एक लाख 81 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कराया पंजीयन
भोपाल। मध्य प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को जानकारी दी है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक एक लाख 81 हजार 793 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। पंजीयन की कार्यवाही 7 मार्च तक जारी रहेगी।उन्होंने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन जरूर करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है।मंत्री राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 27 हजार 175, उज्जैन में 73 हजार 398, ग्वालियर में 3358, चम्बल में 1449, जबलपुर में 12 हजार 342, नर्मदापुरम में 11 हजार 698, भोपाल में 41 हजार 268, रीवा में 3242, शहडोल में 726 और सागर संभाग में 7137 किसानों ने पंजीयन कराया है।पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्थापंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है।पंजीयन की सशुल्क व्यवस्थापंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है।किसानों को करें एसएमएसखाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं।
रोहित शर्मा का 'विराट' रिकॉर्ड ध्वस्त: मिचेल मार्श ने टी20 विश्व कप 2026 में मचाया कोहराम, पावरप्ले के बने नए सुल्तान!

नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज के आखिरी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान मिचेल मार्श ने अपनी बल्लेबाजी से ऐसा गदर मचाया कि क्रिकेट की दुनिया दंग रह गई। ओमान के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में मार्श का बल्ला नहीं बल्कि आग बरस रही थी। उनकी इस तूफानी पारी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने न केवल ओमान को एकतरफा अंदाज में मात दी बल्कि मार्श ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और ‘हिटमैन’ के नाम से मशहूर रोहित शर्मा का एक बड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड भी मटियामेट कर दिया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ओमान की टीम ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण खासकर एडम जैंपा की फिरकी के सामने ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पूरी ओमानी टीम महज 16.2 ओवरों में 104 रनों के मामूली स्कोर पर सिमट गई। लक्ष्य छोटा था लेकिन मिचेल मार्श के इरादे बहुत बड़े थे। 105 रनों के टारगेट का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। कप्तान मार्श ने मैदान के चारों ओर चौकों और छक्कों की झड़ी लगा दी। उन्होंने महज 33 गेंदों पर नाबाद 64 रनों की पारी खेली जिसमें 7 शानदार चौके और 4 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। ऑस्ट्रेलिया ने यह लक्ष्य मात्र 9.4 ओवरों में हासिल कर लिया जो उनके शानदार फॉर्म को दर्शाता है। लेकिन इस मैच की सबसे बड़ी हाईलाइट मार्श द्वारा पावरप्ले में की गई बल्लेबाजी रही। मिचेल मार्श ने अपनी 64 रनों की पारी के दौरान शुरुआती 6 ओवरों (पावरप्ले) में ही 53 रन कूट डाले थे। इसके साथ ही उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में पावरप्ले के दौरान किसी भी बल्लेबाज द्वारा बनाया गया दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड रोहित शर्मा के नाम था जिन्होंने 2024 के टी20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ पावरप्ले में 51 रन बनाए थे। मार्श ने रोहित को पछाड़कर इस सूची में दूसरे पायदान पर कब्जा जमा लिया है। हालांकि इस लिस्ट में अब भी नीदरलैंड के स्टीफन मायबर्ग 57 रनों के साथ शीर्ष पर बने हुए हैं जिनका 12 साल पुराना रिकॉर्ड आज भी अटूट है। दिलचस्प बात यह है कि इस लिस्ट में भारतीय बल्लेबाजों का