भोपाल फिल्म फेस्टिवल का आखिरी दिन: 41 फिल्मों की स्क्रीनिंग, हुमा कुरैशी रहीं आकर्षण

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में आयोजित ‘भोपाल फिल्म फेस्टिवल’ का आज अंतिम दिन था। दो दिनों तक चले इस फेस्टिवल में कुल 41 फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई, जिसमें मध्य प्रदेश के 25 युवा फिल्मकारों की फिल्में शामिल थीं। आयोजन स्थल हमेशा की तरह हाउसफुल रहा और दर्शकों ने स्थानीय प्रतिभाओं को उत्साहपूर्वक सराहा। बच्चों के लिए मास्टरक्लासफेस्टिवल का ओपनिंग सेशन बच्चों के लिए मास्टरक्लास के रूप में आयोजित किया गया। इसमें भोपाल की विभिन्न यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल हुए और फिल्म डायरेक्शन की बारीकियां सीखीं। प्रोड्यूसर शशांक राणे के अनुसार यह मंच युवा प्रतिभाओं को पहली बार वास्तविक अनुभव देने का अवसर रहा। फिल्म पॉलिसी और सिंगल विंडोफेस्टिवल में अचिन जैन, यशोवर्धन मिश्रा और अशोक मिश्रा ने मध्य प्रदेश की फिल्म पॉलिसी और ‘मध्य प्रदेश की वॉयसेस’ पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि सिंगल विंडो पॉलिसी से फिल्म प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी और मदद मिल रही है, जिससे प्रदेश के टैलेंट को सही मंच मिल रहा है। विभिन्न श्रेणियों में फिल्मों का प्रदर्शनफेस्टिवल में फिक्शन, नॉन-फिक्शन, डॉक्यूमेंट्री और एनीमेशन फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। प्रतियोगिता के लिए चार कैटेगरी रखी गईं – जनरल फिक्शन, जनरल नॉन-फिक्शन, वीमेंस वॉइसेस और हार्ट ऑफ इंडिया। इनमें से दो श्रेणियां विशेष रूप से मध्य प्रदेश के फिल्मकारों के लिए थीं। हुमा कुरैशी रहीं विशेष आकर्षणबॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने भी फेस्टिवल में शिरकत की। उन्होंने युवा फिल्मकारों और दर्शकों से बातचीत की और उनके काम की सराहना की। समापन और विजेताओं की घोषणाअंतिम दिन 20 और फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई और फिल्म जुगनूमा के साथ समारोह का समापन हुआ, जिसमें अभिनेता मनोज वाजपेयी शामिल थे। चारों कैटेगरी के विजेताओं की घोषणा की गई: जनरल फिक्शन: अर्पित नाग, कार्तिक महाजन, कहकशां फातिमा, परवीन कुमार यादव वीमेंस वॉइसेस: प्राची ठाकुर, गुंजन नरूला, दिलग्रेस कौर, निधि नर्नवरे जनरल नॉन-फिक्शन: श्रेया समवत्सर, प्रदीप लेकवार, संदीप भाटी, रोशनी चौहान हार्ट ऑफ इंडिया: वर्षा रंसोरे, जुनैद अलावी, अपूर्व गौतम फेस्टिवल में रनर अप और पुरस्कार राशि की जानकारी साझा नहीं की गई। इस प्रकार, भोपाल फिल्म फेस्टिवल ने न सिर्फ युवा प्रतिभाओं को मंच दिया बल्कि शहर में सिनेमा प्रेमियों के लिए उत्सव का माहौल भी बनाया।
भारतीय जनता पार्टी एससी मोर्चा की नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित, मध्यप्रदेश में कई नए चेहरे

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा (मध्यप्रदेश) की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह परमार ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से पदाधिकारियों की सूची जारी की। संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। 8 प्रदेश उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री नियुक्तजारी सूची के अनुसार सत्यप्रकाश सखवार, मोहिनी शाक्यवार, गगन खटीक, धर्मेंद्र आर्य, सत्यनारायण खोईवाल, भगवती प्रसाद शिंदे, प्रवीण मेश्राम और अमित कछवाह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा गणपत डाबी, रामस्वरूप शुक्रवारे और कृष्णा चौधरी को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बसपा से विधायक रहे सत्यप्रकाश सखवार को जिम्मेदारीभाजपा ने सत्यप्रकाश सखवार को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। वे 2013 में मुरैना