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नेपाल में हुई चीन-पाक की Secret Meeting…. भारत के खिलाफ साजिश रोडमैप किया तैयार

बीजिंग। नेपाल (Nepal) की राजधानी काठमांडो के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले रिहायशी इलाके बालुवाटार में 16 फरवरी को पाकिस्तान और चीन के अधिकारियों (Pakistani and Chinese officials) की एक सीक्रेट बैठक (Secret Meeting) आयोजित की गई। इस बैठक में चीन और पाकिस्तान के आला अधिकारी मौजूद थे। खास बात यह रही कि इस बैठक में नेपाल स्थित पाकिस्तान दूतावास में तैनात पाकिस्तानी डिफेंस अटैची कर्नल हफीज उर रहमान भी शामिल हुए। इस बैठक में भारत को अस्थिर करने के लिए अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के नाम पर साजिश का एक रोडमैप तैयार किया गया। इसके लिए बाकायदा चीन और पाकिस्तान में नेपाल के स्थानीय पत्रकारों से लेकर समाजसेवियों व दक्षिणी नेपाल के मधेशिया समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों को चिन्हित कर टास्क देने की पूरी योजना बनाई गई। केंद्रीय खुफिया एजेंसी को लगातार मिल रहे इनपुट के आधार पर इस बात के पुख्ता प्रमाण मिल चुके हैं कि भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए चीन और पाकिस्तान नेपाल की जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।विज्ञापन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पाकिस्तान और चीन के सात प्रमुख अधिकारी शामिल थे। तकरीबन पौने दो घंटे चली इस बैठक में चीन की ओर से भारत को अस्थिर करने के लिए अरुणाचल प्रदेश का जिक्र किया गया। बैठक 20 फरवरी को मनाए जाने वाले अरुणाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर माहौल खराब करने के लिए की गई थी। इसके लिए बाकायदा चीन ने 23 स्थानीय लोगों का चयन किया था। एक्सचेंज प्रोग्राम की आड़ में भड़काने की योजनाइस योजना के तहत नेपाल के उन लोगों को चयनित किया गया था जो कि चीन के अलग-अलग हिस्सों में बीते दो वर्षों के दौरान यात्रा करके आए थे। हालांकि यह बात अलग है चीन और पाकिस्तान की बड़ी साजिश जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तवांग को अपना हिस्सा बताने का नैरेटिव सेट करने की थी पूरी तरह फ्लॉप हो गई। इसमें योजना यह बनाई गई थी कि नेपाल के इन 23 लोगों में से कुछ लोगों को भारत भेजा जाएगा। अभी भी इसमें से 14 लोगों को नॉर्थ ईस्ट जाकर पूरी जानकारियां इकट्ठा करने के लिए भेजने की योजना बनाई जा रही है। केंद्रीय खुफिया एजेंसी को मिले इनपुट के आधार पर इस बात की भी पुष्टि हुई है कि इस पूरी योजना के पीछे चीन के चेंगदू स्थित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पश्चिमी थिएटर कमान के कुछ अधिकारियों की पूरी साजिश थी। दरअसल दिसंबर 2024 से चीन ने नेपाल के ललितपुर और कीर्तिपुर में अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धरोहरों के साथ अपनी भाषा के प्रचार के लिए दो केंद्र स्थापित किए हैं। अब तक हो चुकीं कई बैठकेंसूत्रों के मुताबिक बीते कुछ समय से चीन और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच में काठमांडू में लगातार कई बैठकें आयोजित की जा चुकी है। इसमें कई बैठकें तो ऐसी भी आयोजित हुई हैं जिसमें दूतावास के कार्यक्रमों के बहाने पकिस्तान की आईएसआई से जुड़े अधिकारी भी नेपाल पहुंचे। पिछले सोमवार को आयोजित हुई इस बैठक में पकिस्तान के डिफेंस अटैची समेत दूतावास के तीन प्रमुख अधिकारी भी शामिल थे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पाकिस्तान के अधिकारियों ने चीनी अधिकारियों के साथ बलूचिस्तान में हो रहे विद्रोह और उसके चलते पाकिस्तान में चीन की ओर से चलाई जाने वाले प्रोजेक्ट की पूरी रिपोर्ट की चर्चा की गई।

AI के दौर में 80 लाख नौकरियों की दरकार, पी. चिदंबरम ने जताई सामाजिक विस्फोट की आशंका