दबदबा रहा है। रोहित शर्मा के अलावा ईशान किशन और केएल राहुल भी पावरप्ले में अर्धशतक जड़ने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल हैं। ईशान किशन ने तो इसी वर्ल्ड कप 2026 में न्यूजीलैंड के खिलाफ पावरप्ले में 50 रन ठोककर अपनी ताकत का लोहा मनवाया था। मिचेल मार्श की इस ऐतिहासिक पारी ने न केवल ऑस्ट्रेलिया को ग्रुप स्टेज का अंत धमाकेदार अंदाज में करने में मदद की बल्कि विरोधियों को भी कड़ा संदेश दे दिया है कि ‘कंगारू’ अब रुकने वाले नहीं हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को दतिया को देंगे 532 करोड़ रूपये के विकास की सौगातें

जनसंपर्क अधिकारी निहारिका मीना ने शुक्रवार को बताया कि इन विकास कार्यों में मुख्य रूप से सिंध नदी पर नव निर्मित सेतु का लोकार्पण शामिल हैं। साथ ही सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बसई सहित अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सनकुआ धाम के समीप स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में पूजन-अर्चन भी करेंगे।उन्होंने बताया कि कृषि उपज मंडी प्रांगण सेवढ़ा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 299.32 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए 53 विकास कार्यों का लोकार्पण और 233.24 करोड़ रुपये की लागत के 21 कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास करेंगे। साथ ही विभिन्न शासकीय योजनाओं में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित करेंगे।
मप्र में राज्य व्यापी गिद्ध गणना शुरू, पहली बार ऑनलाइन ऐप से हो रही गिद्धों की गणना

भोपाल। मध्य प्रदेश में तीन दिवसीय राज्य व्यापी गिद्ध गणना 2025-26 शुक्रवार से शुरू हो गई है। इसमें गिद्धों की गणना के लिए पहली बार ऑनलाइन ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है।जनसम्पर्क अधिकारी केके जोशी ने बताया कि इस शीतकालीन गणना 22 फरवरी तक में सूर्योदय से सुबह 9.00 बजे तक प्रदेश के सभी 16 वृत्त एवं 09 टाइगर रिजर्व में गिद्धों की गणना का कार्य वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, डब्लूडब्लूएफ, डब्लूआईआई के प्रतिभागियों के अतिरिक्त स्वंय सेवक एवं फोटोग्राफरों के द्वारा मिलकर किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि इस बार गिद्धों की गणना के लिये प्रथम बार ऑनलाइन ऐप तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से गिद्धों की गणना की जा रही है। “ऐप” के माध्यम से गणना किये जाने पर आंकड़ों के संकलन एवं रिपोर्ट तैयार करने में आसानी होगी। गत वर्षों में गणना ऑफलाइन की जाती रही है। ऐप के माध्यम से गणना किये जाने के लिये मास्टर ट्रेनर्स, अशासकीय संस्थाओं एवं अधिकारियों/कर्मचारियों को ऑनलाईन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना की शुरुआत वर्ष-2016 से की गई थी, जिसमें 7,028 गिद्धों का आंकलन किया गया था। गिद्ध गणना वर्ष-2025 में शीतकालीन गणना में 12,710 एवं ग्रीष्मकालीन गणना वर्ष-2025 में 9509 गिद्धों का आंकड़ा प्राप्त हुआ था। प्रदेश में कुल 07 प्रजातियों के गिद्ध पाये जाते हैं, जिसमें से 04 प्रजातियों स्थानीय हैं एवं 03 प्रजातियाँ प्रवासी हैं, जो ठंड के समाप्त होते ही वापस चली जाती हैं। प्रथम चरण की गणना तब की जाती है जब उपरोक्त सभी प्रजातियों के गिद्ध घोंसले बनाकर अपने अंडे दे चुके होते हैं या देने की तैयारी में होते हैं। इसी प्रकार से फरवरी माह आने तक इन घोंसलों में अंडों से नवजात गिद्ध निकल चुके होते हैं तथा वे उड़ने की तैयारी करते होते हैं। इसलिये गणना करने के लिये शीत ऋतु का अंतिम समय उचित होता है जिससे स्थानीय तथा प्रवासी गिद्धों की गणना हो जाए।जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, गिद्धों की गणना के लिये गणनाकर्मी एवं स्वयंसेवक आदि सूर्योदय के तत्काल बाद प्रथम चरण में चयनित गिद्धों के घोंसलों के समीप पहुंच जाएंगे और घोंसलों के आसपास बैठे गिद्धों एवं उनके नवजातों की गणना ऐप के माध्यम से करेंगे। गणना के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि केवल आवास/विश्राम स्थलों पर बैठे हुए गिद्धों को ही गणना में लिया जाए। उड़ते हुए गिद्धों को गणना में नहीं लिया जाता है। इस वर्ष वन विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ पूरे प्रदेश के विभिन्न स्थानों में पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, छात्र, फोटोग्राफर एवं स्थानीय नागरिक इस गणना में भाग ले रहे हैं। गणना उपरांत डाटा संकलन का कार्य भोपाल के राष्ट्रीय उद्यान वन विहार में किया जाएगा।
MP में सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा: CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

भोपाल । भोपाल से मध्यप्रदेश में सरकारी जमीन और संपत्तियों को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है जिसमेंभारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य के 20 जिलों में कुल ₹77 करोड़ मूल्य की 33 सरकारी संपत्तियां गलत तरीके से Madhya Pradesh Waqf Board के नाम पर रजिस्टर्ड कर दी गईं। ये संपत्तियां मूल रूप से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थीं लेकिन अब इन्हें वक्फ बोर्ड की संपत्ति के रूप में दिखाया गया है जिससे वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों की आशंका बढ़ गई है। CAG ने 81 वक्फ संपत्तियों की जांच की तो पता चला कि इनमें से 33 संपत्तियां लगभग 41% सरकारी रिकॉर्ड में थीं जिनका कुल क्षेत्रफल 2 09 639.48 वर्ग मीटर है। इनमें सार्वजनिक उपयोग की लिए निर्धारित रिजर्व जमीनें भी शामिल हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि कई मामलों में जिला कलेक्टरों द्वारा रजिस्ट्रेशन को रोकने या निरस्त करने के निर्देश नहीं दिए गए जिससे वक्फ एक्ट का गलत इस्तेमाल हुआ और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा संभव हुआ। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ मामलों में कलेक्टरों ने आपत्ति जताई थी लेकिन फिर भी वक्फ बोर्ड ने उन जमीनों को अपनी संपत्ति के तौर पर रजिस्टर्ड करा लिया। CAG ने साफ कहा है कि ये रजिस्ट्रेशन हाल के वर्षों में हुए हैं इसलिए इसे ‘पुरानी तकनीकी गलती’ नहीं कहा जा सकता। सरकार ने रिपोर्ट के जवाब में इसे एक ‘टेक्निकल मिस्टेक’ बताया और दावा किया कि वक्फ एक्ट में जिला प्रशासन से कोई अनिवार्यता एनओसी No Objection Certificate की नहीं है और यह कि राजस्व रिकॉर्ड के कंप्यूटरीकरण में ब्यौरा बदल गया। लेकिन CAG ने सरकार के इस उत्तर को पूरी तरह खारिज कर दिया। रिपोर्ट यह खुलासा 20 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश CAG रिपोर्ट 2018–23 का हिस्सा है। रिपोर्ट में वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच में पाया गया कि बोर्ड के बजट का अनुचित उपयोग ऑडिट प्रक्रिया की कमी और स्टाफ की कमी जैसी अनेकों लापरवाही पाई गई हैं जिनकी वजह से इन संपत्तियों के गलत रजिस्ट्रेशन को रोका नहीं जा सका। जिन सरकारी संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज किया गया उनमें विभिन्न जिलों के कब्रिस्तान और मस्जिद-क़िस्म की जमीनें शामिल हैं जैसे: आगर के सुसनेर के जमुनिया गांव का हैला मुस्लिम समाज कब्रिस्तान अनूपपुर के कोटमा का कल्याणपुर कब्रिस्तान और बिजुरी की मस्जिद रजा बालाघाट की वक्फ अंजुमन सुन्नी हनफी मस्जिद भिंड के मेहगांव की मजार मेवाती बाबा भोपाल के हुजूर इलाके में स्थित कई कब्रिस्तान एवं मस्जिदें बुरहानपुर की मदीना मस्जिद मदरसाछतरपुर एवं देवास के कुछ कब्रिस्तान और ईदगाह आदि स्थान शामिल हैं। CAG रिपोर्ट के प्रकाश में यह मामला प्रशासनिक गैरज़रूरी प्रक्रियाओं और संपत्ति सुरक्षा में कमजोरियों को उजागर करता है। अब सवाल यह है कि सरकार और राज्य प्रशासन आगे क्या कदम उठाएंगे और क्या इन संपत्तियों के रजिस्ट्रीकरण को सही ठहराने या वापस लेने के लिये कोई व्यवहारिक मार्ग अपनाया जाएगा।
