साधारण ऑफ स्पिनर उस्मान तारिक से नहीं घबराएगा भारत, सौरव गांगुली का बड़ा बयान

नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले बहुप्रतीक्षित टी20 विश्व कप मुकाबले से पहले पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने पाकिस्तान के ऑफ-स्पिनर उस्मान तारिक को लेकर साफ और बेबाक राय रखी है। गांगुली ने तारिक को एक साधारण ऑफ-स्पिनर बताते हुए कहा कि भारतीय बल्लेबाज उनकी गेंदबाजी से निपटना अच्छी तरह जानते हैं और इस मुकाबले में उन्हें कोई खास परेशानी नहीं होगी। भारत और पाकिस्तान रविवार को कोलंबो में ग्रुप ए के मैच में आमने-सामने होंगे और मुकाबले से पहले 28 वर्षीय तारिक चर्चा का प्रमुख विषय बने हुए हैं। कोलकाता में टी20 विश्व कप मैगजीन लॉन्च के दौरान गांगुली ने कहा कि टी20 क्रिकेट में किसी भी नतीजे का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल होता है लेकिन भारतीय टीम संतुलित और मजबूत है। उन्होंने तारिक की गेंदबाजी शैली का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपनी डिलीवरी स्ट्राइड में हल्का सा रुककर गेंद छोड़ते हैं पर इसमें ऐसा कुछ भी रहस्यमय नहीं है जिसे समझ पाना कठिन हो। दादा के मुताबिक भारतीय बल्लेबाज इस तरह की विविधताओं के आदी हैं और उन्हें खेलने में सक्षम हैं। उन्होंने भरोसे के साथ कहा भारत अच्छा खेलेगा। तारिक ने अब तक केवल चार टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं जिनमें 11 विकेट लेकर उन्होंने ध्यान जरूर खींचा है लेकिन भारत-पाकिस्तान मुकाबले का दबाव अलग स्तर का होता है। यह सिर्फ एक क्रिकेट मैच नहीं बल्कि भावनाओं और अपेक्षाओं का टकराव होता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीमित अनुभव वाले तारिक इस बड़े मंच के दबाव को कैसे संभालते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच टी20 विश्व कप इतिहास में अब तक आठ मुकाबले हुए हैं जिनमें सात में भारत विजयी रहा है जबकि पाकिस्तान को सिर्फ एक जीत मिली है। आंकड़े भी भारत के आत्मविश्वास को मजबूती देते हैं। गांगुली ने पाकिस्तान की मौजूदा टीम की तुलना उसके स्वर्णिम दौर से करते हुए कहा कि आज की टीम पहले जैसी प्रभावशाली नहीं दिखती। उन्होंने याद दिलाया कि जब टीम में इंजमाम-उल-हक सईद अनवर मोहम्मद यूसुफ वसीम अकरम और वकार यूनिस जैसे दिग्गज खिलाड़ी थे तब पाकिस्तान की टीम का स्तर अलग था। मौजूदा टीम में वह अनुभव और धार नजर नहीं आती। टीम संयोजन को लेकर भी गांगुली ने स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत को गेंदबाजी आक्रमण में बदलाव की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार अक्षर पटेल वरुण चक्रवर्ती जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह मुख्य गेंदबाज होने चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बल्लेबाजी संतुलन बनाए रखना जरूरी है और अनावश्यक प्रयोग से बचना चाहिए। उनका मानना है कि एक खिलाड़ी पर फोकस करने के बजाय पूरी टीम के प्रदर्शन पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर गांगुली के बयान ने भारतीय प्रशंसकों की टेंशन कम कर दी है। अब नजरें इस बात पर होंगी कि क्या उस्मान तारिक बड़े मंच पर खुद को साबित कर पाते हैं या भारतीय बल्लेबाज उनके खिलाफ आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए मुकाबले को अपने नाम करते हैं।
चार दशक बाद फिर से शुरू होगी वुलर बैराज परियोजना, भारत-पाकिस्तान जल विवाद के बीच बड़ा कदम

नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में आई गिरावट के बीच भारत ने वुलर बैराज परियोजना को चार दशक बाद पुनः सक्रिय करने का फैसला किया है। यह परियोजना झेलम नदी के पानी का भंडारण और प्रवाह नियंत्रित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। भारत ने लंबे समय तक मानवता के नाम पर निभाई गई सिंधु जल संधि को मानते हुए इस परियोजना को ठंडे बस्ते में रखा था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर और इसके बाद सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद अब जम्मू-कश्मीर सरकार और केंद्र सरकार मिलकर वुलर बैराज पर काम फिर से शुरू करने जा रही हैं। वुलर झील की वर्तमान स्थितिझेलम नदी के प्रवाह के अनुसार वुलर झील का आकार बदलता रहता है। न्यूनतम आकार लगभग 20 वर्ग किलोमीटर है, जबकि अधिकतम आकार करीब 190 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में बताया कि उनकी सरकार केंद्र के साथ मिलकर दो बड़ी परियोजनाओं—अखनूर में चेनाब नदी से जम्मू शहर के लिए जलापूर्ति और झेलम पर तुलबुल (वुलर) परियोजना पर काम कर रही है। इस परियोजना के पहले एशियाई बैंक से फंडिंग ली गई थी, लेकिन सिंधु जल संधि के कारण इसे रोक दिया गया था। अब जबकि संधि निलंबित हो गई है, परियोजना पर काम फिर से शुरू होगा। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविकावुलर बैराज के निर्माण से स्थानीय लोगों की आजीविका में सुधार होने की उम्मीद है। सर्दियों में झेलम नदी के जल का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे झील के ज्यादातर हिस्से सूख जाते हैं। बांदीपोरा से लेकर सोपोर तक स्थानीय लोग मछली पकड़ने, सिंघाड़ा और कमल ककड़ी निकालने के लिए नावों का इस्तेमाल करते रहे हैं, लेकिन झील सिकुड़ने के कारण पारंपरिक आजीविका प्रभावित हुई थी। परियोजना के पूरा होने से यह संकट कम होने की संभावना है। पाकिस्तान की प्रतिक्रियासिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान ने लगातार बयान जारी किए और चेतावनी दी कि अगर पानी रोका गया तो इसे युद्ध का कदम माना जाएगा। भारत ने अपना फैसला कायम रखा है और केंद्र व राज्य सरकार मिलकर परियोजना पर जल्द ही काम शुरू करने जा रही हैं।
MP: अशोकनगर में पूर्व MLA जजपाल जज्जी के भांजे ने खुद को गोली मारकर की आत्महत्या

अशोकनगर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अशोक नगर जिले (Ashok Nagar district) में पूर्व विधायक जजपाल सिंह जज्जी (Jajpal Singh Jajji) के भांजे ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वारदात के समय घर पर परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। सभी लोग एक सगाई कार्यक्रम में गए थे। वारदात देहात थाना क्षेत्र के इंग्लेखेड़ी गांव की है। मृतक की पहचान 26 वर्षीय गुरतेज पुत्र बिजेंदर सिंह संधू के रूप में हुई है। घर में काम करने वाले एक कर्मचारी ने गोली चलने की आवाज सुनी। आवाज सुनकर वह कमरे में पहुंचा, जहां गुरतेज खून से लथपथ हालत में पड़ा मिला। कमरे में खून से लथपथ गुरतेज को देखकर कर्मचारी घबरा गया। वह तुरंत ट्रैक्टर से सगाई कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा। होटल में परिवार को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही परिजन घर पहुंचे। बताया जा रहा है कि युवक ने अपने बड़े भाई की 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक से चलाई है। गोली माथे पर लगी है, जिससे मौके पर ही मौत हो गई। युवक खेती किसानी का काम करता था। घटना के वक्त युवक के पिता डबरा में थे। परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टमदेहात थाना प्रभारी भुवनेश शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही हमारी टीम मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। आज परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम होगा। फोरेंसिक टीम ने सबूत जांच के लिए लैब भेजा गया है। परिजनों और परिचितों से पूछताछदेहात थाना प्रभारी ने बताया कि युवक ने आत्महत्या किन कारणों से की, इसका फिलहाल स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। परिजनों और परिचितों से पूछताछ की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