नई दिल्ली । कृत्रिम मेधा एआई के तेजी से विस्तार के बीच भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार सृजन की है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने चेतावनी दी है कि देश को हर साल कम से कम 80 लाख नई नौकरियां पैदा करनी होंगी, जबकि वास्तविक आवश्यकता इससे भी अधिक हो सकती है। उनका कहना है कि आधिकारिक बेरोजगारी दर भले 5.1 प्रतिशत बताई जाती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कहीं अधिक गंभीर है। युवा बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और लगभग 55 प्रतिशत लोग स्वरोजगार या दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं, जो अस्थिर आय और असुरक्षित भविष्य का संकेत है। चिदंबरम ने कहा कि एआई मानव क्षमताओं और उत्पादकता को कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके साथ बड़े पैमाने पर रोजगार विस्थापन का खतरा भी जुड़ा है। उन्होंने डारियो अमोदेई के उस विश्लेषण का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि एआई अभूतपूर्व गति से श्रम बाजारों को बाधित कर सकता है और निकट भविष्य में वाइट कॉलर नौकरियों का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। टिकट चेकर, बस और ट्रेन कंडक्टर, रेल सिग्नलकर्मी, स्टेनोग्राफर, टाइपिस्ट, बैंक कर्मचारी, अनुवादक और निजी शिक्षक जैसी पारंपरिक नौकरियां स्वचालन की चपेट में आ सकती हैं। हाल के घटनाक्रम भी इस आशंका को बल देते हैं। Microsoft के सीईओ ने संकेत दिया है कि कई भूमिकाओं में स्वचालन बढ़ेगा और कंपनी ने 2025 में हजारों कर्मचारियों की छंटनी की। इसी तरह Tata Consultancy Services ने पुनर्गठन के तहत बारह हजार से अधिक कर्मचारियों को हटाने की घोषणा की। टेक निवेशक विनोद खोसला का मानना है कि एआई के कारण आईटी सेवाएं और बीपीओ उद्योग आने वाले वर्षों में बुनियादी बदलाव से गुजरेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई को भविष्य और समृद्धि का माध्यम बताया है, लेकिन चिदंबरम का तर्क है कि भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना विकसित देशों से भिन्न है। यहां उच्चतर माध्यमिक स्तर पर नामांकन में गिरावट देखी जाती है और उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात 45-50 प्रतिशत के बीच है। अधिकांश स्नातक डिग्रीधारी रोजगार योग्य कौशल से वंचित रहते हैं, जिससे उपयुक्त नौकरी पाना कठिन हो जाता है। उन्होंने आगाह किया कि यदि शहरी क्षेत्रों में भी रोजगार सिमटने लगे और शिक्षित युवाओं को आईटी व अन्य कुशल क्षेत्रों में अवसर न मिलें, तो सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है। समाधान के तौर पर उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण प्रबंधन में बड़े निवेश, कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा, गैर-रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की समीक्षा और स्थानीय बाजारों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। एमएसएमई क्षेत्र को सबसे बड़ा रोजगार सृजक बताते हुए उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग इन उद्यमों की उत्पादकता बढ़ाने में किया जाए, न कि केवल लागत घटाने में। चिदंबरम का निष्कर्ष स्पष्ट है तकनीक को अपनाना अनिवार्य है, लेकिन इसके साथ रोजगार सृजन की सामाजिक जिम्मेदारी भी तय करनी होगी। अन्यथा, काम से वंचित समाज असंतुलन और असंतोष की ओर बढ़ सकता है। एआई का प्रभाव आने वाले वर्षों में और स्पष्ट होगा, इसलिए अभी से ठोस नीतिगत कदम उठाने का समय है।

पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल

इस्लामाबाद/काबुल। पाकिस्तान (Pakistan) ने एक बार फिर अफगानिस्तान (Afghanistan.) के भीतर घुसकर सैन्य कार्रवाई (Military Action) की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि सीमा पार सात आतंकी कैंप और ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस्लामाबाद का कहना है कि ये ठिकाने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और इस्लामिक स्टेट-खोरासान (ISKP) से जुड़े लोगों के थे. पाकिस्तान सरकार TTP को ‘फितना अल खवारिज’ कहती है. बयान में कहा गया कि हाल के आत्मघाती हमलों, जिनमें इस्लामाबाद की इमाम बारगाह, बाजौर और बन्नू में धमाके शामिल हैं, के बाद यह जवाबी कार्रवाई की गई. रमजान के महीने में हुए ताजा हमले को भी इसका कारण बताया गया. पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके पास पक्के सबूत हैं कि ये हमले अफगानिस्तान में बैठे नेतृत्व और संचालकों के इशारे पर कराए गए. बयान में कहा गया कि जिम्मेदारी भी अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी और ISKP ने ली थी. पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर चुने हुए ठिकानों पर की गई. इस हमले पर तालिबान ने कहा है कि अब वह सही समय पर जवाब देगा। बलूच एक्टिविस्ट मीर यार बलोच ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान की कायर सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया और पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में ड्रोन और हवाई हमले किए. उनके मुताबिक इन हमलों में एक धार्मिक मदरसे को निशाना बनाया गया, जहां मौजूद कुरान की प्रतियां भी नष्ट हो गईं. मीर यार बलोच ने इसे ‘दमनकारी सैन्य कार्रवाई’ करार दिया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्र में अस्थिरता और नफरत को और बढ़ाएगी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने रमजान से पहले कार्रवाई की धमकी दी थी। तालिबान के प्रवक्ता ने क्या कहा?अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीती रात पाकिस्तानी सेना ने अफगान क्षेत्र में घुसकर नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में बमबारी की. उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे भी मारे गए और कई लोग घायल हुए हैं. मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा नाकामियों को छिपाने के लिए अफगान जमीन को निशाना बना रहा है और ऐसे कदम क्षेत्र में हालात और बिगाड़ेंगे। एयर स्ट्राइक से पहले दहला पाकिस्तानइस हमले से पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में एक आत्मघाती हमला हुआ था. पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के अनुसार, एक खुफिया अभियान के दौरान सेना के काफिले को निशाना बनाया गया. हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सिपाही की मौत हो गई. सेना ने कहा कि पांच आतंकियों को मार गिराया गया, लेकिन एक विस्फोटक वाहन सेना की गाड़ी से टकरा गया, जिससे भारी नुकसान हुआ. इससे पहले 16 फरवरी को बाजौर में भी एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था. उसमें 11 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई थी. एक बच्ची की भी जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे. पाकिस्तान ने कहा कि हमलावर अफगान तालिबान की विशेष इकाई से जुड़ा था और टीटीपी ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। पाकिस्तान का क्या है आरोप?पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि अफगान तालिबान सरकार अपनी जमीन से टीटीपी को काम करने से रोकने में नाकाम रही है. बयान में कहा गया कि कई बार चेतावनी देने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए. पाकिस्तान ने दोहा समझौते का हवाला देते हुए कहा कि अफगान अंतरिम सरकार को अपनी जमीन किसी दूसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए। पहले भी किया है हमलायह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने सीमा पार हमला किया हो. पिछले साल भी अफगानिस्तान के खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमलों की खबर आई थी. उस समय काबुल ने पाकिस्तान पर बमबारी का आरोप लगाया था, हालांकि इस्लामाबाद ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी. दोनों देशों के रिश्ते 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से लगातार बिगड़ते रहे हैं. सीमा पर झड़पें आम हो चुकी हैं।