EOW की दबिश से सबलगढ़ नगर पालिका में हड़कंप, अध्यक्ष-CMO सहित कर्मचारी दफ्तर छोड़कर भागे

मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के सबलगढ़ में उस समय हड़कंप मच गया जब आर्थिक अपराध शाखा मध्य प्रदेश की टीम अचानक सबलगढ़ नगर पालिका परिषद पहुंचीपहुंच गई। वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत पर छापामार कार्रवाई के लिए पहुंची टीम को दफ्तर में सन्नाटा मिला। बताया जा रहा है कि टीम के पहुंचते ही नगर पालिका के कर्मचारी अपनी-अपनी आलमारियों में ताले डालकर कार्यालय छोड़कर चले गए। सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई पार्षद मोहन पचौरी द्वारा की गई शिकायत के आधार पर की गई थी। शिकायत में नगर पालिका परिषद में वित्तीय गड़बड़ियों और अनियमित भुगतान के आरोप लगाए गए थे। इसी शिकायत की जांच के लिए EOW की टीम दस्तावेजों की जांच करने पहुंची थी। हालांकि टीम के पहुंचने की भनक लगते ही नगर पालिका अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी CMO सहित कई कर्मचारी कार्यालय से निकल गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ ही मिनटों में पूरा दफ्तर खाली हो गया। कर्मचारी अपनी कुर्सियां छोड़कर चले गए और जरूरी फाइलों वाली आलमारियों में ताले जड़ दिए गए जिससे जांच टीम को रिकॉर्ड तक पहुंच नहीं मिल सकी। करीब चार से पांच घंटे तक EOW की टीम ने कार्यालय में इंतजार किया लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी वापस नहीं लौटा। दस्तावेजों की अनुपलब्धता के चलते टीम को बिना किसी जब्ती या औपचारिक कार्रवाई के लौटना पड़ा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और आगे समन जारी किए जा सकते हैं। स्थानीय स्तर पर इस घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पार्षद मोहन पचौरी का कहना है कि नगर पालिका में लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं और पारदर्शिता के लिए जांच आवश्यक है। वहीं नगर पालिका की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। EOW की यह कार्रवाई भले ही तत्काल दस्तावेजी जांच में सफल नहीं रही हो लेकिन अचानक हुई दबिश और कर्मचारियों के दफ्तर छोड़ने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी आगे क्या कदम उठाती है और क्या संबंधित अधिकारियों को दोबारा पूछताछ या दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बुलाया जाएगा।
US राजदूत बोले- जल्द होगी मोदी और ट्रंप की मीटिंग.. नहीं बताई निश्चित समय-सीमा

नई दिल्ली। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की मुलाकात कब होगी? इस सवाल पर अमेरिकी राजदूत (US Ambassador) ने जवाब दिया है। उन्होंने कहाकि यह मुलाकात जल्द होगी, हालांकि उन्होंने कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है। इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 (India AI Impact Summit 2026) में बोलते हुए सर्जियो गोर ने यह बात कही। उन्होंने कहाकि नजर बनाए रखिए। मुझे पूरी उम्मीद है कि सही वक्त आने पर दोनों की मीटिंग होगी। गौरतलब है कि दोनों राष्ट्रप्रमुखों की मुलाकात को एक साल हो चुका है। दोनों अंतिम बार अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में मिले थे। पिछले कुछ वक्त से भारत और अमेरिका के बीच थोड़ा तनाव भी था। इसकी