सिंगरौली थाने में दबंगई: बंदूक की नोंक पर अवैध रेत वाहन छुड़ाया, पुलिस देखती रह गई

सिंगरौली । जिले में अवैध रेत माफिया के हौसले अब कानून और पुलिस दोनों को चुनौती देने लगे हैं। ताजा मामला इसी डर को पुष्ट करता है जब चितरंगी थाने में पुलिस की मौजूदगी में हथियारबंद दबंगों ने अवैध रेत से भरे वाहन को बंदूक की नोंक पर छुड़ाकर ले गए। घटना का भयावह विवरण वन विभाग की टीम ने अवैध रेत से भरे वाहन को जब्त कर थाने में खड़ा किया था। उसी दौरान दर्जनों लोग गाड़ियों से थाने में पहुंचे। हाथों में हथियार और आंखों में दबंगई लिए आरोपियों ने वनकर्मियों को धमकाया गाली गलौज की और बंदूक लहराते हुए वाहन को जब्त कर फरार हो गए। घटना के दौरान पुलिस न केवल रोकने में असमर्थ रही बल्कि पूरे वाक्य के दौरान सिर्फ देखती रही। उठ रहे सवाल यह घटना सिस्टम और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या थाने में मौजूद पुलिसकर्मी असहाय थे या किसी दबाव में चुप्पी साध ली गई? क्या सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे? आरोपियों की पहचान हो चुकी है या नहीं? क्या किसी स्तर पर मिलीभगत हुई थी? ऐसे कई सवाल जिले में चर्चा का विषय बने हुए हैं। माफिया का ताकतवर नेटवर्क अवैध रेत उत्खनन सिंगरौली में नई बात नहीं है लेकिन इस बार मामला सीधे कानून को चुनौती देने वाला है। अगर बंदूक की नोंक पर थाने से वाहन छुड़ाया जा सकता है तो यह स्पष्ट संकेत है कि माफिया का नेटवर्क कितना मजबूत और प्रभावित है। पुलिस की प्रतिक्रिया घटना के बाद वनरक्षक ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच की बात कही है लेकिन फिलहाल कोई आधिकारिक बयान या गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह घटना न केवल अवैध रेत माफिया की ताकत का उदाहरण है बल्कि स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था की सख्ती पर भी सवाल खड़े करती है।
नर्मदापुरम के स्कूल में बदमाशों ने आग लगाई, दस्तावेज और फर्नीचर जलकर खाक

नर्मदापुरम। जिले के हिरनखेड़ा गांव में रविवार तड़के हड़कंप मच गया जब अज्ञात बदमाशों ने शासकीय माखनलाल चतुर्वेदी हायर सेकेंडरी स्कूल में घुसकर आग लगा दी। आरोपियों ने स्कूल के ऑफिस और रिकॉर्ड रूम को निशाना बनाया। आग इतनी भीषण थी कि स्कूल के महत्वपूर्ण दस्तावेज, फाइलें, सेवा पुस्तिकाएं, कंप्यूटर और फर्नीचर पूरी तरह जलकर खाक हो गए।ग्रामीणों का आक्रोश और सड़क जाम घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक लाखों का नुकसान हो चुका था। आक्रोशित ग्रामीणों ने धर्मकुंडी-इटारसी मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। उन्होंने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की और साथ ही स्कूल में लाइट और सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की भी अपील की। सुरक्षा व्यवस्था की कमी ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पर्याप्त सुरक्षा और बिजली व्यवस्था नहीं होने के कारण ऐसी घटनाएं होती हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और संदिग्धों की पहचान में जुट गई है। इस मामले की पुष्टि राकेश साहू, संकुल प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हीरानखेड़ा ने की। यह घटना शिक्षा और प्रशासनिक सुरक्षा की अनदेखी का उदाहरण भी सामने लाती है, जबकि ग्रामीण और शिक्षक दोनों ही बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं।
अकाउंट फ्रीज होने के बाद नहीं निकाल पाएंगे एक भी रुपया; समझिए उन 5 वजहों को जो आपके बैंक खाते को कर सकती हैं ब्लॉक

