GWALIOR THEFT CASE: 30 मिनट में सूना घर साफ: पड़ोसी के गृहप्रवेश में गईं मालकिन, 4 लाख उदा ले गया चोर

HIGHLIGHTS: 30 मिनट में सूने घर में दिनदहाड़े चोरी पड़ोसी के गृहप्रवेश में गई थीं मकान मालकिन सोने-चांदी के गहने, 1 लाख नकद और 3 मोबाइल चोरी करीब 4 लाख रुपए का नुकसान पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही GWALIOR THEFT CASE: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में दिनदहाड़े चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है। जहां पुरानी छावनी थाना क्षेत्र के लोहार मोहल्ला में महज 30 मिनट के भीतर चोरों ने सूने मकान की कुंडी खोलकर लाखों का माल पार कर दिया। घटना सोमवार दोपहर 2 बजे से 2:30 बजे के बीच की बताई जा रही है। मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत किया संतुलित विकास का आदर्श उदाहरण: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, जीडीपी में 11.14% वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,69,050 रुपये पड़ोसी के कार्यक्रम में गई थीं मालकिन मकान मालकिन 52 वर्षीय प्रेम बाई माहौर पड़ोस में नई बहू के गृहप्रवेश व मुंह दिखाई कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं। उनका घर सामने से दिख रहा था, इसलिए उन्होंने सिर्फ कुंडी लगाई और कार्यक्रम में चली गईं। जब आधे घंटे बाद लौटीं तो कुंडी खुली मिली और अंदर सामान बिखरा पड़ा था। OUTSOURCE EMPLOYEES PROTEST: 9 मांगों पर अड़े आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मी, 23–24 फरवरी को करेंगे हड़ताल गहने, नकदी और मोबाइल गायब चोरों ने कमरे में रखे बक्से और अलमारी खंगाल डाले। सोने-चांदी के गहने, 1 लाख रुपए नकद और तीन मोबाइल फोन चोरी कर लिए गए। कुल नुकसान करीब 4 लाख रुपए आंका गया है। परिवार के मुताबिक वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से की गई। विकास का सशक्त विजन : एक ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश पुलिस ने शुरू की जांच सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मुआयना किया। मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि संदिग्धों की पहचान हो सके।
मध्यप्रदेश ने प्रस्तुत किया संतुलित विकास का आदर्श उदाहरण: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, जीडीपी में 11.14% वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,69,050 रुपये

भोपाल । मध्यप्रदेश ने अपनी दूरदर्शी आर्थिक नीतियों और योजनाबद्ध विकास रणनीतियों के जरिए संतुलित और समावेशी विकास का आदर्श प्रस्तुत किया है। उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश करते हुए कहा कि राज्य योजनाबद्ध, संतुलित और परिणामोन्मुख विकास पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि कृषि, उद्योग, सेवा, सामाजिक क्षेत्र और वित्तीय अनुशासन हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति हुई है। देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत को विश्व की मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश पूरी क्षमता से योगदान दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य ने जो आर्थिक सुधारात्मक कदम उठाए, उनके परिणाम दिखाई देने लगे हैं। आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद GSDP प्रचलित भाव पर 16,69,750 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष के 15,02,428 करोड़ रुपये की तुलना में 11.14 प्रतिशत अधिक है। स्थिर 2011-12 भाव पर GSDP 7,81,911 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय प्रचलित भाव में 1,69,050 रुपये और स्थिर भाव में 76,971 रुपये तक बढ़ गई है। प्राथमिक क्षेत्र में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन 6,79,817 करोड़ रुपये रहा, जिसमें फसलें 30.17 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख रहीं। पशुधन, वानिकी, मत्स्य एवं खनन ने भी योगदान दिया। कृषि एवं ग्रामीण विकास के मोर्चे पर फसल उत्पादन में 7.66 प्रतिशत तथा खाद्यान्न उत्पादन में 14.68 प्रतिशत वृद्धि हुई। दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन और 72,975 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण से ग्रामीण आधार मजबूत हुआ। द्वितीयक क्षेत्र का GSVA 3,12,350 