J&K में तेज हुआ आतंकवाद रोधी अभियान…जगहृ-जगह चप्पा किए आतंकियों के पोस्टर

जम्मू। जम्मू-कश्मीर पुलिस (Jammu and Kashmir Police) ने आतंकवाद रोधी अभियान (Anti-Terrorism Operations) तेज करते हुए डोडा जिले (Doda district) में सक्रिय आतंकवादियों के बारे में सूचना देने के संबंध में कई अहम स्थानों पर पोस्टर चस्पा किए हैं। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इनमें प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर सैफुल्लाह का नाम भी शामिल है। हालिया मुठभेड़ और क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी से जुड़ी खुफिया जानकारी मिलने के बाद जम्मू संभाग के ऊंचाई वाले इलाकों में सुरक्षा अभियान तेज कर दिए गए हैं। इसी क्रम में यह कदम उठाया गया है।पोस्टर डोडा के प्रवेश बिंदु पर गणपत पुल, नागरी, डेसा और ठाठरी समेत प्रमुख चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि जनसहभागिता बढ़ाने के लिए संवेदनशील इलाकों में और भी नोटिस लगाए जा रहे हैं। इस बीच, शनिवार सुबह सुरक्षा बलों ने डोडा के गांदो क्षेत्र के चिल्ली जंगल में आंतकवादियों के एक ठिकाने का भंडाफोड़ किया। वहां से खाने-पीने का सामान और कंबल बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार आसपास के जंगलों में तलाशी अभियान और तेज कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि संदिग्धों की तस्वीरों और संक्षिप्त विवरण वाले पोस्टरों के जरिये आम लोगों से कोई भी विश्वसनीय सूचना को पुलिस के साथ साझा करने की अपील की गई है। साथ ही सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह पोस्टर अभियान चेनाब घाटी क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। डोडा और पड़ोसी किश्तवाड़ जिलों में हाल के वर्षों में कई मुठभेड़ हुई हैं, क्योंकि आतंकियों ने जम्मू क्षेत्र के उन हिस्सों में फिर से गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश की है, जहां पहले आतंकवाद पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था। पिछले एक महीने से डोडा, किश्तवाड़, कठुआ, उधमपुर, राजौरी और पुंछ जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी है। इस दौरान 10 से अधिक मुठभेड़ हुई हैं। इनमें से ज्यादातर किश्तवाड़, उधमपुर और कठुआ में हुई हैं, जिनमें जेईएम के चार पाकिस्तानी आतंकवादी ढेर हो गए और सेना का एक जवान शहीद हो गया। चार फरवरी को उधमपुर के रामनगर वन क्षेत्र और किश्तवाड़ के छत्रू इलाके में मुठभेड़ में दो आतंकवादी ढेर हो गए, जबकि 23 जनवरी को कठुआ के परेहतर इलाके में एक अन्य आतंकी मारा गया। वहीं, 18 जनवरी को छत्रू में हुई मुठभेड़ में सेना का एक ‘पैरा ट्रूपर’ शहीद हो गया।
शिव-शक्ति का पर्व है महाशिवरात्रि… मां पार्वती को भी मनपसंद भोग लगाने मिलता है दोगुना फल