26/11 के सीन ने तोड़ दिए जज़्बात धुरंधर के सेट पर फूट-फूटकर रो पड़े अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल

नई दिल्ली । आदित्य धर की फिल्म धुरंधर ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई कर खुद को हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शुमार कर लिया है। 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई इस फिल्म को देश-विदेश में जबरदस्त सराहना मिली। दमदार कहानी भव्य सेट प्रभावशाली संगीत और कलाकारों की सशक्त अदाकारी ने इसे दर्शकों के दिलों में खास जगह दिलाई। लेकिन फिल्म का एक सीन ऐसा था जिसने पर्दे के पीछे कलाकारों को भी भीतर तक झकझोर दिया। 26/11 मुंबई आतंकी हमले पर आधारित एक दृश्य की शूटिंग के बाद अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल खुद को संभाल नहीं पाए और फूट-फूटकर रो पड़े। इस भावुक घटना का खुलासा आर माधवन ने एक इंटरव्यू में किया। फिल्म में अक्षय खन्ना रहमान डकैत और अर्जुन रामपाल आईएसआई मेजर इकबाल की भूमिका में नजर आए हैं। कहानी के एक अहम हिस्से में 26/11 के भयावह आतंकी हमले को रीक्रिएट किया गया। इस दृश्य में दोनों किरदार हमले के बाद जश्न मनाते दिखते हैं। अभिनय की दृष्टि से यह दृश्य बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि भारतीय कलाकारों को उन किरदारों को निभाना था जो भारत के खिलाफ खड़े दिखाए गए थे। आर माधवन ने बताया कि जब यह सीन शूट हो रहा था तब सेट पर गहरा सन्नाटा और भारी माहौल था। जैसे ही कैमरा बंद हुआ अक्षय और अर्जुन भावनाओं से टूट गए और रोने लगे। माधवन के अनुसार यह सिर्फ एक अभिनय नहीं था बल्कि उस दर्दनाक घटना की यादों से सामना था जिसने पूरे देश को हिला दिया था। 26/11 की त्रासदी आज भी लोगों के ज़ेहन में ताजा है। ऐसे में उस घटना को उल्टे नजरिए से निभाना कलाकारों के लिए बेहद पीड़ादायक साबित हुआ। उन्होंने कहा कि उस पल उन्हें एहसास हुआ कि सिनेमा की ताकत कितनी गहरी होती है वह कलाकारों को भी वास्तविकता के बेहद करीब ले जाती है। यह अनुभव उनके लिए भी भावनात्मक रूप से परिवर्तनकारी था और उन्होंने महसूस किया कि अच्छा कंटेंट केवल मनोरंजन नहीं बल्कि संवेदनाओं को झकझोरने का माध्यम भी होता है। धुरंधर में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में हैं जिन्होंने अपने किरदार को पूरी ऊर्जा और तीव्रता के साथ निभाया है। उनके अलावा संजय दत्त सारा अर्जुन अक्षय खन्ना अर्जुन रामपाल दानिश पंडोर गौरव गेरा सौम्या टंडन राकेश बेदी और आर माधवन जैसे कलाकारों ने फिल्म को और मजबूत बनाया। फिल्म के एक्शन सीक्वेंस और भावनात्मक दृश्यों ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। रिलीज के साथ ही इसने कई बड़े रिकॉर्ड तोड़े और शानदार कमाई की। अब दर्शकों की नजर इसके दूसरे भाग पर है जो 19 मार्च को रिलीज होने जा रहा है। धुरंधर ने साबित कर दिया है कि जब कहानी सच्चाई के करीब हो और कलाकार उसे पूरी ईमानदारी से जिएं तो सिनेमा महज परदे तक सीमित नहीं रहता बल्कि दिलों में उतर जाता है।

SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया

नई दिल्ली/वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक बड़े फैसले के बाद हार मानने के बजाय अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं. कल सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ (Emergency Tariff) को अवैध करार दे दिया था. कोर्ट का कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है. इस फैसले से उन कंपनियों को बड़ी राहत मिली थी जो अरबों डॉलर का टैक्स भर रही थीं. लेकिन ट्रंप ने तुरंत पलटवार करते हुए नए ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का फैसला किया है.। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ट्रेड पॉलिसी से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि वह ‘सेक्शन 122’ जैसी दूसरी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे. राष्ट्रपति का यह अड़ियल रवैया बता रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव और बढ़ेगा. इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल रिफंड को लेकर खड़ा हो गया है. कंपनियां अपने अरबों डॉलर वापस मांग रही हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी में है। 1. सेक्शन 122 क्या है और ट्रंप इसे हथियार क्यों बना रहे हैं?सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप ने अब ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का सहारा लिया है. यह कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वह गंभीर व्यापार घाटे को रोकने के लिए 15% तक का अस्थाई टैरिफ लगा सकते हैं. हालांकि, इसकी एक बड़ी सीमा है कि यह सिर्फ 150 दिनों के लिए ही प्रभावी रह सकता है. इसके बाद राष्ट्रपति को संसद यानी कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी. ट्रंप का मानना है कि इससे उन्हें वह ताकत वापस मिल जाएगी जो कोर्ट ने उनसे छीनी है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों पर भी निशाना साधा और इसे देश के लिए एक बुरा फैसला बताया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें जांच की लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. वह इसे तुरंत लागू करके अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को बरकरार रखना चाहते हैं। 2. इलिनोय के गवर्नर ने ट्रंप को 8.7 अरब डॉलर का बिल क्यों थमाया?इस पूरे विवाद में अब राजनीति भी गर्मा गई है. इलिनोय के गवर्नर जेबी प्रित्ज़कर ने ट्रंप को एक औपचारिक इनवॉइस यानी बिल भेजा है. इसमें उन्होंने ट्रंप से 8.68 अरब डॉलर के रिफंड की मांग की है. गवर्नर का तर्क है कि ट्रंप के अवैध टैरिफ की वजह से उनके राज्य के हर परिवार को करीब 1700 डॉलर का नुकसान हुआ है. उन्होंने इसे ‘पास्ट ड्यू’ यानी बकाया राशि बताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा। हालांकि, कानूनी तौर पर यह मामला इतना सीधा नहीं है. टैरिफ का भुगतान कंपनियां करती हैं, आम जनता नहीं. कंपनियां इस बोझ को ग्राहकों पर डालती हैं जिससे महंगाई बढ़ती है. ऐसे में अगर रिफंड मिलता भी है, तो वह कंपनियों को मिलेगा न कि सीधे आम लोगों को. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वॉलमार्ट या कॉस्टको जैसी कंपनियां ग्राहकों को पुराना पैसा वापस नहीं करेंगी।3. क्या रिफंड की जंग अगले 5 सालों तक खिंच सकती है?रिफंड के मुद्दे पर ट्रंप ने जो बयान दिया है, उसने बिजनेस जगत की नींद उड़ा दी है. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस पर अगले दो साल या शायद पांच साल तक मुकदमा चलेगा’. इसका मतलब है कि जिन कंपनियों ने पिछले साल अरबों डॉलर का टैक्स दिया है, उन्हें अपना पैसा वापस पाने के लिए कोर्ट के चक्कर काटने होंगे. ट्रंप प्रशासन ने पहले वादा किया था कि अगर कोर्ट का फैसला खिलाफ आया तो पैसा वापस कर दिया जाएगा। अब प्रशासन अपने ही वादे से मुकरता दिख रहा है. हजारों कंपनियों ने पहले ही सरकार पर केस कर रखा है. अब इन मामलों की सुनवाई ‘कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में होगी. छोटे व्यापारियों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, क्योंकि उनके पास लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए फंड नहीं है। 4. भारत और ग्लोबल मार्केट पर इस फैसले का क्या असर होगा?भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत पर लगे कुछ पुराने टैरिफ अवैध हो गए हैं. लेकिन ट्रंप के नए 10-15% ग्लोबल टैरिफ ने फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है. भारत का वाणिज्य मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहा है. मंत्रालय ने कहा है कि वह कोर्ट के फैसले और ट्रंप के बयानों का एनालिसिस कर रहा है। 5. क्या बर्बाद होगा ग्लोबल मार्केट?ट्रंप ने हिंट दिया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच वह तेल और अन्य चीजों पर दबाव बनाने के लिए मिलिट्री एक्शन भी ले सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी. भारतीय निर्यातकों के लिए आने वाले 150 दिन बहुत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप की नई नीति किसी भी वक्त लागू हो सकती है।