करोड़ रुपये रहा, जिसमें निर्माण, विनिर्माण और उपयोगी सेवाओं का योगदान प्रमुख रहा। इस क्षेत्र में 1,028 इकाइयों को 6,125 एकड़ भूमि आवंटित की गई, जिससे ₹1.17 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश और लगभग 1.7 लाख रोजगार सृजित हुए। वर्ष 2024-25 में MSME सहायता 2,162 करोड़ रुपये रही। स्टार्टअप्स और इनक्यूबेशन केंद्र सक्रिय हैं, जबकि CSR व्यय 600.47 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। तृतीयक क्षेत्र ने सर्वाधिक तेज वृद्धि दिखाई। वर्ष 2025-26 में इसका GSVA 5,85,588 करोड़ रुपये रहा, जिसमें व्यापार, वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट, होटल-रेस्टोरेंट और पर्यटन प्रमुख योगदानकर्ता रहे। 13.18 करोड़ पर्यटकों की आवक इस क्षेत्र की गति को दिखाती है। वित्तीय अनुशासन में सुधार भी दिखा; राजस्व 618 करोड़ रुपये बढ़ा और ऋण-GSDP अनुपात 31.3 प्रतिशत रहा। नगरीय विकास के तहत AMRUT 2.0 में 4,065 करोड़ रुपये का आवंटन और 1,134 परियोजनाओं की स्वीकृति दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत 8.75 लाख आवास पूरे हुए। स्वास्थ्य क्षेत्र में 34,112 करोड़ रुपये खर्च किए गए और मातृ मृत्यु दर घटकर 142 प्रति लाख जन्म रह गई। शिक्षा एवं कौशल विकास में बजट का 10.37 प्रतिशत आवंटित किया गया। कक्षा 1-5 में ड्रॉपआउट शून्य और कक्षा 6-8 में 6.3 प्रतिशत रह गया। तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 1,625 से बढ़कर 2,070 हो गई और 45,668 विद्यार्थियों को 500 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। देवड़ा ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित रही, लेकिन उद्योग और सेवा क्षेत्र में भी संतुलित विस्तार हुआ है, जिससे मध्यप्रदेश ने संतुलित विकास का आदर्श प्रस्तुत किया है।
OUTSOURCE EMPLOYEES PROTEST: 9 मांगों पर अड़े आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मी, 23–24 फरवरी को करेंगे हड़ताल

HIGHLIGHTS: 30,000 से अधिक आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी आंदोलन में शामिल 17–18 फरवरी: काली पट्टी बांधकर कार्य 23–24 फरवरी: दो दिवसीय सामूहिक हड़ताल नियमितीकरण या संविदा में विलय की मुख्य मांग वेतन सीधे खातों में देने और एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग OUTSOURCE EMPLOYEES PROTEST: ग्वालियर। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े 30 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी इन दिनों काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। बता दें कि मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर ग्वालियर सहित पूरे राज्य में यह प्रदर्शन किया जा रहा है। कर्मचारियों ने 17 और 18 फरवरी को भी काली पट्टी बांधकर काम करने का ऐलान किया है, जबकि 23 और 24 फरवरी को सामूहिक हड़ताल पर जाने की घोषणा भी की गयी है। विकास का सशक्त विजन : एक ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश किन संस्थानों पर पड़ेगा असर यह आंदोलन शासकीय मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, शहरी स्वास्थ्य केंद्रों, संजीवनी क्लिनिक और पोषण पुनर्वास केंद्रों में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में दो दिन की प्रस्तावित हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। चाहत पांडे ने ठुकराया सपना चौधरी का ऑफर, कहा रजत दलाल के पास दिल नहीं है, सोशल मीडिया पर ट्रेंड क्या हैं प्रमुख मांगें? संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को बिना शर्त विभाग में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए।साथ ही वैकल्पिक रूप से उन्हें संविदा में मर्ज करने की मांग भी रखी गई है। रश्मिका-विजय की शादी का कार्ड लीक? 26 फरवरी को वेडिंग, 4 मार्च को हैदराबाद में रिसेप्शन का दावा कर्मचारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर ठोस नीति बनाकर स्थायी समाधान निकाला जाए। साथ ही निजी आउटसोर्स एजेंसियों की वेतन अनियमितताओं पर रोक लगाने और सीधे खातों में वेतन भुगतान की व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई है।