नई दिल्ली। आज महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) का उत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस पावन अवसर पर भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ महादेव की पूजा करते हैं. लेकिन महाशिवरात्रि केवल शिव की साधना (Shiva’s Meditation) का ही नहीं बल्कि शिव और शक्ति (Shiva and Shakti) दोनों से जुड़ा महापर्व है. इस पावन दिन पर भक्त अक्सर महादेव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र और धतूरा चढ़ाते हैं लेकिन मान्यता है कि अगर भोग में माता पार्वती की पसंद का भी ध्यान रखा जाए तो पूजा का फल दोगुना हो जाता है। जब हम शिव और शक्ति दोनों को उनकी प्रिय वस्तुओं का भोग लगाते हैं तो घर में सुख, शांति और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कि इस बार महाशिवरात्रि की अपनी भोग की थाली को कैसे खास बनाएं कि हमारे ऊपर महादेव और मां गौरी दोनों की असीम कृपा बरसे। महाशिवरात्रि पर लगाएं ये भोगभगवान शिव को भोलेनाथ इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि वो बहुत ही सरल चीजों से प्रसन्न हो जाते हैं. इसलिए शिवरात्रि पर भांग, धतूरा और बेर जैसी चीजें चढ़ाई जाती हैं जो हर किसी को आसानी से मिल जाती हैं. लेकिन इसके अलावा भी कुछ ऐसे पकवान हैं जिन्हें शिव और पार्वती को चढ़ाने की मान्यता है. 1. पंचामृत: भगवान शिव को पंचामृत का भोग और अभिषेक अत्यंत प्रिय है. यह दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से बनता है. इसे आत्मा की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है.इसे घर पर कैसे बनाएंपंचामृत बनाने के लिए एक बर्तन में ताजा दही, दूध, थोड़ा सा शहद, थोड़ी चीनी और थोड़े से गंगाजल को मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें. इसमें स्वाद और शुद्धता के लिए बारीक कटे मखाने, सूखे मेवे और तुलसी के पत्ते डालें. सभी सामग्रियों को एक साथ मिलाने के बाद आपका पवित्र पंचामृत भोग के लिए तैयार है. 2. मावा की बर्फी: शिव पूजा में भांग और धतूरे का विशेष महत्व है. भांग को दूध में मिलाकर या इसके लड्डू बनाकर भोग लगाया जाता है. यह भगवान शिव की वैराग्य प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है.इसे घर पर कैसे बनाएंमावे यानी खोया की बर्फी बनाने के लिए कड़ाही में खोया और चीनी डालकर धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक वो गाढ़ा होकर कड़ाही न छोड़ने लगे. इसमें इलायची पाउडर और थोड़े कटे हुए ड्राई फ्रूट्स मिलाएं. फिर मिश्रण को घी लगी प्लेट में एक समान फैला दें. हल्का ठंडा होने पर मनचाहे आकार में काट लें. 3. बेलपत्र और मौसमी फल: माता पार्वती और शिव जी को बेर और केले जैसे कई फलों का भोग लगाया जाता है. लेकिन बेर को शिवरात्रि का मुख्य फल माना जाता है. बेर के बिना शिव पूजा अधूरी मानी जाती है. 4. ठंडाई: शिवरात्रि पर महादेव को केसर, बादाम और पिस्ता मिश्रित ठंडाई का भोग लगाना शुभ होता है. यह मन को शांति प्रदान करने वाला सात्विक भोग है.इसे घर पर कैसे बनाएंसबसे पहले बादाम, काजू, पिस्ता, सौंफ, खसखस और काली मिर्च को कुछ घंटों के लिए भिगोकर उनका बारीक पेस्ट तैयार कर लें. अब इस पेस्ट को ठंडे दूध में अच्छी तरह मिलाएं और इसमें स्वादानुसार चीनी, केसर के धागे और गुलाब की पंखुड़ियां डाल दें. अंत में मिश्रण को छान लें या बिना छाने ही बर्फ के टुकड़े डालकर इसे ठंडा ही शिव जी को भोग लगाएं. 5. मखाना खीर: माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए सूखे मेवों से भरपूर मखाने की खीर का भोग लगाया जाता है. यह भोग शक्ति और भक्ति का संगम माना जाता है. मखाने की खीर व्रत में खाई जाती है और इसका भोग शिव को भी लगाया जाता है.इसे घर पर कैसे बनाएंसबसे पहले मखानों को घी में हल्का कुरकुरा होने तक भून लें और फिर उन्हें दरदरा पीस लें या छोटे टुकड़ों में काट लें. अब दूध को आधा होने तक उबालें और फिर उसमें मखाने, चीनी और इलायची पाउडर डालकर गाढ़ा होने तक धीमी आंच पर पकाएं. आखिर में अपनी पसंद के बारीक कटे हुए मेवे और केसर डाल दें.