नई दिल्ली ।बैंकिंग सेवाओं के इस दौर में हमारा बैंक अकाउंट हमारी जीवनरेखा की तरह है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके खाते पर ताला लगवा सकती है? बैंक अकाउंट के ‘फ्रीज’ होने का सीधा मतलब है कि आप अपने ही जमा पैसों को न तो निकाल सकते हैं और न ही कहीं ट्रांसफर कर सकते हैं। बैंक यह सख्त कदम ग्राहकों की सुरक्षा और कानूनी नियमों के पालन के लिए उठाते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई हमेशा सुरक्षित रहे और लेनदेन में कोई बाधा न आए, तो आपको उन 5 प्रमुख वजहों को जान लेना चाहिए जिनकी वजह से बैंक आपके अकाउंट को फ्रीज कर सकता है। इन 5 कारणों से आपके खाते पर लग सकती है रोकबैंक बिना वजह किसी का खाता बंद नहीं करते, लेकिन निम्नलिखित परिस्थितियों में वे तुरंत कार्रवाई करने के लिए बाध्य होते हैं: संदिग्ध धोखाधड़ी या फर्जी लेन-देन: बैंकों के पास अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम होते हैं। अगर आपके खाते में अचानक कोई ऐसा ट्रांजैक्शन होता है जो आपकी पहचान की चोरी या वित्तीय धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है, तो बैंक सुरक्षा के लिहाज से तुरंत एक्सेस ब्लॉक कर देता है। कोर्ट आदेश या सरकारी जांच: यदि किसी व्यक्ति का कोई कानूनी विवाद चल रहा है या आयकर विभाग Income Tax और अन्य जांच एजेंसियों को किसी अनियमितता का शक होता है, तो वे बैंक को ‘गार्निशमेंट ऑर्डर’ जारी कर सकते हैं। ऐसे सरकारी आदेशों के बाद बैंक को खाता फ्रीज करना ही पड़ता है। मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका: ‘एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग’ नियमों के तहत बैंक हर उस ट्रांजैक्शन पर पैनी नजर रखते हैं जिसका स्रोत स्पष्ट नहीं होता। यदि खाते का उपयोग अवैध धन के लेन-देन या संदिग्ध गतिविधियों के लिए होता पाया जाता है, तो जांच पूरी होने तक उसे फ्रीज कर दिया जाता है। KYC या दस्तावेजों में कमी: अक्सर ग्राहक अपने बैंक अकाउंट की ‘KYC’ Know Your Customer अपडेट करने में ढिलाई बरतते हैं। अगर आप समय पर जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करते या आपका बैलेंस लगातार ‘नेगेटिव’ रहता है, तो बैंक रखरखाव नियमों के तहत लेनदेन रोक सकता है। असामान्य या हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन: अगर आपके खाते का पैटर्न अचानक बदल जाता है—जैसे अचानक बहुत बड़ी रकम का आना या बार-बार हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन होना—तो बैंक इसे सुरक्षा जोखिम मानकर अस्थायी रोक लगा सकता है ताकि पुष्टि की जा सके कि यह लेन-देन आप ही कर रहे हैं।
भोपाल में दिव्यांग टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ, सीएम डॉ. मोहन ने कहा- वर्ल्ड रिकॉर्ड की तैयारी

भोपाल। राजधानी भोपाल में एक अनूठा और प्रेरक आयोजन शुरू हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नेहरू नगर स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में दिव्यांग टी-20 क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन 5 दिन तक लगातार बिना रुके क्रिकेट खेलेंगे और यह आयोजन वर्ल्ड रिकॉर्ड के आधार पर चल रहा है। सीएम ने खिलाड़ियों को किया प्रोत्साहित मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को बधाई दी और कहा कि दिव्यांग होने के बावजूद खिलाड़ियों ने चुनौतियों को स्वीकार कर खेल में हिस्सा लिया है। उन्होंने बताया कि यह आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे न्यास के माध्यम से आयोजित किया गया है जिसमें मन की बात कार्यक्रम के तहत दिव्यांग क्रिकेट महोत्सव भी शामिल है। सीएम ने यह भी कहा कि 100 घंटे लगातार क्रिकेट मैच खेला जाएगा जिससे खेलों को बढ़ावा मिलेगा और प्रतिभाओं को पहचान मिलेगी। प्रतियोगिता का स्वरूप इस टूर्नामेंट में 8 राज्यों की 6 टीमें भाग ले रही हैं। कुल 100 घंटे तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में 