विकास का सशक्त विजन : एक ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी मध्यप्रदेश आज एक ऐसे परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है, जहाँ विकास नारा न होकर धरातल पर उतरती हुई वास्तविकता बन चुका है। राज्य की आर्थिक गति, औद्योगिक विस्तार, कृषि समृद्धि और रोजगार सृजन की दिशा में हो रहे सतत प्रयासों ने इसे देश के तेजी से उभरते राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। इस परिवर्तन के केंद्र में हैं डॉ. मोहन यादव, जिनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट मानना है कि राज्य का विकास देश के समग्र विकास से जुड़ा हुआ है। वे अक्सर कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत नई ऊँचाइयों को छू रहा है और इसी दिशा में मध्यप्रदेश भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य ने एक व्यापक दृष्टिपत्र तैयार किया है, जिसमें आने वाले 25 वर्षों में प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया गया है। आर्थिक विकास की नई कहानीपिछले कुछ वर्षों में एक तरह से देखें तो जिस गति से आर्थिक प्रगति की है, वह प्रेरणादायक है। प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय वर्तमान में लगभग 1 लाख 55 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है, जिसे अगले 25 वर्षों में 22 लाख 50 हजार रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे व्यापक औद्योगिक निवेश, कृषि उत्पादन और सेवा क्षेत्र के विस्तार से हासिल किया जाएगा। राज्य सरकार ने औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने के लिए 18 नई औद्योगिक नीतियां लागू की हैं। इन नीतियों का उद्देश्य बड़े शहरों के साथ ही छोटे और दूरस्थ क्षेत्रों तक उद्योगों को पहुँचाना है। इसके लिए संभागीय स्तर पर अलग-अलग सेक्टरों पर केंद्रित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है। रोजगार सृजन और युवाओं में नया उत्साहमप्र में तेजी से बढ़ते उद्योगों और निवेश के कारण रोजगार के नए अवसर लगातार पैदा हो रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का युवा रोजगार देने वाला बने। इसी उद्देश्य से स्वरोजगार और युवा उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। यही कारण है कि वर्तमान में प्रदेश की बेरोजगारी दर मात्र 1 से 1.5 प्रतिशत के बीच रह गई है, जोकि देश के कई राज्यों की तुलना में काफी कम है। इसका सीधा संबंध उद्योगों के विस्तार, एमएसएमई सेक्टर की मजबूती और कृषि आधारित रोजगार से है। वस्तुत: यहां देखने में यह भी आ रहा है, जैसा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट मानना भी है कि एमएसएमई क्षेत्र राज्य के औद्योगिक विकास की बैकबोन है। छोटे और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर ही व्यापक स्तर पर रोजगार सृजित किया जा सकता है। यही कारण है कि राज्य सरकार एमएसएमई और लघु उद्योगों को विशेष अनुदान, कर में रियायत और आसान ऋण सुविधा उपलब्ध करा रही है। औद्योगिकरण को विशेष रूप से जनजाति और पिछड़े क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कटनी और शहडोल जैसे क्षेत्रों में माइनिंग सेक्टर में निवेश बढ़ा है, वहीं नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा क्षेत्र में इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स के निर्माण के लिए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। यही कारण है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में मिले लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से करीब 8 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि निवेशकों का भरोसा मध्यप्रदेश की नीतियों और वातावरण पर लगातार बढ़ रहा है। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूतीमध्यप्रदेश लंबे समय से कृषि क्षेत्र में अग्रणी रहा है और सरकार इसे और सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने का संकल्प लिया गया है। कृषि उत्पादन के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग और पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। सिंचाई के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले डेढ़ साल में ही 7.