वजह, अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाना था। हालांकि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील के बाद यह टैरिफ 18 फीसदी हो गया है। इस बीच भारत अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठजोड़ ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल हो गया है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक लचीली आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है। इस दौरान वहां उपस्थित लोगों में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, आर्थिक मामलों के लिए अमेरिकी उप विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल थे। इसको लेकर सर्जियो गोर ने अपनी टिप्पणी में कहाकि व्यापार समझौते से लेकर पैक्स सिलिका और रक्षा सहयोग तक, दोनों देशों की साथ काम करने की संभावनाएं वास्तव में असीमित हैं। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि पैक्स सिलिका में भारत का प्रवेश केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक कदम है जो द्विपक्षीय संबंधों की समग्र दिशा को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहाकि भारत ऐसा देश है जहां प्रतिभा का भंडार है, जो प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती देने के लिए काफी है। भारत की इंजीनियरिंग क्षमता इस महत्वपूर्ण गठबंधन के लिए आवश्यक योग्यताएं प्रदान करती है। प्रतिभा के अलावा, भारत ने महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण क्षमता की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति की है और हम इसमें भी पूरी तरह से सहभागिता कर रहे हैं। गोर ने सुझाव दिया कि अमेरिका पैक्स सिलिका ढांचे के तहत भारत के साथ विश्वसनीय एआई प्रौद्योगिकियां साझा कर सकता है। अमेरिकी उप विदेश मंत्री हेलबर्ग ने गठबंधन में शामिल होने के भारत के फैसले की सराहना की और पैक्स सिलिका को आपूर्ति श्रृंखलाओं में दबाव की रणनीति और ब्लैकमेल के खिलाफ एक पहल बताया, जिसे चीन की ओर एक स्पष्ट इशारा माना जा रहा है। उन्होंने कहाकि हम देखते हैं कि हमारे मित्र और सहयोगी प्रतिदिन आर्थिक दबाव और ब्लैकमेल के खतरों का सामना कर रहे हैं। उन्हें अपनी संप्रभुता और अपनी समृद्धि के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हम खुद को एक ऐसी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जूझते हुए पाते हैं जो अत्यधिक केंद्रित है।
अमिताभ बच्चन के मंच से शुरू हुई तकरार? Rajpal Yadav लोन केस में वकील का बड़ा दावा

नई दिल्ली । कॉमेडियन-अभिनेता राजपाल यादव का लोन और चेक बाउंस मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आए राजपाल का केस अभी अदालत में लंबित है लेकिन अब उनके वकील भास्कर उपाध्याय ने इस विवाद को लेकर नया पक्ष सामने रखा है। वकील का दावा है कि शिकायतकर्ता माधव गोपाल अग्रवाल की नाराजगी की असली वजह एक पुरानी मंचीय घटना थी जो महानायक अमिताभ बच्चन से जुड़ी बताई जा रही है। भास्कर उपाध्याय ने मीडिया को बताया कि सितंबर 2012 में एक फिल्म लॉन्च कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। आरोप है कि माधव अग्रवाल उस कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन के साथ मंच साझा करना चाहते थे लेकिन राजपाल की टीम ने इसकी अनुमति नहीं दी। वकील के अनुसार चूंकि अमिताभ बच्चन ने कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लिया था इसलिए मंच प्रबंधन सीमित रखा गया। इसी बात से शिकायतकर्ता नाराज हो गए और इसके बाद कानूनी कार्रवाई तेज कर दी गई। वकील के मुताबिक सितंबर 2012 में मामला दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंचा जहां बकाया भुगतान तक फिल्म पर रोक लगाने की मांग की गई। दिसंबर 2012 में 