ट्रेन टिकट बुकिंग का तरीका बदला… शॉर्टकट अपनाया तो ब्लॉक होगी IRCTC आईडी

नई दिल्ली। ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग (Online Train Ticket Booking) के दौरान शॉर्टकट (Shortcut) अपनाने से आपकी आईआरसीटीसी आईडी (IRCTC ID) ब्लॉक हो सकती है। समय से पहले बुकिंग प्रक्रिया पूरा करने पर यह कार्रवाई की जा सकती है। आईआरसीटीसी की नई तकनीक टिकट बुकिंग के दौरान टाइपिंग की गति से वैध-अवैध उपभोक्ताओं का पता लगा लेगी। इस सख्ती से आम जनता को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना 40 फीसदी तक बढ़ जाएगी। रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग में नया एआई प्रीडेटर सिस्टम (एआई सॉफ्टवेयर) लागू कर दिया गया है। इस नई तकनीक का उद्देश्य अवैध सॉफ्टवेयर की मदद आईआरसीटीसी वेबसाइट में घुसपैठ कर कन्फर्म टिकट लेने वाले दलालों पर नकेल कसना है। एआई आधारित सिस्टम बुकिंग के दौरान प्रक्रिया से पहचान लेगा कि टिकट इंसान बुक कर रहा या कोई सॉफ्टवेयर। ऐसे रेल यात्रियों को सतर्क रहने की जरूरत है जो टिकट बुक करते समय स्मार्ट ट्रिक्स (कट-पेस्ट) अपनाते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को संदिग्ध मानकर रेलवे का सिस्टम यूजर आईडी (अकाउंट) को ब्लॉक कर सकता है। यदि आम उपभोक्ता रात में थोक में नाम जोड़ते या हटाता है तो वह एआई के जद में आएंगे। फॉर्म कम समय में न भरेरेलवे का एल्गोरिदम टाइपिंग की गति मापता है। यदि पांच यात्रियों का विवरण (नाम, उम्र, जेंडर आदि) 4.2 सेकेंड से कम समय में भर दिया जाता है तो सिस्टम यूजर को रेड फ्लैग कर देगा। आधे घंटे में पांच बार से ज्यादा लॉगिन न करेंएक अधिकारी ने बताया, अगर उपभोक्ता एक आईडी से आधे घंटे में पांच बार से ज्यादा लॉगइन या लॉगआउट करते हैं तो ऐसे अकाउंट को 24 घंटे के लिए बैन कर दिया जाएगा। इसके अलावा आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर एक ही क्षेत्र में होना चाहिए। अगर दोनों अलग-अलग हैं तो ट्रांजक्शन बीच में ही रुक जाएगा। एक महीने में 2.8 लाख ऐसे अकाउंट ब्लॉक किए गए हैं। रेलवन ऐप से अनारक्षित टिकट पर डिजिटल पेमेंट से मिलेगी छूटबता दें कि, भारतीय रेलवे यात्रियों को डिजिटल माध्यमों से अधिक सुविधा, पारदर्शिता और प्रोत्साहन देने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। इसी क्रम में रेलवे द्वारा संचालित रेलवन ऐप के माध्यम से अनारक्षित रेल टिकट बुकिंग पर मिलने वाली 3 प्रतिशत बोनस छूट की सुविधा का दायरा बढ़ा दिया गया है। यह व्यवस्था ट्रायल आधार पर 14 जनवरी 2026 से 14 जुलाई 2026 तक लागू रहेगी। इस सुविधा की जानकारी यात्रियों तक पहुंचाने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। अब तक रेलवन ऐप पर अनारक्षित टिकट बुक करने पर केवल आर-वॉलेट से भुगतान करने पर ही 3 प्रतिशत बोनस कैशबैक की सुविधा उपलब्ध थी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तथा डिजिटल भुगतान को अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से रेलवे ने यह लाभ अब सभी स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत रेलवन ऐप के जरिए अनारक्षित टिकट लेते समय यदि यात्री यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग अथवा अन्य स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों का उपयोग करते हैं, तो उन्हें टिकट मूल्य पर 3 प्रतिशत का लाभ प्राप्त होगा। इससे यात्रियों को टिकट बुकिंग में प्रत्यक्ष आर्थिक बचत होगी। रेलवे की यह पहल कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देने के साथ-साथ डिजिटल इंडिया अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी। विशेष रूप से दैनिक यात्रा करने वाले, अनारक्षित श्रेणी में सफर करने वाले आम नागरिकों और उपनगरीय क्षेत्रों के यात्रियों को इस सुविधा से सीधा लाभ मिलेगा। रेलवन ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कर रेल कनेक्ट या यूटीएस मोबाइल ऐप के मौजूदा उपयोगकर्ता अपनी पहचान के प्रमाण के साथ सीधे लॉग इन कर सकते हैं। इस ऐप पर अनारक्षित टिकट, आरक्षित टिकट, प्लैटफॉर्म टिकट, ट्रेन एवं स्टेशन से संबंधित जानकारी, शिकायत निवारण सहित विभिन्न यात्री सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध हैं।

SIR के बाद 6 राज्यों की वोटर लिस्ट जारी… गुजरात में सबसे ज्यादा 68 लाख और MP में हटाए गए 34.25 लाख नाम