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ाया गया है और इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नर्मदा का जल क्षिप्रा नदी में पहुंचने से मालवा क्षेत्र के किसानों को विशेष लाभ मिला है। इसके साथ ही नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य देश में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। मुरैना में उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर एक बड़ा सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है, जिससे दोनों राज्यों को बिजली का लाभ मिलेगा। किसानों को सोलर पंप देकर ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मंदसौर के गांधी सागर बांध में पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट की स्थापना भी राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह सब प्रयास पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को भी गति दे रहे हैं। कौशल विकास और तकनीकी सशक्तिकरणऔद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ भविष्य में कुशल श्रमिकों की मांग भी बढ़ेगी। इसे ध्यान में रखते हुए शिक्षा नीति 2020 के तहत युवाओं के कौशल उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में आईटी सेंटर खोले जा रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है। सरकार तकनीक को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देख रही है और युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकासप्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी ठोस काम मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के नेतृत्व में होता हुआ इन दिनों बड़े स्तर पर देखा जा सकता है। प्रदेश के एक लाख से अधिक स्वसहायता समूहों को बाजार और तकनीकी सहायता दी जा रही है। उद्योगों में महिलाओं को 48 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है और उनके लिए विशेष औद्योगिक क्षेत्र बनाए जा रहे हैं। वहीं धार्मिक पर्यटन को नई गति देने के लिए होम-स्टे जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया गया है। इससे एक ओर पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल रही
चाहत पांडे ने ठुकराया सपना चौधरी का ऑफर, कहा रजत दलाल के पास दिल नहीं है, सोशल मीडिया पर ट्रेंड

नई दिल्ली । रियलिटी शो द 50 के लेटेस्ट एपिसोड ने दर्शकों को हंसने और रोमांचित होने का पूरा मौका दिया। इस बार चाहत पांडे और रजत दलाल की जोड़ी ने सबका ध्यान खींचा। टास्क के दौरान सपना चौधरी ने चाहत से कहा कि वो रजत के घर जाएँगी लेकिन चाहत ने तुरंत मना कर दिया। उनका कहना था मैंने रजत को बहुत पहले ही मना कर दिया था। रजत के पास दिल नहीं है। इस मजेदार पल के बाद सोशल मीडिया पर दोनों का नाम #Rahat के साथ ट्रेंड करने लगा। एपिसोड में कंटेस्टेंट्स को सिर पर किताबें रखकर शेल्फ तक जाना था। इस दौरान रजत ने चाहत की मदद की। दोनों को साथ देख कंटेस्टेंट अरबाज पटेल फैजू और दिग्विजय राठी ने हम आपके हैं कौन फिल्म का गाना वाह वाह राम जी जोड़ी क्या बनाई गाकर उन्हें चिढ़ाया। इसके बाद जब द लायन ने टीम बनाने का टास्क दिया तो रजत ने मजाक में अरबाज और निक्की तंबोली से कहा मेरी चाहत को डेंजर जोन में मत डालना। इन छोटे-छोटे पल ने शो में हंसी और मस्ती का माहौल बनाए रखा। एपिसोड की शुरुआत में प्रिंस नरूला और सिवेत तोमर को डेयर और नो डेयर टास्क दिया गया। उन्हें 75 लाख के इनाम के बदले तीन कंटेस्टेंट्स को अनसेफ जोन में भेजने का विकल्प मिला। प्रिंस और सिवेत ने फैजू रजत दलाल और अदनान खान को अनसेफ जोन में भेजा। इसके अलावा एपिसोड के अंत में चार वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स ने एंट्री ली जिससे खेल और रोमांच और बढ़ गया। स पूरे एपिसोड ने चाहत और रजत के बीच मजेदार बॉन्ड दिखाया और दर्शकों को ड्रामा हंसी और रोमांच का पूरा डोज दिया।
रश्मिका-विजय की शादी का कार्ड लीक? 26 फरवरी को वेडिंग, 4 मार्च को हैदराबाद में रिसेप्शन का दावा

