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दिनेशपुर में रिश्तों की बलि: जमीन के लालच और आपसी कलह में बहू ने मायके वालों के साथ मिलकर ली सास की जान

नई दिल्ली । दिनेशपुर उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में स्थित दिनेशपुर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक ७० वर्षीय बुजुर्ग महिला, संध्या शाह की उनकी अपनी ही बहू और उसके मायके वालों ने मिलकर निर्मम हत्या कर दी। संपत्ति के लालच और घरेलू क्लेश के चलते हुई इस खूनी वारदात ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बहू समेत छह लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है। बच्ची की बीमारी बनी बहाना, जमीन पर था निशाना वारदात की जड़ें पिछले कई सालों से चल रहे पारिवारिक विवाद में दबी हुई थीं। घटना की रात मंगलवार को जब प्रसन्नजीत शाह की छोटी बेटी को बुखार आया, तो उसने अपनी पत्नी सुरभि पर बच्ची की देखभाल में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। यह छोटी सी बहस जल्द ही उग्र हो गई। दरअसल, असली विवाद प्रसन्नजीत द्वारा खरीदे गए एक प्लॉट और पैतृक संपत्ति के पैसों को लेकर था। पत्नी सुरभि चाहती थी कि संपत्ति उसके नाम पर हो, और इसी बात को लेकर घर में पिछले तीन-चार वर्षों से युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई थी। कमरे में कैद कर दी दर्दनाक मौत बहस के दौरान सुरभि ने अपने मायके वालों को फोन कर मौके पर बुला लिया। आरोप है कि सुरभि की माँ सुजाता, बहन दिशा और भाई अमन अपने अन्य साथियों के साथ वहाँ पहुँचे और तांडव शुरू कर दिया। हमलावरों ने प्रसन्नजीत के साथ मारपीट की और ७० वर्षीय बुजुर्ग संध्या शाह को एक कमरे में बंद कर दिया। बंद कमरे के भीतर बुजुर्ग महिला को बेरहमी से पीटा गया। जब तक पड़ोसियों ने शोर सुनकर हस्तक्षेप किया और पुलिस को सूचना दी, तब तक संध्या शाह मरणासन्न स्थिति में पहुँच चुकी थीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।सख्त कार्रवाई की मांग और पुलिसिया जांच घटना के बाद जिले के वरिष्ठ अधिकारी, एसएसपी अजय गणपति और एसपी सिटी उत्तम सिंह नेगी ने फॉरेंसिक टीम के साथ मौके का मुआयना किया। मृतका की बेटी रानी ने पुलिस के सामने बिलखते हुए आरोपियों के लिए कड़ी सजा की मांग की है। पुलिस ने प्रसन्नजीत की तहरीर पर बहू सुरभि, सास सुजाता, साली दिशा और साले अमन समेत कुल छह लोगों पर हत्या धारा ३०२ का मामला दर्ज किया है। फिलहाल कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और पूरे वार्ड में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। वारदात का संक्षिप्त विवरण:विवरणप्रमुख जानकारीस्थानवार्ड चार, दिनेशपुर, ऊधमसिंह नगर उत्तराखंड मृतकसंध्या शाह उम्र 70 वर्ष मुख्य आरोपीबहू सुरभि शाह और उसके मायके वाले कुल 6 नामजद विवाद की वजहसंपत्ति का लालच और बच्ची की बीमारी पर कहासुनीपुलिस कार्रवाईहत्या का केस दर्ज, फॉरेंसिक साक्ष्य संकलित, आरोपी हिरासत में

घर से निकला है… लौटकर नहीं आना चाहिए दतिया में पत्नी निकली पति की हत्या की मास्टरमाइंड, प्रेम प्रसंग ने ली जान

दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया जिले में सामने आए एक सनसनीखेज हत्याकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। गोराघाट थाना क्षेत्र में सिंध नदी पुल के नीचे झाड़ियों में मिले एक अज्ञात युवक के शव की गुत्थी को पुलिस ने दस दिन की गहन जांच के बाद सुलझा लिया है। जो मामला शुरुआत में अंधे कत्ल जैसा प्रतीत हो रहा था, वह दरअसल प्रेम प्रसंग में रची गई एक सुनियोजित साजिश निकला, जिसकी मास्टरमाइंड मृतक की पत्नी ही थी। घटना 6 फरवरी की है, जब हाईवे किनारे पुल के नीचे करीब 35 वर्षीय युवक का शव बरामद हुआ। शव की स्थिति संदिग्ध थी और प्रथम दृष्टया हत्या की आशंका जताई गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई। पहचान न होने पर पुलिस ने नियमानुसार शव को दफना दिया। दो दिन बाद परिजन अपने लापता सदस्य की तलाश में दतिया पहुंचे और शव की पहचान झांसी निवासी हंसराज वर्मा के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने शव को निकलवाकर परिजनों को सौंप दिया और जांच को नई दिशा मिली। पहचान होते ही पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और परिजनों के बयान खंगालने शुरू किए। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मृतक की पत्नी बबीता वर्मा और उसके रिश्ते में लगने वाले देवर हेमंत आर्य के बीच लंबे समय से बातचीत हो रही थी। फोन कॉल्स का सिलसिला धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गया। हंसराज पुराने ऑयल का कारोबार करता था और लेनदेन पत्नी के फोनपे खाते से होता था, जिससे दोनों के बीच संपर्क और गहरा हो गया। पूछताछ में सामने आया कि वारदात वाले दिन हंसराज ग्वालियर जाने के लिए घर से निकला था। उसी दौरान बबीता ने अपने प्रेमी हेमंत को फोन कर कथित तौर पर कहा वह घर से निकला है, लौटकर नहीं आना चाहिए, यह तुम्हारी जिम्मेदारी है। यही वह पल था जब साजिश ने अंतिम रूप लिया। हेमंत ने अपने साथी अनिल खटीक को साथ लिया। दोनों ने हंसराज से मुलाकात की, उसे शराब पिलाई और झांसी छोड़ने का बहाना बनाकर बाइक पर साथ ले गए। डबरा और गोराघाट पुल के पास दोबारा शराब पिलाने के बाद सुनसान झाड़ियों में मफलर से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और शव फेंककर फरार हो गए। कॉल डिटेल में हत्या से पहले और बाद में बबीता और हेमंत के बीच लगातार संपर्क के सबूत मिले। मोबाइल लोकेशन, रेलवे टिकट और गवाहों के बयानों ने पुलिस को साजिश की हर कड़ी जोड़ने में मदद की। आखिरकार 17 फरवरी को पुलिस ने हेमंत आर्य (33), अनिल खटीक (35) और बबीता वर्मा (32) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त मफलर, शराब की बोतलें, मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल भी जब्त कर ली गईं। प्रेम संबंधों की आड़ में रची गई इस खौफनाक साजिश ने न सिर्फ एक व्यक्ति की जान ले ली, बल्कि एक परिवार को भी उजाड़ दिया। दतिया का यह मामला रिश्तों में विश्वासघात और लालच की ऐसी कहानी बन गया है, जिसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।

यादव जी की लव स्टोरी’ पर बवाल, रिलीज से पहले जाति और ‘लव जिहाद’ के आरोपों में घिरी फिल्म