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India- ECI) ने देश के छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों (Voter lists) के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव दर्ज किए गए हैं। लाखों की संख्या में अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। एसआईआर के आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली गिरावट गुजरात में देखी गई है। यहां कुल 68,12,711 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। पुनरीक्षण से पहले गुजरात में मतदाताओं की संख्या 5,08,43,436 थी, जो अब घटकर 4,40,30,725 रह गई है। यह कुल मतदाता संख्या में 13.40% की भारी गिरावट है। गुजरात के बाद मध्य प्रदेश में भी मतदाता सूची में बड़ी शुद्धि की गई है। यहां 34,25,078 नाम हटाए गए, जिससे मतदाताओं की संख्या 5,74,06,143 से कम होकर 5,39,81,065 (-5.97%) पर आ गई है। कहां कितनी हुई कटौती?– राजस्थान: मतदाताओं की संख्या 5,46,56,215 से घटकर 5,15,19,929 हो गई। 31,36,286 नाम काटे गए।– छत्तीसगढ़: यहां मतदाता सूची 2,12,30,737 से घटकर 1,87,30,914 रह गई। 24,99,823 नाम काटे गए।– केरल: सूची से 8,97,211 नाम हटाए गए, जिसके बाद अब कुल मतदाता 2,69,53,644 हैं।– गोवा: मतदाताओं की संख्या में 1,27,468 की गिरावट दर्ज की गई। केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति– पुडुचेरी: 77,367 मतदाताओं के नाम हटाए गए।– अंडमान और निकोबार: 52,364 नामों की कटौती की गई।– लक्षद्वीप: यहां सबसे कम केवल 206 नामों में बदलाव हुआ है। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव ‘नेट चेंज’ को दर्शाता है, जिसमें अपात्र मतदाताओं की संख्या में से नए जुड़े पात्र मतदाताओं को घटाया गया है। सूची से नाम हटाने के प्राथमिक कारणों में मृत्यु, स्थायी रूप से स्थानांतरण, एक से अधिक जगहों पर नाम और अन्य पात्रता संबंधी मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने दोहराया कि मतदाता सूची को अपडेट करना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की बारीनिर्वाचन आयोग ने देश के 12 राज्यों में इस राष्ट्रव्यापी अभ्यास की शुरुआत की थी। दूसरे चरण के 12 राज्यों में से अब केवल तीन राज्य शेष हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के लिए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) का डेटा इस महीने के अंत में जारी किया जाएगा। आयोग ने शेष राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को भी प्रारंभिक कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं। SIR प्रक्रिया का अगला चरण अप्रैल में शुरू होने वाला है, जो मतदाता सूची के सत्यापन के देशव्यापी अभियान का हिस्सा होगा। फिलहाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, गोवा और अंडमान-निकोबार के लिए अंतिम मतदाता सूचियां आधिकारिक तौर पर प्रकाशित कर दी गई हैं।