नई दिल्ली । साउथ फिल्म इंडस्ट्री के चर्चित सितारे रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर दोनों की शादी का एक कथित कार्ड तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें शादी और रिसेप्शन की तारीख तक का जिक्र किया गया है। हालांकि, अब तक इस कार्ड की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वायरल कार्ड के मुताबिक, विजय देवरकोंडा की ओर से संदेश लिखा गया है कि वह और रश्मिका 26 फरवरी 2026 को एक निजी और इंटिमेट समारोह में शादी करने जा रहे हैं। इसके साथ ही 4 मार्च 2026 को हैदराबाद स्थित ताज कृष्णा में शाम 7 बजे से ग्रैंड रिसेप्शन आयोजित करने की बात कही गई है। कार्ड के शीर्ष पर विजय का नाम और उनके हस्ताक्षर होने का दावा किया जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह पारंपरिक शादी का कार्ड नहीं बल्कि उनका पर्सनल लेटरहेड है, जिसे खास मेहमानों को भेजा गया है। कार्ड में कथित तौर पर लिखा है कि “परिवार के आशीर्वाद से हम 26 फरवरी 2026 को एक छोटी और निजी सेरेमनी में विवाह कर रहे हैं।” साथ ही यह भी कहा गया है कि इस नए अध्याय की शुरुआत को वे उन लोगों के साथ सेलिब्रेट करना चाहते हैं, जो उनकी जिंदगी की इस यात्रा में साथ रहे हैं। लेकिन कपल की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए इसे फिलहाल अपुष्ट जानकारी ही माना जा रहा है। इससे पहले भी एक इन्फ्लुएंसर वीडियो में दावा किया गया था कि दोनों उदयपुर के एक हेरिटेज वेन्यू में शादी करने वाले हैं, लेकिन बाद में वह दावा गलत साबित हुआ। वहीं एक और रिपोर्ट में कहा गया था कि ओटीटी प्लेटफॉर्म Netflix ने उनकी शादी के अधिकारों के लिए कथित तौर पर 60 करोड़ रुपये का ऑफर दिया था, जिसे दोनों ने अपनी प्राइवेसी को प्राथमिकता देते हुए ठुकरा दिया। हालांकि, इस दावे की भी पुष्टि नहीं हो पाई है। रश्मिका और विजय के रिश्ते की चर्चा साल 2018 से होती रही है। माना जाता है कि फिल्म गीता गोविंदम और डियर कामरेड की शूटिंग के दौरान दोनों करीब आए। हालांकि, दोनों ने कभी भी सार्वजनिक रूप से अपने रिश्ते को स्वीकार नहीं किया। 2025 में उनकी सगाई की खबरों ने भी फैंस को उत्साहित किया था, लेकिन उस पर भी आधिकारिक मुहर नहीं लगी। फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वेडिंग कार्ड चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या यह सच में शादी का निमंत्रण है या फिर एक और अफवाह। जब तक रश्मिका और विजय खुद इस पर प्रतिक्रिया नहीं देते, तब तक इन खबरों को महज कयास ही माना जाएगा।
तुम्बाड 2 में खौफ का नया चेहरा कौन? अक्षय खन्ना और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के नाम पर तेज चर्चा

दिल्ली । साल 2018 में रिलीज हुई हॉरर-फैंटेसी फिल्म तुम्बाड ने अपनी अनोखी कहानी और विजुअल ट्रीटमेंट से दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई थी। थिएटर में सीमित दर्शक मिलने के बाद फिल्म को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जबरदस्त सराहना मिली और यह एक कल्ट फिल्म बन गई। अब इसके निर्माता और अभिनेता सोहम शाह इसके सीक्वल तुम्बाड 2 पर काम कर रहे हैं। फिल्म की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और इस बार सबसे ज्यादा चर्चा इसके विलेन को लेकर हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुम्बाड 2 की कहानी एक बेहद पावरफुल और रहस्यमयी खलनायक के इर्द-गिर्द घूमेगी। यही वजह है कि मेकर्स इस किरदार के लिए ऐसे अभिनेता की तलाश में हैं जो स्क्रीन पर गहराई और खौफ दोनों पैदा कर सके। सूत्रों की मानें तो इस रोल के लिए दो नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है अक्षय खन्ना और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी। बताया जा रहा है कि फिल्म का विलेन सिर्फ डरावना नहीं, बल्कि कई परतों वाला किरदार होगा, जिसकी मनोवैज्ञानिक जटिलताएं कहानी को आगे बढ़ाएंगी। अक्षय खन्ना अपनी इंटेंस स्क्रीन प्रेजेंस और संयमित अभिनय के लिए जाने जाते हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने ग्रे शेड्स वाले किरदारों से दर्शकों को प्रभावित किया है। वहीं नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अपने रॉ और यथार्थवादी अभिनय के लिए मशहूर हैं। वह नेगेटिव और जटिल भूमिकाओं को सहजता से निभाने में माहिर माने जाते हैं। ऐसे में दोनों में से किसी एक का चयन फिल्म के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। मेकर्स का मानना है कि तुम्बाड 2 का प्रभाव काफी हद तक इसके खलनायक पर निर्भर करेगा। पहली फिल्म में लालच और लोककथा का जो गहरा माहौल रचा गया था, उसे सीक्वल में और विस्तारित किया जाएगा। इसलिए विलेन का किरदार कहानी की आत्मा माना जा रहा है। प्रोडक्शन की बात करें तो इस बार फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है। इसे प्रोड्यूस कर रहे हैं जयंतीलाल गडा, जिनकी कंपनी पेन स्टूडियो कई बड़ी फिल्मों से जुड़ी रही है। इस सहयोग से साफ है कि तुम्बाड 2 को पहले से ज्यादा भव्य और व्यापक स्तर पर पेश करने की योजना है। फिलहाल मेकर्स की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। अब दर्शकों की उत्सुकता इस बात को लेकर है कि आखिर तुम्बाड 2 में खौफ का चेहरा कौन बनेगा अक्षय खन्ना की शांत लेकिन गहरी मौजूदगी या नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की तीखी और अनिश्चित ऊर्जा। जो भी इस भूमिका में आएगा, उससे दर्शकों को एक और यादगार हॉरर अनुभव की उम्मीद जरूर होगी।