जिले की अंबाह सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। बाद में प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के दौरान वे कांग्रेस में शामिल हुए और 2020 के उपचुनाव में मैदान में उतरे, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2023 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। अब उन्हें एससी मोर्चा में अहम जिम्मेदारी दी गई है। कोषाध्यक्ष और प्रदेश मंत्री भी नियुक्तअंकित थेप्ते को कोषाध्यक्ष और मुकेश कुमार को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं सुखलाल पवार, नितेश नरवले, कन्हैया लाल चौहान, संजय दायमा, डॉ. जगदीश चौहान, महेंद्र कुमार अहिरवार, सौरभ बावरिया और सीताराम साकेत को प्रदेश मंत्री नियुक्त किया गया है। मीडिया, सोशल मीडिया और आईटी टीम गठितसंगठन को डिजिटल और मीडिया स्तर पर मजबूत करने के लिए भी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। संतोष बराड़ा को प्रशिक्षण प्रभारी, गोपाल जाटव को सह-प्रशिक्षण प्रभारी और अमर ऊंटवाल को प्रदेश कार्यालय मंत्री बनाया गया है। सुंदरलाल वर्मा को मीडिया प्रभारी तथा कमल अहिरवार और महेश बसवाल को सह मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है। डॉ. नितिन डेहरिया को सोशल मीडिया प्रभारी और गिरिजा जाटव व हिमांशु मालवीय को सह सोशल मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। नीति एवं शोध प्रकोष्ठ में प्रवीण चावला को प्रभारी तथा किरण सिंह सूर्यवंशी और लक्ष्मीदास चौधरी को सह प्रभारी बनाया गया है। आईटी विभाग में कपिल अंजने संयोजक, जबकि राजेश सिंह और दीपमाला सोलंकर सह संयोजक नियुक्त हुए हैं। नई कार्यकारिणी के जरिए भाजपा एससी मोर्चा ने संगठन विस्तार और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने का संदेश दिया है।
India vs South Africa पर टिकी रहीं नजरें, भोपाल में हार से छाया मायूसी का माहौल

नई दिल्ली। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए हाई-वोल्टेज मुकाबले ने राजधानी भोपाल को पूरी तरह क्रिकेट के रंग में रंग दिया। शहर के न्यू मार्केट, एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी, कोलार, शाहपुरा और हबीबगंज समेत कई इलाकों के रेस्टोरेंट, पब, क्लब और कैफे में लाइव स्क्रीनिंग का खास इंतजाम किया गया था। बड़ी एलईडी स्क्रीन, साउंड सिस्टम और टीम इंडिया की जर्सी पहने युवाओं की मौजूदगी ने माहौल को स्टेडियम जैसा बना दिया था। मैच शुरू होने से पहले ही अधिकांश जगहों पर टेबल फुल हो चुकी थीं। कई प्रतिष्ठानों ने खास थीम डेकोरेशन, तिरंगे की सजावट, स्पेशल फूड कॉम्बो और ग्रुप डिस्काउंट ऑफर पेश किए थे। परिवारों से लेकर कॉलेज स्टूडेंट्स तक, हर वर्ग के लोग अपनी-अपनी पसंदीदा टीम को सपोर्ट करते नजर आए। जैसे-जैसे मुकाबला रोमांचक होता गया, दर्शकों का उत्साह भी चरम पर पहुंचता गया। चौके-छक्कों पर तालियों और नारों से पूरा माहौल गूंज उठा। हालांकि मैच का रुख बदलते ही माहौल भी बदल गया। भारतीय टीम की बल्लेबाजी लड़खड़ाने लगी और अहम विकेट गिरते ही रेस्टोरेंट्स में सन्नाटा पसरने लगा। उम्मीदें आखिरी ओवर तक टिकी रहीं, लेकिन टीम इंडिया की हार के साथ ही क्रिकेट प्रेमियों में निराशा छा गई। कई प्रशंसकों ने कहा कि टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, जबकि कुछ ने दक्षिण अफ्रीका की शानदार गेंदबाजी और रणनीति की तारीफ की। मैच खत्म होने के बाद लोग शांत मन से लौटते नजर आए, लेकिन चर्चा देर रात तक चलती रही। कुल मिलाकर यह मुकाबला सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि शहर के लिए एक सामूहिक अनुभव बन गयाजहां जीत की उम्मीद ने जोश भर दिया और हार ने मायूसी।
सुप्रिया श्रीनेत का बीजेपी पर हमला: इंदौर-भोपाल में पत्थरबाजी, दूषित पानी से मौतों पर चुप्पी क्यों?