PM मोदी आज देश के इस क्षेत्र को देंगे हाईस्पीड रीजनल ट्रेन और मेट्रो की सौगात

मेरठ । क्रांति की धरती मेरठ (Meerut.) एक बार फिर ऐतिहासिक पल का गवाह बनने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) रविवार को मेरठ के 135 मिनट के प्रवास के दौरान ‘नमो भारत’ (RRTS) और ‘मेरठ मेट्रो’ (Meerut Metro) की बड़ी सौगात देंगे। यह न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि वैश्विक स्तर पर परिवहन तकनीक का एक अनूठा उदाहरण भी है। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की जा रही इस परियोजना की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे देश के अन्य शहरों से अलग बनाती हैं। भारत में पहली बार एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रैक पर ‘नमो भारत’ (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) और ‘मेरठ मेट्रो’ का संचालन होगा। मेरठ मेट्रो देश की सबसे तेज मेट्रो सेवाओं में से एक होगी, जिसकी डिजाइन स्पीड 135 किमी/घंटा और ऑपरेशनल स्पीड 120 किमी/घंटा तक हो सकती है। साहिबाबाद से मेरठ के बीच का सफर अब मिनटों में तय होगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर और मेरठ के बीच की दूरी का अहसास खत्म हो जाएगा। नमो भारत और मेट्रो के स्टेशनों को विश्व स्तरीय सुविधाओं जैसे—प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (PSDs), हाई-स्पीड वाईफाई और स्मार्ट टिकटिंग से लैस किया गया है। सीएम योगी ने किया निरीक्षणउद्घाटन कार्यक्रम से एक दिन पहले शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने मेरठ पहुंचकर रैपिड के प्रोजेक्ट साइट शताब्दीनगर, मेरठ साउथ स्टेशन और कार्यक्रम स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। दोनों स्टेशनों का निरीक्षण कर मुख्यमंत्री ने जनसभा स्थल पर अधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कॉरिडोर न केवल दूरी कम करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की प्रगति को नई गति प्रदान करेगा। Xइस कॉरिडोर के शुरू होने से न केवल यात्रा के समय में भारी बचत होगी, बल्कि इसके बहुआयामी प्रभाव भी देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के यातायात और बुनियादी ढांचे के इतिहास में नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) यानी ‘रैपिड मेट्रो’ के नए खंड का भव्य उद्घाटन करेंगे। इस कॉरिडोर के शुरू होने से न केवल यात्रा के समय में भारी बचत होगी, बल्कि इसके बहुआयामी प्रभाव भी देखने को मिलेंगे। जनसभा और संबोधनउद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। लगभग 50 मिनट के इस भाषण में वह मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए भविष्य के विजन को साझा करेंगे। मेरठ आगमन से लेकर प्रस्थान तक प्रधानमंत्री 105 मिनट मेरठ की धरती पर रहेंगे, जो शहर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। रूट डायवर्जनप्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर मेरठ में रविवार को रूट डायवर्जन रहेगा। सुबह छह से शाम छह बजे तक दिल्ली-देहरादून हाइवे पर गाजियाबाद-मेरठ के बीच वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। वहीं, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर वाहन चलते रहेंगे। मेरठ से गाजियाबाद जाने वाले वाहनों को हापुड़ होकर गाजियाबाद भेजा जाएगा। एटीएस, एसटीएफ और इंटेलिजेंस यूनिट को अलर्ट पर रखा गया है। मेरठ से दिल्ली जाने वाले वाहन– मेरठ शहर से दिल्ली जाने वाले वाहन दिल्ली रोड नहीं जाएंगे। सभी वाहन मेरठ शहर से मोदीपुरम पुल, सरधना पुल, रोहटा पुल, बागपत पुल से एनएच-58 से होकर काशी टोल प्लाजा से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे होते हुए जा सकेंगे।– मेरठ शहर से दिल्ली जाने वाले वाहन बिजली बंबा चौराहे से होते हुए हापुड़ से दिल्ली-मुरादाबाद हाईवे से दिल्ली जा सकेगे। दिल्ली से मेरठ शहर आने वाले वाहन– दिल्ली से मेरठ शहर आने वाले वाहन एक्सप्रेस-वे से काशी टोल प्लाजा से एनएच-58 होते हुए मेरठ शहर आ सकेंगे।– दिल्ली से मेरठ शहर आने वाले वाहन दिल्ली मुरादाबाद हाईवे होते हुए हापुड से बिजली बंबा चौराहे से मेरठ शहर में आ सकेंगे।– मेरठ से दिल्ली आने/जाने वाले वाहन परतापुर इन्टरचेंज से दिल्ली रोड होते हुए मेरठ शहर मे प्रवेश नहीं कर सकेंगे।– यातायात प्रबंधन के दौरान किसी भी प्रकार की आपात कालीन सेवाएं एंव एम्बुलेंस बाधित नहीं रहेगी।– मोदीनगर से मेरठ की ओर भी कोई भी वाहन नहीं आने दिया जाएगा। सभी वाहन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे से जाएंगे।– एनएच-58 पर परतापुर इंटरचेंज से मोदीनगर-दिल्ली की ओर कोई वाहन नहीं जाएगा। सभी वाहन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे से आएंगे-जाएंगे। एटीएस और एसटीएफ समेत इंटेलिजेंस यूनिट अलर्टएटीएस, एसटीएफ और इंटेलिजेंस यूनिट को अलर्ट किया गया है। सुरक्षा का पूरा जिम्मा एसपीजी ने संभाला हुआ है। लोकल इनपुट को लेकर टीम और स्थानीय पुलिस अलर्ट है। सभास्थल के आसपास का इलाका पूरी तरह पुलिस की निगरानी में रखा जाएगा।

रिटायरमेंट के बाद नियमित आमदनी का भरोसा क्या है सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, जानें ब्याज दर और खाता खोलने की पूरी प्रक्रिया