नई दिल्ली । 27 फरवरी को रिलीज के लिए तैयार फिल्म यादव जी की लव स्टोरी सिनेमाघरों तक पहुंचने से पहले ही विवादों के भंवर में फंस गई है। फिल्म की कहानी एक यादव समाज की लड़की और एक मुस्लिम लड़के की प्रेम कहानी पर आधारित बताई जा रही है, जिसे लेकर यादव समाज के कुछ संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि फिल्म उनकी जातीय पहचान को गलत संदर्भ में पेश करती है और समाज में भ्रम फैलाने की आशंका पैदा करती है। कुछ लोगों ने इसे लव जिहाद जैसे संवेदनशील मुद्दे से जोड़ते हुए आरोप लगाया है कि फिल्म एक खास नैरेटिव को बढ़ावा देती है। विरोध करने वाले समूहों ने चेतावनी दी है कि यदि फिल्म को रिलीज किया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। फिल्म के मेकर्स की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विवाद के कारण यह फिल्म चर्चा के केंद्र में आ गई है। भारतीय सिनेमा में यह कोई नया घटनाक्रम नहीं है। जब भी कहानी जाति, धर्म या सामाजिक पहचान जैसे विषयों को छूती है, तो संवेदनशीलता और विरोध साथ-साथ चलते हैं। इससे पहले भी कई फिल्में इसी तरह के आरोपों और प्रदर्शनों का सामना कर चुकी हैं। पद्मावत इसका प्रमुख उदाहरण है। फिल्म के निर्माण के दौरान ही राजपूत संगठनों और करणी सेना ने यह आरोप लगाया था कि रानी पद्मावती के चरित्र को गलत ढंग से चित्रित किया जाएगा और ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की जाएगी। विरोध इतना तीव्र हुआ कि सेट पर तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं और बाद में फिल्म में कुछ बदलाव भी किए गए। इसी तरह सैराट ने भी अंतरजातीय प्रेम कहानी को पर्दे पर उतारा, जिसमें एक दलित लड़के और मराठा लड़की के रिश्ते को दिखाया गया था। इस पर कुछ मराठा संगठनों ने आपत्ति जताई और प्रदर्शन किए। आर्टिकल 15 ने जाति आधारित भेदभाव और सामाजिक अन्याय के मुद्दे को उठाया था। फिल्म को सराहना के साथ-साथ विरोध भी झेलना पड़ा, क्योंकि कुछ संगठनों का मानना था कि इसमें समाज के एक वर्ग की छवि नकारात्मक रूप में पेश की गई है। वहीं जय भीम को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ, जब वन्नियार समुदाय के कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि फिल्म में उनके समाज को गलत तरीके से दर्शाया गया है। मामला कानूनी नोटिस और सार्वजनिक बहस तक पहुंच गया। महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के जीवन पर आधारित फुले को भी महाराष्ट्र में कुछ ब्राह्मण संगठनों के ोविरोध का सामना करना पड़ा था। आरोप लगाया गया कि फिल्म इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है और एक समुदाय विशेष को नकारात्मक रूप में दिखाती है। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि सिनेमा जब सामाजिक यथार्थ को छूता है, तो वह सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रहता, बल्कि बहस और टकराव का कारण भी बन जाता है। यादव जी की लव स्टोरी का भविष्य अब इस बात पर निर्भर करेगा कि मेकर्स और विरोध कर रहे समूहों के बीच संवाद स्थापित होता है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि फिल्म ने रिलीज से पहले ही समाज और सिनेमा के रिश्ते पर एक नई बहस छेड़ दी है।

MP बजट सत्र: इंदौर भागीरथपुरा कांड पर विपक्ष का हंगामा, डिप्टी सीएम और मंत्री विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग

भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को चौथे दिन भी हंगामेदार रहा। कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने थाली बजाकर विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बजट को आम जनता के लिए “ख्याली पुलाव” बताया और सदन में जोरदार हंगामा किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने इंदौर भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर आक्रोश जताया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे हादसा नहीं बल्कि हत्या बताया और संबंधित मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, इंदौर सांसद शंकर लालवानी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के इस्तीफे की मांग की। इसके बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि 21 से 29 दिसंबर के बीच डायरिया फैलने के बाद स्थिति गंभीर हुई थी और 22 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की राहत दी गई। इसके बावजूद विपक्ष ने मृतकों की संख्या 35 बताते हुए सभी परिवारों को मुआवजा देने और मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार की गंभीर कार्रवाई का उल्लेख किया और आईएएस अधिकारी के निलंबन की जानकारी दी। सदन में अन्य मुद्दों पर भी हंगामा हुआ। अनूपपुर में फीस के दुरुपयोग का मामला उठाया गया। विपक्ष के विरोध के बीच डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने सरकार का पक्ष रखा। बजट सत्र के पहले तीन दिन भी विवादों और हंगामेदार घटनाओं से भरे रहे। पहले दिन राज्यपाल मंगु भाई पटेल का अभिभाषण और वंदे मातरम् के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया। दूसरे दिन वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया, जिसकी चर्चा 23 फरवरी को होगी। तीसरे दिन 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए के बजट पर भाषण हुआ, जिसमें 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री और 15,000 शिक्षकों की भर्ती जैसे ऐलान शामिल थे। बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। इस दौरान कुल 3,478 प्रश्न, 236 ध्यानाकर्षण, 10 स्थगन प्रस्ताव, 41 अशासकीय संकल्प और शून्य काल में 83 सवाल विधानसभा में रखे जाएंगे।

उज्जैन सिंहस्थ 2028: 3,000 करोड़ का बजट, 128 प्रोजेक्ट में से कई अधूरे, प्रशासन पर समय की चुनौती

भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए अब तक कुल 5,570 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है, जिसमें हाल ही में पेश 3,060 करोड़ रुपए की राशि पिछले बजट की तुलना में 1,055 करोड़ अधिक है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के अनुसार, सिंहस्थ आयोजन के लिए पहले से ही 13,851 करोड़ के प्रोजेक्ट स्वीकृत हैं और विभिन्न विभागों में काम जारी है। हालांकि, आर्थिक सर्वेक्षण और विभागीय समीक्षा में सामने आया है कि घाटों की मरम्मत, पुल और सड़कों के अपग्रेडेशन, पेयजल और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं के काम अभी भी अधूरे हैं। सिंहस्थ आयोजन के लिए बनी कैबिनेट सब-कमेटी ने 128 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है, जिनकी अनुमानित लागत 13,752 करोड़ है। इनमें से 42 प्रोजेक्ट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के जिम्मे हैं, लेकिन केवल 33 प्रोजेक्ट पर ही धरातल पर काम शुरू हो पाया है। शेष 26 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अभी फाइलों में अटके हैं। इन लंबित योजनाओं में सड़क चौड़ीकरण, नए पुलों का निर्माण, घाटों का विस्तार, ट्रैफिक सुधार और श्रद्धालुओं के लिए आवास जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। जल और शिप्रा नदी का शुद्धिकरण राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। जल संसाधन विभाग पांच बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिनमें कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट ₹914 करोड़ केवल 52% पूरा हुआ है। उज्जैन और देवास में बैराज निर्माण, शिप्रा को प्रवाहमान बनाने और घाट निर्माण के प्रोजेक्ट भी केवल 15% से 62% तक ही पूरे हुए हैं। इन प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन 2027-2028 तक है, इसलिए प्रशासन पर समय की बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में प्रोजेक्ट की समीक्षा कर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने पिछले तीन वर्षों से केंद्र से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है और उम्मीद जताई है कि 6,000-7,000 करोड़ रुपए की केंद्र सहायता किश्तों में उपलब्ध हो सकेगी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग पर सिंहस्थ तैयारियों का सबसे बड़ा जिम्मा है। विभाग के 42 प्रोजेक्ट में से 33 पर काम चल रहा है, लेकिन 9 प्रोजेक्ट अभी अधूरे हैं। पेयजल, सीवरेज और घाट निर्माण जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी, समय की कमी और भारी वित्तीय बोझ प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। सिंहस्थ की सफलता राज्य की विकास योजनाओं और प्रशासनिक क्षमता का परीक्षण होगी। हालांकि बजट और परियोजनाओं की संख्या प्रभावशाली दिखती है, लेकिन धरातल पर तेजी से काम न होने से आयोजन में संभावित जोखिम बरकरार हैं।

विजयवर्गीय ने देवड़ा को कहा ‘छोटे कद का वित्त मंत्री’, इंदौर में महापौर को महिला ने सुनाई खरी-खोटी, धीरेंद्र शास्त्री ने ड्रोन

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं में रंग-बिरंगे किस्से लगातार सामने आ रहे हैं। विधानसभा में बजट पेश होने के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने सहयोगी मंत्री जगदीश देवड़ा को छोटे कद का वित्त मंत्री कहकर संबोधित किया। उन्होंने देवड़ा जी की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से करते हुए कहा कि ये छठी बार सदन में बजट पेश कर रहे हैं और उनका सम्मान करना चाहिए। विजयवर्गीय की इस टिप्पणी ने सदन में मौजूद लोगों को हैरान कर दिया, लेकिन माहौल को हल्का और खुशनुमा बना दिया। इसके बाद वित्त मंत्री ने मुस्कान के साथ अपना बजट भाषण शुरू किया। इंदौर में संकल्प से समाधान कार्यक्रम के दौरान महापौर पुष्यमित्र भार्गव को एक महिला ने सीधे माइक पर खरी-खोटी सुनाई। महिला ने गड्ढों और स्थानीय समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि जनता परेशान है और प्रशासन सक्रिय नहीं है। महापौर ने जवाब दिया कि दौरे का असर होता है, लेकिन महिला ने कहा कि नाम ही काफी होना चाहिए और जनता के सामने रूबरू होकर समस्याओं को सुनना चाहिए। महिला की तटस्थ और सटीक बातों पर वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन किया, जबकि महापौर असहज नजर आए। शिव बारात के दौरान श्योपुर से कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल की हर्ष फायरिंग मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर दी है। विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं ने उनके खिलाफ दबाव बनाया। उन्होंने बताया कि फायरिंग के लिए इस्तेमाल किया गया हथियार केवल आवाज करने वाला था। कांग्रेस पार्टी अब FIR को निरस्त करने की मांग पर अड़ी हुई है और मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। वहीं, पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने बागेश्वर धाम में कन्या विवाह समारोह के दौरान मंच पर फूल बरसाने वाले ड्रोन को देखकर नाराजगी जताई। उन्होंने मंच से फटकार लगाते हुए कहा कि ड्रोन को बंद किया जाए, नहीं तो वह स्वयं इसे पकड़ लेंगे। उनके इस अंदाज ने समारोह स्थल पर हल्का-फुल्का माहौल बना दिया। इस बीच, पूर्व मंत्री राघव जी भाई ने विदिशा में भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी को सार्वजनिक किया और कहा कि पार्टी अब पहले जैसी व्यवस्थित नहीं रही। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की नसीहत दी। मध्य प्रदेश में राजनीतिक हलचल, सार्वजनिक चेतावनी और धार्मिक आयोजनों में सक्रियता एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई है। विधानसभा, जनता और पंडितों के मंच पर उठ रहे विभिन्न रंगीन मुद्दे राज्य में घटनाओं के विविध आयाम को दर्शा रहे हैं।