भोपाल। भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर और भोपाल में भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस दफ्तरों पर पत्थरबाजी की, बैरिकेड तोड़े और हंगामा किया, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। बीजेपी कार्यकर्ता पत्थरबाज बन गएश्रीनेत ने कहा कि दोनों शहरों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने चार-चार बैरिकेड तोड़कर कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने की कोशिश की। उनके मुताबिक पूरी घटना कैमरों में रिकॉर्ड है, इसके बावजूद नामजद एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही। उन्होंने सवाल उठाया, “जब साफ दिख रहा है कि पत्थर कौन चला रहा था, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?उन्होंने इसे राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि “संगठित गुंडागर्दी” करार दिया। दूषित पानी से मौतों पर सरकार घिरीकांग्रेस प्रवक्ता ने इंदौर में कथित रूप से दूषित पानी पीने से 35 लोगों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब लोग जान गंवा रहे थे, तब बीजेपी नेताओं की ओर से न तो संवेदना जताई गई और न ही जिम्मेदारी तय की गई। श्रीनेत ने कहा, “जब जनता मर रही थी, तब चुप्पी थी। आज राजनीतिक विरोध के नाम पर सड़क पर हिंसा की जा रही है। जनता सब देख रही है।” भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर निशानाभारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। श्रीनेत ने आरोप लगाया कि यह डील किसानों, लघु एवं मध्यम उद्योगों, ऊर्जा सुरक्षा और डेटा संप्रभुता के हितों के खिलाफ है। उनके अनुसार, अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी रियायत, रूस से सस्ता तेल खरीदने में दूरी और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलने जैसे फैसलों से भारतीय किसानों पर दबाव बढ़ेगा। 24 फरवरी को किसान महापंचायतश्रीनेत ने बताया कि 24 फरवरी को भोपाल में किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल होंगे। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश लंबे समय से किसान आंदोलनों की भूमि रहा है और प्रदेश के किसान पहले से आर्थिक दबाव में हैं, इसलिए आंदोलन की शुरुआत यहीं से की जा रही है। युवा कांग्रेस के प्रदर्शन का बचावदिल्ली में एआई समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन पर श्रीनेत ने कहा कि यह समिट के खिलाफ नहीं, बल्कि “देशहित से समझौते” के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि युवा देश की आवाज हैं और आने वाले समय में यह आंदोलन और तेज होगा।
भोपाल में सोमवार को बड़े स्तर पर बिजली कटौती, 25 से अधिक इलाकों में 2 से 6 घंटे तक सप्लाई रहेगी बंद

भोपाल। राजधानी भोपाल के करीब 25 से अधिक इलाकों में सोमवार को बिजली कंपनी द्वारा मेंटेनेंस और लाइन सुधार कार्य किए जाएंगे। इसके चलते अलग-अलग समय स्लॉट में 2 से 6 घंटे तक बिजली सप्लाई बाधित रहेगी। बिजली कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह शटडाउन नियमित रखरखाव, ट्रांसफॉर्मर जांच और लाइन अपग्रेडेशन के लिए लिया जा रहा है, ताकि भविष्य में फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्या कम हो सके। सबसे लंबी कटौती सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक रहेगी। इस दौरान एमएलए रेस्ट हाउस, मालवीय नगर, एमएलए क्वार्टर और आसपास के क्षेत्रों में बिजली सप्लाई बंद रहेगी। इसी समय हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, अयोध्या नगर के सी, डी, ई-एफ सेक्टर और गीत कॉलोनी में भी बिजली नहीं रहेगी। सुबह 10:30 बजे से दोपहर 3:30 बजे तक एजी कॉलोनी, पीएंडटी कॉलोनी, संजय कॉम्पलेक्स, माता मंदिर चौराहा, सीआई होम्स और हर्षवर्धन नगर में सप्लाई प्रभावित रहेगी। इसी समय मेट्रोलॉजिकल कॉलोनी, निराला नगर, द्वारकापुरी और एकता मार्केट क्षेत्र में भी बिजली बंद रहेगी। दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक फिरदोश नगर, शीतला नगर, निशातपुरा, श्री नगर, सरदार नगर और नारियलखेड़ा इलाके में दो घंटे का शटडाउन लिया जाएगा। बिजली कंपनी ने नागरिकों से अपील की है कि वे पानी की टंकियां पहले से भर लें, इनवर्टर और मोबाइल चार्ज कर लें तथा जरूरी घरेलू और व्यावसायिक कार्य समय से पहले निपटा लें। कार्यालय, दुकान और छोटे उद्योगों को भी कामकाज की योजना बिजली कटौती के समय को ध्यान में रखकर बनाने की सलाह दी गई है। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार यह मेंटेनेंस कार्य शहर में बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। यदि मौसम या तकनीकी कारणों से कार्य में बदलाव होता है तो समय में आंशिक परिवर्तन संभव है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय बिजली कार्यालय या आधिकारिक सूचना माध्यमों से अपडेट लेते रहें।
हेल्दी लाइफ का सीक्रेट: मूंग स्प्राउट्स से बढ़ाएं ताकत और घटाएं वजन

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति फिट और हेल्दी रहने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में खानपान में पौष्टिक और प्राकृतिक चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी हो गया है। मूंग दाल के स्प्राउट्स यानी अंकुरित मूंग एक ऐसा सुपरफूड है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इसे सेहत के लिए लाभकारी मानते हैं। जैसे ही मूंग दाल अंकुरित होती है, इसके पोषक तत्वों की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। इसमें प्रोटीन, विटामिन सी, विटामिन ए, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये छोटे-छोटे अंकुर शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करते हैं। बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए मूंग स्प्राउट्स का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है। पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी मूंग स्प्राउट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पेट को साफ रखने में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। आयुर्वेद के अनुसार जब पाचन सही रहता है, तो शरीर का संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है। अच्छे पाचन का असर त्वचा पर भी दिखाई देता है। नियमित सेवन से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और मुंहासों व दाग-धब्बों में कमी देखी जा सकती है। वजन घटाने की चाह रखने वालों के लिए भी यह एक बेहतरीन विकल्प है। मूंग स्प्राउट्स में कैलोरी कम होती है, लेकिन यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और अनावश्यक खाने से बचाव होता है। साथ ही इसमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और शरीर को टोन रखने में सहायक होता है। दिल की सेहत के लिए भी मूंग स्प्राउट्स लाभकारी हैं। इनमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। आयरन और फोलेट की पर्याप्त मात्रा रक्त की गुणवत्ता को सुधारती है और शरीर में ऑक्सीजन के संचार को बेहतर बनाती है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है। हड्डियों और दांतों की मजबूती के लिए भी यह फायदेमंद है। इसमें मौजूद कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। साथ ही यह शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और डिहाइड्रेशन से बचाव करता है। मूंग स्प्राउट्स को अपने आहार में शामिल करना बेहद आसान है। आप इसे सलाद में मिलाकर, सूप में डालकर, सब्जी के रूप में या हल्का भूनकर भी खा सकते हैं। नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है और आप खुद को ज्यादा ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस करते हैं।
देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट का विस्तार, अप्रैल 2026 से बढ़ेगी क्षमता और घटेगी भीड़..

इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शुमार देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर यात्रियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। तेजी से बढ़ते पैसेंजर ट्रैफिक को देखते हुए प्रशासन ने अप्रैल 2026 से पुराने टर्मिनल को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। रेनोवेशन का काम अंतिम चरण में है और इसके शुरू होते ही प्रति घंटे 600 यात्रियों की अतिरिक्त क्षमता जुड़ जाएगी। एयरपोर्ट की मौजूदा डिजाइन क्षमता सालाना 40 लाख यात्रियों की है, लेकिन पिछले वर्ष यहां 43.96 लाख यात्रियों ने सफर किया। लगातार बढ़ती भीड़ के कारण मौजूदा टर्मिनल पर दबाव बढ़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए लगभग 41 करोड़ रुपये की लागत से 6000 वर्ग मीटर क्षेत्र में पुराने टर्मिनल का उन्नयन किया जा रहा है। सिविल वर्क पूरा हो चुका है और फिलहाल इंटीरियर रिनोवेशन का काम जारी है। नए बदलावों के तहत टर्मिनल में आधुनिक सीटिंग व्यवस्था, इमिग्रेशन काउंटर, अत्याधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम, बेहतर लाइटिंग और एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। अप्रैल 2026 तक 200 नई सीटें जोड़ी जाएंगी ताकि पीक ऑवर्स में यात्रियों को लंबी कतारों और भीड़भाड़ से राहत मिल सके। सभी आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पुराना टर्मिनल विशेष रूप से छोटे विमानों के लिए उपयोग में लाया जाएगा। शारजाह की अंतरराष्ट्रीय उड़ान समेत करीब 18 छोटे विमान यहीं से संचालित होंगे। वर्तमान में एयरपोर्ट से प्रतिदिन लगभग 90 उड़ानें संचालित हो रही हैं जो 21 शहरों और शारजाह को जोड़ती हैं। पुराने टर्मिनल के चालू होने से सालाना 10 लाख अतिरिक्त यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित होगी और कुल क्षमता 50 लाख के करीब पहुंच जाएगी। यह परियोजना सिर्फ यात्री सुविधा तक सीमित नहीं है बल्कि शहर की आर्थिक प्रगति से भी जुड़ी है। इंदौर मध्य प्रदेश का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है और बेहतर हवाई कनेक्टिविटी से व्यापार, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अपग्रेड के बाद एयरपोर्ट की रैंकिंग में सुधार होगा और यह प्रदेश का प्रमुख एविएशन हब बन सकता है। भविष्य की योजनाओं में रनवे को 2800 मीटर से बढ़ाकर 3400 मीटर तक करने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे बड़े विमानों की लैंडिंग संभव हो सकेगी। साथ ही 492 करोड़ रुपये की लागत से नया टर्मिनल निर्माणाधीन है जो 2028 तक तैयार होकर सालाना एक करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता देगा। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह कदम अहम माना जा रहा है। ATR जैसे छोटे विमान अपेक्षाकृत कम ईंधन खपत करते हैं और कार्बन उत्सर्जन भी कम करते हैं। इससे संचालन लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
मैदान पर आग उगलने वाले 3 स्टार, Super-8 में साउथ अफ्रीका की बढ़ा देंगे टेंशन

नई दिल्ली । टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 मुकाबले में आज भारत और साउथ अफ्रीका आमने सामने होंगे। अहमदाबाद के भव्य नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने वाला यह मैच रोमांच की पराकाष्ठा पर पहुंचने वाला है। कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में टीम इंडिया जीत की लय बरकरार रखना चाहेगी। ऐसे में तीन भारतीय खिलाड़ी ऐसे हैं जो अपने दम पर मुकाबले का रुख बदल सकते हैं। ईशान किशन: पावरप्ले के तूफान ओपनर ईशान किशन इस टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। चार मैचों में 202 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से 176 रन ठोक चुके ईशान विपक्षी गेंदबाजों पर शुरू से दबाव बना