60,60,350 रुपये का पहला चेक जमा हुआ और बैंक से राशि रिलीज हुई। इसके बाद 2013 में दोनों पक्षों के बीच सहमति समझौता हुआ जिसमें पहले के सभी समझौतों को अमान्य माना जाना था। भास्कर का कहना है कि 2016 में एक नया समझौता तैयार हुआ जिसके तहत 10.40 करोड़ रुपये बकाया बताए गए। इसमें यह भी तय हुआ कि भुगतान होने पर पुराने एग्रीमेंट दोबारा लागू नहीं किए जाएंगे। वकील के अनुसार 2016 में वसूली याचिका दायर की गई और शिकायतकर्ता को 1.90 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया। शेष राशि के लिए एक अन्य गारंटर अनंत दत्ताराम सामने आए। बचाव पक्ष का दावा है कि राजपाल यादव ने 15 करोड़ रुपये की अपनी संपत्ति जमानत के रूप में रखने की पेशकश की और बाकी रकम चुकाने के लिए समय मांगा लेकिन शिकायतकर्ता ने यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। मामला तब और उलझ गया जब वकील के मुताबिक तीसरे सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट के तहत दिए गए चेक दोबारा सक्रिय कर दिए गए जबकि सहमति समझौते के बाद उन्हें निरस्त माना गया था। मार्च 2018 में ट्रायल कोर्ट ने पुराने समझौते के आधार पर राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए 11.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। नवंबर 2018 में एक्जीक्यूशन कोर्ट ने उसी आधार पर तीन महीने की सजा सुनाई। बचाव पक्ष का तर्क है कि एक ही मामले में समानांतर कानूनी प्रक्रियाएं नहीं चलनी चाहिए थीं। 2019 में राजपाल की टीम ने इस आदेश को रिवीजन कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि वकील के अनुसार उस दौरान नए अधिवक्ता की ओर से अदालत में मध्यस्थता के जरिये भुगतान की बात स्वीकार किए जाने से मामला और पेचीदा हो गया। फिलहाल राजपाल यादव की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया है कि उनकी दलीलों को विस्तार से सुना जाए और मामले का निपटारा मेरिट के आधार पर किया जाए। अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
RBI का बड़ा ऐलान… साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को मिलेगा 25000 रुपये तक मुआवजा

नई दिल्ली। साइबर फ्रॉड (Cyber fraud) के शिकार लोगों को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की ओर से थोड़ी राहत मिलने वाली है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने डिजिटल फ्रॉड में हो रही बढ़ोतरी के बीच ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के लिए 25,000 रुपये तक की मुआवजा देने की घोषणा की। आइए जानते हैं कि ये मुआवजा किसे और कैसे मिलेगा। किस तरह के पीड़ित को मिलेगा मुआवजा?साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को 25,000 रुपये का मुआवजा उन मामलों में भी दिया जाएगा जहां ग्राहक गलती से अपना वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) धोखेबाजों के साथ साझा कर देते हैं। मतलब ये कि अगर आपने गलती से स्कैमर को ओटीपी शेयर कर दिया है और आपके बैंक से पैसे कट गए हैं तो आप इस स्कीम का लाभ लेने के लिए योग्य हैं। सिर्फ एक बार ही लाभरिजर्व बैंक के गवर्नर ने स्पष्ट किया था कि पीड़ित को जीवन में केवल एक बार ही मुआवजा मिलेगा। कहने का मतलब है कि अगर आपके साथ बार-बार साइबर फ्रॉड होता है तो इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा। आरबीआई अधिकारियों के मुताबिक डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में दो-तिहाई मामले 50,000 रुपये से कम के हैं। धोखाधड़ी से प्रभावित लोगों में से ज्यादातर को इस सुविधा से लाभ होगा। कैल्कुलेशन पर गौर करें तो धोखाधड़ी की राशि में से 15 प्रतिशत का नुकसान ग्राहक को उठाना होगा और 15 प्रतिशत का नुकसान संबंधित बैंक उठाएगा। शेष 70 प्रतिशत