MP: ट्रेन अटेंडेंट की मदद से हो रही थी दुर्लभ कछुओं की तस्करी…. AC कोच से 311 कछुए बरामद

भोपाल। भोपाल (Bhopal) में वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (Madhya Pradesh State Tiger Strike Force- STSF) ने रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (Railway Protection Force- RPF) और भोपाल वन मंडल के साथ संयुक्त कार्रवाई में 19322 पटना-इंदौर एक्सप्रेस (Patna-Indore Express) के एसी फर्स्ट क्लास कोच से 311 दुर्लभ और संरक्षित कछुए बरामद किए। यह कार्रवाई संत हिरदाराम रेलवे स्टेशन पर की गई। कोच अटेंडेंट की मदद से तस्करीजांच में सामने आया कि यह अंतरराज्यीय गिरोह उत्तर प्रदेश की नदियों, खासकर गंगा और गोमती व उनकी सहायक धाराओं से कछुओं को पकड़कर एसी फर्स्ट क्लास कोच के जरिए मध्य प्रदेश लाता था। आरोप है कि कोच अटेंडेंट (रेलवे कर्मचारी) की मदद से कछुओं को छिपाकर ले जाया जाता था। बरामद कछुए कोच अटेंडेंट अजय सिंह राजपूत के कब्जे से मिले, जो कथित तौर पर गिरोह के लिए कूरियर का काम कर रहा था। बेहद खराब कंडीशन में कैद थे कछुएएक रिपोर्ट के मुताबिक- जब्त प्रजातियों में क्राउन रिवर टर्टल, इंडियन टेंट टर्टल और इंडियन रूफ्ड टर्टल शामिल हैं। ये सभी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित हैं। अधिकारियों के मुताबिक कछुओं को बेहद खराब और दमघोंटू परिस्थितियों में पैक किया गया था, जिससे कई निर्जलित और तनावग्रस्त हो गए थे। बड़े नेटवर्क के खुलासे की संभावनाआगे की जांच में टीम उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंची, जहां साढ़े 17 वर्षीय एक किशोर को हिरासत में लेकर भोपाल के सुधार गृह भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, सुल्तानपुर और अमेठी जैसे जिलों में सक्रिय था। गिरोह का मास्टरमाइंड देवास निवासी आसिफ खान बताया जा रहा है, जिसे 10 फरवरी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया। पूछताछ में वित्तपोषकों और गुजरात-महाराष्ट्र तक फैले नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है। तस्करी करने वाले को क्या सजा मिलती हैविशेषज्ञों का कहना है कि कछुए जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनके अवैध शिकार से नदियों का संतुलन बिगड़ता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियों की तस्करी पर सात साल तक की सजा और न्यूनतम 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। अधिकारियों के अनुसार, रेलवे मार्गों का इस्तेमाल कर कई वर्षों से यह रैकेट संचालित हो रहा था। हालिया कार्रवाई से बड़े नेटवर्क के उजागर होने की उम्मीद है।
पूर्वोत्तर को बड़ी सौगात… ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी देश की पहली सड़क-सह-रेल सुरंग

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) के नीचे भारत (India) की पहली सड़क-सह-रेल सुरंग (Road-Cum-Rail Tunnel) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना गोहपुर (NH-15) से नुमालीगढ़ (NH-715) तक 33.7 किलोमीटर लंबे चार-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसमें ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग शामिल है। कुल लागत 18,662 करोड़ रुपये है और इसे इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यह भारत की पहली अंडरवाटर सड़क-सह-रेल सुरंग होगी, जो विश्व में अपनी तरह की दूसरी ऐसी संरचना होगी। वर्तमान में गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच की दूरी 240 किलोमीटर है, जो कालियाभम्भोरा पुल और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरती है। छह घंटे लगते हैं। नई सुरंग से यह दूरी मात्र 34 किलोमीटर रह जाएगी और यात्रा समय 20-30 मिनट तक कम हो जाएगा। इस परियोजना के प्रमुख फायदे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। यह असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और अन्य राज्यों को सीधे लाभ पहुंचाएगी। माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, रसद लागत में भारी कमी आएगी और क्षेत्रीय व्यापार को गति मिलेगी। सुरंग में एक ट्यूब में सड़क (4 लेन) और दूसरी में रेलवे की व्यवस्था होगी, जो मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देगी। इससे चार प्रमुख रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और