देते हैं। पाकिस्तान के खिलाफ उनकी 44 गेंदों पर 77 रनों की आक्रामक पारी ने मैच का पासा पलट दिया था। अगर अहमदाबाद की सपाट पिच पर ईशान टिक गए तो साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ना तय है। पावरप्ले में तेज शुरुआत भारत की जीत की मजबूत नींव रख सकती है। हार्दिक पांड्या: बल्ला और गेंद दोनों से वार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या बड़े मैचों के खिलाड़ी माने जाते हैं। आईपीएल में गुजरात की टीम के लिए इसी मैदान पर लंबा अनुभव उनके आत्मविश्वास को और मजबूत करता है। मौजूदा वर्ल्ड कप में हार्दिक ने मिडिल ऑर्डर में अहम रन बनाए हैं और जरूरत पड़ने पर विकेट भी झटके हैं। साउथ अफ्रीका जैसी संतुलित टीम के खिलाफ उनका हर ओवर और हर शॉट निर्णायक साबित हो सकता है। दबाव की घड़ी में हार्दिक का शांत दिमाग टीम इंडिया के लिए एक्स-फैक्टर रहेगा। वरुण चक्रवर्ती: रहस्यमयी स्पिन का जाल मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती साउथ अफ्रीका के बल्लेबाजों के लिए पहेली रहे हैं। आंकड़े भी यही कहानी कहते हैं प्रोटियाज के खिलाफ आठ मैचों में 22 विकेट उनके नाम हैं। इस वर्ल्ड कप में भी चार मुकाबलों में 9 विकेट लेकर वे भारत के सबसे सफल गेंदबाज बने हुए हैं। अहमदाबाद की पिच पर अगर उन्हें थोड़ी भी टर्न मिली तो वे मिडिल ओवर्स में मैच का रुख भारत की ओर मोड़ सकते हैं। मुकाबला होगा हाई-वोल्टेज भारत और साउथ अफ्रीका के बीच यह भिड़ंत सिर्फ दो टीमों की टक्कर नहीं बल्कि रणनीति और संयम की परीक्षा भी है। जहां भारतीय बल्लेबाजी आक्रामक अंदाज में शुरुआत करना चाहेगी वहीं गेंदबाज मिडिल ओवर्स में शिकंजा कसने की कोशिश करेंगे। अगर ये तीनों खिलाड़ी अपने रंग में दिखे तो सुपर-8 में भारत की राह और आसान हो सकती है।
नारियल निकालने की कोशिश बनी जानलेवा, 9 दिन बाद पानीपत नहर में मिला बच्चे का शव

नई दिल्ली । हरियाणा के Panipat से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। बत्रा कॉलोनी निवासी 13 वर्षीय अल्तमस का शव नौ दिन बाद नहर से बरामद हुआ। मासूम पिछले शुक्रवार 13 फरवरी को रहस्यमय परिस्थितियों में नहर में डूब गया था। परिजन, स्थानीय लोग और प्रशासन लगातार उसकी तलाश में जुटे थे। आखिरकार नारायण गांव के पास नहर में उसका शव मिलने की पुष्टि हुई, जिसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। नारियल निकालने की कोशिश बनी जानलेवा परिजनों के अनुसार, अल्तमस अपने दो दोस्तों के साथ दिल्ली पैरलल नहर पर घूमने गया था। इसी दौरान नहर में बहकर आया एक नारियल देखने के बाद वह उसे निकालने की कोशिश करने लगा। बताया जा रहा है कि जैसे ही वह किनारे से नीचे उतरा, उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में जा गिरा। नहर में तेज बहाव होने के कारण वह कुछ ही पलों में आंखों से ओझल हो गया। दोस्तों ने शोर मचाया, लेकिन जब तक मदद पहुंचती, बहुत देर हो चुकी थी।नौ दिन चला सर्च ऑपरेशन घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची। नहर के कई किलोमीटर क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। स्थानीय प्रशासन ने लगातार तलाशी अभियान जारी रखा, लेकिन शुरुआती दिनों में कोई सफलता नहीं मिली। नौ दिन बाद नारायण गांव के पास नहर में शव दिखाई देने की सूचना मिली। टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को बाहर निकाला और पहचान की पुष्टि की। पानी में लंबे समय तक रहने के कारण शव की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। पांच बहनों का इकलौता भाई था अल्तमस अल्तमस आठवीं कक्षा का छात्र था और परिवार की उम्मीदों का केंद्र भी। वह पांच बहनों का इकलौता छोटा भाई था। उसकी असामयिक मौत से घर में मातम पसरा हुआ है। परिजन बेसुध हैं और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि अल्तमस बेहद मिलनसार और चंचल स्वभाव का था। उसकी अचानक मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।