गोपी बहू के फैसले ने बदल दी जिया मानेक की जिंदगी, डांस शो ने करियर को पहुंचाया झटका

नई दिल्ली । टीवी जगत की मशहूर एक्ट्रेस जिया मानेक, जिन्हें उनके शो साथ निभाना साथिया में निभाए गए गोपी बहू के किरदार से घर-घर में पसंद किया गया, आज भी फैंस के दिलों में खास जगह रखती हैं। उनका सिंपल लुक, मार्मिक एक्टिंग और संस्कारी बहू की छवि दर्शकों का दिल जीत गई। सोशल मीडिया पर आज भी उनके शो की क्लिप वायरल होती रहती हैं और फैंस nostalgically उनकी यादों में खो जाते हैं। लेकिन जिया मानेक के करियर में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उन्हें रातोंरात स्टार तो बना दिया, लेकिन बाद में उसी फैसले ने उनकी प्रोफेशनल जिंदगी को झटका भी दिया। 2010 में जिया ने स्टार प्लस के शो साथ निभाना साथिया में गोपी कपाड़िया का किरदार निभाया। मोदी परिवार की आज्ञाकारी और जिम्मेदार बहू के रूप में उनका किरदार दर्शकों का पसंदीदा बन गया और शो की टीआरपी लगातार ऊँचाई पर रही। लेकिन 2012 में जिया ने अचानक शो छोड़ने का फैसला कर सबको चौंका दिया। इसके पीछे कारण था उनका डांस रियलिटी शो झलक दिखला जा में हिस्सा लेना। जिया ने एक इंटरव्यू में बताया कि लंबे समय तक संस्कारी बहू की भूमिका निभाते-निभाते वह ऊब चुकी थीं और वह अपनी जिंदगी में थोड़ी सांसारिकता और रचनात्मक बदलाव चाहती थीं। मेकर्स ने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन जिया अड़ी रहीं और स्टेज पर अपने शानदार डांस के जरिए सुर्खियां बटोरीं। हालांकि, डांस शो में विवादों के चलते उन्हें डिसक्वालिफाई कर दिया गया। जिया के शो छोड़ने के बाद साथ निभाना साथिया की टीआरपी में भारी गिरावट आई। उनके किरदार की जगह देवोलीना भट्टाचार्जी को ऑफर किया गया, जिससे शो को नई जिंदगी मिली, लेकिन जिया के करियर को यह फैसला भारी पड़ा। इसके बाद उन्हें कोई दमदार या लगातार काम नहीं मिला और वह लंबे समय तक लाइमलाइट से दूर रहीं। जिया मानेक की कहानी इस बात का सबूत है कि एक सही समय पर लिया गया व्यक्तिगत या पेशेवर फैसला पूरी जिंदगी को बदल सकता है। आज उनके जन्मदिन पर फैंस उन्हें सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं दे रहे हैं और गोपी बहू वाले दिनों की याद कर उनके करियर की मिठास महसूस कर रहे हैं।टीवी जगत की मशहूर एक्ट्रेस जिया मानेक, जिन्हें उनके शो साथ निभाना साथिया में निभाए गए गोपी बहू के किरदार से घर-घर में पसंद किया गया, आज भी फैंस के दिलों में खास जगह रखती हैं। उनका सिंपल लुक, मार्मिक एक्टिंग और संस्कारी बहू की छवि दर्शकों का दिल जीत गई। सोशल मीडिया पर आज भी उनके शो की क्लिप वायरल होती रहती हैं और फैंस nostalgically उनकी यादों में खो जाते हैं। लेकिन जिया मानेक के करियर में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उन्हें रातोंरात स्टार तो बना दिया, लेकिन बाद में उसी फैसले ने उनकी प्रोफेशनल जिंदगी को झटका भी दिया। 2010 में जिया ने स्टार प्लस के शो साथ निभाना साथिया में गोपी कपाड़िया का किरदार निभाया। मोदी परिवार की आज्ञाकारी और जिम्मेदार बहू के रूप में उनका किरदार दर्शकों का पसंदीदा बन गया और शो की टीआरपी लगातार ऊँचाई पर रही। लेकिन 2012 में जिया ने अचानक शो छोड़ने का फैसला कर सबको चौंका दिया। इसके पीछे कारण था उनका डांस रियलिटी शो झलक दिखला जा में हिस्सा लेना। जिया ने एक इंटरव्यू में बताया कि लंबे समय तक संस्कारी बहू की भूमिका निभाते-निभाते वह ऊब चुकी थीं और वह अपनी जिंदगी में थोड़ी सांसारिकता और रचनात्मक बदलाव चाहती थीं। मेकर्स ने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन जिया अड़ी रहीं और स्टेज पर अपने शानदार डांस के जरिए सुर्खियां बटोरीं। हालांकि, डांस