दो अंतर्देशीय जलमार्गों से बेहतर जुड़ाव होगा। काजीरंगा जैसे पर्यटन स्थलों, आर्थिक केंद्रों और रसद हब्स की पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे पर्यटन, उद्योग और व्यापार में नई संभावनाएं खुलेंगी। एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूतीरणनीतिक दृष्टि से यह परियोजना एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूत करेगी और सीमा क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाएगी। पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने में यह मील का पत्थर साबित होगी। निर्माण से लगभग 80 लाख मानव-दिवसों का रोजगार सृजन होगा, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल देगा। सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी, क्योंकि प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन केंद्र निर्बाध रूप से जुड़ेंगे। पूर्वोत्तर भारत के लिए ऐतिहासिक कदमकुल मिलाकर, ब्रह्मपुत्र सुरंग परियोजना पूर्वोत्तर भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह न केवल यात्रा और परिवहन को तेज व सुरक्षित बनाएगी, बल्कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास, व्यापार वृद्धि और सामाजिक समृद्धि के नए द्वार खोलेगी। केंद्रीय सरकार की इस पहल से असम और पूरे पूर्वोत्तर का परिदृश्य बदल जाएगा, जो सबका साथ, सबका विकास के संकल्प को साकार करेगा।
देशभर में महाशिवरात्रि पूर्व की धूम…. जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

नई दिल्ली। देश भर में आज रविवार को फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का पर्व (Mahashivratri festival) धूमधाम से मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि में त्रयोदशी-चतुर्दशी का मेल होता है, त्रयोदशी समाप्त होकर चतुर्दशी शुरू होती है, वही समय महाशिवरात्रि का विशेष पुण्यकाल (Special Auspicious time.) माना जाता है। ज्योतिषचार्यों के अनुसार 15 फरवरी को दिन में त्रयोदशी तिथि रहेगी, लेकिन शाम 5:04 बजे चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जाएगी। ऐसे में पूरी रात्रि में चतुर्दशी ही व्याप्त रहेगी। इसलिए महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी को मनाया जा रहा है। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर व्यतिपात, वरियान व अमृत नामक महा औदायिक योग व निशीथ काल भी बन रहा है। पं. शरद चंद मिश्र के अनुसार, इस दिन सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 25 मिनट पर होगा। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी सायं 4 बजकर 23 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होकर रात्रि भर रहेगी। उत्तराषाढ़ नक्षत्र सायं 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। व्यतिपात योग दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, इसके पश्चात वरियान योग लगेगा। साथ ही अमृत सिद्धि योग पूरे दिन-रात्रि विद्यमान रहेगा। निशीथ काल रात्रि 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जो भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। प. नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6:25 से सायं 7:26 तक रहेगा। व्यतिपात योग साधना और जप-तप के लिए विशेष फलदायी माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर में रहेगा, जिसमें पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि का महत्त्व : पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि में भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसलिए इसे महाशिवरात्रि या कालरात्रि भी कहा गया है। पौराणिक व्याख्यानों के अनुसार इसे शिव विवाह महोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। महाशिवरात्रि को वर्षभर में पड़ने वाली सिद्ध रात्रियों में से एक माना गया है। मुहूर्त● चतुर्दशी तिथि उपस्थित : 15 फरवरी शाम 5:04 से 16 फरवरी शाम 5:34 बजे● शिवरात्रि का विशष पुण्यकाल : 15 की शाम 5:04 से आरम्भ● जलाभिषेक का समय : 15 को प्रातःकाल से आरम्भ● विशेष पुण्यकाल : शाम 5:04 के बाद विशेष पुण्यकाल का अभिषेक होगा शिव पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त- निशिता काल पूजा समय – 12:37 ए एम से 01:32 ए एम, फरवरी 16अवधि – 55 मिनटशिवरात्रि पारण समय – 16 फरवरी को 07:57 ए एम से 01:04 पी एम तक।रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 06:11 पी एम से 09:38 पी एमरात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:38 पी एम से 01:04 ए एम, फरवरी 16रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 01:04 ए एम से 04:31 ए एम, फरवरी 16रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 04:31 ए एम से 07:57 ए एम, फरवरी 16 महाशिवरात्रि की पूजा विधि (घर और मंदिर में कैसे करें पूजा)-महाशिवरात्रि की पूजा विधि: घर में कैसे करें पूजा- महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर में पूजा करने से पहले पूजा की जगह अच्छे से साफ कर लें। शिवलिंग को भी पानी से धोकर साफ जगह पर रखें। सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी और शहद से एक-एक करके अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक करते समय मन में “ॐ नमः शिवाय” का जप करते रहें। अगर सब चीजें उपलब्ध न हों तो सिर्फ जल और दूध से भी पूजा पूरी मानी जाती है। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र जरूर चढ़ाएं। साथ में धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल चढ़ा सकते हैं। फूल चढ़ाते समय मन में अपनी इच्छा रखें और शिवजी को याद करें। इसके बाद धूप-दीप जलाएं और थोड़ी देर शांत बैठकर शिव मंत्रों का जप करें। मन की बात भगवान शिव से कहें। शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी कर सकते हैं। जो लोग रात में जागकर पूजा कर पाते हैं, वे घर पर ही सरल तरीके से रुद्राभिषेक कर सकते हैं। घर में शिवलिंग रखने की सही बात- घर में बहुत बड़ा शिवलिंग रखने की परंपरा नहीं है। आमतौर पर मिट्टी, पत्थर, पीतल या चांदी का छोटा शिवलिंग घर के लिए ठीक माना जाता है। शिवलिंग के साथ गणेश जी, माता पार्वती और नंदी की छोटी मूर्ति रखकर पूजा करना अच्छा माना जाता है। महाशिवरात्रि की पूजा विधि: मंदिर में कैसे करें पूजा- अगर मंदिर जाकर पूजा कर रहे हैं तो सुबह स्नान करके साफ कपड़ों में मंदिर जाएं। मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। कई जगहों पर दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक की व्यवस्था होती है, वहां श्रद्धा से अभिषेक करें। “ॐ नमः शिवाय” का मन ही मन जप करते रहें।शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल चढ़ाएं। पुजारी जी के बताए नियमों का पालन करें। धूप-दीप दिखाकर भगवान शिव का ध्यान करें। अगर संभव हो तो रात में मंदिर जाकर रुद्राभिषेक या विशेष पूजा में शामिल हों। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात की पूजा का खास फल मिलता है। महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जप- महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए कुछ आसान और असरदार मंत्रों का जप किया जा सकता है। सबसे पहले “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। यह शिव जी का सबसे सरल और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इस पावन दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप भी किया जाता है–ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं- महाशिवरात्रि या रोज की पूजा में शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक किया जाता है और इसके बाद बेलपत्र जरूर अर्पित करें, क्योंकि यह शिवजी को सबसे प्रिय माना जाता है। साथ में सफेद फूल, आक और धतूरा भी चढ़ाए जाते हैं। धूप-दीप जलाकर सादे मन से पूजा करें। वहीं शिवलिंग पर केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि मान्यता के अनुसार यह शिव पूजा में वर्जित माना गया है। तुलसी के पत्ते भी शिवलिंग पर
Ind vs Pak महामुकाबला आज… मैच से पहले बालिंग करते नजर आए कप्तान सूर्या