प्रशासन की कार्रवाई और सुरक्षा पर सवाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल के शवगृह में भिजवा दिया है। नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया जाएगा। इस हादसे ने एक बार फिर नहर किनारे सुरक्षा इंतजामों और बच्चों की सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि नहर के पास चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा प्रबंध मजबूत किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों। अल्तमस की मौत ने यह कड़वा सच फिर सामने ला दिया है कि जरा सी लापरवाही या जोखिम भरा कदम जिंदगी छीन सकता है। परिवार और क्षेत्र के लोग आज भी यही सोचकर सिहर उठते हैं कि अगर उस दिन वह नारियल निकालने की कोशिश न करता, तो शायद आज जिंदा होता।
वक्त से आगे सोचने वाली मधुबाला: 12 साल में थामा स्टीयरिंग, 36 की उम्र में बन गई अमर सितारा

नई दिल्ली/ मुंबई। हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की चमकती हुई धरोहर मधुबाला सिर्फ अपनी अदाकारी और खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि अपनी साहसिक सोच और आत्मनिर्भर व्यक्तित्व के लिए भी जानी जाती हैं। जिस दौर में लड़कियों के लिए सामाजिक सीमाएं तय थीं उस समय उन्होंने महज 12 साल की उम्र में ड्राइविंग सीखकर परंपराओं को चुनौती दे दी थी। 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में जन्मी मधुबाला का असली नाम मुमताज जहां देहलवी था। उनके पिता अताउल्लाह खान बेहतर जीवन की तलाश में परिवार सहित मुंबई आ गए थे। आर्थिक तंगी के कारण मधुबाला को बचपन में ही काम करना पड़ा। उन्होंने नौ साल की उम्र में फिल्म बसंत में बाल कलाकार के रूप में काम शुरू किया और उस समय उन्हें बेबी मुमताज के नाम से पहचाना जाने लगा। मासूम चेहरा और स्वाभाविक अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया। 1947 में फिल्म नील कमल के साथ उनके करियर को नई दिशा मिली और यहीं से वह मधुबाला के नाम से मशहूर हुईं। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1950 के दशक में उन्होंने एक से बढ़कर एक सफल फिल्में दीं। महल ने उन्हें रहस्यमयी सौंदर्य की पहचान दी तो हावड़ा ब्रिज और चलती का नाम गाड़ी जैसी फिल्मों ने उनके अभिनय की बहुमुखी प्रतिभा को साबित किया। उनकी जोड़ी उस दौर के दिग्गज अभिनेताओं के साथ खूब सराही गई। दिलीप कुमार के साथ उनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री आज भी याद की जाती है। वहीं राज कपूर और देव आनंद जैसे सितारों के साथ भी उन्होंने काम किया। मधुबाला का निजी जीवन भी चर्चा में रहा। दिलीप कुमार के साथ उनका प्रेम संबंध गहरा था लेकिन पारिवारिक कारणों से दोनों अलग हो गए। बाद में उन्होंने किशोर कुमार से विवाह किया जिन्होंने उनके कठिन समय में साथ निभाया। उनकी जिंदगी में संघर्ष भी कम नहीं थे। 1960 के दशक में पता चला कि उनके दिल में छेद है। इस गंभीर बीमारी ने धीरे धीरे उनके स्वास्थ्य को कमजोर कर दिया। विदेश में इलाज की कोशिशें भी सफल नहीं हो सकीं। तमाम तकलीफों के बावजूद उन्होंने अपने आत्मसम्मान और हौसले को कभी टूटने नहीं दिया। करीब 70 फिल्मों में अभिनय करने वाली मधुबाला ने महज 36 साल की उम्र में 23 फरवरी 1969 को दुनिया को अलविदा कह दिया। कम उम्र में विदा लेने के बावजूद वह आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं बल्कि एक ऐसी लड़की की भी है जिसने समय से आगे सोचने का साहस दिखाया। 12 साल की उम्र में स्टीयरिंग थामना हो या पुरुष प्रधान फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना हो मधुबाला ने हर मोर्चे पर यह साबित किया कि असली खूबसूरती आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच में होती है।