शो में विवादों के चलते उन्हें डिसक्वालिफाई कर दिया गया। जिया के शो छोड़ने के बाद साथ निभाना साथिया की टीआरपी में भारी गिरावट आई। उनके किरदार की जगह देवोलीना भट्टाचार्जी को ऑफर किया गया, जिससे शो को नई जिंदगी मिली, लेकिन जिया के करियर को यह फैसला भारी पड़ा। इसके बाद उन्हें कोई दमदार या लगातार काम नहीं मिला और वह लंबे समय तक लाइमलाइट से दूर रहीं। जिया मानेक की कहानी इस बात का सबूत है कि एक सही समय पर लिया गया व्यक्तिगत या पेशेवर फैसला पूरी जिंदगी को बदल सकता है। आज उनके जन्मदिन पर फैंस उन्हें सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं दे रहे हैं और गोपी बहू वाले दिनों की याद कर उनके करियर की मिठास महसूस कर रहे हैं।
आपकी कथनी-करनी में अंतर, आप कुर्सी पर बैठने के लायक नहीं, राहुल गांधी पर भड़कीं नवजोत कौर

नई दिल्ली। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन वहां पर सियासी हलचल अभी से तेज होती जा रही है. लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के लिए स्थिति खराब होती जा रही है. कुछ दिन पहले पार्टी छोड़ने वाली नवजोत कौर सिद्धू ने राहुल गांधी पर करारा प्रहार किया. नवजोत कौर ने अपने हमले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पर ‘जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटे’ होने और पंजाब इकाई में अंदरूनी भ्रष्टाचार को दूर करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है. कोयंबटूर में बोलते हुए, नवजोत कौर ने यह दावा किया कि राहुल गांधी की ओर से किसी तरह की कार्रवाई नहीं किए जाने की वजह से “पंजाब में कांग्रेस खत्म हो रही है.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके करीबी लोग चुनाव टिकट बेचने में व्यस्त हैं, जबकि उन्हें वहां की स्थिति का पता ही नहीं है. ‘आपका आदमी पंजाब के साथ न्याय नहीं कर रहा’ उन्होंने कहा, “राहुल गांधी अच्छी बातें करते हैं. वह समझदारी की बात करते हैं. लेकिन वह जो करते हैं और जो कहते हैं उसमें बहुत अंतर है. पिछले 8 महीनों से, मैं उनसे यह कहने के लिए समय मांग रही हूं कि आपके लोग, आपके अध्यक्ष या पंजाब में नियुक्त आपका आदमी पंजाब के साथ न्याय नहीं कर रहा है. वे लोग पंजाब में कांग्रेस को खत्म कर रहे हैं. मैं आपसे बस यह बताने के लिए मुलाकात करने का समय मांग रही हूं कि आपकी पार्टी पंजाब में खत्म हो रही है. उन्होंने पहले ही टिकट बेच दिए हैं.” नवजोत कौर ने आगे कहा, “अगर आपको मालूम नहीं है कि आपके नीचे क्या हो रहा है, तो मुझे इसका खेद है. ऐसे में आप उस कुर्सी के लायक नहीं हैं. आप जो कर रहे हैं उसके लिए आप ही जिम्मेदार हैं. हमने पंजाब के लिए सब कुछ छोड़ दिया, आपने हमसे 7 विभाग और मुझे सांसद बनाने के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री पद देने का वादा किया था. लेकिन आपने हमें कुछ नहीं दिया.” ‘आप पंजाब में जीत हासिल नहीं करने जा रहे’ उन्होंने आगे कहा, “आपने हमें स्थानीय निकाय और पर्यटन विभाग दिया, और आप चाहते थे कि वे मुख्यमंत्री के हिसाब से चलें. जब आपके अपने लोग ही भ्रष्ट हैं तो आप भ्रष्टाचार के खिलाफ क्यों बात कर रहे हैं? और आप अपने आस-पास भ्रष्ट लोगों को ही पसंद कर रहे हैं, जबकि आपके आस-पास के लोग पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं.” राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने कहा, “आपके पास उन ईमानदार लोगों से मिलने के लिए वक्त नहीं है जो आकर आपको बताना चाहते हैं कि यह सब गलत हो रहा है, आप पंजाब नहीं जीतने वाले हैं.” उन्होंने आगे कहा, “शायद आपने उन्हें यह गिफ्ट में दे दिया है. वह असल में जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रहे हैं. मुझे ऐसा लगता है कि जमीन से जुड़े रहना बहुत ही जरूरी है. ग्राउंड ज़ीरो पर क्या हो रहा है, यह किसी के लिए भी बहुत जरूरी है.” कांग्रेस नेता को नसीहत देते हुए नवजोत कौर ने कहा, “आपको हकीकत जानने के लिए ग्राउंड रियलिटी से जुड़े रहना होगा. आप सपनों की दुनिया में नहीं जी सकते.” पीएम नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा से ठीक पहले नवजोत कौर ने 30 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. हालांकि पार्टी के खिलाफ अपने बागी तेवर की वजह से उन्हें कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था.