भोपाल-उज्जैन समेत 25 जिलों में बारिश और तेज आंधी, श्योपुर में 1 इंच पानी गिरा, फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। फरवरी के महीने में सक्रिय हुए नए सिस्टम के कारण प्रदेश में तीसरी बार बारिश और ओलों का दौर शुरू हो गया। पिछले 24 घंटों में भोपाल, उज्जैन समेत 25 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें धार, श्योपुर, शिवपुरी, इंदौर, आगर-मालवा, राजगढ़, खरगोन, मुरैना, सीहोर, दतिया, ग्वालियर, गुना, रतलाम, बड़वानी, मंदसौर, शाजापुर, देवास, विदिशा, अशोकनगर, टीकमगढ़ और निवाड़ी छतरपुर जिले शामिल हैं। श्योपुर के नालछा में सबसे ज्यादा 1 इंच पानी गिरा। वहीं तेज आंधी की रफ्तार 63 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंची। भोपाल, सीहोर और आगर में 37 किलोमीटर, शाजापुर में 35 किलोमीटर, गुना में 31 किलोमीटर, राजगढ़ में 30 किलोमीटर और धार, नीमच, शिवपुरी में 28 किलोमीटर प्रति घंटे की गति दर्ज की गई। इस बेमौसम बारिश और तेज आंधी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई जिलों में खड़ी फसलें आड़ी हो गई हैं, जिससे दानों की गुणवत्ता और पैदावार पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि से भी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित फसलों का समय पर सर्वे और उचित मुआवजा किसानों की राहत के लिए जरूरी है। मौसम का हाल बताते हुए मौसम विभाग ने कहा कि प्रदेश में खजुराहो सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा राजगढ़ 10.0°C और पचमढ़ी 10.2°C में भी कड़ाके की ठंड महसूस की गई। प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने किसानों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस संकट की घड़ी में उनके साथ है। उन्होंने कहा कि बारिश और ओलों से प्रभावित क्षेत्रों में फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए अधिकारियों को तुरंत सर्वे का निर्देश दे दिया गया है। प्रभावित खेतों का दौरा कर वास्तविक नुकसान का आंकड़ा तैयार किया जाएगा, ताकि किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जा सके। कृषि मंत्री ने कहा, “जहां-जहां भी ओलावृष्टि और तेज बारिश की वजह से फसलें आड़ी हुई हैं या दाने खराब हुए हैं, वहां समय पर मुआवजा प्रदान किया जाएगा।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सर्वे का काम पूरी पारदर्शिता और तेजी के साथ पूरा किया जाए, ताकि किसानों को राहत राशि में किसी भी तरह की देरी न हो। प्रदेश में मौसम विभाग ने भविष्य के 48 घंटों में भी अनियमित वर्षा और आंधी की संभावना जताई है, जिससे किसानों और आम जनता को सतर्क रहने की जरूरत है। इस बीच प्रशासन और कृषि विभाग सतत निगरानी रखकर किसानों की मदद करने के लिए सक्रिय हैं।

19 फरवरी महाकाल भस्म आरती: त्रिपुंड-त्रिनेत्र और ॐ के साथ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार

उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि गुरुवार को सुबह 4 बजे कपाट खोले गए और भस्म आरती का आयोजन धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार विशेष विधि-विधान के साथ किया गया। मंदिर के गर्भगृह में पुजारियों ने सभी देवी-देवताओं का पूजन और जलाभिषेक के बाद पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से भगवान का अभिषेक किया। भगवान महाकाल का भांग और चंदन से राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके साथ ही शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की माला अर्पित की गई, जिससे बाबा महाकाल का अलंकरण और भी भव्य और मनोहारी दिखाई दिया। सुबह-सुबह सैकड़ों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद मांगा। श्रद्धालु बाबा महाकाल की जयकारे लगाते रहे, जिससे पूरा मंदिर जयकारों की गूंज से गुंजायमान हो उठा। मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ सुबह से ही रही और हर कोई भक्ति और श्रद्धा भाव से बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहा था। भस्म आरती के दौरान मंदिर में शांतिपूर्ण वातावरण, मंत्रोच्चार और दिव्य गंध ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

वर्षा और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के हित में तत्पर है मध्यप्रदेश सरकार: कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और किसी भी परिस्थिति में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हुई वर्षा और ओलावृष्टि के कारण फसलों को हुए नुकसान का शीघ्र निरीक्षण और राहत वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। कृषि मंत्री कंषाना ने बताया कि जिन जिलों में भारी वर्षा और ओलावृष्टि की घटनाएं हुई हैं, वहां तत्काल प्रभाव से सर्वे और नुकसान का आकलन करने के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी सर्वे कार्य पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पूर्ण किए जाएं, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर राहत राशि प्रदान की जा सके। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी किसान को नुकसान की स्थिति में अकेला नहीं छोड़ेगी और सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग करें। उनका कहना था कि राज्य सरकार की प्राथमिकता किसानों को शीघ्र राहत प्रदान करना और उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है। कंषाना ने यह भी बताया कि कृषि विभाग लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और आवश्यकतानुसार फसल सुरक्षा उपायों को लागू किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और नुकसान कम करने के लिए दीर्घकालीन रणनीतियों पर भी काम किया जा रहा है। मंत्री कंषाना ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए निरंतर कदम उठाती रहेगी और हर आवश्यक पहल में किसानों का समर्थन करेगी। उनका मानना है कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और विकास सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

: मध्यप्रदेश क्लाइमेट चेंज में बना लीडर, नवकरणीय ऊर्जा में निवेशकों के लिए खुले अवसर

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई क्लाइमेट वीक-2026 में मध्यप्रदेश के नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि क्लाइमेट चेंज के खिलाफ संघर्ष में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सतत् विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना ही प्रगति की दिशा है। डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश 24×7 बिजली आपूर्ति में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है और नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेशकों को हरसंभव सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश ने जलवायु समाधान, हरित विकास और ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में कई ठोस कदम उठाए हैं। प्रदेश में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट है, जिसमें किसी नागरिक को विस्थापित नहीं किया गया और ऊर्जा उत्पादन भी शुरू हो चुका है। सांची को देश की पहली सोलर सिटी बनाया गया है और सभी शासकीय भवनों पर सोलर रूफटॉप लगाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। डॉ. यादव ने एमओयू के तहत सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन के साथ नवकरणीय ऊर्जा विकास को और तेज करने की बात कही। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 300 मेगावाट 4 घंटे और 6 घंटे सौर-सह एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं के साथ 24×7 नवकरणीय ऊर्जा बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अलावा सौर, पवन, बायोफ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन सहित सभी नवकरणीय तकनीकों में वित्तीय और नीतिगत प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों में मध्यप्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, सौर ऊर्जा में 48 प्रतिशत और पवन ऊर्जा में 19 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। परियोजनाओं के माध्यम से पड़ोसी राज्यों और भारतीय रेलवे को भी स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। डॉ. यादव ने निवेशकों से प्रदेश की तेजी से बदलती ऊर्जा यात्रा में शामिल होने का आव्हान किया, जिससे जलवायु संतुलन के साथ व्यापार-व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके। कार्यक्रम में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने मध्यप्रदेश में बैटरी स्टोरेज आधारित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। आईएफसी के क्षेत्रीय निदेशक इमाद एन. फखौरी और सिकोया क्लाइमेट फाउंडेशन की निदेशक सीमा पॉल ने भी मध्यप्रदेश के नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की नेतृत्व क्षमता और वैश्विक स्तर पर इसके महत्व को सराहा। डॉ. यादव ने निष्कर्ष निकाला कि ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करते हुए मध्यप्रदेश और भारत के उज्जवल भविष्य का निर्माण करना अब सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि वास्तविकता बन रही है।