25 टी-20 मैच दिन-रात खेले जाएंगे। खिलाड़ियों की मेहनत और जोश को देखते हुए यह आयोजन वर्ल्ड रिकॉर्ड लिंका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया गया है। खेल और समर्पण की मिसाल मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ी शरीर की सीमाओं के बावजूद खेल के मैदान में पूरी ऊर्जा के साथ भाग ले रहे हैं। यह न केवल खेलों को बढ़ावा देगा बल्कि समाज में दिव्यांग प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का संदेश भी देगा। खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण इस आयोजन को और भी खास बनाता है। यह टूर्नामेंट न केवल क्रिकेट प्रेमियों के लिए रोमांचक साबित होगा बल्कि यह यह भी दिखाएगा कि सीमाएँ केवल मानसिक हैं और सही अवसर मिलने पर कोई भी खेल की ऊँचाइयों को छू सकता है।
NBFC या बैंक: पर्सनल लोन लेने से पहले जानें सही विकल्प

नई दिल्ली । पैसे की जरूरत पड़ने पर सबसे पहले दिमाग में बैंक आता है। लेकिन बैंक के अलावा भारत में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी NBFC भी लाखों लोगों को लोन देती हैं। दोनों ही पर्सनल लोन की सुविधा देती हैं, लेकिन इनके बीच का फर्क समझना जरूरी है। लाइसेंसिंग, नियामक ढांचा और जमा स्वीकारने की क्षमता में अंतर होने के कारण सही विकल्प चुनना आपके भविष्य की आर्थिक परेशानियों से बचा सकता है।NBFC क्या है? NBFC वे कंपनियां हैं जो कंपनी अधिनियम 1956/2013 के तहत पंजीकृत होती हैं और RBI अधिनियम 1934 के अध्याय III-B के तहत विनियमित होती हैं। इनके पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता, बल्कि उन्हें विशेष वित्तीय गतिविधियों के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलता है। NBFC विभिन्न प्रकार के लोन देती हैं, फिक्स्ड डिपॉजिट सुविधा, बीमा और अन्य वित्तीय उत्पाद भी प्रदान करती हैं। बैंक क्या है? बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के तहत नियंत्रित होते हैं। ये बचत और चालू खाते के रूप में डिमांड डिपॉजिट स्वीकारते हैं और ऋण प्रदान करते हैं। NBFC और बैंक का सबसे बड़ा अंतर यह है कि बैंक भुगतान और निपटान प्रणाली का हिस्सा होते हैं और चेक/क्लीयरिंग सुविधा देते हैं, जबकि NBFC ऐसा नहीं कर सकती। NBFC से पर्सनल लोन क्यों लें? तेज प्रोसेसिंग: अधिकांश NBFC 24–48 घंटे में लोन राशि डिस्बर्स कर देती हैं। लचीले क्रेडिट मानदंड: मध्यम CIBIL स्कोर वाले या नए उधारकर्ता भी पात्र हो सकते हैं। कम दस्तावेज़ और डिजिटल प्रक्रिया: KYC और बैंक स्टेटमेंट ऑनलाइन अपलोड कर लोन प्रक्रिया पूरी होती है। कस्टमाइज्ड लोन: ट्रैवल, वेडिंग या छोटे ब्रिज लोन जैसी विशेष जरूरतों के लिए प्रोडक्ट डिजाइन किए जाते हैं। प्रतिस्पर्धी दरें: स्थिर आय और अच्छे रिकॉर्ड वाले ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दर मिल सकती है। बैंक से पर्सनल लोन क्यों लें? कम ब्याज दर: बैंक की ब्याज दर NBFC से 2–5% कम हो सकती है।पारदर्शी शुल्क: RBI दिशा-निर्देशों से छिपे चार्ज कम होते हैं।बड़ी लोन राशि: ₹20–40 लाख तक बड़े लोन के लिए बैंक उपयुक्त हैं। मौजूदा संबंध का लाभ: सैलरी अकाउंट या FD से प्री-अप्रूव्ड लोन और विशेष ब्याज दर मिल सकती है। शाखा नेटवर्क और ग्राहक सहायता: समस्या का समाधान सीधे शाखा में मिल सकता है। NBFC vs बैंक: कौन बेहतर? यदि आपको तेजी और सुविधा चाहिए तो NBFC बेहतर हैं। वहीं, यदि आपकी प्राथमिकता कम ब्याज दर, बड़ी राशि और दीर्घकालिक विश्वसनीयता है तो बैंक अधिक उपयुक्त हैं। दोनों RBI द्वारा विनियमित हैं, लेकिन बैंक में बचत खाते पर DICGC बीमा का अतिरिक्त सुरक्षा लाभ मिलता है।
Holi 2026: जिद्दी रंगों और एलर्जी को कहें 'बाय-बाय', बस ये आसान प्री और पोस्ट स्किन केयर रूटीन बचाएंगे आपका निखार