राशि केंद्रीय रिजर्व बैंक देगा। हालांकि किसी भी स्थिति में ग्राहक को 25,000 रुपये से अधिक का हर्जाना नहीं मिलेगा। आरबीआई 70 प्रतिशत नुकसान की भरपाई के लिए अपनी सरप्लस आय का इस्तेमाल करेगा। गर्वनर के मुताबिक इसके लिए केंद्रीय बैंक के पास पर्याप्त पैसा है। हालांकि, इस योजना का फ्रेमवर्क अभी तैयार नहीं है। साइबर फ्रॉड से कैचे बचेसाइबर फ्रॉड से बचाव के लिए जरूरी है कि OTP, पासवर्ड, PIN, CVV कभी किसी को न बताएं। अनजान लिंक / QR कोड पर क्लिक / स्कैन न करें । मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखें और 2FA (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) जरूर चालू करें। UPI और बैंकिंग में सावधानी पेमेंट से पहले हमेशा रिसीवर का नाम चेक करें। बैंक ऐप से ही ट्रांजेक्शन करें। अनजान नंबर से बैंक कॉल आए तो काट दें और खुद बैंक के ऑफिशियल नंबर पर कॉल करें। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें। इसके अलावा, cybercrime.gov.in पर कंप्लेंट दर्ज करें। वहीं, बैंक को तुरंत बताएं और अकाउंट फ्रीज/ब्लॉक करवाएं। साइबर फ्रॉड के मामले में अपने नजदीकी साइबर थाना जाकर भी आपको शिकायत दर्ज करानी होती है।
US में पाकिस्तान की बेइज्जती… ट्रंप ने भरी सभा में शहबाज को खड़ा कराया और बांधे मोदी की तारीफ के पुल

वाशिंगटन। अमेरिका (America) के वाशिंगटन में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) के उद्घाटन सत्र में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जोर-शोर से हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अपने संबोधन के दौरान न केवल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को अपना बेहतरीन दोस्त बताया, बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Pakistan’s Prime Minister Shahbaz Sharif) को बीच भाषण में खड़ा कर भारत-पाक शांति का पूरा श्रेय खुद ले लिया। ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने के अपने दावे का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने शहबाज शरीफ की ओर देखते हुए उन्हें खड़ा होने के लिए कहा। जैसे ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खड़े हुए, ट्रंप ने अपनी शैली में प्रधानमंत्री मोदी और भारत का गुणगान शुरू कर दिया। ट्रंप ने वहां उपस्थित दुनियाभर के कई नेताओं और मीडिया के सामने कहा, “भारत और पाकिस्तान… वह एक बहुत बड़ा मामला था। मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है। वह बहुत उत्साहित हैं और वास्तव में वह अभी इस कार्यक्रम को देख रहे हैं।” ट्रंप ने आगे कहा, “भारत और पाकिस्तान, आप दोनों का बहुत शुक्रिया। मोदी एक महान व्यक्ति हैं और मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं।” यह नजारा काफी दिलचस्प था क्योंकि जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री प्रोटोकॉल के तहत खड़े होकर यह सब सुन रहे थे, वहीं भारत इस बैठक में केवल एक ‘पर्यवेक्षक’ के रूप में मौजूद था और पीएम मोदी स्वयं वहां उपस्थित नहीं थे। ट्रंप ने इस दौरान फिर से दोहराया कि उन्होंने पिछले साल भारत-पाक युद्ध को केवल एक फोन कॉल से रोक दिया था। उन्होंने कहा, “जब मुझे पता चला कि दोनों देश लड़ रहे हैं और विमान गिराए जा रहे हैं, तो मैंने फोन उठाया और कहा अगर युद्ध नहीं रुका, तो मैं दोनों देशों पर 200 प्रतिशत का व्यापारिक टैरिफ लगा दूंगा।” ट्रंप ने जिस तरह से सार्वजनिक मंच पर शहबाज शरीफ को खड़ा कर पीएम मोदी का जिक्र किया वह पाकिस्तान के लिए काफी असहज स्थिति थी। एक तरफ जहां पाकिस्तान खुद को ट्रंप का करीबी सहयोगी दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ट्रंप बार-बार अपनी बातचीत में भारत और मोदी को अधिक महत्व देते नजर आ रहे हैं।