नई दिल्ली। टीम इंडिया (Team India.) जब शनिवार 14 फरवरी को कोलंबो को आर प्रेमदासा स्टेडियम में पाकिस्तान (India vs Pakistan) के खिलाफ होने वाले मैच से पहले प्रैक्टिस के लिए उतरी तो उनके दिमाग में उस्मान तारिक (Usman Tariq) का वह बॉलिंग ऐक्शन भी था, जो वे थोड़ा पॉज करके साइड ऑन एंगल से गेंदबाजी करते हैं। यही कारण है कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव (Indian captain Suryakumar Yadav) ने भी नेट्स में थोड़े समय के लिए गेंदबाजी की कमान संभाली और उस्मान तारिक की तरह अपना ऐक्शन पॉज करने के बाद रिंकू सिंह के लिए गेंदबाजी की। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। शनिवार को टीम इंडिया का नेट सेशन पूरा तो हुआ, लेकिन बारिश से भी थोड़ा बहुत बाधित हुआ। आज यानी 15 फरवरी को मैच वाले समय भी बारिश होने की संभावना है। हालांकि, फैंस चाहेंगे कि मुकाबला पूरा खेला जाए, लेकिन एक बात तो तय है कि उस्मान तारिक को लेकर भारतीय खेमे में कोई डर की भावना नहीं है, क्योंकि सूर्या ने सिर्फ मजे के लिए और उनका बॉलिंग ऐक्शन को कॉपी किया है, क्योंकि अगर ऐसा होता तो फिर वे और अन्य सपोर्ट स्टाफ के सदस्य भी उसी ऐक्शन से लगातार गेंदबाजी नेट्स में करा सकते थे। भारतीय टीम के लिए अच्छी बात ये है कि अभिषेक शर्मा फिट हो गए हैं और वे शनिवार को नेट्स में उतरे और काफी देर तक बल्लेबाजी की। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी उनके पाकिस्तान के खिलाफ खेलने की पुष्टि कर दी है। ऐसे में संजू सैमसन को बाहर बैठना होगा। हालांकि, क्या कुलदीप यादव को मौका दिया जाएगा? ये आने वाला वक्त बताएगा, क्योंकि अर्शदीप सिंह की जगह कुलदीप यादव को खिलाने का विकल्प अच्छा रहेगा। इसके पीछे का कारण ये है कि कोलंबो की पिच स्पिनरों की मददगार रही है। उसी पिच पर इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मैच होना है, जिस पर ऑस्ट्रेलिया वर्सेस जिम्बाब्वे मैच खेला गया था और उसे जिम्बाब्वे ने जीता था। हरभजन ने कहा, ”देखिए, मैंने उन्हें आईएलटी20 में गेंदबाजी करते देखा है, जहां वह बेहतरीन गेंदबाजों में से एक थे। जब भी उन्हें सेमीफाइनल और फाइनल खेलने का मौका मिला, वह ‘मैन ऑफ द मैच’ रहे। वह अन्य स्पिनरों से अलग हैं और उनके पास काफी विविधताएं हैं। लोग उनके ‘स्टैंड एंड डिलीवर’ एक्शन की बात कर रहे हैं। यह आसान नहीं है। कोई भी खड़े होकर गेंद फेंक सकता है, लेकिन अलग-अलग वैरिएशन होना जरूरी है जो उनके पास है। बड़े मैदानों और धीमी पिचों पर उन्हें हिट करना मुश्किल है।”
ISRO का निसार उपग्रह करेगा किसानों की बड़ी मदद… मिलेगी मिट्टी की नमी की सटीक जानकारी

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organization- ISRO) ने निसार (NISAR) उपग्रह के बारे में अहम जानकारी साझा की है। यह उपग्रह भारत (India) और अमेरिका (NASA) का संयुक्त प्रोजेक्ट है, जो एस-बैंड और एल-बैंड रडार की मदद से पृथ्वी की सतह की निगरानी करता है। निसार का मुख्य उद्देश्य मिट्टी में नमी का सटीक और नियमित आकलन करना है। इसरो के अनुसार, यह उपग्रह हर 12 दिनों में भारत के पूरे भू-भाग का उच्च रिजॉल्यूशन (100 मीटर) डेटा प्रदान करेगा। इससे किसानों, वैज्ञानिकों और सरकार को मिट्टी की नमी की लगभग वास्तविक समय की जानकारी मिल सकेगी। मिट्टी में नमी की जानकारी कृषि के लिए बहुत उपयोगी है। यह फसलों की सेहत, सिंचाई की कितनी जरूरत है, सूखे का खतरा कितना है और जल प्रबंधन जैसे मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में अलग-अलग इलाकों जैसे सिंचित मैदान, वर्षा पर निर्भर खेत, अर्ध-शुष्क क्षेत्र और ज्यादा बारिश वाले इलाकों में मिट्टी की नमी अलग-अलग होती है। निसार का डेटा इन सभी क्षेत्रों में एकसमान और भरोसेमंद अनुमान देगा। इसरो ने एक भौतिकी-आधारित एल्गोरिदम विकसित किया है, जो इस डेटा को और अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाता है। NISAR के पास क्या है टारगेटनिसार हर 12 दिनों में दो बार (दो अलग-अलग दिशाओं से) अवलोकन करेगा, जिससे मिट्टी की नमी में होने वाले बदलावों की निगरानी आसान हो जाएगी। इससे किसान सिंचाई की बेहतर योजना बना सकेंगे, सूखे से पहले तैयारी कर सकेंगे, मौसम आधारित कृषि सलाह ले सकेंगे और पानी के संसाधनों का सही प्रबंधन कर सकेंगे। यह डेटा जिलों, कृषि समुदायों और योजनाकारों के लिए बहुत मददगार साबित होगा। किस तरह की मिलेगी मददइसरो ने बताया कि 100 मीटर रिजॉल्यूशन वाला यह लेवल-4 मिट्टी नमी डेटा राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र में तैयार किया जाएगा। फिर इसे भूनिधि पोर्टल के जरिए पूरे देश के किसानों, शोधकर्ताओं, सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों को आसानी से उपलब्ध कराया जाएगा। इस तरह निसार उपग्रह भारत की कृषि और जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत बनाने में बड़ा योगदान देगा। इस तरह इसरो लगातार बड़े-बड़े कारनामे कर रहा है।