नई दिल्ली ।होली के त्योहार में रंगों की मस्ती तभी फीकी पड़ने लगती है जब स्किन एलर्जी या जिद्दी केमिकल वाले रंगों का डर सताने लगता है। अक्सर लोग अपनी त्वचा के खराब होने के खौफ से खुद को घर के अंदर कैद कर लेते हैं, लेकिन सावधानी ही सुरक्षा है। अगर आप सही Pre-Holi और Post-Holi स्किन केयर रूटीन अपनाएं, तो आप बिना किसी फिक्र के गुलाल और पानी का भरपूर आनंद ले सकते हैं। आइए जानते हैं वे प्रभावी टिप्स जो आपकी त्वचा को रंगों के दुष्प्रभाव से बचाकर उसे रेशमी और चमकदार बनाए रखेंगे।होली से पहले: सुरक्षा की ढाल तैयार करेंहोली के मैदान में उतरने से पहले अपनी त्वचा पर एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनाना जरूरी है, ताकि रंग रोमछिद्रों के अंदर न समा सकें। इसके लिए सबसे पहला कदम है “त्वचा को डीप मॉइस्चराइज करना”। घर से बाहर निकलने से पहले स्किन को अच्छे से हाइड्रेट करें। आप लाइट वेट मॉइस्चराइजर या हाइलूरोनिक एसिड वाले सीरम का उपयोग कर सकते हैं। यह त्वचा और रंगों के बीच एक फिजिकल बैरियर बना देता है। यदि आपकी स्किन ड्राई है, तो तेल आधारित मॉइस्चराइजर लगाना सबसे बेहतर विकल्प है। दूसरा महत्वपूर्ण टिप है “एक्सफोलिएशन से दूरी”। होली से कम से कम दो दिन पहले किसी भी तरह के स्क्रब या फेस पीलिंग ट्रीटमेंट से बचें। एक्सफोलिएशन से डेड स्किन हट जाती है, जिससे नई त्वचा काफी संवेदनशील हो जाती है और रंगों के केमिकल उस पर तुरंत जलन या रैशेज पैदा कर सकते हैं। इसके साथ ही, अपने नाखूनों की सुरक्षा करना न भूलें। नाखूनों पर क्लियर नेल पॉलिश या बेस कोट की एक परत लगाएं, ताकि रंग अंदर तक न फंसे और बाद में आसानी से साफ हो जाए। अंत में एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना अनिवार्य है। धूप में घंटों होली खेलने से होने वाली टैनिंग और UV किरणों के नुकसान से बचने के लिए इसे चेहरे, गर्दन और बाहों पर जरूर लगाएं। होली के बाद: ऐसे लौटाएं अपनी खोई हुई रौनकरंगों से सराबोर होने के बाद बारी आती है उन्हें सही तरीके से साफ करने की। यहाँ सबसे बड़ी गलती लोग “गर्म पानी” का इस्तेमाल करके करते हैं। हमेशा याद रखें कि रंगों को ठंडे पानी से ही धोना चाहिए। गर्म पानी रंगों को त्वचा पर और अधिक पक्का कर देता है, जिससे उन्हें निकालना मुश्किल हो जाता है। त्वचा से रंग हटाने के लिए किसी कठोर साबुन के बजाय “जेंटल और हाइड्रेटिंग फेस क्लींजर” का चुनाव करें। इसे सर्कुलर मोशन में हल्के हाथों से रगड़ें और फिर पानी से धो लें। ध्यान रहे कि चेहरा सुखाते समय तौलिए से रगड़ें नहीं, बल्कि हल्के हाथों से थपथपाकर Pat dry सुखाएं। एक बार रंग निकल जाने के बाद, नमी को लॉक करना सबसे जरूरी है। त्वचा के नेचुरल हाइड्रेशन लेवल को बहाल करने के लिए रिपेयरिंग सीरम और एक हैवी मॉइस्चराइजर लगाएं। अंत में भले ही होली खत्म हो गई हो, लेकिन अगले कुछ दिनों तक सनस्क्रीन का उपयोग जारी रखें, क्योंकि रंगों के संपर्क में आने के बाद स्किन काफी सेंसिटिव हो जाती है और सूरज की रोशनी उसे जल्दी नुकसान पहुंचा सकती है।
पद्मावत के बाद अब सोमनाथ की गाथा! पर्दे पर जीवंत होगा गजनवी का हमला और महादेव के मंदिर का पुनरुत्थान; भंसाली का नया मास्टरस्ट्रोक।

नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली अपनी भव्यता और ऐतिहासिक कहानियों को जीवंत करने के लिए जाने जाते हैं। इस शिवरात्रि पर उन्होंने अपनी नई महात्वाकांक्षी फिल्म ‘जय सोमनाथ’ की घोषणा कर मनोरंजन जगत और इतिहास प्रेमियों में हलचल पैदा कर दी है। यह फिल्म केवल एक मंदिर की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस अदम्य शक्ति और कभी न हारने वाली हिम्मत का प्रतीक है, जिसने सदियों तक विदेशी आक्रांताओं के वार सहे, लेकिन हर बार पहले से अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ी हुई। इस बार भंसाली ने मशहूर निर्देशक केतन मेहता के साथ हाथ मिलाया है, जो इस बात का संकेत है कि सोमनाथ मंदिर के 17 बार विध्वंस और पुनर्निर्माण की गाथा को बहुत ही गहराई और भव्यता के साथ पर्दे पर उतारा जाएगा। इतिहास के पन्नों को पलटें तो सोमनाथ मंदिर पर लगभग छह सदियों तक बार-बार क्रूर हमले हुए। इस श्रृंखला में सबसे विनाशकारी हमला 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने किया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, गजनवी ने न केवल मंदिर की अकूत संपत्ति लूटी, बल्कि पवित्र ज्योतिर्लिंग को भी भारी नुकसान पहुंचाया। हमलों का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा; 1299 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के जनरल उलग खान ने हमला कर मूर्ति को दिल्ली ले जाने का दुस्साहस किया। इसके बाद 1395 में जफर खान, 1451 में महमूद बेगड़ा और अंततः 1665 में मुगल शासक औरंगजेब के आदेशों पर इस आस्था के केंद्र को बार-बार खंडित किया गया। भंसाली की यह फिल्म इन जख्मों और उनसे उबरने की भारतीय जिजीविषा को बड़े पर्दे पर पेश करेगी। संजय लीला भंसाली का इतिहास से पुराना नाता रहा है। इससे पहले उन्होंने ‘पद्मावत’ के जरिए रानी पद्मावती के त्याग और जौहर की उस शौर्य गाथा को दिखाया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। खिलजी के उन्माद और राजपूतों की आन-बान-शान को भंसाली ने जिस बारीकी से फिल्माया, वह आज भी मिसाल है। इसके अलावा ‘हीरामंडी’, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया है कि वे बीते हुए कल को वर्तमान में जीवंत करने की अद्भुत कला रखते हैं। ‘जय सोमनाथ’ के जरिए पहली बार भारतीय इतिहास का वह काला अध्याय और उसके बाद की विजय गाथा सामने आ रही है, जिसे अब तक मुख्यधारा के सिनेमा ने अछूता छोड़ दिया था। केतन मेहता की ऐतिहासिक समझ और भंसाली की भव्य सिनेमैटोग्राफी का मिलन इस फिल्म को दशक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक फिल्म बना सकता है। यह फिल्म न केवल महमूद गजनवी की बर्बरता को उजागर करेगी, बल्कि यह भी दिखाएगी कि कैसे हर विध्वंस के बाद करोड़ों भारतीयों की आस्था ने सोमनाथ को फिर से संवारा और आज भी वह गौरव के साथ खड़ा है।
दिल्ली में घर खरीदना बन गया लक्जरी, जानें सर्कल रेट के हिसाब से सबसे महंगे 5 इलाके

नई दिल्ली । देश की राजधानी नई दिल्ली में घर खरीदना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुका है। खासतौर पर ए-कैटेगरी के इलाके, जहां सर्कल रेट सबसे ऊंचे हैं, वहां संपत्ति लेना सामान्य खरीदार के लिए आसान नहीं। राजधानी में ए से लेकर एच श्रेणियों तक के इलाके हैं, जिनमें ए-कैटेगरी का न्यूनतम सर्कल रेट करीब 7.74 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंचता है। ऐसे इलाकों में बड़े-बड़े बंगले, लक्जरी फ्लैट और प्रीमियम मार्केट मिलते हैं। सबसे महंगा इलाका है लुटियंस बंगला जोन, जिसे LBZ भी कहा जाता है। राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और कई केंद्रीय मंत्रियों के घरों के पास फैले इस इलाके में बड़े प्लॉट और विशाल बंगले हैं। पृथ्वीराज रोड और अमृता शेरगिल मार्ग जैसे प्रतिष्ठित पते इसी क्षेत्र में आते हैं। इसकी कीमतें देश में सबसे ऊंची मानी जाती हैं और यहां घर खरीदना सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि सामाजिक हैसियत का प्रतीक भी है। इसके बाद आता है गोल्फ लिंक्स। दिल्ली गोल्फ कोर्स के पास स्थित यह इलाका शांत वातावरण और बड़े प्लॉट वाले लक्जरी घरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां घर लेना सिर्फ आर्थिक क्षमता नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर और प्रतिष्ठा दिखाने का तरीका भी है। तीसरे नंबर पर है जोर बाग, जो लोदी गार्डन और सफदरजंग मकबरे के पास स्थित है। सीमित प्लॉट और उच्च मांग के कारण यहां कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं। यह इलाका हाई-प्रोफाइल कारोबारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की पसंदीदा जगह माना जाता है। चौथे स्थान पर है चाणक्यपुरी, दिल्ली का डिप्लोमैटिक एन्क्लेव। यहां कई विदेशी दूतावास, चौड़ी सड़कें, हरियाली और उच्च सुरक्षा है। ए-कैटेगरी में शामिल होने के कारण सर्कल रेट राजधानी में सबसे अधिक है। पांचवें नंबर पर है ग्रेटर कैलाश GK-1 और GK-2। यह साउथ दिल्ली का प्रमुख रिहायशी और प्रीमियम मार्केट वाला इलाका है। यहां लक्जरी फ्लैट, हाई-एंड बिल्डर फ्लोर मौजूद हैं। भले ही कुछ हिस्सों में अपार्टमेंट संस्कृति भी है, फिर भी सर्कल रेट ए-कैटेगरी में आता है। इन इलाकों की कीमतें लोकेशन, सीमित जमीन, सत्ता और प्रशासनिक केंद्र के नजदीक होने, हरियाली और सुरक्षा के कारण ऊंची हैं। मांग अधिक और आपूर्ति सीमित होने से सर्कल रेट और बाजार मूल्य दोनों लगातार ऊंचे बने रहते हैं। दिल्ली में घर लेना कई लोगों का सपना है, लेकिन इन इलाकों में रहना केवल सपनों की पूर्ति नहीं बल्कि सामाजिक स्तर और जीवनशैली का प्रतीक भी है।
ब्राजील बना भारत का 'सुपर पार्टनर': रेयर अर्थ मिनरल्स से लेकर एयरोस्पेस तक 9 बड़े समझौते, चीन के एकाधिकार पर मोदी का सीधा प्रहार!

नई दिल्ली ।दुनिया भर में ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ दुर्लभ खनिजों की प्रोसेसिंग और खनन पर लगभग 70% से 90% तक नियंत्रण रखने वाला चीन अब मुश्किल में पड़ सकता है। अपनी इस ताकत के दम पर समय-समय पर दुनिया को आंख दिखाने वाले चीन की हेकड़ी को शांत करने के लिए भारत ने एक मास्टरस्ट्रोक खेला है। शनिवार को भारत और ब्राजील के बीच एक ऐसी ऐतिहासिक ट्रेड डील हुई है, जो न केवल चीन पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन के समीकरण को भी पूरी तरह बदल कर रख देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने जरूरी मिनरल्स और स्टील सप्लाई चेन में सहयोग के लिए समझौतों पर मुहर लगा दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस साझेदारी को रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि ब्राजील के साथ हुए इस खनिज समझौते से चीन पर भारत की निर्भरता काफी हद तक कम होगी और यह एक मजबूत, सुरक्षित सप्लाई चेन बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस मुलाकात के दौरान भारत और ब्राजील ने साल 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया है। आपको बता दें कि 2006 में जहां यह व्यापार महज 2.4 अरब डॉलर था, वहीं अब यह 15 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, लेकिन दोनों नेताओं का मानना है कि दोनों देशों की क्षमता इससे कहीं अधिक है। इस ऐतिहासिक अवसर पर कुल 9 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें सबसे प्रमुख है ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ के क्षेत्र में सहयोग और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बनाई गई ‘डिजिटल साझेदारी’। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि ब्राजील के पास नायोबियम, लिथियम और लौह अयस्क जैसे बहुमूल्य खनिज संसाधनों का भंडार है, जबकि भारत के पास विश्व स्तरीय तकनीक और विनिर्माण क्षमता है। जब ये दोनों शक्तियां हाथ मिलाएंगी, तो दुनिया को एक वैकल्पिक और विश्वसनीय औद्योगिक पार्टनर मिलेगा। व्यापारिक मोर्चे पर भी बड़े कदम उठाए गए हैं। एनएमडीसी, वेल और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच करीब 500 मिलियन डॉलर की लागत से लौह अयस्क ब्लेंडिंग सुविधा स्थापित करने पर सहमति बनी है। इसके अलावा, एयरोस्पेस क्षेत्र में एक बड़ी सफलता तब मिली जब ब्राजील की दिग्गज कंपनी ‘एम्ब्रेयर’ और ‘अडानी डिफेंस’ ने भारत में ई175 रीजनल जेट की असेंबली लाइन स्थापित करने का फैसला किया। फार्मा क्षेत्र में भी कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं के संयुक्त शोध के लिए हाथ मिलाया गया है। साफ है कि भारत और ब्राजील की यह नई जुगलबंदी न केवल चीन के आर्थिक दबदबे को चुनौती दे रही है, बल्कि विकासशील देशों के हितों को वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित भी कर रही है।
सोना-चांदी की कीमतों में 'यू-टर्न': रिकवरी के बाद भी हाई लेवल से ₹1.67 लाख सस्ती है चांदी, जानें निवेश का सही मौका!

नई दिल्ली ।भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बीते एक सप्ताह के दौरान हलचल तेज रही है। लंबे समय की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों ने एक बार फिर ‘यू-टर्न’ लिया है और निवेशकों के चेहरों पर चमक लौट आई है। बीते हफ्ते दोनों कीमती धातुओं में जोरदार उछाल देखने को मिला, लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस हालिया तेजी के बावजूद सोना और चांदी अपने ऑल-टाइम हाई लेवल से अब भी काफी रियायती दरों पर उपलब्ध हैं। खास तौर पर चांदी की बात करें तो यह अपने जीवनकाल के उच्चतम स्तर से अभी भी 1.67 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती मिल रही है, जो खरीदारों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। बाजार के आंकड़ों पर गौर करें तो चांदी की कीमतों में बीते सप्ताह जबरदस्त रिकवरी दर्ज की गई है। हफ्ते भर के भीतर चांदी 8,584 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हुई है। 13 फरवरी को जहां चांदी 2,44,360 रुपये पर बंद हुई थी, वहीं शुक्रवार तक यह उछलकर 2,52,944 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, यदि हम इसकी तुलना 29 जनवरी के उस ऐतिहासिक दिन से करें जब चांदी ने पहली बार 4 लाख का आंकड़ा पार करते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलो का “लाइफ टाइम हाई” छुआ था, तो मौजूदा भाव अब भी 1,67,104 रुपये प्रति किलोग्राम कम है। चांदी की कीमतों में आया यह “क्रैश” उन लोगों के लिए मुफीद है जो लंबी अवधि के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं। चांदी की ही राह पर चलते हुए सोने ने भी बीते सप्ताह अपनी चमक बिखेरी है। एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना हफ्ते भर में 981 रुपये महंगा होकर 1,56,876 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। सोने की कहानी भी चांदी जैसी ही है; बीते महीने 29 जनवरी को सोना भागते हुए 1,93,096 रुपये के शिखर पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद आई भारी गिरावट की वजह से यह अब भी अपने हाई लेवल से लगभग 36,220 रुपये सस्ता बना हुआ है। घरेलू बाजार की बात करें तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट के अनुसार, शुद्धता के आधार पर सोने की कीमतों में भी बदलाव आया है। वर्तमान में 24 कैरेट गोल्ड का रेट 1,55,066 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है। वहीं, आभूषणों के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,51,340 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। इसके अलावा, 20 कैरेट सोने का रेट 1,38,010 रुपये और 18 कैरेट का भाव 1,25,600 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह हालिया रिकवरी वैश्विक अनिश्चितताओं का परिणाम हो सकती है, लेकिन हाई लेवल से भारी गिरावट के कारण अभी भी बाजार में खरीदारी का माहौल बना हुआ है।