस इसके अपडेट का इंतजार कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के पर्व ‘हेराथ पोश्ते’ पर दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाने वाले पवित्र त्योहार हेराथ पोश्ते के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी समुदाय के सदस्यों के जीवन में स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।प्रधानमंत्री मोदी ने संदेश में कहा, इस पवित्र अवसर पर, मैं सभी के जीवन में स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करता हूं। यह नए सफलता के मार्ग खोले और हर घर को खुशियों और संतोष से भर दे। उन्होंने इस त्योहार के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कश्मीरी पंडित समुदाय की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। हेराथ पोश्ते का पर्व कश्मीरी पंडित समुदाय में धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक प्रथाओं और ऐतिहासिक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है। इस अवसर पर परिवार और समुदाय के लोग मिलकर पूजा-अर्चना और उत्सव आयोजित करते हैं, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक बंधन मजबूत होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने इस पर्व के अवसर पर समुदाय में उत्साह और आनंद की भावना बढ़ा दी है। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि यह पर्व सभी के लिए खुशियों और सफलता का संदेश लेकर आए। उनके संदेश ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय समाज में सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं का सम्मान सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हेराथ पोश्ते के अवसर पर कश्मीरी पंडित समुदाय देशभर में अपने घरों और मंदिरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजन करता है। इस पर्व के माध्यम से युवा पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुभकामना संदेश के माध्यम से समाज में भाईचारे और सामूहिक कल्याण की भावना को भी उजागर किया। उनके संदेश ने न केवल कश्मीरी पंडित समुदाय, बल्कि पूरे देश में सांस्कृतिक और धार्मिक सौहार्द्र की भावना को बल दिया।
PPF में गलती से भी न खोलें दूसरा खाता, वरना डूब जाएगा ब्याज! जानिए पूरा नियम

नई दिल्ली। सुरक्षित निवेश की बात हो और Public Provident Fund (PPF) का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है। सरकार समर्थित यह योजना न सिर्फ स्थिर और सुरक्षित रिटर्न देती है, बल्कि पुरानी टैक्स व्यवस्था में EEE कैटेगरी के तहत टैक्स छूट का भी लाभ देती है। यही वजह है कि करोड़ों लोग इसमें लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं। लेकिन कई बार ज्यादा फायदा कमाने या अधूरी जानकारी के कारण लोग एक से अधिक PPF खाते खोल लेते हैं—और यहीं से शुरू होती है परेशानी। एक व्यक्ति, एक ही PPF खातापब्लिक प्रॉविडेंट फंड एक्ट, 1968 के अनुसार पूरे देश में एक व्यक्ति अपने नाम पर केवल एक ही PPF खाता रख सकता है, चाहे वह बैंक में हो या पोस्ट ऑफिस में। अगर आपके पास पहले से किसी बैंक में PPF खाता है, तो आप दूसरे बैंक या डाकघर में नया खाता नहीं खोल सकते। नियम सख्त हैं और पूरे भारत में समान रूप से लागू होते हैं। दूसरा खाता खुला तो क्या होगा?यदि किसी ने गलती से दो या अधिक खाते खोल लिए हैं, तो प्राथमिक खाते को छोड़कर बाकी सभी खाते ‘अनियमित’ घोषित कर दिए जाते हैं। ऐसे खातों में जमा रकम पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। अतिरिक्त खातों को या तो बंद करना होगा या वित्त मंत्रालय (NS Branch) की अनुमति से प्राथमिक खाते में मर्ज कराना होगा। यदि मर्ज नहीं कराया गया, तो खाते बंद कर केवल मूल जमा राशि लौटाई जाएगी—बिना किसी ब्याज के। यानी छोटी सी चूक से बड़ा वित्तीय नुकसान संभव है। नाबालिग के लिए अलग नियमPPF में एकमात्र अपवाद नाबालिग बच्चे का खाता है। माता या पिता में से कोई एक 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे के नाम पर खाता खोल सकता है। हालांकि, यहां भी कुल निवेश सीमा लागू होती है। आपके और बच्चे के खाते में मिलाकर एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम ₹1.5 लाख ही जमा किए जा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि आपने अपने खाते में ₹1 लाख जमा किए हैं, तो बच्चे के खाते में अधिकतम ₹50,000 ही निवेश कर सकते हैं। ब्याज दर, निवेश सीमा और अन्य सुविधाएंवित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के अनुसार PPF पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। न्यूनतम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख सालाना जमा किए जा सकते हैं। खाता 15 साल में मैच्योर होता है और इसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है। 5 वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है और 3 से 6 साल के बीच बैलेंस के आधार पर लोन भी लिया जा सकता है। ज्यादा निवेश के लिए विकल्पअगर आप ₹1.5 लाख से ज्यादा टैक्स बचत चाहते हैं, तो National Pension System (NPS) या बेटी होने पर Sukanya Samriddhi Yojana में निवेश पर विचार कर सकते हैं। PPF में एक व्यक्ति के नाम पर सिर्फ एक ही खाता मान्य है। अतिरिक्त खाता खुलने पर ब्याज का नुकसान तय है, इसलिए निवेश से पहले नियमों की पूरी जानकारी जरूरी है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में दुनिया भर की जबरदस्त भागीदारी, भारत बन रहा जिम्मेदार एआई नवाचार का वैश्विक केंद्र

नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में दुनिया भर से मिली जबरदस्त भागीदारी यह साबित कर रही है कि भारत जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नवाचार का एक उभरता हुआ वैश्विक केंद्र बन रहा है। यह पहल ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ यानी लोगों, पर्यावरण और प्रगति की सोच से प्रेरित है। समिट 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इसी समिट से पहले तीन प्रमुख वैश्विक चुनौतियों के फाइनलिस्टों की घोषणा की गई है। ये चुनौतियां हैं- एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवाआई। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार इन चुनौतियों का उद्देश्य ऐसे एआई समाधान तैयार करना था, जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालें और वैश्विक जरूरतों के अनुरूप हों। इन तीनों प्रतियोगिताओं में 60 से अधिक देशों से 4,650 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए। कड़े चयन और कई चरणों की समीक्षा प्रक्रिया के बाद कुल 70 टीमों को फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया। ये टीमें 16 और 17 फरवरी को भारत मंडपम और सुषमा स्वराज भवन में आयोजित ग्रैंड फिनाले और पुरस्कार समारोह में अपने समाधान पेश करेंगी। एआई फॉर ऑल ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज में अकेले ही 60 देशों से 1,350 से अधिक आवेदन आए। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु, शासन, शिक्षा और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उपयोगी एआई समाधान तैयार करना था। इसमें चुनी गई 20 शीर्ष टीमों ने कई अभिनव तकनीकें विकसित की हैं, जैसे एआई आधारित संक्रमण जांच उपकरण, मिट्टी की गुणवत्ता बताने वाली प्रणाली, जलवायु जोखिम विश्लेषण प्लेटफॉर्म, डिजिटल स्वास्थ्य जांच, साइबर सुरक्षा समाधान, उद्योगों की कार्यक्षमता बढ़ाने वाले टूल और शिक्षा को आसान बनाने वाली तकनीकें। मंत्रालय ने कहा कि ये नवाचार दर्शाते हैं कि एआई कैसे समान विकास को बढ़ावा दे सकता है और खासकर ग्लोबल साउथ देशों में सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बना सकता है। एआई बाय हर ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज में 50 से अधिक देशों से 800 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए। इसका लक्ष्य महिलाओं के नेतृत्व में एआई नवाचार को बढ़ावा देना है। इसमें चुनी गई 30 शीर्ष महिला उद्यमी स्वास्थ्य, टिकाऊ विकास, वित्तीय समावेशन, रोजगार, कृषि, शिक्षा और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान पर काम कर रही हैं। इन परियोजनाओं में कैंसर और आंखों की जांच के लिए एआई, बहुभाषी मेडिकल निर्णय सहायता प्रणाली, वॉयस-टू-ईएमआर प्लेटफॉर्म, पोषण तकनीक, क्रेडिट इंटेलिजेंस सिस्टम और ईएसजी ऑटोमेशन शामिल हैं। सरकार ने कहा कि यह पहल समावेशी डिजिटल विकास की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है और महिलाओं को वैश्विक एआई इकोसिस्टम में अग्रणी भूमिका देने का प्रयास है। समिट 2026 केवल नवाचार के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक सहयोग और समान अवसर के महत्व को भी रेखांकित करता है।
महाकाल उज्जैन की तर्ज पर थांवला में मना महाशिवरात्रि महोत्सव, शिव बारात में शामिल हुए 'भूत-प्रेत'

नई दिल्ली। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक माना जाता है। इस पावन दिन पर शिव भक्त व्रत रखते हैं, और विधि-विधान से भोलेनाथ की आराधना करते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं और सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। इसी कड़ी में राजस्थान के अजमेर जिले में महाशिवरात्रि का पर्व पूरे धूमधाम के साथ मनाया गया। थांवला का महाशिवरात्रि महोत्सव आस्था, संस्कृति और उत्सव का शानदार उदाहरण बना। इसमें लोग भगवान शिव की भक्ति के साथ-साथ लोक परंपराओं की रंगत में भी डूबे नजर आए। तीर्थराज पुष्कर के समीपवर्ती ग्राम थांवला में थानेश्वर महादेव सेवा समिति की ओर से महाशिवरात्रि महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन को उज्जैन के महाकाल मंदिर की परंपराओं की तर्ज पर किया गया। महोत्सव के दौरान मेहंदी, हल्दी, शिव बारात, महाआरती, शृंगार दर्शन और भजन संध्या जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस आयोजन का सबसे आकर्षक दृश्य भूत-प्रेतों की अनोखी शिव बारात रही, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस मौके पर थानेश्वर महादेव सेवा समिति के सदस्य पंडित मांगीलाल शर्मा ने बताया कि शिव बारात में पुणे से आए ढोल-ताशे वालों ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी। करीब 101 ढोलों की गूंज और ताशा-डमरुओं की आवाज ने पूरे गांव के लोगों का मन मोह लिया। मराठी परिधान में सजे युवक और युवतियों ने जब एक साथ ढोल-ताशा बजाए, तो उनकी आवाज करीब एक किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। इससे माहौल पूरी तरह उत्सव में बदल गया। शिव बारात में आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। श्रद्धालुओं का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। महोत्सव के तहत कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा। इस कड़ी में भव्य महाआरती और भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस सांस्कृतिक संध्या में आध्यात्मिक और संगीत जगत की नामचीन हस्तियां अपनी प्रस्तुतियां देंगी।