नई दिल्ली । रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि नियमित वेतन बंद होने के बाद घर का खर्च कैसे चलेगा। जिन लोगों ने पहले से पेंशन या निवेश की ठोस योजना नहीं बनाई होती, उनके लिए यह चुनौती और भी गंभीर हो सकती है। ऐसे में केंद्र सरकार की एक लोकप्रिय और सुरक्षित योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत का बड़ा जरिया बनकर सामने आती हैसीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम। यह योजना खासतौर पर 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि उन्हें रिटायरमेंट के बाद नियमित आय मिलती रहे और पूंजी भी सुरक्षित रहे। एक सरकारी बचत योजना है, जिसमें निवेश करने पर आकर्षक ब्याज दर के साथ हर तीन महीने में ब्याज का भुगतान किया जाता है। यही तिमाही ब्याज वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन जैसी नियमित आय का काम करता है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि यह सरकार समर्थित योजना है। साथ ही आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत इसमें निवेश पर टैक्स छूट का लाभ भी मिलता है, जिससे यह और अधिक आकर्षक बन जाती है। इस योजना में निवेश करने के लिए सामान्यतः 60 वर्ष या उससे अधिक आयु होना आवश्यक है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में 55 से 60 वर्ष के बीच के वे लोग भी निवेश कर सकते हैं, जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली हो, बशर्ते वे निर्धारित समयसीमा के भीतर निवेश करें। खाता व्यक्तिगत रूप से या जीवनसाथी के साथ संयुक्त रूप से खोला जा सकता है, लेकिन प्राथमिक खाताधारक की आयु पात्रता के अनुरूप होनी चाहिए। निवेश सीमा की बात करें तो SCSS में न्यूनतम 1,000 रुपए से निवेश शुरू किया जा सकता है और राशि 1,000 के गुणांक में ही जमा करनी होती है। अधिकतम निवेश सीमा 30 लाख रुपए है। यदि पति और पत्नी दोनों अलग-अलग खाते खोलते हैं, तो कुल मिलाकर 60 लाख रुपए तक निवेश संभव है। ध्यान रहे कि इस योजना में निवेश एकमुश्त करना होता है, किस्तों में जमा करने का विकल्प नहीं है। कई लोग रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पीएफ, ग्रेच्युटी या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ की राशि को इसमें लगाकर सुरक्षित और नियमित आय सुनिश्चित करते हैं। वर्तमान में इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज दर मिल रही है, जो तिमाही आधार पर खाते में जमा होती है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वरिष्ठ नागरिक 30 लाख रुपए निवेश करता है, तो उसे सालाना लगभग 2.46 लाख रुपए ब्याज मिलेगा। यानी हर तीन महीने में करीब 61,500 रुपए और औसतन लगभग 20,500 रुपए प्रतिमाह के बराबर नियमित आय प्राप्त होगी। यह राशि रिटायरमेंट के बाद घरेलू खर्च, दवाइयों और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मददगार साबित हो सकती है। खाता देश के अधिकृत बैंकों या डाकघरों में खोला जा सकता है। इसके लिए आयु प्रमाण, पहचान पत्र, पैन कार्ड और निवेश राशि के साथ आवेदन करना होता है। कुल मिलाकर, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम उन लोगों के लिए मजबूत विकल्प है जो रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश के साथ नियमित और सुनिश्चित आय चाहते हैं।

फरवरी के अंत में आसमान में सजेगी ‘ग्रहों की परेड’, 6 ग्रह एक साथ; इन राशियों के लिए खुलेगा भाग्य का द्वार

नई दिल्ली । फरवरी माह का अंतिम चरण एक बेहद खास और दुर्लभ खगोलीय घटना का साक्षी बनने जा रहा है। इस दौरान आकाश में छह प्रमुख ग्रह एक साथ विशेष स्थिति में नजर आएंगे। पृथ्वी से देखने पर ये ग्रह एक सीध में कतारबद्ध दिखाई देंगे जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘ग्रहों की परेड’ कहा जाता है। इस अद्भुत नजारे में बुध शुक्र बृहस्पति शनि यूरेनस और नेपच्यून शामिल होंगे। अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार सूर्यास्त के तुरंत बाद ये ग्रह क्षितिज के पास दिखाई देंगे। हालांकि साफ मौसम होने पर भी इनमें से केवल चार ग्रह बुध शुक्र बृहस्पति और शनि नंगी आंखों से स्पष्ट दिख सकेंगे जबकि यूरेनस और नेपच्यून को देखने के लिए दूरबीन की जरूरत पड़ सकती है। यह घटना वैज्ञानिक दृष्टि से जितनी महत्वपूर्ण है ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उतनी ही प्रभावशाली भी मानी जा रही है। जब कई बड़े ग्रह एक ही दिशा में सक्रिय होते हैं तो उसका असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है। वर्तमान ग्रह स्थिति के अनुसार गुरु मिथुन राशि में शनि मीन राशि में और बुध-शुक्र राहु के साथ कुंभ राशि में स्थित बताए जा रहे हैं। फरवरी के अंत तक मंगल और चंद्रमा के भी कुंभ राशि में पहुंचने से ऊर्जा उत्साह और भावनात्मक शक्ति में वृद्धि के संकेत हैं। ग्रहों की यह विशेष व्यवस्था सोच निर्णय धन जिम्मेदारी और भाग्य से जुड़े मामलों में तेजी से बदलाव ला सकती है। कई लोगों को अचानक अवसर नए संपर्क और आर्थिक लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। सही दिशा में किया गया प्रयास उल्लेखनीय सफलता दिला सकता है। मेष राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में तेजी से उछाल लेकर आ सकता है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है और परिवार का सहयोग मनोबल को मजबूत करेगा। मिथुन राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलने के संकेत हैं। गुरु का प्रभाव दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगा नए संपर्क लाभदायक सिद्ध होंगे और नई नौकरी या पदोन्नति के अवसर मिल सकते हैं। सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने वाला है। व्यापार में विस्तार साझेदारी से लाभ और प्रभावशाली लोगों से सहयोग मिलने की संभावना है। वहीं कन्या राशि वालों को अपनी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। स्वास्थ्य में सुधार पुराने विवादों का समाधान और निवेश से अच्छे रिटर्न के योग बन रहे हैं। फरवरी के अंत में बनने वाला यह दुर्लभ ग्रह संयोग न केवल आकाश में एक मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करेगा बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के जीवन में नई ऊर्जा और संभावनाओं का संचार भी कर सकता है। सूर्यास्त के बाद साफ आसमान में इस अद्भुत नजारे को देखने का अवसर विशेष रहेगा।