UP Politics: पल्लवी पटेल के साथ अलायंस फेल, अब बसपा का मिलेगा साथ! यूपी में क्या होगी ओवैसी की पॉलिटिक्स?

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए एक साल से भी कम का वक्त बचा है. इस बीच राज्य में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं. सपा और कांग्रेस जहां भारतीय राष्ट्रीय समावेशी विकास गठबंधन यानी इंडिया अलायंस के परचम तले चुनाव लड़ सकते हैं तो वहीं बीजेपी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और निर्बल भारतीय शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के साथ मैदान में उतरेगी. उधर, बसपा अभी भी अकेले ही मैदान में उतरने का मूड बना रही है. इन सबके बीच हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी यूपी चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरने की तैयारी कर रही है. अगर पार्टी चुनाव में उतरती है तो यह उसका चौथा चुनाव होगा. वर्ष 2017, 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद एआईएमआईएम ने कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर एक मोर्चा बनाया था. यह मोर्चा सपा चीफ के पीडीए फॉर्मूले के मुकाबले के तौर पर पीडीएम बनाया गया था. जिसमें पिछड़ा, दलित मुसलमान की बात की गई थी. इस मोर्चे ने 25 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे. हालांकि इसमें AIMIM का एक भी प्रत्याशी नहीं था. अब 2027 के चुनाव के लिए दावा है कि एआईएमआईएम, बसपा के साथ अलायंस कर सकती है. ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि राज्य में गठबंधन करने के लिए आतुर AIMIM का इस संदर्भ में पुराना इतिहास क्या रहा है? इसके साथ ही यह भी बात हो रही है कि जो एआईएमआईएम, बसपा के हाथी की सवारी कर राज्य में एंट्री की कोशिश में उसकी क्या स्थिति है? बता दें AIMIM ने वर्ष 2017 के यूपी विधानसभा का चुनाव 38 सीटों पर लड़ा था. 37 सीटों पर पार्टी की जमानत जब्त हो गई थी.इस चुनाव में AIMIM को 2,04,142 वोट मिले थे. AIMIM ने जिन सीटों पर चुनाव लड़ा था, वो मुख्यतौर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल सीटें थीं. उधर, 2022 में एआईएमआईएम ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे सिर्फ .49% वोट मिले थे. 2024 के चुनाव कितना कारगर रहा ओवैसी का अलायंस? 2024 चुनाव में पीडीएम मोर्चा बनाने वाली एआईएमआईएम ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा लेकिन उसके साथ का फायदा अन्य दल को भी नहीं मिला. इस चुनाव में अपना दल कमेरावादी की नेता पल्लवी पटेल ने प्रत्याशी उतारे और उन्हें कुल मतदान में से सिर्फ .4 फीसदी वोट मिले और नतीजा सिफर रहा. ऐसे में यह स्पष्ट है कि एआईएमआईएम के साथ का लाभ अपना दल कमेरावादी को नहीं हुआ. बसपा के साथ कितना फिट होंगे ओवैसी?वहीं बसपा की बात करें तो लोकसभा चुनाव में उसे कुल वोट का 9.46 फीसदी मत मिले थे. हालांकि लोकसभा में उसका खाता नहीं खुला था. विधानसभा में भी बसपा का सिर्फ 1 ही विधायक है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर एआईएमआईएम और बसपा साथ आते भी हैं तब भी किसी बड़े जादू की उम्मीद फिलहाल नहीं है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपी में एआईएमआईएम की आगामी रणनीति क्या होगी और वह धरातल पर कितनी मजबूती के साथ उतरेगी.